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Love You जिंदगी – 94

Love You Zindagi – 94

Love You Zindagi
Love You Zindagi

नैना को अवि पर भरोसा था की वह सब ठीक कर देगा ! उसके गले लगे वह कुछ देर के लिए सब भूल गयी ! दरवाजे पर खड़ी रुचिका ने खाँसने का नाटक किया तो नैना और अवि एक दूसरे से दूर हुए अवि बिना रुचिका की तरफ देखे अपने फ्लैट की और चला गया और नैना अपने फ्लैट में चली आयी ! मुस्कुराते हुए रुचिका भी उसके पीछे चली आयी उसने देखा मोंटी बाहर सोफे पर ही सो गया है तो रुचिका अंदर से कम्बल लायी और मोंटी को ओढ़ाते हुए नैना से कहा,”सो आगे का क्या सोचा है तुमने ?”


नैना बालकनी की और चली गयी रुचिका भी उसके पीछे पीछे आयी और आकर नैना के सामने खड़ी हो गयी ! नैना समझ गयी की बिना जवाब जाने रुचिका उसका पीछा नहीं छोड़ेगी ! नैना ने बालकनी के परदे गिराते हुए कहा,”किस बारे में ?”
“अपने और अवि के बारे में अंकल को कब बताओगी ?”,रुचिका ने पूछा
“डेड अवि को पसंद तो करते है पर जब उन्हें पता चला ये सब के बारे में तो पता नहीं उनका रिएक्शन क्या होगा ?”,नैना ने कहा


“रिएक्शन देखने के लिए अंकल को बताना भी तो पडेगा !”,रुचिका ने कहा
“हां लेकिन उस से पहले सार्थक और शीतल के घरवालो को मनाना है , तू तो जानती है दोनों की फॅमिली में कितनी प्रॉब्लम्स है !”,नैना ने कहा
“हां यार , आज सार्थक को उदास देखकर मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा था ,, आई हॉप उसके पापा मान जाये आंटी तो वैसे भी शीतल को इतना पसंद करती है !”,रुचिका ने कहा तो नैना कुछ सोचने लगी और कहा,”कल शीतल के भैया से बात करके देखते है , उनके मन में क्या चल रहा है पता तो चले”


“हां पहले उन्ही से बात करते है !”,रुचिका ने भी कहा और दोनों सोने चली गयी !
अवि अपने फ्लेट में आया नैना के छूने का अहसास उसे अभी तक महसूस हो रहा था उसने अपनी जैकेट उतारी और साइड में रख दी अपनी टीशर्ट को नाक से लगाकर सुंघा , लेडीज परफ्यूम की भीनी भीनी खुशबु आ रही थी जो की नैना ने लगाया हुआ था ! अवि आकर रूम में लेट गया और नैना के बारे में सोचने लगा। कैसे नैना के आने से उसकी जिंदगी बदलने लगी थी , नैना उसकी जिंदगी में पहली लड़की थी जिसे वह इतना चाहता था ,

जैसे जैसे नैना को जानता जा रहा था वैसे वैसे नैना का प्यार उसके लिए बढ़ता जा रहा था और ख़ुशी की बात ये थी की उसकी मॉम भी नैना को पसंद करती थी , साथ ही नैना के डेड से भी अच्छा रिश्ता था। इन्ही बातो के सोच विचार में डूबे अवि को कब नींद आ गयी उसे पता ही नहीं चला।

सुबह नैना उठी बाहर आकर दूध का पैकेट उठाया और सबके लिए चाय बनाकर उन्हें दी और खुद अपनी चाय लेकर बालकनी में आकर खड़ी हो गयी। नैना शीतल के भाई को मनाने की प्लानिंग कर ही रही थी की तभी शीतल टेंशन में फ़ोन हाथ में लिए बाहर आयी और कहा,”आज शाम भैया यहाँ आ रहे है , बहुत नाराज है मुझसे !”
“नाराज क्यों है ?”,मोंटी ने पूछा


“शायद किसी ने उन्हें सार्थक के बारे में बताया है !”,शीतल ने रोनी सी सूरत बनाकर कहा तो रुचिका ने नैना की और देखा नैना ने कंधे उचका दिए तो रुचिका उसके पास आयी और कहा,”लेकिन उन्हें किसने बताया ?”
“इनके एक्स बॉयफ्रेडं ने , उसके अलावा किसको पता है सार्थक का ?”,नैना ने चाय पीते हुए कहा
“हहहह वो राज का बच्चा मुझे मिल जाये तो उसकी ऐसी पिटाई करू के जिंदगी भर याद रखे वो !”,रुचिका ने गुस्सा दिखाते हुए कहा


“पता नहीं उसने भैया से क्या क्या कहा होगा मुझे तो डर लग रहा है ?”,शीतल ने कहा
“डोंट वरी एक दिन तो उन्हें बताना ही था और अच्छा है की उन्हें पता चल गया अब बात करने में आसानी होगी”,नैना ने कहा
“नैना तुम मेरे भैया के बारे में नहीं जानती हो , वो बहुत सख्त है भाभी फिर भी मेरा साथ दे देंगी लेकिन भैया नहीं ,,, राज की वजह से पिछली बार घर में इतना बड़ा तमाशा आलरेडी हो चुका है !”,शीतल ने कहा


“तो तेरे भैया से पहले क्यों ना उस राज की ही बेंड बजायी जाये !”,नैना ने कहा
“ऐसा कुछ करने की सोचना भी मत ये और मुसीबत में फंस जाएगी , मेरे पास एक आइडिआ है शीतल के भैया के आने से पहले क्यों ना सार्थक के पापा से बात कर ली जाये ,, अगर वो मान गए तो वो खुद इसके भैया से इनके रिश्ते की बात करेंगे तब शायद उन्हें इनका प्यार समझ आये और वो मान जाये !”,मोंटी ने सुझाव दिया
“आइडिआ तो अच्छा है पर क्या ये काम करेगा ?”,रुचिका ने कहा


“अरे करेगा करेगा बिल्कुल करेगा , नहीं माने तो अपने तरीके से मना लेंगे !”,नैना ने कहा !
“हां लेकिन सांप के बिल में हाथ डालेगा कौन ?”, रुचिका ने कहा तो मोंटी और नैना दोनों की गर्दन रुचिका की और घूम गयी और दोनों रहस्य्मयी तरीके से मुस्कुराये ! रुचिका को समझते देर नहीं लगी उसने कहा,”नहीं नहीं नहीं नहीं बिल्कुल नहीं मैं नहीं जाने वाली हूँ !”
“यस यस यस यस तुम जाओगी , अपनी दोस्त के लिए तुम इतना तो कर ही सकती हो ना पांडा”,नैना ने ,मक्खन लगाते हुए कहा


“अरे उसके डेड मेरी बात क्यों सुनेंगे ? पता है उस दिन तुम्हे भी कैसे सूना दिया ? और सार्थक उस बेचारे की तो सीधी पिटाई कर दी थी उन्होंने”,रुचिका ने ना जाने की वजह बताई
“अच्छा तो तू नहीं जाएगी !”,नैना ने घूरते हुए कहा
“नहीं कोई चांस ही नहीं है , तुम खुद क्यों बात नहीं करती उनसे”,रुचिका ने कहा
“बाबू तुमको पता है ना मेरी जबान कितनी खराब है गुस्से में आकर शर्माजी को ही सूना दिए तो काम बनने के बजाय बिगड़ जाएगा !”,नैना ने कहा


“रूचि तुम इतना सा नहीं कर सकती कम ऑन यार शीतल तुम्हारी दोस्त है , मैं जाकर बात कर लेता लेकिन मुझे वो जानते कहा है ? शीतल के भैया के आने से पहले उन्हें मनाना होगा ,,, प्लीज मान जाओ ना !”,मोंटी ने कहा तो रुचिका सोच में पड़ गयी और फिर कहा,”अच्छा ठीक है लेकिन सिर्फ शीतल के लिए !”
“वाह वाह वाह सेल्फिश औरत दोस्त ने कहा तो नखरे होने वाले पति ने कहा तो ठीक है”,नैना ने रुचिका की नक़ल करते हुए कहा तो रुचिका ने कुशन फेंक के मारा और कहा,”दोस्ती के लिए ही कर रही हूँ ,

वैसे भी हम लोगो को हमारे हिस्से का प्यार मिला है तो शीतल को भी मिलना चाहिए। अब बताओ क्या करना होगा मुझे ?”
“तुम्हे जाकर सार्थक के पापा को शीतल के बारे में गलत बोलना है !”,नैना ने कहा
“है.,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,तू इनकी शादी करवा रही है या तुड़वा रही है ?”,रुचिका ने हैरानी से कहा
“तू सवाल मत कर मैं जैसा कहती हूँ ना वैसा ही कर सार्थक के पापा से जाकर शीतल के लिए जितना गलत बोल सकती है बोल आगे मैं सम्हाल लुंगी”,नैना ने कहा


“बेटा चल क्या रहा है तेरे दिमाग में ?”,मोंटी ने पूछा
“मजा आने वाला है मोंटी !”,कहते हुए नैना शीतल के पास आयी और उसे गले लगाकर कहा,”टेंशन मत ले शीतू तेरे दोस्त तेरे साथ है ना , सब सही कर देंगे”
नैना की बातो से शीतल को थोड़ी तसल्ली मिली !

नहा धोकर सभी रेडी थे शीतल और रुचिका ने मिलकर नाश्ता बनाया और मोंटी नैना बातो में मस्त थे। अवि देर तक सोता रहा बारिश में भीगने की वजह से उसे सर्दी हो गयी थी और बदन भी तप रहा था लेकिन नैना को इस बात का पता नहीं था वह तो अपनी प्लानिंग में लगी हुई थी। शीतल ने नाश्ता लगाया तो सभी आकर बैठे मोंटी ने नैना से कहा,”अपने पडोसी को भी ले आ !”


“वो खुद बना के खा लेगा , एक्चुअली वो बहुत अच्छा कूक है !”,नैना ने अपनी प्लेट उठाते हुए कहा
“फिर तो मजे है तेरे शादी के बाद दोनों मिलकर बनाना”,मोंटी ने कहा
“ओह्ह मतलबी इंसान उठो और जाकर बुलाकर लाओ उसे , कैसी बेशर्म लड़की है अकेले अकेले ठूसने में लगी है”,रुचिका ने नैना के हाथ से प्लेट छीनते हुए कहा तो नैना मुंह में ठूंसे हुए निवाले को खाते हुए बोली,”तुम्हे बड़ा प्यार आ रहा है उसपे”


“नहीं मुझे अपने दोस्तों की परवाह है , अब उठो और जाओ !”,रुचिका ने लगभग नैना को धकियाते हुए कहा
मुंह का निवाला चबाते हुए नैना अवि के दरवाजे के सामने आयी और बेल बजा दी , किसी ने दरवाजा नहीं खोला ,, कुछ देर बाद नैना ने फिर बेल बजायी तो अवि नींद से जागा लेकिन बुखार की वजह से उसकी उठने की हिम्मत नहीं हो रही थी वह करवट बदल कर सो गया। नैना ने फिर बेल बजाया और इस बार अवि को उठना ही पड़ा वह दरवाजे तक आया और दरवाजा खोला तो देखा सामने नैना खड़ी है ! नैना ने अवि के चेहरे की और ध्यान ही नहीं दिया और कहा,”चलो सब तुम्हे नाश्ते के लिए बुला रहे है !”

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“नैना मेरा मन नहीं है !”,अवि ने नींद से भरी आवाज में कहा
“अरे चलो ना , वरना वो रूचि मुझे भी नहीं खाने देगी”,नैना ने कहा
“नहीं प्लीज तुम लोग खाओ मैं बाद में खा लुंगा”,कहकर अवि जाने लगा तो नैना ने उसका हाथ पकड़ उसे रोका लेकिन जैसे ही नैना ने उसे छुआ पता चला की अवि को बुखार है तो वह अवि के सामने आयी और उसका सर छूकर कहा,”तुम्हे तो बुखार है !”


“आहह,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,छी ,, हां कल रात बारिश में भीगने की वजह से हो गया शायद !”,अवि ने छीकते हुए कहा
“दवा ली तूमने ? और कुछ खाया की नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,कहा से खाओगे तुम तो खुद कल आये हो एक काम करो पहले अंदर चलो”,नैना अवि को लेकर अंदर आयी और सोफे पर बैठने को कहा और खुद अंदर से अवि का कम्बल ले आयी और उसे ओढ़ाते हुए कहा,”तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने को लेकर आती हूँ”


नैना वापस अपने फ्लेट में आयी और अपनी प्लेट में एक्स्ट्रा खाना लेकर जैसे ही जाने लगी रुचिका ने सवाल किया,”अब किधर ?”
“पडोसी और मैं उधर साथ बैठ कर खाएंगे ना”,नैना ने कहा
“अब ये कोनसा नया ड्रामा है ?”,रुचिका ने पूछा
नैना सबको अवि के बारे बताकर परेशान करना नहीं चाहती थी इसलिए कहा,”रोमांस मिसेज शर्मा , आप नहीं समझेगी !”


नैना के जाने के बाद रुचिका ने कहा,”पता नहीं कभी कभी इस लड़की को क्या हो जाता है ?”
“अरे जाने दो ना कम से कम इसी बहाने दोनों को साथ में रहने का थोड़ा मौका मिलेगा”,शीतल ने कहा
“साथ में वक्त कम बिताते है झगड़ते ज्यादा है दोनों”,रुचिका ने शीतल को बैठने का इशारा करते हुए कहा तो शीतल ने कहा,”तुम दोनों खाओ ना मैं बालकनी में जा रही हूँ वही धुप में बैठकर खाउंगी”


नैना अवि की तरह शीतल रुचिका और मोंटी को भी अकेले छोड़ना चाहती थी इसलिए जानबुझकर अपनी प्लेट लेकर बालकनी की और चली आयी।
“दोस्तों से फुर्सत मिल गयी हो तो थोड़ा ध्यान इस गरीब पर दे दीजिये”,मोंटी ने कहा तो रुचिका मुस्कुरा उठी और फिर मोंटी को अपने हाथो से खिलाने लगी। दोनों के बीच जो प्यार था वो साफ दिखाई दे रहा था। नैना नाश्ता लेकर अवि के फ्लैट में आयी उसने टेबल पर प्लेट रखा और देखा अवि वापस सो गया है वही सोफे पर ,

नैना ने उसके चेहरे की और देखा तो बस देखती रही , सोया हुआ अवि उस वक्त बहुत मासूम लग रहा था नैना ने अपने दोनों हाथो से उसकी बलाये लेते हुए कहा,”यार पडोसी कितने मस्त दिखते हो न तुम , लखनऊ के सारे लौंडे एक तरफ और तुम्हारी क्यूटनेस एक तरफ,,,,,,,,,,यहाँ तो मैं भी पिघल गयी”
तभी अवि का सर नींद की वजह से जैसे ही गिरने लगा नैना ने आकर सम्हाल लिया और धीरे से उसके सर को साइड में कर दिया।

उसकी बगल में पड़े सोफे पर बैठकर नैना ने कुछ देर अवि को देखा वह नींद में था और नैना को उसे बार बार जगाना अच्छा नहीं लगा। उसने नाश्ते की प्लेट उठायी और खाने लगी। कुछ देर बाद रुचिका और मोंटी वहा आये नैना को खाते देखकर रुचिका ने कहा,”क्या लड़की हो यार तुम मतलब वो सो रहा है और तुम आराम से बैठकर खा रही हो ?”
“हां तो ?”,नैना ने बेपरवाही से कहा
“मुझे लगा तुम लोगो बीच प्यार भरी बाते हो रही होंगी”,रुचिका ने कहा


नैना ने खाने की डकार ली और प्लेट साइड में रखते हुए कहा,”देखो बहन पेट ना खाने से भरता है प्यार से नहीं !”
रुचिका ने सूना तो अपना सर पीट लिया और कहा,”कुछ नहीं हो सकता तुम्हारा !”
नैना पहली बार शरमाई और अपनी ऊँगली के नाख़ून को दांतो तले दबाकर कहा,”प्यार हो गया मुझे इस से ज्यादा और क्या होगा ?”

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क्रमश – Love You जिंदगी – 95

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“नहीं मुझे अपने दोस्तों की परवाह है , अब उठो और जाओ !”,रुचिका ने लगभग नैना को धकियाते हुए कहा
मुंह का निवाला चबाते हुए नैना अवि के दरवाजे के सामने आयी और बेल बजा दी , किसी ने दरवाजा नहीं खोला ,, कुछ देर बाद नैना ने फिर बेल बजायी तो अवि नींद से जागा लेकिन बुखार की वजह से उसकी उठने की हिम्मत नहीं हो रही थी वह करवट बदल कर सो गया। नैना ने फिर बेल बजाया और इस बार अवि को उठना ही पड़ा वह दरवाजे तक आया और दरवाजा खोला तो देखा सामने नैना खड़ी है ! नैना ने अवि के चेहरे की और ध्यान ही नहीं दिया और कहा,”चलो सब तुम्हे नाश्ते के लिए बुला रहे है !”

“नहीं मुझे अपने दोस्तों की परवाह है , अब उठो और जाओ !”,रुचिका ने लगभग नैना को धकियाते हुए कहा
मुंह का निवाला चबाते हुए नैना अवि के दरवाजे के सामने आयी और बेल बजा दी , किसी ने दरवाजा नहीं खोला ,, कुछ देर बाद नैना ने फिर बेल बजायी तो अवि नींद से जागा लेकिन बुखार की वजह से उसकी उठने की हिम्मत नहीं हो रही थी वह करवट बदल कर सो गया। नैना ने फिर बेल बजाया और इस बार अवि को उठना ही पड़ा वह दरवाजे तक आया और दरवाजा खोला तो देखा सामने नैना खड़ी है ! नैना ने अवि के चेहरे की और ध्यान ही नहीं दिया और कहा,”चलो सब तुम्हे नाश्ते के लिए बुला रहे है !”

“नहीं मुझे अपने दोस्तों की परवाह है , अब उठो और जाओ !”,रुचिका ने लगभग नैना को धकियाते हुए कहा
मुंह का निवाला चबाते हुए नैना अवि के दरवाजे के सामने आयी और बेल बजा दी , किसी ने दरवाजा नहीं खोला ,, कुछ देर बाद नैना ने फिर बेल बजायी तो अवि नींद से जागा लेकिन बुखार की वजह से उसकी उठने की हिम्मत नहीं हो रही थी वह करवट बदल कर सो गया। नैना ने फिर बेल बजाया और इस बार अवि को उठना ही पड़ा वह दरवाजे तक आया और दरवाजा खोला तो देखा सामने नैना खड़ी है ! नैना ने अवि के चेहरे की और ध्यान ही नहीं दिया और कहा,”चलो सब तुम्हे नाश्ते के लिए बुला रहे है !”

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