Manmarjiyan Season 4 – 20

Manmarjiyan Season 4 – 20

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

दोपहर में गुप्ता जी के घर के सामने बैठे मंगल फूफा और गोलू को “तुमको जाना पड़ेगा” और “हमहू नहीं जायेंगे” करते करते शाम हो गयी। गुप्ता जी गोलू की राह देखते देखते थक गए तो अंदर से बाहर आये। सीढ़ियों पर आकर गुप्ता जी ने अंगड़ाई ली और बड़बड़ाये,”जे साले गोलू को हमहू घर आने को कहे रहे और उह्ह अभी तक नाही आये,,,,,,,,लगता है ज़रा तबियत से सुताई करनी होंगी इनकी तबहि ना लाइन पर आएंगे,,,,,,,,,,,,ना जाने कहा पड़े होंगे,,,,,,,उह्ह्ह गुड्डू के घर के अलावा और जा भी कहा सकते है ?”

गुप्ता जी बड़बड़ा ही रहे थे कि तभी उनकी नजर घर के बाहर नीचे जमीन पर बैठे दो लोगो पर पड़ी , साथ ही घर के बाहर भीड़ देखकर उनको कुछ गड़बड़ लगी वे दरवाजे की तरफ बढ़ गए।

गुप्ता जी घर से बाहर आये और जब उन्होंने भीड़ को हटाकर नीचे जमीन पर बैठे गोलू और मंगल को देखा तो उनकी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा।
“तुमको जाना पडेगा”,गोलू ने जमीन पर हाथ मारकर सामने बैठे मंगल फूफा से कहा
“हमहू नहीं जायेंगे”,मंगल फूफा ने हाथो को नचाकर कहा

गुप्ता जी ने वहा खड़े तमाशा देख रहे लोगो को भगाया और गोलू का कान पकड़कर उसे उठाते हुए कहा,”जे का तुम दोनों ने जाना पड़ेगा , नहीं जायेंगे लगा रखा है ?”
गुप्ता जी को देखते ही मंगल फूफा ने उठकर जैसे ही भागने की कोशिश की गुप्ता जी ने दूसरे हाथ से उनका कोलर पकड़कर उन्हें भी रोक लिया और गोलू के साथ घर के अंदर लाकर दोनों को एक साथ सीढ़ियों की तरफ धकेल दिया।

मंगल फूफा और गोलू दोनों घर की सीढ़ियों पर आ गिरे। गुप्ता जी ने घर का मेन गेट बंद किया और अंदर आकर कहा,”हमको एक ठो बात बताओ तुम दोनों में कोनो लाज शर्म है की नाही , दिनभर आवारा सांड की तरह यहाँ वहा भटककर भी तुमको शांति नाही है,,,,,,,,और तुम गोलू तुमको हम दुपहर मा फोन किये रहय कि घर पहुँचो और तुम बाहिर बैठ के तमाशा कर रहे थे,,,,,,,,,,,,नहीं हमको आज बताय दयो आखिर तुमहू हमसे चाहते का हो ?”
“पानी,,,,,,,,,!!”,गोलू ने मरे हुए स्वर में कहा क्योकि बेचारा दोपहर से प्यासा था

“हम का तुमको मुंसिपाल्टी मा बाबू दिखते है ?”,गुप्ता जी ने भड़ककर कहा
“अरे हमहू पीने का पानी मांग रहे है पिताजी , एक ठो गिलास देई दयो दो हमायी जान मा जान आये,,,,,,,,,!!”,गोलू ने सीढियो पर पसरे हुए कहा
गुप्ता जी पानी लेने अंदर जाने लगे तो मंगल फूफा ने कहा,”अब जब पानी ला ही रहे हो तो एक ठो गिलास हमरे लिए भी ले आना”

“तुम्हरे लिए तो चुल्लू भर पानी काफी है मंगलवा ओह्ह मा डूब मरो और पीछा छोडो हमारा”,गुप्ता जी ने खीजकर कहा और अंदर चले गए
सीढ़ियों पर पसरा गोलू उठकर बैठा और कहा,”देखा फूफा ! खामखा तुमहू पिताजी से डर रहे थे , हमने कहा ना हमाये पिताजी चीखें चिल्लाये , मारे पीटे लेकिन मक्खन है , फट से पिघल जाते है”

“बात तो तुम्हारी सही है गोलू,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने कहा तब तक गुप्ता जी हाथो में दो गिलास पानी ले आये एक गोलू को दिया दूसरा मंगल की तरफ बढ़ा दिया। गोलू ने तो चुपचाप पानी पी लिया लेकिन मंगल फूफा ने एक घूंठ पीया और गुप्ता जी की तरफ देखकर कहा,”बर्फ नहीं है ?”
गुप्ता जी ने सुना तो चिढ़कर कहा,”गद्दा लगवाय दे तुम्हाये लिए ? साले तुमको घर मा घुसने दे रहे है ओहि बहुत है , मुंह बंद करके बैठो अपना,,,,,,,,,,,!!!”

“अरे यार पिताजी बस करो ना भाई , अरे शाम के बाद तो महाभारत का युद्ध भी रुक जाता था लेकिन आपका युद्ध साला एक ठो बार चालू हुआ तो फिर रुकने का नाम नाही लेता और काहे पीछे पड़े हो यार मंगल फूफा के , समझा दिए है हम इनको नहीं करेंगे आज के बाद कोनो गलती,,,,,,,,,,,,नहीं देंगे आपको शिकायत का मौका अब का जान ले लेंगे इनकी,,,,,,,,,,अरे मेहमान है घर मा मेहमान की तरह रहन दयो ना”,गोलू ने हताश और निराश होकर कहा

गुप्ता जी ने सुना तो थोड़ा ठंडे पड़े और गोलु के पास आकर कहा,”हाँ ठीक है जाय दयो”
मंगल फूफा ने सुना कि आज पहली बार गोलू उनकी साइड ले रहा है तो मुँह फाड़कर रोने लगे। गुप्ता जी ने हैरानी से उन्हें देखा और गोलू ने कहा,”अब तुमको का हुआ ? काहे गला फाड़ रहे हो ?”
“हम तुमको गलत समझे पर तुम तो अच्छे इंसान निकले रे गोलू,,,,,,,बस जे ही बात सोचकर हमको रोना आ रहा है आआआ”,मंगल फूफा ने कहा और फिर रोने लगे

“हाँ तो उधर जाकर रो लो हमायी छाती पर टेक्टर नाही चलाओ समझे”,गोलू ने कहा तो मंगल फूफा ने रोना बंद कर दिया और सुबकने लगे।
उनका सुबकना सुनकर गोलू और खीज गया उसने मंगल फूफा का मुँह बंद किया और कहा,”अबे चुप हो जाओ का आँख नाक से गंगा जमना बहा रहे हो,,,,,,,,पिताजी”

मंगल फूफा को चुप करवाते हुए गोलू ने थोड़ी तेज आवाज में गुप्ता जी से कहा
“का है बे ? चिल्ला काहे रहे हो ?”,गुप्ता जी ने भी चिल्ला कर कहा
“अब आप काहे चिल्ला रहे है ?”,गोलू ने मासूमियत से कहा तो गुप्ता जी हताश होकर गोलू के बगल में आ बैठे और कहा,”का बताये यार गोलू ? साला ना जाने उह्ह कौनसी मनहूस रात थी जब तुम्हायी अम्मा ने फुलवारी को जे घर मा आते और हमसे बात करते देखा था बस तबसे हमायी जिंदगी के लो,,,,,,,,,,,,,!!!”

“अरे पिताजी का बोल रहे है ? फॅमिली स्टोरी है,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने एकदम से गुप्ता जी को टोका तो गुप्ता जी सम्हले और कहा,”हाँ ! तबसे हमायी जिंदगी की लंका लगी हुई है। तुम्हायी अम्मा ने फुलवारी को देखा नाही कि हम पे सक करना चालू कर देंगी। अरे यार तुम बताओ हम तुमको ऐसे आदमी लगते है का ?”

“नहीं ना पिताजी ! ऐसे होते तो आज हम अकेले होते का हमाओ भी कोनो भाई बहन होतो जे घर मा”,गोलू ने मासूमियत से कहा
गुप्ता जी अपना दुखड़ा सुना रहे थे और गोलू बकैती कर रहा था उन्होंने गोलू को घुरा और कहा,”तुम्हरा कोनो भाई बहन इहलीये नाही है बिटवा का है कि हमहू एक औलाद पैदा करके आज तक ओह्ह का अफ़सोस जता रहे है,,,,,,,,,,जियादा जबान चलाई ना तो यही पटक के पेल देंगे समझे”

गोलू ने सुना तो सहमकर चुपचाप बैठ गया मंगल फूफा पहले ही खामोश थे इसलिए गुप्ता जी ने कहा,”हाँ तो हम का कह रहे थे ?”
“आप कह रहे थे कि न जाने उह्ह्ह कौनसी मनहूस रात थी,,,,,,,,,,,,,पिताजी हमको तो लगता है अमावस की रात थी तबही ना आपकी जिंदगी मा इत्तो अंधेरो है”,गोलू ने फिर बकवास की तो बगल में बैठे गुप्ता जी ने एक घुसा उसकी पीठ पर मारा , कुछ पल के लिए तो बेचारे गोलू की रीढ़ की हड्डी ही सीधी हो गयी और गोलू के मुँह से एक शब्द नहीं फूटा बस घुसे का दर्द उसके चेहरे पर जरूर दिखाई दिया

“तुमको हिया हमहू अपनी पिरोब्लम बता रहे है तुमहू साला हमसे ही बकैती कर रहे हो,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने भड़ककर कहा
“अरे उह्ह्ह तो बच्चा है , हमको बताईये ना का समस्या है ?”,मंगल फूफा ने कहा

“हाँ तो हम कह रहे थे,,,,,,,,,!”,गुप्ता जी ने मंगल फूफा की तरफ पलटकर आराम से कहा और फिर एकदम से बोले,”हम तुमको अपनी समस्या काहे बताये ? तुमहू का हमाये रिश्तेदार हो,,,,,,,,,,,,साले सबसे बड़ी समस्या तो तुम्ही हो , ना तुम हिया आते , ना फुलवारी के चक्कर मा पड़ते , ना उह्ह्ह तुम्हायी मुँह बोली रिश्तदार हमायी मेहरारू हम पर सक करती,,,,,,,,,इहलीये तुमहू तो चुप ही रहो समझे”

बेचारे मंगल फूफा ने सुना तो मुँह घुमा लिया। गोलू के घुसे का दर्द कुछ कम हो चुका था इसलिए उसने कहा,”अरे पिताजी लेकिन समस्या का है उह्ह्ह बताईये ना तबसे आप बस एक ही स्टेशन पर अटके है “हम जे कह रहे थे , हम जे कह रहे थे , का कह रहे थे कहिये और बताईये का समस्या है ?”

गुप्ता जी ने बुरा सा मुँह बनाया और मंगल फूफा की तरफ इशारा करके कहा,”जे साला मंगल और जे के साथ आये लौंडे को हड़काने के चक्कर मा हमहू खड़े थे बाहिर , ओहि टाइम पे फुलवारी घर से बाहिर निकली साथ मा यादववा भी था , हमहू गुस्से मा कहे रहे कि आईन्दा से फुलवारी के आस पास भी दिखे ना तो टाँगे तोड़ देंगे,,,,,,,,बस जे बात तुम्हायी अम्मा ने सुन ली अब उनको लगता है हमहू फुलवारी के लिए सबसे लड़ रहे है और हमाओ ओह्ह के साथ चक्कर है,,,,,,,,,,!!!”

“अच्छा तो जे समस्या है , पर पिताजी आपको का जरूरत थी  मोहल्ला के बीच मा खड़े होकर जे सब कहने की ,,,,,,,,,, अरे फुलवारी को फूफा देखा चाहे फूफा का लाया लौंडा उनको यादववा अपने आप देखेगा आप काहे बीच शाहरुख खान बन रहे थे ए ए ए किरण , अम्म्मम्म किरण , हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते है , हहहहहहहहह”,गोलू ने पहले बहुत आराम से कहा और फिर खड़े होकर शाहरुख खान की तरह बाँहे फैलाकर बहुत ही बुरी एक्टिंग करके कहा।

“समस्या जे नहीं है”,गुप्ता जी ने झुंझलाकर कहा
“जे समस्या नहीं है तो फिर समस्या का है पिताजी ?”,गोलू ने एक बार फिर गुप्ता जी के बगल में बैठकर कहा
“पहले जब तुम्हायी अम्मा को ग़लतफ़हमी हुई तो उह्ह्ह जे नमूने को बुलाय रही “मंगल फूफा” और अब कल सुबह उह्ह अपने किसी “शनि भैया” को बुलाने की धमकी दी है हमका,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने परेशानी भरे स्वर में कहा

“अरे पिताजी तो जे मा डरने की का बात है आन दयो शनि भैया को ,,, मंगल फूफा के नाम पर जे महमूर्ति आये , शनि भैया के नाम पर भी कोनो छोटा मोटा गुंडा आएगा,,,,,,,,,,,,देख लेंगे”,गोलू ने बहुत ही अकड़ से कहा
“पक्का ना गोलू ? हमको बहुते डर लग रहा है”,गुप्ता जी ने कहा
“अरे पिताजी डरने की बात नहीं है हम है न , हमरे होते काहे का डर ? अरे देख लेंगे शनि , राहू , केतू सब को देख लेंगे,,,,,,,,!!!”,गोलू कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया लेकिन मंगल फूफा ने जैसे ही “शनि भैया” नाम सुना उनके चेहरे का रंग उड़ गया।

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( क्या गुप्ता जी ने करेंगे गोलू और मंगल फूफा को उनकी गलतियों के लिए माफ़ और देंगे फिर से अपने घर में जगह ? क्या गोलू निकाल पायेगा अपने पिताजी को इस नयी मुसीबत से और कर पायेगा सामना शनि भैया का ? गुप्ता जी के मुँह से शनि भैया का नाम सुनकर क्यों उड़ा मंगल फूफा के चेहरे का रंग ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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दोपहर में गुप्ता जी के घर के सामने बैठे मंगल फूफा और गोलू को “तुमको जाना पड़ेगा” और “हमहू नहीं जायेंगे” करते करते शाम हो गयी। गुप्ता जी गोलू की राह देखते देखते थक गए तो अंदर से बाहर आये। सीढ़ियों पर आकर गुप्ता जी ने अंगड़ाई ली और बड़बड़ाये,”जे साले गोलू को हमहू घर आने को कहे रहे और उह्ह अभी तक नाही आये,,,,,,,,लगता है ज़रा तबियत से सुताई करनी होंगी इनकी तबहि ना लाइन पर आएंगे,,,,,,,,,,,,ना जाने कहा पड़े होंगे,,,,,,,उह्ह्ह गुड्डू के घर के अलावा और जा भी कहा सकते है ?”

दोपहर में गुप्ता जी के घर के सामने बैठे मंगल फूफा और गोलू को “तुमको जाना पड़ेगा” और “हमहू नहीं जायेंगे” करते करते शाम हो गयी। गुप्ता जी गोलू की राह देखते देखते थक गए तो अंदर से बाहर आये। सीढ़ियों पर आकर गुप्ता जी ने अंगड़ाई ली और बड़बड़ाये,”जे साले गोलू को हमहू घर आने को कहे रहे और उह्ह अभी तक नाही आये,,,,,,,,लगता है ज़रा तबियत से सुताई करनी होंगी इनकी तबहि ना लाइन पर आएंगे,,,,,,,,,,,,ना जाने कहा पड़े होंगे,,,,,,,उह्ह्ह गुड्डू के घर के अलावा और जा भी कहा सकते है ?”

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