Pasandida Aurat Season 2 – 16
Pasandida Aurat Season 2 – 16

पृथ्वी अपने फ्लेट से निकला और सीधा जा पहुंचा अपने घर , पृथ्वी अंदर आया। खानदान के बाकी लोग भी आज यही मौजूद थे और पृथ्वी को लेकर रवि जी-लता से बात करने आये थे बस रवि जी अभी आये नहीं थे इसलिए सब उनका इंतजार कर रहे थे। नीलम भुआ लता से कुछ बात कर रही थी। लक्षित ने जैसे ही पृथ्वी को देखा तो लता से कहा,”आई ! दादा आये है”
पृथ्वी को घर की चौखट पर देखकर सब उसे देखने लगे किसी के चेहरे पर गुस्से के भाव थे तो किसी के चेहरे पर शिकायत के भाव थे लेकिन किसी ने कुछ कहा नहीं। लता नीलम को साइड कर पृथ्वी की तरफ आयी और गुस्से से कहा,”अब यहाँ क्या लेने आये हो ? तुमने तो इस घर से रिश्ता उसी दिन तोड़ दिया था जिस दिन उस लड़की को अपनी जिंदगी में शामिल किया था। अब क्यों आये हो यहाँ ?”
“समझ आ गया पृथ्वी परिवार के बिना रहना कितना मुश्किल है , अगर तुम उस लड़की को छोड़कर आये हो तो तुम्हे यहाँ देखकर अच्छा लगा,,,,,,,,,,,बहुत जल्दी तुमने सही फैसला कर लिया”,बड़े पापा ने कहा
“अरे मैंने तो पहले ही कहा था ये भागकर शादी करने में कुछ नहीं रखा , दो दिन में प्यार खत्म हो जाता है और फिर सबके असली चेहरे सामने आते है,,,,,,,!!”.चाचा ने कहा
“पृथ्वी ! अभी भी देर नहीं हुई है बेटा , वापस आ जाओ”,बड़ी मम्मी ने कहा
“चुप क्यों हो जवाब दो , क्यों आये हो यहाँ ?”,लता ने गुस्से से चिल्लाकर कहा
“ये सब क्या है आई , आपने मुझे बाबा की जायदाद के पेपर्स क्यों भेजे ?”,पृथ्वी ने अपनी चुप्पी तोड़ी
“ताकि तुम ये फैसला कर सको कि तुम्हे अपने बाबा की जायदाद में से हिस्सा चाहिए या फिर वो लड़की,,,,,,,,अगर तुम्हे वो लड़की चाहिए तो फिर इन पेपर्स पर साइन करो और छोड़ दो अपने बाबा की प्रॉपर्टी , ये जो कुछ है वो लक्षित का हो जाएगा”,नीलम भुआ ने कहा
पृथ्वी ने सुना गुस्से से कहा,”आप लोग इतना कैसे गिर सकते है आखिर अवनि ने आप लोगो का क्या बिगाड़ा है ?
“पृथ्वी ! तुम उस लड़की के लिए अपनी आई से बदतमीजी कर रहे हो ,, शर्म भूल गए हो या लता के साथ अपना रिश्ता ?”,बड़े पापा ने गुस्से से कहा
“ना मैं अपनी शर्म भुला हूँ ना ही आप सब के साथ अपना रिश्ता पर लगता है आप लोग इंसानियत भूल चुके है , आप भूल चुके है कि मैं इस घर का बड़ा बेटा हूँ , इस खानदान का अंश हूँ,,,,,,,,,,आई ने मुझे ये पेपर भिजवाए और कहा मैं अवनि और इनमे से किसी एक को चुन लू,,,,,!!”,पृथ्वी ने तकलीफभरे स्वर में कहा
अगर वो लड़की तुम्हारे लिए इतनी इम्पोर्टेन्ट है तो फिर छोड़ दो ना अपने बाबा की प्रॉपर्टी , रहो जाकर उस लड़की के साथ”,चाचा ने पृथ्वी को फटकारते हुए कहा जिसे सुनकर पृथ्वी ने गुस्से से उन्हें देखा और कहा,”मैं पूछता हूँ आखिर इन सब में बार बार अवनि क्यों लाया जा रहा है ? आखिर उसने किया क्या है ?”
“उसने छीन लिया है तुम्हे मुझसे,,,,,,,,,!!”,लता ने दर्दभरे स्वर में कहा
पृथ्वी ने सुना तो रोआँसा हो गया और लता के पास आकर दुखी स्वर में कहा,”ऐसा कुछ नहीं है आई , मैं आज भी आपका पृथ्वी हूँ,,,,,,,मैं जानता हूँ मैंने आपसे किया वादा तोडा लेकिन मैं उसके बिना नहीं रह सकता आई,,,,,,,,,,मुझे समझने की कोशिश कीजिये”
“दूर रहो मुझसे,,,,,,,,वो लड़की तुम्हारे लिए तुम्हारी आई से बढ़कर हो गयी , इस घर से , इस परिवार से बढकर हो गयी। मैं उस लड़की को कभी माफ़ नहीं करुँगी पृथ्वी,,,,,,,!!!”,लता ने पृथ्वी को खुद से दूर धक्का देकर कहा
पृथ्वी का दिल टूटकर बिखर गया , उसकी आँखों में आँसू भर आये लेकिन उसने उन आँसुओ को अपनी आँखों में रोक लिया। अवनि को लेकर घरवालों की जो नफरत थी वह पृथ्वी नहीं देख पा रहा था।
“अरे ये सब नाटक है , अब तक तो तुम्हे अपने आई बाबा की और इस घर की याद नहीं आयी और आज जब ये पेपर मिले तो तुम दौड़े चले आये कि कही तुम्हारे हाथ से उनकी प्रॉपर्टी निकल ना जाये,,,,,,,,जरूर उस अवनि ने तुम्हे ये सिखाया होगा कि जाओ और जाकर पैर पकड़ लो अपने घरवालों के लेकिन इन पेपर्स पर साइन मत करना,,,,,,,,वो लड़की कितनी चालाक है ये सब जानते है,,,,,,,,,,अरे वो यहाँ आयी ही इसलिए है ताकि तुम्हारा इस्तेमाल करके अपने लिए इस शहर में जगह बना सके,,,,,,!!”,नीलम भुआ ने जहर उगलकर कहा
पृथ्वी इस वक्त कुछ कहने की हालत में नहीं था वह समझ चुका था कि वह अवनि को लेकर घरवालों के सामने जितनी सफाई देगा घरवाले अवनि को उतना ही गलत समझेंगे और उनकी नफरत कम होने के बजाय बढ़ती ही जाएगी। पृथ्वी को खामोश देखकर बड़े पापा ने कहा,”अगर वो लड़की तुम्हे प्यारी है तो फिर तुम क्यों आये हो यहाँ , क्यों तुमने इन पेपर्स पर साइन नहीं किये ?”
पृथ्वी ने नम आँखों से सबको देखा और फिर लिफाफे से पेपर बाहर निकालकर कहा,”मैं यहाँ प्रॉपर्टी के लिए नहीं आया , इसमें लिखा है प्रॉपर्टी के साथ मुझे आप सब से रिश्ता भी खत्म करना होगा मैं सिर्फ उस रिश्ते को बचाने के लिए आया हूँ,,,,,,,,,,,!!!”
“कौनसे रिश्ते की बात कर रहे हो तुम पृथ्वी वो रिश्ता जो सबके सामने तुमने बेइज्जत कर दिया,,,,,,,,हाह ! एक लड़की के लिए तुमने अपने माँ बाप को ठोकर मार दी,,,,,,,,,,,और अब रिश्ता बचाने आये हो”,लता ने गुस्से से कहा
अवनि मेरी पत्नी है आई और उसके लिए मुझे जो करना पड़े मैं करूंगा , आप चाहती है मैं इन पेपर्स पर साइन करू तो मैं जरूर करूंगा”,पृथ्वी ने कहा और स्टडी टेबल की तरफ बढ़ गया जहा पेन होलडर में पेन रखे थे।
“साइन करने से पहले एक बार अपनी अवनि से तो पूछ लो पृथ्वी कही प्रॉपर्टी हाथ से जाने के बाद वो भी तुम्हे ना छोड़ दे,,,,,,,,फिर तो तुम ना घर के रहोगे ना घाट के”,नीलम भुआ ने ताना मारकर कहा
पृथ्वी ने पेपर्स पर साइन किये और सबकी तरफ चला आया। उसने एक नजर नीलम को देखा और कहा,”अगर इस प्रॉपर्टी के लिए अवनि ने मुझे छोड़ दिया तो मैं समझूंगा मेरा प्यार झूठा था और इस दुनिया में मोहब्बत नाम की कोई चीज नहीं होती”
पृथ्वी की बात सुनकर लता उसे देखने लगी , एक लड़की पर आखिर पृथ्वी को इतना यकीन क्यों था लता नहीं जानती थी ? उन्होंने कुछ नहीं कहा बस पृथ्वी को देखती रही। पृथ्वी ने आगे बढ़कर पेपर्स लता को दिए और वहा से चला गया।
जैसे ही पृथ्वी घर से बाहर निकला उसकी हिम्मत टूट गयी और आँखों में भरे आँसू बह गए। चलते चलते पृथ्वी ने जैकेट की बाजु से अपनी नम आँखों को पोछा और आगे बढ़ गया। सामने से आते रवि जी की नजर पृथ्वी पर पड़ी। उसे यहाँ देखकर वे हैरान थे लेकिन वे पृथ्वी को रोकते या कुछ पूछते इस से पहले पृथ्वी वहा से निकल गया। रवि जी घर के अंदर आये तो सभी घरवालों को वहा देखकर और ज्यादा हैरान हुए और कहा,”पृथ्वी यहाँ क्यों आया था ? आप सब लोग इतना परेशान क्यों है , उसने यहाँ आकर फिर से कोई तमाशा किया क्या ?”
रवि जी की बात का किसी ने कोई जवाब नहीं दिया तो वे लता के पास आये , वे लता से कुछ पूछते इस से पहले ही उन्हें लता के हाथ में पेपर्स दिखे उन्होंने वो पेपर्स लिए और पढ़ने लगे। जैसे जैसे रवि जी ने उन पेपर्स को पढ़ा उनके चेहरे के भाव बदलते गए। रवि जी ने सभी पेपर्स देखे और आखिर में पृथ्वी के साइन देखे तो उन्हें धक्का लगा। उन्होंने लता और बाकी सबको देखकर गुस्से से कहा,”आप सब लोगो का दिमाग खराब हो गया है क्या , ये सब क्या है ?”
“रवि ये तुम्हारी प्रॉपर्टी के पेपर्स है , सबने मिलकर फैसला किया कि पृथ्वी से बात करे अगर उसे तुम्हारी प्रॉपर्टी में हिस्सा चाहिए तो उसे उस लड़की को छोड़ना होगा,,,,,,,,!!”,बड़े पापा ने कहा
“पूरी सोसायटी में ये बात आग की तरह फ़ैल चुकी है कि पृथ्वी ने शादी कर ली , जो भी मिल रहा है इसी बारे में पूछ रहा है सोसायटी में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है,,,,,,,,,उस लड़की को तो यहाँ से जाना ही होगा दादा और इस से बेहतर तरीका और कुछ नहीं ,, जब उसे पता चलेगा पृथ्वी के पास कोई प्रॉपर्टी नहीं है तो वह खुद ही चली जाएगी”,चाचा ने कहा
“तुम सब क्या पागल हो गए हो ? ऐसा करने से क्या पृथ्वी उस लड़की को छोड़ देगा,,,,,,,,हाँ उसने गलती की है लेकिन क्या ये सही तरीका है उसे उसकी गलती समझाने का , किस हक़ से किस हक़ से तुम सबने ये किया हाँ ? वो चाहे इस घर में रहे या ना रहे वो हमेशा इस घर का बड़ा बेटा रहेगा,,,,,,,!!”,रवि जी ने गुस्से से कहा तो बड़े पापा और चाचा को अपनी गलती का अहसास हुआ। पृथ्वी को वापस घर लाने के लिए ये सब किया गया और सब उलटा हो गया।
अवनि के लिए पृथ्वी अपने घरवालों को पहले ही छोड़ चुका था और आज उसने रवि जी की जायदाद को भी लात मार दी।
“लेकिन दादा,,,,,,!!!”,नीलम ने आगे आकर रवि जी को समझाने की कोशिश की लेकिन रवि जी इस वक्त दुःख में थे और साथ ही गुस्से में भी उन्होंने गुस्से से कहा,”लेकिन क्या नीलम ? तुम सबको लगता ये करके तुम लोग पृथ्वी को वापस ले आओगे नहीं तुम सब उसे इस घर से इस परिवार से और दूर कर दोगे ,, मेरी जायदाद का लालच ना पृथ्वी को है ना उसकी चुनी हुई लड़की को ,
अरे दुःख तो इस बात का है कि इसमें ये लिखा है कि आज के बाद उसका इस घर पर , हम सब पर कोई हक़ नहीं रहेगा ,, हम सब से कोई रिश्ता नहीं रहेगा,,,,,,,,,,,,वो तो बच्चा है जिद कर बैठा है लेकिन आप सब लोग , आप सब लोग तो समझदार है , जिम्मेदार है फिर आप सब इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकते है ? उसे इस घर से जाने को कैसे कह सकते है आप लोग ?”
“क्योकि उसका अब इस घर से कोई रिश्ता नहीं है , एक लड़की के लिए उसने हम सबको ठोकर मारी है देखना वो लड़की ही उसे ठोकर मारकर चली जाएगी”,लता ने कड़वाहट भरे स्वर में कहा
रवि जी ने सुना तो लता के सामने आये और कहा,”अगर वो पृथ्वी को ठोकर मार भी दे तो उसे सम्हालने के लिए हम सब है लता लेकिन अगर पृथ्वी ने उसे छोड़ दिया तो उसे सम्हालने वाला कौन है कभी सोचा है तुमने ?”
“मेरी बला से वो मर जाए”,लता ने गुस्से से कहा
रवि जी ने सुना तो उनका दिल टूट गया उन्होंने अपने कदम पीछे ले लिए और रोआँसा होकर कहा,”एक माँ होकर तुम अपने दिल में इतनी कड़वाहट कैसे रख सकती हो लता ? आज पहली बार पृथ्वी की आँखों में आँसू देखे है मैंने क्या उसे देखकर तुम्हारा दिल नहीं पसीजा , हाह ! मैं भी किसे समझा रहा हूँ पत्थर हो चुकी हो तुम लता पत्थर हो चुकी हो”
कहते हुए रवि ने अपने हाथो को टेबल पर रखा और सर झुका लिया। लक्षित ने अपने बाबा को टूटते देखा तो उनके पास आया और कहा,”बाबा ! बाबा आप परेशान मत होईये सब ठीक हो जायेगा”
रवि जी ने अपनी नम आँखों को पोछा और पलटकर उन पेपर्स को सबके सामने फाड़ते हुए कहा,”पृथ्वी इस घर का बेटा है बेशक उसने गलत किया लेकिन उसकी गलती की मैं उसे इतनी बड़ी सजा कभी नहीं दूंगा,,,,,,वो मेरा बेटा है और मेरे दोनों बच्चो का मुझ पर बराबर हक़ है,,,,,,,,,,!!
लता अवाक् सी रवि जी को देखने लगी। नीलम ने सुना तो सबको वहा से जाने का इशारा किया और खुद लता को लेकर अंदर कमरे में चली गयी। रवि जी सोफे पर आ बैठे। रवि जी पृथ्वी के फैसले से गुस्सा थे , उस से और अवनि से नाराज थे लेकिन उन्होंने कभी पृथ्वी से रिश्ता खत्म करने का नहीं सोचा। रवि जी अपना सर पकड़कर बैठ गए और लक्षित उदास सा किचन में जाकर उनके लिए पानी ले आया।
अपने कमरे में बैठी लता आँसू बहा रही थी। जो कुछ हो रहा था उसके लिए लता ने एक बार फिर अवनि को जिम्मेदार ठहराया। नीलम ने उन्हें आराम करने को कहा और कमरे से बाहर चली आयी। रवि जी को सर पकडे बैठे देखकर नीलम को अच्छा नहीं लगा। घर का माहौल काफी बिगड़ चुका था। नीलम चुपचाप वहा से निकल गयी।
अपने घर से निकला पृथ्वी फ्लेट पर ना जाकर सोसायटी के गार्डन में चला आया। आज जो कुछ हुआ उसे सोचकर पृथ्वी का दिल अंदर ही अंदर टूटता जा रहा था। लता उसे खुद से ऐसे दूर कर देगी पृथ्वी ने कभी सोचा नहीं था। उसे लगा वह धीरे धीरे सबको मना लेगा लेकिन घरवालों ने तो उस से रिश्ता ही खत्म कर दिया। उसे घर और रवि जी की जायदाद दोनों से बेदखल कर दिया। इस से भी ज्यादा दुःख पृथ्वी को इस बात का था कि सब अवनि को दोष दे रहे थे , उसे गलत समझ रहे थे। पृथ्वी की आँखों में नमी थी वह खाली पड़ी बेंच पर आ बैठा।
आज पृथ्वी काफी बेबस और लाचार महसूस कर रहा था। उसे अपने घरवालों को तो मनाना ही था साथ ही साथ उसे अवनि के दिल में भी खुद को लेकर , इस शादी को लेकर विश्वास जगाना था जिस से अवनि को कभी ये ना लगे कि उसने पृथ्वी को चुनकर कोई गलती की है
पृथ्वी का मन भारी होने लगा वह ये सब के बारे में सोच ही रहा था कि तभी हिमांशु भैया आकर उसके बगल में बैठे और कहा,”तुम घर नहीं गए ?”
“घर से तो आप सबने निकाल ही दिया है”,पृथ्वी ने उदासी भरे स्वर में कहा
“मैं तुम्हारे फ्लेट की बात कर रहा हूँ , अवनि अकेली होगी तुम्हे वहा ना देखकर परेशान होगी”,हिमांशु ने कहा
पृथ्वी एकदम से हिमांशु की तरफ पलटा , आँखों में नमी और चेहरे पर बेचैनी के भाव लाकर कहा,”दादा ! मैं इतना बुरा लड़का हूँ क्या ?”
पृथ्वी की आँखों में नमी देखकर हिमांशु का मन भी उदास हो गया और उसने कहा,”किसने कहा तुम बुरे हो ? तुम अच्छे लड़के हो पृथ्वी फिलहाल तुम्हारा वक्त खराब चल रहा है बस तुम हार मत मानना , सब ठीक हो जायेगा”
पृथ्वी ने सुना तो सामने देखने लगा और तकलीफभरे स्वर में कहा,”हाह ! ठीक ही तो नहीं हो रहा दादा , कोई मुझे नहीं समझ रहा , कोई समझना चाहता ही नहीं और आई उन्होंने तो आज ये तक कह दिया कि मैं उनसे सारे रिश्ते ही खत्म कर दू,,,,,,,,!!!”:
हिमांशु पृथ्वी से कुछ कहता इस से पहले पृथ्वी उठा और वहा से चला गया।
पृथ्वी थके कदमो से अपने फ्लेट के दरवाजे के सामने आया। उसकी आँखों में अभी भी नमी थी और उदासी चेहरे से टपक रही थी। उसने दरवाजा खोला और अंदर चला आया। अवनि उठ चुकी थी और उसने पृथ्वी का लिखा नोट भी पढ़ लिया था इसलिए वह सोफे के किनारे पर बैठी पृथ्वी का इंतजार कर रही थी। पृथ्वी को देखते ही अवनि उठी और उसके सामने आकर कहा,”मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी”
पृथ्वी ने कुछ नहीं कहा , वह अवनि को सब बताकर उसे परेशान करना नहीं चाहता था। पृथ्वी सोफे पर आ बैठा , अवनि भी कुछ दूरी बनाकर उसके बगल में आ बैठी और कहा,”क्या हुआ पृथ्वी , तुम ठीक हो ना ?”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और बुझे स्वर में कहा,”कुछ नहीं बस थोड़ा थक गया हूँ”
अवनि ने कोई जवाब नहीं दिया बल्कि हल्का सा मुस्कुराते हुए पृथ्वी को देखकर अपनी गोद को थपथपाया और पृथ्वी से वहा अपनी गोद में सर रखने को कहा।
पृथ्वी ने देखा तो उसका दिल भर आया उसने अपना सर अवनि की गोद में रखा और आँखे मूंद ली। अवनि धीरे धीरे उसका कंधा थपथपाने लगे। अवनि की छुअन से पृथ्वी के आँसू पिघलकर उसकी आँखों से बह गए।
( घरवालों से सारे रिश्ते खत्म कर क्या पृथ्वी अपने प्यार को सही साबित कर पायेगा ? क्या रवि जी को अहसास हो चुका है अवनि और पृथ्वी के प्यार का अहसास ? क्या अवनि बिन कहे महसूस कर रही है पृथ्वी का दर्द ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Arey yr yeh to bahut galat ho gaya…na chahate huye bhi Avni fir se sabki nazro m villain ban gai thi…aur Lata ji ne nazar se wo gir chuki thi…lakin Ravi ji ne sahi Kiya jo paper ko fad kar fek diya…wo samaj rhe hai Prithvi ko…kash baki ghar wale bhi Prithvi ko samjhne…lakin papers wali Avni ko pta nhi chalni chahiye…nhi to wo fir se khud ko doshi maan lengi
🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺