Manmarjiyan Season 4 – 2
Manmarjiyan Season 4 – 2

मिश्रा जी केशव पंडित को समझा बुझाकर अंदर ले आये। जगह जगह से फटा कुर्ता , धोती की जगह धारियो वाला कच्छा , मुँह पूरा लाल पीला धूल मिट्टी से भरा हुआ और उस पर उनके बिखरे बाल , एक बारगी तो कोई अनजान आदमी भी केशव पंडित को देख ले तो उसे भी उन पर दया आ जाये।
“मिश्राइन ! जरा पंडित जी के लिए साफ कपडे तो ले आओ,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने केशव पंडित के साथ अंदर आते हुए कहा। बेचारे केशव पंडित मारे शर्म के खुद में ही सिमटे जा रहे थे।
मिश्रा जी अपने तख्ते पर आ बैठे। वही आँगन में गुड्डू , लवली , आदर्श फूफा , भुआ खड़ी थी। शगुन और वेदी अंदर थी और मिश्राइन पंडित जी के लिए कपडे लेने चली गयी।
आँगन की सीढ़ियों पर बैठा गोलू किसी सोच में डूबा अपना गाल खुजा रहा था कि मिश्रा जी की कड़कदार आवाज उसके कानो में पड़ी,”ए गोलू महाराज ! हुआ बैठकर नई नवेली दुल्हिन के जैसे गाल का खुजा रहे हो जाओ जाकर पंडित जी के लिए गुसलखाने में पानी का बाल्टी भर दयो और टाइम मिले तो अपना चौखटा भी धो लेना”
“बाल्टी काहे कहो तो नहला भी देंगे , अरे आप का हमको दाई माई समझ लिए हो जो इह सत्तर साल के बच्चे के लिए हम बाल्टी भरेंगे,,,,,,,खुद ही जाए गुसलखाने में और भर ले अपनी बाल्टी”,गोलू ने चिढ़कर कहा
मिश्रा जी ने सुना तो कुछ कहा नहीं बस झुककर अपने पैर से बाटा की चप्पल निकाली और गोलू की तरफ फेंककर कहा,”तो फिर हिया हमायी छाती पर काहे बैठे हो घर काहे नाही जाते ?”
मिश्रा जी की चप्पल सीधा जाकर लगी गोलू की पीठ पर और गोलू अपनी पीठ मसलते हुए चिल्लाया,”अई अई यी , ए चचा ए सुनो”
“बको”,मिश्रा जी ने कहा
“आप ओलम्पिक मा भाग काहे नाही लेते ? का है कि निशानो बहुते सही है आपको , मजाल है आपकी जे बाटा की चप्पल थोड़ी सी भी इधर उधर हो जाये”,गोलू ने अपनी पीठ मसलते हुए कहा
“भीतर लट्ठ भी धरो है कहो तो मगवाये ?”,मिश्रा जी ने गोलू को घूरते हुए कहा तो गोलू डरकर गुड्डू के पीछे आ छुपा और बड़बड़ाने लगा तो गुड्डू ने दबी आवाज में कहा,”अबे काहे छेड़ते हो पिताजी को ?”
“ओह्ह का हमरी मेहरारू है जो हंसी ठिठोली करेंगे उनके साथ,,,,,,,!!”,गोलू ने भी दबी आवाज में कहा
गुड्डू कुछ कहता इस से पहले ही मिश्रा जी ने उसे आवाज देकर अपने पास बुलाया और पंडित जी के लिए पानी की बाल्टी भरने को कहा। मिश्राइन तब तक पंडित जी के लिए कपडे ले आयी। गुड्डू ने कपडे लिए और पंडित जी को अपने साथ लेकर वहा से चला गया। गोलू ने अपने कपडे तो झाड़ लिए थे लेकिन मुँह पर मिटटी अभी भी लगी थी इसलिए वह भी नल के पास आकर मुँह धोने लगा।
आदर्श फूफा वही रखे दूसरे तख्ते पर आ बैठे और कहा,”हमको एक ठो बात बताओ मिश्रा जी , जे साले गुप्ता के लौंडे को इत्ता झेलते काहे हो आप सब ? ना उह्ह इह घर का सगा है , ना ही ओह्ह की जे घर मा कोनो रिश्तेदारी है,,,,,,,!!”
गनीमत था गोलू ने ये बात नहीं सुनी थी वरना मिश्रा जी के घर में एक और युद्ध शुरू हो जाता वो भी गोलू और फूफा के बीच,,,,,,,,,!!
मुँह धोकर गोलू वापस आंगन की तरफ आया , मुँह पोछने को कुछ नहीं मिला तो वहा खड़ी मिश्राइन की साड़ी के पल्लू से ही अपना मुँह पोछ लिया। मिश्रा एकटक गोलू को ही देख रहे थे , कुछ देर पहले ही गोलू ने उनसे चप्पल खायी थी और फटकार भी सुनी थी लेकिन गोलू के चेहरे पर शिकायत का एक भाव तक नहीं था। मिश्रा जी ने आदर्श फूफा की तरफ देखा और कहा,”सही कहा आपने आदर्श बाबू गोलू जे घर का सगा नहीं है ,
ना ही ओह्ह्ह की जे घर मा कोनो रिश्तेदारी है फिर भी बचपन से लेकर आज तक साये की तरह हमरे गुड्डू के साथ रहे है उह्ह्ह , हमरी किसी बात का कबो बुरा नाही माना और मार तो हफ्ता मा दुई-चार बार खा ही लेते है हमसे पर कबो शिकायत ना की , जे घर और जे घर मा रहने वाले लोगो पर जान छिड़कता है जे गोलू अब आप ही बताईये ऐसे लड़के को हम जे घर मा आने से कैसे रोक दे ?”
“हम्म्म बात तो सही है आपकी पर कुछ भी कहो मुसीबत की जड़ भी जे गोलुआ ही है”,आदर्श फूफा ने मुँह बनाकर कहा आखिर उन्हें बीती बातें जो याद आ गयी थी
मिश्रा जी ने सुना तो मुस्कुराये और कहा,”कुछ दिन की बात है फिर बाप बन जायेंगे और जब जिम्मेदारी आएँगी ना तो सारी रंगबाजी निकल जाही है,,,,,,,,,,,!!”
“जैसे आपकी और हमारी निकल गयी”,आदर्श फूफा ने कहा तो मिश्रा जी गंभीर हो गए और फिर एकदम से हंस पड़े।
गोलू अंदर चला आया तभी उसके कानो में शगुन की आवाज पड़ी जो कि भुआजी से बात कर रही थी “क्या भुआजी ! अभी तो सब ठीक हुआ है और आप अभी जाने की बात कर रही है , कुछ दिन और रुक जाईये ना”
“हाँ जीजी ! शगुन सही कह रही है ,, अम्मा के दिन तो टेंशन मा ही गुजर गए अब थोड़ा आराम मिला तो आप जाने की बातें कर रही है”,मिश्राइन ने कहा
गोलू भी घूमते घामते उनकी तरफ चला आया और जब पता चला भुआ अपने ससुराल वापस जा रही है तो उसने कहा,”का भुआ ! तुमहू चली जाही हो तो हमार मन कइसन लगे है , हम तो कहते है एक आध महीना और रुक जाओ”
“अरे गोलू रुक जाते पर का करे तुम्हाये फूफा ना माने है रुकने के लिए,,,,,,,,हमके जाए का पड़ी बबुआ”,भुआ जी ने कहा
“अरे फूफा की ऐसी की,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने इतना ही कहा कि देखा मिश्राइन , भुआ , शगुन और पास खड़ी वेदी उसे ही घूर रही है तो उसने तुरंत अपनी जबान सम्हाली और कहा,”हमरा मतलब फूफा की ऐसी फील्डिंग सेट करेंगे कि उह्ह खुद आपको रुकने के लिए कहेंगे”
“अरे नाही गोलू ! दुइ हफ्ता हुई गवा यही है , बाद मा फिर आएंगे ना,,,,,,,वेदी बिटिया के ब्याह मा तब पूरा एक महीना रुकेंगे , का वेदिया अमनवा पसंद रहल तोह का ?”,भुआ जी ने वेदी को देखकर शरारत से कहा तो वेदी शरमाकर शगुन के पीछे जा छुपी
मिश्राइन ने सुना तो मुस्कुराई और कहा.”अरे क्यों नहीं जीजी , बस थोड़े दिन निकल जाये ओह्ह के बाद शगुन के घरवालों को यहाँ बुलाएँगे और बात पक्की कर देंगे,,,,,,,,,और वेदी के साथ साथ अब तो हमाये लवली की शादी भी धूम धाम से करेंगे”
“ल्यो जे तो तुमहू हमाये मन की बात कह दी भाभी , हम जे सब की इकलौती भुआ है हमहू तो खूब डांस करि है जे सब का बियाह मा,,,,,,,,,उह्ह्ह गाना है न “हाय फेंक दे न लोढ़ा , गुस्सा कम कर थोड़ा , चूड़ी फुट जाही , रंग छूट जाही , रे मन रूठ जाही”,कहते कहते भुआ ने गाना शुरू किया और साथ ही नाचने भी लगी ये देखकर गोलू भला कहा पीछे रहने वाला था उसने भी आगे आकर भुआ के साथ कमर मटकाते हुए कहा,”तोहरा राजा जी के दिलवा टूट टूट जाहि”
मिश्राइन ने देखा तो अपना सर पीट लिया वे गोलू से कुछ कहती इस से पहले आदर्श फूफा वहा आ धमके और गोलू की गुद्दी पकड़कर उसे पीछे करके कहा,”ए राजाजी ! हम जोड़ दे तुम्हरा दिल”
“अरे फूफा आप ! हम तो बस भुआ को कम्पनी दे रहे थे”,गोलू ने खिंसियाते हुए कहा
“इनको पिछले 30 साल से कम्पनी हम दे रहे है आगे भी दे देंगे तुमहू कही और अपनी ब्रांच खोलो,,,,,,और तुम राजकुमारी , का लाज शर्म का जीना पे रख दी हो , जे थुलथुल पेट लेकर का जे बागड़बिल्ले के साथ कमर लचका रही हो ?”,आदर्श फूफा ने पहले गोलू को फटकारा और साथ ही भुआ को भी
“हम आपको का बागड़बिल्ला दिखते है ?”,गोलू ने सीना तानकर पूछा तो फूफा ने धीरे से एक मुक्का उसके सीने पर मारा और साइड करके कहा,”अरे तुम तो हमको कैरेक्टर ढीला दिखते हो , हमरी राजकुमारी से दूर रहो समझे”
“अरे तो हम कोनसा इनकी गोद मा बैठकर मक्खन खा रहे है,,,,,,,,ए भुआ समझाय ल्यो अपने जे दानव जैसे पति को,,,,,हमाये मुँह न लगे,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
शगुन और वेदी तो पहले ही वहा से चली गयी और मिश्राइन ने भी वहा से जाना बेहतर समझा और चली गयी
“अरे गोलू इनकी तो मजाक करने की आदत है काहे दिल पर लेते हो”,भुआ ने प्यार से कहा
“अरे भुआ हमको जे चार गाली भी दे तो सुन लेंगे पर कोई तुम्हरे बारे में कुछो कहे ना तो हमसे बर्दास्त नहीं ना हो पाता है”,गोलू ने कहा
“है ! सच्ची गोलू”,भुआ ने प्यार से गोलू की तरफ देखकर पूछा
“सच्ची , तुम्हरे पुष्प हिना वाले बालो की कसम”,गोलू ने भी उतने ही प्यार से कहा
“ए बंद करो तुम दोनों ये नाटक और राजकुमारी अपना अटेची उठाओ और चलो हमरे साथ”,फूफा ने थोड़ा गुस्से से कहा
“का कहे कमलिया के पिताजी ?”,भुआ ने खा जाने वाली नजरो से फूफा को घूरकर कहा तो फूफा का गुस्सा गायब हो गया और उन्होंने मिमियाकर कहा,”हम कह रहे है कि हमे बताओ अटैची कहा है हम ले आते है फिर घर भी तो जाना है”
“हुआ रखी है अंदर कमरा मा”,भुआ ने कहा और अपनी साड़ी का पल्लू लहराते हुए वहा से चली गयी
गोलू ने फूफा को देखा और कहा,”आदमी साला कितना भी शेर हो मेहरारू के सामने बिल्ला बन ही जाता है,,,,,,,हुंह बागड़बिल्ला”
फूफा गोलू को मारते इस से पहले गोलू वहा से भाग गया और आँगन में चला आया जहा मिश्रा जी , गुड्डू , लवली और केशव पंडित मौजूद थे।
पंडित जी नहा धोकर साफ कपडे पहन चुके थे। गोलू चुपचाप आकर गुड्डू के पास खड़ा हो गया और इशारे इशारे में पूछा कि यहाँ क्या हो रहा है ? गुड्डू जिसे खुद कुछ नहीं पता था उसने मुँह बनाकर ना में गर्दन हिला दी और चुपचाप मिश्रा जी की तरफ देखने लगा।
मिश्रा जी पंडित जी से लवली के आने वाले समय के बारे में जानना चाहते थे। उसके भविष्य के बारे में , काम काज के बारे में , उसकी शादी के बारे में और इसलिए उन्होंने केशव पंडित से लवली की कुंडली देखने को कहा लेकिन लवली की कुंडली तो कभी बनी ही नहीं थी तो पंडित जी देखते क्या मिश्रा जी उदास हो गए ये देखकर पंडित जी ने कहा,”कुंडली नहीं है तो का हुआ हम लवली का हाथ देखकर बता देते है कि ओह्ह की कुंडली मा का लिखा है ?”
मिश्रा जी मुस्कुराये और लवली को अपने पास बुलाया। हालाँकि लवली इन सब में विश्वास नहीं करता था लेकिन मिश्रा जी का दिल रखने के लिए वह उनके बगल में आकर बैठ गया। उसने अपना हाथ आगे कर दिया। पंडित जी ने बड़े ध्यान से लवली का हाथ देखा और फिर कागज पर आडी टेढ़ी लकीरे खींचने लगे।
कुछ ही दूर खड़े गोलू और गुड्डू ने देखा और फिर जैसे ही एक दूसरे को देखा दोनों अपने मुँह पर हाथ रखकर दबी हंसी हसने लगे।
“का लगता है गुड्डू भैया जे केशव पंडित लवली भैया की कुंडली बना पाएंगे ?”,गोलू ने दबी आवाज में कहा
“अरे का ख़ाक बनाएंगे ? साला हमरी कुंडली बनायीं तब कहे रहे हमायी कुंडली मा राजयोग लिखा है,,,,,,,,,हिया साला राजभोग खाने के लाले पड़े है”,गुड्डू ने मुँह बिचकाकर कहा
“अरे गुड्डू भैया इनको अपना भविष्य नाही पता हमरा का बताएँगे,,,,देखे नाही कुछ देर पहिले यादववा की भैंसिया इनके पीछे थी,,,,,,,,!!”,गोलू ने भी मुँह बिचकाकर कहा
“न जाने कौनसा जादू किये रहय जे पिताजी पर कि उह्ह जे कि हर बात मान लेते है”,गुड्डू ने कहा
“अरे जादू नाही काला जादू कहो गुड्डू भैया”,गोलू ने कहा
“अच्छा ! तो फिर तुम्हरे हमरे ऊपर काहे नाही चला केशव पंडित का जादू ?”,गुड्डू ने मासूमियत से कहा
“अरे आपके ऊपर तो शगुन भाभी का जादू पहिले ही चल चुका है मिश्रा जी और हमरे ऊपर पिंकिया का,,,,,,,उह्ह के सामने जे केशव पंडित का चीज है”,गोलू ने कहा तो गुड्डू हंसा और उसे देखकर गोलू भी हंसा और ये देखकर मिश्रा जी ने इधर उधर देखा और वहा पड़ी अपनी दूसरी चप्पल गुड्डू गोलू की तरफ फेंककर चिल्लाये,”का औरतन के जइसन दाँत फाड़ रहे हो ? कोनो लाज शर्म नाही है,,,,,,,,,कुत्ते की दुम हमहू पाइप डालकर सीधी कर सकत है पर तुम दोनों को नाही,,,,,,,,,,भाग जाओ हिया से”
गुड्डू और गोलू ने जैसे ही सुना ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सर से सींग
( क्या वेदी की शादी के साथ आने वाला है कहानी में कोई नया ट्विस्ट ? लवली की कुंडली बनाते हुए क्यों हुए केशव पंडित गंभीर ? क्या इस सीजन में मिश्रा जी की चप्पल सुधार पायेगी गुड्डू और गोलू को या यू ही चलती रहेगी उनकी रंगबाजी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


मिश्रा जी केशव पंडित को समझा बुझाकर अंदर ले आये। जगह जगह से फटा कुर्ता , धोती की जगह धारियो वाला कच्छा , मुँह पूरा लाल पीला धूल मिट्टी से भरा हुआ और उस पर उनके बिखरे बाल , एक बारगी तो कोई अनजान आदमी भी केशव पंडित को देख ले तो उसे भी उन पर दया आ जाये।
“मिश्राइन ! जरा पंडित जी के लिए साफ कपडे तो ले आओ,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने केशव पंडित के साथ अंदर आते हुए कहा। बेचारे केशव पंडित मारे शर्म के खुद में ही सिमटे जा रहे थे।
मिश्रा जी केशव पंडित को समझा बुझाकर अंदर ले आये। जगह जगह से फटा कुर्ता , धोती की जगह धारियो वाला कच्छा , मुँह पूरा लाल पीला धूल मिट्टी से भरा हुआ और उस पर उनके बिखरे बाल , एक बारगी तो कोई अनजान आदमी भी केशव पंडित को देख ले तो उसे भी उन पर दया आ जाये।
“मिश्राइन ! जरा पंडित जी के लिए साफ कपडे तो ले आओ,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने केशव पंडित के साथ अंदर आते हुए कहा। बेचारे केशव पंडित मारे शर्म के खुद में ही सिमटे जा रहे थे।
मिश्रा जी केशव पंडित को समझा बुझाकर अंदर ले आये। जगह जगह से फटा कुर्ता , धोती की जगह धारियो वाला कच्छा , मुँह पूरा लाल पीला धूल मिट्टी से भरा हुआ और उस पर उनके बिखरे बाल , एक बारगी तो कोई अनजान आदमी भी केशव पंडित को देख ले तो उसे भी उन पर दया आ जाये।
“मिश्राइन ! जरा पंडित जी के लिए साफ कपडे तो ले आओ,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने केशव पंडित के साथ अंदर आते हुए कहा। बेचारे केशव पंडित मारे शर्म के खुद में ही सिमटे जा रहे थे।
मिश्रा जी केशव पंडित को समझा बुझाकर अंदर ले आये। जगह जगह से फटा कुर्ता , धोती की जगह धारियो वाला कच्छा , मुँह पूरा लाल पीला धूल मिट्टी से भरा हुआ और उस पर उनके बिखरे बाल , एक बारगी तो कोई अनजान आदमी भी केशव पंडित को देख ले तो उसे भी उन पर दया आ जाये।
“मिश्राइन ! जरा पंडित जी के लिए साफ कपडे तो ले आओ,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने केशव पंडित के साथ अंदर आते हुए कहा। बेचारे केशव पंडित मारे शर्म के खुद में ही सिमटे जा रहे थे।