Main Teri Heer Season 5 – 42
Main Teri Heer Season 5 – 42

प्रताप ने राजन को फैक्ट्री जाने को कहा और राजन पूजा से मिलने जा पंहुचा। पूजा ने राजन को अपने चाचा के घर से कुछ दूर पहले वाले चौराहे की लोकेशन भेजी ताकि उसे राजन के साथ जाते कोई देखे नहीं। राजन पूजा की बताई जगह चला आया। उसने पूजा के बगल में गाड़ी रोकी और दरवाजा खोल दिया। पूजा अंदर आ बैठी और मुस्कुराते हुए कहा,”हमे लगा नहीं था आप आएंगे”
“ऐसा क्यों ?”,राजन ने गाडी आगे बढ़ाते हुए कहा
“आप इतने शर्मीले और चुप रहने वाले लड़के है लगा नहीं था हमारे एक बार बुलाने से चले आएंगे”,पूजा ने कहा
राजन ने गाड़ी चलाते हुए एक नजर पूजा को देखा और मुस्कुराकर सामने देखते हुए कहा,”फिर भी हम चले आये क्योकि हमे आपस मिलना था , आपको थोड़ा और जानना था”
पूजा ने सुना तो मुस्कुरा उठी , राजन के साथ बैठकर इस वक्त उसके दिल में तितलियाँ सी उड़ रही थी , वह चाहकर भी अपने चेहरे पर आयी ख़ुशी को छुपा नहीं पा रही थी। उसके गालो पर गुलाबी रंगत थी और दिल सामान्य से तेज धड़क रहा था।
पूजा को खामोश देखकर राजन ने कहा,”ये रंग आप पर अच्छा लग रहा है,,,,,हमारा पसंदीदा है”
“थैंक्यू,,,,,,,,और क्या क्या पसंद है आपको ?”,पूजा ने पूछा
“बनारस पसंद है , यहाँ के घाट गलिया , लोग पसंद है ! घूमना फिरना पसंद है , अच्छा खाना पसंद है और फिल्मे देखना बहुत पसंद है और आपको ?”,राजन ने गाड़ी चलाते हुए पूछा
“हमे ? हमे घूमना फिरना , अच्छा अच्छा खाना बनाना , डिजायनर कपडे पहनना , शॉपिंग करना और गाने सुनना”,पूजा ने कहा
“हमारी कुछ पसंद मिलती जुलती है पूजा जी,,,,,,,,,!!”,राजन ने कहा
“आप मुझे सिर्फ पूजा कहकर बुलाइये न , ये पूजा जी थोड़ा पराया सा लगता है”,पूजा ने प्यार से कहा
पूजा की इस बात पर राजन उसे देखे बिना ना रह सका और जब देखा तो उसका दिल धड़क उठा क्योकि पूजा उसे ही देख रही थी। राजन ने पूजा से नजरे हटाई और गाडी को साइड लगाकर कहा,”घाट जाने के लिए गलियों से होकर जाना पड़ेगा और बनारस की गलियां इतनी संकरी है कि ये गाडी उनमे नहीं जाएगी,,,,,,,,!!”
“तो क्या हुआ ? पैदल चलते है वैसे भी आपका साथ होगा तो सब अच्छा ही लगेगा”,पूजा ने कहा और गाड़ी का दरवाजा खोलकर नीचे उतर गयी। पूजा को अपने साथ इतना सहज पाकर राजन की झिझक भी अब दूर हो गयी वह गाड़ी से उतरा और पूजा के साथ गली की तरफ बढ़ गया। दोनो बातें करते हुए गली में साथ साथ चलने लगे और 20 मिनट बाद घाट पर पहुंचे। सुबह सुबह घाट का नजारा देखकर पूजा की आँखे ख़ुशी से चमक उठी। उसने ख़ुशी से चहकते हुए एक ताली मारी और हाथो को अपने गालों से लगा लिया।
पूजा राजन की तरफ पलटी और कहा,”सच में बनारस कितना खूबसूरत है,,,,,,,!!”
“अभी तो पूरा बनारस देखना बाकी है”,राजन ने कहा
“तो दिखाओ,,,,,!!”,पूजा ने चमकती आँखों के साथ कहा
राजन ने अपना हाथ पूजा के सामने किया और कहा,”चले ?”
पूजा ने एक नजर राजन को देखा और फिर मुस्कुराते हुए उसका हाथ थामकर आगे बढ़ गयी। घाट दर घाट होते हुए राजन पूजा को घाट घुमाने लगा। पूजा के साथ घूमते , बात करते हुए राजन को महसूस हुआ कि पुजा बहुत ही समझदार और खुश मिजाज लड़की है। शादी के लिए वह राजन को पसंद तो थी ही अब और ज्यादा पसंद आने लगी
मुन्ना घर से बाहर आया और आकर अपनी बाइक पर आ बैठा , उसे किसी जरुरी काम से पार्टी हॉउस जाना था। मुन्ना ने बाइक स्टार्ट की और घर से निकल गया। मुन्ना अभी कुछ ही दूर पहुंचा होगा कि उसकी नजर सड़को पर लगे उसके पोस्टर पर गयी जिन पर मुन्ना की तस्वीर के साथ बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था “लाल फूल नीला फूल , मुन्ना भैया ब्यूटीफुल”
ये देखकर मुन्ना को बहुत अजीब लगा और उसने रमेश को फोन लगाया। एक दो रिंग के बाद रमेश ने फोन उठाया और कहा,”जी भैया कहिये”
“रमेश जे शहर मा हमरे नाम के पोस्टर तुमने लगवाये है ?”,मुन्ना ने पूछा
“हाँ भैया ! अब इलेक्शन में खड़े हुए हो तो प्रचार प्रसार तो करना होता है न”,रमेश ने खुश होकर कहा
“वो सब ठीक है रमेश लेकिन हमारी तस्वीरों के साथ तुमने इतनी अजीब बाते क्यों लिखवाई है ? तुम जानते हो न हमे ये सब बिल्कुल पसंद नहीं है,,,,,,,,,!!”,मुन्ना ने थोड़ा रूखे स्वर में कहा
“अरे लेकीन मुन्ना भैया,,,,,,,,,!!”,रमेश ने कहा लेकिन मुन्ना ने उसकी बात बीच में काटकर कहा,”आज शाम से पहले ये सब पोस्टर शहर से हट जाने चाहिए,,,,,,,,,,,,इस इलेक्शन में जीतने के लिए हमे प्रचार प्रसार की जरूरत नहीं है”
“लेकिन,,,,,,,,!!”,रमेश ने कहना चाहा
“रमेश ! तुम भी जानते हो हमारे काम करने का तरिका अलग है , आज शाम तक ये सब हट जाना चाहिए”,मुन्ना ने कहा और फोन काट दिया।
मुन्ना ने एक नजर पोस्टर पर डाली और वहा से आगे बढ़ गया
कुछ देर बाद मुन्ना पार्टी हॉउस पहुंचा , उसने पार्टी हॉउस से अस्सी घाट के लिए परमिशन ली और वहा से निकल गया। पार्टी हॉउस से लौटते हुए मुन्ना को भूख का अहसास हुआ तो वह एक जगह रुका अपनी बाइक साइड लगाई और दुकानवाले से एक चाय और पराठा देने को कहा। मुन्ना आकर वहा पड़ी कुर्सी पर बैठ गया।
3 हफ्ते बाद मुन्ना की शादी थी और उसके पास बाहर घूमने और अपने इलेक्शन के लिए बस 2 हफ्ते का वक्त था। शादी , इलेक्शन , घर की जिम्मदारिया और युवा नेता बनने के बाद बनारस में आने वाले बदलाव के बारे में सोचते हुए मुन्ना अपनी चाय और पराठे का इंतजार कर रहा था कि तभी वहा भूषण की जीप आकर रुकी।
भूषण अपने लड़को के साथ जीप से नीचे उतरा और लड़को से कहा,”जल्दी जल्दी पोस्टर चिपकाओ बे , अभी तो पूरा शहर नापना है”
मुन्ना ने भूषण को वहा देखा लेकिन कोई प्रतिक्रया नहीं दी और अपने फोन में व्यस्त हो गया। भूषण ने जैसे ही मुन्ना को वहा देखा उसे अकेला देखकर भूषण की आँखे चमक उठी उसने अपने लड़को की तरफ देखा और मुस्कुरा दिया।
लड़के समझ गए भूषण क्या कहना चाहता है ? सभी लड़के मुन्ना से दूरी बनाकर उसके इर्द गिर्द जा बैठे , हालाँकि मुन्ना को इस बात का अहसास था लेकिन फिर भी वह शांत बैठा रहा। कुछ देर बाद लड़का मुन्ना के लिए चाय और पराठा रखकर चला गया। मुन्ना ने अपना फोन जेब में रखा और जैसे ही चाय की तरफ बढ़ाया भूषण के एक लड़के ने वहा पड़ा पानी का जग उठाया और मुन्ना की चाय में उड़ेल दिया।
कप में अब चाय कम और पानी ज्यादा था। मुन्ना ने नजर उठा के लड़के को देखा तो लड़का बेशर्मी से मुस्कुरा दिया और साइड में चला गया
मुन्ना फिर भी शांत रहा वह बेवजह उन लोगो से झगड़ा करना नहीं चाहता था इसलिए उसने चाय पानी से भरे कप को साइड में खिसका दिया और पराठे की तरफ हाथ बढ़ाया तो भूषण ने मुन्ना की तरफ आते हुए जमीन से मिट्टी उठायी और उसे पराठे पर उछाल दिया। मुन्ना के हाथ की मुट्ठी बंध गयी और उसने जलती आँखों से भूषण को देखा तो भूषण ने बेशर्मी से अपने लड़को से कहा,”अरे देखो ज़रा ! मुन्ना भैया को तो गुस्सा आ गया,,,,,,,,!!”
मुन्ना अपनी जगह से उठा और भूषण के सामने आकर कहा,”इस तरह खाने का अपमान करना गलत है,,,,,,,,खाओ इसे”
“तुम्हरा दिमाग खराब हो गवा है का मुन्ना हम जे खाएंगे”,भूषण ने गुस्से से कहा
“हमारा दिमाग खराब हो उस से पहले इसे खाकर ख़त्म करो , चाहो तो अपने इन पंटरों की मदद भी ले सकते हो”,मुन्ना ने अपना चश्मा साफ करते हुए कहा
“ए सुन रहे हो तुम लोग जे मुन्ना का कह,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह !”,भूषण आगे कह पाता इस से पहले गरम गरम चाय आकर भूषण के मुँह पर गिरी जिसे मुन्ना ने बगल से गिरते वेटर के हाथ से लेकर फेंका था।
ये सब मुन्ना ने इतनी जल्दी किया कि भूषण समझ ही नहीं पाया और दर्द से कराह उठा। वह हाथो से अपना मुंह छुपाकर चीखने लगा। लड़को ने देखा तो कुछ भागकर भूषण के पास गए और दो लड़के मुन्ना के पास चले आये उनमे से एक ने कहा,”का रे मुन्ना खुद को बहुत बड़ा,,,,,,,,,,,,,!!”
लड़का आगे बोल ही नहीं पाया उसके आगे के शब्द उसके गले में थे और मुन्ना का था उसके गाल पर , एक थप्पड़ में ही लड़का नीचे आ गिरा। साथ खड़े दूसरे लड़के ने देखा तो घबराहट भरे स्वर में कहा,”मार क्यों रहे हो बैठकर बात करते हो ना,,,,,,!!”
“दो ऑप्शन है तुम्हारे पास या तो इसे खाओ या हमसे खाओ”,मुन्ना ने आँखों पर चश्मा लगाकर कहा
“मैं मैं ये खा लूंगा,,,,,,,,,,!!”,लड़के ने डरते हुए कहा
भूषण के पास खड़े लड़के ने सुना तो कहा,”ए तू पागल है क्या ? ये क्या कर रहा है ?”
“चुप कर मुझे तुम सबके जैसे मार खाने का शौक नहीं है,,,,,,,,!!”,कहकर लड़के ने मिटटी से भरे पराठे को उठाया और उसका एक टुकड़ा खाने लगा। उसके हाव भाव देखकर ही समझ आ रहा था कि उसे ये खाने में कितना अजीब लग रहा था।
भूषण ने जब देखा तो पास खड़े लड़के से कहा,”ए जाकर मारो उस मुन्ना को,,,,,,,,,,साला सब आस्तीन के सांप ही पाल रखे है हमने,,,,,,,,खड़े खड़े हमारा मुंह का देख रहे हो मारो उसे”
लड़के ने भूषण को छोड़ा और मुन्ना के सामने आकर कहा,”ए मुन्ना खुद को बहुत बड़ा हीरो समझता है तुझे तो मैं,,,,,,,,!!”
इसके बाद मुन्ना ने लड़के को जो मारा लड़के ने आखिर में अपने हाथ ही जोड़ दिए।
भूषण के साथ चार लड़के थे जिनमे से 3 मुन्ना की मार खाकर नीचे जमीन पर पड़े धूल चाट रहे थे और एक कब से धूल वाले पराठे को चबाने की नाकाम कोशिश कर रहा था।
भूषण ने देखा चारो लड़के मुन्ना के सामने नहीं टिक पाए तो वह खुद उठा और मुन्ना से लड़ने आया लेकिन मुन्ना के दो तीन घुसो ने ही भूषण की अकल ठिकाने लगा दी और कहा,”हमसे उलझने की गलती ना करो भूषण वरना इह शहर से तुम्हरे साथ साथ तुम्हरा अस्तित्व भी मिटा देंगे,,,,,,,,,,!!!”
मुन्ना को गुस्स में देखकर भूषण शांत हो गया , मुन्ना ने भूषण को गर्दन से पकड़ा और उसे टेबल की तरफ धकेलकर कहा,”चल खा इसे”
“मुन्ना,,,,,,,,,,आई ऍम सो,,,,,,,,,,,,,!!”,भूषण ने मरे हुए स्वर में कहा
“खा इसे,,,,,,,,!!”,मुन्ना ने गुस्से से कहा तो भूषण डर गया और बचा हुआ टुकड़ा लेकर खाने लगा। मिटटी होने की वजह से उसे खाना मुश्किल था। मुन्ना उसी टेबल के पास कुर्सी लेकर आ बैठा उसने जैसे ही भूषण के लड़को की तरफ देखा , नीचे गिरे लड़को में से एक ने उठते हुए कहा,”मैं आपके लिए दूसरी चाय और पराठा ले आता हूँ”
मुन्ना ने कुछ नहीं कहा और सामने देखने लगा भूषण और उसके बाकी लड़के वो मिटटी से भरा पराठा खाने को मजबूर हो चुके थे। अगले ही पल लड़का मुन्ना के लिए चाय और पराठा ले आया। मुन्ना ने लड़के को देखा और कहा,”अचार कहा है ?”
“अचार,,,,,,,,,अभी लाया”,लड़का फिर तेजी से वहा से चला गया
अपने लड़को को मुन्ना के लिए काम करते देखकर भूषण की जान जल गई लेकिन वह कुछ कर नहीं पाया मुन्ना ने चाय पराठा खाया और उठकर वहा से चला गया। भूषण एक बार फिर मुन्ना से मात खा गया , मुन्ना का तो वह कुछ बिगाड़ नहीं पाया लेकिन मुन्ना का गुस्सा उसने अपने ही लड़को पर निकाला और उन्हें पीटने लगा।
नवीन का ऑफिस , मुंबई
अपने ऑफिस मे बैठे नवीन ने निशि को फोन लगाया , कुछ देर बाद निशि ने फोन उठाया तो नवीन निशि के बोलने से पहले ही बोल पड़ा और कहा,”हेलो निशि ! कहा बिजी हो बेटा ? कल से तुमने मुझे एक बार फोन तक नहीं किया,,,,,,,,,,तुम ठीक तो हो ना ? और वो चिरकुट ! उसने तुम्हे परेशान तो नहीं किया”
“मैं नहीं बल्कि आपकी बेटी मुझे ज्यादा परेशान कर रही है एंड बाय द वे चिरकुट बुलाने का हक़ सिर्फ निशि को है आपको नहीं,,,,,,,,,!!”,वंश ने चिढ़ते हुए कहा
निशि के फोन पर वंश की आवाज सुनकर नवीन ने हैरानी से अपने फोन की स्क्रीन को देखा जिस पर निशि का ही नंबर था लेकिन वंश की आवाज सुनकर नवीन कन्फ्यूज हो गया और कहा,”निशि का फोन तुम्हारे पास कैसे आया ? निशि कहा है ?”
“कल रात शायद उसका फोन मेरे रूम में रह गया था,,,,,,,,,,,!!”,वंश ने कहा
“क्या ? निशि का फोन तुम्हारे रूम में , इसका मतलब तुम और निशि एक कमरे में साथ साथ रुके हो , मतलब कल रात तुम दोनों साथ थे”,नवीन ने हैरानी से कहा
वंश ने सुना तो चिढ़ते हुए कहा,”आप दोनों बाप बेटी को ओवर रिएक्ट करने की बीमारी है क्या ? पूरी बात सुने बिना ही जज करना शुरू कर देते हो,,,,,,,,,,,,और मेरा नाम वंश है चिरकुट नहीं,,,,,,,,!!”
“ओह्ह्ह सॉरी ! मुझे लगा तुम दोनों साथ थे,,,,,,,,अह्ह्ह छोड़ो निशि कहा है ? मुझे उस से बात करनी है,,,,,,,!!”,नवीन ने कहा
तभी वंश के कमरे का दरवाजा खुला और वंश ने सामने देखा तो पाया सामने से निशि चली आ रही थी। निशि वंश के पास आयी और कहा,”आई थिंक मेरा फोन कल रात यही रह गया , तुमने देखा क्या ?”
वंश ने हाथ में पकड़ा फोन निशि की तरफ बढ़ा दिया। निशि ने फोन लिया और कान से लगाकर कहा,”हेलो डेड !”
“इसका मतलब तुम और वंश कल रात साथ थे , एक ही कमरे में , ये सब मैं क्या सुन रहा हूँ निशि,,,,,,,,,!!”,नवीन ने गुस्से से लेकिन दबी आवाज में कहा
निशि ने वंश को घूरकर देखा और कहा,”आप जैसा सोच रहे है वैसा कुछ भी नहीं है डेड,,,,,,,,मैं आपको समझाती हूँ”
“मुझे कुछ नहीं सुनना निशि , उस चिरकुट को लेकर तुरंत मुंबई पहुंचो तुम आज और अभी,,,,,,,,,!!”,नवीन ने कहा
“इसका नाम चिरकुट नहीं है डेड,,,,,,,,,,,!!”,निशि ने मायूसी से कहा
वंश ने तब तक निशि से फोन छीन लिया और कहा,”लिस्टन मिस्टर नवीन शर्मा मेरा नाम वंश कुमार गुप्ता है , मुझे बार बार चिरकुट बुलाना बंद कीजिये आप समझे,,,,,,,,!!”
“अंकल से सीधा नवीन शर्मा,,,,,,,,,और कुछ बाकी रह गया है तो वो भी बोल दो,,,,,,,!!”,नवीन ने वंश को ताना मारते हुए कहा
“अह्ह्ह्ह मैं आपसे बात ही क्यों कर रहा हूँ ? वैसे भी आपका और आपकी बेटी का दिमाग तो एक ही ट्रेक पर चलता है,,,,,,,,सीधी बातो का भी उलटा मतलब निकालने में माहिर जो है आप दोनों,,,,,,,,!!”,वंश ने कहा
“ए वंश तुम अब अपनी लिमिट क्रॉस कर रहे हो,,,,,!!”,नवीन ने कहा
“बिना लिमिट क्रॉस किये इतना सब सुनने को मिल गया , लिमिट क्रॉस कर देता तो आपकी बेटी मुझे पहाड़ से नीचे फेंक देती,,,,,,,,,क्या ये सच में आपकी बेटी है ?”,वंश ने निशि की तरफ देखकर पूछा जिस से निशि के चेहरे पर खुन्नस के भाव साफ दिखाई देने लगे
“तुम्हे डाउट है क्या ?”,नवीन ने पूछा
“अह्ह्ह नहीं एक्चुली ये आपकी ही बेटी हो सकती है , आप आधे पागल है और ये पूरी,,,,,,,,,,,!!”,कहकर वंश निशि का फोन उसके हाथ में थमाकर कमरे से बाहर निकल गया
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संजना किरोड़ीवाल


Yeh Vansh ko ho kya gaya hai, jo isko Naveen jinka bhi darr nhi hai…kitna cool hokar baap-beti ko suns rha hai 😘 aur upar se Naveen ji ko bol rha hai ki chirkut bolne ka haq sirf Nishi ko hai…😁😆wha vansh tum to bade daring ho…lakin Munna k jitna nhi …kya lanka lagai hai Bhushan & boys ki…chaa gaye Munna tum to yr…
Arey re ye kya tha bansh ne yo sasur ji ko hi chapei me lia…maja agya