Pasandida Aurat Season 2 – 55
Pasandida Aurat Season 2 – 55

फ़ोन के दूसरी तरफ सिद्धार्थ की आवाज सुनकर पृथ्वी को चुभन का अहसास हुआ साथ ही हैरानी भी हुई कि आज अचानक अवनि के फोन पर सिद्धार्थ का कॉल कैसे ? आखिर सिद्धार्थ को अवनि से कौनसी जरुरी बात करनी थी ? पृथ्वी अवनि का फोन हाथ में थामे हॉल में खड़ा था कि तभी अवनि की आवाज उसके कानों में पड़ी,”पृथ्वी ! तुम्हारी चाय”
अवनि की आवाज से पृथ्वी की तंद्रा टूटी , वह पलटा लेकिन साथ ही उस हाथ को पीछे कर लिया जिसमे अवनि का फोन था। पृथ्वी अवनि को देखकर हल्का सा मुस्कुराया और चाय का कप ले लिया।
“रात के खाने में क्या बनाऊ ?”,अवनि ने कहा
“अरे कुछ बनाना क्यों है ? सुरभि पहली बार यहाँ आयी है बाहर चलते है ना इससे सुरभि का मूड भी थोड़ा अच्छा हो जाएगा और वह मुंबई की नाईट लाइफ भी देख लेगी”,पृथ्वी ने चाय पीते हुए कहा
अवनि कुछ कहती इस से पहले किचन से आती सुरभि ने कहा,” वाह जीजाजी ! ये की ना आपने दिल खुश करने वाली बात वरना मेरी ये दोस्त तो सुबह से मेरे साथ कभी घर की बालकनी तो कभी बिल्डिंग के नीचे सब्जिया खरीदने में वक्त बिता रही है,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो सुरभि की तरफ देखा और कहा,”हाह ! तुम्हारा मतलब तुम मेरे साथ बोर हो रही थी ?”
“और क्या ? अरे घर मे ही कैद रहना था तो मैं सिरोही ही ठीक थी ना,,,,,,,ना तुमने मुझे मुंबई घुमाया ना यहाँ का खाना खिलाया”,सुरभि ने शिकायती लहजे में लेकिन प्यार से कहा तो अवनि ने अपनी गर्दन झटकी
“अरे तो क्या हुआ ? मैं हूँ ना मैं लेकर चलता हूँ , इन्फेक्ट हम तीनो चलते है,,,,,,,,,अवनि”,पृथ्वी ने सुरभि से कहा और फिर अवनि की तरफ देखकर कहा
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो उसने कहा,”मैं तैयार हूँ तुम दोनों भी चेंज कर लो फिर चलते है”
अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी और सुरभि की बाँह पकड़कर उसे वहा से ले गयी हालाँकि अवनि को सुरभि की बाते बुरी नहीं लगी क्योकि वह जानती थी सुरभि दिल की बहुत साफ है और थोड़ी मुंहफट भी
सुरभि और अवनि तैयार होने चली गयी और पृथ्वी अवनि के फोन को टेबल पर रखकर चाय पीते हुए बालकनी में चला आया। पृथ्वी ने अवनि को ना सिद्धार्थ के कॉल के बारे में बताया ना ही उस से कुछ पूछा लेकिन उसके दिल और दिमाग के बीच एक जंग छिड़ चुकी थी और वह धीरे से बड़बड़ाया,”आखिर सिद्धार्थ को अब अवनि से कौनसी जरुरी बात करनी है ?”
“मुझे लगा नहीं था तुम इतने बेवकूफ हो सकते हो , अरे किसी भी लड़के लड़की का Ex उसे क्यों याद करेगा ? उसकी जिंदगी में वापस आने के लिए और क्या ? लेकिन इतनी सी बात तुम्हारे भेजे में नहीं आ रही,,,,,,,,,,,!”,दिमाग ने अपने दाँत कुरेदते हुए कहा
पृथ्वी ने सुना तो अपने दांयी तरफ देखा तभी बांयी तरफ से आवाज आयी,”जब भी बोलोगे नेगेटिव ही बोलोगे , अरे सिद्धार्थ ने फ़ोन किया भी तो हो सकता है उसे अवनि से कुछ जरुरी काम हो,,,,,,,,!!!” इस बार गुस्से से लाल दिल ने कहा
“जरुरी काम ? अरे अवनि अब अपने पृथ्वी की बीवी है और इसकी बीवी से उस गधे को क्या काम हो सकता है ? हाह ! वो फिर से अवनि को अपनी मीठी बातो में फ़साना चाहता है,,,,,,,,,!!!”,दिमाग में हाथ में पकडे स्टिक को फेंककर कहा
पृथ्वी ने सुना तो मायूसी से दिमाग की तरफ देखा तभी दिल ने कहा,”अगर उसे अवनि की जिंदगी में वापस आना ही होता तो वो उसकी शादी पृथ्वी से क्यों करवाता ?”
“हाँ बात तो सही है”,पृथ्वी ने एकदम से कहा और ये सुनकर उसका दिमाग गुस्से से उबल पड़ा और कहा,”क्या सही है ? जब देखो तब दिल की बातो में आ जाते हो ,, अरे कभी तो मेरा इस्तेमाल भी करो लेकिन नहीं अवनि के नाम पर सारे फ्यूज उड़ जाते है तुम्हारे,,,,,,,,उसका कॉल खतरे की घंटी समझ समझा”
पृथ्वी एक बार फिर सोच में पड़ गया तो दिल ने उसके कंधे पर हाथ रखकर प्यार से कहा,”पृथ्वी ! मेरी बात का यकीन करो , अवनि तुमसे प्यार करती है वो तुम्हे धोखा कभी नहीं देगी,,,,,!!!”
“अच्छा प्यार करती है तो फिर बोलती क्यों नहीं ?”,दिमाग ने मुँह बनाकर कहा
“जरुरी नहीं है प्यार बोलकर जताया जाये , कभी कभी सामने वाले की परवाह भी ये जता देती है कि प्यार है बस हमे समझ आना चाहिए,,,,,,,,!!!””,दिल ने इस बार भी प्यार से कहा तो पृथ्वी ने मुस्कुरा कर हामी भरी क्योकि बीते दिनों में अवनि की परवाह ने उसे ये अहसास दिलाया था कि अवनि के दिल में भी उसके लिए भावनाये है,,,,,,,,,,!!!
पृथ्वी को दिल की बातों में आते देखकर दिमाग ने हताश होकर मुँह बना लिया और पृथ्वी के सर पर चपत लगाकर कहा,”बाद में रोते हुए मेरे पास नहीं आना,,,,,,,,!!!”
“आह,,,,,,!!!”,पृथ्वी के मुँह से निकला वह भूल गया कि उसका दिल और दिमाग सिर्फ उसके ख्याल है जो अगले ही पल हवा हो गए।
“क्या हुआ ?”,अवनि की आवाज पृथ्वी के कानों में पड़ी तो उसकी तंद्रा टूटी और उसने अवनि की तरफ देखकर कहा,”अह्ह्ह कुछ नहीं कुछ भी तो नहीं हुआ”
अवनि अपने हाथो में थामे जैकेट को लेकर पृथ्वी की तरफ आयी और उसकी तरफ बढाकर कहा,”इसे पहन लो बाहर ठंड है और हमे आने में देर हो जाएगी”
पृथ्वी ने सुना तो सहसा ही उसके कानो में अपने दिल के कहे शब्द गूंजे “जरुरी नहीं है प्यार बोलकर जताया जाये , कभी कभी सामने वाले की परवाह भी ये जता देती है कि प्यार है बस हमे समझ आना चाहिए”
पृथ्वी को खोया हुआ देखकर अवनि ने उसके सामने हाथ हिलाकर कहा,”पृथ्वी , पृथ्वी , तुम ठीक हो ?”
“हाँ,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और अवनि के हाथ से जैकेट ले लिया
पृथ्वी को जैकेट देखकर अवनि सुरभि की तरफ चली आयी। पृथ्वी ने भी जैकेट पहना और दोनों के साथ बाहर निकल गया।
रवि जी का घर , पनवेल
“लता ! आज बड़े दिनों बाद तुमने लौकी चने की सब्जी बनायीं है , वैसे ये बहुत बढ़िया बनी है”,रवि जी ने खाना खाते हुए कहा
लता जी किचन से गर्म रोटी ले आयी और टेबल पर रख कर खुद भी अपनी प्लेट लेकर आ बैठी और रवि जी की प्लेट में रोटी रखते हुए कहा,”पृथ्वी जब यहाँ था तो उसे लौकी खाना बिल्कुल पसंद नहीं था इसलिए मैं कभी नहीं बनाती थी , अब जब वह यहाँ नहीं है तो,,,,,,,,,,!!!”
कहते कहते लता उदास हो गयी। रवि जी ने देखा तो अपना हाथ लता के हाथ पर रखा और कहा,”लता ! तुमने पृथ्वी को इस घर से तो दूर कर दिया लेकिन उसकी आदतों को अपने दिल से दूर नहीं कर पायी”
रवि जी की बात सुनकर लता की आँखों में नमी उभर आयी उन्होंने रवि जी की तरफ देखा तो रवि जी ने कहा,”माफ़ कर दो उसे आखिर वो हमारा बेटा है , हाँ उसने गलती की लेकिन क्या तुम्हे नहीं लगता वो अपने फैसले के साथ खुश है। जो कुछ उसने किया उसमे उस बेचारी लड़की की क्या गलती है ? वो तो यहाँ पृथ्वी के भरोसे पर आयी है ना”
लता ने सुना तो तो अपनी आँखों के किनारे साफ किए और कहा,”मुझे उस लड़की से कोई शिकायत नहीं है बस वो मेरे पृथ्वी का ख्याल रखे”
“वो रख रही है लता , तुमने देखा नहीं पृथ्वी पहले से कितना बदल गया है। पहले से ज्यादा खुश रहने लगा है। बस अब तुम सब भूलकर उसे माफ़ कर दो और उन दोनों को अपना लो तो उनकी ख़ुशी दुगुनी हो जाएगी”,रवि जी ने कहा
“इस होली सबने दादा के घर बुलाया है उस लड़की को दो , सबके साथ रहेगी तो उसे हमारे घर का माहौल समझ आएगा और हम सबको भी पता चल जाएगा कि वह सबके साथ रह सकती भी है या नहीं ?”,लता ने कहा
“दादा के घर क्यों ? वो यहाँ भी आ सकती है”,रवि जी ने हैरानी से कहा
“शादी के बाद पहली होली पर घर की बहू अपने ससुराल में नहीं रहती है,,,,,,,,!!!”,लता ने कहा और उठकर जाने लगी
रवि जी ने सुना तो मुस्कुराये और लता की तरफ देखकर कहा,”मतलब तुमने अवनि को अपनी बहू मान लिया है ?”
लता ने सुना तो चलते चलते रुकी और पलटकर कहा,”मैंने ऐसा तो नहीं कहा,,,,,,!!”
रवि जी ने कुछ नहीं कहा बस लता को देखकर मुस्कुराते रहे ये देखकर लता ने कहा,”आप कुछ और लेंगे ?”
रवि जी ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी लेकिन मन ही मन बहुत खुश थे , आखिर इतने दिनों बाद ही सही लता के मन से अवनि को लेकर नफरत कुछ तो कम हुई।
पृथ्वी ने कैब बुक की और अवनि-सुरभि के साथ मरीन ड्राइव चला आया। रात के वक्त था और ऐसे में ये जगह और भी खूबसूरत लग रही थी। इस समय यहाँ काफी लोग मौजूद थे। समंदर किनारे बड़े बड़े ऊँचे पत्थरो के के बाद बने प्लेटफॉर्म पर कुछ प्रेमी जोड़े बैठे थे जिन्हे ना अपने आस पास के लोगो की फ़िक्र थी ना दीन दुनिया की फ़िक्र , वे बस एक दूसरे में ही खोये हुए थे। कुछ लोग अपने बच्चो और परिवार के साथ वहा आये थे कुछ जोड़े हाथो में हाथ डाले घूम रहे थे।
सुरभि और अवनि पहली बार मुंबई आयी थी इसलिए उन्हें ये सब काफी रोमांचक लग रहा था। सुरभि ने अवनि का हाथ थामा और उसे लेकर चलते हुए आगे बढ़ गयी। पृथ्वी मुस्कुराते हुए कुछ दूरी बनाकर दोनों के पीछे चलने लगा। अवनि ने पलटकर पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने पलकें झपकाकर अवनि से सुरभि के साथ जाने का इशारा किया। अवनि हल्का सा मुस्कुरा दी और सुरभि के साथ आगे बढ़ गयी। पृथ्वी एक खाली जगह देखकर बैठ गया और आस पास फैली जगह और गरजते लोगो को देखने लगा।
सब कितना बदल गया था, कॉलेज के दिनों में वह नकुल के साथ अक्सर यहाँ आया करता था फिर नौकरी में ऐसा व्यस्त हुआ कि महीनो इस जगह को पलटकर नहीं देखा और आज कितने दिनों बाद यहाँ आया था वो भी अवनि के साथ,,,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि के साथ चलते हुए सुरभि ने कहा,”अवनि ! क्या तुम पहली बार यहा आयी हो ?”
“हाँ,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“ये जगह कितनी खूबसूरत है और रोमांटिक भी , तुम्हे पृथ्वी के साथ यहाँ रोज आना चाहिए,,,,,,,,देख रही हो उन कपल्स को कैसे हाथो में हाथ डालकर बैठे है वो भी इतना पास की हवा भी उनके बीच से ना गुजर पाए,,,,,,,,,तुम्हे और पृथ्वी को भी यहाँ आकर टाइम स्पेंड करना चाहिए”,सुरभि ने वहा बैठे कपल्स को देखकर कहा।
अवनि ने सुना हैरानी से सुरभि की तरफ देखा , अवनि को हैरान देखकर सुरभि ने कहा,”इसमें इतना चौंकने वाली कौनसी बात है ? एक दूसरे के साथ जब तक टाइम स्पेंड नहीं करोगे तब तक तुम दोनों के बीच की ये दूरिया कैसे कम होगी ?”
“दूरिया , कैसी दूरिया ? और तुमसे किसने कहा हमने एक दूसरे के साथ वक्त नहीं बिताया है ? मैं और पृथ्वी हमेशा ही रहते है , एक दूसरे का हाथ थामना , साथ बैठकर बाते करना,,,,,,ये सब किया है हमने , तुम तुम ज्यादा दिमाग ना लगाओ ठीक है , हमारे बीच में सब सही है”,अवनि ने हड़बड़ाकर कहा
“सब सही है तो तुम इतना घबरा क्यों रही हो ? बेचारे पृथ्वी को देखकर तो लगता है कि जैसे तुमने उसके और अपने बीच दिवार खड़ी कर रखी है,,,,,,,,,,,मुझे नहीं लगता तुम दोनों के बीच कभी किस भी,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने कहा लेकिन वह अपनी बात पूरी करती इस से पहले ही अवनि ने उसकी बाँह खींचकर कहा,”ए सुरभि ! क्या बोल रही हो तुम , कोई सुनेगा तो क्या सोचेगा ?”
“अच्छा लोग यहाँ खुलेआम कर सकते है और मैं बोल भी नहीं सकती”,सुरभि ने थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा तो आस पास के लोग उसे देखने लगे। अवनि ने झेंपकर सबको देखा और सुरभि का हाथ खींचकर उसे वहा से ले गयी। दोनों चलते चलते पृथ्वी से काफी दूर निकल आयी थी
“तुम्हारे मुँह में जरा भी फ़िल्टर नहीं है सबके सामने कुछ भी बोल देती हो तुम”,अवनि ने सुरभि से कहा
“हाह ! तुम क्यों इतनी अन्कॉमफोर्टेबल हो रही हो , ओह्ह्ह अच्छा अच्छा अभी तक तुमने पृथ्वी को किस नहीं किया इसलिए ना,,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह मैं समझ सकती हू,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अवनि को छेड़ते हुए कहा
“मैंने किया है,,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने खीजकर कहा वह अपने और पृथ्वी के बीच का सच गलतफहमी बनकर सुरभि के सामने आने देना नहीं चाहती थी।
“सच में ? कैसा लगा ?”,सुरभि ने अपनी आँखे मिचमिचाते हुए शरारत भरे स्वर में कहा
“तुम न बहुत बेशर्म हो गयी हो सुरभि,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा और जाने के लिए वापस पलट गयी तो सुरभि उसके बगल में आयी और अपने कंधे से उसका कंधा टकरा कर कहा,”अरे बताओ भी मुझसे क्या शर्माना ?”
“शट-अप चलो पृथ्वी वहा पर अकेला है”,अवनि ने आगे बढ़ते हुए कहा
“तुम्हे पृथ्वी की परवाह करते देखकर मुझे सच में कितना अच्छा लग रहा है,,,,,,,,बस ऐसे ही खुश रहो तुम दोनों”,सुरभि ने अवनि की बाँह थामकर उसके साथ चलते हुए कहा तो अवनि मुस्कुरा दी और दोनों वापस पृथ्वी की तरफ बढ़ गयी।
वर्सोनावा होटल एंड बार , साऊथ मुंबई
एक बड़े से आलिशान बार में अपने दोस्तों के साथ बैठे विक्रम ने वेटर से ड्रिंक देने को कहा और बातों में लग गया। उस जगह कई लोग मौजूद थे। कुछ नशे में झूम रहे थे तो कुछ बैठकर शराब और खाने का आनंद ले रहे थे। वहा मौजूद लोगो को देखकर लग रहा था कि सब रईस घरो से है जो पैसे को पानी की तरह बहाने में विश्वास रखते है। इत्तेफाक से प्राची भी आज अपने दोस्तों के साथ इसी बार में आयी थी और ऊपर डांस बार में मौजूद थी। प्राची ने दोस्तों के साथ मिलकर शराब पी और मदहोशी में सबके बीच झूम रही थी।
सहसा ही उसे पृथ्वी का ख्याल आया और साथ ही याद आया वो पल जब पृथ्वी ने उसके सामने अवनि की बातें की थी। वो सब याद आते ही एकदम से प्राची का मूड खराब हो गया। वह सबके बीच से निकलकर साइड आयी अपना क्लच ( पर्स ) उठाया और सबको बाय बोलकर सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी। प्राची सीढिया उतरकर नीचे आयी , उसने बहुत ही शार्ट और रिवीलिंग ड्रेस पहना था जिस से नीचे में मौजूद लड़को की नजरे उस पर ही थी। विक्रम की नजर जब प्राची पर पड़ी तो वह भी खुद को उसे देखने से रोक नहीं पाया।
प्राची ने किसी पर ध्यान नहीं दिया वह शराब के नशे थी और इस वक्त एक आग में जल रही थी जिसका नतीजा ये हुआ कि बार काउंटर के सामने से गुजरते हुए वह रुकी और कुर्सी खिसकाकर उस पर आ बैठी। उसने वेटर की तरफ देखा और कहा,”वन ड्रिंक प्लीज”
वेटर ने हामी में गर्दन हिलायी और प्राची के लिए ड्रिंक बनाने लगा। प्राची ने अपनी कोहनी काउंटर पर टिकाई और अपने बालों में उंगलिया घुमाने लगी। विक्रम ने देखा तो अपना ड्रिंक खत्म करके गिलास नीचे रखा और प्राची की तरफ चला आया। वह प्राची के बगल में आकर बैठा और कहा,”हाय ! आई ऍम विक्रम कपूर”
प्राची ने विक्रम में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और बेमन से हाथ उठाकर बुझे स्वर में कहा,”हाय,,,,,,,,,!!!”
विक्रम मुस्कुराया और कहा,”एक्चुली यू आर लुकिंग सो ब्यूटीफुल टूनाईट और मैं तुम से अपनी आँखे नहीं हटा पा रहा हूँ। मुझे गलत मत समझना दरअसल मैं एक डायरेक्टर हूँ और नए चेहरों की तलाश में रहता हूँ एंड तुम्हे देखकर मैं कह सकता हूँ कि तुम में वो बात है,,,,,,,,,,मैं तुम्हे अपने सीरियल में रोल देना चाहता हु,,,,,,,,!!!”
कहते हुए विक्रम ने अपनी आँखों से प्राची के पुरे जिस्म को स्कैन कर लिया
प्राची ने सुना तो मुस्कुराई , उसने अपने क्लच से विजिटिंग कार्ड निकाला और विक्रम के कोट की ऊपरी जेब में डालकर कहा,”ये मेरा विजिटिंग कार्ड है अगर तुम्हे नौकरी की जरूरत हो तो कल ऑफिस आकर मेरे मैनेजर से मिल लेना”
विक्रम ने सुना तो ख़ुशी और मुस्कान उसके चेहरे से गायब हो गयी , प्राची ने अपना ड्रिंक उठाया और पेमेंट करके दरवाजे की तरफ बढ़ गयी। विक्रम ने जेब में रखे कार्ड को निकालकर देखा , उसके सामने खड़ी लड़की कोई और नहीं बल्कि शहर के सबसे बड़े बिजनेसमैन में से मिस्टर देसाई की बेटी थी।
“क्या विक्रम ! मछली फंसी की नहीं ?”,विक्रम के एक दोस्त ने आकर उसके कंधे पर हाथ मारकर कहा और विक्रम फीका सा मुस्कुरा दिया।
क्या दिल और दिमाग के इस जाल से बाहर निकल पायेगा पृथ्वी ? क्या होली के टाइम होने वाला है कोई बड़ा तमाशा ? क्या प्राची और विक्रम की ये पहली मुलाकात लाने वाली है पृथ्वी की जिंदगी में तूफ़ान ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” सीजन 2 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Esa lag raha hai ki ab Vikram Kapoor aur prachai ka gang ban jayega…jo Avni aur Prithvi k khilaf hoga…but Vikram Prachi k hote huye Prithvi se badla nhi le payega… filhal to Holi par Avni k liye Neelima bua ne kya soch rakha hai, mujhe to wahi soch kar darr lag rha hai…esa na ho Neelima bua Avni k physically nuksaan pahuchte….dekhte hai…but Prithvi k parents to Maan Gaye hai.