Manmarjiyan Season 4 – 64
Manmarjiyan Season 4 – 64

गोलू और मंगल फूफा बिंदिया के होने वाले दूल्हे को उठाने आये थे लेकिन जब दोनों ऋतिक से मिले तो उनके मुँह खुले के खुले रह गए क्योकि इस ऋतिक में कोई तो गड़बड़ जरूर थी। ऋतिक ने देखा दोनों बुत बने खड़े है तो उसने मंगल फूफा के कंधे पर मारकर कहा,”ए का दिन मा सपने देखने लगे , जल्दी बोलो हिया का काहे आये हो ? अरे जल्दी बताओ फिर हमे ब्यूटी पार्लर भी जाना भाई शीला भाभी से मेनिक्योर पेडिक्योर करवाना है , जल्दी बोलो,,,,,,,,,,,,बोलो ना”
ऋतिक की आवाज से मंगल फूफा होश में आये और बगल में खड़े गोलू को देखा जो कि अभी भी आँखे फाड़कर ऋतिक को ही देख रहा था। मंगल फूफा ने गोलू की बांह पकड़ी और उसे साइड में लाकर दबे स्वर में कहा,”ए गोलू ! हमको तो जे लौंडे मा कोनो डिफेक्ट लगता है। जे कि अदाए तो साला फुलवारी से भी जियादा कमसिन है,,,,,,,,कही हम गलत आदमी से तो नाही मिल लिए,,,,,,,,,,,,हमको नाही लगता जे बिंदिया का होने वाला पति है”
मंगल फूफा की बात सुनकर गोलू होश में आया वह कुछ कहता इस से पहले ऋतिक आया और मंगल फूफा को अपनी तरफ करके कहा,”ए ! बच्चो के साहरुख खान , हमहि है ऋतिक बिंदिया के होने वाले पति,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने मंगल फूफा को साइड किया और ऋतिक के सामने आकर कठोर स्वर में कहा,”हाँ तो फिर कान खोलकर हमायी बात सुनो,,,,,,,,जे शादी से इंकार कर दयो”
ऋतिक ने ललाट पर आये बालो को बड़ी नजाकत से कान के पीछे किया और कहा,”काहे मना कर दे , हम बिंदिया से शादी करेंगे करेंगे करेंगे , अरे बचपन से पियार करते है उस से,,,,,,,,,काहे मना कर दे”
कहते कहते ऋतिक ने गोलू के सीने पर बाँयी तरफ एक हल्का मुक्का दे मारा और अपने होंठो को चबाने लगा।
“बचपन से प्यार करते हो तो अभी तक मन नाही भरा तुम्हरा ?”,गोलू ने चिढकर कहा
गोलू की बात सुनकर ऋतिक भी चिढ गया और हाथ पैर पटकते हुए कहा,”काहे भरेगा मन ! सी इज माय फर्स्ट एंड ओनली लव , शादी तो हम उसी से करेंगे,,,,,,,,,,!!!!”
“गोलूआ ! अंग्रेजी झाड़ रहा है तुम्हाये सामने”,मंगल फूफा ने गोलू के पास आकर दबे स्वर में कहा तो गोलू और चिढ गया और मंगल फूफा की तरफ देखकर कहा,”हाँ तो समझ आती है हमे,,,,,,,12 वी मा अंग्रेजी मा 36 नंबर आये थे,,,,,,,,,और तुम , तुम कबो स्कूल भी गए हो,,,,,,,,,,,,जाओ जाकर रस्सी लेकर आओ”
ऋतिक ने गोलू के मुँह से रस्सी का नाम सुना तो उसके पास आकर कहा,”रस्सी , रस्सी काहे चाहिए ?”
“अरे रस्सी से तुमको जादू दिखाएंगे ना”,गोलू ने ऋतिक को बातो में उलझाकर कहा
“का जादू ? अरे हमको जादू बहुते पसंद है ,, दिखाओ न दिखाओ ना जल्दी दिखाओ हमाये मेनिक्योर का टाइम हो रहा है”,ऋतिक ने नाचते हुए कहा
“अरे दिखाए कहा से रस्सी नहीं है ना , वो लाने गए है फूफा तब तक रुको तुम”,गोलू ने झुँझलाकर कहा
“रस्सी चाहिए,,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए ऋतिक ने दरवाजे के बाहर सामने से आते लल्लन को देखा , अब लल्लन ठहरा ऋतिक का फूफा तो उसने गोलू से रुकने का इशारा किया और खुद जा पंहुचा लल्लन के सामने , उसने ना मंगल से कुछ कहा ना कुछ पूछा बस उसकी नजर थी लल्लन के पाजामे के नाड़े पर , बस फिर क्या था ऋतिक ने उसे खींचा और कमरे की तरफ जाते हुए कहा,”ए फूफा ! तुम्हाये पाजामे से ज्यादा हमको इसकी जरूरत है”
लल्लन कुछ समझ पाता इस से पहले उसका पजामा खुलकर नीचे आ गिरा और आस पास खड़े बच्चे हसने लगे।
मंगल फूफा रस्सी लेने बाहर आये थे उन्होंने जब लल्लन को इस हाल में देखा तो जोर से हंस पड़ा।
लल्लन की नजर जैसे ही मंगल फूफा पर पड़ी लल्लन चिल्लाया,”अबे मंगलू तू”
मंगल फूफा तुरंत वहा से गायब हो गए और भागे सीधा कमरे में और गोलू के सामने आकर कहा,”अबे गोलू भागो हिया से उह्ह्ह लल्लन ने हमे देख लिया है”
“अरे हमहू आपको रस्सी लाने को कहे थे फांसी का फंदा नाही,,,,,,,,,,,,कहा से आ रहा है उह्ह्ह छप्पन ?”,गोलू ने झुंझलाते हुए कहा
“छप्पन नाही लल्लन”,मंगल फूफा ने कहा
गोलू एक तो पहले ही चिढ़ा हुआ था ऊपर से मंगल फूफा की बात सुनकर और चिढ गया और कहा
,”तुमहू का आधार कार्ड बनाने बैठे हो जो सही गलत बताय रहे हो हमे ?”
“जे लो रस्सी,,,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए ऋतिक अंदर आया लेकिन फर्श पर उसका पैर फिसला और वह जाकर गोलू से टकराया और गोलू अपने आगे खड़े मंगल फूफा , पहले बिस्तर पर मुँह के बल मंगल फूफा गिरे , उनके ऊपर गोलू और गोलू के ऊपर ऋतिक और उसी वक्त लल्लन बिना पाजामे के कमरे में आया और ये नजारा देखकर उसका मुँह खुला का खुला रह गया और उन्होंने गलत समझ लिया।
उसने मुँह घुमाया और गुस्से से कहा,”ए रीतिकवा ! साला तुम्हरी जे ही हरकतों की वजह से कोई गाँव मा तुमको लड़की देने को तैयार नाही था , तुम्हरे बाप से दुई लाख रुपिया नाही लिए होते ना तुम्हायी शादी करवाने के नाम पर तो साला तुम्हरा जे असली रंग पुरे गाँव को दिखाते,,,,,,,,,,,,,अरे आज शादी है तुम्हायी ये छिनरई छोड़ देओ अब। सब लोग नीचे तुम्हायी राह देख रहे है आकर तेल हल्दी लगवाय ल्यो”
कहकर लल्लन पैर पटकते हुए वहा से चला गया।
ऋतिक के कानो पर जूं तक नहीं रेंगी वह तो मस्त गोलू पर पड़ा था ये देखकर गोलू ने उसे धकियाकर साइड किया और कहा,”अबे का स्लीपवेल का गद्दा समझ
लिए हो हमे,,,,,,,,,,,!!!!”
गोलू के एक धक्के से ऋतिक दूर जा गिरा , गोलू ने उसे तो अपने ऊपर से हटा दिया लेकिन खुद ज्यों का त्यों मंगल फूफा पर पड़ा रहा तो मंगल फूफा ने मरे हुए स्वर में कहा,”ए गोलू ! तुमने सुना उह्ह्ह लल्लन का बोले ?”
“का बोले ?”,गोलू ने मंगल फूफा पर पड़े पड़े पूछा
“अबे हम नाही कह रहे थे जे रीतिकवा मा कोनो डिफेक्ट है , जे ससुरा मा बहुते बड़ो डिफेक्ट है और जे वास्ते उह्ह्ह लल्लन ने जे के बाप से दुइ लाख रुपिया लेइ रहे ताकि जे का ब्याह बिंदिया से करवा सके”,मंगल फूफा ने एक बार फिर मरे हुए स्वर में कहा
गोलू ने सुना तो अपनी कोहनी मंगल फूफा की पीठ पर टिका ली और हाथ मुँह से लगाकर हैरानी भरे स्वर में कहा,”अरे भाईसाहब ! इह का मतलब जे बब्बन तो आस्तीन का सांप निकला , हुआ मंगेशवा के सामने दोस्ती का नाटक करके जे ना नर ना मादा जैसे रीतिकवा का ब्याह बिंदिया से करवाय रहा है,,,,,,,,,,,,,,जे साला तो अपने ही दोस्त को धोखा दे रहा है रे फूफा”
गोलू की कोहनी मंगल फूफा की पीठ में धसती चली गयी और उस पर गोलू का पूरा वजह भी उन पर आ गया तो मंगल फूफा ने अपनी जाती हुयी साँसो को रोककर कहा,”गोलू हमको एक ठो बात बताओ आदमी को घुट घुट कर मरना चाहिए या एक बार मा ही अपनों काम तमाम करवाय लेनो चाहे ?”
“अरे घुट घुट कर का मरना फूफा , एक बार मा ही फुल एंड फाइनल”,गोलू ने कहा
“तो एक काम करो अपनी दूसरी कोहनी भी गड़ाय दयो हमायी पीठ पर और निकाल दयो छेड़ हमाये आर पार,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फुफा ने रोआँसा होकर कहा
गोलू ने सुना तो उसे अहसास हुआ कि वह अभी तक मंगल फूफा पर पड़ा है तो वह जल्दी से उठा और कहा,”अरे सॉरी सॉरी फूफा ! हमका माफ़ कर दयो”
मंगल फूफा उठे और खाँसने लगे , उन्होंने अपना सीना थपथपाते हुए कहा,”अबे गोलू ! हमको तो लगता है साला उह्ह्ह मंगेश और लल्लन से पहिले साला तुमहि हमे मार दोगे”
“अरे कैसी बात करते हो फु,,,,,,,,,,,,,,,ए फूफा ! अबे उह्ह्ह ऋतिक कहा गया ?”,गोलू ने मंगल फूफा से कहते हुए जैसे ही कमरे में नजरे घुमाई देखा ऋतिक वहा नहीं है
“ए गोलू ! अगर उसने लल्लन को हमाये बारे में बता दिया तो गड़बड़ हो जाएगी , चलो चलकर उसे ढूंढते है”,कहकर मंगल फूफा ने गोलू को अपने साथ लिया और कमरे से बाहर निकल गए
गुप्ता जी , शर्मा जी और आदर्श फूफा मस्त अपनी चाय पी रहे थे कि तभी फटेहाल यादव जी वहा आये और गुप्ता जी का कंधा थपथपाया। गुप्ता जी ने गर्दन घुमाकर देखा कपड़ो से यादव जी उन्हें कोई भिखारी लगे इसलिए हाथ में पकडे बिस्किट के डिब्बे में से एक बिस्किट निकालकर यादव जी की तरफ बढ़ा दिया और ध्यान चाय पीने में लगा लिया। यादव जी ने हैरानी से बिस्किट को देखा और फिर गुस्से से फेंक दिया। ये देखकर सामने खड़े आदर्श फूफा ने कहा,”का बात है तुम्हाये बड़े नखरे है ,, अरे भिखारी होकर इत्ता ऐटिटूड दिखाए रहे हो,,बिस्कुट काहे फेंके बे ?”
गुप्ता जी ने सुना तो आदर्श फूफा का मजाक उड़ाकर कहा,”आपको कुत्ता समझकर फेंके होंगे , उठाय लीजिये”
“अपनी जबान को थोड़ा लगाम दयो गुप्ता,,,,,,,हमहू का तुमको कुत्ता दिख रहे है ?”,आदर्श फूफा ने भड़ककर कहा
गुप्ता जी ने आदर्श फूफा की तरफ देखा और चाय में बिस्कुट डुबोकर खाते हुए कहा,”शकल से तो तुमहू सूअर दिखते हो पर का है ना मिश्रा के जीजा हो इहलीये कुत्ता कह रहे है”
आदर्श फूफा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया , वे जैसे ही गुप्ता जी की तरफ बढ़ने लगे शर्मा जी ने उन्हें रोककर कहा,”जाने दीजिये आदर्श बाबू ! अब जैसी जबान होगी वैसा नहीं न बोलेंगे”
शर्मा जी कुछ कहे और गुप्ता जी ना चिढ़े ऐसा भला कैसे हो सकता है गुप्ता जी ने बची हुयी चाय एक साँस में पी और शर्मा जी की तरफ आते हुए कहा,”का का खराबी है हमायी जबान मा ? हमहू आदमी देखकर बात करते है समझे , और तुमहू जियादा चहको नाही शर्मा अपने घर मा अपने दामाद की जो छीछा लेदर तुमहू करते हो न उह्ह्ह सब मालूम है हमको”
यादव जी ने देखा तीनो फिर झगड़ा करने लगे है तो उन्होंने चिल्लाकर कहा,”अबे चुप करो तुम तीनो , साला जब देखो तब आवारा खुले सांडो की तरह लड़ने लगते हो,,,,,,,,,,,,!!!”
यादव जी की बात सुनकर तीनो ने लड़ना बंद किया और हैरानी से यादव जी को देखा। फटेहाल यादव जी को ध्यान से देखते हुए गुप्ता जी ने कहा,”जे आवाज तो कुछो जानी पहचानी लग रही है,,,,,,,,,,,,,,,अबे जे तो यादव है , अबे तुम हिया का कर रहे हो ? उह्ह्ह भी जे हाल मा”
“यादव जी आप,,,,,,,,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने भी हैरानी भरे स्वर में कहा
“काहे के आप ? ए यादव तुमहू का मिश्रा जी का पीछा करते हुए आये हो ?”,आदर्श फूफा ने शर्मा जी को साइड कर यादव की तरफ आकर पूछा
यादव जी ने सुना तो मन ही मन खुद में बड़बड़ाया,”अगर हमने इनको सच बता दिया तो पहिले जे तीनो हमे मारेंगे बाद मा मिश्रा जी मारेंगे , लेकिन हमे कुछ ना कुछ तो दिमाग लगाना ही पड़ेगा,,,,,,,,उह्ह्ह्ह ससुरे गोलू ने हमायी नाक मा बहुते दम किया है आज ओह्ह्ह का ही फसाते है”
“अबे मुँह मा का दही मथ रहे हो बोलोगे कुछो ?”,गुप्ता जी ने कठोर स्वर में कहा
“हम , हम काहे पीछा करेंगे आप लोगन का ? हमहू तो चकिया जा रहे थे रास्ते मा बस से गिर पड़े तो हमायी जे हालत होय गयी,,,,,,,,,,,!!!”,यादव ने झूठ कहा
“अच्छा तो मतलब तुम हमाओ पीछा नाही कर रहे , तो फिर चकिया का अपने बाप की बारात मा जाय रहे हो ?”,आदर्श फूफा ने गुस्से से घुरककर कहा
“हमहू चकिया गोलू के लिए जा रहे है,,,,,,,,,,ओह्ह्ह ही हमे कहे रहा कि यादव जी चकिया आ जाओ आपकी मदद की जरूरत है , पहिले हमहू मना किये बाद में उह्ह्ह कहे रहा कि हम पर भरोसा करता है तो हमहू चले आये ,, आखिर एक पडोसी ही पडोसी के काम आता है”,यादव जी ने अपनी तरफ से कोई कहानी बनाकर सुना दी और उन तीनो ने उस पर यकीन भी कर लिया।
गुप्ता जी ने सुना तो भड़क गए और आदर्श फूफा से कहा,”जे साला गोलू ! चरस की औलाद अपने बाप से मदद नाही मांग के पडोसी से मदद मांग रहा है,,,,,,,ए आदर्श बाबू हमको तो लगता है उह्ह्ह हमरी औलाद है ही नाही,,,,,,,,,ऐसे लग रहा जैसे तबेले से उठा के लाय रही मिश्राइन ओह्ह्ह का”
“अरे का अंट शंट बक रहे है आप,,,,,,,,,,मानते है गोलू जी बद्तमीज है , बदमाश है , गलतिया करते है पर जे यादव को अपनी मदद के लिए काहे बुलाएँगे ? अरे जे से चिढ़ते है उह्ह्ह,,,,,,,,,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने कहा
गुप्ता जी ने सुना तो पलटे और शर्मा जी से कहा,”खोपड़ी मा बाल चाहे कम हो पर बात हमेशा भारी कहते हो शर्मा,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“ए जाओ जाओ ! हमाये मुँह नाही लगो , ना जाने कौनसे अशुभ घडी मा उह्ह्ह तिकड़मबाज को अपना दामाद और आपको अपना समधी बनाये रहे हम”,शर्मा जी ने फिर चिढ़कर कहा
“हमायी छोडो जे बताओ आप तीनो कहा जा रहे है ?”,यादव ने पूछा
“अरे तीनों कहा चारो मिश्रा जी भी तो है साथ मा और हम लोग भी चकिया ही जा रहे है”,आदर्श फूफा ने कहा तो शर्मा जी और गुप्ता जी ने अपना सर पीट लिया
“जे तो सही है फिर हमे भी हुआ तक लिफ्ट देइ दयो”,यादव ने खुश होकर कहा
“अरे नाही नाही मिश्रा मना किये रहय किसी को जे सब बताने से,,,,,,,,,,,!!”,आदर्श फूफा ने कहा
“ठीक है फिर हम गोलू को फोन करके बता देते है कि आप सब भी चकिया आय रहे है,,,,,,,,,,,,!!!”,यादव जी ने कहा तो आदर्श फूफा शर्मा जी और गुप्ता जी का मुँह देखने लगे।
गुप्ता जी ने दिमाग चलाया कि गुड्डू और गोलू चकिया में है और अगर गोलू को पता चला कि ये सब भी चकिया आ रहे है तो कही वहा कुछ गड़बड़ ना हो जाये और अगर गड़बड़ हुयी तो मिश्रा जी फिर सबकी खाल उधेड़ कर उसमे भूंसा भर देंगे। ये सब सोचकर ही गुप्ता जी को एक झुरझुरी सी हुई और उन्होंने कहा,”अरे नहीं नहीं यादव गोलू को परेशान करने की का जरूरत है वैसे भी गाड़ी मा एक जन की जगह है तो आओ तुमहू भी चलो लेकिन पहिले जाकर हमहू एक बार मिश्रा जी को खबर कर दे तब तक तुमहू हाथ मुँह धो अपना हुलिया सुधारो,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी ने आकर मिश्रा जी को सारी बात बताई तो मिश्रा जी ने गुस्से से कहा,”और कोनो बचा है तो ओह्ह्ह का भी बुलाय ल्यो चकिया , परसादी बंट रही है ना वहा जैसे , ए गुप्ता कान खोलकर सुन ल्यो हमहू उह्ह गोबर के ढेर को अपने साथ चकिया लेकर नाही जायेंगे”
“नहीं लेकर गए तो उह्ह्ह गोलू को सब बता देगा”,गुप्ता जी ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“अब उह्ह्ह गोलू चकिया मा का कर रहा है ?”,मिश्रा जी ने कहा
“उह्ह्ह तो गोलू ही बताएगा और हमको तो सक है गुड्डूआ भी ओह्ह्ह के साथ है”,गुप्ता जी ने कहा
मिश्रा जी ने जब सुना तो उनके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और उन्होंने कहा,”अगर तुमहू सच कह रहे हो गुप्ता तो हमको फिर से रामनगर की पहाड़ी वाला सीन नाही चाहिए”
“तो यादव को बुला ले ?”,गुप्ता जी ने डरते डरते पूछा
“बुलाय ल्यो”,मिश्रा जी ने चिढ़कर कहा और गाडी का दरवाजा खोलकर गाडी ड्राइवर सीट पर आ बैठे।
( क्या बिंदिया की शादी ऋतिक से करवाकर लल्लन दे रहा है मंगेश को धोखा ? क्या गोलू और मंगल फूफा रोक पाएंगे ऋतिक को दूल्हा बनने से ? खुद को बचाने के लिए आखिर यादव जी ने लगा ही दी बेचारे गोलू की लंका ? जानने के लिए पढ़ते रहे “मनमर्जियाँ” सीजन 4 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

