Love You जिंदगी – 82

Love You Zindagi – 82

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Right Now – रुचिका ने जिन 3 खास लोगो को बुलाया था उनमे से एक सार्थक आ चुका था , बाकि दो लोगो का कोई अता पता नहीं था। सारे मेहमान लॉन में इक्क्ठा थे , रुचिका और मोंटी भी आ चुके थे। सभी मेहमान उन दोनों से मिल रहे थे अभी सगाई शुरू होने में वक्त था। मोंटी ने रुचिका को गाउन में देखा तो बस देखता ही रह गया। डार्क रेड गाउन और उसके साथ मैचिंग जेवेलरी में रुचिका बहुत प्यारी लग रही थी। सार्थक भी कम नहीं लग रहा था आज रुचिका की सारी सहेलिया बस उसी को देखे जा रही थी। सभी हंसी मजाक में लगे थे रुचिका की सहेलिया और मोंटी के दोस्त आपस में सब एक दूसरे की खिंचाई कर रहे थे की मोंटी के पास बॉस का फ़ोन आया मोंटी ने सबको एक्सक्यूज मी कहा और साइड में जाने लगा। म्यूजिक की वजह से कुछ साफ सुनाई नहीं दे रहा था। मोंटी फोन कान से लगाए चला जा रहा था तभी सामने से आते किसी से टकरा गया और झुंझलाकर कहा,”ओह्ह हेलो देख के नहीं चल सकते क्या ?”
“आप गलत वे से आ रहे है , मैं देख कर ही चल रहा हूँ”,सामने खड़ी अवि ने शालीनता से कहा
“मेरी मर्जी मैं कही से भी आउ ,,,, बुलाया किस ने है तुम्हे यहाँ ?”,कहते हुए मोंटी हेलो हेलो बोलता हुआ आगे बढ़ गया। अवि ने अपने शर्ट में आयी सलवट सही की और आगे बढ़ गया। अवि रुचिका के पास आया और अपने हाथ में पकड़ा गिफ्ट उसे देकर कहा,”मुबारक हो प्रिंसेज”
“अवि,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मुझे पता था तुम जरूर आओगे”,कहते हुए रुचिका उसके गले लग गयी अवि भी मुस्कुरा उठा और कहा,”अरे इतना बड़ा दिन हो और मैं ना आउ ऐसे कैसे हो सकता है”
रुचिका उस से दूर हुई और उसका इंट्रोडक्शन अपनी दोस्तों से करवाया। रुचिका की सभी दोस्त तो बस अवि को देखते ही रह गयी। ब्लैक शर्ट , उस पर व्हाइट लेदर जैकेट लाइट ग्रे पेंट , हाथ में महंगी घडी , पॉलिश किये हुए जूते , बालो को अच्छे से जमा रखा था और हल्की सेट की हुई दाढ़ी में वह बहुत अच्छा लग रहा था। रुचिका की दोस्तों को अपनी और देखता पाकर अवि थोड़ा सा शरमा गया और रुचिका से कहा,”रूचि मैं आता हूँ”
“हां , एंड बी कम्फर्टेबल”,रुचिका ने मुस्कुरा कर कहा तो अवि वहा से चला गया। रुचिका की सभी दोस्तों ने रुचिका को घेर लिया और पूछने लगी,”यार कौन है ये हेंडसम ?,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,उफ़ क्या दिखता है यार ये लड़का,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मुझे ऐसा लड़का मिले मैं तो अभी उस से शादी कर लू”
“अरे रुको रुको रुको,,,,,,,,,,,,,,,,उस पर ट्राय करना बेकार है वो पहले से किसी के प्यार में है”,रुचिका ने सबको शांत करवाते हुए कहा
“ये अच्छे लड़के इतनी जल्दी कमिटेड क्यों हो जाते है यार ?”,रुचिका की एक दोस्त ने कहा और फिर सब बातो में लग गयी। अवि वहा से निकल कर कॉफी स्टॉल की और आया उसने अपने लिए एक कॉफी ली और कोई एकांत कोना ढूंढने लगा हॉल के गेट के पास आकर अवि खड़ा हो गया और कॉफी पीने लगा ठंड थी और ऐसे में गर्म गर्म कॉफी को कौन भला ना कहेगा ? वह कॉफी पी रहा था की उसकी नजर हॉल के अंदर सीढ़ियों से निचे आती किसी लड़की पर पड़ी अवि को उसका चेहरा दिखाई नहीं दिया बस साड़ी में लिपटी कमर दिखाई दे रही थी। अवि ने नजरे घुमा ली और वापस कॉफी पीने लगा तभी उसके कानो में जानी पहचानी आवाज पड़ी,”ओये पडोसी !”

अवि ने पलटकर देखा तो बस देखता ही रह गया। उसका दिल इतना तेज धड़क रहा था की लगा जैसे बाहर आ गिरेगा , पलकों ने झपकने से इंकार कर दिया क्योकि वे उस नज़ारे को मिस नहीं करना चाहती थी। हाथ से छूटकर कॉफी का खाली ग्लास निचे जा गिरा और अवि वह बस नैना को देखे जा रहा था , काले रंग की लाल झिरी वाली साड़ी में लिपटी नैना बला की खूबसूरत लग रही थी। रेड कलर का स्लीवलेस , हाई नेक ब्लाउज उस साड़ी को और भी खूबसूरत लुक दे रहा था। मेकअप के नाम पर बस नैना के होंठो पर लिपस्टिक थी काजल का शौक उसे कभी नहीं रहा , हाथ में एक प्लेटिनम वाच और कानो में मैचिंग के ईयर रिंग्स थे , बालो को उसने खुला करके एक साइड किया हुआ था ,, उसके कपड़ो से आती परफ्यूम की महक ने अवि के होश ही उड़ा दिए थे। नैना उसके सामने आयी और हाथ हिलाते हुए कहा,”ओह्ह हेलो पडोसी ! कहा खोये हो ?”
नैना को अपने करीब देखकर अवि होश में आया और कहा,”तुम तुम सच में हो,,,,,,,,,,,!”
“नहीं मेरा भूत खड़ा है ,, अभी तुम्हे काटेगा देखना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, क्या पडोसी तुम भी ? मैं ज़िंदा खड़ी हूँ तुम्हारे सामने”,नैना ने कहा
“एक्चुअली मुझे लगा तुम उस दिन वाली बात पर नाराज हो शायद और मुझसे बात नहीं करोगी”,अवि ने कहां
“अच्छा वो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,वो तो मैं कब का भूल चुकी। ये बताओ तूम यहाँ क्या कर रहे हो ?”, नैना ने पूछा
“बस यू ही टहलने आया था”,अवि ने कहा
“हा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या क्या क्या ?”,नैना ने पहले हामी भरी और फिर अचानक से कहा
“रूचि की सगाई है तो जायज सी बात है की सगाई में ही आया हूँ”,अवि ने कहा
“हम्म्म ! चलो चलते है”,कहते हुए नैना जैसे ही जाने लगी हील की वजह से लड़खड़ा गयी अवि ने उसका हाथ पकड़कर उसे गिरने से बचा लिया। नैना ने अवि की और देखा तो पाया की अवि एकटक उसकी आँखों में ही देखे जा रहा है। उसने नैना को अपनी और खिंचा और कहा,”तुम लड़खड़ाती बहुत हो नैना”
नैना ने कुछ नहीं कहा और जाने लगी तो फिर से लड़खड़ाई लेकिन इस बार खुद ही सम्हल गयी अवि ने देखा नैना के सेंडल्स का हुक खुला था और इस वजह से वह बार बार बीच में आ रहा था। वह नैना के सामने आया और कहा,”एक मिनिट प्रॉब्लम तुम्हारी सैंडिल्स है”
नैना देखने के लिए झुकने को हुई तो अवि ने उसे रोका और खुद नीचे बैठकर उसकी सेंडिल का हुक लगाने लगा नैना ने देखा तो उसे बड़ा अजीब लगा क्योकि आज से पहले उसने किसी को ये करते नहीं देखा था। हुक लगाकर अवि जैसे ही खड़ा हुआ नैना ने कहा,”मैं कर लेती”
“इट्स ओके ! ये करने से मैं छोटा थोड़ा हो गया ,, वैसे भी तुम करती तो तुम्हे झुकना पड़ता एंड तुम्हारी साड़ी की वजह से सब दिखता , मैं नहीं चाहता तुम्हे कोई और देखे”,अवि ने आखिर के शब्द धीरे कहे , नैना ने उसके चेहरे की और देखा कोई घमंड नहीं , कोई ऐटिटूड नही वह जाने लगी दो कदम चलकर रुकी और पलटकर कहा,”वैसे तुम्हे पता है मैं हमेशा तुम्हारे सामने ही लड़खड़ाती हूँ”
“हां क्योकि उपरवाले को पता है ये सम्हाल लेगा”,अवि ने प्यार से नैना को देखते हुए कहा
“मुझे तो ऐसा नहीं लगता”,नैना ने कहा
“तुम हाथ थामने का मौका तो दो जिंदगी भर नहीं गिरने दूंगा”,अवि ने कहा तो नैना खामोश हो गयी और कुछ देर बाद कहा,”चले !”
“हम्म्म !”,कहते हुए अवि नैना के साथ साथ चलने लगा।

साथ साथ चलते हुए दोनों लॉन में आये सबकी नजर उन दोनों पर ही थी , रुचिका और मोंटी को साइड करके देखा जाये तो सबसे प्यारा कपल वही था उस शाम। अभी कुछ ही दूर चले थे की विपिन जी नजर अवि पर पड़ी और वे ख़ुशी ख़ुशी उसके पास आये और कहा,”अरे अवि बेटा तुम , अरे अरे बहुत अच्छा हुआ तुम आये”
“नमस्ते अंकल ! वो रुचिका दोस्त है आना इसलिए उसने बुला लिया”,अवि ने कहा
“हां हां दोस्तों के बिना रखा ही क्या है ? कुछ खाया पीया की ऐसे ही घूम रहे हो ?”,विपिन जी ने पूछा तो अवि ने हामी भर दी। विपिन जी अपने साथ खड़े लोगो से अवि को मिलाने लगे। नैना ने देखा ऐसा करते हुए विपिन की आँखो में एक अलग ही चमक और होंठो पर मुस्कान थी। रुचिका की आवाज से नैना का ध्यान भटका और वह उसकी और चली गयी। तब तक मोंटी भी आ गया और जब नैना को देखा तो आज वह भी उसे देखता ही रह गया ,,, नैना बहुत खूबसूरत लग रही थी !
“क्यों बोला था ना तेरी सगाई में मैं तुझसे ज्यादा मैं दिखने वाली हूँ”,नैना ने चहकते हुए कहा
“जहर लग रही हो बेटा,,,,,,,,,,,,,,,,,,आज अगर सगाई नहीं होती ना तो भगाकर ले जाता तुझे”,मोंटी ने कहा
“वैरी फनी,,,,,,,,,,,,,,,,मेरी दोस्त को धोखा देने का सोचा भी ना तो इस से पहले मैं तेरा खून कर दूंगी”,नैना ने कहा
“देखा नैना कैसे लाइन मार रहे है मानव जी”,रुचिका ने इतनी इज्जत से कहा तो मोंटी और नैना दोनों ही उसे आँखे फाड़कर देखने लगे रुचिका ने उन्हें ऐसे देखते पाया तो कहा,”क्या हुआ ?”
“ये किस लाइन में आ गयी हो बहन ? कही तुम एजी ओजी करने का तो नहीं सोच रही,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ना ना ना ना बेटा पांडा बिल्कुल नहीं , ये आप जी जा यहाँ नहीं ,, बाबू शोना वाली उम्र नहीं रही है तुम्हारी का समझी ?”,नैना ने हैरानी से कहा
“अरे ! शादी के बाद इनको आप कहके तो बुलाना होगा ना बस अभी से प्रेक्टिस कर रही हूँ”,रुचिका ने कहा
“रूचि तुम्हे कुछ करने की जरूरत नहीं है , शादी से पहले हम दोस्त है और अगर शादी के बाद भी ये दोस्ती रही तो एक दूसरे को समझने में आसानी होगी इसलिए तुम्हे जो अच्छा लगे तुम उस नाम से बुलाना ये आप बुलाने की जरूरत नहीं है”,मोंटी ने कहा !
“ओके , मुझे भी अजीब लग रहा था वो तो मौसीजी ने कहा इसलिए”,रुचिका ने खुश होकर कहा
“अबे रिश्तेदारों का काम है फट्टे में टाँग अड़ाना”,नैना ने कहा
“ओह्ह बेटा जी तुम अब शुरू मत हो जाना प्लीज ,, आज मेरी सगाई है कोई गाली गलौच नहीं ठीक है”,मोंटी ने कहा तो नैना ने अपनी भँवे उचका दी की नजर कुछ ही दूर खड़े अवि पर गयी उसने नैना को साइड में लाकर कहा,”ये लड़का कौन है ? और अंकल के साथ क्या कर रहा है ?”
“दोस्त है !”,नैना ने बिना किसी भाव के अवि की और देखकर कहा
“तुम्हारा ?”,मोंटी ने चौंकते हुए कहा
“नहीं डेड का दोस्त है”,नैना ने कहा
“तेरे डेड पागल है क्या ?”, मोंटी ने अवि और विपिन जी को साथ देखकर कहा
“ए ! मैं मुंह तोड़ दूंगी तेरा मेरे डेड के बारे में कुछ कहा तो”,नैना ने मोंटी को घूरते हुए कहा
“मेरा मतलब अपनी से आधी उम्र के लड़के को दोस्त बनाया है ,, समझ नहीं आया कुछ”,मोंटी ने कहा
“तो बेटा इतनी चूल मची है ना तो खुद जाकर पूछ ले”,कहकर नैना चली गयी और मोंटी ने कहा,”पागल लड़की जरा जरा सी बात पर गुस्सा जाती है”


सभी हंसी ख़ुशी बातो में लगे थे कुछ देर बाद रिंग सेरेमनी की अनाउंसमेंट हुई सभी जमा हो गए। स्टेज पर मोंटी और रुचिका अपने अपने हाथो रिंग लेकर खड़े थे। अवि भीड़ में सबसे पीछे एक साइड खड़ा था उसकी नजरे सिर्फ नैना को ढूंढ रही थी। रुचिका थोड़ी उदास थी क्योकि शीतल नहीं आयी थी तीन खास लोगो में अवि और सार्थक के अलावा शीतल ही थी जिसे रुचिका बहुत मिस कर रही थी। सार्थक ने अवि को वहा देखा तो वह भी आकर उसके पास खड़े हो गया। पंडित जी ने जैसे ही एक दूसरे को अंगूठी पहनाने को कहा अचानक से सभी लाइट्स डिम हो गयी और स्पीकर्स में आवाज आयी,”अटेंशन प्लीज ! जैसा की आज मेरी बेस्ट फ्रेंड रुचिका और दुसरा भी बेस्ट फ्रेंड ही है मानव उर्फ़ मोंटी की जिंदगी की आज से नयी शुरुआत होने वाली है ,,, क्यों ना इस बोरिंग शाम को थोड़ा यादगार बनाया जाये”
कहकर नैना जैसे ही रुकी एक साथ सभी लाइट्स जल उठी !
सबने देखा नैना स्टेज के कॉर्नर पर माइक हाथ में लिए खड़ी है। मोंटी के दोस्त तो बस उसे आहे भरते हुए देख रहे थे। अवि भी उतने ही प्यार से नैना को देख रहा था। नैना ने आगे बोलना शुरू किया,”सो कुछ लाइन्स मेरी तरफ से मेरे दोनों दोस्तों के लिए
“जिंदगी को जो जन्नत बनाये वो होते है दोस्त !
खाली झोली को खुशियों से भर जाये वो होते है दोस्त !!
जिनकी बेफिजूल बातो पर भी हम मुस्कुराये वो होते है दोस्त !
अपने हिस्से में से बचाकर उन्हें खिलाये वो होते है दोस्त !!
जो इनके सारे सीक्रेट्स छुपाये वो होते है दोस्त !
फिर उन्ही सीक्रेट्स की बदौलत अपना हर काम करवाए वो होते है दोस्त !! (हंस पड़ती है नैना)
सीधी बातो को भी उलटे तरीके से समझाए वो होते है दोस्त !
और ना समझे तो दोस्तों की गालिया भी खाये वो होते है दोस्त !!
नयी नयी मुसीबत में डाले वो होते है दोस्त !
फिर हाथ पकड़ उनसे बाहर निकाले वो होते है दोस्त !!
मत पूछो कितना सताते है ये दोस्त !
जब दूर होते है तो बहुत याद आते है ये दोस्त !!
कहते कहते नैना को शीतल का ख्याल आया और वह उदास हो गयी , आज यहाँ सब मौजूद थे बस वही नहीं थी उसकी नाराजगी नैना समझ ही नहीं पाई थी। उसकी आँखों में हल्की सी नमी तैर गयी रुचिका समझ गयी वह नैना के पास आयी और हग करके धीरे से कहा,”मैंने उसे बहुत फोन किये पर वो नहीं आयी”
“सॉरी , मैं आगे नहीं बोल पाऊँगी ! रिंग सेरेमनी शुरू करते है”,नैना ने होंठो पर झूठी मुस्कान लाकर कहा और रुचिका के साथ मोंटी की तरफ बढ़ गयी। अगले ही पल स्पीकर्स पर एक जानी पहचानी आवाज उभरी जिसे सुनकर रुचिका नैना ने हैरानी से एक दूसरे की और देखा
“अनजान से जो जान बन जाये वो होते है दोस्त !
उदास लबों की मुस्कान बन जाये वो होते है दोस्त !!
बिना गलती के जो मुझसे थप्पड़ खाये वो होते है दोस्त !
मेरी बेवकूफियों पर जिसको हमेशा गुस्सा आये वो होते है दोस्त !!
सबने पलटकर देखा नीले रंग का सूट पहने गले में दुपट्टा लगाए हाथो में माइक लेकर बोलते हुए शीतल चली आ रही थी नैना ने जैसे ही उसे देखा उसकी आँखो में ख़ुशी के आंसू उतर आये जिन्हे नैना ने रोक लिया रुचिका ने तो मारे ख़ुशी के नैना को झप्पी दे दी और पप्पी भी। शीतल धीरे धीरे स्टेज की और बढ़ने लगी और कहने लगी
“दोस्त का जो ब्रेकअप करवाए वो होते है दोस्त !
समझाने के नाम पर जो लंबा सा लेक्चर दे जाये वो होते है दोस्त !!
आधी रात में भी मुझसे चाय बनवाये वो होते है दोस्त !
खुद भले जागती रहे पर चैन से मुझे सुलाए वो होते है दोस्त !!
दोस्ती कोई रिश्ता नहीं ये तो है ऊपर वाले की बंदगी
तुम जैसे दोस्तों को पाकर तो कहने का दिल करता है – लव यू जिंदगी ,, लव यू जिंदगी ,,लव यू जिंदगी !!
लॉन तालियों से गूंज उठा !!

क्रमश – Love You Zindagi – 83

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संजना किरोड़ीवाल !

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