Pasandida Aurat Season 2 – 41
Pasandida Aurat Season 2 – 41

लक्षित ने पृथ्वी को माफ कर दिया और अपनी टीम की तरफ चला गया। पृथ्वी की आँखों में नमी थी उसने अपनी आँखों को पोछा और पलटा तो नजर अवनि पर पड़ी , कुछ ही दूर खड़ी अवनि पृथ्वी को देखकर मुस्कुरा रही थी। पृथ्वी अवनि के पास आया और कहा,”आपने जान बूझकर ऐसा किया है ना ?”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराते हुए हामी में गर्दन हिला दी।
“मैं पूरी जिंदगी आपसे हारने के लिए तैयार हूँ मैडम जी,,,,,लेकिन आगे से मुझे हराने के लिए ऐसी हरकत मत करना कि मेरे लिए खुद को सम्हालना मुश्किल हो जाये वैसे आपने जो किया मुझे आपको उसका जवाब तो देना ही”,पृथ्वी ने प्यार से अवनि की तरफ देखते हुए कहा लेकिन वह अपनी बात पूरी करता इस से पहले अवनि ने घबराकर कहा,”आई थिंक हमे चलना चाहिए , तुम्हारे ऑफिस वालो के लिए डिनर भी तो बनाना है”
अवनि इतना कहकर आगे बढ़ गयी और पृथ्वी मुस्कुराते हुए उसके पीछे चला आया।
पृथ्वी और अवनि घर चले आये। पृथ्वी नहाने चला गया और अवनि हाथ मुँह धोकर मंदिर के सामने चली आयी उसने संध्या आरती की और फिर सीधा किचन में चली आयी। उसने कूकर उठाया और उसमे अरहर , मूंग , चना , मसूर और उड़द दाल डालकर पानी डाला साथ ही हल्दी नमक और एक चम्मच घी डालकर उसे उबलने के लिए गैस पर चढ़ा दिया। दाल पकने में वक्त लगने वाला था इसलिए अवनि ने बाटी बनाने के लिए कड़क आटा गूंथना शुरू कर दिया।
आटा तैयार था उसे साइड रख अवनि ने सुबह से भीगी सुखी लाल मिर्च को मिक्सी के जार में डाला साथ ही लहसुन , अदरक , जीरा और नमक डालकर उसे भी दरदरा पीस लिया।
अवनि ने पेस्ट को फ़्राय किया और उसे पकाने लगी। लहसुन की चटनी की खुशबु से ही पूरा किचन महकने लगा।
पृथ्वी नहा चुका था उसने घडी में समय देखा रात के शाम के 8 बज रहे थे। जयदीप और बाकि सब 9 बजे आने वाले थे। अब चूँकि ऑफिस के लोग आ रहे थे इसलिए पृथ्वी ने कबर्ड से जींस और टीशर्ट निकाला और पहनकर किचन में चला आया। किचन में आकर पृथ्वी ने देखा अवनि अकेले ही सब काम कर रही है तो उसने उसके पास आकर कहा,”बताओ मुझे क्या करना है ?”
अवनि ने देखा दाल अभी पक रही है चटनी बन चुकी है , उसे मीठे चूरमे के लिए मुठरी बनानी थी इसलिए उसने पृथ्वी की तरफ पलटकर कहा,”तुम बाटी बनाओ मैं उन्हें सिकने के लिए रख देती हूँ”
“अह्ह्ह्ह कैसे बनाना होगा ?”,पृथ्वी ने कहा क्योकि उस बेचारे ने ये सब पहले कभी नहीं बनाया था
अवनि ने अपने हाथ में थोड़ा आटा लिया और फिर उसकी गोल बाटी बनाकर पृथ्वी को बताया।
“हाह ! ये तो मेरे बाँये हाथ का खेल है”,कहकर पृथ्वी ने थोड़ा सा सख्त आटा अपने हाथ में लिया और जैसे ही उसकी बाटी बनाने लगा उसने महसूस किया कि ये इतना आसान भी नहीं था। उसे बहुत मेहनत करनी पड़ी और धीरे धीरे वह बाटी बनाकर साइड रखने लगा। अवनि ने भी मुठरी बनाकर उन्हें तला और फिर मिक्सी के जार में डालकर पीस लिया। उसने पीसे हुए चूरमे में घी , पीसी चीनी और द्राय फ्रूट्स डालकर उसे अच्छे से अपने दोनों हाथो से मिक्स किया। पृथ्वी का पूरा ध्यान अपनी बाटी बनाने पर था आखिर उसे अवनि से तारीफ जो सुननी थी।
अवनि ने देखा पृथ्वी ने सब बहुत अच्छे से किया है तो उसने पृथ्वी के पास आकर कहा,”अरे वाह ! इन्हे देखकर ये लग नहीं रहा कि तुम ये पहली बार कर रहे हो”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया ,अवनि ने कुछ बाटी उठाकर बाटी कुकर में रखी और कम आँच पर उन्हें सिकने के लिए छोड़ दिया। पृथ्वी अपना काम खत्म कर चुका था इसलिए कहा,”अब मुझे क्या करना होगा ?”
“तुम्हारे लिए मेरे पास एक काम और है,,,,,,,,यहाँ आओ”,अवनि ने कहा और पृथ्वी को साइड में आने को कहा।
उसने प्लेटफॉर्म पर रखे पतीले को पृथ्वी के सामने रखा और फिर दही के पैकेट को फाड़कर उसमे उड़ेल दिया। साथ ही अवनि ने उसमे पानी डाला और पृथ्वी के हाथ में लकड़ी की मथनी देकर कहा,”इसका मट्ठा बनाओ”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और कहा,”हाह ! मुझे ये बनाना होगा , अरे मैं एक जिम पर्सन हूँ यार कोई ढंग का काम दो मुझे”
“पृथ्वी जी ! आपके ये मजबूत बायसेप्स देखकर ही मैंने आपको ये काम दिया है,,,,,, अब जल्दी करो वो लोग आते ही होंगे”,कहकर अवनि वापस गैस की तरफ चली आयी क्योकि अभी उसे दाल में तड़का जो लगाना था !
पृथ्वी ने मथनी उठायी और भगोने में चलाते हुए धीरे से बड़बड़ाया,”हाह ! क्या इस दिन के लिए मैंने ये बायसेप्स बनाये थे ? अरे मैंने ये इसलिए बनाये थे ताकि कभी जरूरत पड़े तो मैं आपको उठा सकू इस मथनी को नहीं,,,,,,,,!!!!”
तुमने कुछ कहा ?”,अवनि ने पलटकर पृथ्वी से कहा
“अह्ह्ह्हह नहीं ! मैंने कुछ नहीं कहा”,पृथ्वी ने कहा और अपना काम करने लगा।
सबके आने से पहले अवनि सब खाना बना चुकी थी , उसने खुद को देखा और पृथ्वी से कहा,”पृथ्वी ! सब तैयार है मैं कपडे बदलकर आती हूँ”
“हम्म्म ठीक है , मैं ये सब साफ कर देता हूँ”,पृथ्वी ने कहा और किचन में फैला सामान जमाने लगा। पृथ्वी ने देखा सिंक में कुछ बर्तन भी रखे है तो वह उस तरफ आया और बर्तन साफ करने लगा।
पृथ्वी की टीम के अलावा सुबह उसने नकुल को भी आज के डिनर के लिए इन्वाइट किया था इसलिए नकुल पहले ही चला आया और किचन की चौखट से पीठ लगाकर अपने हाथो को बांधे पृथ्वी को बर्तन धोते देख रहा था। पृथ्वी को नकुल के आने का अहसास तक नहीं था वह तो इत्मीनान से अपना काम कर रहा था। नकुल ने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा,”बर्तन धोते हुए कितने अच्छे लग रहे हो तुम पृथ्वी,,,,,,,,,,!!!”
नकुल की आवाज सुनकर पृथ्वी चौंका और पलटकर देखा तो पाया किचन की चौखट पर नकुल खड़ा मुस्कुरा रहा है। अब नकुल उसे बर्तन धोते देख ही चुका है तो बर्तन धोने में कैसी शर्म ?
ये सोचकर पृथ्वी बचे हुए बर्तन धोते हुए कहा,”धोना पड़ता है अब मैं शादीशुदा हूँ और घर के कामो के प्रति मेरी भी कुछ जिम्मेदारी बनती है”
“ओह्ह्ह्ह तुम कब से ऐसी बाते करने लगे मिस्टर पृथ्वी उपाध्याय ? वैसे कुछ भी कहो अवनि मेरी भाभी नहीं बल्कि भगवान का भेजा गया एक चमत्कार है जो मेरे साथ हुई ज्यादतियों का तुमसे बदला लेने आयी है’,नकुल ने पृथ्वी की तरफ आकर प्लेटफॉर्म पर बैठते हुए कहा
“मैंने तुम्हारे साथ क्या ज्यादत्ती की ?”,पृथ्वी ने नकुल को घूरकर पूछा
“हाह ! भूल गए ? तुमने कितनी ही बार रिया के नाम पर मुझे बलैकमेल करके मुझसे घर की सफाई करवाई , मुझसे बर्तन धुलवाए और तो और तुमने मुझे कितनी ही बार घर से बाहर सामान लेने भेजा,,,,,,,,लेकिन अब तुम्हे ये सब काम करते देखकर मुझे कितना सुकून मिल रहा है मैं तुम्हे बता नहीं सकता”,नकुल ने आहे भरकर कहा
“मैं तुम्हारा मुँह तोड़ दूंगा समझे तुम”,पृथ्वी ने गुस्से से कहा एक तो बेचारा बर्तन धो रहा था ऊपर से नकुल इस काम के लिए उसे चिढ़ा भी रहा था।
“वैसे हॉट भी लग रहे हो,,,,,पर अवनि भी क्या मस्त बदला ले रही है तुमसे”,नकुल ने एक बार फिर पृथ्वी को छेड़ा , पृथ्वी तब तक सारे बर्तन धो चुका था इसलिए अपने हाथ पोछते हुए कहा,”कोई बात नहीं बेटा , मेरी भी वक्त आएगा तब सारे बदलो का हिसाब लूंगा”
नकुल ने सुना तो हसने लगा और फिर पृथ्वी के साथ बाहर चला आया।
पृथ्वी ने नकुल से हॉल के कॉर्नर में पड़ी डायनिंग टेबल को सेंटर में सेट करने को कहा और खुद कमरे की तरफ चला आया। कमरे में आते ही पृथ्वी के कदम रुक गए। शीशे के सामने खड़ी अवनि अपनी माँग में सिंदूर भर रही थी। आज उसने वही सफ़ेद सूट पहना था जो उसने एयरपोर्ट पर पहना था। अवनि ने अपने आधे लम्बे बालों में क्लेचर लगाया और बाकि खुला छोड़ दिया।
सूट की बाजु कलाई तक आ रही थी इसलिए अवनि ने सिर्फ एक एक कड़ा पहना , गले में मंगलसूत्र , ललाट पर छोटी लाल बिंदी , आँखों में काजल , होंठो पर लिपस्टिक और गले में दुप्पटा डाले अवनि जैसे ही पलटी पृथ्वी को देखकर कहा,”तुम कब आये ?”
“बस अभी,,,,,,आप ऐसे सबके सामने जाने वाली है ?”,पृथ्वी ने खोये हुए स्वर में कहा
“क्या हुआ , ये ठीक नहीं लग रहा क्या ? मैं चेंज कर लेती हूँ”,अवनि ने कहा
पृथ्वी अवनि के पास आया और कहा,”नहीं चेंज मत कीजिये इन्फेक्ट आप इसमें बहुत ज्यादा सुंदर लग रही और मैं नहीं चाहता कोई आपको ऐसे देखे”
“तुम सच में थोड़े पागल हूँ”,अवनि ने धीरे से कहा
“वैसे एक बात पुछु , शादी के बाद लड़किया अपनी माँग में रोज रोज ये सिंदूर क्यों लगाती है ?”,पृथ्वी ने बात बदलकर कहा
“अपने पति की लम्बी उम्र के लिए”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
“हम्म्म,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने सोचते हुए कहा और एकदम से अपने दाहिने हाथ की तीसरी ऊँगली से अवनि की माँग को छुआ जिस में अवनि ने कुछ देर पहले ही सूखा सिंदूर भरा था , पृथ्वी ने थोड़ा सा अपनी ऊँगली पर लिया और अपने ललाट पर लगा लिया। ये देखकर अवनि ने हैरानी से कहा,”तुमने ये क्यों किया ?”
“मेरी लम्बी उम्र के लिए अगर आप इसे अपनी मांग में भर सकती है तो फिर आपकी लम्बी उम्र के लिए मैं भी इसे अपने ललाट पर लगा सकता हूँ,,,,,,,,,,,हाँ मैं लड़का हूँ न तो अपनी माँग में नहीं भर सकता वरना बहुत अजीब लगेगा,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने मासूमियत से कहा
अवनि ने सुना तो धीरे से हंसी और कमरे से बाहर जाते हुए कहा,”क्या होगा तुम्हारा पृथ्वी ?”
पृथ्वी ने जाती हुई अवनि को देखा और कहा,”सच अवनि , तुम्हारे बिना क्या ही होगा मेरा”
अवनि बाहर आकर नकुल से मिली और फिर उसकी मदद करने लगी। हॉल काफी साफ सुथरा और अच्छा दिख रहा था। कुछ देर बाद बेल बजी और पृथ्वी दरवाजा खोलने चला गया। पृथ्वी ने दरवाजा खोला सामने जयदीप , अंकित , मनीष , तान्या और कशिश खड़े थे।
पृथ्वी उन्हें देखकर मुस्कुराया और सबसे अंदर आने को कहा। सभी अंदर चले आये , नकुल और अवनि ने देखा तो वे भी उनकी तरफ आ गए और सबसे मिले।
तान्या , कशिश , मनीष और अंकित तो बस पृथ्वी का घर ही देख रहे थे। कितना सुन्दर था उसका घर , एक एक चीज करीने से जमी , पर्दो के रंगो से लेकर दिवार पर लेगी तस्वीरों तक सब परफेक्ट था। आज से पहले इनमे से कोई भी पृथ्वी के फ्लेट पर नहीं आया था और आता भी कैसे पृथ्वी ने कभी किसी को इतनी अहमियत दी ही नहीं।
जयदीप ने हाथ में पकड़ा बैग अवनि की तरफ बढाकर कहा,”अवनि ! बेटा ये तुम्हारे लिए,,,,,,मेरी वाइफ ने पसंद किया है आई हॉप तुम्हे पसंद आएगा”
“लेकिन मैं ये सब,,,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए अवनि ने जैसे ही पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने धीरे से अपनी पलकें झपकाकर अवनि से लेने का इशारा किया। अवनि ने जयदीप से बैग लिया और कहा,”थैंक्यू ! उन्हें भी थैंक्यू कहियेगा”
“मेम ये आपके लिए,,,,,,!!”,अंकित ने अपना गिफ्ट अवनि की तरफ बढाकर कहा
“और ये मेरी तरफ से , आप इतनी प्रिटी है तो मैंने सोचा आपके लिए स्किन केयर लू,,,,,,,,आपको ये पसंद आएगा”,तान्या ने कहा
“ये मेरी तरफ से,,,,,,आप इसे जरूर पहनना आप पर बहुत अच्छा लगेगा”,कशिश ने अपना बैग बढाकर कहा
“अह्ह्ह्ह मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैं आपके लिए चॉकलेट्स ले आया , आई हॉप आपको ये पसंद आएगी”,मनीष ने झिझकते हुए कहा
अवनि ने सबसे तोहफे लिए और सबको थैंक्यू भी कहा , सब अवनि के लिए कुछ ना कुछ लेकर आये थे लेकिन पृथ्वी के लिए कोई कुछ भी लेकर नहीं आया इसलिए उसने मासूस होकर कहा,”मेरे लिए कोई कुछ नहीं लाया ?”
“अरे सर आपसे तो हम सब ऑफिस में रोज मिलते रहते है , मेम से पहली बार मिल रहे है न इसलिए,,,,,,,,,!!!”,कशिश ने कहा
पृथ्वी ने मुँह बनाया तो जयदीप ने उसके कंधो पर हाथ रखा और धीरे से कहा,”तुम्हारे लिए आज मेरे पास एक ख़ास गिफ्ट है”
“क्यों ! नौकरी से निकाल दिया क्या मुझे ?”,पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखकर कहा
“अह्ह्ह्ह तुम कभी नहीं बदलोगे,,,,,,,,,,चलो अब फटाफट खाना लगवाओ हम सबको बहुत भूख लगी है”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने सबसे हॉल मे चलकर बैठने को कहा और खुद अवनि के साथ किचन में चला आया ताकि सबके लिए डायनिंग पर खाना लगाने में अवनि की मदद कर सके। पृथ्वी और अवनि ने मिलकर सब खाना डायनिंग पर रखा तब तक नकुल बाकि सब से बाते करता रहा। पृथ्वी के फ्लेट का माहौल आज काफी खुशनुमा हो चला था।
खाना लगने के बाद पृथ्वी ने सबसे आने को कहा। सभी कुर्सियों पर आ बैठे। जयदीप की प्लेट में अवनि ने खुद परोसा और बाकि सबकी प्लेट में पृथ्वी और नकुल ने,,,,,,,,!!
परोसने के बाद नकुल और पृथ्वी भी कुर्सी पर आ बैठे पृथ्वी ने अपनी बगल वाली कुर्सी अवनि के लिए बचाकर रखी जो की जयदीप और पृथ्वी के बीच में थी। अवनि भी अपनी कुर्सी पर आ बैठी। जयदीप ने देखा प्लेट में रखी एक कटोरी में दाल थी जिस से हींग की बहुत ही सौंधी खुशबु आ रही थी।
घी में डूबी करारी बाटी , साथ में घी और ड्राय फ्रूट्स से सराबोर चूरमा , लहसुन की चटनी , गिलास में मसाले वाला मठ्ठा था और पास ही प्लेट में सलाद रखा था। ये सब देखकर ही जयदीप की भूख दुगनी हो गयी। उसने आज से पहले बस नाम सुना तो था कभी दाल बाटी चूरमा खाया नहीं था। वह मुस्कुराते हुए खाने की प्लेट को देख रहा था और मन ही मन पृथ्वी की किस्मत पर नाज कर रहा था।
“क्या हुआ ! आप खा क्यों नहीं रहे ?”,अवनि ने धीरे से पूछा
जयदीप ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”ये देखकर ही इतना अच्छा लग रहा है खाने में तो इसका स्वाद और ज्यादा अच्छा होगा लेकिन अवनि बेटा मुझे ये तो बताओ की इसे खाते कैसे है ?”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और जयदीप की प्लेट में रखी बाटी को तोड़कर उसे चुरा , उस पर थोड़ी दाल डाली , थोड़ी चटनी और तीनो को अपने हाथ की उंगलियों से अच्छे से मसलकर मिक्स किया और एक निवाला बनाकर उठाया तो जयदीप ने कहा,” मैं तुम्हारे हाथ से खाता अच्छा नहीं लगूंगा अब तुमने निवाला बना ही लिया है तो क्यों ना तुम ये पृथ्वी को खिला दो”
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से जयदीप को देखा और अगले ही पल जयदीप की कही बात उसके जहन में आयी “तुम्हारे लिए आज मेरे पास एक ख़ास गिफ्ट है”
पृथ्वी को समझ आ गया वो खास गिफ्ट क्या था ? सबके सामने अवनि जयदीप को मना कैसे करती इसलिए वह पृथ्वी की तरफ पलटी और निवाला पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी का दिल धड़कने लगा , उसे अपने और अवनि के अलावा वहा ना कुछ दिखाई दे रहा था ना ही कुछ सुनाई उसके जहन में चल रही थी वो चंद लाईने जो एक शाम उसने नकुल से कही थी
“उसकी सबसे खूबसूरत बात ये है कि वो राजस्थान से है और इस से भी ज्यादा खूबसूरत बात ये है कि उसे दाल बाटी बनाना आता है। खाने की थाली में जब घी में डूबी बाटी को तोडा जाता है , उस पर पंचमेल की दाल डालकर उसे हाथ की पाँचो उंगलियों से जब प्यार से मसलकर एक निवाला बनाया जाता है। मुझे उसके हाथ से वो निवाला खाना है यार”
पृथ्वी ने आगे बढ़कर अवनि के हाथ से वो निवाला खाया , जैसे ही निवाला उसके हलक से नीचे उतरा पृथ्वी ने अपनी आँखे मूँद ली , उसकी आँखों में हलकी नमी थी और उसके दिल से एक आवाज आयी “इस पल का मैंने कितना इंतजार किया है मैडम जी”
( अवनि के एक्शन पर क्या आएगा पृथ्वी का रिएक्शन ? डिनर के बहाने क्या जयदीप मिटाना चाहता है अवनि और पृथ्वी के बीच की दूरिया ? अवनि के हाथ से निवाला खाकर क्यों भर आयी पृथ्वी की आँखे ? जानने की लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Wow…main to imagine kar rhi hai iss waqt Prithvi aur Avni ko…jo jo cheeze kabhi Prithvi ne Sochi thi na ab wo ho rhi hai…aur usse bhi achchi baat yeh hai ki uske Boss yani bade bhai jaideep bhi usko samjhte hai, Avni ko lekar Prithvi ki feeling ko jante hai…tabhi to usko yeh gift Mila…khar ek baat puchni hai Sanjana ji…yeh ki Avni ne yeh sara rajasthani khana banaya hai…wo ese hee banta hai, jaise aapne likha hai…aur aapko bhi yeh sab banana aata hoga na
Obviously mam ko bhi yeh sab khana bnana aata hi hoga kyuki mam jaipur mai rehti hai also itne achche se khane ko kaise banate hai usko vistar se likha hai
Aaj prithvi me v mujhe apne husband dikhe jb prithvi bina kisi srm ke brtn dho rha tha…
Mere husband v bilkul aise hi mera help krte h, infact maine unse kaha tha ki atleast guest ke samne ye sb na kre, wo log kya sochege
And u know what he said
He said, unlog ki soch ke liye mai apko kitchen me akele kaam krte nhi chhor skta, jisko jo sochna h sochne dijiye.
Wow! Di amazing tha aaj ka episode vaise mai bhi Maharashtra se hu aur maine bhi kabhi nahi khaya daal baati churma par try karna hai