हाँ ये मोहब्बत है – 21

Haan Ye Mohabbat Hai – 21

Haan Ye Mohabbat Hai
Haan Ye Mohabbat Hai

Haan Ye Mohabbat Hai – 21

अक्षत मीरा का वेलेंटाइन बहुत प्यारा था लेकिन साथ साथ घरवालों का सेलिब्रेट अधूरा रह गया फिर भी सब खुश थे की सबने साथ मिलकर ये शाम एन्जॉय की। देर रात सभी सोने चले गए। सुबह अक्षत जल्दी उठ गया उसे किसी जरुरी केस पर स्टडी करनी थी। मीरा और अमायरा को डिस्टर्ब ना हो इसलिए उसने गर्म कपडे पहने और बाहर सोफे पर आकर बैठ गया। कुछ देर बाद मीरा की आँख खुली तो उसने देखा अक्षत कमरे में नहीं है।

उसने घडी देखी सुबह के 6 बज रहे थे। मीरा ने अपने बालों को समेटा और उठकर बाथरूम की तरफ चली गयी। नहाकर मीरा तैयार हुई , उसने अमायरा को अच्छे से ओढ़ाया और कमरे से बाहर चली आयी। अक्षत को काम करते देखकर मीरा उसके पास आयी और कहा,”आपको देखता लगता है आप रातभर सोये नहीं है”
“एक कप चाय मिलेगी ?”,अक्षत ने मीरा की तरफ देखते हुए कहा


“हम अभी लेकर आते है”,कहकर मीरा नीचे चली आयी। धीरे धीरे करके बाकी घरवाले भी उठ चुके थे। दादू अपना सुबह का अख़बार पढ़ रहे थे। विजय जी टहलने गए थे साथ में जीजू को भी ले गए। नीता , तनु और मीरा किचन में सुबह के नाश्ते की तैयारी में लगी थी और राधा पूजा घर में बिजी थी।  मीरा अक्षत के लिए चाय लेकर ऊपर चली गयी।


कुछ वक्त बाद सभी नाश्ता करने डायनिंग टेबल के इर्द गिर्द आ बैठे। सबने नाश्ता किया। विजय जी और सोमित साथ साथ ऑफिस निकल गए। अर्जुन अपने ऑफिस चला गया आज उसकी नए मैनेजर्स के साथ मीटिंग थी। अक्षत अपने कोर्ट के चला गया। चीकू काव्या स्कूल चले गए और मीरा अपने चाइल्ड होम,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अमायरा राधा के साथ घर पर ही रुक गयी। निधि अपने ससुराल में थी और उसने राधा को फोन कर दिया की वह कुछ दिन हनी के मम्मी पापा के साथ ही रहेगी। नाश्ते के बाद तनु और नीता घर के दूसरे कामो में लग गयी।

अर्जुन अपने ऑफिस आया जैसे ही अंदर आया सब उसे देखकर मुस्कुरा उठे और सब उसे थैंक्यू कहने लगे। अर्जुन को समझ नहीं आ रहा था आखिर सब उस से थैंक्यू क्यों कह रहे है ? वह मुस्कुराते हुए अपने केबिन में चला आया। उसने दीपा को फोन लगाया और ऑफिस के नए मैनेजर के साथ मीटिंग रखने को कहा।

कुछ देर बाद अर्जुन उठा और मीटिंग रूम में चला आया। ऑफिस के ही दो एम्प्लॉय मिथिलेश और निखिल वहा पहले से मौजूद थे। अर्जुन के आते ही दोनों अपनी कुर्सी से उठे और एक साथ कहा,”गुड मॉर्निंग सर”
“गुड मॉर्निंग , प्लीज सिट”,अर्जुन ने अपनी कुर्सी खिसकाकर बैठते हुए कहा। अर्जुन ने उन दोनों से ऑफिस की ग्रोथ के बारे में कुछ बातें की , कुछ नए आइडियाज पर डिस्कस किया।

1 घंटे की लम्बी मीटिंग के बाद अर्जुन अपने नए मैनेजर्स के जवाबो से काफी संतुष्ट नजर आ रहा था उसने मुस्कुराते हुए कहा,”थैंक्यू जेंटलमेंट्स , तो निखिल आप होंगे इस कम्पनी के नए मार्केटिंग मैनेजर और मिथिलेश आप मेहता जी के साथ काम करते हुए रहेंगे कम्पनी के जूनियर मैनेजर,,,,,,,,,,,,,,कॉन्ग्रैचुलेशन बोथ ऑफ़ यू”
“थैंक्यू सो मच सर आपने हमे इतनी बड़ी अपॉच्युनिटी दी है हम अपना बेस्ट देंगे सर”,निखिल ने खुश होकर कहा


 “यस सर , मैंने नए नए इन्वेस्टर से मिलना भी शुरू कर दिया है जो आपकी कम्पनी में इन्वेस्ट करना चाहते है। ऑफिस में सबको लगता था आप बहुत रुड है , इन्क्लुडिंग मी आल्सो , लेकिन आप बहुत अच्छे इंसान है सर। ऑफिस के एम्पलॉयज को आपने इतनी बड़ी अपॉर्च्युनिटी दी है , हम आपका भरोसा नहीं तोड़ेंगे सर और खूब मेहनत करेंगे”,मिथिलेश ने कहा


अर्जुन ने सूना तो मुस्कुरा उठा। आज से पहले उसने अपने ऑफिस के लोगो के साथ बैठकर ऐसे कम ही बात की थी लेकिन धीरे धीरे उसे समझ आ रहा था की ये लोग कितने काबिल थे। अर्जुन उठा और दोनों से हाथ मिलाकर जैसे ही बाहर जाने लगा निखिल ने कहा,”कल की पार्टी के लिए थैंक्यू सर”


अर्जुन ने सूना तो उसे फिर हैरानी हुई। वह दोनों लड़को की तरफ पलटा और कहा,”पार्टी ? आज सुबह भी ऑफिस का स्टाफ मुझे थेंक्यू कह रहा था ? कुछ हुआ है क्या ?”
“सर कल शाम में आपने ऑफिस स्टाफ के लिए वेलेन्टाइन डे पर एक छोटी सी पार्टी रखी थी , सब उसी के लिए आपको थैंक्यू कह रहे है”,निखिल ने कहा


“हाँ सर हमे पता नहीं था आप इतने कूल है , वरना आजकल के बॉस को कहा अपने एम्प्लॉय की लाइफ से इतना मतलब होता है , सो थैंक्यू सर”,मिथिलेश ने कहा


“इट्स ओके”,अर्जुन ने मुस्कुरा कर कहा और वहा से चला गया। वह अपने केबिन में आया और अपने गले में पड़ी टाई को लूज करके मन ही मन खुद से कहा,”हो ना हो ये जरूर आशु ने किया है,,,,,,,,,,,,ये लड़का भी ना कब क्या करता है कोई नहीं जानता , पर जो भी हो मेरे ऑफिस के एम्प्लॉय मुझसे कितना प्यार करते है , मेरे थोड़ी से एफर्ट के बाद सब कितने खुश है”


“सर आपकी कॉफी”,दीपा ने ट्रे टेबल पर रखते हुए कहा। दीपा की आवाज से अर्जुन की तंद्रा टूटी वह टेबल की तरफ आया। उसने दीपा से एक और कॉफी बनाने को कहा और दुसरा कप दीपा की तरफ बढ़ा दिया। दीपा को थोड़ी हैरानी हुयी लेकिन उसने कप ले लिया और कॉफी पीने लगी।


”तुमसे पहले मैं पापा का असिस्टेंट हुआ करता था बट मैं इतना भुक्कड़ हुआ करता था की जब भी पापा कुछ आर्डर करते थे तो उनसे पहले मैं खाता था और उस पर बहाना ये की पापा मैं आपकी परवाह करता हूँ इसलिए,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”,अर्जुन ने अपनी कॉफी पीते हुए कहा। उसकी बातें सुनकर दीपा हसने लगी। अर्जुन उस से हल्की फुलकी बातें करता रहा और कुछ देर बाद दीपा वहा से चली गयी।

अर्जुन को काफी हल्का महसूस हो रहा था। बीते कुछ सालों में वो जितना व्यस्त हो गया था अपने लिए वक्त ही नहीं निकाल पाता था। अब उसी काम को उसने 4 लोगो में बाँट दिया और ये उसके ऑफिस के लिए अच्छी पहल थी।

मीरा चाइल्ड होम पहुंची। बच्चो से मिलने के बाद वह अपने ऑफिस में आयी तो अखिलेश ने आकर कहा,”गुड मॉर्निंग मैडम , मिस्टर सिद्धार्थ और उनकी पत्नी आये हुए है वे आपसे मिलना चाहते है”
“जी उन्हें अंदर भेज दीजिये”,मीरा ने अपने लेपटॉप में मेल्स चेक करते हुए कहा
 कुछ देर बाद सिद्धार्थ और आशा मीरा के ऑफिस रूम में चले आये। मीरा ने उन्हें बैठने को कहा और खुद भी आकर उनके साथ सोफे पर बैठ गयी।

सिद्धार्थ और आशा बच्चे को गोद लेना चाहते थे और इसी सिलसिले में वो यहाँ आये थे। सिद्धार्थ और आशा से मिलकर मीरा को काफी सकारात्मकता महसूस हुई उसने सहजता से कहा,”मिस्टर सिद्धार्थ हमने अपने मैनेजर से कहा था की वो आपके बारे में पूछताछ करे और आपको जानकर ख़ुशी होगी की आपकी रिपोर्ट्स काफी पॉजिटिव है। हम आपको बच्चा गोद देने के लिए तैयार है। आप चाइल्ड होम के किसी भी बच्चे को गोद ले सकते है। कुछ फ़ॉर्मेल्टीज होगी और कुछ पेपर्स पर आपको साइन करने होंगे उसके बाद आप बच्चे को अपने साथ ले जा सकते है।”


“थैंक्यू सो मच मेम , मुझे समझ नहीं आ रहा मैं किन शब्दों में आपका शुक्रिया अदा करू”,सिद्धार्थ ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा।
“शुक्रिया हमे कहना चाहिए आप दोनों को , आप दोनों के इस फैसले से एक बच्चे को माँ-बाप का प्यार और एक अच्छी जिंदगी मिलेगी।”,मीरा ने कहा


“मीरा जी जिन बच्चो पर आप जैसी इंसान का साया हो उनकी जिंदगी से कभी खुशिया कम नहीं हो सकती,,,,,,,,,,,,,,आप बहुत अच्छी है मेम”,आशा ने कहा तो मीरा मुस्कुरा उठी उसने पास खड़े अखिलेश को देखा और कहा,”अखिलेश जी इनके पेपर्स तैयार करवा दीजिये और जो भी फ़ॉर्मेल्टीज हो वो पूरी करवा दीजिये”
“मीरा जी इजाजत हो तो मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ”,सिद्धार्थ ने कहा।
“जी कहिये”,मीरा ने कहा


“आज हम बच्चे को घर लेकर जा रहे है इसलिए जाने से पहले यहाँ एक छोटा सा खाने का फंक्शन रखना चाहते है , बाकि सब बच्चो के लिए प्लीज अगर आपकी इजाजत हो तो , हमे अच्छा लगेगा”,सिद्धार्थ ने कहा मीरा कुछ देर सोचती रही और फिर कहा,”माफ़ करना सिद्धार्थ जी यहाँ के रूटीन के हिसाब से बच्चो की हेल्थ देखते हुए उनके लिए बाहर का खाना अलाउड नहीं है।”


“मैं समझ सकता हूँ पर क्या मैं और आशा उन्हें कुछ गिफ्ट्स दे सकते है , प्लीज इनके लिए ना मत कहियेगा”,सिद्धार्थ ने बहुत ही आसभरे स्वर में कहा
मीरा ने हामी भर दी तो सिद्धार्थ और आशा उठकर अखिलेश के साथ चले गए। मीरा बहुत खुश थी , वह उठी और ऑफिस रूम में लगी “सावित्री जी” की तस्वीर के सामने खड़े होकर कहने लगी,”माँ हमने आपसे किया वादा पूरा किया , इन बच्चो को एक बेहतर जिंदगी देकर और हम वादा करते है माँ अपनी आंखरी साँस तक हम आपके इस सपने को पूरा करेंगे।

ईश्वर के घर से आप हमे देखती होंगी ना , आज आप हमारे साथ होती तो हमारी पीठ थपथपाती। आपकी बहुत याद आती है माँ,,,,,,,,,,,,(कहते हुए मीरा की आँखे नम हो जाती है) ऐसा नहीं है की राधा माँ हमे प्यार नहीं करती , वो हमसे बहुत प्यार करती है माँ , वो कभी हमारे साथ सास बनकर नहीं रही बल्कि हमेशा हमे माँ का प्यार दिया है। अक्षत जी भी हमारा बहुत ख्याल रखते है और बाकि घरवाले वो तो हम पर जान छिड़कते है लेकिन कभी कभी आपकी बहुत कमी महसूस होती है। काश आप हमारे साथ होती माँ,,,,,,,,,,,,,,,,!!”


कहते हुए मीरा ने अपनी आँखे मूंद ली आँसुओ की कुछ बुँदे उसके गालों पर लुढ़क आयी
“मैडम वो मैंने,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”,अखिलेश ने अंदर आते हुए कहा तो मीरा की तंद्रा टूटी उसने अपने आँसू पोछे और अखिलेश की तरफ पलटकर कहा,”जी अखिलेश जी , आप कुछ कह रहे थे”


“हाँ मेडम , मैंने सिद्धार्थ जी को बच्चे से मिलवा दिया है। ये पेपर्स पर आपका साइन चाहिए था”,अखिलेश ने कहा
मीरा ने पेपर्स लिए और पढ़ने के बाद उन पर साइन करने लगी। अगले ही पल अखिलेश का फोन बजा और उसने डरे हुए स्वर में हैरानी से कहा,”क्या ? क्या हुआ माँ को ? और कब हुआ ? तुम लोग मुझे अब बता रहे हो,,,,,,,,,,,,,,,,मैं अभी निकलता हूँ”
“क्या हुआ अखिलेश जी सब ठीक है ?”,मीरा ने अखिलेश की तरफ पलटकर पूछा


“वो माँ,,,,,,,,,,,,,,,,,मुझे जाना होगा मैडम”,अखिलेश ने घबराये हुए स्वर में कहा
“आप घबराईये मत उन्हें कुछ नहीं होगा , आप अभी घर के लिए निकल जाईये”,मीरा ने अपने टेबल के ड्रावर की तरफ आते हुए कहा
“हाँ मैडम मुझे अभी जाना होगा कल तक तो वो ठीक थी आज अचानक से,,,,,,,,,,,,,,कई दिनो से वो घर आने को कह रही थी मैं ही नहीं जा पाया”,अखिलेश ने परेशान होते हुए कहा।    


मीरा ने अपने ड्रावर से कुछ रूपये निकाले और उन्हें अखिलेश की तरफ बढ़ाकर कहा,”परेशान मत होईये उन्हें कुछ नहीं होगा”
“अरे मैडम ये किसलिए ? नहीं नहीं ये मैं नहीं ले सकता”,अखिलेश ने मना करते हुए कहा।


मीरा ने अखिलेश का हाथ पकड़ा और रूपये उसके हाथ में रखते हुए कहा,”चिंता मत कीजिये वो जरूर ठीक हो जाएगी और ये रूपये रखिये आपके काम आएंगे। आपने इस चाइल्ड होम को इतना वक्त दिया है , हमारी भी आपके प्रति कोई जिम्मेदारी बनती है। हम ड्राइवर से कह देते है वो आपको ले जायेंगे”
मीरा का अपनापन देखकर अखिलेश की आँखे भर आयी उसने हामी में गर्दन हिला और चला गया।

अपने केबिन में बैठा अक्षत किसी फाइल को देख रहा था। फाइल देखते हुए अक्षत ने कहा,”सचिन वो 3rd रॉ में रखी तीसरे नंबर की किताब देना जरा”
“सर आपकी बुक”,सचिन की जगह चित्रा ने किताब अक्षत की तरफ बढ़ाते हुए कहा। अक्षत ने देखा सचिन केबिन में नहीं है तो उसने चित्रा से पूछा,”सचिन कहा है ?”


“सचिन सर फॅमिली कोर्ट गए है , मिस्टर कल्पेश का जो केस है उसमे एक डोमेस्टिक वोइलेंस का केस भी अटैच है उसी की डिटेल्स लेने”,चित्रा ने कहा
“कल्पेश केस की स्टडी तुम कर रही हो ?”,अक्षत ने पूछा
“यस सर ये केस काफी पेंचीदा है और मेरी प्रेक्टिस में ये मेरी बहुत हेल्प करेगा”,चित्रा ने कहा


“देंट्स गुड तुम्हे इस केस से जुड़े लोगो से मिलकर उनका स्टेटमेंट लेना चाहिए इस से तुम इस केस को अच्छे से समझ पाओगी। ये काफी लंबा जाने वाला है”,अक्षत ने कहा
“बिल्कुल सर , सर क्या आप मेरी हेल्प करेंगे ये कुछ पॉइंट्स समझने में ?”,चित्रा ने हिचकिचाते हुए पूछा क्योकि वह अक्षत का स्वाभाव जानती थी


“प्लीज सिट”,अक्षत ने कहा और चित्रा को बड़ी बारीकी से सब पॉइंट्स समझाने लगा। चित्रा तो उसकी फेन ही हो गयी , आज अक्षत का मूड काफी अच्छा था और किसी केस की डेट भी नहीं थी इसलिए उसने चित्रा की पढाई में थोड़ी मदद कर दी। अक्षत ने महसूस किया की चित्रा पढ़ने में और चीजों को सीखने में काफी एक्सपर्ट थी। कुछ देर बाद अक्षत उठा और किसी काम से बाहर चला गया। चित्रा आज बहुत खुश थी , कुछ वक्त के लिए ही सही अक्षत ने उसकी मदद की।

फाइल देखते हुए चित्रा ने पेन अपने मुंह में रखा और मुस्कुराते हुए सोच में डूब गयी।
सचिन केबिन में आया तो चित्रा को अकेले में मुस्कुराते देखकर हैरान हुआ और फिर उसके सामने आकर चुटकी बजाते हुए कहा,”हेलो कहा खोई हो ?”
सचिन की आवाज से चित्रा की तंद्रा टूटी उसने सचिन की तरफ पलटकर कहा,”कही भी तो नहीं”
“अच्छा ये लो कुछ फाइल्स इन्हे माथुर साहब से अटेस्टेड करवा दो प्लीज,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मैं आज बहुत थक गया हूँ”,सचिन ने फाइल सामने टेबल पर रख अंगड़ाई लेते हुये कहा


चित्रा आज खुश थी इसलिए उसने ख़ुशी ख़ुशी उन फाइल्स को उठाया और चली गयी। कॉरिडोर में भीड़ देखकर चित्रा नीचे बने रास्ते से जाने लगी। कुछ देर बाद ही कोर्ट में भगदड़ मच गयी। कुछ लोगो का किसी वकील से झगड़ा हो गया और वे लोग हाथापाई पर उतर आये।  भगदड़ की वजह से कौन किसको मार रहा है कुछ समझ नहीं आ रहा था। चित्रा ने देखा तो घबरा गयी , उसने वापस जाना सही समझा लेकिन जैसे ही वह वापस जाने के लिए पलटी

सामने गुस्से से खड़े आदमी ने हाथ में पकड़ा लकड़ी का टुकड़ा चित्रा की तरफ फेंका घबरा कर चित्रा ने आँखे मूँद ली लेकिन वह चित्रा को लगता इस से पहले ही अक्षत बीच में आ गया और वो टुकड़ा उसकी पीठ पर आ लगा। अक्षत ने गुस्से से पीछे देखा , चित्रा ने अपनी आँखे खोली तो पाया की अक्षत उसके सामने बिल्कुल उसके करीब खड़ा है। चित्रा का दिल धड़कने लगा , वह अक्षत के गुस्से भरे चेहरे को देखने लगी।

अक्षत ने चित्रा के कंधे को छूकर उसे साइड किया और जाने का इशारा कर दिया। अक्षत को देखते हुए चित्रा वहा से निकल गयी। कुछ देर बाद वहा पुलिस फ़ोर्स आयी और सबको सम्हाला।

VS ग्रुप एंड कम्पनीज
“डेड को और कितना वक्त लगेगा ? उनसे कहो मैं उनका वेट कर रहा हूँ मुझे बाहर जाना है”,विक्की ने सिंघानिया जी के असिस्टेंट से कहा
“विक्की सर वे अभी मीटिंग में है और उन्होंने कहा की उन्हें कोई डिस्टर्ब ना करे , जैसे ही मीटिंग खत्म होगी वो आपसे मिलेंगे”,असिस्टेंट ने कहा


“व्हाट द हेल अब क्या अपने ही डेड से मिलने के लिए मुझे वेट करना पड़ेगा ? उनसे अभी जाकर कहो की मैं यहाँ उनसे मिलने आया हूँ,,,,,,,,,,,,,,जस्ट गो”,विक्की ने थोड़ा चिल्लाकर कहा तो असिस्टेंट वहा से चला गया।
गुस्से में विक्की सिंघानिया जी के केबिन में यहाँ वहा घूमने लगा। वह कुमार और अपने दूसरे दोस्तों के साथ गोआ जाना चाहता था लेकिन सिंघानिया जी ने उसके सारे कार्डस ब्लॉक कर दिए थे

साथ ही उसके शहर से बाहर जाने पर भी पाबंदी लगा दी और इसी बात से नाराज होकर वह सिंघानिया जी से मिलने आया था। काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब सिंघानिया जी उस से मिलने नहीं आये तो वह गुस्से से उठा और उनके केबिन से बाहर चला आया।  सिंघानिया जी का गुस्सा उसने केबिन के बाहर रखे फ्लावर पॉट पर निकाला और उसे अपने पैर से जोर से मारा। पॉट नीचे आ गिरा और चकनाचूर हो गया।

सबकी नजरे विक्की पर चली गयी। छवि भी वही थी। विक्की ने वहा रखी एक दो चीजों को और तोड़ा सभी सहमकर एक तरफ हो गए किसी में भी उसे रोकने की हिम्मत नहीं थी। गुस्से से भरे विक्की की नजर फिश पॉट पर गयी जो की छवि के डेस्क पर रखा था। विक्की उसे तोड़ने के इरादे से उस तरफ बढ़ा लेकिन छवि से रहा नहीं गया और वह उसे रोकने उसकी तरफ बढ़ गयी। वह एकदम से विक्की के सामने आ गयी और कहा,”सर ये सब मत कीजिए प्लीज”


“तो तुम मुझे रोकेगी , मुझे विक्की सिंघानिया को यू मदर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”,विक्की ने गुस्से में जैसे ही छवि को गाली देनी चाही उसके गाली देने से पहले ही छवि ने खींचकर एक तमाचा विक्की के गाल पर रसीद कर दिया। विक्की के होश उड गए और आँखे फ़टी की फ़टी रह गयी , साथ ही सभी ऑफिस वाले भी देखते ही रह गए।

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संजना किरोड़ीवाल 

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