Manmarjiyan Season 3 – 66
Manmarjiyan Season 3 – 66

गुप्ता जी और गोलू ने मिलकर लवली को पागल कर दिया वह बेचारा खुद को कोस रहा था कि वह यहाँ आया ही क्यों ? ऊपर से लवली ने एक और मुसीबत खुद बुला ली गुड्डू को फोन करके यहाँ बुलाकर , लवली को गुड्डू के आने से पहले यहाँ से निकलना था। लवली उठा और चुपचाप दरवाजे की तरफ बढ़ गया लेकिन लवली इतनी आसानी से वहा से निकल जाये ऐसा भला कैसे हो सकता था ? लवली को चुपचाप जाते देखकर मंगल फूफा ने आदमी से कहा,”ए पकड़ो उसे भाग रहा है उह्ह,,,,,,!!”
दोनों आदमी गोलू को पकड़ कर लतिया रहे थे उसने मरे हुए स्वर में कहा,”अबे ! हमका वापस आकर मार लेना हमहू तो यही है उनको जाकर पकड़ो,,,,,!!”
आदमियों ने सुना तो गोलू को नीचे पटका और लवली की तरफ लपककर उसे दोनों बांहो से ज्यों का त्यों हवा में उठा लिया और लाकर गोलू के सामने पटक दिया। लवली ने जब गोलू को देखा तो धूल मिटटी से सने गोलू ने अपनी बत्तीसी दिखाई और कहा,”अकेले अकेले कहा जा रहे थे गुड्डू भैया ?”
लवली ने गोलू के गाल पर एक थप्पड़ रसीद किया और दाँत पीसते हुए कहा,”तुम्हायी अम्मा के ब्याह मा , साले दोस्त नाही दुश्मन हो तुमहू गुड्डू के,,,,,,,!!”
“अरे हमने का किया अब ?”,गोलू ने गुस्सा होकर कहा और उसका हाथ गलती से लवली के गाल पर जा लगा , लवली को लगा गोलू ने जान बुझकर मारा है तो उसने गोलू के दूसरे गाल पर भी थप्पड़ रसीद कर दिया
अब तो गोलू भी झल्ला उठा और उसने भी लवली को एक चाँटा रख दिया। लवली ने जवाब में वापस मारा तो गोलू लवली पर कूदकर उसे ही मारने लगा। दोनों एक दूसरे पर थप्पड़ घुसे बरसाए जा रहे थे और घर में किसी को उन दोनों की परवाह नहीं थी।
यादव को अपने घर में देखकर गुप्ता जी चिढ गए और गुस्से से उनकी तरफ आये क्योकि गुप्ता जी के घर में जो तमाशा चल रहा था वो शुरू इन्ही यादव जी वजह से हुआ था। ना यादव जी बिन बुलाये गुप्ता जी के घर आते , ना गुप्ता जी का फेंका लोटा उन्हें लगता , ना वे बेहोश होते , ना उनको ठिकाने लगाने के चक्कर में गुप्ता परेशान होते , ना फुलवारी उन्हें ढूंढते हुए घर आती और ना ही गुप्ताइन अपने पति को गलत समझती।
“का हे बे जे अपने तबेले का एग्जाम्पल हिया काहे दे रहे हो ? भैंसिया और ओह्ह के गोबर से बाहर निकलो कभी,,,,,,,,!!”,गुप्ता जी ने अकड़कर कहा
“जबान को ब्रेक दयो गुप्ता जी,,,,,,,,,!!”,यादव ने ऊँगली दिखाकर कहा
“ए बुड़बक हमाये सामने हमाये घर के दामाद को ऊँगली दिखाने की तुम्हायी हिम्मत कैसे हुई ? हाथ काट देंगे समझे”,गुप्ता जी ने पहले मंगल फ़ुफ़ा ने कहा
यादव जी ने सुना तो मंगल फूफा को देखा उसे हाथो में उठाया और दिवार पर बैठाकर कहा,”छी छी छी गुप्ता जी इतना स्टेंडर्ड गिर गवा है आपका एक बच्चे से जे सब बुलवाय रहे हो”
“अबे बच्चा नहीं है उह्ह 55 साल का अधेड़ है”,गुप्ता जी ने दाँत पीसते हुए कहा
यादव जी ने हैरानी से पलटकर मंगल को देखा और उसे दिवार से वापस नीचे उतार कर कहा,”तुमहू तो छोटा रिचार्ज निकले , तुमसे बड़े तो तुम्हाये बच्चे होंगे”
“शादी नहीं हुई है हमायी”,मंगल फूफा ने फुलवारी की तरफ देखकर शर्माते हुए कहा
यादव ने फुलवारी को देखा तो पाया कि वह भी मंगल की बात पर मुस्कुराते हुए उसे देख रही है तो यादव ने उसकी बांह पकड़कर साइड करके कहा,”तुम का दाँत फाड़ रही हो , तुम्हायी शादी हुई है तुम्हाये चार बच्चो का एक बाप है हमहू समझी”
“तो का चार बच्चो के चार बाप होते है,,,,,,,,,,!!”,गुप्ता जी ने कहा
“अरे आप काहे इतना किलसाये हुए है ? और जे हाल्फ फ़्राय कौन है और हिया हो का रहा है ? कोई बताएगा हमे ?”,यादव ने अपने बालों को नोचते हुए कहा।
लवली और गोलू भी अब तक एक दूसरे को मार पीट कर थक चुके थे इसलिए दोनों सीढ़ियों पर आ बैठे। लवली ने गोलू की तरफ देखा और हाँफते हुए कहा,”सारी बाते साइड करो सबसे पहिले हमे जे बताओ गोलू फोन मा ऐसी रिंगटोन कौन रखता है ?”
“का गुड्डू भैया आप ही तो कहे थे बदलने को तो हमने बदल ली,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा
“तो कोनो ढंग की नाही मिली ? तुमको मालूम है कित्ती गलत सिचुएशन में तुमहाओ फोन बजे है उस पर जे रिंगटोन,,,,,,,,कमाल हो तुम भी”,लवली ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा
“हमे छोडो गुड्डू भैया यादववा को धरो बहुते चौड़ा रहा है पिताजी के सामने,,,,,,,,,!!”,गोलू ने उठते हुए कहा लेकिन देखा लवली वही बैठा है और टस से मस नहीं हुआ है ये देखकर गोलू ने कहा,”गुड्डू भैया चलो ना बैठे काहे हो ?”
“हम नहीं आ रहे”,लवली ने उखड़े स्वर में कहा
“मतलब आप सेल्फिश हो गए हो ?”,गोलू ने कहा
“हाँ,,,,,,,,!!”,लवली ने उसी अंदाज में कहा
“मतलब हमाओ रिश्ता खत्म ?”,गोलू ने पूछा
“हाँ,,,,,!!”,इस बार लवली ने गोलु की तरफ देखकर कठोरता से कहा
“मतलब डन डना डन डन ?”,गोलू ने कहा
“अब का लिखकर दे ? बोला ना हाँ”,लवली ने कहा
“ठीक है गुड्डू भैया याद रखेंगे,,,,!!”,गोलू ने कहा और आगे बढ़ गया कदम चलकर रुका और पलटकर कहा,”आखरी बार पूछ रहे है आ रहे हो कि नाही ?”
लवली ने अपने पैर से जूता निकाला और गोलू की तरफ फेंककर कहा,”भाग जाओ यहाँ से,,,,,,!!”
लवली का जूता गोलू को तो नहीं लगा लेकिन सामने खड़े मंगल को जरूर जा लगा। उसने जैसे ही जूता मारने वाले की तरफ देखा गोलू उछलकर उनकी तरफ गया और कहा,”गुड्डू भैया ने मारा है”
“अबे का बक रहे हो ? ए हमने तुमको नहीं मारा है”,लवली ने कहा
“अच्छा हमको नहीं मारा तो तुम्हारा निशाना सीधा हमाये मुंह पर कैसे लगा ?”,मंगल फूफा ने गुस्से से उबलकर कहा
“भैया कालेज मा भाला फेंक प्रतियोगिता मा फस्ट आते थे फूफा निशाना चूक ही नहीं सकता उनका,,,,,,,,,,!”,गोलू ने आग में घी डालते हुए कहा
लवली ने सुना तो गोलू पर चिल्लाते हुए कहा,”तुमहू साले दोस्त नहीं दोस्त के नाम पर दुश्मन हो , तुमको दोस्त बनाने से अच्छा है इंसान घर मा सांप पाल ले”
“फूफा सांप कह रहे है गुड्डू भैया आपको”,गोलू ने तो आज जैसे लवली से दुश्मनी निकालने की कसम खा ली थी।
“ए खड़े खड़े देख का रहे हो मारो उसको”,मंगल फूफा ने चिल्लाकर अपने आदमियों से कहा
“यहाँ हमायी बर्बादी का तमाशा चल रहा है आओ तुमहू भी देख ल्यो”,गुप्ता जी की आवाज गोलू के कानो में पड़ी तो गोलू उनकी तरफ पलट गया।
“का कह रहे है आप ? अरे हुआ का जे बताईये ना ?”,यादव जी ने कहा
गुप्ताइन जो इतनी देर से सब देख रही थी उन्होंने गुप्ता जी को साइड किया और आगे आकर कहा,”अरे इह का बताएँगे हम बताते है , इह जो है ना आपकी फुलवारी , आपकी घरवाली इह से ज़रा पूछो आँखे लड़ाने के लिए इन्हे हमाये पति मिले,,,,,,,,अरे इतनी बेशर्म है आपकी पत्नी आधी रात को हमहू खुद इन्हे हमाये घर आते देखे है,,,,,,,,,और आज सुबह तो हद ही कर दी”
“का किया ?”,यादव ने हैरानी से पूछा
“जे गोलुआ के पिताजी और आपकी फुलवारी हिया गेट पर खड़े थे उह्ह भी ऐसी हालत मा कि का कहे ?”, कहकर गुप्ताइन ने साड़ी का पल्लू मुंह में दबाया और रोने लगी
“का कुछ भी कह रही हो गुप्ताइन ? ए यादववा ए हमायी बात सुनो,,,,,,,,,हमहू तुम्हारी पत्नी को कबो बुरी नजर से नाही देखे है रे”,गुप्ता जी ने कहा
गोलू उनके दाँये हाथ की तरफ ही खड़ा था इसलिए उसने बीच में कहा,”हमेशा पूरी नजर से देखे है”
यादव ने सुना तो गुस्से से चेहरा चमक उठा और उन्होंने गुप्ता जी की तरफ देखा , गुप्ता जी ने भी दाँये हाथ का कमाल दिखाया और एक थप्पड़ सीधा गोलू के गाल पर मारकर कहा,”अब बीच मा बोले ना तो मार मार के ढोलक बना देंगे”
“अरे लेकिन हमहू तो आपकी ही मदद कर रहे थे पिताजी”,गोलू ने मिमियाते हुए कहा
गुप्ता जी ने गोलू के सामने हाथ जोड़े और कहा,”ए मालिक ! हमहू ना तुम्हाये सामने हाथ जोड़ते है हमको तुम्हायी मदद नहीं चाहिए , मदद के नाम पर साला हमाओ हवन बैठाय दिए हो तुमहू और साला अब आहुति पर आहुति दिए जा रहे हो,,,,,इह से पहिले हमहू जलकर राख हो जाए अपना जे मनहूस शरीर उठाओ और भाग जाओ हिया से,,,,,,,,,!!”
गुप्ता जी की बात सुनकर गोलू जाने के लिए मुड़ गया तो गुप्ता जी ने उसके पिछवाड़े पर एक जोरदार लात मारकर कहा,”मदद करेंगे”
लात खाकर गोलू फिर उन्ही सीढ़ियों पर आ गिरा जिन सीढ़ियों पर लवली मार खाकर पड़ा था। बेचारा लवली इतनी मार उसने आज तक अपनी पूरी जिंदगी में नहीं खायी थी जितनी गोलू ने उसे एक दिन में खिला दी। लवली की एक आँख काली हो चुकी थी , दूसरी खुलने का नाम नहीं ले रही थी , कपड़ो पर धूल लगी थी ,
चेहरे पर जगह जगह मार खाने से लाल निशान , उसके सर से लेकर पैर के अंगूठे तक पूरा शरीर दुःख रहा था बेचारा सीढ़ियों पर पड़ा दर्द से कराह रहा था कि तभी गोलू उसके बगल में आ पड़ा।
“का बे ? गिरते पड़ते पैदा हुए थे ?”,लवली ने मरे हुए स्वर में पूछा
“नाही पर साला जबसे इह दुनिया मा आये है गिर पड़ ही रहे है कभी किसी के पियार मा तो कभी किसी की मार से”,गोलू ने भी मरे हुए स्वर में कहा क्योकि उस बेचारे को भी लात बहुत जोर से पड़ी थी
“हमको एक बात बताओ गोलू तुम्हायी जिंदगी मा कोनो सामान्य दिन भी होता है कि हर वक्त बकचोदी चलती रहती है”,लवली ने सम्हलकर बैठते हुए कहा और अपनी पीठ सीढ़ी से लगा ली।
“सच बताये भैया ! बकचोदी तो आप और हम पहले भी करते थे पर इह बार कुछो जियादा ही हो गयी ऐसा लग रहा चरस का खेत नाही पूरा शहर बो दिया हो हमने अपने जीवन मा , साला जब से तुम्हायी अम्मा गयी है तब से जे काण्ड ही नाही खत्म हो रहे”,गोलू ने बेचारगी से कहा
और लवली की तरफ देखा तो पाया कि लवली पिंकी को देख रहा है तो गोलू ने लवली का मुंह घुमाकर कहा,”उधर नाही देखो उह्ह हमाओ पर्सनल कांड है,,ओह्ह का खाली हमही देख सकते है”
“हम उसे नही घडी देख रहे है”,लवली ने कहा
“अरे कित्ती भी घडी देख लेओ गुड्डू भैया आपका और हमारा टाइम तो खराब ही चल रहा है,,,,,,,,,,,जबसे पैदा हुए है तब से”,गोलू ने कहा
“पिछवाड़े पर लात खाकर आये हो लेकिन बकैती नाही खत्म होय रही तुम्हायी , साले जे सब चक्कर में हमे काहे पिटवाया ? हमने का किया था हमायी का गलती थी”,लवली ने गोलू को घूरते हुए कहा
गोलू ने लवली को देखा और मुस्कुरा कर कहा,”तुम्हायी गलती जे रही कि तुमहू हिया गुड्डू भैया बनके आये , अब पंजीरी तो मिलेगी ना गुड्डू भैया के हमशक्ल,,,,,,,,!!”
लवली ने जैसे ही सुना उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वो अभी तक इस गलतफहमी में था कि गोलू उसे गुड्डू समझकर लोगो से पिटवा रहा है जबकि ऐसा नहीं था। लवली भागने की सोचता इस से पहले ही गोलू ने उसकी गर्दन को अपनी बांह में दबोचा और कहा,”अबे साले ! तुमको तो हमहू मिश्रा जी के केबिन मा ही पहिचान गए थे , हमाये गुड्डू भैया ना आज तक कबो अपने बाप की कुर्सी पर नाही बैठे इत्ती रिस्पेक्ट करते है उह अपने पिताजी की और तुमहू साले आते ही कूल्हे टिका लिए बस वही गलती कर दिए ना बाबू,,,,,,,,
का कहे थे हम बाज की नजर है हमायी और हिया तो हमहू तुमको थोड़ा परसादी खिलाने लाये थे , कैसी लगी ?”
“बहुत जोर की गोलू गुप्ता”,लवली ने मरे हुए स्वर में कहा
उसमें अब इतनी हिम्मत नहीं बची थी कि वह गोलू को खुद से दूर कर पाता इधर गोलू अपनी जीत पर मुस्कुरा रहा था।
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संजना किरोड़ीवाल


लवली ने जैसे ही सुना उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वो अभी तक इस गलतफहमी में था कि गोलू उसे गुड्डू समझकर लोगो से पिटवा रहा है जबकि ऐसा नहीं था। लवली भागने की सोचता इस से पहले ही गोलू ने उसकी गर्दन को अपनी बांह में दबोचा और कहा,”अबे साले ! तुमको तो हमहू मिश्रा जी के केबिन मा ही पहिचान गए थे , हमाये गुड्डू भैया ना आज तक कबो अपने बाप की कुर्सी पर नाही बैठे इत्ती रिस्पेक्ट करते है उह अपने पिताजी की और तुमहू साले आते ही कूल्हे टिका लिए बस वही गलती कर दिए ना बाबू,,,,,,,,,
लवली ने जैसे ही सुना उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वो अभी तक इस गलतफहमी में था कि गोलू उसे गुड्डू समझकर लोगो से पिटवा रहा है जबकि ऐसा नहीं था। लवली भागने की सोचता इस से पहले ही गोलू ने उसकी गर्दन को अपनी बांह में दबोचा और कहा,”अबे साले ! तुमको तो हमहू मिश्रा जी के केबिन मा ही पहिचान गए थे , हमाये गुड्डू भैया ना आज तक कबो अपने बाप की कुर्सी पर नाही बैठे इत्ती रिस्पेक्ट करते है उह अपने पिताजी की और तुमहू साले आते ही कूल्हे टिका लिए बस वही गलती कर दिए ना बाबू,,,,,,,,,
लवली ने जैसे ही सुना उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वो अभी तक इस गलतफहमी में था कि गोलू उसे गुड्डू समझकर लोगो से पिटवा रहा है जबकि ऐसा नहीं था। लवली भागने की सोचता इस से पहले ही गोलू ने उसकी गर्दन को अपनी बांह में दबोचा और कहा,”अबे साले ! तुमको तो हमहू मिश्रा जी के केबिन मा ही पहिचान गए थे , हमाये गुड्डू भैया ना आज तक कबो अपने बाप की कुर्सी पर नाही बैठे इत्ती रिस्पेक्ट करते है उह अपने पिताजी की और तुमहू साले आते ही कूल्हे टिका लिए बस वही गलती कर दिए ना बाबू,,,,,,,,,
लवली ने जैसे ही सुना उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वो अभी तक इस गलतफहमी में था कि गोलू उसे गुड्डू समझकर लोगो से पिटवा रहा है जबकि ऐसा नहीं था। लवली भागने की सोचता इस से पहले ही गोलू ने उसकी गर्दन को अपनी बांह में दबोचा और कहा,”अबे साले ! तुमको तो हमहू मिश्रा जी के केबिन मा ही पहिचान गए थे , हमाये गुड्डू भैया ना आज तक कबो अपने बाप की कुर्सी पर नाही बैठे इत्ती रिस्पेक्ट करते है उह अपने पिताजी की और तुमहू साले आते ही कूल्हे टिका लिए बस वही गलती कर दिए ना बाबू,,,,,,,,,
लवली ने जैसे ही सुना उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वो अभी तक इस गलतफहमी में था कि गोलू उसे गुड्डू समझकर लोगो से पिटवा रहा है जबकि ऐसा नहीं था। लवली भागने की सोचता इस से पहले ही गोलू ने उसकी गर्दन को अपनी बांह में दबोचा और कहा,”अबे साले ! तुमको तो हमहू मिश्रा जी के केबिन मा ही पहिचान गए थे , हमाये गुड्डू भैया ना आज तक कबो अपने बाप की कुर्सी पर नाही बैठे इत्ती रिस्पेक्ट करते है उह अपने पिताजी की और तुमहू साले आते ही कूल्हे टिका लिए बस वही गलती कर दिए ना बाबू,,,,,,,,,
लवली ने जैसे ही सुना उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वो अभी तक इस गलतफहमी में था कि गोलू उसे गुड्डू समझकर लोगो से पिटवा रहा है जबकि ऐसा नहीं था। लवली भागने की सोचता इस से पहले ही गोलू ने उसकी गर्दन को अपनी बांह में दबोचा और कहा,”अबे साले ! तुमको तो हमहू मिश्रा जी के केबिन मा ही पहिचान गए थे , हमाये गुड्डू भैया ना आज तक कबो अपने बाप की कुर्सी पर नाही बैठे इत्ती रिस्पेक्ट करते है उह अपने पिताजी की और तुमहू साले आते ही कूल्हे टिका लिए बस वही गलती कर दिए ना बाबू,,,,,,,,,
Waah golu maharaj …..maar khaakr or khilakar kmaal kr diya…..😂😂