Manmarjiyan Season 4 – 14

Manmarjiyan Season 4 – 14

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

लवली बाहर मैनेजर को सभी आर्डर की डिटेल्स दे रहा था कि तभी मिश्रा जी आये और एक लिफाफा लवली की तरफ बढाकर कहा,”अरे लवली बेटा ! जे लिफाफा प्रकाश पाण्डे तक पहुँचाना है और जे रही इनके आर्डर की लिस्ट,,,,,,,,सब सामान पैक है बस तुमको पटकापुर में इनके घर पहुँचाना है”
“अरे मालिक ! लवली बाबू काहे हम किसी लड़के को भेज देते है”,मैनेजर ने कहा

“नहीं नहीं लड़का नहीं जाएगा , लवली को हमहू इहलिये भेज रहे है क्योकि पाण्डे जी अच्छे मित्र है हमाये और अगले हफ्ते बिटिया की शादी है। लवली जाएगा तो उन्हें अच्छा लगेगा,,,,,,,,लवली तुमहू चले जाओगे न ?”,मिश्रा जी ने पूछा
“हाँ हम चले जायेंगे लेकिन जे पटकापुर में पाण्डे जी का घर , जे कहा पडेगा ?”,लवली ने लिफाफे पर लिखे एड्रेस को देखकर पूछा
“अरे वो अपना गोलू है ना ओह्ह्ह के घर से घर से चार घर छोड़कर गली जाती है ओही गली मा तीसरा मकान है,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने समझाया

“ठीक है पिताजी हम चले जायेंगे”,लवली ने लिफाफा जेब में रखकर कहा
“अभी निकलो का है कि आर्डर के सामान मा कुछो जरुरी सामान भी है जो आज चाहिए उनको तभी तो अर्जेन्ट मा भेज रहे है,,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने लवली के कंधे पर हाथ रखकर कहा और फिर वहा से चले गए।
“आप जे सामान रखवा दीजिये हमहू ले जाते है”,लवली ने कहा जो पटकापुर की गली गली जानता था।
लवली शोरूम से बाहर आया तब तक मैनेजर ने लड़के से कहकर मिश्रा जी की गाडी में सब सामान रखवा दिया

लवली ड्राइविंग जानता था इसलिए ड्राइवर को वही रुकने को कहा और खुद पटकापुर के लिए निकल गया।

मंगल फूफा गुड्डू का सामान और गुड्डू के ड्राइवर को लेकर पहुंचे गुप्ता जी के मोहल्ले में , अब गुप्ता जी और यादव जी का घर ठहरा आमने सामने और दोनों घरो के बीच चौड़ी सड़क जहा से रोज कितने ही मोटर गाडी ऑटो गुजरते। मंगल फूफा ने गाडी गुप्ता जी के घर से एक घर पहले ही रुकवा दी तो लड़के ने कहा,”हिया काहे रुकवाए हो ?”

मंगल फूफा ने उसका मुँह घुमाया यादव जी के घर की तरफ और कहा,”उह्ह रहा हमायी फूल का घर”
“का फूल का घर ? कौनसा फूल गोभी का या मोगरे का ?”,लड़के ने हंसकर कहा
मंगल फूफा फुलवारी के बारे में भला ऐसा कैसे सुन सकते थे इसलिए लड़के के सर पर एक चपत लगायी और कहा,”अबे गोभी का फूल तो ओह्ह्ह का घरवाला है हमायी फूल तो गुलाब का फूल है गुलाब का,,,,,,,साला एक बार छू ले तो पत्थर भी पिघल जाये”

“ऐसा है का ? अरे जिनकी इत्ती तारीफ कर रह रहे हो आखिर उह्ह है कहा ?”,लड़के ने बेसब्री से कहा
“हिया बैठे बैठे नाही दिखेगी , नीचे उतरो”,कहकर मंगल फूफा और दोनों गाड़ी से नीचे उतर गए। मंगल फूफा लड़के के साथ गाड़ी के बोनट के पास छुप गए और यादव के घर की तरफ देखने लगी। कुछ देर बाद यादव जी के घर से लाल साड़ी पहने एक औरत निकली तो लड़के ने ख़ुशी से मंगल फूफा के कंधे पर मारकर कहा,”आई आई आई,,,,,,,!!”

मंगल फूफा मुँह के बल नीचे जा गिरे और सामने पड़ा कीचड़ उनके मुँह पर लग गया। मंगल फूफा अपना मुँह पोछते हुए उठे और लड़के की तरफ देखकर गुस्से से कहा,”अबे वो नहीं है,,,,,,,,हमसे जियादा तो साला तुम एक्साइटेड लग रहे हो”
लड़के ने सुना तो झेंप गया और एक बार फिर दोनों फुलवारी के आने का इंतजार करने लगे। कुछ देर बाद फुलवारी सब्जी वाले से सब्जी लेने बाहर आयी तो मंगल फूफा ने खुश होकर कहा,”आ गयी हमायी फूल”

लड़के ने देखा तो उसे समझ आया आखिर क्यों मंगल फूफा उसके पीछे इतना बौराय रहे थे। खूबसूरत तो वह थी ही उस पर उम्र में भी ज्यादा नहीं लगती भी। एक हाथ से अपना पल्लू लहराते हुए फुलवारी दूसरे हाथ से सब्जी वाले को सब्जी चुन चुन कर दे रही थी।

“का लड़की फसाये हो बे तुमहू , पर साला जे इत्ती खूबसूरत लड़की तुम्हाये प्यार मा पड़ी कैसे ?”,लड़के ने मंगल फूफा की तरफ देखकर हैरानी से कहा
मंगल फूफा ने सुना तो थोड़ा अकड़ में आ गए और ये भूल गए कि इस वक्त वे गुप्ता जी के मोहल्ले में खड़े है जहा से सुबह सुबह गुप्ता जी ने उन्हें बोरिया बिस्तर के साथ बाहर निकाला था।

मंगल फूफा लम्बी लम्बी फेंकते हुए लड़के को लेकर फुलवारी की तरफ बढे और भूल गए की उनका हर एक कदम उन्हें गुप्ता जी के घर के करीब ले जा रहा है। अब इसे मंगल फूफा की बुरी किस्मत कहे या इत्तेफाक गुप्ता जी किसी काम से घर के दरवाजे पर आये और मंगल फुफा लड़के को कहानी सुनाते हुए सामने खड़े गुप्ता जी से टकरा गए। जैसे ही मंगल फूफा ने गुप्ता जी को देखा उसके होश उड़ गए सिट्टी पिट्टी गुम , शब्द गले में अटक गए और जबान लड़खड़ाने लगी हालाँकि मंगल फूफा के मुँह पर पहले से कीचड़ लगा था इसलिए गुप्ता जी अभी तक ठीक से उसे पहचान नहीं पाए थे।

लड़के ने देखा मंगल फूफा अपनी और फुलवारी की कहानी सुनाते सुनाते रुक गए है तो उसने चिढ़कर गुप्ता जी से कहा,”अरे का मुंसिपाल्टी के खम्बे की तरह बीच मा खड़े हो गए , हटो साइड हमका इनसे कहानी सुनने दयो,,,,,,,हाँ फिर का हुआ ?”
गुप्ता जी के मोहल्ले में आकर कोई गुप्ता जी से ही बदतमीजी करे ऐसा तो भला कैसे हो सकता था ? उन्होंने खींचकर एक थप्पड़ मारा लड़के के गाल पर तो लड़का बौखलाया हुआ सा गुप्ता जी को देखने लगा।

“का बेटा ! कान का पर्दा खुला के नाही ? साले हमाये मोहल्ले में आकर हमाये घर के सामने खड़े होकर तुमहू हमसे बकैती कर रहे हो,,,,,,,अभी तबियत से झपड़ा दिए ना तो यही बैठ के मुजरा करोगे हमाये सामने,,,,,,,,,,समझयो”,गुप्ता जी ने कहा
“अरे हमने का किया ? जे ही हमको फुलवारी को दिखाने हिया लेकर आये थे”,लड़के ने रोते हुए कहा
गुप्ता जी ने जैसे ही फुलवारी का नाम सुना कीचड़ से सने आदमी को देखा , गुप्ता जी मंगल फूफा को पहचाने इस से पहले मंगल फूफा पलटे और जाने लगे।

“अबे ए कहा जा रहे हो ?”,गुप्ता जी ने आवाज दी
“हमे जरुरी काम याद आ गवा”,मंगल फूफा ने कहा
“इसकी आवाज तो जानी पहचानी लग रही है,,,,,,,,,अबे मंगलू तू , तेरी ऐसी की तैसी साले खुद तो यादववा की घरवाली के पीछे पड़े थे अब लोगो को भी दिखाने लगे,,,,,,,,,,,,,,अबे उह्ह्ह का म्यूजिम मा रखी मूर्ति है,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए गुप्ता जी ने अपने पैर से चप्पल निकाली और मंगल के पीछे भागे।

मंगल फूफा के साथ आये लड़के को कुछ समझ नहीं आया कि गुप्ता जी मंगल फूफा को कैसे जानते है ? वह तो एक बार फिर फुलवारी को देखने लगा।    

गुप्ता जी कुछ दूर तक मंगल फूफा के पीछे गए लेकिन मंगल फूफा ना जाने कौनसे बिल में घुसा कि गुप्ता जी को दिखाई नहीं दिया। वे बड़बड़ाते हुए वापस आये तो देखा उनके घर के सामने खड़ा लड़के झुककर घुटनो पर अपने दोनों हाथो को टिकाये सब्जी खरीदती फुलवारी को देख रहा था। गुप्ता जी एक भँवरे को उड़ाकर आये थे और वापस आये तो दूसरा भंवरा तैयार था। गुप्ता जी लड़के के पास आये और उसका कंधा थपथपाया तो लड़के ने उनका हाथ झटक दिया क्योकि वह फुलवारी को देखने में बिजी था।

गुप्ता जी ने एक बार फिर उसका कंधा थपथपाया तो लड़के ने फिर झटक दिया। गुप्ता जी ने लड़के की गुद्दी पकड़ी और अपनी तरफ करके कहा,”अबे का खा जाओगे ओह्ह्ह का,,,,,,,,,,,साले शादीसुदा है उह्ह्ह”
“हाँ तो आपको काहे मिर्ची लग रही है , आप भी है का लाइन मा ?”,लड़के ने कहा
गुप्ता जी ने सुना तो उसकी गर्दन को बाँह में दबोचा और कहा,”पटकापुर मा आके बाप से बकैती नाही करते बिटवा , वरना पटक पटक के जो मारेंगे रेल बना देंगे,,,,,,,,,,,और हमको जे बताओ उह्ह्ह मंगलवा के साथ का कर रहे हो तुम ? ओह्ह्ह के आदमी हो ?”

“हम का आपको औरत दिखते है ? उह्ह्ह हमाये आदमी कैसे होंगे ?”,लड़के ने चिढ़कर कहा
“अबे का सुबह सुबह भांग खाये हो , आदमी से मतलब का रिश्ता है तुम्हरा ओह्ह के साथ ?”,गुप्ता जी ने लड़के का कान मरोड़कर कहा
लड़का दर्द से बिलबिलाया और कहा,”अरे हमरा कोनो रिश्ता नाही है ओह्ह से हम तो गुड्डू भैया और गोलू भैया के साथ काम करते है उनके कहने पर डेकोरेशन का सामान लेकर जा रहे थे उह्ह्ह हमको कहे रहा कि चलो तुमको अपनी गर्लफ्रेंड से मिलवाते है,,,,,,,,,,,,माँ कसम चाचा हमने कुछ नाही किया हमको छोड़ दयो,,,,,,,,,,,,,!!!”

गुप्ता जी को लड़के की बात में थोड़ी थोड़ी सच्चाई नजर आयी तो उन्होंने कहा,”तुम्हरे साथ का कर रहा था उह्ह्ह रंगबाज ?”
“अरे चचा आज सुबह गोलू भैया ने ही उनको काम पर रखा है,,,,,,,,,,,,हमको माफ़ कर दयो आइंदा से जे मोहल्ला मा नाही आएंगे”,लड़के ने हाथ जोड़कर कहा
 गुप्ता जी ने जब सुना कि मंगल को अपने साथ काम पर गोलू ने रखा है तो उनकी भँवे तन गयी। उन्होंने लड़के का गाल थपथपाया और कहा,”चलो निकलो हिया से”

लड़का अपनी जान बचाकर वहा से आगे बढ़ गया और गुप्ता जी मन ही मन गोलू को 10 गालियाँ दे चुके थे तभी लड़का पलटकर वापस आया और दबे स्वर में गुप्ता जी से पूछा,”वैसे फुलवारी का नंबर मिल सकता है का ?”
गुप्ता जी ने सुना तो लड़के की तरफ देखा और झुककर पैर से अपनी चप्पल निकाली तो लड़का भाग गया और गुप्ता जी उसके पीछे चप्पल फेंककर चिल्लाये,”साले आइंदा फुलवारी के आस पास भी दिखे ना तो टाँगे तोड़ देंगे तुम्हायी समझे,,,,,,,,,,,,भाग जाओ हिया से”

गुप्ता जी के डर से लड़का ऐसा भागा कि डेकोरेशन का सामान गाडी समेत वही छोड़ दिया।

अच्छा बुरी किस्मत सिर्फ गोलू और मंगल फूफा की ही नहीं बल्कि गुप्ता जी की भी थी लड़के को हड़काकर जैसे ही उन्होंने सामने देखा तो पाया फुलवारी के साथ खड़े यादव जी ने गुस्से से कहा,”साले गुप्ता ! तुम पर हमको पहिले से सक था हमायी घरवाली से दूर रहो तुम समझे,,,,,,,,,,,,!!”

“नहीं तो का कर लोगे बे ?”,गुप्ता जी ने भी गुस्से से कहा तभी घर के आँगन की सीढ़ियों पर खड़ी गुप्ताइन ने छाती पीटते हुए कहा,”हे भगवान ! जे आदमी कबो ना सुधरे है ,, मार डालो हमका मार डालो ,, जे उम्र मा आपकी रंगरलिया देखने से अच्छा है हमहू भगवान को पियारे हो जाए,,,,,,,,,,,मार डालो हमका”

गुप्ता जी ने सुना तो अपना सर पकड़ लिया उन्होंने यादव-फुलवारी को देखा और कहा,”पड़ गयी तुम लोगन के कलेजे मा ठंडक ? साला एक ठो बार उह्ह्ह रंगबाज मंगलवा हमको मिल जाए बस,,,,,,,,ओह्ह्ह की बत्ती नाही बनाय दी ना तो हमाओ नाम गज्जू गुप्ता नाही”
गुप्ता जी घर के अंदर चले गए और यादव जी भी फुलवारी को लेकर घर के अंदर चले गए।

लवली पाण्डे जी से मिला उन्हें आर्डर का सब सामान और मिश्रा जी की तरफ से दिया लिफाफा देकर वहा से वापस शोरूम जाने के लिए निकल गया। लवली गाडी घुमाकर गुप्ता जी के घर के सामने से गुजरा तो सहसा ही मुस्कुरा उठा।

गोलू और गुप्ता जी की वजह से इस घर के आँगन में कितना तमाशा देखा था उसने। उसने गाडी आगे बढ़ा दी तभी उसकी नजर सामने खड़ी गाडी पर पड़ी जिस पर लिखा था “मिश्रा वेडिंग प्लानर” साथ में गुड्डू मिश्रा और गोलू गुप्ता का नाम भी लिखा था ये देखकर लवली बड़बड़ाया “लगता है ये गुड्डू और गोलू की गाडी है फिर तो वो दोनों भी यही होंगे”

लवली ने अपनी गाड़ी गुड्डू की गाड़ी के बगल में रोकी और देखा अंदर कोई नहीं है उलटा गाड़ी में चाबी लगी है ये देखकर लवली फिर बड़बड़ाया,”पिताजी सही कहते है जे गुड्डू सच मा बहुते लापरवाह है , गाडी मा चाबी छोड़कर चला गया और लगता है पीछे सामान भी रखा है”
लवली अपनी गाड़ी साइड में लगाकर नीचे उतरा और गुड्डू को फोन लगाया। एक दो रिंग के बाद गुड्डू ने फोन उठाया और कहा,”लबली भैया ! हमहू आपसे बाद मा बात करते है अभी बहुते बिजी है”

कहकर गुड्डू ने लवली की बात भी नहीं सुनी और फोन काट दिया। लवली ने अफ़सोस में सर हिलाया और एक बार फिर गुड्डू का नंबर डायल किया। इस बार भी गुड्डू ने एक ही रिंग में फोन उठा लिया लेकिन वह कुछ बोलता इस से पहले लवली बोल पड़ा,”गुड्डू हमायी बात सुनो !  हम गोलू के घर के सामने से
गुजर रहे थे तो देखा सामान से भरी तुम्हायी गाड़ी हिया खड़ी है ,, पर हमको एक बात बताओ यार तुम और गोलू इत्ते लापरवाह कैसे हो सकते हो ? नहीं मतलब
गाडी की चाबी को गाडी मा ही छोड़ दिए,,,,,,,,,,,अभी कहा हो तुम दोनों ?”

गुड्डू ने जैसे ही सुना उसकी जान में जान आयी। गुड्डू गोलू को लेकर जा रहा था सोनू भैया की दी लोकेशन पर और गोलू का घर था वहा से काफी दूर तो आने जाने में ही घंटा भर खराब होगा सोचकर गुड्डू ने लवली से कहा,”भैया ! हमहू बहुते बड़ी मुसीबत मा है , हम मिलकर आपको सब बताते है बस आप हम पे एक ठो अहसान कर दीजिये,,,,,,,,!!”
“बताओ का करना है ?”,लवली ने कहा

“हम आपको एक ठो पता भेज रहे है जे गाडी लेकर जल्दी से वहा पहुँच जाओ भैया,,,,,,,,,,,,!!!!”,गुड्डू ने कहा तो बगल में खड़े गोलू ने गुड्डू के कंधे पर मारकर दबे स्वर में कहा,”पिताजी पिताजी”
“अब तुमको पिताजी से का काम है ?”,गुड्डू ने झुंझलाकर कहा
“अरे गुड्डू भैया उनसे कहो पिताजी की इज्जत,,,,,,,,अरे कैसे समझाए ?”,गोलू ने भी झुंझलाकर कहा
“ल्यो एक काम करो तुम्ही बोल दयो”,गुड्डू ने गुस्से से फोन गोलू की तरफ बढाकर कहा

“नहीं नाही आप बात करो”,गोलू ने कहा
“नहीं नहीं ल्यो तुम्ही बोल ल्यो सब , बात कर रहे है ना करने तो दो”,गुड्डू ने भड़ककर कहा तो गोलू ने कुछ नहीं कहा बस गुड्डू से आगे बात करने को कहा
गुड्डू ने फोन कान से लगाया और कहा,”हाँ भैया ! हम आपको जो एड्रेस भेज रहे है प्लीज जे गाड़ी और सामान वहा लेकर आ जाईये , पिताजी , पिताजी की इज्जत का सवाल है भैया,,,,,,,,,,,!!!”

गुड्डू के कहने पर लवली भले ही उसकी बात नहीं मानता लेकिन जैसे ही उसने पिताजी सुना तो परेशान हो गया और कहा,”ठीक है तुमहू एड्रेस भेजो हमहू पहुंचते है,,,,,,,,,,,,!!!”
लवली ने फोन जेब में रखा और सबसे पहले अपनी गाड़ी को लॉक किया। वह गुड्डू की गाड़ी में आ बैठा और उसे स्टार्ट कर वहा से निकल गया।

गुड्डू ने लवली को लोकेशन भेजी और फोन जेब में रख लिया उसने गोलू की तरफ देखकर कहा,”हमने लवली भैया को एड्रेस भेज दिया है वो लोकेशन पर पहुँच जायेंगे हम भी जे बाइक सही करवाकर सीधा वही चलते है,,,,,,,,,,और एक बार साला तुम्हरा जे मंगल फूफा हमाये हाथ लग जाए छोले कुलचे की कसम ओह्ह्ह की बत्ती नहीं बनायीं ना तो हमाओ नाम भी गुड्डू मिश्रा नाही”

“बत्ती बनाओ चाहे चाय पत्ती बनाओ गुडू भैया हमायी जिंदगी मा तो जबसे मंगल फूफा आये है तबसे सब अमंगल ही हो रहा है”,गोलू ने मायूसी से कहा और गुड्डू के साथ आगे बढ़ गया।

( गुप्ताइन के सामने एक बार फिर खुद को सही साबित कैसे करेंगे गज्जू गुप्ता ? फुलवारी के चक्कर में आखिर कितने दुश्मन बनाएंगे मंगल फूफा ? क्या लवली वक्त से पहुँच पायेगा लोकेशन पर या बीच में होगा फिर कोई कांड ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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