Manmarjiyan Season 4 – 19
Manmarjiyan Season 4 – 19

मंगल फूफा और गोलू से परेशान होकर गुड्डू फूट फूट कर रो पड़ा वही गोलू मंगल फूफा के साथ दुकान से बाहर आये और कहा,”फूफा ! हमको एक ठो बात बताओ , लाज , शर्म , हया जे से तुम्हरी कोनो दुश्मनी है का ? नहीं मतलब तुमको जब पता है फुलवारी शादीशुदा है तो काहे नहा धो के ओह्ह्ह के पीछे पड़े हो बे ? अरे तुमहू कहो हम कानपूर मा बढ़िया से बढ़िया औरत तुम्हरे लिए ढूंढ के ले आएंगे पर तुम्हरे आगे हाथ जोड़ते है जे फुलवारी का चक्कर छोड़ दयो”
“औरत काहे ढूंढोगे बे हमाये लिए , लड़की काहे नहीं ?”,मंगल फूफा ने चिढ़कर कहा
“लड़के तो तुमहू भी नाही लगते कोनो एंगल से,,,,,,खोपड़ी पे चार बाल बचे है उह्ह उड़े ओह्ह से पहिले कोनो अच्छी लड़की देख के सादी कर लेओ वरना यादव तो है ही तुम्हाये बाल नोचने के लिए,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
“ए यार गोलू ! हमहू ना उह्ह्ह साले यादववा जो एक ठो बार तबियत से मारना चाहते है,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने गोलू से चिपककर मायूसीभरे स्वर में कहा
“यार फूफा ! मारना तो उसको हम भी चाहते है,,,,,,,,उसकी वजह से पिताजी बहुते परेशान रहते है एक बार तो उसकी बत्ती बनाना चाहते है यार हमहू”,गोलू ने भी मंगल फूफा के कंधो पर बाँह रखकर कहा
कुछ देर पहले यही गोलू मंगल फूफा के खून का प्यासा था और अब उनसे चिपककर ऐसे बात कर रहा था जैसे जन्मो जन्मो के बिछड़े हुए साथी हो दोनों
“हाँ तो मार दयो साले को,,,,,,,,,ओह्ह्ह के बाद फुलवारी हमायी”,मंगल फूफा ने बहुत ही आराम से कहा
गोलू ने सुना तो मंगल फूफा को देखा और फिर पैर से जैसे ही चप्पल निकाली मंगल फूफा गोलू को धक्का देकर जो भागे है गोलू की नजरे उन्हें देख ही नहीं पायी। गोलू ने चप्पल नीचे फेंका और कहा,”कुत्ते की दुम सीधी हो सकती है लेकिन तुम्हायी नहीं,,,,,,,,,तुम्हरा अमंगल तो साला यादववा के हाथ ही लिखा है , मरो तुम”
गोलू बड़बड़ा ही रहा था कि तभी उसका फोन बजा। गोलू ने फोन जेब से निकाला और स्क्रीन पर नंबर देखे बिना ही उठाकर कान से लगाकर कहा,”कौन बोल रहा है बे ?”
“हम बोल रहे है,,,,,,,,,,,तुम्हाये बाप,,,,,,,,,,गज्जू गुप्ता , कहा मर रहे हो ?”,दूसरी तरफ से गुप्ता जी की आवाज उभरी तो बेचारे गोलू का कॉन्फिडेंस अगले ही पल मिटटी में मिल गया और उसने मिमियाकर कहा,”पि पि पिताजी ! आपने हमको फोन किया,,,,,,,,,,,!!”
“नाही ! हमने तुमको खून से चिट्टी लिखकर भेजी है पढ़कर जवाब दयो”,गुप्ता जी ने कहा
“खून की चिट्टी ?”,गोलू ने हैरानी से कहा
“अबे भूतनी के ! फोन पे बात कर रहे है तो फोन ही नहीं न किया होगा हमने,,,,,,,,,,हो कहा जे बताओ ?”,गुप्ता जी ने गोलू को झिड़ककर कहा
“दुकान पर है पिताजी,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
“अपना मनहूस शरीर उठाओ और तुरंत प्रभाव से घर पहुंचो समझे”,कहकर गुप्ता जी ने फोन काट दिया
गोलू ने सुना तो फोन कान से हटाया और रोआँसा होकर कहा,”साला अभी थोड़ी देर पहिले उनसे मार खाकर आये थे अब हमने का कर दिया,,,,,,,,,!!!”
गोलू सोच ही रहा था कि उसका फोन फिर बजा इस बार गोलू ने स्क्रीन देखी और पिताजी नाम देखकर फोन उठाकर कहा,”जी पिताजी”
“और दस मिनिट के अंदर नहीं आये ना तो कही टेंट लगाने लायक नहीं छोड़ेंगे तुमको , फिर तुम्हरी तेहरवी का टेंट लगाएंगे हम और कॉन्ट्रेक्ट देंगे तुम्हरे गुड्डू भैया को , का समझे ?”,गुप्ता जी ने कड़क स्वर में कहा
“समझ गए पिताजी 9 मिनिट मा आपके सामने होंगे”,गोलू ने मरे हुए स्वर में कहा क्योकि उस बेचारे को तो ये भी नहीं पता था अब उस से क्या गलती हुई है ?
गुप्ता जी के फ़ोन करने पर गोलू गिरते पड़ते भागा अपने घर के लिए , रास्ते में मंगल फूफा दिखे तो उनको भी ऑटो में खींच लिया और कहा,”साला हर बार तुम्हरी वजह से हमहू अकेले मार क्यों खाये ?”
“अरे लेकिन हमको कहा लेकर जा रहे हो ?”,ऑटो में औंधे मुँह गिरे मंगल फूफा ने कहा
“तुम्हरे ससुराल,,,,,,,,,चुपचाप चलो , जे सारा रायता तुम्हरी वजह से फैला है अब तुम्ही समेटोगे समझे , का है कि तुम्हरे चक्कर में अब गज्जू गुप्ता से मार नाही खायेगा ये गोलू गुप्ता उर्फ़ पिंकेश गुप्ता”,गोलू ने कहा
मंगल फूफा भाग ना पाए इसलिए गोलू ने अपने दोनों पैर उनकी पीठ पर रख लिए और मंगल फूफा अपने हाथो पैरो को पटकते गोलू के साथ एक बार फिर पटकापुर की सैर करने निकल पड़े
गोलू जिस रिक्शा में बैठा था वो आकर रुका गुप्ता जी के घर के सामने , गोलू ने मंगल फूफा की पीठ से पैर हटाए , पहले खुद रिक्शा से उतरा बाद में फूफा को उतारा और जैसे ही जाने लगा रिक्शा वाले ने कहा,”अरे भैया पैसे ?”
“खाते में लिख लो बे”,गोलू ने पलटकर ऐसे कहा जैसे बेचारा कानपूर का कोई बहुत बड़ा गुंडा हो
“अरे भाई हम तुमको जानते नहीं किस खाते की बात कर रहे हो ?”,रिक्शा वाले ने कहा
गोलू जैसे ही कुछ कहने के लिए आगे बढ़ा मंगल फूफा ने हाथ आगे करके उसे रोका और वही हाथ अपने सीने पर रखकर पलकें झपकाकर इशारो इशारो में कहा मैं हूँ ना , मंगल फूफा आगे बढे और ऑटो पर बड़ी स्टाइल से हाथ रखकर कहा,”उसको नाही जानते “डाकू मंगल फूफा” को तो जानते ही होंगे”
“अब जे कौन है ? और हमको जानकर का करना है हमरा 20 रुपिया दो और हमको जाय दयो,,,,,,,,,!!”,ऑटोवाले ने मंगल फूफा को झिड़ककर कहा
“का डाकू मंगल को नाही जानते ? अरे डाकू मंगल,,,,,,,,,,,,,,!!”,फूफा ने जोश से भरकर कहा लेकिन बेचारा अपनी बात पूरी करता इस से पहले गोलू ने आकर उसे साइड किया और कहा,”तुम्हरा इंट्रो हम जे का बाद मा दे देंगे , और तुम जे पकड़ो 20 रुपिया और निकलो हिया से,,,,,,,,,,!!”
गोलू की बदतमीजी पर ऑटोवाला चिढ गया उसने पैसे लेकर जेब में रखे और ऑटो का पिछले टायर गोलू के पैर के ऊपर से निकाला और वहा से चला गया। गोलू दर्द के मारे अपना पैर पकड़कर एक टाँग पर कूदने लगा।
नीचे गिरे मंगल फूफा उठकर गोलू के पास आये और कहा,”अबे गोलू ! हमको हिया का लंगड़ी खेलने लाये थे ?”
“अबे दिख नाही रहा रिक्शा पैर पर चढ़ दिए रहा उह्ह हमाये,,,,,,,,,,,हमाये साथ अंदर चलो”,गोलू ने दर्द से बिलबिलाकर कहा
“हम काहे अंदर आये ?”,मंगल फूफा ने पूछा
“क्योकि पिताजी ने हमको बुलाया है और हमको अकेले नाही जाना”,गोलू ने कहा
“तो हमको का तुम स्टेपनी समझे हो जो साथ लेकर जा रहे हो,,,,,,,,,,हम नाही जा रहे देखा नाही कित्ती बेइज्जती करके निकाले रहे हमको घर से”,मंगल फूफा ने बिफरकर कहा
“हाँ हाँ घर से बाहिर तो जैसे लोग तुमको फूलो का हर पहिनाने के लिए ढूंढ रहे है , अबे चलो हमाये साथ वैसे भी जे सारी भसड़ तुम्हायी वजह से फैली है,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा
“हम नाही जायेंगे,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने कहा
“तुमको हमरे साथ जाना पडेगा फूफा”,गोलू ने भी जिद करके कहा
फूफा ने सुना तो वही आलथी पालथी मारकर घर के सामने वाले रास्ते पर बैठ गए और कहा,”ल्यो हम यही बैठ जायेंगे पर नहीं जायेंगे”
“ठीक है तो फिर हम भी यही बैठ जायेंगे , तुमको लिए बिना हम भी नहीं जायेंगे”,गोलू भी मंगल फूफा के ठीक सामने रास्ते पर बैठ गया और दोनों ऐसे कब तक बैठे रहने वाले थे ये तो भगवान ही जाने
बनारस , अस्सी घाट
प्रीति रोहन के साथ शाम की गंगा आरती देखने अस्सी घाट चली आयी। पहले से काफी कुछ बदल गया था बनारस में , पहले जहा गंगा आरती में लोग 7 बजे आना शुरू होते थे अब शाम 4 बजे से ही आकर सीढ़ियों पर अपने लिए जगह बनाना शुरू कर देते थे। प्रीति ने देखा आज भीड़ भी बहुत थी लेकिन साथ ही उसे अच्छा भी लग रहा था शादी के बाद पहली बार घाट पर आयी थी वो भी रोहन का हाथ थामकर , प्रीति ने पारस और सोनिया को भी मिलने घाट पर ही बुला लिया। गंगा आरती के बाद चारो “पिज़्ज़ेरिया” चले आये।
प्रीति ने सबके लिए पिज्जा और एप्पल पाइ आर्डर किया और बैठकर बाते करने लगे
“और बताईये पारस भैया कैसी चल रही है आपकी शादीशुदा जिंदगी ?”,प्रीति ने शरारत से पूछा
“वैसी ही जैसी तुम्हारी चल रही है , जितना तुम बेचारे रोहन को बोलने देती हो उतना ही हम बोल पाते है इनके सामने”,पारस ने कहा तो सोनिया ने धीरे से उसकी बांह पर मारा और कहा,”हमने कब मना किया ?”
रोहन और प्रीति ने देखा तो दोनों हंस पड़े और रोहन ने कहा,”अरे सोनिया जी ! आप और मैं बनारस से बाहर के है ना तो ये दोनों मिलकर है हमारी टाँग खींच रहे है , वैसे भी बनारस वालो से ज्यादा कौन ही बोल सकता है”
सोनिया ने सुना तो रोहन को हाई फाइव दिया। माहौल काफी हंसी ख़ुशी वाला था। पिज्जा आया और सभी खाते हुए बाते करने लगे
“अच्छा प्रीति ! शगुन कैसी है ? काफी टाइम हो गया बनारस भी नहीं आयी लास्ट टाइम तुम्हारी शादी में मिला था उस से,,,,,,,,,,!!!”,पारस ने कहा
“दी अच्छी है और पता है पारस भैया कल हम सब कानपूर जा रहे है दी से मिलने और साथ ही,,,,!!”,प्रीति ने बहुत ही रोमांचक तरीके से बात अधूरी छोड़ दी।
“और साथ ही क्या ?”,पारस ने पूछा उसके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये कि कही शगुन फिर से तो किसी परेशानी में नहीं
“और साथ ही अमन का रिश्ता लेकर गुड्डू जीजू की बहन वेदी के लिए”,प्रीति ने अपनी अधूरी बात पूरी की तो पारस की हैरानी का ठिकाना नहीं रहा उसने खुश होकर कहा,”क्या ? अमन का रिश्ता वेदी के लिए,,,,,,,,,वैसे तुम्हारी शादी में उन्हें साथ देखकर मुझे लगा भी कि कुछ तो चल रहा है दोनों के बीच,,,,,,,,!!!”
“ये तो बहुत ही ख़ुशी की बात है प्रीति , वैसे मैं मिली हु वेदी से अच्छी लड़की है,,,,,,,और अमन के साथ उसकी जोड़ी बहुत सुन्दर लगेगी”,सोनिया ने मुस्कुरा कर कहा
“हाँ भाभी ! इसीलिए तो कल सब जा रहे है कानपूर , कुछ दिन पहले गुड्डू जीजू की दादी माँ गुजर गयी ही तब अंकल आंटी आये थे यहाँ , उन्होंने तभी पापा और चाचा से कहा था ,,,,,, मैं तो बहुत ख़ुश हूँ वेदी मेरी भाभी बनाकर हमारे घर आ जाएगी”,प्रीति ने कहा
“शगुन से मेरा नमस्ते कहना,,,,,,,!!”,पारस ने कहा
“एक काम कीजिये आप और भाभी भी चलिए साथ में,,,,,,फिर खुद ही मिल के कह देना नमस्ते दी से”,प्रीति ने कहा
“अरे नहीं प्रीति ! कल से कॉलेज में एग्जाम शुरू हो जायेंगे तो ड्यूटी बढ़ जाएगी,,,,शगुन और गुड्डू जब बनारस आएंगे तब उनसे मिलने आऊंगा”,पारस ने कहा
”शगुन दी और जीजू इस बार बनारस अकेले नहीं आएंगे बल्कि नन्हे मेहमान के साथ आएंगे”,प्रीति ने कहा तो पारस मुस्कुरा उठा और कहा,”शगुन अपनी जिंदगी में खुश है जानकर लगा , वैसे भी ये खुशिया बहुत तकलीफो के बाद आयी है उसकी जिंदगी में,,,,,,,,,,,!!”
“हाँ पारस भैया ! महादेव से प्रार्थना है कि अब बस शगुन दी और गुड्डू जीजू हमेशा साथ रहे और खुश रहे”,प्रीति ने कहा
“जिसके पास दुआ करने वाली इतनी प्यारी बहन और इतना अच्छा दोस्त हो उसकी जिंदगी में भला खुशिया कैसे नहीं होगी , पारस भैया आपकी तरफ से मैं शगुन दी को नमस्ते कह दूंगा”,रोहन ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा
“थैंक्यू रोहन , और हाँ हमारी प्रीति का भी ख्याल रखना ये बस थोड़ी नटखट है पर दिल की बहुत अच्छी है”,पारस ने प्रीति का सर सहलाकर कहा
“इनका ख्याल रखने के लिए ही तो 100 लोगो की बारात लेकर आया था बनारस,,,,,,,,,,!!”,रोहन ने कहा तो सब हंस पड़े और कुछ देर वहा रुकने के बाद सभी घर चले गए।
प्रीति रोहन घर आये तो देखा अमन आ चुका था। अमन सबसे मिला और जब चाचा ने उसे बताया कि कल सब कानपूर जा रहे है उसके लिए वेदी का हाथ मांगने तो अमन शरमा कर वहा से चला गया। अमन छत पर चला आया और वेदी को फोन लगा दिया। एक दो रिंग जाने के बाद वेदी ने फोन उठाया और कहा
– हेलो
“खबर तो मिल ही गयी होगी तुम्हे ?”
– जी हाँ ! तो फाइनली आप हमारा हाथ माँगने घर आ रहे है , चलो देर आये दुरुस्त आये
“क्या बात है ? तुम्हे बड़ी जल्दी है शादी की
– अरे हमने शादी का कब कहा हमने तो हाथ मांगने की बात की
“हाथ नहीं हमे तो पूरी लड़की चाहिए , वैसे हमारे पास तुम्हारे लिए कुछ है
– क्या ?
“है कुछ बहुत खास”
– बताओ न अमन , क्या है ?
“कल खुद ही देख लेना”
– नहीं हमे अभी बताओ
“अरे तुम तो बच्चो की तरह जिद करने लगी”
– बताओ ना
“नहीं ! कल हम खुद तुमको अपने हाथो से पहनाएंगे तब देखना और अब तुम जिद नहीं करोगी
– हम्म्म , ठीक है
“कैसा लग रहा है ?”
– सच बताये अमन तो हमे तो ऐसे अजीब सी बेचैनी हो रही है और ख़ुशी हो रही है। हम पहले भी तुम से मिल चुके है पर अभी लग रहा है जैसे कल पहली बार मिलेंगे तुमसे,,,,,,,,हमने सोचा नहीं था ये सब इतनी जल्दी बिना किसी परेशानी के हो जायेगा
“हाँ वेदी यकीन तो हमे भी नहीं हो रहा पर शुक्र है कि सब घरवाले बिना मनाये ही मान गए , हम तो बस कल सुबह का इंतजार कर रहे है जब यहाँ से कानपूर के लिए निकलेंगे”
– हम इन्तजार करेंगे
“अच्छा ! अभी हम नीचे जाए प्रीति दीदी और जीजू आये हुए है”
– तो क्या कल प्रीति भी आएगी ?
“हाँ प्रीति दी और रोहन जीजू भी आएंगे लेकिन तुम ये बात शगुन दी को मत बताना , वरना प्रीति दी मुझे मार डालेगी”
– हाहाहा नहीं बताउंगी , जाओ
“बाय”,कहकर अमन ने फोन काट दिया और वहा से चला गया
दिनभर दुकान में व्यस्त रहा गुड्डू शाम में थका हारा जल्दी घर चला आया। शगुन उस वक्त अपने कमरे में थी और बिस्तर पर बैठी गुड्डू की शर्ट का बटन लगा रही थी। गुड्डू उतरा हुआ चेहरा लेकर कमरे में आया।
“आप आ गए गुड्डू जी , वैसे अच्छा हुआ आप जल्दी आ गए मुझे आपको कुछ बताना था,,,,,,,,,कल पापा और चाचा अमन का रिश्ता लेकर घर आ रहे है”,गुड्डू को देखकर शगुन ने शर्ट साइड में रखते हुए कहा
गुड्डू जो की गोलू और मंगल फूफा की वजह से आज बहुत परेशान हुआ था सीधा आकर शगुन की गोद में मुँह छुपाकर लेट गया और अपनी बाँहे उसकी कमर से लपेट ली ये देखकर शगुन ने कहा,”गुड्डू जी ! क्या हुआ आपको ? किसी ने कुछ कहा आपसे ?”
“कोई हमसे का कहेगा शगुन हमने खुद ही अपनी जिंदगी मा गोलू नाम की चरस बो रखी है”,शगुन की गोद में मुँह छुपाये गुड्डू ने रोआँसा होकर कहा
“गुड्डू जी ! क्या गोलू जी ने फिर कोई गड़बड़ की ?”,शगुन ने पूछा
गुड्डू ने सुना तो उठकर बैठा और कहा,”गड़बड़ ? शगुन ये पूछो उसने क्या नहीं किया ? तुमने देखा ना बूढ़ा के दिनों मा कितना बवाल हुआ ओह्ह्ह के बाद हमको लगा अब उह्ह्ह कुछो गलती नहीं करेगा लेकिन एक बार को कुत्ते की दुम सीधी हो सकती है लेकिन जे साला गोलू नहीं सुधर सकता,,,,,,,,,,,,,,इत्ती मुश्किल से सोनू भैया से हाथ पैर जोड़ के एक आर्डर लिए थे उसको भी बर्बाद करने की पूरी पूरी कोशिश रही है मंगल फूफा की,,,,,,,,,,,,!!!”
“मंगल फूफा बीच में कहा से आये ?”,शगुन ने पूछा
“अरे उह्ह्ह है न गोलू , हर जगह सरपंच बना घूमता है गुप्ता जी ने मंगल को घर से निकाला तो उह्ह्ह मंगल को हमरे पास ले आया कि जे का काम पर रख ल्यो बस फिर का था लोग पैर पर कुल्हाड़ी मारते है और हमने हमने कुल्हाड़ी पर अपने दोनों पैर दे मारे,,,,,,,,,,,ओह्ह्ह के चक्कर मा आज पार्टी से जूते खाते खाते बचे है हम,,,,,,,,,सच बताय रहे है शगुन इनके साथ रह के हम सच मा पगला जायेंगे,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने रोआँसा होकर कहा और एक बार फिर अपना सर शगुन की गोद में टिका लिया
शगुन ने सुना तो उसे बहुत बुरा लगा साथ ही गुड्डू को परेशान देखकर भी उसे दुःख हुआ और गोलू पर थोड़ा गुस्सा भी , शगुन धीरे धीरे गुड्डू का सर सहलाने लगी और कहा,”गुड्डू जी ! आप चिंता मत कीजिये कल शाम गोलू जी घर आएंगे तो मैं उनसे बात करुँगी और समझाउंगी उन्हें,,,,,,,,,,आप परेशान मत होईये और जाकर मुँह हाथ धो लीजिये , लवली भैया और पिताजी भी आते ही होंगे”
गुड्डू ने सुना तो अच्छे बच्चे की तरह उठा और बाथरूम की तरफ बढ़ गया। शगुन उठी और गुड्डू का शर्ट समेटकर कबर्ड में रखते हुए बड़बड़ायी ,”ये गोलू जी नहीं सुधरने वाले,,,,,,,,!!!
( क्या गुड्डू बदल पायेगा गोलू और मंगल फूफा को या बन जायेगा उन जैसा ? गोलू को घर बुलाने के पीछे क्या है गुप्ता जी का इरादा मदद या मार ? जिस गोलू को गुड्डू , गुप्ता जी और मिश्रा जी नहीं सुधार पाए क्या उसे सुधार पायेगी शगुन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “,मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19
Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19Manmarjiyan Season 4 – 19
- Continue With Manmarjiyan Season 4 – 2001
- Visit https://sanjanakirodiwal.com
- Follow Me On http://instagram.com/sanjanakirodiwal/
संजना किरोड़ीवाल

