Sanjana Kirodiwal

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“मैं तेरी हीर” – 26

Main Teri Heer – 26

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Main Teri Heer – 26

अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी काशी जाते हुए शक्ति को देखते रही , शक्ति उसकी आँखों से ओझल हो चुका था लेकिन काशी सोच में डूबी वही खड़ी रही। शक्ति एकदम से आया और एकदम से चला भी गया , इस अनजाने शख्स ने काशी के दिमाग में हलचल मचा दी। बाहर खड़ी अंजलि काशी का इंतजार कर रही थी जब काशी बाहर नहीं आयी तो अंजलि ने ही अंदर आते हुए कहा,”काशी एक दुपट्टा लेने में इतना वक्त लगता है क्या ? (काशी को खिड़की के पास देखा तो उसकी तरफ आते हुए आगे कहा) ये लो हम तुम्हारा बाहर इंतजार कर रहे है और तुम यहाँ हो , काशी काशी क्या हुआ ?”
“हां हां कुछ नहीं कुछ भी तो नहीं”,अंजलि की आवाज सुनकर काशी जैसे नींद से जागी उसने चौंकते हुए कहा
“यहाँ क्या कर रही हो तुम ?”,अंजलि ने खिड़की के बाहर देखते हुए कहा
“वो हम खिड़की बंद करने आये थे , चलो चलते है”,काशी ने वहा से दरवाजे की तरफ जाते हुए कहा
अंजलि ने देखा काशी जिस खिड़की को बंद करने की बात कर रही थी वह खिड़की उसने बंद ही नहीं की। अंजलि ने खिड़की बंद की और काशी के साथ चल पड़ी। दोनों नीचे चली आयी , घर मेहमानो से भरा हुआ था। इतने लोगो को काशी ने पहली बार देखा था सब उसे ही देखे जा रहे थे और काशी उन सबको नमस्ते किये जा रही थी। काशी अंजलि का हाथ थामे बाहर चली आयी , बाहर की सजावट और पूजा का बंदोबस्त देखकर काशी की आँखे चमक उठी। वहा बनारस के बहुत से लोग जमा थे , कुछ रिश्तेदार और कुछ घर के लोग। कुछ ही दूर मुन्ना अपने दोस्तों के साथ खड़ा था। वंश लड़कियों से घिरा था , शिवम् पंडित जी के साथ था और मुरारी बड़े लोगो के बीच बैठा अपने चर्चे कर रहा था। सबके होते हुए भी काशी की नजरे किसी को ढूंढ रही थी लेकिन उसे शक्ति दोबारा दिखाई नहीं दिया।
“काशी चलो ना”,अंजलि ने उसे खींचते हुए कहा और लेकर सबके बीच चली आयी। पंडित जी ने सबको इकट्ठा होने को कहा और उसके बाद पूजा शुरू हुई। मुन्ना और वंश भी काशी अंजलि की तरफ चले आये। चारो भाई बहन मुस्कुराते हुए माँ लक्ष्मी की आरती में शामिल हो गए। अंजलि वंश के बगल में ही खड़ी थी जैसे ही दोनों की नजरे मिली वंश ने अपना कान पकड़ कर इशारो में अंजलि से माफ़ी मांगी। अंजलि ने कुछ देर वंश को देखा और फिर एक बड़ी सी स्माइल अपने चेहरे पर ले आयी जिस से वंश समझ गया की अंजलि ने उसे माफ़ कर दिया। एक बार फिर सब आरती का आनंद लेने लगे।

जहा सभी आरती में शामिल थे , वही शक्ति विष्णु को ढूंढ रहा था। उसने विष्णु को फोन लगाया लेकिन कवरेज क्षेत्र से बाहर ,, शक्ति ने फोन जेब में रख लिया। शक्ति ने देखा बाकि सब पूजा में है यही सही मौका था , वह एक बार फिर घर के पीछे गया और वहा से अंदर चला आया। विष्णु भी भीड़ में सबसे पीछे खड़ा था उसका ध्यान सिर्फ मुरारी और शिवम् पर था। कोई उसे पहचाने नहीं इसलिए उसने गमछा ओढ़ रखा था। पूजा के बाद पंडित जी सभी को आरती देने लगे जैसे ही पंडित जी विष्णु के सामने आये विष्णु बिना आरती लिए ही वहा से चला गया। क्योकि ये अस्सी घाट वाले ही पंडित जी थे जो विष्णु और शक्ति को अच्छे से जानते थे लेकिन गमछे की वजह से वे विष्णु को पहचान नहीं पाए। भीड़ से निकलकर विष्णु घर के पीछे वाली साइड आया शक्ति ने उसे यही मिलने को कहा था। कुछ देर बाद शक्ति आया और कहा,”कहा चले गए थे ?”
“यही था काम हुआ ?”,विष्णु ने इधर उधर देखते हुए कहा
“हां हो गया चलो चलते है”,कहते हुए शक्ति विष्णु को लेकर वहा से आगे बढ़ गया। चलते चलते उसने पलटकर काशी के कमरे की खिड़की की तरफ देखा लेकिन वहा कोई नहीं था। शिवम् के घर से बाहर आकर शक्ति और विष्णु बाइक लेकर चले गए। शक्ति ने फाइल विष्णु को दी और मालिक को देकर आने को कहा और खुद घाट की सीढ़ियों पर आकर बैठ गया दिवाली की रात थी और पूरा बनारस दियो की रोशनी में जगमगा रहा था। शक्ति एक टक घाट के पानी को निहारते रहा जिसमे उसे बीते वक्त की परछाईया नजर आने लगी।

अतीत -:
“माँ माँ हमने कहा था ना इस बार दिवाली पर हम लोग पुरे 500 दीपक जलाएंगे , लेकिन देखो इसमें 20 दीपक कम है”,15 साल के शक्ति ने अपनी माँ से शिकायती लहजे में कहा
“एक दो दीपक कम होने से क्या फर्क पड़ता है बेटा ? बाजार में आखरी दीपक यही बचे थे तो मैं ले आया। अब जल्दी से इनमे तेल बाती रख फिर इन्हे जलाना भी तो है”,शक्ति के पापा ने उसके पास आकर कहा
“मुझे तो ये समझ नहीं आता शक्ति की इतने दीपक जलाने की जरूरत क्या है ?”,शक्ति की माँ ने रसोई से झांकते हुए कहा
“माँ 500 दीपक की रौशनी कितनी होती है जानती हो ना तुम , जब इतने सारे दीपक एक साथ जलेंगे तो देखना घर कैसे जगमगा उठेगा ?”,शक्ति ने खुश होकर कहा
“पगला कही का”,कहते हुए शक्ति की माँ एक बार फिर काम में जुट जाती है।
लक्ष्मी पूजा के बाद सभी शक्ति अपने पापा के साथ मिलकर घर की छत , मुंडेर और आँगन में दीपक रखने लगता है। आखिर में एक दीपक बचता है तो शक्ति कहता है,”पापा इसे मैं सामने महादेव वाले मंदिर में रख आता हूँ , उनके घर में भी तो रौशनी होनी चाहिए ना”
“हां जा और जल्दी आना उसके बाद जो फुलझड़िया और पटाखे मैं तेरे लिए लाया हूँ उन्हें जलाना भी तो है”,शक्ति के पापा ने कहा
शक्ति जलते हुए दीपक को हवा से बचाते हुए मंदिर में लेकर आता है और उसे भगवान के सामने रख देता है। पंडित जी उसे प्रशाद देने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाते है शक्ति के कानो में एक तेज धमाके की आवाज पड़ती है। शक्ति बिना प्रशाद लिए ही बाहर भागता है और देखता है की उसके घर में आग लगी है और पूरा घर धूं धूं करके जल रहा है। घर के बाहर लोगो की भीड़ जमा थी और सब चिल्ला रहे थे ,, शक्ति भागते हुए उस तरफ आया लेकिन वहा खड़े लोगो ने उसे पकड़ लिया क्योकि आग बहुत तेज थी। वह चीखता रहा चिल्लाता रहा लेकिन किसी ने उसे अंदर जाने नहीं दिया”
कुछ घंटो बाद जब दमकल पहुंची और आग को बुझाया गया तब तक सब खत्म हो चुका था। शक्ति के माँ बाप उस आग में जलकर राख हो चुके थे ,, अपने वह अपने माँ बाप का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाया।

वर्तमान -:
ये सब याद आते ही शक्ति ने तड़पकर एक गहरी साँस ली , उसकी आँखों में नमी थी लेकिन उसने उसे बाहर आने नहीं दिया वह गुस्से से उठा और घाट से बाहर चला आया। घाट से बाहर आकर सड़क पर चलते हुए शक्ति ने अपनी जेब से सिगरेट निकाल ली और मुंह में रखकर जलाते हुए आगे बढ़ गया। दिवाली की हर रात से उसे नफरत थी , सिगरेट के कश लगाते हुए शक्ति आगे बढ़ता जा रहा था की उसे काशी का ख्याल आया। उसकी चाल धीमी पड़ गयी , उसे काशी की काजल से सनी बड़ी बड़ी नजर आने लगी। शक्ति की उंगलियों में फंसा सिगरेट जलते हुए जब उसकी ऊँगली से जा लगा तो उसे अहसास हुआ। वह रूककर वही पास पड़े पत्थर पर आ बैठा और उस आधी सिगरेट के कश लगाते हुए काशी के बारे में सोचने लगा। काशी की आँखे , उसके खूबसूरत होंठ , उसके लम्बे घने बाल , उसकी मीठी सी आवाज शक्ति के कानो में किसी संगीत की तरह गूंजने लगी। आज से पहले तो काशी के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था ,, ना जाने कितनी ही लड़किया उसपर जान छिड़कती थी लेकिन किसी लड़की से रिश्ता रखना तो दूर शक्ति उन्हें नजर भर देखता तक नहीं था लेकिन काशी को लेकर ना जाने क्यों उसके मन में एक अहसास जगने लगा। शक्ति ने सिगरेट खत्म की और एक बार फिर घाट की तरफ चला गया क्योकि जो सुकून उसे चाहिए था वो वही था , घाट की उन सीढ़ियों पर।

शिवम् के घर में उत्सव का माहौल था सभी अपनी अपनी मण्डली बनाकर दिवाली की रात का आनंद ले रहे थे। मुन्ना के दोस्त दो दिन बाद कॉलेज में इलेक्शन को लेकर भरे जाने वाले फॉर्म को लेकर बातें कर रहे थे। वंश काशी और अंजलि के साथ थी। मुन्ना भी उन सबके बीच जाना चाहता था लेकिन मजबूर था जब काशी की नजरे उस से मिली तो काशी ने उसे आराम से आने का इशारा किया।
अपनी जीप में सवार राजन अपने दोस्तों के साथ शिवम् के घर के सामने से गुजरा। कुछ दूर जाकर उसने जीप रोक दी।
“का हुआ भैया जीप काहे रोक दी ?”,राजन के साथ रहने वाले लड़को में से एक ने कहा जो की राजन का खास था और उसी के घर में रहता था ।
“ये उस वंश का घर है ना , यहाँ जलसा किस ख़ुशी में है ?”,राजन ने सवाल किया
“अरे उह शिवम् गुप्ता है ना उसकी लौंडिया आयी है शहर से पढ़कर उसी ख़ुशी में रखा है ये जलसा”,पास ही बैठे दूसरे लड़के ने पान की पीक थूकते हुए कहा
“ओह्हो तो क्यों ना रंग में भंग डाला जाये”,राजन के खास लड़के भूषण ने कहा
“अरे नहीं भूषणवा याद है ना पापा का कहे थे अभी कुछो गड़बड़ नहीं करनी है और वैसे भी गुप्ता जी की लड़की से हमे क्या लेना देना हम तो उस मुन्ना के बारे में सोच रहे है , इस साल के कॉलेज इलेक्शन में उसको हराना ही है , तब ही मिलेगी हमारे कलेजे को ठंडक ,, का समझे ?”,राजन ने कहा
“भैया सोचो अगर मुन्ना कॉलेज के इलेक्शन में अपना नाम ही ना दे पाए तो,,,,,,,,,,,,,!!”,बगल में बैठे लड़के ने कहा
“हम कुछो समझे नहीं,,!!”,राजन ने कहा
“हम समझ गए”,भूषण ने मुस्कुराते हुए कहा और जीप से नीचे उतरकर कहा,”भैया आप लोग चलिए हम थोड़ा हल्के होकर आते है”
“ठीक है जल्दी आना”,राजन ने कहा और सिगरेट जला ली।

शिवम् के घर के गेट पर दो आदमी तैनात थे इसलिए भूषण को दिवार फांदकर आना पड़ा , भूषण हमेशा अपनी शर्ट की कॉलर में एक छोटा धारदार चाकू रखता था। उसने देखा कुछ ही दूर मुन्ना अपने दोस्तों के साथ खड़ा है , भूषण ने खुद से ही प्लान बनाया की वह जाकर मुन्ना को थोड़ा सा जख्मी कर देगा और फिर जान बुझकर पकड़ा जायेगा , कोई पूछेगा तो कह देगा की कॉलेज की लड़ाई के चलते ऐसा किया ,, इस से मुन्ना इलेक्शन में अपना नाम नहीं दे पायेगा , राजन भी बच जाएगा और भूषण राजन की नजरो में वफादार कहलायेगा।
भूषण ने चाकू निकाला और मुन्ना की तरफ बढ़ गया , सब बातो में लगे थे किसी का ध्यान भूषण के हाथ में पकडे उस चाकू पर नहीं गया लेकिन कही से वंश की नजर भूषण पर चली गयी। किसी अनहोनी के डर से वंश मुन्ना की तरफ बढ़ा , भूषण और वंश दोनों मुन्ना से बराबर दुरी पर थे। रवि मुन्ना को फोन में कुछ दिखा रहा था और उसे अंदाजा भी नहीं था की ऐसा कुछ होने वाला है। भूषण का ध्यान सिर्फ मुन्ना पर था इसलिए वह सामने से आते वंश को नहीं देख पाया
मुन्ना के पीछे आकर भूषण ने जैसे ही चाकू उसके मारने के लिये बढ़ाया वंश ने अपना हाथ बीच में करके उस चाकू को अपनी मुट्ठी में भींच लिया। चाकू वंश के हाथ में चुभ गया लेकिन उसके मुंह से एक आह तक नहीं निकली। भूषण ने अपनी बगल में खड़े वंश को देखा तो चाकू छोड़ दिया , उसका गला सुख गया और जैसे ही वह जाने को हुआ मुन्ना पलटा , मुन्ना को देखकर वंश ने तुरंत भूषण के कंधे पर हाथ रख लिया और अपने होंठो पर बड़ी सी स्माइल लाकर जख्मी हुए हाथ को पीछे कर लिया जिस से अब खून रिसने लगा था।
“क्या हुआ ?”,मुन्ना ने पूछा
“कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही घूम रहा था , तू इंजॉय कर ना”,वंश ने अपने दर्द को अपनी मुस्कुराहट के पीछे छुपाते हुए कहा
“ये कौन है ?”,मुन्ना ने पूछा क्योकि वह नहीं जानता था की भूषण राजन का आदमी है
“दोस्त है , दोस्त मैंने बुलाया है”,वंश ने भूषण की ओर देखकर कहते हुए हल्के से उसका कंधा दबा दिया तो भूषण ने भी हामी भर दी।
“मुन्ना सुन न वो मैं ये कह रहा था की,,,,,,,,,,!!”,रवि ने कहा तो मुन्ना एक बार फिर उसकी तरफ पलट गया और वंश भूषण को लेकर साइड में जाने लगा। भूषण अंदर ही अंदर काँप रहा था क्योकि वंश के गुस्से और उसकी मार के किस्से उसने खूब सुन रखे थे।
हाथ में हुए दर्द की वजह से वंश ने अपना दुसरा हाथ झटका , उसका ध्यान जैसे ही भूषण से हटा भूषण को मौका मिल गया उसने वंश को धक्का दिया और पास ही की दिवार को फांदकर भाग गया। वंश ने खुद को सम्हाला और जैसे ही दिवार के पार देखा भूषण उसे भागता नजर आया। वंश ने अपना जख्मी हाथ दिवार पर दे मारा इस बार उसके मुंह से आह निकली उसने पलटकर मुन्ना को देखा और मुस्कुरा उठा।

वंश ने अपनी जेब से रुमाल निकाला और उसे हाथ पर अच्छे से बांध लिया। ख़ुशी के माहौल में वंश टेंशन पैदा करना नहीं चाहता था। वह वहा से वापस अंदर चला आया। मुरारी ने वंश को देखा तो उसके पास आकर कहा,”ए वंश सुनो”
“हां चाचू”,वंश ने अपना हाथ अपनी जेब में डालते हुए कहा
मुरारी उसे साइड में लेकर आया और कहा,”हमको जे बताओ की कुछो संगीत का पिरोगराम रखा है के नहीं ? का है की शिवम् भैया ने बाबा से कहा था और बाबा ने पता नहीं किस गधे से कहा नाचे गाने के प्रोग्राम के लिए की अभी तब शुरू नहीं हुआ है”
मुरारी ने गधा शब्द इस्तेमाल किया तो वंश उसे घूरने लगा क्योकि बाबा से तो ये जिम्मेदारी उसी ने ली थी लेकिन मुरारी ने उस पर ध्यान नहीं दिया और आगे कहने लगा,”कुछ दिन से शिवम् भैया हमसे थोड़े खफा है और जे सही मौका है , हमने देखा सारा बंदोबस्त हो चुका है बस शुरू होने में देर है तो तुमको बस इतना करना है की उन गाने बजाने वालो से जे कहना है की उह पिरोगराम शुरू करने से पहिले कहे की जे बंदोबस्त हमने याने मुरारी मिश्रा उर्फ़ बनारस के विधायक ने करवाया है , का समझे ? अरे यार शिवम् भैया की नजरो में थोड़ी इज्जत बढ़ जाएगी हमारी,,,,,,,,,,,,बस इतना कर दो हमारे लिए”
“ठीक है लेकिन बदले में मुझे क्या मिलेगा ?”,वंश ने कहा
“बेटा तुम्हारे कांड शिवम् भैया से छुपाये है ना उह काफी है इसके बदले में , काम पर ध्यान दो”,कहकर मुरारी चला गया।
वंश भी गाने बजाने वालो की तरफ चला आया स्टेज के सामने सभी घरवाले , रिश्तेदार और बनारस के लोग बैठे थे। साथ मुरारी अपने कुछ बड़े बड़े दोस्तों , अधिकारियो के साथ बैठा शुरू होने वाले प्रोग्राम के बारे में शेखी बघार रहा था। कुछ देर बाद ही गाने वालो ने मुरारी के नाम से अनाउंसमेंट की के सब मुरारी की तरफ से किया जा रहा है। मुरारी ने शिवम् की तरफ देखा तो शिवम् हल्का सा मुस्कुरा दिया। मुरारी के दिल को सुकून मिला उसने सामने स्टेज पर बैठे लोगो से गाने का इशारा किया तो उन्होंने गाना शुरू कर दिया
“काशी हिले , पटना हिले , कलकत्ता हिलेला रे,,,,,,,,,,,,,,तोहरी लचके जब कमरिया सारा जिला हिलेला”
मुरारी ने सूना तो उसके तोते उड़ गए , दिवाली के शुभ मुहूर्त पर ये कैसा गाना गा रहे थे वो लोग,,,,,,,उस पर मुरारी ने अपनी लंका खुद लगवा ली ये कहकर की जे सारा बंदोबस्त उसने किया है। डरते डरते मुरारी ने शिवम् की तरफ देखा तो पाया शिवम् उसे गुस्से से घूर रहा है।

Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26 Main Teri Heer – 26

क्या मुरारी शिवम् के गुस्से से बच पायेगा ? क्या वंश पता लगा पायेगा भूषण के आने वजह ? क्या शक्ति और काशी के दिल में जगने लगे है अहसास ? जानने के लिए सुनते पढ़ते रहे “मैं तेरी हीर”

क्रमश – “मैं तेरी हीर” – 27

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