Manmarjiyan Season 4 – 7

Manmarjiyan Season 4 – 7

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

पिंकी की मम्मी शर्मा जी को समझा बुझाकर अंदर ले आयी साथ ही पिंकी भी उनके पीछे अंदर चली आयी। हालाँकि शर्मा जी ने पिंकी से ये कहा जरूर था कि वे गोलू से माफ़ी मांगने वाले है लेकिन एक ससुर होकर वे अपने बकैत दामाद से माफ़ी माँगनेगे तो उनकी इज्जत कम नहीं हो जाएगी सोचकर शर्मा जी सोफे पर आ बैठे और कहा,”कहा है तुम्हारे पति परमेश्वर,,,,,,,कही हमेशा की तरह बहाना बनाकर भाग तो नहीं गए,,,,,,,!!”

गोलू जो कि खुद को साफ करके बाथरूम से निकला ही था , शर्मा जी के शब्द जैसे ही उसके कानों में पड़े वह उछलकर शर्मा जी के पास आया और तुनककर कहा,”अरे भागे तो हमहू उह्ह दिन भी नाही थे जब पिंकिया हमरे साथ भागने को तैयार थी,,,,,,,,!!”
“जे हमाई लुंगी काहे पहिने हो ?”,शर्मा जी ने कहा
“उह्ह का है ना हमरी पेंट पर ज़रा गोबर लग गवा तो हमहू बदलकर आपकी लुंगी पहन लिए,,,,,,,,वैसे जच रही है हम पर नई”,गोलू ने खुश होकर कहा

“बिटिया देइ दी अब का लुंगी भी दे दे आपको”.शर्मा जी ने कहा
“जे छेड़ वाली लुंगी हमको नाही चाहिए ससुर जी,,,,,,,,पिताजी सही कहे रहे भूखा नंगा खानदान मा किये रहय हमहू”,गोलू ने पहले चिढ़कर कहा और फिर धीरे से बड़बड़ाया
“हाँ हाँ आपके खानदान मा तो हीरे जवाहरात का भण्डार लगा है न,,,,,,!!”,शर्मा जी ने कहा
पिंकी ने देखा शर्मा जी और गोलू फिर आपस में उलझ गए है तो उसने चिल्लाकर कहा,”पापा , गोलू आप दोनों फिर शुरू हो गए,,,,,,,,गोलू चुप रहो तुम और पापा आप , क्या कहा था आपने कि आप गोलू से माफ़ी मांगेंगे”

“माफ़ी और जे उह्ह्ह भी हमसे,,,,,,,,,,अरे ऐसा हो ना तो हमहू अपनी मूछ मुंडवा ले पिंकिया,,,,,,,,,,,तुम्हाये बाप इत्ते लिच्चड़ आदमी है माफ़ी तो दूर इनका बस चले ना तो जे तो हमका कानपूर से बाहिर फेंक दे”,गोलू ने कहा
“बस बस रहन दयो कोनो जबान है आपकी,,,,,,,,,जो बोलते हो कबो करते हो ?”,शर्मा जी ने कहा
गोलू ने सुना तो उछलकर शर्मा जी के सामने आया और कहा,”का बात कर रहे हो ससुर जी ? अरे एक ठो बार जबान दे दे ना तो उह्ह पूरा करके मानते है”

“पक्का अपनी जबान पर रहोगे,,,,,,,मुंडवा लोगे मूंछ ?”,शर्मा जी ने गंभीरता से कहा
“का बच्चो जैसे बात कर रहे हो ससुर जी ? अरे आप हमसे माफ़ी,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने हसंते हुए कहा वह अपनी बात पूरी करता इस से पहले शर्मा जी ने एकदम से कहा,”हमे माफ़ कर दीजिये गोलू जी , हमने आपको सबके सामने बेइज्जत किया ,, आपको तबेले जैसे मुँह वाला कहा,,,,,,,,,हम बहुते शर्मिंदा है हमे माफ़ कर दीजिये”

गोलू ने सुना तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया। शर्मा जी खुद उस से माफ़ी मांग रहे थे। गोलू को हक्का बक्का देखकर शर्मा जी ने कहा,”तो फिर कब मुंडवा रहे है आप अपनी मूंछ ? देखिये आपने जबान दी है अब हमको भी यही देखना है आप जबान के पक्के है या नहीं,,,,,,,,,शर्माईन का पिरोगराम है हमरे जन्मदिन है अरे केक शेक लाओ जरा हम भी तो काटे”

शर्मा जी हाथ मुँह धोने बाथरूम की तरफ चले गए और गोलू बड़बड़ाया,”पिरोगराम तो बहुते तगड़ा सेट किये रहय आप ससुर जी केक के साथ साथ हमाओ चू,,,,,,,,,,,,,जाने दो फेमिली स्टोरी है कुछो कह दिया तो भड़क जायेंगे लोग,,,,,,,,,पर का सही फील्डिंग सेट किये हो हमायी ,, एक सॉरी के बदले मुछमुंडा ही कर दिए हमको,,,,,,,,,धत साला हम नहीं खेल रहे आपके साथ,,,,,,,!!”
गोलू को खुद से बाते करते देखकर पिंकी अंदर चली गयी। पिंकी अंदर से केक लेकर आयी , टेबल को फूलो से सजाया।

गोलू अपने सर से हाथ लगाए सोफे पर बैठा खुद को कोस रहा था। शर्मा जी साफ सुथरे होकर , दूसरे कपडे पहनकर मुस्कुराते हुए हॉल में आये लेकिन जब गोलू को अकेले बैठे देखा तो कहा,”का दामाद जी हमाये मातम मा आये हो का जे कपाट से हाथ लगाकर काहे बैठे हो , हिया आओ केक काटो हमरे साथ,,,,,,,,,!!”
“गोलू आओ ना,,,,,,,!!”,पिंकी ने गोलू की तरफ देखकर धीरे से कहा तो गोलू उठा और शर्मा जी के बगल में चला आया। कुछ देर के लिए गोलू अपनी परेशानी भूल गया और सबके साथ मिलकर शर्मा जी का बर्थडे मनाया

अब बर्थडे हो और नाच गाना ना हो ऐसा भला कैसे हो सकता है ? गोलू ने टीवी पर बजाया मस्त भोजपुरी गाना और अपने साथ साथ पिंकी और शर्माईन को भी शामिल कर लिया। शर्मा जी भी अपना गुस्सा भूल गए और सबको नाचते देखकर ताली बजाने लगे। गोलू ने देखा तो वह शर्मा जी के पास आया और उनको नाचने के लिए सबके बीच ले आया। गोलू को खुश देखकर शर्मा जी ने भी थोड़ा हाथ पैर हिला दिया और इसके बाद सभी साथ बैठकर खाना खाने लगे।

जितनी भसड़ के साथ शर्मा जी का जन्मदिन शुरू हुआ उतनी ही शांति से खत्म भी हुआ और गोलू पिंकी घर के लिए जाने लगे।  शर्मा जी एक छोटा सा डिब्बा लेकर गोलू के पास आये और कहा,”दामाद जी ! जे आपका रिटर्न गिफ्ट”

गोलू ने खुश होकर डिब्बा खोला तो उसका मुँह बन गया डिब्बे में जिलेट का एक नया रेजर रखा था। गोलू ने शर्मा जी की तरफ देखा तो शर्मा जी के होंठो पर एक बड़ी सी मुस्कान तैर गयी और गाना गाते हुए अंदर चले गए “जो वादा किया वो निभाना पडेगा”
शर्माईन ने घर का दरवाजा बंद कर लिया और गोलू मायूसी से पिंकी को देखने लगा , पिंकी ने मुँह बनाया और स्कूटी की तरफ चली गयी।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
रात के खाने पर मिश्रा जी , गुड्डू , लवली और वेदी साथ साथ डायनिंग टेबल पर बैठे थे। शगुन और मिश्राइन सबको खाना परोस रही थी। मिश्रा जी चुपचाप खाना खा रहे थे। लवली के बगल में बैठा गुड्डू बार बार उसे कोहनी मारकर इशारे कर रहा था कि लवली मिश्रा जी से बात करे और उन्हें बिंदिया के बारे में बताये लेकिन लवली ना जाने क्यों मिश्रा जी के सामने ये बात करने से घबरा रहा था।

गुड्डू इशारो में कभी लवली से रिक्वेस्ट करता तो कभी उसे आँखे दिखाता। मिश्रा जी काफी देर से दोनों की ये नौटंकी देख रहे थे और आखिर में उन्होंने लवली की तरफ पलटकर कहा,”का बात है लवली , तुमको कुछो कहना है हमसे ?”

लवली फंस गया गुड्डू लवली की तरफ देखकर मुस्कुराया और बोलने का इशारा किया तो लवली मिश्रा जी की तरफ पलटा और कहा,”अह्ह्ह पिताजी वो , हम जे कह रहे थे कि हमे शोरूम कब से आना है ? का है कि घर पे पूरा दिन खाली बैठ के हम उकता जा रहे है”
“जे भी कोनो पूछने की बात है बेटा , तुम्हरा शोरूम है तुम जब चाहो तब आ जाओ,,,,,,,,,,एक काम करो कल से ही आना शुरू कर दो , मैनेजर साहब से कह देंगे हम उह्ह्ह तुमको सारा काम समझाय देंगे,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने कहा और अपना ध्यान खाने पर जमा लिया

लवली ने निवाला उठाया और मुँह में रखा तो बगल में बैठे गुड्डू ने उसकी कमर पर कोहनी मारी क्योकि लवली ने वो बात नहीं कही जो गुड्डू चाहता था।
“आह,,,,,,,,!!”,लवली चिल्लाया
“का हुआ लवली ?”,मिश्राइन ने पूछा , मिश्रा जी , वेदी और शगुन भी लवली की तरफ देखने लगे तो लवली ने कहा,”अह्ह्ह कुछ नहीं अम्मा , वो भिंडी की सब्जी अच्छी बनी है ना तो हम खाने से साथ साथ गलती से अपनी ऊँगली भी चबा गए,,,,,,,,,!!!”

लवली की बात सुनकर सब हसने लगे बस गुड्डू को छोड़कर , वह तो मन ही मन खीज रहा था कि आखिर लवली मिश्रा जी को बिंदिया के बारे में क्यों नहीं बता रहा ? लवली की बात सुनकर मिश्रा जी ने हँसते हुए मिश्राइन से कहा,”मिश्राइन , लवली को थोड़ा तरकारी और देओ”
“हाँ,,,,,,,,!!”,मिश्राइन ने मुस्कुरा कर कहा और लवली की प्लेट में सब्जी रखते हुए बोली,”आज भिंडी की तरकारी शगुन ने बनायीं है , जे का हाथो मा तो साक्षात् माँ अनपूर्णा का आशीर्वाद है,,,,,,पेट भरकर खाओ बिटवा,,,,,!!”

लवली ने सुना तो शगुन की तरफ देखा , शगुन लवली को देखकर मुस्कुरा दी ये देखकर गुड्डू ने फिर लवली को कोहनी मारी और दबे स्वर में कहा,”अपनी वाली के बारे में पिताजी से बात करना छोड़कर हमरी वाली पर नजरें काहे गड़ा रहे है आप ?”
लवली ने सुना तो गुड्डू की तरफ देखा और दबे स्वर में कहा,”सही कहता है गोलू ! एक नंबर के बैल हो तुम , हम अपने छोटे भाई की पत्नी को गलत नजर से काहे देखेंगे बे ? अपनी बुद्धि साफ़ करो तुम,,,,,,,,,,!!”

गुड्डू ने सुना तो मुँह बनाया और अपना खाना खाने लगा। खाना खाने के बाद वेदी किताबे लेकर पढ़ने आ बैठी क्योकि अगले महीने से उसके पेपर शुरू होने  वाले थे। गुड्डू सोनू भैया से मिलने उनके घर चला गया क्योकि दो दिन बाद सोनू भैया के ऑफिस की कोई पार्टी थी जिसका टेंडर वे गुड्डू को दिलवा रहे थे। उसी की जानकारी लेने गुड्डू उनके घर चला गया। मिश्रा जी हाथ मुँह धोकर अपने तख्ते पर आ बैठे नजरे अम्मा के कमरे कि ओर चली गयी। अक्सर रात का खाना खाने के बाद मिश्रा जी अपनी अम्मा के साथ बैठकर बतियाते थे लेकिन आज अम्मा उनके पास नहीं थी।

उन्हें याद कर मिश्रा जी के चेहरे पर उदासी झिलमिलाने लगी। उन्होंने कमरे से अपनी नजरे हटा ली और तख्ते पर रखा अपना रजिस्टर उठाया जो कि मैनेजर साहब आज सुबह ही उन्हें देकर गए थे ताकि मिश्रा जी पिछले 2 हफ्तों का हिसाब किताब देख सके।
मिश्रा जी ने आँखों पर नजर का चश्मा लगाया और रजिस्टर खोलकर हिसाब चेक करने लगे। लवली खाना खाने के बाद वही हॉल में चक्कर काटने लगा।

उसे मिश्रा जी से बात करनी थी लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह उन्हें सीधा सीधा बिंदिया के बारे में कैसे बताये ? लवली को परेशान हॉल में चक्कर काटते देखकर शगुन उसके पास आयी और कहा,”क्या बात है लवली भैया आप कुछ परेशान दिख रहे है ?”

“कुछ नहीं शगुन बस वो पिताजी से कुछो बात करनी है लेकिन कैसे बात करे समझ नहीं आ रहा ?”,लवली ने कहा
“कैसे बात करे मतलब ? वो रहे पापाजी जाकर बात कीजिये,,,,,,,,!!”,शगुन ने सहजता से कहा
“वो बात नहीं है , हमे ना उनके सामने जाने में थोड़ा डर लग रहा है”,लवली ने हिचकिचाकर कहा
शगुन ने सुना तो वह मुस्कुराई और कहा,”और ये डर

किसलिए ? आप तो पहले भी पापाजी से बात कर चुके है,,,,,,,,,!!”
“ऐसी बात नहीं है शगुन आज से पहले मैंने उनके सामने उनसे नफरत करने वाले शख्स के रूप में बात की है लेकिन आज एक बेटे के रूप में उनसे बात करते हुए डर लग रहा है,,,,,,घबराहट हो रही है,,,,,,,,,वो मेरी बात समझेंगे या नहीं यही सोचकर बस हिम्मत नहीं हो रही उनसे बात करने की,,,,,,,,!!”,लवली ने शगुन के सामने अपनी परेशानी जाहिर की

शगुन कुछ देर खामोश रही और फिर कहा,”लवली भैया ! आप जैसा सोच रहे है वैसा कुछ नहीं है , पापा जी बहुत अच्छे है अगर आप जाकर प्यार से उन्हें अपनी भावनाये जाहिर करेंगे तो वो जरूर समझेंगे,,,,,,,वे बाहर से खुद को कितना भी सख्त दी सख्त दिखाए लेकिन वे सच में बहुत मासूम और नरम दिल है। आपको जाकर उनसे बात करनी चाहिए वो आपको जरूर समझेंगे”
शगुन की बात सुनकर लवली को थोड़ी हिम्मत मिली उसने मुस्कुराकर कहा,”तुम बहुत अच्छी हो शगुन , गुड्डू सच में बहुत किस्मतवाला है जिसे इतनी समझदार मास्टरनी मिली”

लवली के मुँह से अपने लिए मास्टरनी शब्द सुनकर शगुन चौंकी और कहा,”ये आपसे किसने कहा ?”
“गुड्डू ने , वो तुम्हे शायद इसी नाम से बुलाता है”,लवली ने कहा और वहा से चला गया। शगुन ने गुड्डू को याद किया और मन ही मन कहा,”आने दो आज उन्हें उनकी खैर नहीं,,,,,,,,,,,मैं मास्टरनी लगती हूँ उन्हें”

 गुप्ता जी का घर , कानपूर
रात के खाने के बाद मंगल फूफा गुप्ता जी और गुप्ताइन से नजरे बचाकर छत पर चले आये। गुप्ता जी की छत से यादव जी के घर का आँगन साफ नजर आता था। किसी काम से फुलवारी घर के आँगन में आये और मंगल फूफा उन्हें नजर भर देख सके इस ख्याल के साथ वे छत पर चक्कर लगाने लगे। गोलू और पिंकी  अभी शर्मा जी के घर से लौटे नहीं थे और गुप्ता जी गुप्ताइन नीचे आँगन में बैठे बतिया रहे थे।

छत पर चक्कर काटते मंगल फूफा की नजर यादव की के घर के आंगन की तरफ ही थी लेकिन ना फुलवारी आयी और ना ही मंगल फूफा के बैचैन दिल को चैन मिला। थककर मंगल फूफा छत की दिवार पर पेट के बल आ लेटे और गर्दन घुमा ली यादव जी के घर की तरफ ,  ना उन्हें ठंड का अहसास था ना ही रात का डर बस फुलवारी की एक झलक के इंतजार में बेचारे एक एक पल गिन रहे थे।

गोलू लड़ते झगड़ते बहस करते पिंकी को लेकर घर आया। पिंकी स्कूटी से नीचे उतरी और भुनभुनाते हुए अंदर चली गयी , गोलू ने स्कूटी साइड लगायी और जैसे ही अंदर जाने लगा उसकी नजर पड़ी छत की दिवार पर जहा कोई लेटा था अब गोलू भला कहा ये अंदाजा लगाता कि वो मंगल फूफा हो सकते है , उसने गलत अंदाजा लगाया और मंगल फूफा को चोर समझकर दबे पाँव छत पर जाने वाली सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया। आँगन में बैठे गुप्ता जी ने गोलू को चोरो की तरह छुपकर ऊपर जाते देखा तो उनका दिमाग ठनका और वे भी गोलू के पीछे दबे पाँव सीढ़ियों की और बढ़ गए।

गोलू ऊपर आया , अँधेरे में मंगल फूफा उसे दिखाई नहीं और ऊपर से मंगल फूफा का चेहरा भी दूसरी तरफ था गोलू ने जाकर जोर से अपने दोनों हाथो को दिवार पर सोये आदमी पर दे मारा। अचानक पड़ी मार से मंगल फूफा की ना चीख़ निकली ना ही कोई आवाज , गोलू भी हैरानी कि जिसको मारा उसको कोई असर क्यों नहीं हुआ ? उसने अँधेरे में आदमी की गर्दन दबोच ली और कहा,”साले हमरे घर मा चोरी करने के इरादे से घुसने की तुम्हरी हिम्मत कैसे हुई ? जानते नाही हम कौन है ?”

“अरे गोलू हम है फूफा,,,,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने मरे हुए स्वर में कहा
गोलू ने सुना तो फूफा को छोड़ दिया फूफा छत की दिवार पर जा गिरे और गोलू चिल्लाया,”ए फूफा तुमहू हिया का कर रहे हो ?”

मंगल फूफा ने जैसे ही सामने देखा आँगन में घूमती फुलवारी उन्हें नजर आयी और मंगल फूफा की आँखे चमक उठी , चेहरा खिल उठा और दिल बाग़ हो गया उन्होंने फुलवारी की तरफ देखते हुए कहा,”चाँद देखने आये थे”
गोलू ने सुना तो आसमान में देखा जहा चाँद तो दूर तारे भी नजर नहीं आ रहे थे और हैरानी से फूफा से कहा,”पर आज तो अमावस है फूफा”

( क्या शर्मा जी को दी अपनी जबान बचाने के लिए गोलू मुंड़वायेगा अपनी मूंछ ? क्या लवली कह पायेगा मिश्रा जी से अपने दिल की बात ? क्या गोलू और मंगल फूफा की जिंदगी में आने वाली है गुप्ता जी के रूप में अमावस ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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