Love You जिंदगी – 70
Love You Zindagi – 70

अवि के गले लगे हुए नैना सब भूल चुकी थी। कुछ देर के लिया वह ना कुछ सोचना चाहती थी ना ही कुछ बोलना बस खामोश आँखे बंद किये वह अवि के सीने से लगी थी। अवि के धड़कते दिल को नैना साफ सुन पा रही थी , अवि बस खामोश खड़ा था उसके दोनों हाथ हवा में थे नैना को छूने से भी काँप रहे थे क्योकि उसने कभी सोचा नहीं था नैना उसे ये हक़ भी देगी पर नैना को इस वक्त छूने की हिम्मत उसमे नहीं थी।
नैना को अहसास हुआ तो वह अवि से दूर हुई उसे कुछ पल के लिए समझ ही नहीं आया की उसने कहा,”सॉरी !”
“नो इट्स ओके , तुम ठीक हो ?”,अवि ने सवाल किया
“या आई ऍम ओके”,नैना ने कहा जबकि उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था की वो ठीक नहीं थी अवि ने उसका हाथ पकड़ा और उसे दिवार पर बैठने का इशारा किया
साथ ही खुद भी नैना की बगल में कुछ दूरी बनाकर बैठ गया और कहने लगा,”मैं जानता हूँ इस वक्त तुम थोड़ा हर्ट हो रूचि और शीतल के बिहेव से , पर नैना जिंदगी वैसी नहीं है जैसा तुम देखती हो। तुम हर चीज , हर सिचुएशन , हर इंसान को अलग नजर से देखती हो शायद इसलिए तुम्हे सब आसान लगता है। शीतल रुचिका दोनों की लाइफ अलग है मैं ये नहीं कह रहा की वो दोनों सही है और तुम गलत हो ,, पर हर कोई अपनी जगह सही होता है।”
“हम्म्म आई नो , मैं बचपन से ऐसी ही हूँ जो लोग मुझसे क्लोज है उन्हें प्रॉब्लम में नहीं देख पाती और यही वजह है की मुझसे रिश्ते सम्हाले नहीं जाते। रिश्तो से दूर भागना मेरी आदत नहीं मेरी मज़बूरी है”,नैना के होंठो पर एक दर्दभरी मुस्कान उभर आती है जो की अवि के दिल को चुभती है वह नैना की आँखों में देखता रहा तो नैना ने मुस्कुरा कर कहा,”क्या पडोसी तुम फिर से आँखों में देखकर जादू करने की कोशिश कर रहे हो ?”
नैना की बात सुनकर अवि मुस्कुरा उठा और सामने देखते हुए कहने लगा,”तुम पर मेरा कोई जादू असर नहीं करेगा , मेरा क्या किसी का भी नहीं करेगा”
नैना ने कुछ नहीं कहा बस सामने खाली पड़े आसमान को देखने लगी तो अवि ने कहा,”वैसे मुझे नहीं लगता रुचिका और शीतल ज्यादा दिन तुमसे दूर रह पायेगी , देखना जल्दी ही लौट आएगी”
“हां पता है , जब मोहब्बत लात मारती है ना तो सबसे पहले दोस्त ही याद आते है ,, उन्हें भी अकल आ जाएगी कभी।”,नैना ने बेपरवाही से कहा
“तो तुम नाराज नहीं हो उनसे ?”,अवि ने सवाल किया
“एक ही तो जिंदगी है किस किस से नाराज रहेंगे ? वैसे भी दोस्ती और प्यार में अक्सर लात दोस्ती को ही पड़ती है”,नैना ने कहा
“बस यही बाते तो तुम्हे सबसे अलग बनाती है !”,अवि ने प्यार से नैना को देखते हुए कहा
नैना ने कुछ नहीं कहा बस चुपचाप बैठी रही तो अवि ने ही माहौल को थोड़ा सामान्य करने के लिए कहा,”वैसे मैंने सोचा नहीं था तुम गिटार भी बजा लेती हो”
“कॉलेज में सीखा था उसके बाद कभी मन नहीं किया , हां तुम काफी अच्छा बजाते हो !”,नैना ने कहा
“ओह्ह्ह मतलब तुमने मुझे नोटिस किया ,, वाओ सो नाइस”,अवि ने क्यूट सी स्माइल के साथ कहा
“अहहहह ऐसा कुछ नहीं है मतलब वहा से गुजरते हुए देखा था !”,नैना ने कहा
“ज़रा वो गिटार देना !”,अवि ने कहा तो नैना ने साइड में पड़ा गिटार उठाकर अवि को दे दिया अवि ने उसे देखा और कहा,”बड़ी बुरी हालत में है ये , खैर बताओ क्या सुनना पसंद करोगी ? मेलॉडी , इंस्ट्रुमेंटल या फिर रोमांटिक”
“नथिंग !”,नैना ने बुझे मन से कहा
“कितनी बोरिंग हो ना तुम”,अवि ने मुंह बनाकर कहा
“अच्छा ठीक है”,नैना ने कहा तो अवि गिटार को सेट करके उसपर कोई धुन बजाने लगा , साथ ही नैना को देखते हुए गुनगुनाने लगा – वो देखने में कितनी सीधी सादी लगती है
बोलती कि वो तो कुछ नहीं समझती अंदर से कितनी तेज़ है
कभी अजीब सी कभी हसीन लगती
कभी किसी किताब का ही सीन लगती फिलोसॉफी का क्रेज़ है
हो कहती है ये एक फेज़ है
वो देखने में…
वो देखने में कितनी सीधी सादी लगती है”
अवि का गाना सुनकर नैना मुस्कुराने लगी दरअसल अवि ने जान बूझकर ऐसा गाना गया जो की नैना से मिलता जुलता था। अवि रुक गया तो नैना ने कहा,”और कितना टेलेंट छुपा है तुम्हारे अंदर ?”
“मैं सबके लिए नहीं गाता हूँ मिस नैना , बस उनके लिए जो स्पेशल हो”,अवि ने गिटार साइड में रखकर कहा
“सो अब तक कितने लोगो के लिए गाया है ?’,नैना ने भी पूछ लिया
“तुम पहली हो”,अवि ने नैना की आँखों में देखते हुए कहा। अवि का इस तरह देखना नैना को बैचैन कर देता था उसने उठते हुए कहा,”आई थिंक मुझे अब चलना चाहिए।” नैना कुछ ही कदम चली की अवि ने कहा,”नैना !”
“हम्म्म !”,नैना ने पलटकर कहा
“खाना खाया तुमने ?”,अवि ने पूछ लिया
“नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,भूख नहीं है !”,कहकर नैना वहा से चली गयी और निचे अपने फ्लैट में चली आयी।
आज पुरे फ्लैट में नैना अकेले थी ना खिंचाई करने के लिए रुचिका थी और ना ही बहस करने के लिए शीतल। बुझे मन से नैना सोफे पर आकर लेट गयी घडी में रात के 11.30 बज रहे थे। नैना लेटी रही और घडी को देखती रही घडी की टिक टिक घर में गूंज रही थी। कुछ देर बाद बेल बजी नैना उठी और दरवाजा खोला तो वहा कोई नहीं था पलटकर वह जाने लगी तो उसकी नजर निचे रखी बड़ी कटोरी पर पड़ी नैना ने उसे उठाया तो उसके निचे एक चिट भी रखी थी
नैना ने उसे उठाकर देखा लिखा था – किसी का गुस्सा खाने पर नहीं निकालते है,,,,,,,,,,,,,,,,,खा लेना !”
नैना समझ गयी वो कटोरी वहा अवि ने रखी है नैना उसे लेकर अंदर चली आयी। नैना ने ढक्कन हटाकर देखा तो उसमे उसके पसंदीदा नूडल्स थे। नैना सोफे पर बैठकर उन्हें खाने लगी।
नूडल्स खाने के बाद नैना को थोड़ा अच्छा महसूस हो रहा था। वह वही सोफे पर ही सो गयी। अगली सुबह अवि जल्दी उठा और अपना बैग , केमेरा और अपने फोटोज लेकर निकल गया। आज उसका दिल्ली में आखरी एग्जीबिशन था उसके बाद उसे वापस चंडीगढ़ जाना था। अवि ने इस एग्जीबिशन के लिए बहुत मेहनत की थी। अवि एग्जीबिशन में पहुंचा और अपने फोटोग्राफ्स सबमिट किये जिनमे सबसे खूबसूरत फोटो तो नैना का जो उसने पिछली रात ही नैना को बिन बताये उसने क्लिक की थी जब नैना सैड होकर गिटार पकडे हुई थी।
उस तस्वीर में सबसे बेस्ट इमोशन था जिसे अवि ने ब्रोकन हार्ट के नाम से रिलीज किया। काफी लोगो ने उस तस्वीर को पसंद किया और उसे तस्वीर को पहले नंबर पर रखा गया। अवि की ख़ुशी का तो जैसे कोई ठिकाना ही नहीं रहा। दिनभर वह इन्ही सब में लगा रहा , बिच बिच में नैना को मिस भी करता रहा लेकिन नैना वहा नहीं थी।
अपार्टमेंट में आज आखरी सभी उदास थे क्योकि माँ की मूर्ति का विसर्जन करना था। रुचिका शीतल जा चुकी थी ऐसे में नैना का मन नहीं था निचे जाने का लेकिन माँ की स्थापना भी उसी ने करवाई थी इसलिए विसर्जन करना भी बनता था।
तैयार होकर नैना निचे आयी उसने पिले रंग का कुरता जींस पहना था। सार्थक मोंटी और अपार्टमेंट के सभी लोग मौजूद थे नैना भी उनके पास चली आयी और होंठो पर अपनी पहले वाली मुस्कराहट ले आयी। सभी नाचते कूदते , हँसते गाते विसर्जन के लिए चले गए। विसर्जन के दौरान सभी हाथो में रंग लिए एक दूसरे को लगा रहे थे नैना भीड़ में खड़ी थी तभी उसने देखा सामने से अवि आ रहा था , उसकी मुट्ठी बंद थी जिसमे से रंग छिटक रहा था।
नैना की और देखते हुए अवि उसकी तरफ बढ़ रहा था और उसी के साथ बढ़ रही थी नैना के दिल की धड़कने ,, उसे वहा मौजूद भीड़ धुंधली दिखाई दे रही थी बस एक अवि साफ नजर आ रहा था। अवि नैना के सामने आया और अपने दोनों हाथो से नैना के गालो पर रंग लगा दिया सिहरन से नैना की आँखे खुली की खुली रह गयी नैना के गालो पर लगा वो लाल रंग बहुत प्यारा लग रहा था।
उसके बालो की लट उसके गाल पर झूलने लगी तो अवि उसके थोड़ा पास आया और धीरे से फूंक मारते हुए उसे पीछे कर दिया उसकी सांसो से आती महक नैना को महसूस हो रही थी। अवि की आँखों में देखते हुए नैना जैसे खामोश हो गयी कुछ बोल नहीं पा रही थी बस एकटक उसे देखे जा रही थी।”
“नैना,,,,,,,,,,,,,,,,,,नैना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,चलो सब चले गए है”,सार्थक ने नैना को झंकझोड़ कर कहा। नैना जैसे नींद से जागी और देखा वहा सामने सार्थक खड़ा था ना अवि था ना भीड़ थी ना कुछ और साथ वाले आगे निकल गए थे।
नैना ने दो चार बार अपनी आँखों को मसला सब साफ था अवि वहा नहीं था ! “नैना,,,,,,,,,,,,,,तुम ठीक हो ?”,सार्थक ने फिर पूछा
“हां हां मैं ठीक हूँ,,,,,,,,,,,,,,,चलो चलते है”,नैना ने कहा और सार्थक के साथ वहा से चली गयी। मातारानी का विसर्जन हुआ सभी वापस अपार्टमेंट लौट आये। अधिराज जी ने फोन किया और नैना से दिवाली पर घर आने को कहा तो नैना ने भी आने की हामी भर दी क्योकि यहाँ शीतल और रुचिका के बिना उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। दिनभर वह अपने फोन की स्क्रीन देखती रही लेकिन रुचिका और शीतल का कोई मैसेज या फोन नहीं आया था।
नैना सो गयी शाम को आँखे खुली , दिल्ली में अब ठण्ड थोड़ी बढ़ने लगी थी नैना ने अपने लिए चाय बनायीं और बालकनी में आकर पीने लगी। दूसरी तरफ दिनभर काम करने के बाद अवि थका हारा वापस आया लेकिन वह बहुत खुश था क्योकि उसकी एग्जीबिशन बहुत अच्छी गयी थी थोड़ा उदास भी था की अब उसे वापस चंडीगढ़ जाना है और उसके बाद शायद वह कभी नैना से नहीं मिल पायेगा। अवि अपने फ्लेट में आया और फ्रेश होने के बाद बिस्तर पर आकर लेट गया !
अगली सुबह अवि उठा तो उसे सौंदर्या जी का मेसेज मिला की वे लोग दिल्ली पहुंचने वाले है और उस से सीधा मैक्स मॉल में मिलेंगे। दरअसल सौंदर्या जी को वहा कुछ काम था और मैक्स मॉल एयरपोर्ट के पास ही था इसलिए उन्होंने अवि को वहा बुला लिया। अवि ने मैसेज देखा तो उसकी आँखे झट से खुल गयी वह उठकर बिस्तर पर बैठ गया देखा घडी में सुबह के 9 बज रहे थे।
अवि ने जल्दी से अपनी टीशर्ट उठायी और दरवाजे के बाहर आया। उसने नैना के फ्लैट का दरवाजा खटखटाया नैना ने आँखे मसलते हुए दरवाजा खोला नैना कुछ कहती इस से पहले ही अवि उसे लेकर अंदर आया और कहा,”उस दिन तुमने मुझसे कहा था की तुम मेरी हेल्प करोगी ,, आई नीड योर हेल्प”
“इतनी सुबह सुबह हेल्प कौन मांगता है यार ?”,नैना ने नींद से ग्रसित होकर कहा
“यार हेल्प भी कोई वक्त देखकर मांगी जाती है क्या ? प्लीज़ यार नैना”,अवि ने कहा तो नैना ने उबासियाँ लेकर कहा,”ओके बोलो क्या करना है ?”
“लिस्टन मेरे पेरेंट्स यहाँ है दिल्ली में एंड मॉम तुमसे मिलना चाहती है”,कहकर अवि ने अपना होंठ दांतो तले दबा लिया और कन्फूजन वाली स्तिथि में नैना की और देखने लगा। नैना ने सूना तो उसने कहा,”व्हाई ? मुझसे क्यों मिलना है उनको ? वेट वेट तुमने उन्हें मेरे बारे में कुछ बोला तो नहीं है लाईक अपने परपोजल को लेकर”
“अगर इसे सच बता दिया तो ये बिल्कुल नहीं जाएगी , सॉरी नैना लेकिन पहली बार झूठ बोलना पडेगा हम दोनों के लिए”,अवि ने मन ही मन कहा और फिर नैना से कहा,”नो नो नो ऐसा कुछ भी नहीं बस मैंने बताया था की तुम लोग मेरी पडोसी हो देन मॉम सेड मिलना है ,, प्लीज नैना मैंने उन्हें हां कह दिया है प्लीज”
नैना की अवि ने हमेशा हेल्प की थी और यही सोचकर नैना ने उसे हां कह दिया और कहा,”ओके डन मैं तुम्हे सीधा मैक्स मॉल ही मिलूंगी”
“थैंक्यू !”,अवि ने कहा और वहा से चला गया नैना भी नहाने चली गयी अवि अपने फ्लैट में आकर तैयार होकर वहा से निकल गया। नैना नहाकर आयी उसने देखा कबर्ड में सिर्फ वही सफेद कुर्ता रखा हुआ था जो उसने नवरात्री के पहले दिन पहना था बाकि कपडे धोने के लिए रखे हुए थे। नैना ने जींस और वही कुर्ता पहना। ऑफिस में कुछ काम था इसलिए नैना को पहले वहा जाना पड़ा आजा नैना को कुर्ते में देखकर सब हैरान थे क्योकि उसका ड्रेसिंग सेन्स हमेशा सबसे अलग रहा था।
ऑफिस की दिवाली की छुट्टियां शुरू होने वाली थी ऐसे में नैना ने सारे प्रोजेक्ट्स सब्मिट किये और 1 बजे वहा से निकल गयी। अवि के मम्मी पापा दिल्ली पहुँच चुके थे और अवि भी उनसे मिलकर बहुत खुश था। उन्होंने मिलकर शॉपिंग की बातें की और फिर आकर कैफे में बैठ गए। सौंदर्या ने अवि से नैना के बारे में पूछा लेकिन नैना अभी तक नहीं आयी थी।
कुछ देर बाद अवि को नैना आते हुए दिखी अवि उठकर उसके पास आया और कहा,”थैंक्स फॉर कमिंग , मॉम डेड वहा है उनसे मिलना है बस प्लीज कुछ मत बोलना सिर्फ हां ना प्लीज क्योकि मॉम नहीं जानती नैना बजाज कौन है ?”
“ये रिक्वेस्ट है या आर्डर ?”,नैना ने भँवे चढ़ाकर पूछा
“रिक्वेस्ट है मेरी माँ”,अवि ने अपने हाथ जोड़कर कहा और फिर नैना के साथ अपने पेरेंट्स के सामने आया नैना ने उन्हें नमस्ते कहा।
दोनों ने उन्हें बैठने को कहा नैना उनके सामने आ बैठी कुछ देर बाते हुए जिसमे नैना ने बहुत कम बोला कुछ देर बाद सौंदर्या जी ने कहा,”नैना बाहर चले”
“या स्योर !”,नैना उठी और सौंदर्या के साथ चली गयी पीछे से अवि फिंगर क्रॉस कर रहा था की कुछ गड़बड़ ना हो। सौंदर्या नैना से बाते करते हुए चली जा रही थी और नैना बस हां हूँ में जवाब दे रही थी तभी सौंदर्या ने कहा,”बेटा आप तो बहुत शाय हो कुछ बोल ही नहीं रहे”
“अह्ह्ह्ह नो आंटी ऐसा कुछ नहीं है”,नैना ने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा क्योकि वह अवि की मॉम के साथ फंस चुकी थी अभी कुछ ही कदम आगे बढ़ाये थे की सामने से आता लड़का नैना से टकरा गया और उसके हाथ में पकड़ी कॉफी नैना के ऊपर जा गिरी और नैना के मुंह से निकला अबे देख के चल ना चू#ये ,, आँखे नहीं है क्या ?”
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संजना किरोड़ीवाल


थैंक्यू !”,अवि ने कहा और वहा से चला गया नैना भी नहाने चली गयी अवि अपने फ्लैट में आकर तैयार होकर वहा से निकल गया। नैना नहाकर आयी उसने देखा कबर्ड में सिर्फ वही सफेद कुर्ता रखा हुआ था जो उसने नवरात्री के पहले दिन पहना था बाकि कपडे धोने के लिए रखे हुए थे। नैना ने जींस और वही कुर्ता पहना। ऑफिस में कुछ काम था इसलिए नैना को पहले वहा जाना पड़ा आजा नैना को कुर्ते में देखकर सब हैरान थे क्योकि उसका ड्रेसिंग सेन्स हमेशा सबसे अलग रहा था। ऑफिस की दिवाली की छुट्टियां शुरू होने वाली थी ऐसे में नैना ने सारे प्रोजेक्ट्स सब्मिट किये और 1 बजे वहा से निकल गयी।