Pasandida Aurat Season 2 – 58

Pasandida Aurat Season 2 – 58

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि कुछ देर खामोश रही और फिर धीरे से कहा,”जल्दी आना , मैं इन्तजार करुँगी”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुरा उठा और हामी भरकर फोन काट दिया। अवनि का ये कहना कि जल्दी आना मैं इंतजार करुँगी उसके दिल में अवनि से मिलने की चाहत को और बढ़ा दिया। पृथ्वी ने फोन जेब में रखा और वही बरामदे में खड़े होकर बारिश को देखने लगा। उसकी आँखों के सामने बारिश की वो शाम आ गयी जब वह अवनि के करीब था , उस रात बारिश में भीगी अवनि कितनी खूबसूरत लग रही थी।

प्राची अपने कमरे की खिड़की पर खड़ी नीचे बरामदे में खड़े पृथ्वी को देख रही थी। पहली मुलाकात से ही उसे पृथ्वी बहुत पसंद था लेकिन वह अब तक पृथ्वी के दिल में जगह नहीं बना पायी थी। पृथ्वी को अकेले में मुस्कुराते देखकर ना जाने क्यों प्राची को जलन महसूस हुई और उसने एकदम से खिड़की बंद कर दी। वह बिस्तर पर आ कर लेट गयी और अपनी आँखे मूँद ली। नशे और उन्मांद में उसकी आँखे भारी हुई जा रही थी लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी उसकी आँखों में बस पृथ्वी का चेहरा था।

काफी देर इंतजार करने के बाद मिस्टर देसाई की गाड़ी आकर पोर्च में रुकी। मिस्टर देसाई को वहा देखकर पृथ्वी को राहत मिली और बारिश भी अब धीमी पड़ चुकी थी। मिस्टर देसाई बरामदे में आये और पृथ्वी की तरफ हाथ बढाकर कहा,”थैंक्यू पृथ्वी ! तुमने मुझ पर एक बहुत बड़ा अहसान किया है , इस अहसान के बदले में अगर मैं आपके कुछ काम आ सकू तो मुझसे जरूर कहना”
“इट्स ओके सर ! मैंने आप पर कोई अहसान नहीं किया है , मुझे बस आपसे एक बात जाननी है”,पृथ्वी ने सहजता से कहा

“हाँ पूछो ना”,मिस्टर देसाई ने कहा
“प्राची को घर छोड़ने वाले बहुत लोग थे फिर आपने मुझसे उसे घर छोड़ने के लिए क्यों कहा ?”,पृथ्वी ने अपने मन की परेशानी मिस्टर देसाई के सामने जाहिर करते हुए कहा
मिस्टर देसाईं मुस्कुराये और फिर कहा,”क्योकि मैं तुम पर भरोसा करता हूँ और मैं जानता था कि प्राची तुम्हारे साथ सुरक्षित रहेगी बस इसलिए मैंने तुमसे उसे घर छोड़ने को कहा,,,,,,,,,,!!!”  

पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से मिस्टर देसाई को देखने लगा और मन ही मन सोचने लगा “आखिर कोई कैसे एक बार मिलने के बाद उस पर इतना भरोसा कर सकता है” पृथ्वी को खोया देखकर मिस्टर देसाई ने कहा,”तुम बाहर क्या कर रहे हो ? अंदर चलो”
“थैंक्यू सर ! पर मुझे अब चलना चाहिए , मेरी वाइफ घर पर मेरा इंतजार कर रही है,,,,,,,,,,,गुड नाईट”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
“एक काम करता हूँ मैं अपने ड्राइवर को तुम्हारे साथ भेज देता हूँ वह तुम्हे घर तक छोड़ देगा”,मिस्टर देसाई ने कहा

“नहीं सर उन्हें परेशान मत कीजिये मैं कैब बुक कर लेता हूँ , वैसे भी रात बहुत हो चुकी है,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अपने फ़ोन से कैब बुक करते हुए कहा
मिस्टर देसाई को पृथ्वी की बात माननी पड़ी और उन्होंने कहा,”ठीक है जब तक तुम्हारी कैब आती है क्यों ना एक एक कप चाय हो जाये ?”
“थैंक्यू सर ! इस वक्त मेरा कुछ भी पीने का मन नहीं है”,पृथ्वी ने कहा

“ठीक है तो फिर ये चाय तुम पर उधार रही पृथ्वी , जब भी फ्री रहो मेरे ऑफिस जरूर आना”,मिस्टर देसाई ने मुस्कुराकर कहा
जवाब में पृथ्वी मुस्कुराया और हामी में गर्दन हिला दी। उसकी बुक की हुई कैब कुछ देर बाद वहा चली आयी पृथ्वी ने मिस्टर देसाई से विदा ली और वहा से चला गया।

पृथ्वी के जाते ही मिस्टर देसाई के चेहरे के भाव बदल गए और वे गुस्से से अंदर चले गए। अंदर आकर उन्होंने घर के नौकर से प्राची के बारे में पूछा और सीधा सीढ़ियों की तरफ बढ़ गए। मिस्टर देसाई प्राची के कमरे मे आये और देखा प्राची पीठ के बल बिस्तर पर पड़ी है। बाहर से आने के बाद ना उसने कपडे बदले ना ही अपने सेंडिल उतारे बल्कि इस वक्त वह नशे में धुत्त थी और ये देखकर मिस्टर देसाई और गुस्सा हो गए।
“प्राची , प्राची उठो”,मिस्टर देसाई ने प्राची के पास आकर गुस्से से कहा

जैसा कि प्राची को नींद नहीं आयी थी वह बस आँखे मूंदकर लेटी थी , मिस्टर देसाई की आवाज सुनकर उसने अपनी आँखे धीरे से खोली और सामने खड़े अपने पापा को देखकर मुस्कुराई।
मिस्टर देसाइ ने प्राची की बाँह पकड़कर उसे उठाया और कहा,”होश में आओ प्राची ! तुम्हारी ये मनमर्जियाँ दिन ब दिन कुछ ज्यादा ही बढ़ती जा रही है”

बाँह पकड़कर उठाने की वजह से प्राची ने अपनी आँखे खोली और मिस्टर देसाई की तरफ देखकर कहा,”आप इस वक्त मेरे कमरे में क्या कर रहे है डेड ? लगता है आप होश में नहीं है”
मिस्टर देसाई ने सुना तो गुस्से प्राची को देखा और कहा,”होश में मैं नहीं हूँ या तुम अपना होश खो बैठी हो प्राची ? तुमने मुझे फोन करके पृथ्वी से तुम्हे घर छोड़ने की जिद क्यों की ? और जब मैंने मना किया तो तुम मुझे मरने की धमकी दे रही हो ,, तुम्हारा दिमाग तो ठीक है प्राची,,,,,,,,,,,,,,,वो शादीशुदा है तुम क्यों उसके पीछे पड़ी हो ?”

“क्योकि मैं उस से प्यार करने लगी हूँ डेड और जब भी मैं उसे उस लड़की के साथ देखती हूँ तो बस एक ही ख्याल मेरे दिमाग में आता है डेड कि उस लड़की की जगह मुझे पृथ्वी के साथ होना चाहिए था,,,,,,,,,,,!!”,प्राची ने उन्मांद भरे स्वर में कहा

मिस्टर देसाई ने सुना तो प्राची की बाँह पकड़कर उसे उठाया और अपने सामने करके कहा,”होश में आओ प्राची ! पृथ्वी एक बहुत ही नेक और शरीफ लड़का है और उस पर वो अपनी वाइफ से बहुत प्यार करता है,,,,,,,,,,,,तुम उसका ख्याल अपने दिमाग से निकाल दो,,,,,,,वो तुम्हारा कभी नहीं हो सकता”

“और अगर वो लड़की ही उसे छोड़ दे तो,,,,,,,,!!!”,प्राची ने विश्वास भरे स्वर में कहा
“तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है प्राची,,,,,,,,जाओ जाकर सो जाओ मैं तुमसे सुबह बात करूंगा”,कहकर मिस्टर देसाई ने प्राची को साइड किया और वहा से चले गए। जाते जाते उन्होंने प्राची के कमरे के दरवाजे को जोर से बंद कर दिया। प्राची एक बार फिर बिस्तर पर आ गिरी और इस बार नींद ने उसे अपने आगोश में ले लिया।

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
देर रात पृथ्वी घर पहुंचा और दरवाजे के सामने आकर बेल बजायी। दरवाजा अवनि ने खोला और जैसे ही पृथ्वी ने अवनि को देखा उसके दिल को एक तसल्ली मिली। वह अंदर आया और कहा,”तुम अभी तक जाग रही हो ?”
“हम्म्म्म,,,,,,,,,तुम भीग कैसे गए ?”,अवनि ने पूछा

“उस तरफ बारिश हुई थी बस उसी में,,,,,,,,सुरभि सो गयी ?”,पृथ्वी ने पूछा
“नहीं वो भी जाग रही है,,,,,,,,,तुम कपडे बदल लो और अपना सर पोछ लो मैं तुम्हारे लिए गर्म कॉफी या चाय बना देती हूँ”,अवनि ने कहा

“परेशान मत हो अवनि,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“इसमें परेशानी की क्या बात है पृथ्वी , हम साथ इसलिए है ताकि एक दूसरे का सहारा बन सके,,,,,,,,,,जाओ कपडे बदल लो”,अवनि ने कहा और वहा से किचन की तरफ चली गयी
पृथ्वी हॉल की तरफ आया जहा सुरभि सोफे पर उदास सी बैठी थी ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”हेलो ! अब तुम्हे क्या हुआ ?”

पृथ्वी की आवाज सुनकर सुरभि की तंद्रा टूटी , वह उठकर पृथ्वी के सामने आयी और हैरानी भरे स्वर में कहा,”तुम बिल्कुल सही थे पृथ्वी , वो अनिकेत , वो सच में एक नंबर का कमीना है,,,,,,,,,,,,,,मैंने उसे शादी के लिए मना किया तो वह अब किसी और से शादी कर रहा है,,,,,,,,,,हाह ! ये सारे मर्द एक जैसे ही होते है”

पृथ्वी ने सुना तो सुरभि को घूरकर देखा और कहा,”ओह्ह्ह हेलो ! अपने ये कमीने मर्दो की लिस्ट में सारे मर्दो को ऐड मत करो समझी,,,,,,,,,,तुम  जिसके साथ थी वो मर्द गलत निकला इसका मतलब ये नहीं सब एक जैसे है,,,,,,,,,,जो सही होगा न वो आखरी वक्त तक तुम्हारे साथ सही ही रहेगा और रही अनिकेत की बात तो भाड़ में जाए वो , तुम बेटर डिजर्व करती हो,,,,,,,,,,,,,पागल लड़की”
कहकर पृथ्वी ने सुरभि के ललाट पर धीरे से चपत मारी और कपडे बदलने चला गया।

पृथ्वी के जाने के बाद सुरभि उसकी कही बातों के बारे में सोचने लगी। सही तो कहा पृथ्वी ने जो सही होगा वो अंत तक सही रहेगा। पृथ्वी कपडे बदलकर आया तब तक अवनि तीनो के लिए कॉफी ले आयी। अवनि ने एक कप सुरभि को दिया और दूसरा पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। वह अपना कप लेकर सामने सोफे पर आ बैठी और पृथ्वी से कहा,”पृथ्वी ! वो ठीक है न ?”

“कौन ?”,पृथ्वी ने कप होंठो से लगाते हुए कहा
“जिन्हे तुम घर छोड़ने गए थे ?”,अवनि ने बेचैनी से कहा
“अच्छा वो , उसे क्या होगा ? वो ठीक है बस उसके दिमाग में थोड़ी गड़बड़ है”, पृथ्वी ने पहले आराम से कहा और आखिर में धीरे से बड़बड़ाया
“उसने तुमसे कुछ कहा क्या ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा , मुस्कुराया और कहा,”हाँ उसने कहा मैं बहुत स्मार्ट दिखता हूँ और बहुत हेंडसम भी हूँ”

अवनि ने सुना तो उसके चेहरे के भाव बदल गए और उसने नीचे देखते हुए मुँह बनाकर धीरे से कहा,”हाह ! मुझे तुम्हे उसके साथ भेजना ही नहीं चाहिए था , बेशर्म लड़की,,,,,,,,,,,!!!”
“क्या क्या क्या , कुछ कहा तुमने ?”,पृथ्वी ने अवनि को छेड़ते हुए कहा
“नहीं कुछ भी तो नहीं,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा

पृथ्वी के बगल में बैठी सुरभि पृथ्वी की सब शरारत समझ रही थी और कॉफी पीते हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी। प्राची को लेकर अवनि के चेहरे पर मीठी सी जलन के भाव देखकर पृथ्वी को अच्छा लग रहा था। वह मुस्कुराते हुए अपनी कॉफी पीने लगा।

कॉफी पीकर पृथ्वी उठा और अंगड़ाई लेकर कहा,”रात बहुत हो चुकी है अब तुम दोनों सोने जाओ,,,,,,,,,!!!”
“हाँ तुम दोनों को जाना चाहिए वैसे भी मुझे बहुत नींद आ रही है”,सुरभि ने अंगड़ाई लेकर सोफे पर पसरते हुए कहा।

पृथ्वी और अवनि ने सुना तो एक दूसरे की तरफ देखा और फिर पृथ्वी ने सुरभि से कहा,”तुम यहाँ से उठोगी तभी तो मैं यहाँ सो पाऊंगा ना”
सुरभि उठकर बैठ गयी और कहा,”तुम्हे यहाँ क्यों सोना है ? तुम्हारा बेडरूम तो वहा है तुम वहा जाकर सोओ ना”
“हाँ लेकिन वहा अवनि सोती है”,पृथ्वी ने कहा

हाँ तो अवनि तुम्हारी वाइफ है पृथ्वी और वो तुम दोनों का कमरा है। अब जाओ यहाँ से मुझे सोने दो , मुझे सोने दो बहुत नींद आ रही है अह्ह्ह्हह्ह गुड नाईट”,कहते हुए सुरभि फिर सोफे पर पसर गयी  

दरवाजा बंद कर पृथ्वी जैसे ही पलटा देखा अवनि बिस्तर के दूसरी तरफ खड़ी है। शादी के बाद आज पहली बार दोनों इस कमरे मे साथ थे वरना हर रात कभी अवनि सोफे पर सोते नजर आती तो कभी पृथ्वी। पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर कहा,”एक काम करो अवनि तुम ऊपर सो जाओ मैं यहाँ नीचे सो जाता हूँ,,,,,,,,कुछ दिन की बात है फिर जब सुरभि चली जाएगी तब मैं वापस हॉल में सोना शुरू कर दूंगा”

“पृथ्वी तुम्हे नीचे सोने की जरूरत नहीं है , यहाँ काफी जगह है तुम यहाँ सो सकते हो”,अवनि ने बिस्तर की तरफ देखकर धीरे से कहा

पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा , वह अवनि का पति था लेकिन आज तक उसने अवनि पर अपने पति होने का हक़ नहीं जताया था ना ही कभी अवनि से इस बारे में शिकायत की वह बस उस पल का इंतजार कर रहा था जब अवनि खुद उसे वो सारे देगी। पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलाई और बिस्तर के दूसरी तरफ चला आया।

वह कुछ देर खामोश खड़ा रहा और फिर बिस्तर रखे तकिये उठाकर उन्हें बिस्तर के बिस्तर के बीचोंबीच रखकर उसे दो हिस्सों में बाँट दिया। अवनि ने देखा तो पृथ्वी ने कबर्ड से एक और चद्दर लाकर अपनी साइड रखते हुए कहा,”ये मैंने इसलिए रखा ताकि सोते वक्त गलती से मेरा हाथ तुम्हे ना लगे”

“हम्म्म्म ठीक है,,,,,,,,,,,गुड नाईट”,अवनि ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा
“गुड नाईट”,पृथ्वी ने कहा और अपने हिस्से पर लेट गया।  कुछ ही देर बाद पृथ्वी को नींद आ गयी लेकिन अवनि की आँखों से नींद कोसो दूर थी।  वह पृथ्वी की तरफ करवट लेकर सो गयी , अपने दोनों हाथो को अपने गाल के नीचे लगाया और पृथ्वी को देखने लगी।

तकिये के दूसरी तरफ अवनि की तरफ करवट लेकर लेटा पृथ्वी सोया हुआ किसी मासूम बच्चे सा लग रहा था। उसने अपने हाथो को समेट रखा था जिस से अनजाने में भी वे अवनि को ना लगे।
अवनि की नजरे पृथ्वी के चेहरे पर जा ठहरी , सांवला रंग , बिखरे बाल , बंद आँखों की बड़ी बड़ी पलकें , सुर्ख होंठ , हलकी दाढ़ी-मूछें सब कितना परफेक्ट था। अवनि प्यार भरी नजरो से पृथ्वी को देखती रही और फिर देखते देखते कब उसे नींद आ गयी उसे पता ही नहीं चला।

सुबह पृथ्वी और अवनि गहरी नींद में सो रहे थे। दोनों के बीच रखा तकिया अब भी अपनी जगह पर था। अवनि ने नींद में करवट ली और उसका हाथ तकिये पर जा लगा जहा पहले से पृथ्वी का हाथ था। जैसे ही अवनि का हाथ पृथ्वी के हाथ से लगा पृथ्वी की नींद खुली उसने धीरे से अपनी आँखे खोली और अपने बगल में लेटी सोयी हुयी अवनि को देखा। पृथ्वी अधखुली आँखों से मुस्कुराया उसकी आज की सुबह कितनी खूसबूरत थी। पृथ्वी ने धीरे से अपना हाथ अवनि के हाथ के नीचे से निकाल लिया और साइड हो गया।

 एकदम से उसे कोई ख्याल आया वह वापस अवनि की तरफ आया देखा अवनि का छोटा सा नाजुक हाथ बिस्तर पर रखा है। पृथ्वी ने अवनि के हाथ के बगल में अपना हाथ रखकर देखा , अवनि के हाथ से काफी बड़ा और सख्त हाथ ये देखकर पृथ्वी बच्चो की तरफ फिर मुस्कुराया। उसने अपना फोन उठाया और दोनों हाथो की साथ में एक तस्वीर ले ली।

पृथ्वी ने फोन साइड में रखा और देखा कि बालों की एक लट अवनि के गाल पर गिरी है। पृथ्वी धीरे से अवनि की तरफ झुका और बहुत ही आराम से उसने उस लट को साइड कर दिया। सुबह सुबह अवनि कितनी प्यारी लग रही थी , उसका गोरा रंग , सुर्ख गुलाबी होंठ , बंद  आँखों की पलकें , उसी पतली सी नाक और ठुड्डी पर मौजूद वो काला तिल,,,,,,,,,,,,,पृथ्वी एकटक उसे देखता रहा और फिर अपने हाथ की चारो उंगलियों को अपने होंठो से छूकर धीरे से अवनि के ललाट से छू दिया। पृथ्वी उठा और कमरे के दरवाजे की तरफ बढ़ गया। उसने धीरे से दरवाजा खोला और कमरे से बाहर चला आया।

सुरभि आज पहले उठ चुकी थी इसलिए किचन में आकर तीनो के लिए चाय बनाने लगी। पृथ्वी भी पानी लेने किचन में आया तो सुरभि को देखकर पहले तो हैरान हुआ फिर प्लेटफॉर्म से पानी का बोतल उठाते हुए कहा,”गुड मॉर्निंग,,,,,,,,!!!”
सुरभि पृथ्वी की तरफ पलटी और कहा,”गुड मॉर्निंग जीजाजी,,,,,,,,,,,,कैसी रही आपकी फर्स्ट नाईट ?”

पृथ्वी ने जैसे ही सुना मुँह में भरा पानी बाहर आ गिरा और वह जोर जोर से खाँसने लगा। उसने खाँसते हुए एक नजर सुरभि को देखा और मन ही मन खुद से कहा,”तो क्या इसलिए सुरभि ने उसे और अवनि को एक कमरे में सोने को कहा था ?”
पृथ्वी की हालत देखकर सुरभि ने बड़ी सी स्माइल दी और चाय छानने लगी। बेचारा पृथ्वी वहा न रूककर चुपचाप किचन से बाहर चला आया।

( क्या मिस्टर देसाई जानते है अपनी बेटी की जिद का नतीजा ? पृथ्वी को लेकर क्या है प्राची देसाई के इरादे ? क्या धीरे धीरे समझ आ रही है अवनि को पृथ्वी की भावनाये ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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