Manmarjiyan Season 4 – 42
Manmarjiyan Season 4 – 42

नवरतन को अपनी बातो में उलझाकर गोलू अपने घर चला आया। घर में घुसते ही सुबह सुबह उसकी मुलाकात हुई गुप्ता जी से , गोलू गुप्ता जी से नजरे चुराकर चुपचाप अंदर जाने लगा तो गुप्ता जी ने कहा,”का रे गोलुआ ! कहा मुँह काला करके आये रहय हो जो मुँह छुपाकर जा रहे हो ?”
गुप्ता जी कुछ कहे और गोलू ना भड़के ऐसा भला कैसे हो सकता था ? वह पैर पटकते हुए गुप्ता जी के पास आया और कहा,”कहा मुँह काला करके आएंगे हमहू,,,,,,,,रात मा स्टेशन गए थे फिर वहा से सीधा मिश्रा जी के घर चले गए और कहा जायेंगे हम,,,,,,,,,!!!”
“हाँ तो जे मा इत्ता भड़कने की का जरूरत है ? तुमहाओ अपनों घर नाही है जो जब देखो तब मिश्रा के घर मा पड़े रहते हो ?”,गुप्ता जी ने घुड़ककर कहा
“ए पिताजी ! ए हमहू ना आपके आगे हाथ जोड़ते है , आप कहे तो ल्यो आपको दंडवत प्रणाम कर लेते है बस आज के दिन हमे बख्स दयो”,कहते हुए गोलू सच में गुप्ता जी के सामने पेट के बल धरती पर लेट गया और उन्हें दंडवत प्रणाम करने लगा।
गोलू की बात सुनकर गुप्ता जी चुपचाप गोलू की नौटंकी देखने लगे , गोलू उठा और कहा,”आज हम जा रहे है चंदौली और वहा हमे अकेले सब देखना है और जे के लिए हमाये दिमाग का शांत रहना बहुते जरुरी है,,,,,,,,,,,इहलीये आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है आज के दिन हमसे बहस नाही कीजिये ,, दुइ दिन बाद आते है ना हमहू वापस तब 50-50 मैच रखेंगे,,,,,,,,ठीक है”
गुप्ता जी गोलू से कुछ कहते इस से पहले गोलू वहा से चला गया। अंदर आँगन में आया तो देखा मंगल फूफा सुबह सुबह नहा धोकर तैयार खड़े थे। उन्होंने पीले फूलो वाली हाल्फ बाजु की शर्ट और काले रंग की पेंट पहनी थी। चेहरे पर पाउडर इतना लगाया था कि हाथ और मुँह का रंग आपस में कोई मेल नहीं खा रहा था। घर के अंदर भी आँखों पर धुप वाला चश्मा लगाए हुए थे और सर पर बचे चंद बालो में चमेली का तेल डालकर उन्हें भी चिपकाया हुया था , बालों में तेल इतना था कि कनपटी से चू रहा था।
गोलू ने मंगल फूफा को देखा तो उनके पास आया और कहा,”जे का हाल बना रखो है तुम्हाये पिताजी की शादी है वहा जो इत्ता तैयार हुए हो ? और जे चार बालों मा जित्ता तेल तुमहू चुपड़े हो न उत्ते मा तो आधा मोहल्ला निपट जाए,,,,,,,,,,,!!!”
“का हुआ ! हमहू अच्छे नाही लग रहे का ?”,मंगल फूफा ने आँखों पर लगे चश्मे को ठीक करते हुए कहा
“अच्छे ! ऐसे लग रहे हो जैसे कोनो सुवर अभी अभी नाले से नहाकर आया है और जे का फूल वाली कमीज पहनी है कोनो ढंग का कमीज नाही था तोह पे और उस पर जे चश्मा , तुम्हायी कौनसी अम्मा घर के अंदर धुप वाला चश्मा लगा के घूमती है बे ?”,गोलू ने बिफर कर कहा
सुबह सुबह अपनी इतनी बेइज्जती होते देखकर मंगल फूफा रोआँसा हो गए और कहा,”देखो गोलू ! हमको अपने साथ लेकर जाना है तो जाओ वरना हमायी बेइज्जती नाही करो”
गोलू ने मंगल फूफा को उदास देखा तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने कहा,”अरे सॉरी यार फूफा ! सुबह सुबह पहिले मिश्रा जी से बहस हो गयी , घर आये तो पिताजी मिल गए और जे दोनों का गुस्सा हमहू आप पर उतार दिए,,,,,,,,अच्छे लग रहे हो , चश्मा उतार काहे दिए लगा के रखो”
गोलू की बात सुनकर मंगल फूफा मुस्कुराये और चश्मा वापस लगा लिया तो गोलू ने कहा,”हमहू जल्दी से नहाकर आते है फिर चलते है गुड्डू भैया नुक्कड़ पर हमरा इंतजार कर रहे है और फिर लड़के लोगन को भी तो सामान के साथ रवाना करना है”
“लड़को को तो हमने दूकान जाकर सुबह ही भेज दिया गोलू”,मंगल फूफा ने कहा
“का बात है फूफा ? पहली बार कोनो ढंग का काम किये हो”,गोलू ने मुस्कुराकर कहा
“अब जिम्मेदारी लिए है तो निभाएंगे भी ना गोलू , जाओ जाकर नहाय ल्यो हम ज़रा खाने पीने का देखकर आते है”,कहकर मंगल फूफा वहा से चले गए और गोलू भी नहाने चला गया
गोलू नहाकर आया और तैयार होकर मंगल फूफा के साथ बाहर आया तो गुप्ता जी बाहर कुर्सी पर बैठे अख़बार पढ़ते दिखाई दिए। गोलू आज नए आर्डर के लिए बाहर जा रहा था इसलिए आकर गुप्ता जी के पैरो में झुका और कहा,”आशीर्वाद दीजिये पिताजी , आज बहुत दिनों बाद एक ठो शादी का आर्डर मिला है”
गुप्ता जी ने अपने अखबार को साइड किया और सामने देखा तो कोई दिखाई नहीं दिया , उनके कानो में सिर्फ गोलू की आवाज पड़ी।
“पिताजी हिया हिया नीचे”,गोलू ने कहा तो गुप्ता जी ने देखा गोलू एक बार फिर उनके चरणों में दंडवत पड़ा है।
“हाँ हाँ ठीक है खुश रहो”,कहकर गुप्ता जी ने फिर अपना अख़बार खोला और खबर पढ़ने लगे। गोलू उठा और ऐसा उठा कि फिसलकर गुप्ता जी पर गिरा और उसका सर अख़बार के बीचोंबींच से निकल गया। अख़बार दो हिस्सों में बटकर गुप्ता जी के दोनों हाथो में ये देखकर गुप्ता जी ने खींचकर एक थप्पड़ गोलू के गाल पर रसीद किया और गोलू सीढ़ियों से लुढककर नीचे जा गिरा।
गोलू उठा और अपने कपडे झाड़ते हुए गुप्ता जी की तरफ आया और कहा,”अरे हमहू आशीर्वाद मांगे रहे आपसे और आप सबेरे सबेरे थप्पड़ मार रहे है”
“तो तुमको किसने कहा था हमायी छाती पर चढ़कर मांगो आशीर्वाद सुबह सुबह हमाओ साढ़े पाँच रूपये को नुकसान कर देओ,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने गोलू को घूरकर कहा
“पिताजी ! का साढ़े पाँच रूपये के लिए बिलबिला रहे है आप , एक ठो बार हमाओ और गुड्डू भैया को काम चल जाए ओह्ह्ह के बाद पाँच नाही 50 हजार यू यू उड़ा देंगे आप पर,,,,,,,,,,अरे पुरो मोहल्ला कहे है उह्ह्ह आ रहे गज्जू गुप्ता के होनहार सपूत गोलू गुप्ता ,, देखना पिताजी एक दिन बहुते नाम करेंगे हम आपका”,गोलू ने हवाबाजी करते हुए कहा
गुप्ता जी ने सुना तो फटा हुआ अख़बार समेटकर साइड में रखा और कहा,”हम पे एक ठो अहसान करोगे बेटा ?”
“हाँ बोलिये ना पिताजी”,गोलू ने बड़े प्यार से कहा
गुप्ता जी ने गोलू को देखा और कहा,”जे अपने नाम के आगे से ना हमाओ सरनेम हटाय दयो का है कि तुम्हाये कारनामे गुप्त ही रहे तो अच्छा है,,,,,,,,,,,हमको जे सब मा भागीदार नाही बननो”
“अरे पिताजी,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा लेकिन वह अपनी बात पूरी कर पाता इस से पहले गुप्ता जी उठे और वहा से अंदर जाने लगे। जाते जाते उनकी नजर मंगल फूफा पर पड़ी जो कि तैयार होकर सीढ़ियों पर खड़े थे। उन्हें देखकर गुप्ता जी रुके और कहा,”अब तुम कहा चले ?”
“गुड्डू और गोलू ने हमको अपने साथ काम पर रखा है”,मंगल फूफा ने सामने देखते हुए कहा
गुप्ता जी ने एक नजर गोलू को देखा और एक नजर मंगल को देख अंदर जाते हुए कहा,”ल्यो एक और नमूना शामिल हो गओ जे गुड्डू गोलू की नौटंकी मा,,,,,,जे घर अब घर नाही रहो है गोलू की अम्मा चिड़ियाघर बन गओ है”
मंगल फूफा ने सुना तो बुरा सा मुँह बनाते हुए गोलू की तरफ आया और कहा,”जे तुम्हाये बाप तुम से कबो खुश होते भी है का ? जब देखो तब तुम्हे मोहल्ला के कुत्ते की तरह दुतकारते रहते है”
मंगल फूफा की बात सुनकर गोलू ने उन्हें खा जाने वाली नजरो से देखा और कहा,”कुत्ता बोल रहे हो हमको फूफा”
मंगल फूफा ने खिंसिया कर कहा,”अरे नाही गोलू हमहू तो बस एग्जाम्पल दे रहे है,,,,,,,,,,,,अब चलो देर हो जाएगी”
गोलू ने हामी में गर्दन हिलायी और मंगल फूफा के साथ घर से बाहर जाते हुए कहा,”देर तो हो चुकी है फूफा लेकिन और देर हो ओह्ह्ह से पहिले साला पिताजी को हमरा जलवा दिखाना पडेगा”
“अब आ घाघरा चोली पहिन के गुप्ता जी के सामने नाचने वाले हो तुमहू ?”,मंगल फूफा ने कहा
“भगवान के हिया जब बुद्धि बट रही थी तब कहा थे आप ?”,गोलू ने गुस्से से उबलकर कहा तो मंगल फूफा दूसरी तरफ देखने लगे और गोलू ने आगे कहा,”जलवा दिखाना मतलब इह बार जो आर्डर लिए है ना ओह्ह्ह को बिना इसी गड़बड़ के पूरा करने में जी जान लगा देंगे हमहू और दिखा देंगे पिताजी को कि ओह्ह्ह के गोलू गुप्ता किसी से कम नाही है,,,,,,,,,,,,ओह्ह्ह के बाद देखना शादी पे शादी , फंक्शन पे फंक्शन साला लाइन लगा देंगे आर्डर की कानपूर मा”
“अरे जे तो सही कहा तुमने गोलू और बहुते जरुरी भी है ताकि घरवालों के बीच मा तुम्हायी थोड़ी इज्जत बनी रहे और कुछो हमायी भी,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने खिंसियाकर कहा
“अरे बन जाएगी फूफा ! इह बार बहुते सही हाथो मा आये हो आप ,, हमाये और गुड्डू भैया के रहते काहे की टेंशन बस आप काम मा ध्यान लगाओ ओह्ह्ह के बाद आपके ब्याह का बेंड भी हम ही बजवायेंगे और एक फुलवारी का पूरा गुलदस्ता लाएंगे आपके लिए,,,,,,,,,,!!!”,फूफा के साथ चलते हुए गोलू ने अपना कंधा उनके कंधे से टकरा कर कहा।
मंगल ने सुना तो खुश हो गए और कहा,”अरे हम तो तुमको हरामी समझते थे रे गोलू तुम तो बहुत बड़े दिल वाले निकले,,,,,,,,,,,हमरे बारे मा इत्ता सोचे”
गोलू तारीफ सुनकर खुश तो हुआ लेकिन साथ ही हरामी शब्द सुनकर चिढ़ा भी और कहा,”का रे फूफा पहिले कुत्ता से कम्पेयर किये अब हरामी कह रहे हो हमको , नहीं चाहते का हो ?”
“अरे गोलू ! शब्दों को छोडो भावना पर ध्यान दो,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने साथ चलते हुए कहा
गोलू ने सुना तो एकदम से चिढ गया और रुककर कहा,”एक नंबर की चुड़ैल है भावना !! अरे पुरे कानपूर की धोखेबाज लड़किया एक तरफ और उह्ह्ह अकेली एक तरफ ,, साला गोलगप्पे खाती थी हमरे पैसे से और झालमुड़ी वाले के साथ भाग गयी , मोबाइल मा रिचार्ज करवाती थी हमरे पैसे से और मैसेज भेजती थी गुड्डू भैया को , साला और तो और शादी का लहंगा लिया हमरे पैसे से और फेरे किसी और के साथ ले ली,,,,,,,,,,,,,!!!”
“जे उह्ह बात हो गयी गोलू रातभर जागकर दही जमाये तुम और सुबह बूंदी मिलाकर कोई और ले गया”,मंगल फूफा ने बहुत ही अफ़सोस भरे स्वर में कहा
“हमाये जले पर नमक नाही छिड़को तुम फूफा,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने एक मुक्का मंगल फूफा के सर पर मारकर कहा तो मंगल फूफा चुपचाप आगे बढ़ गए और गोलू जैसे ही आगे बढ़ने को हुआ अपने सामने खड़ी “भावना” को देखकर हैरान रह गया और कहा,”अरे भावना तुम ? कैसी हो , हमायी याद वाद आती है कि नाही ?”
“याद और तुम्हरी ! अरे तू , तुमको याद करने से अच्छा है गोलू हमहू गली मोहल्ला के कुत्ता लोगन को याद कर ले,,,,,,,,,,,,अभी का का कह रहे थे हमाये बारे मा ? सब सुने है हम,,,,,,,,,तुम्हरी जे ही हरकतों की वजह से जुगनू से सादी कर लिए हम”,भावना ने गुस्से से उबलकर कहा
गोलू ने सुना तो वह भी तैश में आ गया और कहा,”हाँ तो का नाचे ? और तुम जुगनू से सादी करो चाहे मंगल से हमको का,,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने सुना तो शर्माते हुए कहा,”हमको कोई ऐतराज नाही है”
भावना ने सुना तो मंगल की तरफ पलटी और कहा,”अभी चप्पल निकाल के मारेंगे सारी रंगबाजी धरी की धरी रह जायेगी तुम्हरी और तुम गोलू जिंदगी मा दोबारा कबो हमे अपनी सकल नाही दिखा देना,,,,,,,,,!!!”
कहकर भावना ने अपना पैर जोर से गोलू के पैर पर मारा और वहा से चली गयी। गोलू अपना पैर पकड़कर चिल्लाया तभी उसका फोन बजा। गोलू ने दूसरे हाथ से फोन निकाला और कहा,”हां बे कौन बोल रहा है ?”
“हम बोल रहे है तुम्हाये बाप गुड्डू,,,,,,,,,,,,हमाओ फोन कल तुम्हाये घर मा रह गओ ओह्ह्ह का भी ले आईओ अपने साथ ,, हम निकल रहे है 10 मिनिट मा चौक वाले चौराहे पर मिलेंगे”,कहकर गुड्डू ने फोन काट दिया
गोलू ने अपनी पेंट का जेब टटोला और राहत की साँस ली क्योकि गुड्डू का फोन वह अपने साथ लेकर ही आया था। गोलू ने सामने से गुजरते ऑटो को रोका और मंगल फूफा के साथ उसमे आ बैठा। दोनों चौक के लिए निकल गए
मिश्रा जी का घर , कानपूर
गुड्डू तैयार होकर आँगन से आया और जैसे ही सीढिया उतरकर अपनी बाइक की तरफ बढ़ा घर के मेन गेट से अंदर आती राजकुमारी भुआ और आदर्श फूफा पर उसकी नजर पड़ी। गुड्डू हैरान था कि सुबह सुबह ये दोनों यहाँ क्या कर रहे है ? वह बाइक को छोड़ सीढ़ियों की तरफ चला आया। आदर्श फूफा और भुआ गुड्डू के पास आये उनके चेहरे देखकर ही गुड्डू समझ गया कि मामला कुछ गंभीर है क्योकि हमेशा हसने मुस्कुराने वाली भुआ के चेहरे पर कठोर भाव थे और फूफा की आँखों में गुस्सा।
“अरे भुआ-फूफा आप दोनों सुबह सुबह हिया , हमरा मतलब ना कोनो खबर ना कोनो फ़ोन सब ठीक तो है ना ?”,गुड्डू ने पूछा
“हमको तुमसे बात नाही करनी है गुड्डू , मिश्रा जी को बाहिर बुलाओ पहिले उन्ही से पूछेंगे कि हम और राजकुमारी उनके कुछो लगते है की नाही”,आदर्श फूफा ने कहा
“अरे कैसी बातें कर रहे है फूफा ? भुआ जे घर की बिटिया है और आप जे घर के दामाद ,, आप दोनों का तो जन्मो जन्मो का रिश्ता रहेगा जे घर से,,,,,,,,,,और पिताजी को बाहिर काहे बुलाय रहे है आप लोग अंदर चलिए ना,,,,,,,,,बाहिर काहे खड़े है ?”,गुड्डू ने कहा
“नाही गुड्डू हम और राजकुमारी जे घर मा कदम ना रखे है , अब तो मिश्रा जी ही बाहिर आकर फैसला करेंगे”,आदर्श फूफा ने कहा तो बेचारा गुड्डू उलझन में पड़ गया कि अब ऐसी क्या बात हो गयी जो भुआ और फूफा मिश्रा जी से नाराज है।
गुड्डू कुछ पूछता या कहता इस से पहले लवली को कुछ बताते हुए मिश्रा जी सीढ़ियों की तरफ चले आये और जैसे ही नजर राजकुमारी और आदर्श फूफा पर पड़ी उन्होंने धीरे से लवली से कहा,”जे दोनों सुबह सुबह हिया का कर रहे है ?”
( क्या गोलू कर पायेगा गुप्ता जी का नाम रौशन या अभी नाम डुबोना बाकी है ? क्या मंगल फूफा भी बातो बातो में करने लगे है गोलू को जलील ? आखिर सुबह सुबह मिश्रा जी के घर में क्या कर रहे है आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


“अरे भुआ-फूफा आप दोनों सुबह सुबह हिया , हमरा मतलब ना कोनो खबर ना कोनो फ़ोन सब ठीक तो है ना ?”,गुड्डू ने पूछा
“हमको तुमसे बात नाही करनी है गुड्डू , मिश्रा जी को बाहिर बुलाओ पहिले उन्ही से पूछेंगे कि हम और राजकुमारी उनके कुछो लगते है की नाही”,आदर्श फूफा ने कहा
“अरे कैसी बातें कर रहे है फूफा ? भुआ जे घर की बिटिया है और आप जे घर के दामाद ,, आप दोनों का तो जन्मो जन्मो का रिश्ता रहेगा जे घर से,,,,,,,,,,और पिताजी को बाहिर काहे बुलाय रहे है आप लोग अंदर चलिए ना,,,,,,,,,बाहिर काहे खड़े है ?”,गुड्डू ने कहा
Yeh fufa kuch anshan na bak de