Sakinama – 8 Sakinama – 8 मैं जैसे ही ऑफिस पहुंची मेरे साथ काम करने वाले लड़के मुझे देखने लगे। गलती उनकी नहीं थी आज से पहले किसी ने मुझे ऐसे अवतार में देखा भी तो नहीं था। कुछ ने तो...
Sakinama – 7 Sakinama – 7 मैं जिंदगी के एक नए सफर पर थी जिसमे ख़ुशी थी , अपनापन था , एक दूसरे की परवाह थी , छोटे छोटे सपने थे और खूबसूरत अहसास जिस से हर लड़की अपनी जिंदगी में...
Sakinama – 6 Sakinama – 6 मैं राघव को गुड बाय बोल चुकी थी और मुझे नहीं लगता इसके बाद वो मुझे मैसेज या कॉल करेगा। कुछ दिन बाद मेरी जिंदगी फिर से पहले जैसी हो गयी। वही दिनभर ऑफिस ,...
Sakinama – 5 Sakinama – 5 मैं अपना फोन लेकर छत पर चली आयी। मैंने फ़ोन उठाया तो दूसरी तरफ से राघव ने कहा,”हेलो !!”“जी कहिये”,मैंने कहा“क्या कर रही हो ?”,राघव ने बहुत ही अपनेपन से पूछा“कुछ नहीं बस अभी थोड़ी...
Pakizah – 48 Pakizah – 48 “आज पता चला सर , इस मुस्कराहट के पीछे कितना दर्द छुपा है !”,पाकीजा ने रूद्र की आँखों में देखते हुए कहा l रूद्र की आँखों में नमी तैर गयी वह पाकीजा को देखने लगा...