Pasandida Aurat Season 3 – 10

Pasandida Aurat Season 3 – 10

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

अवनि को अपनी गोद में उठाये पृथ्वी बिस्तर की तरफ आया। उसने बड़े प्यार से अवनि को बिस्तर पर लेटाया और तकिया उठाकर अवनि के सर के नीचे लगाकर कहा,”तुम रातभर मेरे साथ जगी हो थोड़ी देर सो जाओ”
अवनि ने सुना तो ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी और मन ही मन सोचने लगी कि रातभर जगा तो पृथ्वी भी है फिर क्या उसे नींद नहीं आ रही। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी जान लगा तो अवनि ने उसकी कलाई पकड़कर उसे रोक लिया। पृथ्वी पलटा और अपनी गर्दन उचकाई तो अवनि ने अपनी बाँहे फैलाकर पृथ्वी से अपने पास आने का इशारा किया।

पृथ्वी अवनि के बगल में आ बैठा , अवनि ने साइड में खिसककर पृथ्वी को सोने के लिए जगह दी। पृथ्वी अवनि के बगल में आ लेटा और अपनी बाँह फैला दी। अवनि ने अपने सर के नीचे से तकिया निकाला और अपना सर पृथ्वी की बाँह पर रख लिया। पृथ्वी ने अवनि को अपनी बाँहो में भरा और कुछ ही देर में दोनों को नींद आ गयी।
अवनि और पृथ्वी ऐसा सोये कि उनकी आँख दोपहर 12 बजे घर की डोरबेल बजने से खुली। डोरबेल की आवाज सुनकर अवनि उठी लेकिन पृथ्वी नींद में था इसलिए करवट ली और तकिया सर पर रखकर सो गया।

अवनि ने जयदीप के घर जाने के लिए रात में जो साड़ी पहनी वही पहनकर सो गयी थी। उसने जल्दी से अपने बालों को समेटा और साड़ी को सही करते घडी की तरफ देखा जो कि 12 दोपहर के 12 बजा रही थी।
“हे महादेव ! 12 बज रहे है और हम लोग सो रहे है,,,,,,,,पता नहीं दरवाजे पर कौन होगा ? मुझे जल्दी जाकर देखना चाहिए”,खुद में ही बड़बड़ाते हुए अवनि कमरे से बाहर चली आयी।

दरवाजे के सामने आकर उसने दरवाजा खोला सामने दादी , नीलम भुआ , रवि जी और लक्षित को देखकर अवनि ने घबराकर  दरवाजा वापस बंद कर दिया। इन सबको अचानक वहा देखकर अवनि को समझ नहीं आया क्या करे ?
बाहर खड़े रवि जी ने दादी को देखा और हैरानी भरे स्वर में कहा,”अरे ! ये अवनि ने हमारे मुँह पर दरवाजा क्यों बंद कर दिया ?”

“लगता है दादा के साथ रहकर वहिनी भी उनकी तरफ बद्तमीज हो गयी है”,लक्षित ने बिना सोचे समझे कहा
रवि जी ने सुना तो लक्षित को घूरकर देखा और कहा,”बड़ो के सामने कैसे बात करते है इसकी समझ नहीं है तुम्हे लकी ?”
रवि जी की फटकार सुनकर लक्षित दूसरी तरफ देखने लगा

रवि जी , दादी , नीलम भुआ और लक्षित तो वहा थे ही रही सही कसर नकुल ने वहा आकर पूरी कर दी और कहा,”अरे आप सब लोग बाहर क्या कर रहे है ?”
“तुम्हारा ही इन्तजार कर रहे थे बेटा कि कब तुम आकर ये बेल बजाओ और तुम्हारा वो नालायक दोस्त आकर दरवाजा खोले और हमे अंदर जाने को मिले”,रवि जी ने कहा

“क्या दादा आप भी ! आप पृथ्वी को नालायक कह रहे है। अरे उसकी शादी हो चुकी है”,नीलम भुआ ने कहा
“शादी हो चुकी है तो क्या अब वो घर का दरवाजा नहीं खोलेगा ?”,रवि जी ने कहा
“अरे क्यों चिढ रहा है फिर से बेल बजा दे”,दादी ने कहा
रवि जी से पहले नकुल ने बेल बजायी और इस बार भी अवनि ने ही दरवाजा खोला। उसने सर पर पल्लू ले रखा था।
“क्या हुआ अवनि ? तुमने हमे देखकर दरवाजा क्यों बंद कर लिया ?”,नीलम भुआ ने अवनि से पूछा

“जी भुआजी वो,,,,,,,,,,,वो मैंने सर पर पल्लू नहीं लिया था इसलिए , आप लोग बाहर क्यों खड़े है अंदर आईये ना”,अवनि ने झेंपते हुए कहा
दादी ने सुना तो मुस्कुराई और अंदर चली आयी। दादी के पीछे पीछे बाकी सब भी अंदर चले आये। अवनि ने दादी , नीलम भुआ और रवि जी के पैर छुए।
दादी और नीलम भुआ सोफे पर आ बैठे और रवि जी अवनि के पास चले आये।

उन्होंने अवनि के सर पर हाथ रखकर प्यार से कहा,”अवनि ! बेटा आज मेरे पैर छू लिए कोई बात नहीं लेकिन आगे से मत छूना। तुम हमारे घर की बहू ही नहीं बल्कि बेटी भी हो और हमारे यहाँ बेटियाँ पैर नहीं छूती,,,,,,,,,,समझे बेटा”
अवनि ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी। रवि जी ने देखा पृथ्वी कही नजर नहीं आ रहा तो अवनि से पूछा,”पृथ्वी कहा है , कही बाहर गया है क्या ?”

“जी वो सो रहे है”,अवनि ने पलकें झुकाकर धीरे से कहा
“ये कोई सोने का वक्त है , हम लोग यहाँ उस से मिलने आये है और वो सो रहा है,,,”,दादी ने कहा  
नकुल ने सुना तो कहा,”अरे दादी ! मैं उठाकर आता हूँ उसे”
“नकुल भाई मैं भी आता हूँ”,कहकर लक्षित भी नकुल के साथ पृथ्वी के कमरे की तरफ बढ़ गया और रवि जी सोफे पर आ बैठे।

बेचारी अवनि ने उठने के बाद ना मुँह धोया था ना ब्रश किया था। अवनि को उलझन में देखकर नीलम भुआ ने कहा,”क्या बात है अवनि तुम ठीक हो ना ?”
“अह्ह्ह्ह हां , हां भुआजी ! आप लोग बैठिये मैं अभी आयी”,अवनि ने कहा
“हम्म्म,,,,,,,,,,!!!”,नीलम भुआ ने कहा

अवनि दूसरे कमरे में चली आयी और कपडे लेकर जल्दी से नहाने चली गयी। उधर नकुल और लक्षित पृथ्वी के कमरे में पहुंचे देखा पेट के बल लेटा , तकिये में मुँह गड़ाए पृथ्वी सो रहा है। नकुल पृथ्वी के पास आकर बैठा और अपनी ऊँगली उसके गाल पर घुमाते हुए कहा,”पृथ्वी , पृथ्वी , पृथ्वी उठ जाओ सुबह हो चुकी है”
पृथ्वी नींद में था उसे लगा अवनि उसे जगाने आयी है तो वह दूसरी तरफ मुँह घुमाकर सो गया ये देखकर लक्षित ने कहा,”नकुल भैया ! लगता है दादा गहरी नींद में है,,,,,,,,,,,,अब क्या करे ?”

नकुल ने सुना तो पृथ्वी को जोर से हिलाया और पृथ्वी हड़बड़ाकर उठा उसने जब नकुल और लक्षित को अपने कमरे में देखा तो हैरान हुआ और उठकर बैठते हुए कहा,”तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो ?”
“हम दोनों नहीं बाहर और भी लोग आये है आपसे मिलने लेकिन आपको देखकर तो लग रहा है जैसे आपकी नींद पूरी नहीं हुई”,लक्षित ने पृथ्वी को उबासी लेते देखकर कहा
नकुल ने सुना तो पृथ्वी का कंधा दबाकर शरारत से कहा,”नींद कैसे पूरी होगी नयी नयी शादी जो हुई है लड़के की , लगता है भाभी ने रातभर सोने नहीं दिया तुम्हे”

पृथ्वी ने देखा नकुल लक्षित के सामने ऐसी बातें कर रहा है तो उसने लक्षित से थोड़ा कठोर स्वर में कहा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? चलकर बाहर बैठो मैं आता हूँ,,,,,,,,,,,,,!!”
लक्षित ने सुना तो मुँह बनाया और वहा से चला गया। पृथ्वी नकुल की तरफ पलटा और उसे एक चपत लगाकर कहा,”कुछ भी बोलने से पहले थोड़ा सोच लिया कर , बच्चे के सामने ऐसी बाते कर रहा है”

“बच्चा ? यहाँ बच्चा कौन है बताना जरा ? वो तुम्हारा छोटा भाई लक्षित , वो सोच में तुमसे भी बड़ा है नवी मुंबई में गर्लफ्रेंड है उसकी , दो साल से रिलेशनशिप में है उसके साथ,,,,,,,,,,,,तेरी तरह नहीं कि शादी को एक महीना हो गया और सुहागरात अब मना रहा है।”,नकुल ने पृथ्वी के सामने लक्षित की पोल खोलते हुए कहा

पृथ्वी ने सुना तो इधर उधर देखने लगा और मन ही मन कहा,”एक महीने बाद भी कहा मौका मिला मुझे,,,,,,,,,,!!”
“कुछ कहा तुमने ?”,नकुल ने पृथ्वी को बड़बड़ाते देखकर पूछा
“तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”,पृथ्वी ने पूछा
“मैं तो बस ऐसे ही तुम्हारे और भाभी के हाल चाल पूछने आया था और बाहर तुम्हारी दादी , नीलम भुआ और अंकल मिल गए”,नकुल ने बिस्तर से नीचे उतरकर कहा

“क्या ! ये सब लोग यहाँ आये है ?”,पृथ्वी ने चौंककर कहा
“हाँ इसमें इतना चौंकने की क्या बात है ? वैसे तुम अब तक सो रहे हो रातभर जागकर क्या कर रहे थे ?”,नकुल ने पृथ्वी को छेड़ते हुए पूछा
पृथ्वी बिस्तर से नीचे आया और कहा,”वही जो शादीशुदा लोग करते है”
“ओह्ह्ह्ह मतलब रोमांस,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने पृथ्वी के पीछे आते हुए कहा

पृथ्वी रुका और पलटकर कहा,”जी नहीं ! एक दूसरे को जानने समझने की कोशिश,,,,,,,,,!!!”
नकुल ने सुना तो हताश होकर कहा,”हाह ! मुझे तो लगता है तुम्हारे दो चार बच्चे हो जायेंगे तब भी तुम अवनि से जान पहचान ही बढ़ा रहे होंगे,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने अपना सर झटका और कमरे से बाहर निकल गया। नकुल भी कमरे से बाहर चला आया।

हॉल में आकर पृथ्वी ने देखा दादी , रवि जी और नीलम भुआ आये है साथ ही लक्षित भी वही बैठा अपने फोन में बिजी है तो पृथ्वी ने कहा,”आप सब यहाँ ?”
“क्यों ! क्या हम लोग यहाँ नहीं आ सकते ?”,रवि ने कहा
“मैंने ऐसा कब कहा ?”,पृथ्वी ने झेंपकर कहा
“अरे भई ! रिसेप्शन के बाद तुम बहू को लेकर सीधा यहाँ चले आये और उसके बाद अपनी और अवनि की शक्ल ही नहीं दिखाई तो हम लोग ही तुम दोनों से मिलने चले आये,,,,,,,,,,!!!”,दादी ने कहा

“लता भी आना चाहती थी लेकिन घर में उसकी कुछ दोस्त और मिलने वाली आ गयी तो उसे रुकना पड़ा,,,,,,,,,,,,तुम बताओ यहाँ सब ठीक है ?”,रवि जी ने पूछा
“हाँ सब ठीक है,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“जब सब ठीक है तो फिर तुम घर क्यों नहीं आये ? बड़े दादा और पंकज दादा तुम्हे और अवनि को खाने पर बुलाने वाले है साथ ही मेरे घर भी आना है और अभी तो अवनि की पहली रसोई भी बाकि है,,,,,,,कितना कुछ बाकी है और तुम यहाँ हो,,,,,,,,पृथ्वी शादी होते ही कही तुम फिर से तो हम सबको नहीं भूल गए ?”,इस बार नीलम भुआ ने कहा

“नहीं भुआ ! ये कैसी बाते कर रही है आप,,,,,,,,,,,,थोड़ा बिजी था इसलिए नहीं आ पाया और फिर सब भागदौड़ में अवनि भी काफी थक चुकी थी”,पृथ्वी ने आकर सोफे पर बैठते हुए कहा
“देखा आई ! अभी से अपनी बायको की कितनी फ़िक्र है इसे”,रवि जी ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा तो पृथ्वी दूसरी तरफ देखने लगा

अवनि तब तक नहाकर किचन में जा चुकी थी। उसने सबके लिए चाय चढ़ा दी और नाश्ते के लिए कबर्ड खोलकर देखा तो वहा बस कुछ बिस्किट्स और नमकीन रखे थे। अवनि ने उन्हें ही बाहर निकाला प्लेट में रखा और चाय कपों छानकर बाहर चली आयी।
नीलम भुआ ने देखा अवनि ने साड़ी बदल ली है तो उन्होंने चाय का कप उठाते हुए कहा,”अरे अवनि ! तुमने साड़ी क्यों बदल ली ?”

“वो मैं नहाने गयी थी इसलिए,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा
“ओह्ह्ह तो तुम और भाभी साथ साथ सो रहे थे , सही जा रहे हो पृथ्वी”,नकुल ने पृथ्वी की तरफ झुककर दबे स्वर में कहा तो पृथ्वी ने नकुल को घुरा और नकुल सीधे होकर बैठ गया।
दादी ने अवनि को अपने पास आने का इशारा किया अवनि उनके सामने चली आयी तो दादी ने हाथ पकड़कर अवनि को अपने बगल में बैठाया और उसका गाल छूकर प्यार से कहा,”ये साड़ी तुम पर बहुत अच्छी लग रही है”

“थैंक्यू दादी,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने सर का पल्लू सम्हाले मुस्कुरा कर कहा
“दादी नही आई , घर में सब मुझे आई कहते है तो तुम भी मुझे आई कह सकती हो”,दादी ने प्यार से कहा
“जी आई,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
दादी को अवनि पर प्यार लुटाते देखकर रवि जी और पृथ्वी साथ साथ मुस्कुरा उठे।

अवनि ने दादी और रवि जी को चाय दी और कप लेकर पृथ्वी के सामने आयी तो पृथ्वी ने चाय के कप के साथ साथ अवनि की उंगलियों को भी छू लिया जिसमे एक शरारत थी लेकिन घरवालों के सामने बेचारी अवनि क्या कहे ? लक्षित और नकुल ने अपनी चाय खुद ही ले ली और फिर सब चाय पीते हुए बाते करने लगे।

चाय पीकर रवि जी ने कप रखा और पृथ्वी से कहा,”आज शाम तुम और अवनि घर आ जाओ। रात में वही रुक जाना सब से मिल भी लेना और कल सुबह अवनि की पहली रसोई भी हो जाएगी,,,,,,,,,,,,,,क्यों आई मैं ठीक कह रहा हूँ ना ?”

“हाँ रवि सही कह रहा है , नयी नयी शादी हुई है तुम दोनों को वहा रहना चाहिए,,,,,,,,,,,,सोसायटी की ओरते अवनि से मिलने आएँगी , आस पास के लोकल मेहमान है वो भी आएंगे और फिर कुछ दिनों बाद मैं भी वापस गांव चली जाउंगी , जाने से पहले कुछ वक्त इसके साथ बिताउंगी तो मुझे अच्छा लगेगा”,दादी ने रवि जी की बात पर सहमति जताकर कहा

रवि जी और दादी की बात सुनकर पृथ्वी ने मायूसी से नीलम भुआ की तरफ देखा तो नीलम भुआ पृथ्वी की भावनाये समझ गयी और कहा,”अरे क्या आई ! नयी नयी शादी हुई है दोनों को साथ रहने दो। घर की जिम्मेदारी और सोसायटी के लोगो से मिलना जुलना तो होता रहेगा।”
पृथ्वी ने सुना तो उसे आज नीलम भुआ पर कुछ ज्यादा ही प्यार आया , एक वही तो थी जो बेचारे के दिल का हाल समझ रही थी।

पृथ्वी ने रवि जी की तरफ देखा और कहा,”अह्ह्ह्ह बाबा ! मैं और अवनि आज शाम घर नहीं आ सकते”
“क्यों ?”,रवि जी ने पूछा
“अह्ह्ह वो दरअसल ! जयदीप सर है ना मेरे पुराने बॉस , अह्ह्ह उन्होंने मेरे और अवनि के टिकट्स बुक किये है। एक हफ्ते के लिए हम दोनों मुंबई से बाहर जा रहे है,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने हिचकिचाते हुए कहा
पृथ्वी की बात सुनकर रवि जी कुछ देर चुप रहे और फिर कहा,”ठीक है कोई बात नहीं उसके बाद तो तुम घर आ सकते हो ना ?”

“हाँ , हाँ उसके बाद आ जायेंगे”,पृथ्वी ने कहा
“बाबा वैसे भी दादा वहिनी के साथ कही घूमने नहीं गए है इन्हे जाना चाहिए। अभी दादा की ऑफिस की छुट्टी है बाद में तो इन्हे ऑफिस जाना पडेगा और ये बिजी भी हो जायेंगे”,लक्षित ने कहा
लक्षित के मुँह से ऑफिस का नाम सुनकर पृथ्वी के चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे। अवनि क्या उसने अपने घर में भी किसी को अपनी नौकरी जाने के बारे में नहीं बताया था।

दादी ने जब जयदीप का नाम सुना तो उन्हें शादी वाली रात याद आ गयी और उन्होंने पृथ्वी से कहा,”ये जयदीप वही है ना जो उस दिन तेरे आँसू पोछ रहा था ?”
“हाँ मेरे बॉस है”,पृथ्वी ने कहा
“पक्का बॉस ही है न ?”,दादी ने कहा
“अरे हाँ आई ! बॉस ही है”,पृथ्वी ने कहा

दादी ने मुँह बनाया और कहा,”उसकी हरकतों से तो नहीं लगता,,,,,,,,,,,,,,कौनसा बॉस अपने एम्प्लॉय को हनीमून के टिकट्स देता है बताओ ?”
दादी के मुँह से हनीमून का नाम सुनकर पृथ्वी के साथ साथ सब हैरान थे और अवनि शरमाकर वहा से चली गयी
“अरे आई ! वो मेरे बॉस होने के साथ साथ अवनि को अपनी छोटी बहन भी मानते है,,,,,,,,,,,,,,,,,और वैसे भी मैंने इतने साल उनकी कम्पनी के लिए काम किया है इतना तो वो मेरे लिए कर ही सकते है ना”,पृथ्वी ने दादी को समझाते हुए कहा

“कब जाना है ?,”रवि जी ने पूछा
“आज शाम की फ्लाइट है”,पृथ्वी ने कहा
रवि जी ने हॉल में लगी में समय देखा जो कि दोपहर का 1 बजा रही थी , उन्होंने पृथ्वी से कहा,”तो यहाँ बैठकर बातें क्या कर रहे हो जाकर तैयारी करो,,,,,,,,,,,नीलम , आई हम लोग चलते है”
“हाँ दादा चलते है वरना अवनि हमारी खातिरदारी में ही लगी रहेगी उसे पैकिंग का वक्त नहीं मिलेगा”,नीलम भुआ ने उठते हुए कहा

“मैं भी आप लोगो के साथ चलता हूँ”,पृथ्वी ने भी सबके साथ उठकर कहा
“अब तुम कहा चले ? तुम्हे यहाँ अवनि की मदद करनी चाहिए ना कि हमारे साथ जाना चाहिए”,रवि जी ने कहा
“सोच रहा हूँ जाने से पहले आई से मिल लू और उन्हें बता दू वरना वो फिर मुझसे गुस्सा हो जाएँगी,,,,”,पृथ्वी ने कहा
अवनि तब तक बाहर आ चुकी थी उसने देखा सब जा रहे है तो उसने आकर कहा,”आप सब जा रहे है ?”
“हाँ बेटा ! तुम दोनों को देखना था देख लिया।

एक हफ्ते बाद तो तुम घर आ ही रही हो”,रवि जी ने प्यार से कहा
अवनि ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी।सबने अवनि को बाय बोला और फ्लेट से बाहर निकल गए पृथ्वी अवनि की तरफ पलटा और कहा,”अह्ह्ह अवनि ! मैं आई से मिलकर आता हूँ। मैं जाऊ ना ?”
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”पृथ्वी ! आई-बाबा हमारी फर्स्ट प्रायोरिटी है , उनसे मिलने या उनके पास जाने के लिए हमे एक दूसरे से परमिशन लेने की जरूरत नहीं है,,,,,,,,,,,,जाओ और जल्दी वापस आना”

पृथ्वी ने सुना तो उसका मन किया अभी अवनि को गले लगा ले आखिर वह इतनी सुलझी हुई कैसे हो सकती है ? अब गले तो नहीं लेकिन जैसे ही पृथ्वी ने अपने होंठो को अवनि के गाल की तरफ बढ़ाया दरवाजे पर खड़े रवि जी ने खाँसने का नाटक किया और कहा,”पृथ्वी,,,,,,,,,,,,!!!!”
पृथ्वी को याद आया घरवाले उसके पीछे ही खड़े है तो बेचारे ने अपनी आँखे मीची और झेंपते हुए कहा,”आया बाबा”

अवनि ने देखा तो अपना हाथ अपने मुँह पर रखकर धीरे से हंसी ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”तुम से तो मैं वापस आकर बात करूंगा”
पृथ्वी वहा से चला गया और अवनि दरवाजा बंद करके जोर से हंस पड़ी क्योकि पहले पृथ्वी उसके प्यार में पूकी था लेकिन अब तो पूरा मजनू बन चुका था।

( क्या हनीमून बनेगा अवनि और पृथ्वी के बीच की इन दूरियों को खत्म करने का जरिया ? क्या लता जाने देगी पृथ्वी और अवनि को मुंबई से बाहर ? क्या आपको भी लगता है पूकी पृथ्वी बन गया है अवनि के प्यार में मजनू ? मुझे कमेंट सेक्शन में बताये और पढ़ना ना भूले “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
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