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साक़ीनामा – 16

Sakinama – 16 Sakinama – 16 सुबह सुबह राघव तैयार होकर ऑफिस चला गया। मैं अब बहुत कम हसती थी दिनभर खुद को घर के कामों में बिजी रखती या फिर अपने कमरे में बैठकर अपने हालात पर रोते रहती। मैं...

साक़ीनामा – 15

Sakinama – 15 Sakinama – 15 राघव मुझसे दूर जा रहा था ये बात मैं जानती थी राघव नहीं । कुछ दिन यु ही गुजर गए। राघव और मेरे बीच सिर्फ खामोशियों का रिश्ता था। हमारे बीच ज्यादा कोई बात नहीं...

साक़ीनामा – 14

Sakinama – 14 Sakinama – 14 कुछ दिन यू ही गुजर गए , मैं सबके सामने खुश रहने का दिखावा करने लगी थी पर अंदर से खुश नहीं थी। मैंने महसूस किया जैसे धीरे धीरे मैं अंदर से खाली होते जा...

साक़ीनामा – 18

Sakinama – 18 Sakinama – 18 मेरे बार बार माफ़ी मांगने के बाद भी उसने मुझे माफ़ नहीं किया। वो अपने घमंड में चूर था और मैंने उसकी मोहब्बत में अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट तक गवा दी। मेरा उपवास था। सब खाना...

साक़ीनामा – 13

Sakinama – 13 Sakinama – 13 खिड़की के पास खड़ी मैं आसमान में चमकते चाँद को देख रही थी कि तभी राघव की आवाज मेरे कानों में पड़ी,”पानी लेकर नहीं आयी तुम ?”“नहीं”,मैंने पलटकर कहा  “जाओ लेकर आओ”,राघव ने लगभग आदेश...
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