Pasandida Aurat Season 3 – 13
Pasandida Aurat Season 3 – 13

एक अनजान आदमी पृथ्वी को बैग थमाकर चला गया। पृथ्वी ने बैग लिया और पार्किंग से निकलकर अवनि के पास चला आया। उसने सभी फॉर्मेलिटी पूरी की और अवनि के साथ वेटिंग एरिया में चला आया। भीड़ बहुत ज्यादा थी और बैठने को कही जगह नहीं। इधर उधर देखने के बाद पृथ्वी को एक कुर्सी खाली दिखाई दी वह अवनि के साथ वहा चला आया। पृथ्वी ने खुद ना बैठकर अवनि से बैठने का इशारा किया। अवनि खाली कुर्सी पर आ बैठी और पृथ्वी वही खड़े होकर अपना फोन चेक करने लगा।
दरअसल पृथ्वी देख रहा था कि जिस आदमी को उसने मिलने का समय दिया था उसने पृथ्वी के लिए कोई मैसेज छोड़ा है या नहीं लेकिन फोन में कोई मैसेज नहीं था।
पृथ्वी के हाथ में बैग देखकर अवनि ने कहा,”ये बैग ?”
“अह्ह्ह ! इसमें ऑफिस के कुछ जरुरी पेपर्स है”,पृथ्वी को अवनि से झूठ बोलना पड़ा जबकि पृथ्वी को भी नहीं पता था इस बैग में क्या है ?
अवनि ख़ामोशी से एयरपोर्ट को देखने लगी जो कि काफी सुन्दर था और वेटिंग एरिया भी काफी अच्छा और साफ सुथरा था। अवनि दूसरी बार प्लेन में बैठने वाली थी इसलिए खुश थी पहली बार जब वह पृथ्वी के साथ उदयपुर से मुंबई आयी थी तब कैसे डर और घबराहट के मारे रास्तेभर उसने पृथ्वी का हाथ पकडे रखा था। ये सब सोचकर अवनि मुस्कुराने लगी। अवनि को मुस्कुराते देखकर पृथ्वी ने प्यार से कहा,”क्या हुआ ?”
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और आँखों में चमक भर मुस्कुराकर कहा,”थैंक्यू”
“अब ये थैंक्यू किसलिए ?”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा
“बस थैंक्यू”,अवनि ने भी मुस्कुरा कर कहा
“मिसेज उपाध्याय ! ये आप आजकल मुझे कुछ ज्यादा ही थैंक्यू नहीं बोलने लग गयी है ?”,पृथ्वी ने कहा
“जी नहीं मिस्टर उपाध्याय ! आप तो हर पल थैंक्यू डिजर्व करते है”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखते हुए प्यार से कहा।
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराते हुए अपने सीने पर बाँयी तरफ हाथ रखा और कहा,”बस करो अवनि ! इतनी मोहब्बत मैं सह नहीं पाऊंगा”
अवनि ने सुना तो हंस पड़ी , अवनि को हँसते देखकर पृथ्वी उसकी मुस्कान में खोकर रह गया। उसके सामने बैठी ये लड़की आज उसकी पत्नी थी और उस से बेइंतहा मोहब्बत भी करती थी। पृथ्वी को वो दिन याद आ गया जब उदयपुर में ऐसे ही एयरपोर्ट पर अवनि उसके सामने बैठी थी लेकिन उस वक्त अवनि उदास थी और उसकी आँखे आँसुओ से भरी थी और आज वही अवनि हंस रही थी , मुस्कुरा रही थी। अवनि को खुश देखकर पृथ्वी को बहुत अच्छा लगा।
कुछ देर बाद फ्लाइट की अनाउंसमेंट हुए और पृथ्वी अवनि को साथ लेकर वहा से प्लेन की तरफ जाने लगा। चलते चलते अवनि ने पृथ्वी की बाँह को दोनों हाथो से थामा और उस से सटकर चलने लगे। पृथ्वी ने अवनि की बाँहो में लिपटी अपनी बांह देखी और मुस्कुरा उठा। पृथ्वी को विंडो सीट मिली लेकिन उसने अवनि से वहा बैठने को कहा ताकि वह बाहर बादल देख सके और पृथ्वी उसे,,,,,,,,,,,,,,,,प्लेन अपनी उडान भर चुका था और इसी के साथ पृथ्वी और अवनि भी इस शहर से देखते ही देखते दूर निकल गए।
भरत मिस्टर देसाई और प्राची को लेने एयरपोर्ट आया था लेकिन अंदर जाने से पहले ही उसकी नजर एक आदमी पर पड़ी जिसने मास्क से अपना मुँह ढक रखा था। भरत को ना जाने क्यों उस आदमी पर शक हुआ और वह उसका पीछा करने लगा लेकिन पार्किंग में पृथ्वी को देखकर भरत रुक गया और बहाना बनाकर वहा से चला गया।
पार्किंग से निकलकर भरत एयरपोर्ट एग्जिक्ट के वेटिंग लॉबी में आया लेकिन मिस्टर देसाई और प्राची वहा नहीं थे। उनकी फ्लाइट को लेंड किये 20 मिनिट हो चुके थे। भरत ने इधर उधर देखा और अगले ही पल उसका फोन बजा।
भरत ने जेब से फोन निकाला , स्क्रीन पर मिस्टर देसाई का नाम देखकर उसने फोन उठाया और कान से लगाकर कहा,”हेलो सर ! मैं यहाँ लॉबी में हूँ आप कही दिखाई नहीं दे रहे”
“ओह्ह्ह भरत ! ये सवाल तो मुझे तुमसे करना चाहिए कि तुम कहा हो ? मैं पिछले 15 मिनिट से यहाँ गाड़ी के पास खड़ा हूँ”,मिस्टर देसाई ने कहा
“आई ऍम सो सॉरी सर ! मैं अभी आता हूँ”,भरत ने कहा और फोन काटकर वहा से चला गया
भरत एयरपोर्ट अकेले ही आया था इसलिए गाडी भी लॉक थी और मिस्टर देसाई और प्राची को गाड़ी के बाहर ही रुकना पड़ा। भरत भागते हुए उनके पास आया और कहा,”आई ऍम सॉरी सर,,,,,,,,मुझे लगा आप लोग अंदर है”
“कोई बात नहीं भरत”,मिस्टर देसाई ने मुस्कुरा कर कहा
भरत ने गाड़ी का पिछला दरवाजा खोला और उसमे रखा सफ़ेद और पीले फूलो का बुके मिस्टर देसाई की तरफ बढाकर कहा,”वेलकम सर ! कैसी रही आपकी कोलकता ट्रिप ?”
“ओह्ह्ह भरत थैंक्यू लेकिन इसकी क्या जरूरत थी ? कोलकाता ट्रिप बहुत अच्छा था ! तुम कभी टाइम निकालकर जाओ वहा क्या खूबसूरत शहर है तुम्हारी तबियत खुश हो जाएगी”,मिस्टर देसाई ने कहा और बुके सम्हालकर ड्राइवर के बगल वाली सीट की तरफ चले आये और दरवाजा खोला।
“जरूर सर”,भरत ने मुस्कुरा कर कहा और पिछली सीट पर रखा दूसरा बुके उठाकर प्राची की तरफ बढाकर कहा,”और ये रोज बुके आपके लिए मिस ब्यूटीफुल”
खिले खिले गुलाबो से भरे बुके को देखकर प्राची खुश हो गयी और मुस्कुरा कर कहा,”थैंक्यू भरत,,,,,,अब चले ?”
“स्योर मेम,,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए भरत ने प्राची के लिए गाडी का पिछला दरवाजा खोला और प्राची बुके सम्हाले अंदर आ बैठी।
भरत ड्राइवर सीट पर आ बैठा और सीट बेल्ट लगाकर गाडी स्टार्ट की और वहा से निकल गया। रास्तेभर मिस्टर देसाई भरत से ऑफिस के कामो के बारे में पूछते रहे जिन्हे सुनकर प्राची को बोरियत महसूस होने लगी। उसने अपना फोन निकाला और विक्रम को मैसेज करके अपने मुंबई वापस आने की खबर दी।
“अह्ह्ह भरत ! गाडी सीधा ऑफिस में ही ले लो,,,,,,,,,,कुछ इम्पोर्टेन्ट काम है वो देख लेता हूँ और प्राची ड्राइवर के साथ वहा से घर चली जाएगी”,मिस्टर देसाई ने एकदम से कहा तो भरत के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये लेकिन उन्होंने तुरंत अपने चेहरे के भाव बदले और कहा,”सर आप ट्रेवल करके आये है और इस वक्त ऑफिस , मैं आपको और प्राची को सीधा घर छोड़ देता हूँ आप रेस्ट कीजिये और कल सुबह फ्रेश मूड के साथ ऑफिस आईये”
“ओह्हफ़ो भरत ! पिछले एक हफ्ते से मैं आराम ही तो कर रहा हूँ। नवी मुंबई से एक इम्पोर्टेन्ट क्लाइंट है मुझे उनसे मिलना है और मैंने उन्हें ऑफिस आने को कहा है। ऑफिस में एक छोटी सी मीटिंग के बाद उनके साथ डिनर भी है इसलिए,,,,,,,,,,,,यू नो न घर से ये सब पॉसिबल नहीं हो पायेगा,,,,,,,,गाड़ी ऑफिस की तरफ ले लो”,मिस्टर देसाई ने गंभीर स्वर में कहा
भरत को मिस्टर देसाई की बात माननी पड़ी जबकि वह चाहता था मिस्टर देसाई ऑफिस ना जाये ताकि आज रात ऑफिस में बैठकर वह उन सारी गड़बड़ को छुपा सके जो उसने पिछले एक हफ्ते में की है। भरत ने बेमन से गाडी वाशी जाने वाले रास्ते की तरफ बढ़ा दी। प्राची का फोन बजा , विक्रम ने प्राची के मैसेज का जवाब दिया था। विक्रम का मैसेज देखकर प्राची मुस्कुरा उठी और भरत से कहा,”भरत ! गाड़ी साइड में रोक दो”
“क्या हुआ , तुमने गाडी क्यों रुकवाई ?”,भरत के गाडी रोकने के बाद मिस्टर देसाई ने पलटकर पीछे बैठी प्राची से पूछा
“अह्ह्ह डेड ! मैं आपके ऑफिस जाकर क्या करुँगी ? एक्चुली मैं बहुत थक गयी हूँ इसलिए मैं यही से कैब बुक करके सीधा घर जा रही हूँ। आप और भरत ऑफिस के लिए निकल जाईये”,प्राची ने गाडी की पिछली सीट पर रखा अपना छोटा मोटा सामान अपने पर्स में रखते हुए कहा
“आर यू स्योर प्राची ?”.मिस्टर देसाई ने पूछा
“ऑफकोर्स डेड ! मैं चली जाउंगी आप ऑफिस जाईये मैं आपसे घर पर मिलती हूँ”,प्राची ने कहा और पर्स और भरत के दिए बुके के साथ गाड़ी से नीचे उतर गयी।
मिस्टर देसाई ने प्राची को ध्यान से घर जाने को कहा और खुद भरत के साथ ऑफिस निकल गए , मिस्टर देसाई के जाने के बाद प्राची ने कैब तो बुक किया लेकिन घर जाने के बजाय वह कही और ही निकल गयी।
सिरोही , राजस्थान
मुंबई से उदयपुर आने के बाद सिरोही बस कुछ घंटे उदयपुर रुकी और फिर सीधा सिरोही चली आयी। घरवालों के साथ साथ सुरभि ने अवनि से भी झूठ कह दिया कि उसके बॉस ने ऑफिस के काम से उसे जल्दी बुलाया है। घरवालों ने ज्यादा पूछा नहीं और अवनि अगर पूछती तो वो इस वक्त इतना बिजी थी कि उसने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। स्टेशन से सुरभि फ्लेट चली आयी। सफर की वजह से काफी तक चुकी थी इसलिए गर्म पानी का एक शॉवर लिया और कबर्ड के सामने चली आयी। सुरभि के चेहरे पर एक चमक थी और आँखों में एक ख़ुशी।
आज से पहले सिरोही आकर वह इतना खुश कभी नहीं हुई थी जितना आज थी और वजह था सिद्धार्थ,,,,,,,,,,सुरभि को ये अहसास हो चुका था कि वह सिद्धार्थ को पसंद करने लगी है हालाँकि उसने इस पसंद को प्यार का नाम नहीं दिया था लेकिन अब सिद्धार्थ उसे अच्छा लगने लगा था। एक वक्त था जब सिद्धार्थ के नाम से भी चिढ जाया करती थी लेकिन अब ऐसा नहीं था सिद्धार्थ बदल चुका था और उसके साथ बदल चुकी थी सुरभि ,
सुरभि ने कबर्ड खोला और कपडे लेने लगी , हमेश जींस टॉप या फिर वन पीस पहनने वाली सुरभि की नजर आज कुर्ती पर पड़ी जो उसे अवनि ने गिफ्ट की थी। सुरभि ने उस कुर्ती को निकाला और साथ में जींस लेकर कबर्ड बंद कर दिया। सुरभि ने कपडे बदले और शीशे के सामने चली आयी। जींस पर वह गुलाबी कुर्ती काफी अच्छी लग रही थी। सुरभि ने अपने बाल बनाये , आँखों में काजल डाला , होंठो पर लिप ग्लॉस लगाया और शीशे के सामने से हट गयी।
अगले ही पल सुरभि वापस शीशे के सामने आयी और शीशे पर लगी काली बिंदी उतारकर अपने ललाट पर लगा ली और खुद को ही फ्लयिंग किस देकर कहा,”अब लग रही हो ना परफेक्ट,,,,,,,,,!!”
सुरभि ने अपना पर्स लिया उसमे कुछ जरुरी सामान रखा और अपना फोन लेकर कमरे से बाहर निकल गयी। फ्लेट से बाहर आकर सुरभि लिफ्ट के अंदर चली आयी और अपने फोन से सिद्धार्थ को मैसेज किया। मैसेज करने के बाद सुरभि बार बार अपना फोन चेक करने लगी लेकिन सिद्धार्थ ने उसे कोई जवाब नहीं दिया , देता भी कैसे उसने सुरभि का मैसेज सीन तक नहीं किया।
सुरभि ने एक और मैसेज भेजा और उसका भी यही हाल था। लिफ्ट नीचे आकर रुकी सुरभि ने अपना फोन हवा में उठाकर देखा कि कही नेटवर्क प्रॉब्लम तो नहीं लेकिन ऐसा नहीं था। फ़ोन में नेटवर्क पूरा था बस सिद्धार्थ ही मैसेज सीन नहीं कर रहा था।
सुरभि ने देखा सिद्धार्थ ने अभी तक मैसेज सीन नहीं किया है तो उसका नंबर डॉयल करते हुए बड़बड़ाई,”आखिर ये चिलगोजा है कहा ?”
सुरभि ने फोन कान से लगाया और अपार्टमेंट से बाहर चली आयी। सड़क किनारे आकर वह फोन कान से लगाये ऑटोवाले का इंतजार करने लगी। रिंग जा रही थी लेकिन सिद्धार्थ ने फोन नहीं उठाया इस से सुरभि और चिढ गयी।
ऑटो आकर रुका तो सुरभि अंदर आ बैठी और ऑटो वाले को सिद्धार्थ के घर का पता बताया और चलने को कहा।
सुरभि ने उम्मीद के साथ एक बार फिर अपने फोन से सिद्धार्थ का नंबर डॉयल किया लेकिन रिंग जाती रही और किसी ने फोन नहीं उठाया। सुरभि ने झल्लाकर फोन साइड में पटका और खुद में बड़बड़ाई,”हाह ! आखिर ये चाहता क्या है ? जब मैं इस से मिलना नहीं चाहती थी तब ये बार बार मुझसे टकरा जाता था और अब जब मैं इस से मिलना चाहती हूँ तो ये मेरा फोन तक नहीं उठा रहा”
सुरभि को अकेले में गुस्से से बड़बड़ाते देखकर ऑटोवाले ने गर्दन घुमाकर कहा,”क्या हुआ मैडम ! आप ठीक है ना
“तुमसे मतलब ? चुपचाप ऑटो चलाओ”,सुरभि ने सिद्धार्थ का गुस्सा ऑटोवाले पर निकालकर कहा तो ऑटोवाले ने चुपचाप गर्दन आगे घुमा ली। अगले ही पल सुरभि का फोन बजा , ख़ुशी के मारे उसने जल्दी से फोन उठाकर देखा और फिर मायूस हो गयी। उसे लगा सिद्धार्थ का जवाब आया है लेकिन वो बस एक फेसबुक का नोटिफिकेशन था।
सुरभि ने मायूसी से फोन साइड में रखा और फिर फोन को अपने होंठो से लगाकर सोचते हुए कहा,”वो मेरे मैसेज सीन नहीं कर रहा , मेरा फोन भी नहीं उठा रहा , कही वो मर तो नहीं गया ?”
ऑटो जरा सा उछला तो सुरभि की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”ओह्ह्ह भैया ! देख के चलाओ ना,,,,,,,,,!!!”
“सॉरी मैडम ! गड्डा आ गया था”,ऑटोवाले ने कहा और उसके बाद उसकी सुरभि से कोई बात नहीं हुई क्योकि खुद से बात करने वाली इस अजीब लड़की को वह पहली बार देख रहा था।
मिस्टर देसाई से घर जाने का कहकर प्राची एक आलिशान रेस्टोरेंट में चली आयी। प्राची ने अपना सूटकेस गाड़ी में ही छोड़ दिया था उसके एक हाथ में उसका पर्स था और दूसरे हाथ में फूलो वाला बुके। उसने दोनों को एक हाथ में लिया और दूसरे हाथ की उंगलिया अपने बालों में घुमाकर उन्हें सही करते हुए पहले से बुक टेबल की तरफ बढ़ गयी जहा विक्रम उसका इंतजार कर रहा था।
पृथ्वी को देखते ही विक्रम मुस्कुराते हुए उठा और प्राची के गले लगने के लिए जैसे ही उसकी तरफ बढ़ा प्राची ने उसके सीने पर अपना हाथ रख दिया और बहुत ही घमंड भरे स्वर में कहा,”अभी हम इतने अच्छे दोस्त भी नहीं बने है कि तुम इतना आगे बढ़ सको”
विक्रम ने सुना तो उसे थोड़ा बुरा तो लगा लेकिन उसने प्राची के सामने अपने दोनों हाथ उठाये और अपने कदम पीछे लेकर कहा,”ठीक है आई ऍम सॉरी , माय मिस्टेक , बाय द वे क्या रोज बुके तुम मेरे लिए लायी हो ?”
प्राची ने एक नजर अपने हाथ में पकडे बुके पर डाली और सामने टेबल पर धीरे से फेंककर कहा,”अह्ह्ह्ह ! ये मुझे डेड के मैनेजर ने दिया है,,,,,,,,,,,,!!!”
विक्रम ने सुना तो उसे फिर बुरा लगा लेकिन इस बार भी उसने खुद को सम्हाल लिया क्योकि गलत लड़की से उम्मीद जो कर रहा था। प्राची ने कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठी। विक्रम भी प्राची के सामने आ बैठा और कहा,”सो कैसी रही तुम्हारी कोलकता की ट्रिप ?”
“ठीक थी ! डेड चाहते थे मैं उनके साथ चलू बस इसलिए,,,,,,,,,,,,,तुम बताओ तुम कैसे हो ? हमारा प्लान आगे बढ़ा ?”,प्राची ने चमकती आँखों से कहा
“सर-मेम योर आर्डर प्लीज”,वेटर ने आकर कहा
“टू ऑरेंज जूस प्लीज”,विक्रम ने और वेटर वहा से चला गया। विक्रम ने देखा प्राची उसके जवाब का ही इंतजार कर रही है तो विक्रम पीछे आराम से सहारा लेकर बैठा और कहा,”पृथ्वी को तुम भूल जाओ प्राची ! मैंने उसके और अवनि के बारे में सब पता किया। वो दोनों किसी भी कंडीशन में एक दूसरे से अलग नहीं होंगे।
तुमने कहा उसके घरवालों ने अवनि को एक्सेप्ट नहीं किया है तो तुम्हारी जानकारी के लिए बता दू अभी दो दिन पहले ही धूमधाम से उन दोनों की फिर से शादी हुई है और आज शाम की फ्लाइट से दोनों हनीमून के लिए मुंबई से बाहर गए है,,,,,,,इसके बाद उनका रिश्ता और मजबूत हो जाएगा”
प्राची ने जैसे ही सुना उसके चेहरे के भाव बदल गए ऐसे लगा जैसे विक्रम उसके सवालो का जवाब नहीं दे रहा
बल्कि उसके जले पर नमक छिड़क रहा है। वेटर ने जूस के ग्लास प्राची और विक्रम के सामने रखे और चला गया। विक्रम ने गिलास उठाया और एक घूंठ भरकर तीखी मुस्कान के साथ कहा,”अवनि ने तुम्हे हरा दरिया प्राची”
प्राची ने सुना तो गुस्से से अपना हाथ साइड में किया और सामने रखे गिलास को एक झटके में नीचे गिराकर गुस्से से चिल्लाकर कहा,”वो क्या मुझे हराएगी ?”
विक्रम ने सुना तो बस मुस्कुराते हुए दुसरा घूंठ भरा और प्राची को देखने लगा
( क्या खत्म हो चुकी है पृथ्वी और अवनि की जिंदगी की परेशानिया या गोआ में कर रहा है कोई उनका इंतजार ? ऑफिस आकर क्या मिस्टर देसाई को नजर आएगी भरत की गलतिया या भरत चलेगा कोई नयी चाल ? आखिर क्यों नहीं दिया सिद्धार्थ ने सुरभि के मैसेज का जवाब और क्यों नहीं उठाया सुरभि का फोन ? पृथ्वी और अवनि की शादी की खबर सुनकर क्या तमाशा करने वाली है प्राची देसाई ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Yeh Vikram aakhir chahata kya hai…kyu Prachi ko bhadka rha hai.. ek to itni muskilo k baad Prithvi aur Avni ek huye hai, shadi hui hai aur ab yeh dono (Prachi-Vikram) kyu unko preshan kar rhe hai…aur upar se yeh Bharat…esa lag rha hai ki Mr. Desai hee Bharat k sath m koi game khel rhe hai aur shayad isme unka beta neelesh bhi sath hai..