Manmarjiyan Season 4 – 4
Manmarjiyan Season 4 – 4

गुड्डू और गोलू आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ को बस में बैठाकर मस्त अपना छोले कुलचे खा रहे थे कि तभी उनकी नजर पड़ी मंगल फूफा पर और दोनों उनकी तरफ चल पड़े। मंगल फूफा वही बाजार में फूलो की दुकान पर खड़े चुन चुन कर गुलाब के फूल ले रहे थे। गुड्डू उनके एक तरफ आ खड़ा हुआ
और दूसरी तरफ गोलू खड़ा हो गया दोनों ने एक साथ मंगल फूफा के कंधो पर अपनी अपनी बाँह रख दी।
अचानक गोलू गुड्डू को वहा देखकर मंगल फूफा के चेहरे पर हवईया उड़ने लगी और चेहरा सफ़ेद पड़ गया। उन्होंने हाथ में पकडे गुलाबों को नीचे रख दिया और कहा,”अरे गोलू-गुड्डू तुम दोनों हिया का कर रहे हो ?”
“जोन कांड तुमहू करने जा रहे हो ना फूफा ओह्ह ही देखने आये है”,गोलू ने अपनी भंव चढ़ाकर कहा
“कांड कौनसा कांड ? अरे हम तो बाजार मा कुछो सामान लाने के लिए आये रहय”,फूफा ने हकलाते हुए कहा
“अच्छा तो उह्ह सामान कही जे गुलाब के फूल तो नाही”,गुड्डू ने कहा
“अरे नहीं नहीं हमहू तो हिया से गुजर रहे थे तो फूलो की खुशबु ने हमाओ ध्यान खींच लेओ अपनी तरफ तो हमहू रूककर बस देखने लगे”,मंगल फूफा ने इधर उधर देखते हुए कहा
गोलू ने सुना तो फूफा की गर्दन को अपनी बाँह में दबोचा और कहा,”का फूफा हम और गुड्डू भैया तुमको पान का पत्ता दिख रहे है जो चुना लगा रहे हो ,, सच सच बताओ का कर रहे थे हिया , कही जे फूल फुलवारी के लिए तो नाही ?”
मंगल फूफा ने जब देखा कि गुड्डू गोलू को सब पता चल गया है तो उन्होंने कहा,”अब तुमसे का छुपाना गोलू , फुलवारी के लिए ही ले रहे थे उह्ह्ह बताए रही हमका कि गुलाब का फूल बहुते पसंद है ओह्ह का तो बस वही लेने चले आये ओह्ह के लिए,,,,,,,,,,,ए गोलू तुमहू किसी से कहना नहीं हाँ”
गोलू ने सुना तो उसे फूफा की बात पर यकीन नहीं हुआ और उसने हैरानी से कहा,”फुलवारी ने खुद कहा ?”
“माँ कसम”,मंगल फूफा ने चुटकी से अपनी गर्दन पकड़कर कहा
गोलू ने हैरानी से गुड्डू को देखा तो गुड्डू ने भी मुँह बनाकर कहा,”हमको नाही पता था गोलू जे फुलवारी को टेस्ट इत्तो ख़राब है”
“ख़राब है से का मतलब है तुम्हरा ? हमहू का इंसान नहीं है हमरे सीने मा का दिल नाही है,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने चिढ़कर कहा
“अरे अरे फूफा काहे गर्माते हो यार , हमको भी मालूम है तुम्हरे सीने मा दिल है पर तुम्हरा जे दिल ना बहुते गलत जगह पर आया है , उह्ह्ह यादववा को पता चला ना तो टाँगे काटकर और छोटा कर देंगे ,, ढाई फुट के फूफा कानपूर की गलियों मा घूमते का अच्छे लगेंगे”,गोलू ने फूफा को झिड़ककर कहा
“अरे इनको तो बाद मा देखेंगे पहिले गुप्ता जी की बत्ती बनाएंगे”,गुड्डू ने अपने बालों में हाथ घूमाते हुए कहा
गोलू ने सुना तो गुड्डू को धीरे से धक्का देकर कहा,”यादववा हमाये बाप की बत्ती काहे बनाएंगे गुड्डू भैया ?”
“धक्का काहे दिए बे ?”,गुड्डू ने भी गोलू को वापस धक्का देकर कहा अब गोलू बेचारा दुबला पतला लड़का और गुड्डू हट्टा कट्टा , उसका हाथ रहा भारी जैसे ही गोलू को लगा गोलू पीछे से गुजरती लड़की के गले जा पड़ा।
लड़की ने खींचकर एक चाँटा गोलू को मारा और गोलू जाकर गिरा फूलों की दुकान पर। उसने सामने पड़ा गुलाब उठाया और लड़की की तरफ बढ़ाकर कहा,”हैप्पी बड्डे”
लड़की ने फूल लिया और गोलू के मुँह पर फेंककर कहा,”अपनी अम्मा को जाकर कहना हैप्पी बड्डे,,,,,,,,,,,,!!!”
लड़की चली गयी और गुलाब का फूल आकर लगा गोलू की आँख में और वह चिल्लाया,”ए गुड्डू भैया हमायी आँख मा लग गयी यार,,,,,,,,,,!!”
“काहे छेड़ते हो परायी औरत को अब तो तुम्हरा ब्याह भी हो गवा है”,मंगल फूफा ने कहा
एक तो गोलू को आँख में लगने की वजह से पहले ही कुछ नहीं दिख रहा था ऊपर से मंगल फूफा की बात सुनकर वह और बिदक गया और उसने मंगल फूफा को ही पीट दिया। गुड्डू ने मंगल को गोलू से छुड़ाया तक तक बेचारे मंगल फूफा को दो चार घुसे पड़ चुके थे।
“अबे गोलू पगला गए हो , का कर रहे हो ?”,गुड्डू ने गोलू को मंगल से दूर करके कहा
“अरे यार गुड्डू भैया एक तो साला हमायी आँख मा इत्ती जोर की लगी ऊपर से जे बकैती कर रहे है हमाये साथ”,गोलू ने अपनी आँख मसलते हुए कहा
“लाओ हमे दिखाओ”,कहते हुए गुड्डू गोलू के सामने आया और उसका चेहरा अपने हाथो में लेकर उसकी आँख में फूंक मारने लगा। उसी मार्किट में गुप्ता जी किसी काम से आये थे जैसे ही उन्होंने गुड्डू और गोलू को एक दूसरे के साथ इस हालत में देखा तो अपना हाथ अपने सीने पर रख लिया और कहा,”साला हमको पहिले से सक था जे गुड्डू और गोलू की दाल मा कुछो तो काला है,,,,,,,,,ए रुक जाओ साला का प्रकृति का नियम ही बदल दोगे”
गुड्डू और गोलू को इतना पास देखकर गुप्ता जी ने अपने मन में कुछ अलग ही सोच लिया और गुड्डू की तरफ लपक कर उसे गोलू से दूर करके कहा,”हमको साला लगा ही था कुछो गड़बड़ है तुम दोनों में , तबही ना गोलू महाराज बात बात पर गुड्डू भैया से काम है गुड्डू भैया के हिया जा रहे है ,, तो जे है उह काम भरे बाजार मा एक दूसरे की चोंच से चोंच लड़ाय रहे हो”
“का बक रहे हो चचा ?”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा
“बक नाही रहे खुद अपनी आँखों से देखे है,,,,कैसे खुलेआम चुम्मा-चाटी कर रहे हो शर्म नाही आती”,गुप्ता जी ने दाँत पीसते हुए कहा
गोलू ने सुना तो चिढ़ते हुए कहा,”जे का हमायी लुगाई है जो चुम्मा चाटी करेंगे इनके साथ ? अरे आँख मा लग गयी थी तो फूंक मार रहे थे गुड्डू भैया”
गुप्ता जी ठहरे गोलू के बाप उनके हाथ में आये गोलू के बाल और उन्होंने गोलू को इधर उधर झुलाकर कहा,”आँख मा फूंक ही मारनी थी तो मंगल से काहे नाही कहे फूँक मारने को ?”
“उह्ह पहुंचेगा हम तक”,गोलू ने भी गुस्से से कहा
“का कर रहे हो चचा ? अरे गोलू हमरा दोस्त है भाई जैसा दोस्त,,,,,,,,का आप भी कुछ भी सोच रहे है”,गुड्डू ने गुप्ता जी से गोलू के बाल छुड़ाते हुए कहा
“उह्ह सब छोडो हमका जे बताओ तुम तीनो हिया का कर रहे हो उह्ह भी एक साथ,,,,,,,,,,हैं अब कौनसा नवा कांड करने का सोचे हो ? और जे मंगल फूफा को भी अपने साथ शामिल कर लिए”,गुप्ता जी ने कहा
“अरे हम और गुड्डू भैया तो बस स्टेण्ड आये थे भुआ और फूफा को छोड़ने,,,,,,भूख लगी तो छोले कुलचे खा रहे थे कि फूफा हिया फूल खरीदते दिखे तो हम इनकी तरफ चले आये,,,,,,,,,!!”,गोलू ने झुंझलाकर सारी बात गुप्ता जी को बता दी और अगले ही पल गुप्ता जी की नजर मंगल फूफा पर,,,,,,,,,
गुप्ता जी ने मंगल फूफा को घूरकर देखा और कहा,”का बे मंगलू , जे फूलो की दुकान पर का कर रहे हो तुमहू ?”
“का करेंगे फुलवारी के लिए,,,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने इतना ही कहा कि मंगल फूफा ने गोलू का हाथ खींचकर दबे स्वर में कहा,”चुप हो जाओ गोलू का कर रहे हो ?”
“का फुलवारी का ?”,गुप्ता जी ने कहा
“अरे जे का मतलब हम फूल लेने आये थे,,,,,!!”,मंगल फूफा ने कहा
“काहे तुमको फूल की का जरूरत पड़ी ?”,गुप्ता जी गोलू को छोड़कर अब मंगल के पीछे पड़ गए ये देखकर गुड्डू ने आँखों ही आँखों में गोलू से चलने का इशारा किया और दोनों पलक झपकते ही वहा से गायब , मंगल फूफा को समझ नहीं आ रहा था गुप्ता जी से का कहे तो उन्होंने मोरल सपोर्ट के लिए गुड्डू गोलू के लिए इधर उधर देखा लेकिन वहा तो कोई नहीं था।
“का बोलोगे कुछो कि मुहूर्त निकलवाए ?”,गुप्ता जी ने झिड़ककर कहा तो मंगल फूफा डर गए और बेचारे डर के मारे झूठ बोल पड़े,”उह्ह्ह हमरी दूर की चचिया की आज बरसी है तो बस ओह्ह के लिए खरीद रहे थे”
“पर तुम तो अनाथ हो गोलू की अम्मा के अलावा तुम्हरा तो कोनो रिश्तेदार भी नाही है फिर जे चचिया कहा से आयी ?”,गुप्ता जी शकभरे स्वर में पूछा
“अह्ह्ह्ह वो , वो हम,,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा अटक गए , बेचारे कहे तो कहे क्या
“का तुम पैदा किये रहय ?”,गुप्ता जी ठहरे बकैत तो पूछ लिया
“कैसी बात कर रहे हो गुप्ता जी ? आदमी कबो बच्चा जनता है का ?”,फूफा ने चिढ़कर कहा
“तुम्हरे जैसे लक्षण है ना तुमहू साला जन्म भी दो , दूर की चचिया , कहा रहती है जे तुम्हायी दूर की चचिया बताओ ज़रा”,गुप्ता जी ने कहा
“रहती थी अब तो बस उनकी यादें है। आज उनकी बरसी रही तो सोचा फूल अर्पित कर दे ओह्ह का पर आपको तो जे मा भी परेशानी है”,मंगल फूफा ने अपनी आँखे मसलते हुए कहा
“अरे रे लगता है ससुरा सच मा इमोशनल हुई गया , ए मंगलवा ए खरीद ल्यो एक ठो हमरी तरफ से भी ले लेना अपनी चचिया के लिए,,,,,,,!!”,गुप्ता जी ने कहा
बेचारा मंगल कहा फुलवारी के लिए फूल ले रहा था और कहा उसे अब अपनी चचिया के लिए फूल खरीदने पड़ रहे थे वो भी उसके लिए जो इस दुनिया में कही थी ही नहीं,,,,,,,,!!
मंगल फूल खरीदकर जैसे ही पलटा बेचारे का मुँह ही उतर गया क्योकि गुप्ता जी अभी तक वही खड़े थे
मंगल गुप्ता जी के पास आया तो उन्होंने कहा,”यार मंगलवा हमहू सोचे रहे कित्ती भली औरत होगी तुम्हायी चचिया जिनके मरने के बाद भी तुमहू ओह्ह के लिए फूल लेकर जा रहे हो,,,,,,,,
हमरा ना दिल भर आया सच्ची तो हमहू फैसला किये रहय कि हमहू भी तुम्हरे साथ चलेंगे और खुद अपने हाथो से उनको एक ठो फूल अर्पित करेंगे”
गुप्ता जी की बात सुनकर मंगल फूफा का दिल बैठ गया , कौन चाची कहा की चाची मंगल ने तो झूठ बोला था। उसे चुप देखकर गुप्ता जी ने कहा,”अरे का हुआ चलो भी देर हो जाएगी,,,,,,,,!!”
मंगल फूफा फूलो की थैली उठाये गुप्ता जी के साथ आगे बढ़ गए।
गुप्ता जी से जान बचाकर गुड्डू और गोलू मार्किट से बाहर चले आये और पैदल ही दोनों घर की तरफ निकल गए। चलते चलते गोलू का फोन बजा , उसने फोन उठाकर कान से लगाया और कहा,”हेलो कौन ?”
“अरे गोलू भैया हम बोल रहे है रवि , थोड़ी देर के लिए दुकान पर आएंगे का ? एक ठो पार्टी आने वाली है बुकिंग के लिए आप बात कर लेते तो ठीक रहता”,फोन के दूसरी तरफ से लड़के ने कहा
“ठीक है आते है,,,,,,,,पार्टी कहा की है ?”,गोलू ने पूछा
“यही चंदौली से बताय रहे थे , आप आजाओ खुदही बात कर लेना”,लड़के ने कहा
गोलू ने हाँ बोलकर फोन काट दिया तो गुड्डू ने कहा,”का किसका फोन था ?”
“उह्ह्ह दुकान से लड़के का फोन था कह रहा बुकिंग के लिए कोनो पार्टी आने वाली है हम आकर मिल ले”,गोलू ने कहा
“का गोलू आज बूढ़ा का भोज रहा और तुमको आज भी काम करना है”,गुड्डू ने कहा
“अरे तो आपकी बूढ़ा कौनसा हमरा कोपी पेन लेकर मरी है,,,,,,,,,,वैसे भी हो गए ना 13 दिन,,,,,,,,और हम आपको आने को नाही कह रहे हम चले जाते है , वैसे भी पिछले महीने काम मंदा ही चल रहा है इसी बहाने लड़का लोगन की तनख्वाह निकल आएगी,,,,,,,,,,नई”,गोलू ने कहा
“का बात है गोलू , जिम्मेदार हो गए हो”,गुड्डू ने मुस्कुरा कर कहा
गोलू ने सुना तो अपने हाथो को उठाकर अंगड़ाई ली और कहा,”अरे गुड्डू भैया जिम्मेदार तो इत्ते है न कि पुरे कानपूर में होने वाले आधे से ज्यादा कांडो के लिए हमही जिम्मेदार होते है , यादव जी की भैंसिया खुले तो हम जिम्मेदार , आदर्श फूफा का ड्रामा चले तो हम जिम्मेदार , केशव पंडित का कुरता फ़टे तो हम जिम्मेदार , साला हमरे ससुर का वक्त ना कटे तो हम जिम्मेदार , अरे मिश्रा जी की पोल खुले तो हम जिम्मेदार , किसी से प्यार के दो बोल सुने तो भी हमही जिम्मेदार”
“अरे बस बस गोलू इत्ता जिम्मेदार भी नाही बनना था , अच्छा हमहू जाते है तुम भी बुकिंग के बाद घर निकल जाना,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने गली में मुड़ते हुए कहा
गोलू ने भी बगल से गुजरते रिक्शा का डंडा पकड़ा और अंदर बैठते हुए कहा,”मिश्रा टेंट हॉउस लेइ ल्यो”
रिक्शावाले ने सुना और आगे बढ़ गया।
गोलू दुकान पहुंचा और बाहर खड़े लड़के से कहा,”का पार्टी आयी का ?”
“हाँ अंदर ही बैठे है उह्ह लोग”,लड़के ने कहा
“शुक्ला को बोल के बढ़िया कड़क चार चाय भिजवाय दो”,गोलू ने अंदर जाते हुए कहा
गोलू अंदर आया देखा सोफे पर दो जन बैठे है। एक गोलू का हमउम्र था तो दूसरा उसके पिता की उम्र का , गोलू ने उनसे नमस्ते की और अपनी कुर्सी पर बैठा। गोलू ने उनसे शादी कब है से लेकर शादी में क्या क्या अरेंजमेंट चाहिए की सारी जानकारी ले ली बस जगह नहीं पूछी और जैसे ही गोलू ने पूछना चाहा उसका फोन बजा। गोलू ने स्क्रीन पर पिंकी का नाम देखा और फोन उठाकर कहा,”अरे बाबू मिटिंग मा है करते है थोड़ी देर मा फोन”
“गोलू अगर हमरी बात सुने बिना फोन काटा तो हमसे बुरा कोई नाही होगा”,पिंकी ने गुस्से से कहा
“अरे का हो गवा इत्ता गुस्से मा काहे हो ?”,गोलू ने कहा
शादी का बुकिंग करवाने जो लोग आये थे उनको निकलने की जल्दी थी। अब इधर पिंकी उधर बुकिंग वाले और बीच में गोलू ,, पिंकी की बात सुनते हुए गोलू ने बुकिंग वाली की तरफ देखा तो आदमी ने कहा,”लोकेशन ‘चकिया’ रहेगी”
अब गोलू को लोकेशन तो सुना लेकिन आगे का सुन पाता इस से पहले ही पिंकी चिल्ला पड़ी,”गोलू ! तुम हमरी बात ठीक से सुन रहे हो कि नाही ?”
गोलू ने बुकिंग वालों को जाने का इशारा किया और पास पड़ी बुकिंग डायरी में लोकेशन लिखा “कचिया”
अब इसे गोलू की बेवकूफी कहे या अनजाने में हुई भूल लेकिन इस एक गड़बड़ नाम से आगे इनकी जिंदगी में क्या भूचाल आने वाला था ये तो भगवान ही जानते थे। गोलू ने डायरी बंद की और अपनी जगह से उठकर पिंकी से कहा,”अरे यार बाबू हमहू साला सादी से पहिले तुम्हरी सुनत रहे , शादी के बखत तुम्हरी सुनत रहे , अरे शादी के बाद तुम्हरी सुनत रहे अब का चाहती हो देवी काम ना करे ? उह्ह कुछो महीनो बाद जोन मेहमान घर में आने वाला है ओह्ह के डायपर का इंतजाम करने दोगी की नाही”
“तुम बदल गए हो गोलू”,पिंकी ने चिढ़कर कहा
“बदल गए है , अरे का बदल गए है का सींग निकल आये है हमाये सर पर , हमायी पूछ निकल आयी है ,, का बदल गए है ?”,गोलू ने कहा
“हम बस जे कह रहे है शाम मा घर जल्दी आ जाना हमको अपने पापा के घर जाना है,,,,,,,,!!”,पिंकी ने कहा
“अभी सुबह ही तो मिली हो उनसे गुड्डू भैया के घर मा अब फिर से काहे जाना है उह्ह असुर के घर”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
“गोलू,,,,,,,,!!”,पिंकी ने गुस्से से कहा
“हाँ हाँ ठीक है ले जायेंगे,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा और फोन काटकर खुद से कहा,”शादी के बाद आदमी की जिंदगी न कुत्तो जैसी हो जाती है”
सामने खड़े कुत्ते ने सुना तो गोलू पर भोंका ये देखकर गोलू ने बुरा सा मुँह बनाया और कहा,”आदमी को कुत्ता कहा तो साला कुत्ते को बुरा लग गवा,,,,,,,,!!”
( क्या मंगल फूफा मिलवाएंगे गुप्ता जी को अपनी चचिया से या फिर पीटेंगे गुप्ता जी के हाथो ? चकिया को कचिया लिखकर क्या गोलू ने कर दी है इस कहानी के पहले कांड की शुरुआत ? आखिर कब खत्म होगी गोलू और शर्मा जी के बीच की ये मीठी दुश्मनी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ Season 4” मेरे साथ )
Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4
Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4 Manmarjiyan Season 4 – 4
- Continue With Manmarjiyan Season 4 – 5
- Visit https://sanjanakirodiwal.com
- Follow Me On http://instagram.com/sanjanakirodiwal/
संजना किरोड़ीवाल

