Manmarjiyan Season 5 – 40

Manmarjiyan Season 5 – 40

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गोलू और मंगल फूफा की बाते सुनकर गुप्ता जी उनकी बगल में आ बैठे और लगे टेसू बहाने। गोलू और मंगल फूफा ने देखा तो दोनों हैरान क्योकि सबको  रुलाने वाला खुद रोये तो थोड़ा अजीब लगता है न। गोलू ने गुप्ता जी का कंधा थपथपाया और कहा,”पिताजी ! ओह्ह्ह पिताजी , अरे का हुआ काहे रो रहे है आप ? मत रोईए रोते हुए बड़े भयंकर लग रहे है आप,,,,,,,,,ए पिताजी”

गोलू की सहानुभूति पाकर गुप्ता जी और जोर से रोने लगे ये देखकर गोलू चिढ गया और कहा,”अरे इह तो बताईये काहे गंगा जमना बहाय रहे हैआप ?”
गुप्ता जी ने अपने आँसू पोछे और साइड में नाक छिनक कर कहा,”अरे का बताय गोलुआ ? तुमको का पता हमायी जिंदगी कित्ती झंड है अभी तुम्हरी और मंगल फूफा की बात सुने तो हमे हमायी आपबीती याद आय गयी”
“का जवानी मा कोनो रूपा से आपका भी चक्कर था का ?”,गोलू ने गुप्ता जी की बात बीच में काटकर कहा

गुप्ता तो गुप्ता जी है एक थप्पड़ रसीद किया गोलू के गाल पर और कहा,”जे तुमहू बार बार हमाये कैरेक्टर पर सक करना बंद करो समझे,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी से थप्पड़ खाकर गोलू जा गिरा मंगल फूफा की गोद में और उठकर कहा,”हाँ तो जे बात कहने के लिए थप्पड़ मारने की का जरूरत थी ? सीधा सीधा भी तो बोल सकते थे ना”
“सीधी सीधी बात तुम्हरे भेजा मा घुसती कहा है ? हिया हमहू अपना दुःख सुनाय रहे है और तुमको बकैती सूझ रही है,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने कहा

“अरे इसको छोड़िये आप सुनाईये ना आपबीती हमहू सुन रहे है,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने गोलू को साइड कर गुप्ता जी के पास आकर कहा तो गुप्ता जी फिर सुबकने लगे और कहा,”का बताये मंगलू ! साला जबसे गोलुआ की अम्मा से ब्याह हुओ है तब से हमायी तो गुंडई ही खत्म हो गयी है।  

पहले कानपूर के लौंडे लपाटे हमसे डरते थे और अब हम गोलुआ की अम्मा से डरते है,,,,,,,,,,,,अरे डरे नहीं तो और कहा करे ? जब देखो तब हमे डराती धमकाती रहती है,,,,,,,,,,अब का करे मेहरारू है हमायी और प्रेम भी तो करते है इहलीये चुपचाप मान लेते है ओह्ह की बात लेकिन सच बताये मंगलू कभी कभी ना सच मा सहना मुश्किल हो जाता है,,,,,,,,,,,,,अब आज की ही बात लेइ ल्यो तुमहू ,  हमहू ज़रा सा मजाक मा कह दिए तुम्हायी लम्बी जबान है बस भड़क गयी हमाये पे और घर से बाहिर फेंक दिया”

मंगल फूफा ने पूरी बात ध्यान से सुनी और फिर कहा,”मतलब आपसे भी जियादा जे घर मा गोलूआ की अम्मा की चलती है ?”
“चलती है ? अरे जे कहो इह घर की कर्ता धर्ता वही है , हमहू तो बस नाम के मालिक है जे घर मा”,गुप्ता जी ने मायूसी भरे स्वर में कहा

मंगल फूफा ने सुना तो झटके से उठे और अकड़कर गुप्ता जी से कहा,”ए साला ! हमहू खामखा अब तक आपसे डर रहे थे कि आप हमको घर से निकाल देंगे , अरे आप तो खुद घर के बाहिर पड़े है,,,,,,,,,,,,,,भककक हम ना जाही है इह घर छोड़कर”
गुप्ता जी ने सुना तो मुँह फाड़कर मंगल फूफा को देखने लगे कि एकदम से इस नाटके में इतनी हिम्मत कैसे आ गयी और फिर अगले ही पल उन्हें समझ आया कि उन्होंने खुद ही तो अभी मंगल फूफा के सामने अपना रोना रोकर अपनी इज्जत कम की है।

गोलू को मंगल फूफा और गुप्ता जी की बातो में कोई दिलचस्पी नही थी , उसने देखा हॉल की खिड़की खुली है तो वह खिड़की से घर के अंदर कूदा और अंदर जाकर दरवाजा खोलकर गुप्ता जी और मंगल फूफा को आवाज दी,”पिताजी , फूफा , आ जाईये”
मंगल फूफा दरवाजे की तरफ बढ़ गए लेकिन गुप्ता जी अपनी जगह पर ही बैठे रहे ये देखकर गोलू ने कहा,”अरे का हुआ पिताजी , हुआ काहे बैठे है आप आ जाईये ना,,,,,,,,,,,!!!”

“तुम्हरी अम्मा ने दरवाजे बंद किये थे हमाये लिए अब वही आकर कहेंगी तो अंदर आएंगे हमहू वरना नहीं आएंगे”,गुप्ता जी ने बच्चो की तरह मुँह फुलाकर कहा
गोलू ने सुना तो मंगल फूफा की तरफ पलटकर कहा,”ए फूफा छोडो उनको तुमहू अंदर चलो , इनकी तो हिया आसिकी फॉर चल रही है,,,,,,,,,,इनका इलाज तो अम्मा ही करि है”

गोलू मंगल फूफा के साथ अंदर चला आया। गुप्ताइन रसोईघर से बाहर आयी , उन्होंने मंगल फूफा और गोलू को देखकर कहा,”जे भिखारियों वाला भेस बनाके कहा घूम रहे हो तुम दोनों ?”
गोलू ने खुद को और मंगल फूफा को देखा और फिर गुप्ताइन की तरफ जाते हुए कहा,”अरे बनाया नहीं है अम्मा बन गवा है,,,,,,अभी नहाकर आएंगे ना तो देखना घर के नए बर्तन के जैसे कैसे चमकते है”
गुप्ताइन ने गोलू को साइड किया और मंगल फूफा की तरफ देखकर कहा,”और आपकी रूपा रानी कहा है , ओह्ह्ह का साथ नाही लेकर आये ?”

रूपा का नाम सुनते ही मंगल फूफा का जख्म फिर से हरा हो गया और उनके चेहरे के भाव बदल गए , वे जैसे ही मुँह फाड़कर रोने को हुए गोलू ने चिल्लाकर कहा,”ए फूफा ! रोना नाही ,  तुमको रूपा की कसम”
मंगल फूफा ने रोने के लिए मगरमच्छ की भांति जो मुँह फाड़ा था उसे धीरे से वापस बंद किया और रोआँसा होकर गुप्ताइन की तरफ देखने लगा। गोलू गुप्ताइन को साइड में लेकर गया और उन्हें सारी बात बता दी।

गुप्ताइन ठहरी गुप्ता जी से भी दो कदम आगे उन्होंने मंगल फूफा की तरफ आकर कहा,” का रे मंगल फूफा ? आप तो कहे थे रूपा आपसे पियार करती है आपको छोड़ के कही ना जाहि है और उह्ह्ह किसी जानू के साथ आपकी छाती पर पैर धर के चली गयी,,,,आप तो बड़ा चौड़ में गए थे रूपा को लेने , गयी  न रूपा आपको चुना लगा के,”

“तुमहू हमायी रिश्तेदार हो या हमायी दुश्मन , काहे हमाये जख्मो पर नमक छिड़क रही हो ? अरे हमायी रूपा तो मासूम थी इहलीये उह्ह्ह जानू की बातो मा आकर हमे छोड़कर चली गयी,,,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने सुबकते हुए कहा
“हाँ मासूम थी इहलिये चुपचाप चली गयी , समझदार होती ना तो माँ-बहन की गन्दी गालियाँ देकर जाती उह्ह आपको,,,,,,,,,,,अरे ओह्ह्ह से पियार करने से पहिले अपने और उसके बीच मा फर्क नाही देखे आप”,गुप्ताइन ने मंगल फूफा को ताना मारकर कहा

“पियार मा फर्क नाही देखा जाता , बस दिल देखा जाता है”,मंगल फूफा ने विश्वास से भरकर कहा
“हाँ तो ओह्ह्ह का दिल तो इत्ता बड़ा रहल के ओह्ह्ह मा आप , नवरतन , गुडडुआ के फूफा , ओह्ह का जानू और थोड़ा थोड़ा हमाये गोलुआ के पिताजी भी रहे”,गुप्ताइन ने मुँह बनाकर कहा
“आप हमायी रूपा के बारे मा ऐसा कैसे कह सकती है ? उह्ह्ह सिर्फ हमायी थी हमसे सादी करना चाहती थी,,,,,,,,उह्ह्ह तो उह्ह्ह ससुरा जानू ओह्ह्ह का बहकाकर ले गया”,मंगल फूफा ने अपने सीने के बांयी तरफ हाथ रखकर कहा

“अरे का सादी ? आपके और आपकी रूपा मा जमीन आसमान का फर्क है ,, कहा आप बीहड़ के डाकू , कहा उह्ह्ह गांव की छोरी , कहा उसके लम्बे लहराते बाल और कहा आपके टखले पर बचे इह चार बाल , अरे कहा आप हिया कानपूर मा दर दर की ठोकरे खाने वाले और कहा उह्ह्ह अपने घर की मालकिन , कहा उह्ह्ह ताड़ सी लम्बी और कहा आप सिलेंडर से भी छोटे,,,,,,,,,,,अरे ओह्ह्ह की माँग भरने के लिए के लिए का सीढ़ी लगाते ?”,गुप्ताइन ने गुस्से से चिल्लाकर कहा

गोलू तो हक्का बक्का रह गया और मंगल फूफा मुँह फाडे भारी दिल लिए गुप्ताइन को देखते रहे तभी तीनो के कानों में किसी के ताली पीटने की आवाज पड़ी। तीनो ने एक साथ पलटकर देखा तो दरवाजे से अंदर आते गुप्ता जी ने ताली पीटते हुए कहा,”वाह गोलू की अम्मा वाह , का डायलॉग मारी हो वाह मजा आ गवा,,,,,,,,जे ही बात तो हमहू समझा समझा के थक गए पर तुम्हरा इह रिश्तेदार सुने तब ना”

 गुप्ता जी से अपनी तारीफ सुनकर गुप्ताइन शरमा गयी और कहा,”ठंकू,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे का ठंकु अम्मा ? भूल गयी सुबह जे ही आदमी आपकी जबान को लम्बी बताय रहे थे”,गोलू ने आग लगाई
गुप्ताइन ने गुस्से से गुप्ता जी को देखा उनकी तो जान ही हलक में अटक गयी लेकिन अगले ही पल थप्पड़ पड़ा गोलू के गाल पर और गुप्ताइन ने गुस्से से कहा,”जे आदमी का होता है ? तुम्हरे पिताजी है इह , लाज शर्म का जीना मा रखकर आये हो ?”

“अरे हमको साला खेलना ही नहीं है यार , दोनों तरफ से साला हमायी ही बत्ती बनाये रहते है आप लोग , हम जा रहे है”,कहकर गोलू पैर पटकते हुए अपने कमरे में चला गया।

मंगल फूफा सुबक रहे थे ये देखकर गुप्ताइन ने कहा,”अरे अब इह रोना बंद कीजिये और जाकर नहा लीजिये हमहू नाश्ता लगाते है”
मंगल फूफा ने हामी में गर्दन हिलायी और वहा से चले गए क्योकि भूख के सामने हर दर्द छोटा होता है। गुप्ता जी ने नाश्ते का नाम सुना तो उन्हें फिर से भूख लग गयी और उन्होंने कहा,”थोड़ा सा हमहू भी खा लेंगे”

गुप्ताइन पलटी और मुस्कुराकर कहा,”अरे आपको तो हम अपने हाथो से खिलाएंगे गुप्ता जी,,,,,,,,,बस आप बैठिये हमहू अभी गरमा गर्म लेकर आते है”
गुप्ता जी ने सुना तो ख़ुशी से चेहरा खिल उठा और वे सोफे पर आ बैठे।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
गुड्डू आदर्श फूफा के लिए डॉक्टर बुलाने गया था , उसे आने में कितना वक्त लगे सोचकर लवली ने आदर्श फूफा को बाइक पर बैठाया और निकल गया। लवली जैसे ही फूफा को लेकर नुक्कड़ पर पहुंचा उसकी नजर ठेले के पास खड़े गुड्डू पर पड़ी जो कि छोले कुलचे खा रहा था। लवली को हैरानी भी हुई और साथ ही गुड्डू पर गुस्सा भी आया , उसने बाइक लाकर गुड्डू के बगल में रोकी और गुस्से से कहा,”गुड्डू,,,,,,,!!!”

गुड्डू के एक हाथ में कुलचा था और दूसरे हाथ में रायते का गिलास , वह लवली की तरफ पलटा तो लवली ने कहा,”पिताजी तुमको फूफा के लिए डॉक्टर बुलाने भेजे थे और तुमहू हिया छोले कुलचे खाय रहे हो ?”
“अरे लवली भैया हमहू गए थे लेकिन उह्ह्ह डाक्टरवा खुद बीमार है , उह बोला आज नहीं आ सकेगा जे ही बताने के लिए घर आ रहे थे कि रास्ते मा इह ठेला दिख गवा,,,,,,,,,हमको भूख लगी थी तो हमहू खाने के लिए रुक गए”,गुड्डू ने मासूमियत भरे स्वर में कहा

“साला जे ही हरकतों की वजह से तुम और तुम्हरा उह्ह दोस्त पिताजी से मार खाते हो,,,,,,,,अरे जे शहर मा का एक ही डाक्टर है ? उह्ह बीमार था तो किसी और को ले आते,,,,,,,,,,,अब इह सब छोडो और पीछे बैठकर फूफा को सम्हालो , तब से गेंहू की बोरी की तरह बस हम पर लदे जा रहे है”,लवली ने पहले गुस्से से कहा और फिर झुंझलाकर कहा
गुड्डू ने हाथ में पकडे कुलचे में प्लेट के सारे छोले लपेट लिए और दूसरे हाथ में रायते का गिलास थामे फूफा के पीछे आ बैठा जिसे से लवली को आगे खिसकना पड़ा।

लवली ने बाइक स्टार्ट की और हॉस्पिटल जाने वाले रास्ते की तरफ बढ़ा दी। लवली गुड्डू गोलू की हरकतों से परेशान , आदर्श फूफा दर्द से बेहाल और पीछे बैठा गुड्डू मजे से छोले कुलचे का निवाला खाता और एक घूंठ रायते का जमा लेता। आदर्श फूफा ने धीरे से अपनी गर्दन गुड्डू की तरफ घुमाई और कहा,”अबे गुड्डू ! अबे का सब अकेले ही खा जाओगे ? इह नाही की हमसे भी पूछ ले”

“अरे आप खाकर का करेंगे सर पर चोट लगी है”,गुड्डू ने कहा
“चोट सर पे लगी है मुँह पे नाही , जरा सा चखाय ही दयो”,आदर्श फूफा ने कहा
गुड्डू ने बचा हुआ आखिरी निवाला आदर्श फूफा के मुँह में ठूस दिया तो आदर्श फूफा ने खाकर कहा,”स्वाद तो बढ़िया है , रायता भी दयो”

गुड्डू ने झुंझलाकर बचा हुआ रायता भी आदर्श फूफा को पिला दिया।
आगे बैठा लवली अपने दाँत भींचे ये तमाशा देख रहा था , उसका दिल तो किया सामने से जा रहे ट्रक में अपनी बाइक दे मारे और हमेशा के लिए सबका किस्सा ही खत्म करे लेकिन ये एक कहानी थी और इसे लिखने वाले का अभी कांडो से शायद मन नहीं भरा था।

मिश्रा जी मंगेश और उसके साथ आये आमदियो को अंदर ले आये , उन्हें बैठाया और मिश्राइन को आवाज दी। मिश्राइन ने शगुन से राजकुमारी भुआ को अंदर  ले जाने को कहा और खुद हॉल में चली आयी। मंगेश को देखकर मिश्राइन का दिल धड़क उठा लेकिन अगले ही पल मंगेश ने हाथ जोड़कर मिश्राइन को प्रणाम किया और कहा,”नमस्ते ! हम हिया बिंदिया से मिलने आये है”

“जी नमस्ते , बिंदिया अंदर है हम अभी ओह्ह का बुलाय देते है”,मिश्राइन ने कहा और आगे कुछ कहने के लिए रुकी लेकिन मिश्रा जी को देखकर रुक गयी। मंगेश समझ गया इसलिए कहा,”आप कुछ कहना चाहती है तो बेझिझक कहिये”

“भाईसाहब ! देखिये हुआ आपके गांव मा जो कुछ भी हुआ ओह्ह के लिए हम बहुते शर्मिन्दा है लेकिन जे मा लवली और बिंदिया का कोनो दोष नाही है , इह दोनों एक दूसरे से बहुते प्रेम करते है , जे का अलग नाही करो लवली की तरफ से हम आपसे माफ़ी मांगते है। हमारा लवली बहुते अच्छा इंसान है उह्ह्ह आपकी बिंदिया को खुश रखेगा,,,,,,,,,,,,!!”,मिश्राइन ने कहते हुए जैसे ही अपने हाथ जोड़ने चाहे

मंगेश उठा और कहा,”अरे नहीं नहीं आप माफ़ी ना मांगिये , माफ़ी मांगने तो हम आये है मिश्रा जी से , हमने अब तक सबके साथ जो बदसलूकी की ओह्ह के लिए हमहू बहुते शर्मिंदा है। हमका माफ़ कर दयो , हमहू तो खुद बिंदिया के लिए आपके लवली का हाथ मांगने आये है,,,,,,,,,!!!”
मंगेश की बात सुनकर मिश्राइन ने हैरानी से मिश्रा जी की तरफ देखा और मिश्रा जी ने पलकें झपकाकर हामी में गर्दन हिला दी।

( क्या मंगल फूफा भूल पाएंगे रूपा को या सब ऐसे ही छिड़कते रहेंगे उनको जख्मो पर नमक ? क्या लवली झेल पायेगा गुड्डू और आदर्श फूफा को या बीच रास्ते में छोड़ देगा उन्हें ? क्या मिश्रा जी करेंगे स्वीकार मंगेश की माफ़ी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40

Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40Manmarjiyan Season 5 – 40

Continue With Manmarjiyan Season 5 – 41

Read Manmarjiyan Season 5

Follow Me On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/

संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

पहले कानपूर के लौंडे लपाटे हमसे डरते थे और अब हम गोलुआ की अम्मा से डरते है,,,,,,,,,,,,अरे डरे नहीं तो और कहा करे ? जब देखो तब हमे डराती धमकाती रहती है,,,,,,,,,,अब का करे मेहरारू है हमायी और प्रेम भी तो करते है इहलीये चुपचाप मान लेते है ओह्ह की बात लेकिन सच बताये मंगलू कभी कभी ना सच मा सहना मुश्किल हो जाता है,,,,,,,,,,,,,अब आज की ही बात लेइ ल्यो तुमहू ,  हमहू ज़रा सा मजाक मा कह दिए तुम्हायी लम्बी जबान है बस भड़क गयी हमाये पे और घर से बाहिर फेंक दिया”

पहले कानपूर के लौंडे लपाटे हमसे डरते थे और अब हम गोलुआ की अम्मा से डरते है,,,,,,,,,,,,अरे डरे नहीं तो और कहा करे ? जब देखो तब हमे डराती धमकाती रहती है,,,,,,,,,,अब का करे मेहरारू है हमायी और प्रेम भी तो करते है इहलीये चुपचाप मान लेते है ओह्ह की बात लेकिन सच बताये मंगलू कभी कभी ना सच मा सहना मुश्किल हो जाता है,,,,,,,,,,,,,अब आज की ही बात लेइ ल्यो तुमहू ,  हमहू ज़रा सा मजाक मा कह दिए तुम्हायी लम्बी जबान है बस भड़क गयी हमाये पे और घर से बाहिर फेंक दिया”

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!