हाँ ये मोहब्बत है – 51

Haan Ye Mohabbat Hai – 51

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Haan Ye Mohabbat Hai – 51

शाम में अर्जुन और सोमित जीजू बिना किसी को बताये मीरा से मिलने अमर जी के घर की ओर निकल गए। अर्जुन ने देखा दरवाजे पर गार्ड खड़ा है तो उसने गाड़ी का शीशा नीचे किया और कहा,”अरे अंकल गेट खोलिये हम लोग मीरा से मिलने आये है”
“बाहर के किसी का भी अंदर आना मना है”,गार्ड ने कहा
“अरे अंकल आप हम लोगो को नहीं जानते , हम लोग उसके ससुराल से आये है ,, मैं अक्षत का बड़ा भाई हूँ और ये सोमित जीजू है,,,,,,,,,,,आप मीरा से जाकर कहिये की हम लोग उसने मिलने आये है”,अर्जुन ने कहा


“अरे भाई तुमको कहा ना किसी का भी अंदर आना मना है , चलो जाओ यहाँ से”,गार्ड ने बिगड़ते हुए कहा
“ये क्या मामला है अर्जुन ? ये गार्ड हमे अंदर क्यों नहीं जाने दे रहा ?”,सोमित जीजू ने हैरानी से कहा
“वही मैं नहीं समझ पा रहा जीजू , आईये देखते है”,कहते हुए अर्जुन ने गाड़ी साइड लगाईं और सोमित जीजू के साथ गार्ड के पास चले आये।
“क्यों भई गार्ड साहब अंदर क्यों नहीं जाने दे रहे ?”,सोमित जीजू ने कहा


“अमर साहब का आदेश है किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जाये , अगर ऐसा किया तो मेरी नौकरी चली जाएगी”,गार्ड ने कहा
अर्जुन और जीजू ने सूना तो दोनों हैरानी से एक दूसरे को देखने लगे। ये क्या चल रहा था दोनों समझ नहीं पाए ? जीजू ने गार्ड को बातो में लगाया इतने में अर्जुन गेट खोलकर अंदर चला गया,”मीरा , मीरा , मीरा कहा हो तुम ?”
“ए ए भाई तुमको मना किया था ना अंदर जाने से,,,,,,,,,,,,,,!”,कहते हुए गार्ड अर्जुन के पीछे गया तो पीछे से सोमित जीजू भी अंदर चले आये और मीरा को आवाज दी,”मीरा मीरा”


अर्जुन और जीजू आगे बढ़ते इस से पहले ही चार बॉडीगार्ड्स वहा आये उन्हें रोक लिया। अर्जुन ने देखा तो गुस्से से कहा,”ये सब क्या है और मीरा कहा है ? मुझे उस से मिलना है हटो सामने से”
“आप उनसे नहीं मिल सकते”,गार्ड्स में से एक ने कहा
“नहीं मिल सकते लेकिन क्यों ? और उस से मिलने से रोकने वाले तुम कौन हो ?”,सोमित जीजू ने गुस्से से कहा
“अमर सर का आर्डर है किसी को भी उनसे ना मिलने दिया जाये , आप दोनों यहाँ से जाईये प्लीज”,दूसरे गार्ड ने कहा


अर्जुन और जीजू फिर एक दूसरे की तरफ देखने लगे आखिर ये हो क्या रहा था ? अमर जी ने ऐसी सिक्योरिटी क्यों रखी और क्यों मीरा से मिलने नहीं दिया जा रहा ? अर्जुन ने जाने की कोशिश की तो गार्ड ने उसे पकड़ लिया और पीछे धकेलते हुए कहा,”आप लोग मेरी बात को समझे यहाँ से चले जाईये”
“मीरा को यहाँ बुलाओ , मुझे उस से मिलना है क्या उसने कहा वो हम लोगो से नहीं मिलना चाहती,,,,,,,,,,,,,,,,,बुलाओ उसे”,सोमित जीजू ने कहा


“ये मीरा का ही फैसला है , वो किसी से नहीं मिलना चाहती खासकर व्यास फैमिली से”,गार्ड्स के पीछे से सौंदर्या ने आते हुए कहा
सौंदर्या को वहा देखकर अर्जुन और जीजू को ज्यादा हैरानी नहीं हुई क्योकि दोनों पहले भी उनसे काफी बार मिल चुके थे। अर्जुन ने सूना तो कहा,”क्या ? क्या कहा आपने ? मीरा ने ऐसा कहा ,, मैं नहीं मानता वो ऐसा कुछ कह ही नहीं सकती , आप आप झूठ बोल रही है आप बुलाइये मीरा को,,,,,,,,,,,,,,मैं उस से बात करना चाहता हूँ”


“मुझे पता था तुम्हे मेरी बात पर विश्वास नहीं होगा रुको मैं अभी उसे फोन लगाती हूँ”,कहते हुए सौंदर्या ने अपने फोन से मीरा का नंबर डॉयल किया और फोन लाउड स्पीकर पर डाल दिया। कुछ देर बाद दूसरी तरफ से मीरा की आवाज आयी,”भुआ जी आप हमे फोन क्यों कर रही है ?”
“मीरा वो तुमसे मिलने कोई आया है , तुम्हारे ससुराल से सोमित जी और अर्जुन जी आये है तुमसे मिलना चाहते है”,सौंदर्या ने कहा


“उनसे कहिये यहाँ से चले जाए , हमे किसी से नहीं मिलना है”,मीरा ने नफरत भरे शब्दों में कहा
सोमित जीजू और अर्जुन ने सूना तो हैरान रह गए , मीरा उनसे मिलना तक नहीं चाहती थी। सौंदर्या ने फोन काट दिया और कहा,”सूना आप लोगो ने , अब जाईये यहाँ से खामखा यहाँ तमाशा मत कीजिये”
“लेकिन वो हम लोगो से मिलना क्यों नहीं चाहती ? मीरा ऐसा कैसे कर सकती है ?”,सोमित जीजू ने कहा


“ये आप मुझसे पूछ रहे है , आप सब ने मिलकर उस से उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी ख़ुशी उसकी बेटी छीन ली। उसे घर से निकाल दिया और अब उस से हमदर्दी जताने आये है। बेहतर होगा आप दोनों यहाँ से चले जाए और दोबारा यहाँ ना आये,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आप लोगो से मिलना तो दूर मीरा व्यास फॅमिली से कोई रिश्ता तक नहीं रखना चाहती,,,,,,,,,,,,,,!!”,कहकर सौंदर्या वहा से चली गयी।  


  सोमित जीजू और अर्जुन ने जब ये सूना तो उनका दिल टूट गया। अर्जुन को तो यकीन ही नहीं हुआ कि मीरा ये सब भी कह सकती है। सोमित जीजू ने सौंदर्या की बातो को नजरअंदाज किया और जैसे ही जाने लगे गार्ड ने उन्हें धक्का दे मारा सोमित जीजू नीचे जा गिरे। अर्जुन ने उन्हें सम्हालते हुए कहा,”जीजू,,,,,,,!!”
“हमे मजबूर मत कीजिये सर , जाईये यहाँ से प्लीज”,गार्ड ने कहा तो अर्जुन गुस्से में जैसे ही उसकी तरफ जाने लगा सोमित जीजू ने उसकी कलाई पकड़कर उसे रोक लिया और कहा,”चल चलते है”


“लेकिन जीजू मीरा,,,,,,,,,,,,,,!!”,अर्जुन ने कहा
“तूने सूना ना मीरा ने क्या कहा ? वो हम लोगो से नहीं मिलना चाहती,,,,,,,,,,,,,,,,,चल यहाँ से , अर्जुन तुझे मेरी कसम है चल यहाँ से”,सोमित जीजू ने अर्जुन को लगभग खींचकर ले जाते हुए कहा। अर्जुन फ़टी आँखों से अमर जी के उस आलिशान घर को देखता रहा और जीजू उसे खींचकर घर से बाहर ले आये। बाहर आकर अर्जुन ने गाड़ी पर घुसा मारकर कहा,”आपने मुझे कसम क्यों दी ? उन चारो की तो मैं,,,,,,,,,,,,,,,वो लोग हमे मीरा से मिलने से नहीं रोक सकते”


सोमित जीजू के चेहरे पर तकलीफ और बेबसी के भाव थे उनकी आँखे नम थी और वो भरे गले से कहने लगे,”कल रात मैंने अक्षत से कहा की सब ठीक हो जाएगा , उसकी मीरा लौट आएगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन यहाँ कुछ सही नहीं हो रहा है अर्जुन मीरा ने हम लोगो से मिलने से मना कर दिया , वो व्यास फॅमिली से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती ऐसा कैसे हो सकता है ? कुछ सही नहीं हो रहा अर्जुन कुछ सही नहीं हो रहा”


“घर चलिए जीजू , मैं अभी पापा और अक्षत से इस बारे में बात करूंगा मीरा ऐसा नहीं कर सकती,,,,,,,,,,,,,,ये हमारे घर की इज्जत का मामला है , आशु की जिंदगी का मामला है वो ऐसे स्वार्थी होकर एक तरफ़ा फैसला नहीं ले सकती,,,,,,,,,,,!!”,अर्जुन ने कहा
“अर्जुन , अर्जुन हमे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए हो सकता है मीरा किसी मुसीबत में हो या उसने दबाव में आकर ऐसी बाते कही हो ? हमे ठन्डे दिमाग से सोचना चाहिए।

अक्षत इस वक्त बहुत परेशान है और तनाव में है कल ही कोर्ट से उसका लाइसेंस केंसल हुआ है और अगर उसे अब ये सब बताया तो वो,,,,,,,,,,,,,,,मैं तेरे आगे जोड़ता हूँ उसे इन सब बातो से दूर रख प्लीज”,सोमित जीजू ने कहा
“क्या ? आशु का लाइसेंस केंसल हो गया ? उस लड़के की जिंदगी में और कितनी परेशानिया आएगी”,अर्जुन ने दुखी स्वर में कहा


“सब ठीक हो जाएगा अर्जुन , सबसे हमे घर चलना चाहिए और प्लीज यहाँ जो कुछ भी हुआ उस बारे में घरवालों को पता ना चले , कही ऐसा ना हो सब मीरा को गलत समझ ले और फिर सुलझने के बजाये चीजे और उलझ जाये”,सोमित जीजू ने कहा
“हम्म्म मैं नहीं बताऊंगा”,अर्जुन ने अपनी आँख के किनारे साफ़ करते हुए कहा।

अर्जुन और सोमित जीजू दुखी मन से घर चले आये। दोनों ने किसी से कुछ नहीं कहा पर अंदर ही अंदर दोनों बहुत परेशान थे। अर्जुन ने देखा अक्षत कही दिखाई नहीं दे रहा तो उसने राधा से पूछा,”माँ आशु कही दिखाई नहीं दे रहा , कही गया है क्या ?”


“वो आज दोपहर में ही दिल्ली के लिए निकल गया , कहा कि दो दिन बाद आएगा”,राधा ने बुझे मन से कहा तो अर्जुन और सोमित जीजू एक दूसरे की तरफ देखने लगे। उन्हें अक्षत के लौटने का इंताजर था साथ ही उसकी जिंदगी में आने वाले तूफान की चिंता भी।

सोमित जीजू और अर्जुन से जाने का कहकर सौंदर्या अंदर आयी और फोन कान से लगाकर कहा,”मैंने आपका काम कर दिया है भाईसाहब”
दूसरी तरफ से सिर्फ हम्म्म की आवाज आयी और फोन कट गया। सौंदर्या भी वहा से चली गयी और अपने काम में लग गयी। अगले दिन मीरा उठी तो सौंदर्या ने बताया कुछ लोग उस से मिलने आये है। मीरा ने आकर देखा चाइल्ड होम के स्टाफ के कुछ लोग थे जो की मीरा का हाल जानने आये थे।

अखिलेश भी साथ में ही था शायद वही उन्हें लेकर आया था। मीरा उनके साथ बैठी , बाते की , बातो बातो में मीरा का दर्द भी उसके चेहरे से साफ दिखाई दे रहा था जिसे देखकर अखिलेश को काफी तकलीफ हो रही थी  
अखिलेश कई सालो से मीरा के साथ था और उसके दिल में मीरा के लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर था। मीरा को उदास देखकर अखिलेश बाहर चला आया और बरामदे में घूमते हुए खुद में ही बड़बड़ाने लगा,”छ कैसा आदमी है वो अक्षत , यहाँ मीरा मेडम इतनी परेशान है , दुखी है लेकिन उसे इनकी परवाह तक नहीं है।

मीरा मेडम कितनी अच्छी है वो हमेशा सबका अच्छा चाहती है , कभी किसी को तकलीफ पहुँचाना तो दूर उन्होंने कभी किसी से ऊँची आवाज में बात तक नहीं की लेकिन आज उनकी जिंदगी में कितनी परेशानिया , कितनी तकलीफे है और ये सब उस अक्षत व्यास की वजह से है। आई ऍम सॉरी मेडम मैंने ऐसा कहा लेकिन ये सच है उनकी वजह से ही आपकी जिंदगी में इतनी परेशानिया है।

वो आदमी अपने घमंड में इतना चूर है कि उसने आपसे मिलना तक जरुरी नहीं समझा। हुंह्ह वो आदमी आपसे प्यार करने का दावा करता है लेकिन उसे आपकी ज़रा भी परवाह नहीं है,,,,,,,,,,,,,आप उस घर में दोबारा कभी मत जाना मेडम कभी मत जाना,,,,,,,,,,,,,,,,,मेरा दिल तो कर रहा है जाकर अभी उसे सबक सिखाऊ लेकिन मैं बस आपकी वजह से चुप हूँ मेडम”


“अखिलेश क्या हुआ तुम ऐसे परेशान क्यों घूम रहे हो ?”,चाइल्ड होम के स्टाफ के आदमी ने कहा
“कुछ नहीं,,,,,,,,,,!!”,अखिलेश ने सामान्य होते हुए कहा
“अच्छा तुम बाहर क्या कर रहे हो ? सब तो अंदर है”,आदमी ने कहा
“हाँ मैं जानता हूँ लेकिन मैं मीरा मेडम को ऐसे दुखी होते नहीं देख सकता। वो इस वक्त कितनी तकलीफ में है। अच्छे लोगो के साथ ही हमेशा बुरा क्यों होता है ?”,अखिलेश ने दुखी स्वर में कहा


“भगवान हमेशा अच्छे लोगो की ही परीक्षा लेते है अखिलेश , मीरा मेडम ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा आज उन्हें तकलीफ में देखकर हम सब भी दुखी और उदास है। वक्त के साथ सब सही हो जायेगा। मीरा मेडम ने तुम्हे बुलाया है चलो आओ”,आदमी ने कहा और अखिलेश को लेकर अंदर चला आया
मीरा ने कुछ चेक अखिलेश को दिए चूँकि वह चाइल्ड होम में मैनेजर था इसलिए मीरा ने कुछ वक्त के लिए चाइल्ड होम की सभी जिम्मेदारियां अखिलेश को सौंप दी।

मीरा ने अपने कुछ जरुरी काम भी अखिलेश को बताये और एक लिफाफा देकर कहा,”ये वक्त से पहुचा देना अखिलेश हमे लगता है हमे अब इसे खत्म कर देना चाहिए”
“एक बार फिर सोच लीजिये मेडम”,अखिलेश ने कहा
“हमने बहुत सोच समझकर ये फैसला किया है अखिलेश जी आप इसे वक्त से पहुंचा दीजियेगा”,मीरा ने चेहरे पर उदासी के भाव लाकर कहा


“ठीक है मेडम”,अखिलेश ने कहा तो मीरा ने बाकि सबसे जाने की इजाजत मांगी और वहा से चली गयी। अखिलेश ने लिफाफे को फाइल में रखा और बाकि सब लोगो के साथ वहा से निकल गया।
मीरा अपने कमरे में चली आयी उसे काफी कमजोरी महसूस हो रही थी। दो दिन से मीरा की तबियत वापस बिगड़ने लगी थी। वह समझ नहीं पा रही थी ऐसा क्यों था ? मीरा बिस्तर पर आकर लेट गयी उसे काफी चक्कर आ रहे थे और सर भी दर्द कर रहा था।

अक्षत दिल्ली में था उसे मीरा के बारे में को खबर नहीं थी। वह बस इसी वहम में था की मीरा उस से नाराज है इसलिए बात करना नहीं चाहती। अर्जुन और सोमित जीजू ने मीरा से मिलने की कोशिश की लेकिन खुद मीरा ने ही उन्हें मिलने से इंकार कर दिया। अपने साथ हुए व्यवहार से सोमित जीजू और अर्जुन दोनों ही आहत थे लेकिन दोनों ने ये बात घर में किसी को नहीं बताई।

अर्जुन तो अक्षत और घरवालों को सब बताना चाहता था लेकिन सोमित जीजू को इन सब घटनाओ में कुछ गड़बड़ नजर आ रही थी इसलिए उन्होंने अक्षत के वापस आने तक इस बात को खुद तक ही रखा। दो दिन काफी परेशानी और तनाव में गुजरे। इन दो दिनों में अखिलेश 3-4 बार किसी ना किसी बहाने मीरा से मिलने आता रहा। एक शाम वह किसी काम से अमर जी के घर के सामने से गुजरा तो खिड़की पर खड़ी मीरा नजर आयी।

अखिलेश उसे देखने के लिए रुक गया। मीरा को रोते देखकर उसका दिल कट सा गया , वह वहा नहीं रुक सका और आगे बढ़ गया। गाड़ी चलाते हुए अखिलेश खुद में ही बड़बड़ाने लगा,”बस बहुत हो गया , मैं अब मीरा मेडम को ऐसे और नहीं देख सकता। उस आदमी को कोई हक़ नहीं है वो इन्हे रुलाये , वो नहीं जानता इनके आँसू कितने कीमती है। मैं आपका ख्याल रखूंगा मेडम , उस आदमी से कई गुना ज्यादा मैं आपका ख्याल रखूंगा।”
और ऐसा कहते हुए अखिलेश की आँखों में एक अलग ही आकर्षण देखने को मिला।


अगली सुबह अखिलेश चाइल्ड होम से कुछ बच्चो के साथ मीरा से मिलने आया। बच्चो को वहा देखकर मीरा को अच्छा लगा थोड़ी देर के लिए वह अपने दुःख भूल गयी और उन बच्चो से मिलने लॉन में चली आयी। आज कई दिनों बाद मीरा मुस्कुराई थी लेकिन आँखों में आँसू अब भी थे। कुछ दूर खड़ा अखिलेश प्यार भरी नजरो से मीरा को देखता रहा और मन ही मन कहा,”आप सिर्फ खुशिया डिजर्व करती है मीरा मेडम”
मीरा को बच्चो के साथ देखकर अखिलेश वहा से चला गया।

उसी सुबह अक्षत दिल्ली से वापस अपने घर आया था। अक्षत जैसे ही घर आया अर्जुन और सोमित जीजू ने उसे सारी बातें बता दी जिन्हे सुनकर अक्षत एक पल को हैरान रह गया। उसे सुनकर बहुत अजीब लगा की मीरा अचानक से ऐसा बर्ताव क्यों करने लगी है ? उसने अर्जुन की तरफ देखकर कहा,”मुझे लगता था मीरा सिर्फ मुझसे नाराज है फिर उसने आप दोनों से इस तरह बात,,,,,,,,,,,,,,,,,,,और मीरा के पापा ने सिक्योरिटी क्यों रखी है ? आप दोनों ने मुझे ये सब बताया क्यों नहीं ?”


“वही तो हम लोग नहीं जानते ,  मैं और अर्जुन उस शाम मीरा से मिलने गए थे लेकिन गार्ड्स ने हमे उस से नहीं मिलने दिया”,जीजू ने बुझे स्वर में कहा
“और वो जो मीरा ने कहा”,अर्जुन ने गुस्से से कहा।
“क्या कहा मीरा ने ?”,अक्षत ने पूछा तो सोमित जीजू ने अर्जुन से चुप रहने का इशारा किया लेकिन अक्षत ने जीजू की बात पर ध्यान ना देकर अर्जुन को लगभग घूरते हुए पूछा,”क्या कहा मीरा ने ?”


“उसने कहा वो व्यास फॅमिली के किसी भी सदस्य से मिलना नहीं चाहती”,अर्जुन ने धीमे स्वर में कहा तो अक्षत को और हैरानी हुई और उसने कहा,”वो ऐसा कैसे कह सकती है ?”
“आशु हो सकता है उसने गुस्से में कह दिया हो इसका मतलब ये नहीं है कि वो हम लोगो से नफरत करती है। वो इस वक्त परेशान है शायद और उसे लगा होगा हम तुम्हारे बारे में बात करने आये है इसलिए उसने ये सब,,,,,,,,,,!”,सोमित जीजू ने मीरा की सफाई में कहा

तो अक्षत उनकी तरफ पलटा और कठोरता से कहा,”मीरा बच्ची नहीं है जीजू कि उसे अपनों और गैरो में फर्क नजर ना आये। ये सब मेरी वजह से हुआ है मुझे उसे जाने देना ही नहीं चाहिए था। बस बहुत हो गया मैं उसे वापस लाने जा रहा हूँ। वो मेरी पत्नी है और मुझे पूरा हक़ है उसे यहाँ लाने का”
अक्षत की बात सुनकर जीजू और अर्जुन खामोश हो गए  अक्षत वहा से नीचे चला आया। विजय जी और दादू नाश्ता करने के लिए डायनिंग एरिया में थे और राधा उनके लिए नाश्ता परोस रही थी।

अक्षत को जल्दी में सीढ़ियों से उतरते देखकर सबकी नज़रे उस तरफ चली गयी। अक्षत जैसे ही दरवाजे की तरफ जाने लगा सामने से आते अखिलेश को देखकर उसके कदम रूक गए। अखिलेश आकर अक्षत के सामने खड़ा हो गया। अक्षत को इस वक्त अखिलेश का वहा आना अच्छा नहीं लगा लेकिन फिर भी उसने खुद को नार्मल रखते हुए पूछा,”तुम यहाँ क्यों आये हो ?”


अखिलेश ने कोई जवाब नहीं दिया बस हाथ में पकड़ा लिफाफा अक्षत की तरफ बढ़ा दिया। अक्षत ने एक नजर अखिलेश को देखा और फिर लिफाफे को खोलकर उसमे रखे पेपर्स निकालकर पढ़ने लगा। अक्षत ने जैसे ही पेपर्स पढ़े उसकी आँखों में गुस्से और तकलीफ के भाव उभर आये। उसके जबड़े भींच गए उसने गुस्से से अखिलेश को कॉलर पकड़ी और कहा,”तेरी हिम्मत कैसे हुई ये सब लाने की ?”
“आशु,,,,,,,,,”,डायनिंग के पास खड़ी राधा ने घबराये हुए स्वर में कहा


“अक्षत छोडो उसे,,,,,,!”,विजय जी भी जल्दी से उठकर अक्षत की तरफ आये
“आशु छोड़ इसे ये क्या कर रहा है ?”,अर्जुन ने कोशिश की लेकिन अक्षत बस अखिलेश को घूरे जा रहा था
सोमित जीजू , अर्जुन और विजय जी ने मिलकर अक्षत को अखिलेश से दूर किया तो अखिलेश ने कहा,”अपनी हद में रहो मिस्टर अक्षत व्यास , मेरी भी कोई इज्जत है , मुझे कोई शौक नहीं है यहाँ आने का मुझे बस ये देने के लिए भेजा गया है। अपने गुस्से को थोड़ा काबू में रखो”


“आप जाईये प्लीज”,विजय जी ने अखिलेश से कहा तो अखिलेश वहा से चला गया। अक्षत की आँखों में गुस्से के भाव थे और चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। सभी घरवाले वहा मौजूद थे। अर्जुन ने अक्षत के हाथ से पेपर लेकर जैसे ही पढ़ा उसके चेहरे पर हवाईया उड़ने लगी और उसने हैरानी भरे स्वर में कहा,”ये डायवोर्स पेपर है , मीरा अक्षत से तलाक लेना चाहती है”


जैसे ही सबने सूना सब के मुंह खुले के खुले रह गए , राधा की आँखों से आँसू बहकर गालों पर लुढ़क आये उसने सोचा नहीं था ऐसा भी पल आएगा  
सभी घरवाले आपस में बाते करने लगे सब मीरा के इस फैसले से हैरान थे। अक्षत के कानों में उन सबकी बातें पड़ रही थी लेकिन वह खामोश था। विजय जी ने सूना तो अर्जुन के हाथ से पेपर लिए और पढ़ने के बाद कहा,”मीरा ऐसा कैसे कर सकती है ?

नहीं जरूर उसे कुछ गलतफहमी हुई है हम सब अभी उसके पास चलते है और उस से बात करते है। हम सब उसे मनाकर वापस ले आएंगे,,,,,,,,,,,,,,,,,ये सब मेरी गलती है मैं उसे यहाँ से नहीं भेजता तो ये सब होता ही नहीं,,,,,,,,,अर्जुन , सोमित जी आप लोग चलिए मेरे साथ हम सब मीरा को लेकर आते है”
“कोई कही नहीं जाएगा,,,,,,,,,,,,,,,,!!”,अक्षत ने चिल्लाकर तेज आवाज में कहा तो एक पल के लिए सभी घरवाले सहम गए। विजय जी के कदम भी वही रुक गए

अक्षत पलटकर उनके पास आया और उनके हाथ से कागज लेकर कहा,”अगर आप में से कोई भी जाकर उस से मिला तो मेरा मरा मुंह देखेगा ये याद रखियेगा”
अक्षत की बात सुनकर सब के चेहरे तकलीफ से भर गए लेकिन इस वक्त उसका गुस्सा देखकर किसी में उसे रोकने या कुछ बोलने की हिम्मत नहीं थी। राधा तो ये सब सुनकर बस रोये जा रही थी। अक्षत वो पेपर लेकर जैसे ही जाने लगा सोमित जीजू ने कहा,”आशु मैं तेरे साथ,,,,,,,,,,,,,,,,,!!’


अक्षत ने गुस्से से पलटकर जैसे ही जीजू को देखा आगे के शब्द उनके गले में ही अटक गए आज से पहले उन्होंने अक्षत को इतने गुस्से में तो कभी नहीं देखा था। अक्षत वहा से चला गया। वह बाहर आया गाड़ी स्टार्ट की और वहा से निकल गया। गुस्सा उसकी आँखों और चेहरे से साफ़ नजर आ रहा था। अक्षत ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी दो बार वह मरते मरते भी बचा लेकिन उसके दिमाग में चल रहा तूफान शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।

गाड़ी आकर अमर जी के घर के सामने रुकी अक्षत गाड़ी से नीचे उतरा और अंदर जाने लगा तो गार्ड ने उसे रोका अक्षत ने आंव देखा ना तांव खींचकर एक घुसा गार्ड को मारा और जोरदार लात घर के मेन गेट को मारी गेट भड़भड़ाकर खुल गया और अक्षत गुस्से से भरा अंदर चला आया। जो भी उसे रोकने आया अक्षत उन सबको पीटते हुए आगे बढ़ गया इस वक्त उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था।

अक्षत ने देखा घर के गार्डन में मीरा बच्चो के साथ है वह उसके पास आया और उसे अपनी तरफ किया। अक्षत को वहा देखकर मीरा खुश भी थी और उसे गुस्से में देखकर हैरान भी वह कुछ कहती इस से पहले अक्षत ने गुस्से से बोलना शुरू किया,”समझती क्या हो तुम अपने आप को ? तुम्हे लगता है हमारा रिश्ता इतना कमजोर है कि उसे एक कागज के टुकड़े से तुम खत्म कर दोगी।

आज तक मैं सोचता रहा कि मेरी गलती की वजह से हम दोनों इन हालातों में है लेकिन मैं गलत था अमायरा सिर्फ तुम्हारी बेटी नहीं थी वो हमारी बेटी थी , तुमसे ज्यादा वक्त बिताया था मैंने उसके साथ , तुम से ज्यादा समझा था मैंने उसे , तुम्हे क्या लगता है उसके चले जाने का दुःख सिर्फ तुम्हे है मुझे नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  उसे बचाने के लिए मैंने वो सब किया जो मैं कर सकता था,,,,,,,,,,,,,दिन रात पागलों की तरह इस पुरे शहर में ढूंढता रहा मैं उसे पर वो नहीं मिली।

उसकी आखरी साँस तक मैंने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन उसे मार दिया गया। तुम्हे क्या लगता है मुझे उसके चले जाने का दुःख नहीं है ? मुझे उसके जाने का दुःख तुमसे भी ज्यादा है मीरा लेकिन मैं किसी के सामने अपना दुःख जाहिर नहीं कर सकता। तुम्हे लगता रहा अमायरा को हमने मेरी वजह से खोया है लेकिन ऐसा नहीं था मैं अपनी ही बेटी को कैसे मरने दे सकता था कभी सोचा तुमने ? मैं अपना वादा नहीं निभा सका सिर्फ इसलिए तुम मुझसे दूर हो गयी तुमने एक बार भी मेरी बात तक नहीं सुनी ,

मुझे गलत समझ लिया और उस वक्त मेरा साथ छोड़ दिया जिस वक्त मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी। अमायरा के जाने से भी ज्यादा तकलीफदेह था तुम्हारा चले जाना , तुम वो मीरा हो ही नहीं जिस से मैंने प्यार किया था। तुमने सिर्फ अमायरा को खोया लेकिन मैंने,,,,,,,,,,,,,,,मैंने अमायरा के साथ साथ तुम्हे भी खो दिया , तुम मुझसे दूर जाने लगी इतना दूर की तुमने हमारे रिश्ते को खत्म करने का सोच लिया”


 मीरा ने जैसे ही सूना उसकी आँखों में आँसू भर आये। उसका गला भरने लगा , धड़कने तेज हो गयी अक्षत की कही एक एक बात उसके दिल को चीरते जा रही थी। वह बोलना चाहती थी लेकिन बोल नहीं पायी , उसके चेहरे पर दर्द के भाव उभर आये और वह बस फ़टी आँखों से अक्षत को देखने लगी। अक्षत की आवाज सुनकर सौंदर्या और राजकमल जी भी वहा चले आये।


अक्षत गुस्से से काँप रहा था उसका चेहरा लाल पड़ चुका था और आँखे जल रही थी उसने मीरा को देखा और आगे कहना शुरू किया,”मैंने कभी नहीं सोचा था हमारी जिंदगी में ऐसा मोड़ भी आएगा लेकिन ये हमारी किस्मत थी। अमायरा का चले जाना उसकी किस्मत थी लेकिन हमारे रिश्ते की किस्मत का फैसला अकेले करने वाली तुम होती कौन हो हाँ ? तुम्हे लगता है महज एक डिवोर्स पेपर पर साइन करके तुम हमारे रिश्ते को खत्म कर दोगी ? वो रिश्ता जिसे बचाये रखने के लिए मैंने कितने लोगो का दिल तोड़ा ,

कितनी बार अपना दिल तोड़ा , खुद को तकलीफ पहुंचाई सिर्फ इसलिए क्योकि मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ,,,,,,,,,,,,,,,,तुम उस रिश्ते को तोड़ देना चाहती हो जिसके लिए मैंने तुम्हारे साथ अग्नि के सात फेरे लिए थे , तुम उस रिश्ते को तोड़ना चाहती हो जो इस संसार के हर स्वार्थ से परे था,,,,,,,,,,,,,,,,,तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो मीरा ? तुम इतनी पत्थर दिल कैसे हो सकती हो ? इस रिश्ते को बचाने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं किया ,

मैंने कितने दिल तोड़े , कितने लोगो का दिल दुखाया , खुद को परेशान किया , हर मंदिर में दुआ मांगी ताकि इस रिश्ते पर कभी कोई आंच ना आये और तुमने इस रिश्ते को तोड़ने की बात कही,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या तुम्हे इतनी नफरत हो गयी है मुझसे कि अब तुम मेरे साथ तक नहीं रहना चाहती। तुमने सिर्फ अमायरा को खोया है लेकिन क्या तुम ये जानती हो मैंने क्या खोया है ? मैंने अमायरा के साथ साथ तुम्हे भी खो दिया मीरा , तुम मुझसे दूर चली आयी ,,

जिंदगी के जिस नाजुक पल में मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी तुमने उन पलों में मेरा साथ छोड़ दिया। मेरे कहे बिना मेरी बात को समझने वाली तुम आज मेरी बात तक सुनने को तैयार नहीं हो क्यों ? सिर्फ इसलिए कि मैं तुमसे किया वादा नहीं निभा पाया , मैं अमायरा को वापस नहीं ला पाया , अगर मेरी जगह तुम होती तो तुम क्या करती ? क्या तुम उसे ला पाती,,,,,,,,,,,,,,

तुम माँ हो इसका मतलब ये नहीं है कि तुम्हारा दर्द और तकलीफ ज्यादा है , एक पिता होने के नाते मुझे कितनी तकलीफ हुयी ये सिर्फ मैं जानता हु। तुम वो मीरा हो ही नहीं जिस से मैंने प्यार किया , जिसे मैंने अपना सबकुछ माना”
कहते हुए अक्षत की आँखों में आँसू भर आये , उसका गला रुंधने लगा वह आगे कुछ बोल पाने की स्तिथि में नहीं था।


सौंदर्या अपने पति के साथ वही कुछ दूर खड़ी ख़ामोशी से सब देख रही थी। घर के नौकर और गार्ड्स भी वही मौजूद थे। राजकमल जी ने जैसे ही अक्षत की तरफ जाने की कोशिश की सौंदर्या ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें रोक लिया और ना में गर्दन हिला दी। मीरा नम आँखों से बस अक्षत को देखे जा रही थी आज वह अक्षत का दुसरा ही रूप देख रही थी


अक्षत ने मीरा की तरफ देखा और अपने जेब से डायवोर्स पेपर निकालकर उन्हें फाड़ते हुए धीमी आवाज में कहने लगा,”मैंने तुमसे मोहब्बत की है मीरा मेरी मोहब्बत इतनी भी कमजोर नहीं जो कागज के इन चंद टुकड़ो से खत्म हो जाये। इस जन्म में तुम सिर्फ मेरी हो और तुम तो क्या कोई भी मुझे तुमसे अलग नहीं कर सकता , ये शहर , इस शहर के लोग , मंडप में तुम्हारे साथ लिए गए वो 7 फेरे इस बात के गवाह है कि मीरा सिंह राजपूत सिर्फ अक्षत व्यास की है ये कागज के टुकड़े हमारी मोहब्बत का फैसला नहीं करेंगे मीरा”


कहते हुए अक्षत ने फाड़े हुए कागज के टुकड़े मीरा के सामने उछाल दिए और उसके करीब आकर उसकी आँखों में देखते हुए कठोरता से कहा,”अब तक तुमने सिर्फ मेरी मोहब्बत देखी है पर आज के बाद तुम सिर्फ मेरी नफरत देखोगी”


कहकर अक्षत पीछे हटा और वहा से चला गया। मीरा की आँखों में ठहरे आँसू उसके गालों पर बह गए वह कुछ बोल ही नही पायी और घुटनो के बल वही गिरकर अपना चेहरा हाथो में छुपाकर रोने लगी। अक्षत वहा से चलते हुए दरवाजे की तरफ बढ़ गया। चलते चलते उसने अपनी आँखों में आये आँसुओ को अपनी बाँह से पोछा और आगे बढ़ गया। ये पहली बार था जब उसने पलटकर मीरा को नहीं देखा।

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To Be Continued With “हाँ ये मोहब्बत है” Season 3 in 2024

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संजना किरोड़ीवाल    

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