Manmarjiyan Season 4 – 37

Manmarjiyan Season 4 – 37

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

पिंकी को घर छोड़कर गुड्डू अपने घर के लिए निकल गया साथ ही अपना फोन भी गोलू के घर भूल गया जिसे उसने गोलू को चार्जिंग में लगाने को दिया था। गुड्डू घर पहुंचा तब तक अँधेरा हो चुका था। मिश्रा जी भी विनोद चाचा और गुप्ता जी के साथ घर आ चुके थे उन्होंने जब देखा गुड्डू घर में नहीं है तो उन्हें गुड्डू पर बहुत गुस्सा आया मेहमानो के सामने भला अब वे क्या कहते इसलिए चुपचाप उसके आने का इंतजार करने लगे। वही शगुन गुड्डू को फोन कर रही थी और हर बार उसका फोन बंद , शगुन को चिंता होने लगी।

लवली दोपहर में सो गया था इसलिए शाम में उठा और नीचे आया जबकि उसके इस बात का पता ही नहीं था कि गुड्डू घर में नहीं है।
“लवली भैया ! आपको पता है क्या गुड्डू जी कहा गए है ?”,शगुन ने लवली के पास आकर पूछा
“गुड्डू बिंदिया की खबर लेने चकिया जाने वाला था , कही वह बिना बताये वहा तो नहीं चला गया ?”,लवली ने मन ही मन खुद से कहा

“लवली भैया ! लवली भैया , क्या सोचने लगे ?”,शगुन की आवाज से लवली की तंद्रा टूटी। उसने जैसे ही गर्दन घुमाई सामने से आता गुड्डू उसे दिखाई दिया।
“वो रहा गुड्डू”,लवली ने कहा तो शगुन ने देखा गुड्डू आ गया है। वह जल्दी से गुड्डू के पास आयी और परेशानी भरे स्वर में कहा,”गुड्डू जी ! ऐसे बिना बताये कहा चले गए थे आप और आपका फोन भी बंद आ रहा है ,, सब ठीक तो है ना ?”

“उह्ह्ह गोलू का फोन आया था इहलीये एमर्जेन्सी मा जाना पड़ा,,,,,!!!”,गुड्डू ने बुझे स्वर में कहा
शगुन ने सुना तो कहा,”क्या हुआ गोलू जी को वो ठीक तो है ना ?”
“हम्म , हम तुम्हे सब बाद मा आराम से बताएँगे शगुन , अभी जाकर पिताजी से मिल ले गुस्साय रहे होंगे हमे घर मा ना देखकर”,गुड्डू ने शगुन की बाँह छूकर कहा और अंदर चला गय
शगुन परेशान सी वही खड़ी गुड्डू के बारे में सोचने लगी। लवली शगुन के पास आया और कहा,”का कहा गुड्डू ने , कहा गया था उह्ह्ह ?”
“गोलू जी के यहाँ गए थे,,,,,,,,!!!”,शगुन ने कहा

“लगता है उह्ह्ह गोलू महाराज ने फिर कोनो गड़बड़ की है”,लवली ने मन ही मन कहा और फिर शगुन से कहा,”अरे तुम काहे परेशान होती हो , जे गुड्डू को भी ना आदत हो गयी है पिताजी से डांट सुनने की , जाओ तुमहू अंदर जाओ और अपने घरवालों के साथ बतियाओ फिर तो वे लोग चले जायेंगे”
“हम्म्म्म,,,,,,,,,,,,,!!!!”,कहकर शगुन वहा से चली गयी।
लवली भी अंदर चला गया  

गुड्डू अंदर आया तो सबसे पहले सामने मिश्रा जी ही मिल गए और उन्हें देखते ही गुड्डू के दिल की धड़कने बढ़ने लगी। गुड्डू मिश्रा जी के सामने आया तो मिश्रा जी ने दबी आवाज में धीरे से कहा,”एक दिन बाहिर घूमने नहीं जाओगे तो का भूचाल आ जायेगा कानपूर मा ? हिया तुम्हाये ससुराल वाले मौजूद है और तुमहू अपनी फटफटिया लेकर घूमने निकल पड़े,,,,,,,,,,,नहीं का जरूरत पड़ गयी तुमको बाहिर जाने की ज़रा बताओ हमे ?”

“घूमने नहीं गए थे पिताजी उह्ह्ह गोलू से मिलने गए थे”,गुड्डू ने शब्दों को चबाकर धीरे से कहा
मिश्रा जी ने सुना तो और चिढ गए और कहा,”काहे ? उह्ह्ह का लुगाई है तुम्हायी जो दिन मा दो बार ओह्ह्ह के हाल खबर लेने पहुँच जाते हो,,,,,,और उह्ह्ह गोलुआ ! उह्ह्ह ससुरे की अपने घर और घरवालों के प्रति कोनो जिम्मेदारी नाही बनती का जो दिनभर तुम से चिपके रहते है,,,,,,,,कल सबेरे बुलाओ ओह्ह्ह का हिया दोनो जन से साथ मा बात करेंगे”

“अरे पिताजी ! आप जैसा समझ रहे है वैसा कुछो नाही है हम तो बस,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहना चाहा लेकिन मिश्रा जी कहा उस बेचारे की सुनने वाले थे इसलिए कहा,”ए बेटा ! तुमहू और उह्ह्ह तुम्हरी पूँछ गोलू जोन स्कूल मा पढ़े हो ना ओह्ह्ह के मास्टर रह चुके है हम , तो जे ज्ञानबाजी हमाये सामने नाही,,,,,,,,जाकर गुप्ता जी और बाकि घरवालों से मिलो और फिर सबके खाने का बंदोबस्त करवाओ”
“जी जी पिताजी,,,,,,,,,,!”,गुड्डू ने कहा और सबके बीच चला आया।

गुड्डू सबसे मिला और फिर सबके साथ बैठकर खाना खाने लगा। खाना खाने के बाद सभी अपना अपना बैग ज़माने लगे क्योकि स्टेशन के लिए घर से एक घंटा पहले निकलना था। शगुन के कमरे में खड़ा अमन अपना सामान बैग में रख रहा था कि सबसे बचते बचाते वेदी हाथ में शरबत का गिलास लेकर आयी और  दरवाजे पर रुक गयी। वह प्यार से अमन को देखने लगी और अमन बैग में सामान रखने में बिजी था। कुछ देर बाद अमन की नजर दरवाजे पर खड़ी वेदी पर पड़ी तो वेदी उसे देखकर मुस्कुराई और अंदर चली आयी।

वेदी ने हाथ में पकड़ा शरबत का गिलास अमन की तरफ बढ़ाया और कहा,”तुम्हारे लिए शरबत लेकर आये है , पीकर बताओ कैसा बना है ?”
“लो पहले तुम पीओ”,अमन ने गिलास वेदी की तरफ बढ़ा दिया  
“अरे ये तुम्हारे लिए है तुम पीओ”,वेदी ने कहा

“नहीं पहले तुम पीओ , अच्छा चलो एक घूंठ”,कहते हुए अमन ने अपने हाथ से वेदी को पिला दिया और फिर बचा हुआ शरबत खुद पीकर बोला,”अब ये ज्यादा मीठा लग रहा है”
वेदी को अमन की बात थोड़ी देर से समझ आयी तो वह शरमाकर जाने लगी    

तो अमन ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और अपनी तरफ करके कहा,”थोड़ी देर रुको ना वेदी , फिर मैं चला जाऊंगा”
वेदी ने अमन को देखा और कहा,”अमन ! सब कितनी जल्दी हो गया ना , हमने तो सोचा भी नहीं था हमारी शादी के लिए घरवाले ख़ुशी ख़ुशी मान जायेंगे”
“हाँ वेदी सोचा तो मैंने भी नहीं था लेकिन ये सब शगुन दी और गुड्डू जीजू की वजह से हुआ है , उन्होंने ही अंकल से बात करके ये सब सम्हाला,,,,,,,,,,और देखो आज हम साथ है”,अमन ने प्यार से कहा

हाँ और जल्दी ही हमेशा हमेशा के लिए भी साथ होंगे,,,,,,,बनारस जाकर तुम हमे याद करोगे ना ?”,वेदी ने पूछा
अमन पलटा और बैग बंद करते हुए कहा,”अह्ह्ह्हह ! बिल्कुल नहीं , बनारस जाकर मेरे पास बहुत काम है तो तुम्हे याद करने के लिए मेरे पास टाइम ही नहीं होगा,,,,,,,,,,!!!”
वेदी ने सुना तो अमन की पीठ पर मारते हुए कहा,”हाह ! तुम कितने बुरे हो , जाओ हम तुमसे बात नहीं करते,,,,,,,!!!”

अमन ने सुना तो मुस्कुराने लगा और वेदी के पास आकर उसके चेहरे को अपने हाथो में थामा और उसके ललाट को अपने होंठो से छूकर कहा,”पगली !  मैं तो बस तुम्हे छेड़ रहा था ,, बनारस जाने के बाद मैं तुम्हे बहुत याद करने वाला हूँ और अब तो कुछ ज्यादा ही याद करूंगा,,,,,,,,,बस तुम जल्दी से दुल्हन बनाकर मेरे घर आ जाओ”
वेदी ने सुना तो मुस्कुरा कर पलकें झुका ली , उसका चेहरा अभी भी अमन के हाथो में था और अमन की नजरे उसके होंठो पर जा ठहरी।

अमन ने अपने होंठो को जैसे ही वेदी के होंठो की तरफ बढ़ाया शगुन कमरे में आयी और खाँसने का नाटक किया। हड़बड़ाकर अमन वेदी से दूर हटा और उलझकर गिर गया ये देखकर वेदी हसने लगी और शगुन ने आकर कहा,”क्या हो रहा है यहाँ ?”

“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं दी,,,,,,,!!!”,नीचे गिरे अमन ने उठकर बैठते हुए कहा
“चाचाजी ने तुम्हे बाहर बुलाया है और वेदी तुम मेरे साथ आओ जरा”,शगुन ने अमन से कहा और फिर वेदी को अपने साथ लेकर चली गयी। जाते जाते वेदी ने पलटकर देखा तो नीचे बैठा अमन मुस्कुरा दिया और वेदी भी मुस्कुरा कर वहा से चली गयी।

बाबू गोलगप्पे वाले के पास खड़ा गोलू अपने नंबर का इंतजार कर रहा था साथ ही  गोलगप्पे देखकर उसके मुँह में पानी भी आ रहा था। वही साथ में खड़े मंगल फूफा की नजर तो बस बाबू के हाथो पर थी , जैसे जैसे बाबू का हाथ जाता मंगल फूफा की गर्दन भी उसी दिशा में घूम जाती , आज पहली बार गोलू मंगल फूफा को लेकर बाहर आया था वो भी बिना किसी भसड़ के,,,,,,,,,,,,!!!”

“अरे का यार बाबू ? दुइ पिलेट गोलगप्पा खिलाने में और कित्ता बख्त लेइ हो भैया , खिलाय दयो बेचारे मंगल फूफा के मुँह से थूक की नदिया बहने लगी है”,गोलू ने उकता कर बाबू गोलगप्पे वाले से कहा
“हाँ हाँ गोलू भैया बस हो गया , बताओ का खिलाये ?”,बाबू ने आस-पास के कस्टमर से निपट कर कहा
“हमाये लिए एक ठो दही वाला पिलेट बनाओ और फूफा तुम बताओ तुम का खाओगे ?”,गोलू ने पूछा
“जो तुम खाओगे हमहू भी वही खा लेंगे गोलू”,मंगल फूफा ने खिंसिया कर कहा

गोलू ने बाबू से दो प्लेट दही पूरी बनाने को कहा और इंतजार करने लगा। मंगल फूफा बड़े ध्यान से चमकती आँखों से गोलगप्पे की सजती प्लेट को देख रहे थे।
“का फूफा पहिले कबो गोलगप्पे नाही खाये हो ?”,गोलू ने पूछा
“अरे गोलू हमहू ठहरे बीहड़ के डाकू हमको कहा जे सब खाने को मिलता था , कानपूर मा जब से पैर रखे है तब से बस भाग रहे है कहा से खा पाएंगे”,मंगल फूफा ने रोआँसा होकर कहा

“अरे रो काहे रहे हो ? खिलाते है ना,,,,,,रबड़ी फालूदा भी खिलाएंगे खुश,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा
“तुमहू कित्ते अच्छे आदमी हो यार गोलू,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने गोलू से चिपककर कहा
गोलू ने मंगल फूफा को खुद से दूर किया और कहा,”हाँ तो जे मा इत्ता चिपकने की का बात है ? दूर से भी कह सकते हो”
मंगल फूफा ने सुना तो खुश होकर मुस्कुराने लगा
“ल्यो गोलू भैया”,बाबू ने दो प्लेट गोलू की तरफ बढाकर कहा

गोलू ने एक प्लेट मंगल फूफा को दी और दूसरी खुद लेकर खाने लगा। खाते खाते गोलू ने बाबू की तरफ देखा और कहा,”अरे बाबू सुनो ! तीन पिलेट तीखे खट्टे पानी की भी पैक कर दयो घर के लिए”
“हाँ भैया कर देंगे,,,,,,और आज गुड्डू भैया नाही आये , कही व्यस्त है का ?”,बाबू ने पूछा
 “अरे गुड्डू भैया के ससुराल वाले आये हुए है तो उन्ही के साथ व्यस्त है , मिश्रा जी की बिटिया वेदी का ब्याह तय हुई गवा न आज”,गोलू ने खाते हुए कहा

“अरे जे तो बहुते बढ़िया खबर सुनाय रहय , पर ए गोलू भैया गुड्डू भैया से कह दीजियेगा बहिन की सादी मा चाट हमहू ही लगाएंगे”,बाबू ने कहा
“अरे हाँ हाँ बाबू चिंता नाही करो टेंडर तुम्ही को दिलवाएंगे”,गोलु ने कहा और बाबू ख़ुशी ख़ुशी उसके लिए गोलगप्पे पैक करने लगा

“गोलू हम दोनों तो हिया खा रहे है फिर जे पैक काहे ?”,मंगल फूफा ने पूछा
“फूफा ! तुमको का लगता है तुम पे हमको इत्ता पियार आएगा कि हमहू तुमको गोलगप्पे खिलाने ले आएंगे,,,,,,,,,,,,,अरे जे तो हमहू अपनी पिंकिया के लिए लेकर जा रहे है,,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने मंगल फूफा को देखकर कहा

गोलू की बात सुनकर एक बार तो मंगल फूफा का मुँह उतर गया लेकिन ख़ुशी उन्हें इस बात की थी कि गोलू चाहे जिस वजह से उन्हें बाहर लाया हो लाया तो सही और उस पर गोलगप्पे इतने टेस्टी कि मंगल फूफा गोलू की बात को नजरअंदाज करके मुस्कुराया और कहा,”अरे किसी भी वजह से लाये हो हमे जे खाकर मजा आ गया”
“कहो तो एक ठो पिलेट और बनवाय दे ? ए बाबू ! फूफा के लिए एक ठो पिलेट और बनाय दयो”,मंगल फूफा के कहने से पहले ही गोलू ने बाबू को एक और प्लेट का आर्डर दे दिया।

मंगल फूफा खुश हो गए और गोलू को देखने लगे। गोलू ने देखा कि मंगल फूफा एकटक उसे ही देख रहे है तो उसने कहा,”का फूफा ऐसे का देख रहे हो ?”
“गोलू जब कोनो तरह का टेंशन नाही होता तब तुमहू कित्ते अच्छे और खुशमिजाज लगते हो और देखो अपनी घरवाली के लिए हिया तक चले आये”,मंगल फूफा ने कहा

गोलू ने सुना तो एकदम से मुस्कुराया और कहा,”सच बताये फूफा हमहू ऐसे ही है टेंशन फ्री और मस्तमौला पर का करे जीवन मा इत्ती भसड़ है न कि पूरा दिन हिया हुआ करने में निकल जाता है। हम हिया नाही आते पर आज पिंकिया ने बहुते प्यार से हमसे कुछो माँगा और हमने दो चार दिन बाद का बोलकर बात टाल दी , पर साला जब ओह्ह्ह का मासूम चेहरा देखे ना तो खुद पे बहुते सरम आयी कि कैसे पति है ? अपनी पत्नी की इत्ती छोटी सी ख्वाहिश पूरी नाही कर पा रहे बस चले आये हिया,,,,,,,,,,,!!!”

मंगल फूफा ने सुना तो मुस्कुरा कर कहा,”अरे अरे गोलू तुम दोनों को किसी की नजर नाही लगे , बस हमायी जिंदगी मा भी पिंकी,,,,,,,,!!!”
“ए फूफा ! का बक रहे हो बे ? पर्सनल प्रॉपर्टी है हमायी,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने एकदम से भड़ककर कहा

“छी छी ! तुमहू भी का मतलब निकाल रहे हो हमायी बात का ? अरे तुम्हरी मेहरारू हमरे लिए बिटिया जइसन हुई भाई ओह्ह्ह के लिए कुछो गलत सोच के नर्क मा थोड़े जाना है हमका,,,,,,,,,हम तो बस कह रहे जैसे तुमको इत्ती समझदार , सीधी लड़की मिली है बस ऐसी ही एक ठो लड़की हमाये जीवन मा भी आ जाये तो हमको भी लगे कि हमाये जीवन का कोनो मकसद है,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने कहा


“तुम्हरी जिंदगी का एक ही मकसद है फूफा और उह्ह्ह है गुप्ता जी से बचते हुए उनके घर मा रहना , का है कि उह्ह्ह आदमी का कोनो भरोसा नाहीं कब उह्ह्ह का कर दे कोई कुछ कह नाही सकता है,,,,अरे अपनी इकलौती औलाद को नाही छोड़े जब देखो तब जूतियाते रहते है तो थोड़ा सम्हलकर”,गोलू ने कहा
 “अरे गोलू हमको कोनो चिंता नहीं है तुमहू हो न हमाये साथ”,मंगल फूफा ने एक बार फिर गोलू से चिपकते हुए कहा

गोलू ने फिर उन्हें दूर किया और कहा,”का फेविकोल का डिब्बा हो जो बात बात पर चिपक जा रहे हो हमसे,,,,,,,,,,,अकेले हो जे का मतलब का सब मा पिरेम ढूंढोगे , नर मादा मा फर्क नाही पता,,,,,,,,,,दूर खड़े हो हमसे”
“गोलू भैया सुखी पपड़ी दे का ?”,बाबू ने पूछा
“हाँ देइ दयो”,गोलू ने कहा
“हमको मीठी पपड़ी”,मंगल फूफा ने खिंसिया कर कहा

गोलू ने सुना तो बाबू से कहा,”कोई मीठी पपड़ी देने की जरूरत नाही है जे का , पहिले से ही बहुते जियादा चाशनी टपक रही है इनमे से , तीखी पपड़ी दो जे का”
बाबू ने दोनों को सुखी पपड़ी खिलाई और फिर गोलू के लिए पैक किये गोलगप्पे उसकी तरफ बढ़ा दिए। गोलू ने पैसे दिए और मंगल फूफा के साथ वहा से निकल गया।

रास्ते में गोलू ने मंगल फूफा को फालूदा भी खिला दिया और फालूदा खाने के बाद तो मंगल फूफा गोलू के फैन ही हो गए , आज तो अगर गोलू उनसे उनकी किडनी भी मांग लेता ना तो मंगल फूफा उसे ख़ुशी ख़ुशी निकालकर दे देते। दोनों घर के लिए निकल गए

गुप्ता जी , विनोद चाचा , चाची , प्रीति , रोहन और अमन मिश्रा जी घर से निकल गए और उन्हें स्टेशन छोड़ने जा रहे थे हमाये गुड्डू और लवली , हालाँकि लवली को देखकर प्रीति का मुँह बन गया लेकिन वह उसे साथ जाने से मना भी तो नहीं कर सकती थी। मिश्रा जी की गाड़ी में गुप्ता जी , चाचा , चाची और प्रीति बैठ गए और ड्राइवर सीट पर गुड्डू आ बैठा। अमन और रोहन लवली के साथ बाइक से निकल गए।

शगुन के घरवालों को ख़ुशी ख़ुशी विदा कर मिश्रा जी अंदर आये और तख्ते पर आ बैठे। उनके चेहरे पर गुस्से के भाव थे और ये देखकर बाकि सब परेशानी में आ गए। शगुन , वेदी और मिश्राइन उनके पास चले आये। मिश्राइन ने धीरे से अपना हाथ मिश्रा जी के कंधे पर रखा तो मिश्रा जी ने उनकी तरफ देखा और कहा,”कल सुबह सबसे पहिले जे गोलू गुप्ता को घर बुलाओ”

मिश्रा जी के मुँह से गोलू का नाम सुनकर शगुन ने वेदी की तरफ देखा तो वेदी ने दबे स्वर में कहा,”लगता है गुड्डू भैया और गोलू भैया ने फिर से कोई कांड किया है”

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संजना किरोड़ीवाल  

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