Manmarjiyan Season 4 – 5
Manmarjiyan Season 4 – 5

मंगल फूफा ने गुप्ता जी से कह तो दिया कि वे फूल अपनी चाची के लिए खरीद रहे है लेकिन असल में तो मंगल फूफा की कोई चचिया थी ही नहीं वह बेचारा गुप्ता जी को लेकर कानपूर की गलियों में यहाँ से वहा घूम रहा था। घूमते घूमते गुप्ता जी थक गए तो अपने आगे चलते मंगल की कोलर पकड़ रुके रोका और कहा,”अबे का बनारस मा बसी है तुम्हरी चचिया , साला पिछले एक घंटे से बस चले जा रहे हो। ऐसे ही चलते रहे न तो जे फूल हमहि पे चढ़ाने पड़ जायेंगे”
“हम तो पहले ही कहे रहे आपसे कि आप परेशान ना होईये हम चले जाते है”,मंगल फूफा ने कहा
मंगल की बातो में ना जाने क्यों गुप्ता जी को झूठ की नजर आया तो उन्होंने कहा,”ए मंगलू ! ए तुम ससुरा चचिया का नाम लेकर कही हमका बोतल मा तो नाही उतार रहे ? नहीं मतलब चचिया सच मा है भी या ऐसे ही हमका पागल बनाय रहे हो ?”
“कैसी बाते कर रहे है आप ? अरे चचिया है मतलब थी , सच मा थी”,मंगल फूफा ने कहा
“फिर हमको काहे लग रहा है कि नहीं थी”,गुप्ता जी ने सोचते हुए कहा
“आपने कबो चार मीनार देखा है ?”,मंगल फूफा ने कहा
“नाही देखा”,गुप्ता जी ने कहा
“आपने नहीं देखा मतलब चार मीनार दुनिया मा नाही है”,मंगल फूफा ने कहा
“अरे नाही नाही ऐसा थोड़े ना होता है”,गुप्ता जी ने झेंपते हुए कहा
“अरे तो फिर आपने हमरी चचिया को नाही देखा जे का मतलब का हमायी चचिया नहीं थी,,,,,हम देखे है अपनी आँखों से देखे है , बचपन मा ओह्ह की गोद मा खेले है,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने भड़ककर कहा
“जितना तुम्हरा साइज है बचपन तो का तुमहू तो जवानी मा भी ओह्ह की गोद में खेले होंगे,,,,,,,,!!”,गुप्ता जी ने कहा
“ए गुप्ता जी , चचिया को लेकर मजाक नहीं हाँ,,,,,,,हम बहुते रिस्पेक्ट करते है उनकी”,मंगल फूफा ने गुस्से से कहा
“अच्छा अच्छा ठीक है नाम का है तुम्हरी चचिया का ?”,गुप्ता जी ने पूछा
मंगल फूफा फिर फंस गए , अब ऐसे अचानक से क्या नाम बताये सोचकर सामने देखा तो सड़क के उस पार खड़ी नजर आयी जिस पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था “रूपा इनरवियर” मंगल फूफा ने भी फटाक से कहा,”रूपा,,,,,रूपा नाम था”
“आगे का लगाती है ?”,गुप्ता जी ने पूछा तो मंगल फूफा ने सर खुजाते हुए फिर सामने देखा लेकिन गाडी तब तक वहा से जा चुकी थी और मंगल की नजर पड़ी दुकान के बोर्ड पर और उन्होंने बिना सोचे समझे जल्दबाजी में कहा “कुरैशी”
गुप्ता जी ने सुना तो हैरान नाम रूपा और सरनेम कुरैशी ऐसा भला कैसे हो सकता है ? उन्होंने हैरानी भरे स्वर में कहा,”कुरैशी कैसे हो सकता तुम्हरी चाची तो हिन्दू थी ना”
मंगल फूफा ने सुना तो मन ही मन खुद को कोसा लेकिन गुप्ता जी को जवाब देना भी जरुरी था और एक झूठ को छुपाने के लिए उन्होंने आगे झूठ की लाइन लगा दी और कहा,”अरे तो चचिया हिन्दू थी , चाचा तो मुस्लिम थे ना”
गुप्ता जी ने सुना तो उनका दिमाग चकराने लगा उन्होंने झुंझलाकर कहा,”तुम्हरे चाचा मुस्लिम कैसे हो सकते है बे ? तुम तो खुद हिन्दू हो”
“हमने कब कहा हमरे चाचा मुस्लिम थे”,मंगल ने कहा
“अभी तो तुमने कहा”,गुप्ता जी ने कहा
मंगल हंसा और कहा,”अरे उह्ह्ह तो चचिया के पहले पति के लिए कहा ना हमने वो मुस्लिम थे , हमारे चाचा तो हिन्दू ही थे उन्होंने तो चाची से दूसरी शादी की थी,,,,,,चाची के पहले पति मुस्लिम थे”,मंगल ने अपनी तरफ से कोई कहानी बनाकर कहा
गुप्ता जी ने सुना तो बौखला उठे उन्होंने मंगल फूफा के सर पर बचे चंद बालों को मुट्ठी में पकड़ा और मंगल झंकझोड़ कर कहा,”तो तुम्हरी चचिया का पहला पति तुम्हरा चाचा कैसे हुआ बे ? हमको का पागल समझे हो,,,,,,,,सच्ची सच्ची बताओ का खिचड़ी पक रही है तुम्हरे दिमाग मा ?”
“अरे हम सच कह रहे है हमरी बात का विश्वास कीजिये”,मंगल ने मरे हुए स्वर में मिमियाते हुए कहा
गुप्ता जी ने उसके बालों को छोड़ा और उसके हाथ से गुलाब के फूल छिनकर कहा,”ऐसा है तो फिर कोई जरूरत नाही है अपनी चचिया को जे फूल देने की,,!!”
“अरे लेकिन आप इनका का करेंगे ?”,मंगल ने कहा क्योकि बेचारा अपनी जेब से उन फूलो के 100 रूपये जो देकर आया था
“इह फूल हम गोलू की अम्मा को देंगे,,,,,,का खुश होंगी उह्ह्ह जे फूल देखकर,,,,,,चलो आओ”,गुप्ता जी ने कहा और मंगल फूफा को साथ लेकर घर के लिए निकल गए। फूलो की किस्मत तो देखो कहा वो फुलवारी के हाथो में जाने वाले थे और कहा अब गुप्ताइन के हाथो में पड़ने वाले थे वो भी मंगल फूफा के एक झूठ के कारण,,,,,,,,,,,!!”
गोलू को दुकान भेजकर गुड्डू घर चला आया। घर से सब मेहमान जा चुके थे अब बस घर के लोग ही बचे थे। गुड्डू अंदर आया तो सामने ही तख्ते पर बैठे मिश्रा जी मिल गए और उन्होंने कहा,”का बेटा ! अपनी भुआ और फूफा को सही से बस मा बैठाय दिए न ?”
“जी पिताजी और फूफा ने कहा है वेदी की शादी में पूरा एक हफ्ता पहिले आएंगे”,गुड्डू ने खुश होकर कहा
“चलो जे अच्छा हुआ कि समय रहते आदर्श बाबू और राजकुमारी मा सुधार हुई गवा बाकि जे फूफा लोग सादी मा आये और कोनो बवाल ना करे इह तो नामुमकिन है,,,,,,,,,,उह्ह्ह गोलू तुम्हरे साथ गवा था ना उह्ह कहा है ?”,मिश्रा जी ने कहा
“गोलू दुकान चला गया पिताजी उह्ह शादी का कोनो नवा आर्डर आये रहा ओही देखने”,गुड्डू ने अपने हाथ पैर धोते हुए कहा
“अच्छा है काम मा व्यस्त रहा तो इधर उधर दिमाग कम लगाएगा,,,,,,,,अच्छा गुड्डू हम जे कह रहे थे कि तुम्हरे पास तो तुम्हरा टेंट का काम है”,मिश्रा जी ने इतना ही कहा कि गुड्डू ने टोक दिया और कहा,”पिताजी वेडिंग प्लानर है हमहू,,,,,,,,टेंटवाले नाही”
“हाँ हाँ वही तुम्हरे पास तुम्हरा बिजनेस है तो हम सोच रहे लवली को अपने शोरूम का सब काम समझा दे और फिर पूरा कारोबार उसे ही सम्हला दे,,,,,,,,तुम का कहते हो ?”,मिश्रा जी ने गंभीर होकर पूछा
गुड्डू ने सुना तो हैरानी से मिश्रा जी को देखने लगा , बहुत कम ऐसा होता था जब मिश्रा जी गुड्डू से ऐसा कोई सलाह मशवरा करते थे। गुड्डू मिश्रा जी के सामने आया और कहा,”अरे पिताजी ! इसमें हमसे का पूछना , लवली भैया हमाये बड़े भाई है आप उन्हें जो देना चाहे दीजिये हमे का आपत्ति होगी ?”
मिश्रा जी ने सुना तो अपनी जगह से उठे और गुड्डू के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”हमे तुमसे जे ही उम्मीद थी बिटवा , खुश रहो”
गुड्डू मुस्कुराया तो मिश्रा जी वहा से चले गए। गुड्डू भी अंदर चला आया देखा मिश्राइन अपने कमरे में है और वेदी पीछे आँगन में तो वह चुपके से रसोईघर की तरफ आया उसने देखा शगुन अंदर है और कुछ काम कर रही है तो गुड्डू आया और शगुन को पीछे से अपनी बाँहो में भर लिया। शगुन ने घबराकर पीछे देखा तो पाया गुड्डू है उसने खुद को गुड्डू से छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा,”गुड्डू जी ! ये क्या कर रहे है आप ? माजी और पिताजी घर में है उन्होंने देखा तो क्या सोचेंगे ?”
“का सोचेंगे ? तुमहू हमायी पत्नी हो हम जब चाहे तब तुम्हे पिरेम कर सकते है , अब का जे के लिए भी हमे अम्मा पिताजी की परमिशन लेनी पड़ेगी ?”,गुड्डू ने शगुन को तंग करते हुए कहा
“अपना ये प्रेम ना नए मेहमान के लिए थोड़ा बचाकर रखिये मिश्रा जी,,,,,!!”,शगुन ने कहा तो गुड्डू ने उसे पलटकर अपने सामने किया और कहा,”ए शगुन गुप्ता ! जे नन्हे मेहमान के नाम पर हमरे पिरेम के आगे फुल स्टॉप नाही लगाओ तुमहूँ समझी”
गुड्डू शगुन को छेड़ ही रहा था कि तभी लवली किसी काम से नीचे आया और किचन के दरवाजे पर आकर रुक गया। उसने जब शगुन और गुड्डू को साथ देखा पलट गया और खाँसने का नाटक किया।
लवली को वहा देखकर शगुन जल्दी से साइड हो गयी और सर पर पल्लू ले लिया क्योकि लवली अब रिश्ते में शगुन के जेठ जी थे। गुड्डू भी झेंप गया और पलटकर कहा,”अरे लवली भैया आप हिया , कुछ चाहिए आपको ?”
“हाँ वो हमे एक कप चाय चाहिए”,लवली ने कहा
“मैं बना देती हूँ”,शगुन ने कहा और लवली के लिए चाय बनाने लगी। लवली ने सुना तो वहा से चला गया और गुड्डू ने अपने सर पर एक चपत मारी क्योकि बड़े भाई ने उसे शगुन के करीब जो देख लिया था।
गुड्डू भी लवली के पीछे पीछे हॉल में चला आया। हॉल में पड़े सोफे पर बैठा लवली उंगलियों से अपना ललाट सहला रहा था ये देखकर गुड्डू उसके पास आया और कहा,”का हुआ सर मा दर्द है का ?”
“हाँ सोने की कोशिश किये थे लेकिन सोकर उठे तो और ज्यादा होने लगा,,,,,,,!!”,लवली ने कहा
“लगता है आप किसी बात बात पर बहुते ज्यादा सोच विचार कर रहे है , रुकिए हमहू अम्मा से आपके सर मा तेल लगाने को कह देते है”,गुड्डू ने उठते हुए कहा
लवली ने उसका हाथ पकड़कर उसे वापस बैठा लिया और कहा,”अम्मा को काहे परेशान करते हो ? उह्ह्ह पहिले ही बहुते थकी हुई है ओह्ह का आराम करने दयो,,,,,,,,!!!”
“तो फिर हमहू आपके लिए दवा ले आये ?”,गुड्डू ने फिर पूछा
“नहीं हमरे सर मा तेल तुम लगाओगे”,लवली ने कहा
“हम लगाएंगे ?”,गुडू ने चौंककर कहा
“हम तुम्हरे बड़े भाई है और छोटे भाई का फर्ज होता है बड़े भाई की हर बात मानना , जाओ अब जाकर कडु तेल लेकर आओ और हमाये सर मा मलो”,लवली ने आँखे मूंदकर सर पीछे लगाते हुए कहा
गुड्डू ने सुना तो बेचारा उठा और तेल लेने चला गया। शगुन तब तक लवली के लिए चाय ले आयी। उनसे चाय लवली के सामने टेबल पर रखकर कहा,”लवली भैया ! आपकी चाय”
शगुन की आवाज सुनकर लवली ने अपनी आँखे खोली और चाय का कप उठाकर कहा,”शुक्रिया,,,,,,,,,!!”
शगुन मुस्कुराई और जाने लगी तो लवली ने कहा,”शगुन,,,,,,,,,,,,!!”
शगुन रुकी और लवली की तरफ पलटी तो लवली ने नजरे झुका ली , अपने छोटे भाई की पत्नी को वह नजर भरकर कैसे देख सकता था ? शगुन लवली के बोलने का इंतजार करने लगी तो लवली ने कहा,”हमे तुमसे कुछो कहना है”
“हाँ कहिये”,शगुन ने सहजता से कहा
“दरअसल हम तुमसे माफ़ी मांगना चाहते है , हमने सबको परेशान किया , तकलीफ पहुंचाई लेकिन इन सब में हमने सबसे ज्यादा तकलीफ तुम्हे पहुंचाई , तुम्हे परेशान किया और तुम्हरा अपमान भी किया। हमे अपने छोटे भाई की पत्नी के साथ ऐसा बर्ताव नहीं करना चाहिए था। हम अपने उस बर्ताव को लेकर शर्मिन्दा है शगुन और हम तुमसे माफ़ी चाहते है,,,,,,,,,,,,,हमने जो किया वो माफ़ी के लायक तो नाही है लेकिन फिर भी हो सके तो हमे माफ़ कर देना”,लवली ने नजरे झुकाये कहा
शगुन ने सुना तो वह मुस्कुराई और प्यार से कहा,”लवली भैया ! जो हुआ उसे भूल जाईये वो बस एक बुरा वक्त था जो गुजर चुका है। मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूँ इसलिए नहीं कि आप इस घर के बड़े बेटे है या फिर गुड्डू जी के बड़े भाई है बल्कि इसलिए कि जब गुड्डू जी की जगह आप यहाँ थे गुड्डू जी बनकर तब भी आपने कभी अपनी मर्यादा नहीं भूली एक औरत आपके साथ सुरक्षित महसूस करे इस से बड़ा गुण और कुछ नहीं हो सकता। मुझे माफ़ी मांगकर आप मुझे शर्मिंदा ना करे,,,,,,,
मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है बस इतना कहूँगी कि जैसे इस घर और घर के लोगो ने आपको अपना लिया है वैसे ही आप भी पुरे दिल से इस घर को अपना लीजिये,,,,,,,,,,,इस से ज्यादा मुझे और कुछ नहीं चाहिए”
लवली ने सुना तो उसके मन से शगुन को लेकर एक भारी बोझ उतर गया और उसने शगुन की तरफ देखकर कहा,”आज समझ आया गुड्डू तुम पर जान क्यों छिड़कता है ? तुम बहुते समझदार और सरल हो शगुन , खुश रहो”
“आप भी खुश रहिये और चिंता मत कीजिये जल्दी ही बिंदिया भाभी भी हम सबके साथ होगी”,शगुन ने मुस्कुराकर कहा और वहा से चली गयी।
शगुन के मुँह से बिंदिया के बारे में सुनकर लवली हैरान था तभी गुड्डू तेल की बोतल लेकर वहा आया और कहा,”ल्यो नीचे बैठो लगा देते है आपके सर मा तेल आप भी का याद रखोगे ?”
“जे शगुन मन की बातें भी जान लेती है का ?”,लवली ने नीचे जमीन पर बैठते हुए कहा। गुड्डू लवली के पीछे सोफे पर आ बैठा और कहा,”काहे ? आपको भी लेक्चर दे दी का हमायी मास्टरनी ?”
“मास्टरनी ?”,लवली ने हैरानी से कहा
“हाँ शादी से पहिले बनारस मा कॉलेज मा पढ़ावत रही , फिर हमरे साथ सादी हुई तो हिया चली आयी लेकिन मास्टरनी वाला स्वाभाव नाही गया , जब भी हमसे कोनो गलती होती है उनका लेक्चर शुरू हो जाता है,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने हाथो में तेल लेकर लवली के बालों में लगाते हुए कहा
लवली ने सुना तो हंसा और कहा,”अच्छा है हमाये वाली स्कूल कॉलेज मा नाही पढ़ाती,,,,,,,,,,,!!”
“का ?”,गुड्डू ने कहा उसे लवली की बात ठीक से सुनाई नहीं दी
“कुछ नहीं,,,,,,,,,,!!”,लवली ने कहा और फिर आँखे मूँद ली , आँखों के सामने बिंदिया का चेहरा आने लगा। बिंदिया कितना चाहती थी लवली को और लवली हर बार उसे खुद से दूर कर दिया करता लेकिन आज बिंदिया से दूर होकर लवली को उसकी अहमियत पता चली।
गुप्ता जी का घर , कानपूर
दुकान से गोलू सीधा घर आया और अंदर आकर पिंकी को आवाज लगाई। पिंकी अपने पापा के घर जाने के लिए तैयार हो रही थी जब गोलू की आवाज सुनी तो जल्दी से अपने बालों को समेटा और उनमे कलेचर खोंसकर बाहर आयी। पिंकी को सजा धजा देखकर गोलू ने कहा,”का बात है पिंकिया का लग रही हो मतलब कतई जहर,,,,,,,,!!”
“पुरा आधा घंटा लेट हो तुम गोलू , हमने कहा था न हमे पापा के घर जाना है,,,,,,,,,,,!!!”,पिंकी ने चिढ़कर कहा
“अरे तो चलते है ना तुम्हरे पापा कौनसा लन्दन मा रहते है , यही दुई गली छोड़कर घर है उनका लेकर चलते है,,,,,,,,,वैसे ऐसा का है जो तुमको उनसे आज ही मिलना है “.गोलू ने हाथ मुँह धोते हुए कहा
“आज पापा का जन्मदिन है,,,,,,और किसी को याद भी नहीं है इसलिए हम घर जाकर उन्हें सरप्राइज देना चाहते है”,पिंकी ने कहा
“हाँ और जे गाजर का हलवा हमरी तरफ से भेंट कर देना उनको और ए गोलुआ अपने ससुर जी के लिए कोनो बढ़िया सा गिफ्ट ले जाना ना भूलना”,गुप्ताइन ने बड़ा सा डिब्बा पिंकी को दिया और फिर गोलू की तरफ पलटकर कहा
“थैंक्यू मम्मी जी,,,,,,,!!”,पिंकी ने खुश होकर कहा
गोलू ने देखा गुप्ताइन ने गाजर का हलवा बनाया है वो भी उसके खड़ूस ससुर के लिए तो गोलू का मुँह बन गया लेकिन पिंकी के सामने क्या ही कहता। गोलू कमरे में गया कपडे बदले और बाहर चला आया। पिंकी भी तैयार खड़ी थी और दोनों शर्मा जी के घर के लिए निकल गए।
गोलू ने अपनी स्कूटी स्टार्ट की और पिंकी उसके पीछे आ बैठी। दोनों वहा से निकल गया , अब पिंकी का घर दो गली छोडकर ही था इसलिए पिंकी ने कहा,”गोलू एक काम करो हमे यहाँ उतारो और तुम जाकर कुछो मिठाई और फल ले आओ घर के लिए ऐसे खाली हाथ जाना अच्छा नहीं लगता”
गोलू ने पिंकी को नुक्कड़ पर उतारा और खुद मार्किट साइड चला गया।
अब गोलू तो ठहरा गोलू वह भला शर्मा जी पर पैसे खर्च क्यों करता ? उसने मार्किट से एक सोहन पपड़ी का डिब्बा लिया और दो किलो केले लेकर पिंकी के पास चला आया। सब सामान पिंकी को देकर उसने स्कूटी स्टार्ट की और अगले ही पल शर्मा जी के मोहल्ले में , गोलू ने स्कूटी साइड लगाई। दोनों स्कूटी से नीचे उतरे और घर की तरफ बढे , चलते चलते पिंकी की नजर एकदम से ठेले में रखे केलो पर पड़ी तो वह रुकी और हैरानी से कहा,”गोलू पगला गए हो का ? पापा इन केलो का का करेंगे ?”
गोलू ने ठेले से एक केला निकाला , छिला और खाकर कहा,”का करेंगे ? ऐसे छीलेंगे , खाएंगे और बॉडी बनाएंगे देखी नहीं कितना दुबला गए है बेचारे”
पिंकी ने सुना तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया और गोलू ने बड़ी ही स्टाइल से छिलका हवा में उछाल दिया ,, कर्मा इसे ही कहते है जिस छिलके को गोलू ने हवा में उछाला था वह आकर उसी के रास्ते में गिरा और जैसे ही गोलू आगे बढ़ा गोलू का पैर पड़ा छिलके पर और गोलू महाराज फिसलकर सीधा शर्मा जी के घर के सामने मुँह के बल आ गिरे और उनका मुँह गिरा घर के बाहर पड़े गोबर पर,,,,,,,,,,,बर्थडे शर्मा जी का था लेकिन केक गोलू ने काटा
( गुप्ता जी के रहते क्या मंगल फूफा की प्रेम कहानी हो पायेगी मुकम्मल ? क्या लवली को मिलेगा बिंदिया का साथ या रह जाएगा उसका प्यार अधूरा ? केक तो गोलू काट चुका लेकिन बर्थडे कहेगा कौन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

