Pasandida Aurat Season 2 – 11
Pasandida Aurat Season 2 – 11

पृथ्वी अपने काम में ऐसा बिजी हुआ कि उसे वक्त का ध्यान ही नहीं रहा। अवनि तब तक दोनों के लिए खाना बना चुकी थी। पृथ्वी ने जैसे ही लेपटॉप बंद किया अवनि ने उस से कहा,”तुम जाकर हाथ मुँह धो लो मैं खाना लगा देती हूँ”
“हम्म्म,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और वाशबेसिन की तरफ बढ़ गया। अवनि ने खाना लगा दिया पृथ्वी मुस्कुराते हुए आकर सोफे पर बैठा लेकिन अगले ही पल उसके होंठो से मुस्कुराहट गायब हो गयी और उसे अपने ही कहे शब्द याद आ गए “जो तुम प्यार से खिला दो,,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने देखा उसके सामने रखी प्लेट में दाल , चपाती और साथ में गंवार फली की सब्जी थी। ये देखकर पृथ्वी मन ही मन रो पड़ा लेकिन अवनि के सामने अपनी भावनाये जाहिर नहीं होने दी।
अवनि ने पृथ्वी को ख़ामोशी देखा तो कहा,”वो सबसे जल्दी बनने वाली सब्जी यही थी इसलिए मैंने,,,,,,,,मैं जानती हूँ तुम्हे ये पसंद नहीं है,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने इतना ही कहा कि पृथ्वी ने प्लेट अपनी तरफ खिसकाई और एक निवाला तोड़कर मुँह में रख लिया। पृथ्वी ने खाया और कहा,”अच्छा बना है , बहुत अच्छा बना है,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा उठी , पृथ्वी को उसका बनाया खाना पसंद आया उसके लिए यही काफी था। उसने भी अपनी प्लेट में खाना लिया और खाने लगी।
अवनि के बनाये खाने के हर एक निवाले में पृथ्वी को अपनी आई के हाथो से बने खाने का स्वाद आ रहा था। खाते खाते उसे लता की याद आने लगी जब पृथ्वी उनके बनाये खाने में नखरे दिखाता था और वे कैसे डाँटकर , मनाकर प्यार से अपने हाथो से उसे जबरदस्ती खिला दिया करती थी।
उसका मन भारी होने लगा। वह खाते खाते रुक गया , अवनि की नजर पृथ्वी पर पड़ी तो उसने पूछा,”क्या हुआ पृथ्वी ?”
“कुछ नहीं , आप बिल्कुल आई की तरह खाना बनाती है”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो वह समझ गयी कि पृथ्वी को अपनी आई की याद आ रही है उसने कहा,”मैं समझ सकती हु पृथ्वी और तुम बहुत किस्मतवाले हो कि तुमने अपनी आई के हाथो से बना खाना खाया है , मुझे तो याद भी नहीं है कि मेरी माँ दिखती कैसी थी ? उनके हाथो से बना खाना खाना तो नसीब की बात है। हाँ तस्वीरों में बहुत बार देखा है उन्हें,,,,,,,,,,,!!”
अवनि की बात सुनकर पृथ्वी और ज्यादा दुखी हो गया , उसे याद आया कि अवनि की जिंदगी में तो उस से भी ज्यादा दुःख थे। उसने अपनी उदासी को अपनी मुस्कुराहट के पीछे छुपाया और कहा,”आपने अपनी माँ के हाथ से बना खाना नहीं खाया ना , कोई बात नहीं कहते है कि दुनिया की हर माँ के हाथो से खाने का स्वाद एक जैसा होता है,,,,,,,,,,,जब आई का गुस्सा आपके लिए कम हो जाएगा ना तब वो खुद आपको अपने हाथो से बनाकर खिलाएगी,,,,,,,,,,,,,,बस आप थोड़ा सब्र रखना वो दिन जरूर आएगा,,,,,,,,,!!”
“मैं उस दिन का इंतजार करुँगी पृथ्वी,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और फिर दोनों खाना खाने लगे। खाते खाते पृथ्वी को कुछ याद आया और उसने अवनि से कहा,”आज तो आपकी पहली रसोई थी”
अवनि ने सुना तो उदासी से पृथ्वी की तरफ देखने लगी। अवनि को याद आया शादी के बाद पहली रसोई में रस्म के रस्म के तौर पर ससुराल वालो के लिए कुछ मीठा बनाना होता है लेकिन अवनि की शादी ऐसे हालातों में हुई कि वह कोई रस्म निभाना तो दूर अपने ससुराल वालो की नजर में ही बुरी बन गयी।
अवनि के चेहरे पर उदासी देखकर पृथ्वी समझ गया और कहा,”अरे आप उदास क्यों हो गयी मैंने तो इसलिए पूछा क्योकि ये खाना बहुत अच्छा बना है,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो फीका सा मुस्कुराई और खाना खाने लगी। खाना खाकर अवनि ने बर्तन धोये किचन साफ किया और फिर कमरे में चली आयी। पृथ्वी अवनि से बात करना चाहता था लेकिन अवनि आज साफ सफाई और बाहर घुमकर इतना थक चुकी थी कि जल्दी ही उसे नींद आ गयी।
पृथ्वी जब कमरे में आया तो अवनि को सोया देखकर वापस जाने लगा। जाते जाते वह रुका और वापस अवनि की तरफ चला आया। उसने कंबल उठायी और धीरे से अवनि को ओढ़ा दी। पृथ्वी वही खड़े होकर अवनि के मासूम से चेहरे को देखता रहा और फिर कमरे की लाइट बंद कर बाहर चला आया। उसने दरवाजा बंद किया और हॉल में चला आया। पृथ्वी के पास करने के लिए ऑफिस का काम था इसलिए वह हॉल में बैठकर अपने ऑफिस का काम करने लगा। काम करते करते रात के 2 बज गए लेकिन पृथ्वी की आँखों में नींद नहीं थी।
उसने लेपटॉप बंद किया और अपनी गर्दन पीछे झुका ली। सहसा ही उसे अपनी कही बात याद आयी “आज आपकी पहली रसोई है ना ?”
पृथ्वी सीधा बैठा और खुद में ही बड़बड़ाने लगा,”हाह ! ये पूछकर अवनि को हर्ट करने की क्या जरूरत थी , जिन हालातों में ये शादी हुई है क्या उसे ये सब याद रहेगा , याद रहा भी तो ये सब रस्मे निभाने का किसका दिल करेगा ? और फिर यहाँ है भी कौन ये सब रस्मे निभाने के लिए,,,,,,,वैसे ये शादी के बाद ये पहली रसोई में होता क्या है ? अह्ह्ह्ह तुम सच में डफर हो पृथ्वी , शादी कर ली लेकिन शादी के बाद क्या होता है तुम्हे इसका ABC भी नहीं पता , ऐसे बनोगे अच्छे पति ?,,,,,,,,,!!!!”
पृथ्वी ने टेबल पर पड़े अपने लेपटॉप को खोला और उसमे कुछ सर्च करने लगा। पूरा एक घंटा ढूंढने के बाद पृथ्वी को गूगल पर वो सब जानकारी मिल गयी जो उसे चाहिए थी। 3 बजते बजते पृथ्वी को उबासी आने लगी और वह लेपटॉप बंद करके लेट गया। कुछ देर बाद ही उसे नींद आ गयी।
सुबह अवनि की आँख खुली उसने टेबल पर रखी घडी में समय देखा , सुबह के 6 बज रहे थे। अवनि उठी अपने बालों को समेटा और बिस्तर सही किया। तकियो को सही जमाया और कम्बल तह करके रख दी। उसने अपना दुपट्टा उठाया और कंधो पर डालकर कमरे से बाहर चली आयी। कमरे से बाहर आते हुए अवनि की नजर हॉल में सोफे पर सोते पृथ्वी पर चली गयी जो कि सिकुड़ कर सो रहा हालाँकि मुंबई में इतनी ठंड नहीं होती लेकिन सुबह सुबह बालकनी से आती हवा से हॉल में ठण्ड महसूस हो रही थी।
अवनि अंदर गयी और तह की कम्बल लेकर हॉल में चली आयी। उसने कम्बल खोलकर सोये हुए पृथ्वी को ओढ़ा दी और जाने लगी तो अवनि ने देखा पृथ्वी के बाल बिखरकर उसके ललाट पर आ रहे है और बाल इतने लम्बे है कि कुछ तो आँखों तक आ रहे है।
अवनि पृथ्वी की तरफ आयी , घुटनो के बल नीचे बैठी और एकटक पृथ्वी को देखने लगी। सोते हुए पृथ्वी कितना मासूम और प्यारा लग रहा था उस पर उसके बिखरे बाल,,,,,,,,अवनि ने अपना हाथ पृथ्वी की तरफ बढ़ाया और धीरे से उंगलियों से पृथ्वी के ललाट के बालों को साइड कर दिया। पृथ्वी ने करवट ली और अवनि की तरफ मुँह करके सो गया। उसकी गर्म साँसो का शोर अवनि सुन पा रही थी। वह उठी और वहा से चली गयी।
वाशबेसिन के सामने आकर अवनि ने मुँह धोया ब्रश किया और फिर किचन में चली आयी। फ्रीज में दूध रखा था अवनि ने उसी से दोनों के लिए चाय बनाई और लेकिन हॉल में चली आयी। पृथ्वी अभी तक सो रहा था ये देखकर अवनि ने चाय टेबल पर रखी और पृथ्वी के पास आकर कहा,”पृथ्वी , पृथ्वी”
पृथ्वी गहरी नींद में सोया हुआ था उसे अवनि की आवाज जैसे सुनाई ही नहीं दी , अवनि ने देखा पृथ्वी नहीं उठ रहा है तो उसने धीरे से पृथ्वी का कंधा थपथपाया।
नींद में पृथ्वी को किसी का हाथ अपने कंधे पर महसूस हुआ तो उसने आँखे मूँदे मूँदे अवनि की कलाई पकड़ी और उसे अवनि तरफ खींच लिया। लड़खड़ाकर अवनि पृथ्वी पर आ गिरी। पृथ्वी ने आँखे खोली और जैसे ही अवनि को अपने पास देखा वह हड़बड़ाकर उठा और अवनि से दूर होकर कहा,”आई ऍम सो सॉरी , वो मैं , मैंने ध्यान नहीं दिया आप है,,,,,,,,,,,आप मुझे गलत मत समझना मैंने जान बूझकर नहीं किया वो गलती से,,,,,,,,,,मैं नींद में था”
पृथ्वी को सफाई देते देखकर अवनि उठी और नजरे झुकाकर कहा,”इट्स ओके,,,,,,,,चाय वहा रखी है”
कहकर अवनि ने अपना कप उठाया और वहा से चली गयी। पृथ्वी ने देखा तो अपना हाथ जोर से अपने ललाट पर मारा , आखिर वह अनजाने में भी ऐसी गलती कैसे कर सकता है ? पृथ्वी बड़बड़ाया,”ये मैंने क्या किया ? पता नहीं अवनि अब मेरे बारे में क्या सोच रही होगी ?”
“क्या सोचेगी ? तुम उसके पति हो तुम्हे उसके करीब जाने का हक़ है”,दिमाग से एक आवाज आयी
“पति हो तो क्या ऐसा करोगे ? और हक़ का मतलब ये नहीं तुम बिना उसकी मर्जी के उसका हाथ पकडकर उसे खींच लो”,दिल ने पृथ्वी को फटकार लगाकर कहा
“हाथ ही तो पकड़ा क्या गलत कर दिया ? वैसे भी तुम नींद में थे”,दिमाग ने पृथ्वी की साइड लेकर कहा
“अच्छा नींद में थे तो कुछ भी करोगे , कही अवनि ने तुम्हे गलत समझ लिया तो,,,,,,,,!!”,दिल ने पृथ्वी को चेताया
“क्या गलत समझेगी ? उसने भी देखा कि तुम नींद में थे और वैसे भी बीवी का हाथ पकड़ना गलत नहीं होता”,दिमाग ने कहा
“गलत होता है , बिना पत्नी की सहमति के उसके करीब जाना भी गलत है,,,,,,तुम इसकी बात मत सुनो पृथ्वी और जाकर अवनि से माफ़ी माँगो”,दिल ने कहा
“हाँ भाई तू मेरी मत सुन इसकी सुन और इसकी सुनेगा ना बुढ़ापा आ जायेगा और तू अवनि से परमिशन लेता ही रह जाएगा”,दिमाग ने कहा
“तो क्या अब ये अवनि पर हक़ जताने लगे ?”,दिल ने कहा
“क्यों नहीं जाता सकता ?”,दिमाग गुर्राया
“नहीं जाता सकता”,दिल ने भी तुनककर कहा
अब तक पृथ्वी दिल और दिमाग की इस जंग में इतना उलझ गया कि एकदम से चिल्लाया,”चुप करो तुम दोनों”
पृथ्वी के इतना कहते हुए दिल और दिमाग दोनों शांत हो गए और बालकनी में खड़ी अवनि ने पलटकर कहा,”क्या हुआ तुम्हे ? तुम किसे चुप रहने को कह रहे हो ?”
पृथ्वी को होश आया उसने अपनी चाय का कप उठाया और कहा,”अह्ह्ह ये मच्छर मेरे कान के पास आखर भिनभिना रहे थे तो मैं इन्हे ही कह रहा था चुप रहने को,,,,,,,!!”
“तुम मच्छरों से भी बात कर लेते हो ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ आते हुए कहा क्योकि वह अपनी चाय खत्म कर चुकी थी। पृथ्वी ने एक घूंठ चाय का भरा और कहा,”हाँ अब इंसानो को तो जल्दी सोने की आदत होती है इसलिए मैं कभी कभार इन दीवारों , आसमान , चाँद , फर्नीचर , किताबो और मक्खी मच्छरों से बाते कर लेता हूँ,,,,,,,,,,
ये बेचारे कुछ बोलते तो नहीं है पर हाँ ख़ामोशी से मुझे सुन जरूर लेते है”
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि को अहसास हुआ कि पृथ्वी उसे ही सुना रहा है क्योकि कल अवनि पृथ्वी से बात किये बिना ही जाकर सो गयी थी !
अवनि कुछ कहती इस से पहले पृथ्वी ने कहा,”आप जाकर तैयार हो जाईये”
“हम कही जा रहे है ?”,अवनि ने पूछा
“अह्ह्ह्ह नहीं बस मुझे आपसे कुछ काम है , कुछ बहुत जरुरी काम तो आप नहाकर तैयार हो जाईये , मैं जरा नीचे जाकर आया”,पृथ्वी ने अपनी चाय खत्म करते हुए कहा और कप रखकर दरवाजे की तरफ बढ़ गया। अवनि भी ख़ामोशी से कमरे की तरफ जाने लगी तो पृथ्वी ने कहा,”अवनि,,,,,,,!!”
“हम्म्म,,,,,,,!”,अवनि ने पलटकर कहा
“अगर आपको ठीक लगे तो क्या आप आज रेड वाला सूट पहनेंगी ?”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने कुछ नहीं कहा बस अंदर चली गयी और पृथ्वी मायूस होकर दरवाजे की तरफ पलट गया।
लिफ्ट में आकर पृथ्वी बड़बड़ाने लगा,”तुम्हे अवनि पर अपनी पसंद नापसंद ऐसे थोपनी नहीं चाहिए , उसका मन वो ग्रीन पहने वाइट पहने या रेड , तुम उसे नहीं बता सकते उसे क्या पहनना है,,,,,,,,ये टिपिकल हस्बेंड बनना बंद करो तुम , एक तो सुबह सुबह तुम उसे खींचकर पहले ही गलती कर चुके हो , अब पता नहीं वो तुम्हारे बारे में क्या सोच रही होगी ? लेकिन मैंने जान बूझकर नहीं किया,,,,,,,,,,, अह्ह्ह्ह ये सब बहुत मुश्किल होने वाला है पृथ्वी उपाध्याय तुम्हे अपनी भावनाओ पर कंट्रोल रखना चाहिए , अवनि से दूर रहो तुम समझे,,,,,,,,!!!
लिफ्ट नीचे आकर रुकी पृथ्वी बाहर आया और बिल्डिंग से निकल गया। सोसायटी के बाहर फूलवाले से पृथ्वी ने कुछ फूल लिए और वापस बिल्डिंग में चला आया। वह अपने फ्लेट में आया और तैयारियों मे लग गया।
अवनि तब तक नहा चुकी थी उसने कपडे पहने , बाल बनाये , आज उसने पहले ही अपनी माँग में सिंदूर भर लिया जिस से पृथ्वी फिर से उस पर ध्यान ना दे। मेकअप के नाम पर अवनि के पास ज्यादा कुछ नहीं था बस ललाट पर बिंदी , आँखों में काजल और होंठो पर हलकी लिपस्टिक लगाकर वह तैयार थी। उसने दुपट्टा लिया और अपने कंधे पर डाल लिया। पृथ्वी अपना काम खत्म कर हॉल में चला आया। रातभर जागने और सुबह जल्दी उठने की वजह से उसका बदन दर्द कर रहा था , उसने अंगड़ाई ली और जैसे ही पलटा कमरे से बाहर आती अवनि पर उसकी नजरे ठहर गयी।
अवनि को लाल रंग के सूट में देखकर पृथ्वी के होंठो पर मुस्कान तैर गयी और आँखे चमक उठी। अवनि बहुत सुंदर लग रही थी। पृथ्वी एकटक अवनि को देखता रहा तो अवनि उसके पास आयी और कहा,”तुमने मुझसे तैयार होने को कहा लेकिन तुम तैयार नहीं हुए ?’
“क्योकि पहली रसोई आपकी है मेरी नहीं नहीं”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए कहा
“मतलब ?”,अवनि को समझ नहीं आया उसने तो उसने कहा
“चलिए,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अपने दोनों हाथो को आगे करके अवनि से किचन में चलने का इशारा किया। हैरान परेशान सी अवनि आगे बढ़ी और जैसे ही किचन के दरवाजे पर पहुंची नीचे बिखरे फूलो की पत्तिया देखकर हैरान रह गयी उसने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”आज आपकी पहली रसोई है , मैंने सब सामान रखा है आपको बस कुछ मीठा बनाना है”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी को देखने लगी , अवनि को अपनी तरफ एकटक देखते पाकर पृथ्वी ने पलकें झुकाकर धीरे से कहा,”ऐसे मत देखिये मुझे कुछ कुछ होने लगता है,,,,,,,,इन्फेक्ट बहुत कुछ होने लगता है”
अवनि ने सुना तो अपनी नजरे पृथ्वी से हटा ली और अंदर चली आयी। अंदर किचन प्लेटफॉर्म को भी पृथ्वी ने बहुत अच्छे से सजाया था। वही पूजा की थाली रखी थी और गैस भी साथ सुथरा चमक रहा था। एक तरफ हलवा बनाने का सारा सामान रखा था और ये सब पृथ्वी ने किया। अवनि ने पलटकर दरवाजे पर खड़े पृथ्वी को देखा और कहा,”ये सब तुमने किया ?”
“हाँ,,,,,,ChatGpt की मदद से,,,,,,,आप जो रस्म है वो कीजिये”,पृथ्वी ने अपने हाथो को आपस में बांध दरवाजे से पीठ लगाकर कहा
अवनि मुस्कुराई , पृथ्वी उसके लिए ये सब कर रहा था जानकर ही अवनि को ख़ुशी महसूस हो रही थी। पृथ्वी अवनि को हर वो ख़ुशी देने की कोशिश कर रहा था जो वह अवनि को दे सकता था।
“तुम अंदर नहीं आओगे ?”,अवनि ने पूछा
“मेरा मन तो बहुत है लेकिन अगर मैं अंदर आया तो फिर आपका ध्यान हलवा बनाने से ज्यादा मुझ पर होगा और आपकी पहली रसोई खराब हो जाएगी,,,,,,इसलिए मैं यही ठीक हूँ,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपनी तारीफ करते हुए कहा
“तुम थोड़े से पागल हो क्या ?”,अवनि ने कहा
“हाँ , आपके प्यार में,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर कहा लेकिन अवनि को कुछ सुनाई नहीं दिया क्योकि पृथ्वी ने ये शब्द अपने मन में कहे थे जिन्हे सिर्फ वह सुन सकता था।
( क्या अवनि की जिंदगी में आएगा वो दिन जब लता अवनि को अपने हाथो से बना खाना खिलाएगी ? क्या अवनि के साथ रहते हुए पृथ्वी रख पायेगा अपनी भावनाओ पर काबू ? दिल और दिमाग की जंग में क्या कभी जीत पायेगा पृथ्वी का दिमाग ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

