Pasandida Aurat Season 2 – 64
Pasandida Aurat Season 2 – 64

पृथ्वी और अवनि को एक दूसरे के करीब देख मारे ख़ुशी के सुरभि ने मूवी टिकट्स ही फेंक दिए और पॉपकॉर्न लेकर उनकी तरफ बढ़ी। पृथ्वी ने देखा वहा मौजूद सभी लोग अवनि और उसे ही देख रहे है तो उसने धीरे से अवनि का हाथ पकड़कर उसे रोका और कहा,”क्या कर रही हो अवनि ? सब हमे ही देख रहे है”
अवनि ने देखा तो उसे अहसास हुआ वह पृथ्वी से पीछे से हटी और कहा,”तुमने आने में इतनी देर क्यों कर दी ?”
“स्टाफ के साथ एक मीटिंग थी बस उसी में थोड़ा टाइम लग गया , तुम लोगो ने मूवी टिकट्स लिए ?”,पृथ्वी ने पूछा
“हाँ सुरभि लेने गयी है”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने जैसे ही बगल में देखा सुरभि खड़ी थी और उसे देखकर मुस्कुरा रही थी। पृथ्वी को अजीब लगा क्योकि सुरभि की मुस्कराहट में शरारत थी।
“ये लो सुरभि भी आ गयी”,अवनि ने सुरभि को देखकर कहा
“चलो चलते है फिल्म शुरू होने वाली है”,पृथ्वी ने कहा और अवनि से चलने का इशारा किया। तीनो एंट्री गेट के पास चले आये तो वहा खड़े गार्ड ने कहा,”टिकट प्लीज”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और अवनि ने सुरभि की तरफ तो सुरभि को याद आया कि टिकट्स तो उसके पास है ही नहीं
“टिकट दिखाईये”,गार्ड ने कहा
“क्या कर रही हो सुरभि ? टिकट दो न इन्हे”,अवनि ने कहा
” अह्ह्ह्ह वो टिकट तो मैंने फेंक दी”,सुरभि ने एक पॉपकॉर्न उठाकर अपने मुँह में रखते हुए कहा
“क्या ?”,पृथ्वी और अवनि के मुँह से एक साथ निकला और फिर गार्ड ने कहा,”जाईये पहले टिकट लेकर आईये उसके बाद ही एंट्री मिलेगी , चलिए साइड होईये बाकी लोगो को आने दीजिये”
पृथ्वी अवनि और सुरभि साइड में चले आये तो अवनि ने कहा,”सुरभि तुमने टिकट क्यों फेंक दी ?”
“अह्ह्ह वो मैंने,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अटकते हुए कहा ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”जाने दो अवनि ! तुम लोग यही रुको मैं दूसरी टिकट्स ले आता हूँ”
पृथ्वी के जाने के बाद अवनि ने सुरभि से कहा,”सुरभि ! ध्यान कहा रहता है तुम्हारा ? टिकट्स ही फेंक दिए तुमने,,,,,,,,,,,,और क्यों फेंके बताओगी ज़रा ?”
“अरे वो मेरे हाथ में पॉपकॉर्न और टिकट्स दोनों थे तो मैंने टिकट्स को टिश्यू समझकर फेंक दिया , आई ऍम सॉरी”,सुरभि ने मासूम सी शक्ल बनाकर कहा जबकि टिकट फेंकने की असल वजह कुछ और थी।
कुछ देर बाद पृथ्वी टिकट ले आया और तीनो अंदर चले आये। फिल्म शुरू हो चुकी थी तीनो कुर्सियों पर आ बैठे और फिल्म देखने लगे। पृथ्वी के बगल में अवनि बैठी थी और अवनि के बगल में सुरभि और तीनो का ध्यान स्क्रीन पर था। पृथ्वी का हाथ सीट के हत्थे पर रखा था , फिल्म देखते हुए एक सीन ऐसा आया जिस से खुश होकर अवनि ने मारे ख़ुशी के अपना हाथ पृथ्वी के हाथ पर रख दिया। पृथ्वी ने अपने हाथ पर अवनि का हाथ देखा तो मुस्कुराया , अब उसका ध्यान फिल्म में कम में अवनि पर ज्यादा था। ना चाहते हुए भी उसकी नजर अवनि पर चली जाती।
फिल्म देखते हुए बार बार अवनि की पलकों का झपकना , उसका खुश होना , मुस्कुराना और कभी कभी खिलखिलाकर हँसना पृथ्वी के लिए किसी जादू से कम नहीं था। वही पृथ्वी के हाथ पर अपने हाथ को रखे अवनि का पूरा ध्यान फिल्म पर , अवनि की आँखों और मुस्कान से हटकर पृथ्वी का ध्यान अवनि के गाल पर चला गया। अब तो पृथ्वी के लिए खुद को रोकना मुश्किल होने लगा , उसके होंठ अवनि के गाल पर अपनी छाप छोड़ना चाहते थे लेकिन पृथ्वी ने खुद को रोक लिया वह ऐसा कुछ नहीं करना चाहता था जिस से अवनि असहज हो।
“क्या कर रहा है पृथ्वी , ऐसे फालतू ख्याल तेरे दिमाग में कैसे आ सकते है ? तू यहाँ फिल्म देखने आया है या अपनी फिल्म बनाने , खबरदार जो तूने अवनि की तरफ देखा,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी मन ही मन खुद में बड़बड़ाया
“ए मेरा नाम लेकर बदनाम ना कर , ये ऐसे फालतू ख्याल तुम्हे आते है मुझे नहीं ,, मेरा ध्यान फिल्म देखने में है”,पृथ्वी के दायीं तरफ से आवाज आयी तो उसने देखा उसका दिमाग उसके और अवनि के हाथ पर खड़ा गुस्से से उबल रहा है
“मुझे सब पता है तुम्हरा ध्यान कहा है फिल्म तो बहाना है , तुम यहाँ सिर्फ अवनि को देखने आये हो”,पृथ्वी के बांयी तरफ से आवाज आयी तो पृथ्वी ने गर्दन घुमाकर देखा उसका दिल अपने नाखुनो पर लगी गीली नेलपॉलिश पर फूँक मार रहा है
हाँ तो क्या गलती की इसने अपनी बीवी को देखना गलत है क्या ? कम से कम दुसरो की बीवी को तो नहीं देख रहा और मैंने सिर्फ देखा उसे चूमने का ख्याल तो तुम्हे आया ना”,दिमाग ने कहा
“हाँ तो अवनि इसकी पत्नी है इसमें गलत क्या है ?”,दिल ने इतरा कर कहा
“गलत है इसके मन में लगी आग को हवा देना ,, ये अवनि के बारे में ऐसा कैसे सोच सकता है ?”,दिमाग ने कहा
“तुम जब देखो तक इसे अवनि को लेकर नेगेटिव ही बोलते हो अरे क्या पता अवनि इसी इंतजार में हो कि ये खुद से कोई पहल करे,,,,,,,,,,,,,,!!!”,दिल ने मासूमियत से कहा
“अह्ह्ह्ह ! रोमांटिक फिल्म देखकर तुम्हारी दीवारें भी धक् धक् करने लगी ना इसलिए तुम इसे अवनि की तरफ धकेल रही हो , भूलो मत वो फिल्म है और ये असल जिंदगी कुछ भी गड़बड़ की तो फिल्म तो जाएगी ही क्या पता गुस्सा होकर अवनि भी यहाँ से चली जाए”,दिमाग ने कहा
पृथ्वी कभी दाँये देखता तो कभी बाँये सुरभि ने पृथ्वी की तरफ झुककर कहा,”ए पृथ्वी पॉपकॉर्न खाओगे ?”
“ठीक है मत खाओ”,अगले ही पल सुरभि ने कहा क्योकि पृथ्वी का दाँये बाँये गर्दन घुमाने को उसने पृथ्वी की ना समझ ली और खुद ही खाते हुए फिल्म इंजॉय करने लगी !
“ओह्ह्ह पृथ्वी ! तुम्हारा दिमाग कितनी नेगेटिव बाते करता है , ये इतना डरपोक है कि ये तुम्हे कभी अवनि के करीब नहीं आने देगा,,,,,,,,,तुम तुम इसे यहाँ से भगाते क्यों नहीं ?”,दिल ने पृथ्वी की शर्ट की बाँह खींचकर कुनमुनाते हुए कहा
अब पृथ्वी तो ठहरा पृथ्वी दिल के मामले में भला दिमाग की कैसे चलने देता इसलिए जैसे ही दिल ने कहा पृथ्वी ने अपना दूसरा हाथ दिमाग पर दे मारा और अवनि चिल्लाई।
अवनि के चिल्लाने से आगे बैठे लोगो ने गर्दन घुमाकर पीछे देखा , पृथ्वी की भी तंद्रा टूटी उसने दाँये बांये देखा ना दिल था ना दिमाग कही नजर आया और पृथ्वी ने कहा,”साले फिर मुझे फंसा कर चले गए”
“किसने फसाया और तुमने मुझे मारा क्यों ?”,बगल में बैठी अवनि ने अपना हाथ सहलाते हुए कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने अवनि की तरफ पलटकर कहा,”आई ऍम सॉरी वो , वो तुम्हारे हाथ पर एक मोटा सा मच्छर बैठा था न तो उसी को मारने के लिए लेकिन तुम्हे जोर से लग गया सॉरी,,,,,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो कहा,”इट्स ओके,,,,,,,,,फिल्म देखो”
“हाँ ! हाँ हाँ हाँ अच्छी फिल्म है”,पृथ्वी ने कहा और अपनी नजरे स्क्रीन पर गड़ा ली। इस बार पृथ्वी ने अवनि को नहीं देखा या यू कह लीजिये वह फिर से कोई गड़बड़ करना नहीं चाहता था। फिल्म देखने में पृथ्वी ऐसा खोया कि हीरो की जगह खुद को और हीरोइन की जगह अवनि को इमेजिन करने लगा और इसके बाद मुस्कराहट उसके होंठो पर जैसे जम सी गयी थी।
फिल्म खत्म होते होते रात के 9 बज चुके थे। पृथ्वी , अवनि और सुरभि थियेटर से बाहर चले आये। तीनो को भूख लगी थी इसलिए तीनो मॉल से बाहर आये पृथ्वी के ऑफिस के बगल वाले रेस्त्रो में चले आये जहा अच्छा खाना मिलता है और रूफ टॉप पर बैठने का बहुत ही अच्छा इंतजाम था। पृथ्वी ऑफिस की मीटिंग या फिर स्टाफ के साथ अक्सर इस जगह आता जाता रहता था इसलिए उसने फ़ोन करके पहले ही एक टेबल बुक करवा दिया।
तीनो रेस्त्रो के रूफ टॉप पर चले आये।
पृथ्वी के इस वक्त टेबल बुक करने को मैनेजर से कुछ और समझ लिया और उसके लिए एक बहुत ही सुन्दर कपल टेबल बुक कर दिया। पृथ्वी अवनि और सुरभि के साथ वहा आया तो देखकर हैरान हो गया क्योकि मैनेजर ने टेबल तो बहुत सुन्दर अरेंज करवाया था लेकिन साथ ही वहा एक स्टाइलिश ट्रे रखी थी जिसमे कुछ बियर बॉटल्स और चॉकलेट्स रखे थे ये देखकर पृथ्वी झेंप गया और मैनेजर को देखकर आँखों ही आँखों में पूछा कि ये सब क्या है ? मैनेजर ने भी इशारो इशारो में जवाब दिया कि उसे लगा पृथ्वी अपनी पार्टनर के साथ आ रहा है क्योकि इस वक्त यहाँ जयादातर लोग अपनी पार्टनर के साथ ही आते थे।
अवनि के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह बस एकटक उन बियर की बॉटल्स को देखे जा रही थी। वही बोतल देखकर सुरभि की आँखे चमक उठी और उसे वो शाम याद आ गयी जब सिद्धार्थ के साथ बैठकर उसने एक के बाद एक बियर पीकर उल्टियां की थी।
अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी समझ गया कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है ? कही अवनि पृथ्वी को गलत ना समझ ले सोचकर पृथ्वी ने बगल से गुजरते वेटर को रोककर कहा,”इसे यहाँ से लेकर जाओ”
“जी सर,,,,,,,,,आप लोग बैठिये ना प्लीज”,वेटर ने पृथ्वी से कहा और ट्रे लेकर वहा से चला गया। जैसे जैसे ट्रे टेबल से उठकर वहा से गयी सुरभि की गर्दन भी उसी और मुड़ गयी ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”तुम्हे पीनी है क्या ?”
“अरे नहीं नहीं ! मैंने बस एक बार पी है”,सुरभि ने पृथ्वी और अवनि की तरफ पलटकर कहा
“किसके साथ ?”,पृथ्वी ने सवाल किया
“सिद्धार्,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह मेरा मतलब सिरदर्द , सिरदर्द हो रहा था तब पी ली थी ताकि मैं सो जाऊ ,, और क्या किसके साथ , मुझे किसी के साथ की क्या जरूरत है मैं पीने के बाद खुद को सम्हाल सकती हूँ”,सुरभि ने बात सम्हालते हुए कहा
पृथ्वी ने इतना ध्यान नहीं दिया और अवनि की तरफ देखकर कहा,”और अवनि तुम,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने पृथ्वी को देखा और थोड़ा गम्भीरता से कहा,”मुझे शराब और शराब पीने वाले दोनों ही नहीं पसंद”
अवनि को गंभीर देखकर पृथ्वी ने आगे कुछ ना पूछना ही सही समझा और सामने पड़ा मेनू उठाते हुए कहा,”खाना आर्डर करे ?”
“हाँ पृथ्वी ! मुझे बहुत भूख लगी है”,सुरभि ने कहा
पृथ्वी ने अवनि और सुरभि से पूछकर उनकी पसंद का और साथ में अपनी पसंद का खाना आर्डर कर दिया और तीनो साथ बैठकर खाने लगे। खाना खाने के बाद सभी हाथ धोकर वापस आ बैठे और पृथ्वी ने सबके लिए आइसक्रीम आर्डर किया।
एक कॉल आने की वजह से पृथ्वी को उठकर साइड में जाना पड़ा क्योकि वहा म्यूजिक और लोगो का शोर ज्यादा था। पृथ्वी के जाने के बाद सुरभि ने अवनि से कहा,”तुम पृथ्वी को सॉरी कब बोलने वाली हो अवनि ?”
“मुझे मौका ही नहीं मिला”,अवनि ने धीरे से कहा
“हाह ! अब अपने ही पति से बात करने के लिए तुम्हे मौका चाहिए , जाओ और सॉरी बोलकर ग़लतफ़हमी दूर करो अवनि,,,,,,,,,,,और हाँ आज तुमने उसके लिए जो तोहफा खरीदा था वो उसे देना मत भूलना”,सुरभि ने कहा
“अभी जाऊ ?”,अवनि ने पूछा
“नहीं 20-25 साल बाद जाना,,,,,,,,तुम इतनी अनरोमांटिक कैसे हो सकती हो अवनि ? जरा देखो उधर कितना अच्छा दिख रहा है वो , ऐसा लड़का मेरे पास हो तो मैं दिन में 50 बार उस से अपना प्यार जाहिर करू,,,,,,,,,,,जाओ और उस से बात करो,,,,,,,,,!!!!”,सुरभि ने कहा
अवनि ने अपने पर्स से डिब्बा निकाला और हिम्मत करके कुर्सी से उठी और पृथ्वी की तरफ बढ़ गयी। पृथ्वी फोन कान से लगाये बात कर रहा था।
अवनि उसके पास आयी और जैसे ही पृथ्वी पलटा अवनि को अपने सामने देखकर थोड़ा हैरान हुआ और फिर फोन पर किसी से कहा,”ठीक है मिस्टर मोर्या मैं कल सुबह आपके ऑफिस आकर आपसे मिलता हूँ,,,,,,,,,,,जी बिल्कुल , गुड नाईट”
पृथ्वी ने फोन जेब में रखा और अवनि की तरफ देखकर कहा,”हाँ अवनि क्या हुआ ?”
“आई ऍम सॉरी पृथ्वी,,,,,,,,,”,अवनि ने एकदम से कहा जिस से पृथ्वी और हैरान हुआ और कहा,”सॉरी ! लेकिन किसलिए ?”
“कल रात मैंने तुम्हे उस लड़की की मदद करने के लिए फ़ोर्स किया बस इसलिए , मुझे लगा तुम मुझसे नाराज हो,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”अवनि ! तुम्हे पता है तुम मेरी कौन हो ? तुम मेरी “पसंदीदा औरत” हो और मर्द कभी अपनी पसंदीदा औरत की बात का बुरा नहीं मानते। मैं तुमसे बिल्कुल नाराज नहीं हूँ,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो उसके दिल को थोड़ी तसल्ली मिली। उसने हाथ में पकडे छोटे से डिब्बे को पृथ्वी के सामने किया और कहा,”ये मैंने तुम्हारे लिए खरीदा है”
पृथ्वी ने सुना तो ख़ुशी से उसका चेहरा खिल उठा , अवनि की तरफ से पहली बार उसे कोई तोहफा मिलने वाला था और वो भी अवनि ने खुद खरीदा था ये जानकर पृथ्वी ख़ुशी से भर गया।
अवनि ने जैसे ही डिब्बा पृथ्वी की तरफ बढ़ाया उसी रूफ टॉप पर मौजूद विक्रम हाथ में शराब का गिलास पकडे चियर्स कहते हुए घुमा और उसका हाथ जा लगा डिब्बे पर और डिब्बा हवा में उछल गया। अब चूँकि पृथ्वी और अवनि रेलिंग के पास खड़े थे इसलिए डिब्बा हवा में उछलकर नीचे पूल में जा गिरा।
ये देखकर अवनि के चेहरे पर परेशानी के भाव आ गए। पृथ्वी ने विक्रम की बाँह पकड़कर उसे अपनी तरफ करते हुए कहा,”ए ! दिखाई नहीं देता”
पृथ्वी ने जब देखा वो कोई और नहीं विक्रम है तो चौंका
“व्हाट हेपन ? इतना क्यों परेशान हो रहे हो एक मामूली सा डिब्बा ही तो था ?”,विक्रम ने मुँह बनाकर कहा
अवनि ने सुना तो विक्रम की तरफ देखा और कहा,”मामूली नहीं था वो , उसमे वाच थी जो मैंने अपने हस्बेंड के लिए खरीदी थी इसलिए अपना मुँह बंद रखो”
अवनि विक्रम से कहकर जैसे ही पृथ्वी की तरफ पलटी उसने देखा पृथ्वी वहा है ही नहीं और अगले ही पल अवनि के कानों में किसी के पानी में कूदने की आवाज आयी और उसने झुककर नीचे देखा।
( क्यों हर बार पृथ्वी का दिमाग खा जाता है दिल से मात ? क्या सुरभि को आ रही है सिद्धार्थ की याद ? आखिर क्यों मिलना चाहते है मिस्टर मौर्या पृथ्वी से ? पानी में कूदने वाला क्या पृथ्वी है फिर कोई और ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


पृथ्वी के इस वक्त टेबल बुक करने को मैनेजर से कुछ और समझ लिया और उसके लिए एक बहुत ही सुन्दर कपल टेबल बुक कर दिया। पृथ्वी अवनि और सुरभि के साथ वहा आया तो देखकर हैरान हो गया क्योकि मैनेजर ने टेबल तो बहुत सुन्दर अरेंज करवाया था लेकिन साथ ही वहा एक स्टाइलिश ट्रे रखी थी जिसमे कुछ बियर बॉटल्स और चॉकलेट्स रखे थे ये देखकर पृथ्वी झेंप गया और मैनेजर को देखकर आँखों ही आँखों में पूछा कि ये सब क्या है ? मैनेजर ने भी इशारो इशारो में जवाब दिया कि उसे लगा पृथ्वी अपनी पार्टनर के साथ आ रहा है क्योकि इस वक्त यहाँ जयादातर लोग अपनी पार्टनर के साथ ही आते थे।
Yaar kitna pyara Banda hai matalab direct roof top se pani me chhalang laga li
Maine bola na ki tu nn dono k happy moment pe koi na koi a jata hai…ab yeh Vikram aa gaya… kya kare iss Vikram Kapoor aur prachai ka… Prithvi Avni k gift k pool m kud gaya ….kya pyar hai yr
Aakhir prithvi ke liye Avani ka gift hai jo Avani usse de rahi thi par iss vikram vajah se vo bhi gir gaya par koi nahi shayad isse Avani ko Uske prati Prithvi ka pyaar nazar aa jaye
Har Har mahadev dii 🙏🙏💗