Pasandida Aurat Season 2 – 30
Pasandida Aurat Season 2 – 30

पृथ्वी ने फाइल लैब में मौजूद लड़के को दी तो लड़के ने सभी एंट्री कर अवनि से बैठने को कहा। अवनि वहा पड़ी कुर्सी पर आ बैठी तो पृथ्वी भी उसकी तरफ चला आया। लड़के ने नीडल तैयार किया और लेकर अवनि की तरफ आया तो उसके हाथ में इंजेक्शन देखकर बेचारे पृथ्वी का तो दिल ही बैठ गया। लड़के ने अवनि से अपना हाथ आगे करने को कहा। अवनि ने हाथ आगे किया लेकिन इंजेक्शन देखकर डर अवनि को भी लग रहा था। पृथ्वी ने देखा कहा अवनि का सर अपनी तरफ घुमाकर कहा,”आप उधर मत देखो , डर लग रहा है तो मेरा हाथ पकड़ लो”
अवनि ने आँखे मीच ली और पृथ्वी की बाँह थाम ली लेकिन जैसे लड़के ने सेम्पल लेने के लिए इंजेक्शन लगाया अवनि ने पृथ्वी की बाँह नोच ली और एक बार फिर उसका नाख़ून पृथ्वी के हाथ में लग गया जिसका अहसास अवनि को भले ना हुआ हो लेकिन पृथ्वी को जरूर हुआ था तभी तो बेचारे ने मारे दर्द के अपने होठो को दबा लिया। सेम्पल लेने वाले लड़के की नजर जब पृथ्वी पर पड़ी तो उसने हैरानी से कहा,”आपको क्या हुआ ? सेम्पल तो इनका लिया है”
“हाह ! तुम नहीं समझोगे , वाइफ है मेरी”,पृथ्वी ने कहा
लड़का सेम्पल लेकर साइड में चला गया , अवनि ने पृथ्वी की बाँह छोड़ दी तो पृथ्वी ने कहा,”ठीक हो ?”
“हम्म्म,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने धीरे से कहा
“इसमें यूरिन सेम्पल दे दीजिये , उसके बाद आप 1 घंटा बाहर इंतजार कीजिये”,लड़के ने एक छोटा डिब्बा अवनि की तरफ बढाकर कहा और कुछ ही दूर बने वाशरूम की तरफ इशारा कर दिया।
अवनि वाशरूम की तरफ बढ़ गयी और पृथ्वी लैब के बाहर पड़े सोफे पर आ बैठा। सामने ही मेडिकार शॉप था जहा कुछ लोग अपनी दवाईयों के इंतजार में खड़े थे। पृथ्वी की नजर अपने हाथ पर पड़ी तो उसने देखा अवनि का नाख़ून जहा चुभा था वहा से हल्का खून चमकने लगा है। पृथ्वी ने उसे धीरे से अंगूठे से दबाया और अवनि के आने का इंतजार करने लगा।
सेम्पल देकर अवनि पृथ्वी के पास चली आयी और उस के बगल में आकर बैठ गयी।
“दर्द हो रहा है ?”,पृथ्वी ने अवनि से पूछा
अवनि ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने कहा,”मैं आपके लिए कुछ लेकर आउ , पानी चाय कॉफी ?”
“पानी,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा क्योकि उसे बहुत तेज प्यास लगी थी
“मैं लाता हूँ”,कहकर पृथ्वी उठा और वहा से चला गया। अवनि की नजर सामने मेडिकल स्टोर पर पड़ी तो वह उठकर उसकी तरफ गयी और कुछ सामान लेकर वापस चली आयी। पृथ्वी पानी की बोतल लेकर अवनि की तरफ आया और ढककर खोलकर बोतल अवनि की तरफ बढ़ा दी।
“पीओ इसे”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने हैरानी से अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने सहजता से कहा,”मुझसे ज्यादा तुम्हे इसकी जरूरत है , पीओ”
पृथ्वी समझ गया अवनि ऐसा क्यों कह रही थी ? वह जब से हॉस्पिटल आया था तब से अवनि के लिए कुछ ज्यादा ही परेशान था। उसने पानी पीया और बोतल अवनि की तरफ बढ़ा दी तो अवनि ने बोतल साइड में रखा और कहा,”अपना दाहिना हाथ आगे करो”
पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि के सामने किया तो अवनि ने हाथ में रखी बेंडेज का स्टिकर हटाया और पृथ्वी की बाँह पर चुभे नाख़ून पर लगाते हुए कहा,”मुझे माफ़ करना , मैंने तुम्हे कुछ ज्यादा ही नोच दिया”
पृथ्वी तो हैरानी से बस अवनि को देख रहा था आज से पहले शायद ही किसी ने उसके लिए इतनी परवाह जताई हो। बेंडेज लगाकर अवनि ने पानी का बोतल लिया और पानी पीने लगी वही बगल में बैठा पृथ्वी अपने हाथ पर लगी उस बेंडेज को देखकर मुस्कुरा रहा था जैसे वो बेंडेज नहीं अवनि का दिल हो”
पृथ्वी और अवनि रिपोर्ट्स का इंतजार करने लगे। अवनि को काफी थकान महसूस हो रही थी सुबह से उसने कुछ खाया भी नहीं था इसलिए उसका जी मिचलाने लगा। पृथ्वी ने देखा अवनि काफी रेस्टलेस लग रही है तो वह अवनि की तरफ खिसका और उसके सर को अपने कंधे से टिकाकर कहा,”थोड़ी देर की बात है फिर घर चलते है,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि अपना सर पृथ्वी के कंधे पर टिकाये बैठी रही , उसकी आँखों में भारीपन था और बुखार की वजह से बदन टूट रहा था। पृथ्वी ख़ामोशी से बैठा रहा। एक घंटे बाद रिपोर्ट्स आयी। लड़का पृथ्वी के पास आया और रिपोर्ट्स उसे थमाकर कहा,”इन्हे डॉक्टर को दिखा दीजिये”
“कुछ प्रॉब्लम ?”,पृथ्वी ने पूछा
“अह्ह्ह कोई सीरियस प्रॉब्लम नहीं है , छोटी मोटी प्रॉब्लम है वो डॉक्टर आपको बता देंगे”,लड़के ने कहा और वहा से चला गया
पृथ्वी अवनि को साथ लेकर एक बार फिर डॉक्टर के चेंबर में आया। डॉक्टर ने रिपोर्ट्स देखी और कहा,”रिपोर्ट्स नार्मल है मिस्टर पृथ्वी ! जैसा मैंने सोचा वैसा कुछ नहीं है , बुखार और सर्दी के लिए मैं दवा लिख देता हूँ आप बस कोशिश कीजिये ये फिर से ना भीगे”
“sure डॉक्टर एंड thankyou”,पृथ्वी ने कहा
डॉक्टर ने कुछ दवाईया लिखी , अवनि से वक्त पर दवा खाने और आराम करने को कहा। पृथ्वी ने दवाईया ली और अवनि को लेकर हॉस्पिटल से बाहर चला आया। बाहर आकर पृथ्वी ने अवनि से वही रुकने को गया और खुद सामने बनी दुकान पर चला गया। पृथ्वी ने वहा से अवनि के लिए जूस लिया और चला आया। उसने गिलास अवनि की तरफ बढ़ाया और कहा,”पीजिये,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने गिलास लिया वह उसे आधा ही पी पायी और बाकि आधा पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया तो पृथ्वी ने कहा,”तबियत खराब आपकी है मेरी नहीं , पीजिये”
अवनि ने थोड़ा और पिया और कहा,”इस से ज्यादा नहीं पी सकती प्लीज”
पृथ्वी ने गिलास लिया और बचा हुआ खुद ही पीकर गिलास डस्टबिन में फेंककर कहा,”अभी ठीक लग रहा है आपको ?”
“हम्म्म , घर चलते है”,अवनि ने कहा
“हम्म्म ! आईये”,पृथ्वी ने कहा और सामने से गुजरती टैक्सी रुकवाकर अवनि के साथ उसमे आ बैठा और घर के लिए निकल गया।
रास्तेभर अवनि खामोश रही उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था पृथ्वी उसे लेकर घर पहुंचा और दरवाजा खोलकर अंदर आया तो देखा नकुल ने पूरा घर अच्छे से साफ कर दिया है और बालकनी में खड़ा फोन पर किसी से बात कर रहा था नकुल ने अवनि और पृथ्वी को देखा तो उनकी तरफ चला आया और कहा,”क्या कहा डॉक्टर ने ?”
“चिंता की कोई बात नहीं है बस सर्दी बुखार है , दवा दी है और आराम करने को कहा है”,पृथ्वी ने नकुल से कहा और फिर अवनि की तरफ पलटकर बोला,”सो मैडम जी ! आज आप कोई काम नहीं करेंगी सिर्फ दवा खाएंगी और आराम करेगी,,,,,!!”
“आपको अपना ख्याल रखना चाहिए”,नकुल ने कहा
“तुम ऑफिस जाओ इनका ख्याल रखने के लिए मैं हूँ”,पृथ्वी ने हाथ में पकड़ी ट्रीटमेंट फाइल नकुल के सर पर मारकर कहा
“हाह ! तुम इतने अहसानफरामोश कैसे हो सकते हो ?”,नकुल ने इतरा कर कहा
“तुम्हारे अहसान का बदला संडे को उतार दूंगा”,पृथ्वी ने कहा
“क्या सच में ? मतलब इस संडे तुम मैच खेलने आ रहे हो,,,,,,,,मुझे यकीन नहीं होता ये चमत्कार कैसे हुआ ?”,नकुल ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“हाँ बिल्कुल ! किसी ने बहुत ही यकीन से कहा है कि मैं जीत नहीं सकता”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो उसने नजर उठाकर देखा और पाया पृथ्वी उसे ही देख रहा है। अवनि को देखकर पृथ्वी ने अपनी नजरे हटाई और नकुल को दरवाजे की तरफ करके कहा,”अह्ह्ह अब तुम जाओ भी यहाँ से,,,,,,,,!!”
“बाय , बाय भाभी , अपना ख्याल रखना”,नकुल ने कहा तो अवनि धीरे से मुस्कुराई और हामी में गर्दन हिला दी।
पृथ्वी ने दवाईया और फाइल टेबल पर रखा और अवनि की तरफ पलटकर कहा,”आप जाकर आराम कीजिये मैं आपके लिए कुछ खाने को बना देता हूँ,,,,,,,,,,,वैसे आपका क्या खाने का मन है मुझे बताईये मैं वही बना देता हूँ”
“पृथ्वी मैं ठीक हूँ , तुम्हे अपने ऑफिस जाना चाहिए,,,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा
“मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली है जब तक आप पूरी ठीक नहीं हो जाती मैं आपको छोड़कर कही नहीं जा रहा”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
“पृथ्वी ये बस मामूली सा बुखार है दवा से हो जायेगा ठीक , मेरे लिए तुम्हे इतना परेशान नहीं होना चाहिए,,,,,,,,,,,तुमने अभी अभी ऑफिस ज्वाइन किया है और छुट्टी लिया,,,,,,,,,,तुम्हे परेशान करके मुझे अच्छा नहीं लग रहा पृथ्वी”,अवनि ने कहा
“मामूली सा बुखार ? आपको पता भी है सुबह बुखार में कैसे तप रही थी आप ? कुछ देर पहले जब ब्लड सेम्पल देते देखा आपको मुझे ही पता है मैंने कैसे सम्हाला खुद को,,,,,,,,,मैं सब देख सकता हूँ लेकिन आपको दर्द में नहीं देख सकता,,,,,और मैं नहीं जा रहा ऑफिस मैंने लिव डाल दिया है,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी उसके सामने खड़ा ये लड़का आखिर किस मिटटी का बना था अवनि नहीं समझ पा रही थी। कितनी ही बार ऐसा हुआ जब अवनि दर्द में तकलीफ में थी और उसके सामने मौजूद लोगो को फर्क नहीं पड़ा और आज उसके जरा से दर्द पर पृथ्वी ऐसे परेशान हो रहा था जैसे खुद उस दर्द को महसूस कर रहा हो। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने कहा,”क्या अब भी आपको मुझसे बहस करनी है”
“क्या तुम्हे वेजिटेबल सूप बनाना आता है ?”,अवनि ने धीरे से पूछा
“अह्ह्ह नहीं मैंने कभी ट्राय नहीं किया लेकिन मैं बना लूंगा”,पृथ्वी ने कहा
“ठीक है , मुझे वही पीना है”,कहकर अवनि कमरे में चली गयी। पृथ्वी मुस्कुराया और अवनि को जाते देखकर कहा,”बच्ची हो कसम से , मेरे बिना क्या होगा आपका ?”
पृथ्वी किचन में चला आया और सबसे पहले गूगल पर सूप बनाने की रेसिपी देखी , उसने फ्रीज से कुछ सब्जिया निकाली और उन्हें बारीक़ बारीक़ काटने लगा।
पृथ्वी सब्जिया काट ही रहा था कि तभी उसका फोन बजा। पृथ्वी ने देखा फोन जयदीप का है तो उसने फोन उठाकर अपने कान और कंधे के बीच रखा और कहा,”हेलो”
– पृथ्वी ! तुम ऑफिस नहीं आ रहे तुमने आज का लिव डाला है , सब ठीक है ना ?”
“हाँ ! वो एक्चुली अवनि की तबियत खराब है तो मुझे उसके पास रुकना होगा
– तबियत खराब है , क्या हुआ उसे ?
“उसे तेज बुखार है और सर्दी हुई है
– ओह्ह्ह ! अब कैसी तबियत है उसकी ?
“अभी ठीक है , डॉक्टर को दिखाया है उन्होंने कुछ टेस्ट करवाए और दवा दी है।”
– उसे नजर लग गयी है
“हाह ! क्या कह रहे है आप ?
– हाँ ! अभी उसे मुंबई आये चार दिन नहीं हुए और तुमने उसे बाहर लेकर घूमना शुरू कर दिया , तुम्हे दिखता नहीं बाहर कितने लोगो की नजर उस पर पड़ती है और तो और तुम्हारे घरवाले वो भी तो उस से नाराज है , उनके बारे में सोचकर ही वो बीमार हुई है,,,,,,,,!!
“ये क्या बकवास कर रहे है आप ?”
– माफ़ करना मैं जरा भावुक हो गया था , तुम उसका ख्याल रखो मिस्टर देसाई के साथ आज की मीटिंग मैं अटेंड कर लूंगा लेकिन वीकेंड के बाद फाइनल मीटिंग उनके ऑफिस जाकर तुम्हे ही अटेंड करनी होगी,,,,,,,,,यू नो ये बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है”
“हाँ मैं कर लूंगा,,,,,,,,एंड थैंक्यू”
– आज अचानक ये थैंक्यू किसलिए ?
“आपने अवनि के लिए चिंता जताई , अच्छा लगा”
– ओह्ह्ह पृथ्वी अब मान भी लो मैं अच्छा इंसान हूँ , एंड लिस्टन कुछ जरूरत हो तो मुझे बताना और जब तक अवनि पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती उसके साथ रहना और उसका ख्याल रखना,,,,,,,,!!
“थैंक्यू ! आप फाइल्स मुझे मेल कर दीजिये मैं फ्री होकर घर से रिपोर्ट बना दूंगा”
– वो सब मैं कर लूंगा तुम अवनि का ख्याल रखो , रखता हूँ बाय
“बाय,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने फोन काटकर साइड में रख दिया आज पहली बार जयदीप से बात करते हुए वह बहुत ही शांत था और चिढ़ा भी नहीं उल्टा उसे अच्छा लगा कि उसके बाद इस शहर में कोई है जिसे अवनि की परवाह है। पृथ्वी मुस्कुराया और ख़ुशी ख़ुशी अवनि के लिए सूप बनाने लगा। पृथ्वी ने अवनि के लिए सूप बनाया , एक कटोरी में निकाला और पहले खुद चखा
“उम्म्म्म ये तो काफी अच्छा बना है,,,,,,,,,,क्या बात है पृथ्वी अवनि के साथ रहकर तुम तो मास्टर सेफ बन गए हो”,पृथ्वी ने अपना ही कंधा थपथपाते हुए कहा और जैसे ही उसके हाथ ने अपनी गर्दन को छुआ तो उसे महसूस हुआ कि सिर्फ अवनि को ही नहीं बल्कि उसे भी बुखार है। पृथ्वी ने ध्यान नहीं दिया और कटोरी चम्मच प्लेट में रखकर किचन से बाहर निकल गया।
अवनि कमरे में बिस्तर पर लेती आराम कर रही थी हालाँकि नींद नहीं आयी थी उसे बस उसने अपनी आँखे मूँद रखी थी। पृथ्वी ने प्लेट बिस्तर के साइड में पड़ी टेबल पर रखा और कहा,”अवनि,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की एक आवाज से अवनि उठकर बैठ गयी। पृथ्वी ने कुर्सी खिसकाई और बिस्तर के बगल में आ बैठा। उसने प्लेट अवनि की गोद में रखी और खाने का इशारा किया। अवनि ने चम्मच उठाया और एक घूंठ पीकर पृथ्वी की तरफ देखा तो पाया कि पृथ्वी उसकी प्रतिक्रया का ही इंतजार कर रहा है।
“अच्छा बना है”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”मतलब मेरी मेहनत रंग लायी”
अवनि ने सुना तो धीरे से मुस्कुराई और सूप पीने लगी। पृथ्वी वही बैठकर प्यार से उसे देखता रहा अवनि को खाते हुए देखना उसे हमेशा से पसंद था शायद इसलिए क्योकि पहली बार उसने अवनि को खाते हुए ही देखा था और उसी पल उसे उस से प्यार हो गया। अवनि ने देखा पृथ्वी उसे ही देख रहा है तो उसने कहा,”तुमने कुछ खाया ?”
“अह्ह्ह्ह नहीं मैं बाद में कुछ खा लूंगा,,,,,,आप पीजिये ना”,पृथ्वी ने कहा
पृथ्वी मुझे और सूप चाहिए,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा जबकि उसकी कटोरी अभी भी आधी भरी थी , पृथ्वी उठा और जैसे ही प्लेट लेने के लिए हाथ बढ़ाया अवनि ने कहा,”किचन में दूसरा प्लेट कटोरी नहीं है क्या ?”
“है ना”,पृथ्वी ने कहा
“हाँ तो उसमे लेकर आओ”,अवनि ने मुँह बनाकर कहा
पृथ्वी धीरे से हंसा क्योकि आज अवनि बच्चो जैसी जिद कर रही थी।
पृथ्वी कमरे से बाहर चला गया वापस आया तो उसके पास प्लेट में एक कटोरी सूप और था वह कुर्सी पर आ बैठा और प्लेट अवनि की तरफ बढ़ाई तो अवनि ने प्लेट उसकी तरफ खिसकाई और कहा,”पीओ इसे”
“मैडम जी ! मैंने कहा न मैं बाद में,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने इतना ही कहा कि अवनि ने उसकी बात काटकर कहा,”पृथ्वी तुमने भी सुबह से कुछ खाया नहीं है , सो प्लीज”
पृथ्वी अवनि की बात कैसे टाल सकता था वह धीरे धीरे सूप पीने लगा।
दोनों ने चुपचाप सूप पीया इसके बाद पृथ्वी ने बर्तन उठाये और किचन में रखने चला गया। हॉल में आकर उसने अवनि की दवाईया उठायी और लेकर वापस कमरे में चला आया। वह एक बार फिर कुर्सी पर आ बैठा। उसने बुखार की दवा निकाली और अवनि की तरफ बढ़ा दी। अवनि ने दवा ली और खाकर पानी पी लिया , उसने पृथ्वी से दवा का पत्ता लिया और एक टेबलेट निकालकर कहा,”अपना हाथ आगे करो”
पृथ्वी ने अपना हाथ आगे किया तो अवनि ने टेबलेट उसकी हथेली पर रख दी। पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने कहा,”खाओ इसे”
अवनि की बात सुनकर पृथ्वी उसे देखने लगा तो अवनि ने प्यार से कहा,”तुम भी तो कल मेरे साथ बारिश में भीगे थे ना , तुम्हे भी बुखार है”
पृथ्वी ने सुना तो उसकी आँखों में नमी उभर आयी उसे बुखार था ये बात सिर्फ वह जानता था। पृथ्वी नम आँखों से अवनि को देखने लगा।
पृथ्वी को आँखों में नमी देखकर अवनि का मन अंदर ही अंदर दुखने लगा। उसने पानी का गिलास पृथ्वी की तरफ बढ़ाया और कहा,”दवा खाओ , तुम्हे भी इसकी जरूरत है”
पृथ्वी ने दवा खाई पानी पिया, अपनी नजरे झुकाई और रोआँसा होकर कहा,”मेरे बिना कहे आपने ये समझ लिया कि मुझे इस दवा की जरूरत है और फिर आप कहती है मैं आपसे प्यार ना करू , इतना आज तक मुझे किसी ने नहीं समझा है जितना आप समझती है”
“तुम रो रहे हो ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी ने नीचे गर्दन किये ना में सर हिला दिया जबकि उसकी आँखे नम थी और वह अवनि को दिखाना नहीं चाहता था। पृथ्वी उठा और कहा,”आप आराम कीजिये , मैं बाहर हूँ”
पृथ्वी कमरे से बाहर निकल गया और अवनि लेट गयी। दवा के असर से जल्दी ही उसे नींद आ गयी।
पृथ्वी ने बर्तन लाकर किचन के सिंक में रख दिए उसकी आँखों में अभी भी नमी थी और ये क्यों थी पृथ्वी नहीं समझ पा रहा था ? बस जब अवनि ने उसे भी दवा खाने को कहा तो उसका मन भारी हो गया। पृथ्वी ने अपनी नम आँखों को पोछा और किचन से बाहर चला आया। पृथ्वी हॉल में सोफे पर आ बैठा और मन ही मन खुद से कहने लगा,”मुझे अवनि से झूठ नहीं बोलना चाहिए था , मेरे एक झूठ की वजह से वो इस हाल में है , वो भीगी इसलिए उसे बुखार हुआ और अब उसे दवाईया खानी पड़ रही है,,,,,,,,
उसकी कड़वी याद मिटाने के लिए मैंने उसे एक और नयी वजह दे दी बारिश से नफरत करने की,,,,,,,,मुझे माफ़ करना अवनि मैं सच में पागल हूँ,,,,,,,,,,,इतना पागल कि तुम्हारी ख़ुशी के लिए मैंने तुम्हे ही परेशानी में डाल दिया बस तुम ठीक हो जाओ आज के बाद मैं ऐसी बेवकूफी नहीं करूंगा,,,,,,,,पर तुम कितनी अच्छी हो अवनि , मैंने तो तुम्हे बताया भी नहीं फिर भी तुम्हे अहसास हो गया कि मुझे बुखार है और दवा की जरूरत है,,,,,,,,तुम बहुत अच्छी हो अवनि और इसके बाद तो मुझे तुम से और ज्यादा प्यार हो रहा है”
पृथ्वी ने दवा खायी थी इसलिए उसे भी हलकी हलकी नींद आने लगी और वह वही सोफे पर लेट गया।
दवा के असर से दोनों दोपहर तक सोते रहे। अवनि अपने कमरे में सो रही थी और पृथ्वी बाहर हॉल में सोफे पर , दरवाजे की बेल बजने से पृथ्वी की नींद टूटी। वह उठा और आँखे मसलते हुए दरवाजे की तरफ आया , जैसे ही पृथ्वी ने दरवाजा खोला उसके चेहरे के भाव बदल गए , आँखों में बेचैनी और चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये,,,,,,,,,,!!!
( क्या अवनि के प्यार में पृथ्वी भूल रहा है अपनी दूसरी जिम्मेदारियां ? पृथ्वी के कहे बिना कैसे जान लिया अवनि ने उसका दर्द ? आखिर किसे देखकर पृथ्वी की आँखों में उभरे बेचैनी के भाव ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Iska matlab ye hai ki barish Hui nhi thi, balki Prithvi ne naklee barish karwai thi…aur shayad wo Avni k thik hone k baad usko barish ka sach btaye ..lakin yeh Prithvi k ghar pe kon aaya, jisko dekh kar wo preshan ho gaya…kahin uske parivar m se to koi nhi aaya hai na…but kuch bhi bolo… Prithvi aur Avni ek dusre k liye purn hai…dono ek dusre ko achche se samjhte hai…itna hee nhi Avni janti thi ki injection k time uske naakhoon Prithvi ki bahna m chubh gaye to usne bandez lagai…fir usko soop pilakar dawai bhi kilai… agar koi aapke liye ese karenga to mann bhari ho hee jayega…jaise Prithvi ka ho gaya