Manmarjiyan Season 5 – 6

Manmarjiyan Season 5 – 6

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

लवली बिंदिया को अपने साथ लेकर वहा से निकल गया क्योकि वह इस भसड़ में नहीं पड़ना चाहता था। गुप्ता जी सीढ़ियों के सामने नीचे धरती पर पड़े थे। गोलू लोटे की मार से बेहोश पड़ा था और गुड्डू उसे होश में लाने की कोशिश कर रहा था। रूपा गुस्से में आदर्श फूफा के पीछे भाग रही थी और शर्मा जी गटर में पड़े थे। इन सब में अगर कोई शांति से बैठा था तो वो थे मंगल फूफा क्योकि वो बीती रात पहले ही इतनी मार खा चुके थे कि कानपूर आकर उन्होंने हार मान ली।

गुप्ताइन को कुछ समझ नहीं आया लेकिन जब उन्होंने गुप्ता जी को नीचे गिरे देखा तो दौड़कर उनके पास आयी और उन्हें उठाते हुए कहा,”गोलू के पिताजी ! घर मा बिस्तर होते हुए हिया जमीन पर काहे सो रहे है आप ?”
गुप्ता जी एक तो दर्द के मारे पहले ही दुखी थी गुप्ताइन की बात सुनकर खीज गए और कहा,”ताकि तुम्हाये सपूत अपने कर्म कांडो से हिया हमायी कब्र खोद दे , अरे दिखाई नहीं ना देता है गिर गए है। हमे उठाने के बजाय बकैती कर रही हो”

गुप्ताइन ने गुप्ता जी का हाथ थामा और सहारा देकर उन्हें सीढ़ियों की तरफ लाते हुए कहा,”अरे ऐसे कैसे गिर गए आप ?”
गुप्ता जी की बात सुनकर सीढ़ियों पर बैठे मंगल फूफा ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”रूपा को देख के लड़खड़ा गए”
गुप्ता जी ने सुना तो जाते जाते एक लात मंगल फूफा को मारी और दाँत पीसकर कहा,”इत्ती मुश्किल से जे फुलवारी का नाम भूली है अब तुमहू रूपा नाम का बीज बो दयो जे के भेजा मा,,,,,,,,,,,!!!”

“का कौनसा बीज ?”,गुप्ताइन ने कहा क्योकि उन्हें गुप्ता जी की बात ठीक से समझ नहीं आयी
“बीज नाही पिलीज , पिलीज गुप्ताइन हमका अंदर लेकर चलो”,गुप्ता जी ने कराहते हुए कहा
“का गोलू के पिताजी आप भी , सुबह सुबह अंग्रेजी मा काहे रोमांटिक हो रहे है ?”,गुप्ताइन ने मुस्कुरा कर गुप्ता जी के सीने पर मुक्का मारकर कहा

अभी अभी इसी सीने पर आदर्श फूफा का पैर पड़ा था वो दर्द अभी कम हुआ भी नहीं था कि गुप्ताइन के भारी भरकम हाथ में उस दर्द को और बढ़ा दिया  

गुप्ता जी की मारे दर्द के आह निकल गयी और उन्होंने कराहते हुए कहा,”का कर रही हो गुप्ताइन ? अरे अभी अभी उह्ह्ह चांडाल आदर्श्वा जे ही सीने पर पैर रखके गवा था और तुमहू यही अपना टेलेंट दिखाय रही हो। हमे अंदर लेकर चलो हमहू तुम्हाये हाथ जोड़ते है”
गुप्ताइन गुप्ता जी को लेकर अंदर चली गयी।

मिश्रा जी ने देखा गोलू बेहोश पड़ा है तो उन्होंने गुड्डू से कहा,”गुड्डू ! खड़े खड़े देख का रहे हो पानी लेकर आओ और मारो जे के मुँह पर कही जे सच मा ना निपट जाए , हमहू ज़रा उह्ह्ह आदर्श्वा का मेटर क्लोज करके आते है”
गुड्डू भागा पानी लेने लेकिन जल्दी जल्दी में उसे समझ नहीं आया कि पानी ले कहा से , भागते हुए वह बाथरूम की तरफ आया और चिल्लाया,”पिताजी ! हिया लाश पड़ी है”

अब चुकी शर्मा जी मुँह के बल गिरे हुए थे तो गुड्डू को शक्ल तो दिखी नहीं उसने तो बस शरीर देखा और उसे लाश समझ लिया।
आदर्श फूफा भागते हुए मिश्रा जी के हाथ लगे ही थे कि तभी गुड्डू चिल्ला दिया और वे बाथरूम की तरफ भागे , पीछे पीछे आदर्श फूफा जाने लगे तो रूपा ने उन्हें रोककर कहा,”ए,,,,,,,,,,,!!

आदर्श फूफा ने रूपा को साइड किया और कहा,”अरे हम कहा भागकर जा रहे है , थोड़ी देर बाद मार लेना,,,,,,,,,,पहिले जाकर देखे गुडडुआ कौन लाश की बात कर रहा है ?”
आदर्श फूफा ने जो कहा वो घर के बाहर दिवार के पीछे छुपे यादव ने सुन लिया , लाश का नाम सुनते ही उन्हें याद आयी शर्मा जी की और उनका दिमाग चला। वे जल्दी से वहा से भाग गए ,  भागकर गए कहा ये आगे पता चलेगा।

रूपा ने झुंझलाकर मंगल के पास चली आयी और कहा,”मंगल जी ! हमे हिया नाही रहना , कितने पागल लोग है इह सब”
“अरे रूपा जी इन सबको छोड़िये यहाँ बैठिये हमाये पास,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने रूपा का हाथ पकड़कर उसे अपने बगल में बैठाकर कहा। इतनी भसड़ में भी मंगल को रूपा पर प्यार आ रहा था और उसे दिन दुनिया या यू कहे जो हो रहा था उसकी फ़िक्र नहीं थी।

गोलू के लिए लिए जब कोई पानी लेकर नहीं आया तो बेचारा खुद ही सर सहलाते हुए उठा। एक तो सुबह सुबह बिना बात के सर पर लोटा खा लिया उस पर नजर जैसे ही मंगल फूफा पर पड़ी देखा कि मंगल फूफा रूपा के साथ बैठकर प्यार मोहब्बत की बाते कर रहा है तो चिढ गया और जोर से चिल्लाया,”ए फूफा,,,,,,,,,,,,,!!!”
बेचकर मंगल रूपा से कुछ कहने जा ही रहा था कि घबराकर उछला और रूपा की गोद में आ बैठा।

गोलू उठा और उन दोनों की तरफ आकर रूपा से कहा,”का रूपा जी ! इत्ता छोटा बॉयफ्रेंड रखने से अच्छा था चावल का एक ठो बोरा ले लेती,,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने सुना तो गुस्से से कहा,”ए गोलू ! अपनी फूफी के साथ बदतमीजी नाही करो”
“फूफी ? जे फूफी कैसे हुई ?”,गोलू ने चौंककर कहा
“अरे हमहू फूफा तो जे तुम्हायी फूफी”,मंगल फूफा ने कहा

“अरे तुमहू मंगल फूफा हो तो जे हिसाब से इह हमायी भुआ नहीं ना हुई,,,,,,,,,,पर साला भुआ नाही कहेंगे जे का। एक ठो भुआ हुआ मिश्रा जी के घर मा पहिले से बैठी है ओह्ह्ह के नखरे कम नाही हो रहे,,,,,,,,,,इह बताओ बाकी सब कहा गए ?”,गोलू ने इधर उधर देखकर कहा
“हुआ बाथरूम की तरफ गुडडुआ को कोनो लाश मिली है तो सब उधर ही गए है”,मंगल फूफा ने कहा
“का गुड्डू भैया को लाश मिली है ! उह्ह्ह कब से CID मा काम करने लगे ?”,गोलु बड़बड़ाया और वहा से चला गया।

किसी को अपने आस पास ना पाकर मंगल फूफा ने रूपा का हाथ पकड़ा और जैसे ही कुछ कहने लगा दरवाजे पर खड़ी गुप्ताइन चिल्लाई,”मंगल फूफा ! इह सब का है ?”
मंगल फूफा रुक गए और पलटकर देखा तो गुप्ताइन ने उनके पास आकर कहा,”दिन दहाड़े लड़की लेकर घर मा आये हो ? कोनो लाज शर्म नाही बची है आपके अंदर,,,,,,,,,,,

गोलुआ के पिताजी सही कहत रहे कि गुप्ताइन अपने मंगल फूफा पर ध्यान दयो पर नाही हमहू तुम्हाये पिरेम मा इत्ते अंधे रहे इत्ते बहरे रहे कि ना कुछो देखे ना कुछो सुने , तबही ना उह्ह्ह फुलवारी मुँह उठा के हिया आ जाय रही ,, अरे उह्ह्ह तुम्हरे लिए आती थी और हमहू खामखा बेचारे गोलुआ के पिताजी पर शक किये रहय,,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे चुप हो जाईये का कह रही है आप ?”,मंगल फूफा ने दबे स्वर में कहा लेकिन तब तक रूपा के कानो में फुलवारी का नाम पड़ चुका था उसने घूरकर मंगल फूफा को देखा और कहा,”जे फुलवारी कौन है ?”

“अरे इह का बताये है हमहू बताते है , उह्ह जो हमाये पडोसी है ना यादव जी ओह्ह की घरवाली है फुलवारी , जे मंगलवा ओह्ह्ह,.,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ताइन रूपा को मंगल फूफा के कारनामे सुनाने ही वाली थी कि तभी उनकी नजर पड़ी सामने से आते आदर्श फूफा , मिश्रा जी , गुड्डू और गोलू पर जो कि शर्मा जी को चार कंधो पर जीतेजी उठाकर ला रहे थे।

गुप्ताइन ने अपनी बात पूरी ही नहीं की और रूपा को साइड कर शर्मा जी की तरफ जाते हुए कहा,”हाय हाय इनको का हुई गवा ?”
आगे गुड्डू और गोलू थे , गुप्ताइन की बात सुनकर गोलू ने चिढ़कर कहा,”कुछो नाही अम्मा ! ससुर जी का झूला झूलने का मन था अब सुबह सुबह इनको झूला कहा झुलाये इहलीये कंधो पर लादकर झुलाय रहे है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अरे देख नाही रही बेहोश हो गए है इह”

गुप्ताइन ने सुना तो हैरानी से गोलू को देखने लगी लेकिन गोलू की बात सुनकर पीछे खड़े मिश्रा जी ने उसे लात मारी और कहा,”अपनी अम्मा से ऐसे बात करोगे”
“अरे जाने दीजिये मिश्रा जी ! लेकिन गोलुआ इह बेहोश कैसे हुए ?”,गुप्ताइन ने पूछा
“अरे हमे का पतो हुआ गटर मा पड़े थे”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा

“जे भी पीने लगे का ?”,गुप्ताइन ने उंगलिया अपने गाल से लगाकर हैरानी भरे स्वर में कहा
गुड्डू ने सुना तो रोनी सी सूरत बनाकर मिश्रा जी को देखा जैसे कहना चाह रहा हो कि सिर्फ गोलू ही नहीं उसका पूरा खानदान बकैत है लेकिन बेचारा नहीं कह पाया।

आदर्श फूफा काफी देर से खामोश थे लेकिन गुप्ताइन को सवाल जवाब करते देखकर बोल पड़े,”अरे बहिन जी ! आप का हिया खड़ी होकर सवाल जवाब कर रही है इनको अंदर लेकर चलिए जरा”
गुप्ताइन साइड हट गयी तो चारो शर्मा जी को उठाकर अंदर ले आये और तख्ते पर लेटा दिया। पास ही सोफे पर पड़े गुप्ता जी कराह रहे थे।

मिश्रा जी उनके पास आये और कहा,”यार गुप्ता ! मेटर हुई गवा जे शर्मा हुआ गटर मा पड़ा मिला , अब जे कब से पड़ा था कुछो पता नाही , ज़िंदा है भी कि नाही पता नाही”
मंगल फूफा , रूपा और गुप्ताइन भी अंदर चले आये। सब यहाँ वहा खड़े होकर एक दूसरे को देखने लगे। इस परेशानी के चलते किसी का इस बात पर ध्यान ही नहीं गया कि लवली और बिंदिया यहाँ नहीं है।  

शोर शराबा सुनकर पिंकी अपने कमरे से बाहर आयी। गोलू को देखते ही पिंकी ख़ुशी से उसकी तरफ आयी ये देखकर गोलू ने अपने आस पास खड़े लोगो को  नहीं देखा और शाहरुख़ खान के पोज में अपनी बाँहे फैलाई लेकिन गोलू तक आते आते पिंकी तख्ते की तरफ पलट गयी ये देखकर गोलू ने अफ़सोस में जैसे ही गर्दन घुमाई उसकी नजरे सोफे पर बैठे गुप्ता जी से जा मिली।

उनकी गुस्से से भरी आँखे देखकर गोलू ने अपनी फैली हुयी बाँहो को नीचे किया और चुपचाप खड़ा हो गया ये देखकर बगल में खड़े गुड्डू ने धीरे से कहा,”जे का पिंकिया को देखते ही बात बात पे साहरुख खान बन जाते हो,,,,,,,,,!!!”
“अरे उह्ह्ह इत्ते टाइम बाद देखे ना तो फीलिंग्स बाहर आ गयी हमायी”,गोलू ने झेंपकर कहा
“पापा ! पापा का हुआ आपको ? पापा पापा”,तख्ते पर बेहोश पड़े शर्मा जी को देखकर पिंकी चिल्लाई।

गुड्डू ने गोलू को पिंकी की तरफ धक्का दिया ताकि वह उसे सम्हाल सके। गोलू पिंकी के पास आया और कहा,”बस पिंकिया बस , होनी को अब कौन टाल सकता है ?”
पिंकी ने सुना तो गोलू की तरफ देखा और कहा,”गोलू ! जे का बक रहे हो तुम ? पापा जिन्दा है”
“का ज़िंदा है ?”,गोलू ने चौंककर कहा

“हाँ देखो इनकी नब्ज चल रही है,,,,,,,,,!!!”,पिंकी ने शर्मा जी के हाथ की नब्ज गोलू को थामकर कहा और खुद गुप्ता जी के सामने आकर बोली,”पापा जी ! पापा जी  जल्दी से हॉस्पिटल फोन करके एम्बुलेंस भेजने को कहिये”
“हाँ हाँ बिटिया ! तुमहू चिंता नही करो हमहू अभी फोन करते है , ए गुड्डू खड़े खड़े देख का रहे हो जल्दी अस्पताल फोन करो”,गुप्ता जी ने कहा

गुड्डू ने अपना फोन निकाला और एम्बुलेंस के लिए फोन करने लगा। बात करके गुड्डू ने जैसे ही फोन काटा एक सायरन की आवाज सबके कानो में पड़ी लेकिन ये सायरन एम्बुलेंस का नहीं पुलिस की गाडी का था
गोलू ने सुना तो खुश होकर गुड्डू की तरफ आया और कहा,”का बात है गुड्डू भैया ! आपकी सर्विस तो बड़ी तेज निकली , फोन काटते ही गाडी आ गयी”
“गोलू तुमहू कबो स्कूल गए हो ?”,आदर्श फूफा ने पूछा

“स्कूल का हमहू तो कालेज भी गए है”,गोलू ने इतराकर कहा
“फिर तो तुम्हायी पढाई और गुप्ता जी के पैसे मिटटी मा ही मिलाये है तुमने,,,,,,,,,,,,अबे जे एम्बुलेंस की नाही पुलिस की गाडी का सायरन है”,आदर्श फूफा ने कहा
“का पुलिस ?”,गोलू ने हैरानी से कहा इतने में इंस्पेक्टर और चार थानेदार अंदर आये ये देखकर सब डर गए।

“हमे खबर मिली है कि हिया किसी की लाश मिली है”,इंस्पेक्टर ने कहा
इंस्पेकटर की बात सुनकर सब एक दूसरे का मुँह देखने लगे और मिश्रा जी उठकर इंसपेकटर के सामने आये और कहा,”नहीं साहब आपको कोनो गलत खबर मिली है , हिया कहा से लाश आएगी ?”
“खबर पुख्ता है ! फोन भी इसी मोहल्ले से आया है। उह्ह्ह कौन है ?”,इंस्पेक्टर ने मिश्रा जी से कहा और फिर नजर शर्मा जी पर पड़ी

“उह्ह तो हमाये रिश्तेदार है,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी उठकर मिश्रा जी की तरफ चले आये
“रिश्तेदार है तो ऐसे काहे पड़े है ?”,इंस्पेकटर ने कड़ककर कहा
“अब का बताये इंस्पेक्टर साहब ! रात मा दुई घूंठ जियादा मार लिए जे के कारण अभी तक बेहोश पड़े है”,गुप्ता जी ने बहाना बनाकर कहा

इंस्पेकटर को शक हुआ तो वह शर्मा जी की तरफ गया और सूंघकर देखा तो बहुत ही गन्दी बदबू आयी और उनका मुँह बन गया। उन्होंने नाक पर रुमाल रखा और पीछे आकर कहा,”उनहू ! बहुते गन्दी बास आ रही है , लगता है कोनो स्ट्रांग ब्रांड पिए है ,, ठीक है हमहू जाते है , खामखा हमाओ बक्त बर्बाद किये,,,,,,,हवलदार चलो”
इंस्पेकटर जैसे आया था पांच मिनिट में वैसे ही वापस चला गया। गोलू गुप्ता जी के पास आया और कहा,”पिताजी ! आपने झूठ काहे कहा , हमाये ससुर तो कबो नाही पीते है”

“तो का बोले ओह्ह्ह का जे कहे कि गटर से उठाकर लाये है इन्हे”,गुप्ता जी ने चिढ़कर कहा
गोलू कुछ कह पाता इस से पहले ही शर्माईन रोते छाती पीटते अंदर आयी। किसी ने पुलिस के साथ साथ उन्हें भी खबर दी कि शर्मा जी इस दुनिया में नहीं रहे। वे रोते हुए अंदर आयी और तख्ते पर पड़े शर्मा जी की छाती पर जोर जोर से अपने दोनों हाथो को मारकर कहा,”ए पिंकिया के पापा ! हमे अकेला छोड़कर काहे चले गए ?”

“अरे अकेली कहा है आप हम है न”,गुप्ता जी ने बड़े प्यार से कहा ये सुनकर गुप्ताइन , गोलू और मिश्रा जी ने एक साथ उन्हें घूरकर देखा तो गुप्ता जी वापस पीछे आ गए और गोलू ने धीरे से कहा,”ए पिताजी ! हमायी सासुमा की ब्यूटी के चक्कर में कही आपने ही तो हमाये ससुर जी को नहीं निपटा दिया ?”
गुप्ता जी ने सुना तो गोलू की गुद्दी पकड़कर उसे दरवाजे की तरफ फेंक दिया और जैसे ही पलटा मिश्रा जी ने कहा,”सुधर जाओ गुप्ता”

बेचारे गुप्ता जी झेंपते हुए दूसरी तरफ देखने लगे।

शर्माईन को रोते देखकर पिंकी उन्हें समझाने के लिए उनके पास आयी लेकिन शर्माईन किसी की सुने ना। गुप्ताइन भी उस तरफ चली आयी और शर्माईन को सम्हाला। गुड्डू ये सब तमाशा देखकर एक बार फिर एम्बुलेंस के लिए फोन करने लगा। बेचारी रूपा पहली बार कानपूर आयी थी और आते ही उसे ये सब देखना पड़ रहा था उसने अपने सीने से हाथ लगाया और कहा,”मंगल जी ! हमाओ मन बहुते घबरा रहो है ! हमहू ज़रा बाहिर जाते है”

“हाँ हाँ रूपा जी आप बाहिर खुली हवा मा चलिए हम ज़रा इह सब सुलटा के आते है,,,,,,,,,,,,का है कि हमको लग रहा है इह मेटर अब गुप्ता जी और मिश्रा जी का बस को ना रहो”,मंगल फूफा ने रूपा के सामने बड़ी बड़ी फेंककर कहा
रूपा ने हामी में गर्दन हिलायी और वहा से चली गयी। पास ही खड़े आदर्श फूफा ने रूपा को बाहर जाते देखा और झुककर मंगल फूफा से कहा,”अब समझ आया जे रूपा तुम्हाये पियार मा कैसे गिरी ?”

“कैसे ?”,मंगल फूफा ने पूछा
“अपनी हाइट से लम्बी बाते जो कर लेते हो”,आदर्श फूफा ने कहा और साइड में चले गए।
“आज तो साला जे गोलू से बात करके रहूंगा ! हमे सादी का सपना दिखाकर ना जाने कहा भाग गवा ? हमसे पैसा लेकर कहा नवरतन चचा तुम्हाये लिए आसमान से उतरी अप्सरा का रिश्ता लेकर आएंगे,,,,,,,,,और खुद ही गायब हो गए। आज तो हमहू फैसला करके जाएंगे”,कहते हुए नवरत्न टेलर गुप्ता जी के घर में आया !  

नवरत्न सीढ़ियों के पास पहुंचा तभी सीढ़ियों से नीचे उतरती रूपा का पैर फिसला और जैसे ही वह गिरने को हुई नवरत्न ने आगे बढ़कर किसी फ़िल्मी हीरो की तरफ उसे अपनी बाँह में थाम लिया। घरबराकर रूपा ने अपनी आँखे मीच ली और फिर धीरे से खोली तो उसकी नजरे नवरत्न से जा मिली। दोनों की नजरे मिली , दिल धड़का और बजा नवरत्न का फोन

“धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना , धीरे धीरे से दिल को चुराना”

रूपा हल्का सा मुस्कुराई। नवरत्न की आँखों में दिल चमकने लगे उसने जेब से फोन निकालकर कान से लगाया और दूसरी तरफ से किसी ने कुछ कहा
“पेंट शर्ट नाही बे अब सीधा सादी की शेरवानी सिलेगी”,नवरत्न ने कहा और फोन साइड में फेंक दिया जो की जाकर लगा खिड़की के पास खड़े यादव जी के सर पर जो खिड़की से अंदर झाँककर अंदर देख रहे थे।

( क्या समय रहते शर्मा जी को आएगा होश या बढ़ने वाली है उनकी मुसीबते ? क्या कभी सुधर पाएंगे गोलू और उसके पिताजी ? क्या रूपा की जिंदगी में हो चुकी है नवरत्न की एंट्री और टूटने वाला है मंगल फूफा का दिल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6Manmarjiyan Season 5 – 6

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Continue With Manmarjiyan Season 5 – 7

Read manmarjiyan season 4

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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