Pasandida Aurat Season 2 – 29
Pasandida Aurat Season 2 – 29

बारिश में भीगने की वजह से अवनि को तेज बुखार था और अवनि को बुखार में देखकर पृथ्वी परेशान हो गया। उसने अच्छे से अवनि को कम्बल ओढ़ाया और कमरे से बाहर चला आया। अवनि अभी सो रही थी इसलिए पृथ्वी ने उसे नहीं उठाया और किचन में चला आया। पृथ्वी जब बीमार होता था तो लता उसे दवा दे दिया करती थी लेकिन वह अवनि को कौनसी दवा दे उसे तो कुछ पता भी नहीं था। उसने अपना फोन निकाला और लता को फोन करने का सोचा लेकिन अगले ही पल उसे लता के कहे शब्द आये और वह उदास हो गया।
एक बार फिर कमरे में चला आया और अवनि का हाथ छूकर देखा , शरीर अब भी भट्टी सा तप रहा था। पृथ्वी एक बार फिर किचन में आया एक बर्तन में पानी लिया और वापस कमरे में चला आया। उसने कुर्सी खिसकाई और अवनि के बगल में बैठ गया। बर्तन को साइड में रखा और अपने धुले हुए रुमाल को भीगाकर , उसे निचोड़ा और समेटकर अवनि के ललाट पर रख दिया। ऐसा उसने अवनि की लिखी किताब में पढ़ा था कि ऐसा करने से बुखार कम हो जाता है।
अवनि नींद में थी और बुखार से उसका चेहरा भी कुछ कुछ लाल हो चुका था जैसे ही पृथ्वी ने उसके ललाट पर पट्टी रखी उसके चेहरे पर सुकून के भाव दिखाई देने लगे। पृथ्वी बार बार रुमाल को पानी में भिगोता और अवनि के ललाट पर रख देता। काफी देर बाद उसने अवनि का ललाट और हाथ छूकर देखा बुखार अब भी था लेकिन तापमान पहले से थोड़ा कम,,,,,,,,,,,,!!!”
“ऐसे नहीं चलेगा , मुझे अवनि को हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए , हाँ यही सही रहेगा”,पृथ्वी कहते हुए उठा और किचन में चला आया जहा प्लेटफॉर्म पर उसने अपना फोन रखा था। पृथ्वी ने फोन पर डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लिया और उनसे बात कर बाहर आया तो देखा अवनि उठ चुकी है और कमरे से बाहर आ रही है।
पृथ्वी अवनि के पास आया और कहा,”अरे आप उठ क्यों गयी ? आपकी तबियत खराब है आप लेट जाईये , मैंने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लिया है थोड़ी देर में हम हॉस्पिटल जायेंगे”
“मैं ठीक हूँ पृथ्वी,,,,,,,,आहहहछी”,अवनि ने कहा और साथ ही उसे छींक आयी। बुखार के साथ साथ अवनि को सर्दी भी हुई थी ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”ठीक ? आपको पता भी है सुबह आपको कितना तेज बुखार था और अभी देखिये सर्दी भी हुई है,,,,,,,,हम डॉक्टर के पास जायेंगे , और आप यहाँ खड़ी मत रहिये अंदर जाकर आराम कीजिये”
“पृथ्वी मैं ठीक हूँ,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने देखा कि अवनि उसकी बात नहीं सुन रही है उलटा उस से जिद कर रही है तो उसने थोड़ा कठोरता से कहा,”मैडम जी ! आप चाहती है मैं आप पर गुस्सा करू ? मैंने कहा ना आप बीमार है आराम कीजिये,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की डांट सुनकर अवनि खामोश हो गयी और पृथ्वी को देखने लगी तो पृथ्वी ने उसी कठोरता से कहा,”क्या ?”
“मुझे एक कप चाय चाहिए”,अवनि ने रोआँसा होकर धीरे से कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसकी कठोरता पल भर में गायब हो गयी और उसने कहा,”अरे तो ऐसा कहिये ना , आप बैठिये मैं लेकर आता हूँ”
पृथ्वी किचन में चला गया और अवनि उसे जाते देखकर बड़बड़ाई,”खड़ूस,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि का बदन दुःख रहा था और सर्दी की वजह से नाक भी बंद था , सर में हल्का दर्द था और बदन बुखार से अभी भी तप रहा था। वह धीरे धीरे चलकर हॉल में चली आयी और सोफे पर आ बैठी।
पृथ्वी किचन में आकर अपने और अवनि के लिए चाय बनाने लगा तभी डोरबेल बजी पृथ्वी बाहर आया देखा अवनि दरवाजा खोलने के लिए उठने वाली है तो उसने अवनि से बैठे रहने का इशारा किया और खुद दरवाजे की तरफ बढ़ गया। पृथ्वी ने दरवाजा खोला सामने नकुल खड़ा था। नकुल अंदर चला आया और सोफे पर बैठी अवनि को देखकर कहा,”हेलो भाभी ! कैसी है आप ?”
“ठीक हूँ,,,,,,,,,!!”,अवनि ने फीका सा मुस्कुरा कर कहा
पृथ्वी दरवाजा बंद कर नकुल की तरफ आया और कहा,”कुछ ठीक नहीं है सुबह से बुखार है और सर्दी हुआ है इनको”
“अरे तो फिर तुम यहाँ क्यों खड़े हो ? इन्हे डॉक्टर के पास लेकर जाओ”,नकुल ने कहा
“अपॉइंटमेंट लिया है अभी जाऊंगा,,,,,,,,,,तुम बताओ तुम सुबह सुबह यहाँ क्या कर रहे हो ?”,पृथ्वी ने पूछा
नकुल ने अपनी जेब से एक गुलाबी रंग का कागज निकाला और कहा,”मैं तुम्हे ये वाटर टैंक का बिल देने आया था,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने जैसे ही सुना जल्दी से नकुल के हाथ से बिल लिया और जेब में डालकर कहा,”अह्ह्ह्हह इसकी जरूरत नहीं थी वैसे तुम यहाँ क्यों खड़े हो मेरे साथ आओ मेरी हेल्प करो चलो,,,,,,,,!!!”
नकुल को कुछ समझ नहीं आया और पृथ्वी उसे खींचते हुए वहा से किचन में ले गया। अवनि की तबियत खराब थी इसलिए उसने नकुल और पृथ्वी की बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया वह अपनी गर्दन पीछे सोफे के हत्थे पर झुकाये , आँखे मूँदे बैठी थी।
“पागल है क्या अवनि के सामने ये सब क्यों कहा ? उसे शक हो जायेगा”,पृथ्वी ने किचन में आकर दबे स्वर में नकुल से कहा
“तो क्या ये सीक्रेट रखना था ?”,नकुल ने हैरानी से पूछा
“तुमने कभी किसी से प्यार किया है ?”,पृथ्वी ने पूछा
“किया है न , मैं अपनी रिया से बहुत प्यार करता हूँ,,,,,,,,,पर तुम ये क्यों पूछ रहे हो ?”,नकुल ने कहा
“तो फिर तुम ऐसे बेव्कूफीभरे सवाल कैसे कर सकते हो ? जब हम किसी से प्यार करते है तो ये हमारी जिम्मेदारी है कि हम उसके सारे सपने पुरे करे”,पृथ्वी ने कहा
“हाह ! ऐसा करने पे आया ना तो किसी दिन रोड पर आ जाऊंगा मैं , रिया के सपने बहुत महंगे है भाई घर जाएगा मेरा उनमे,,,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने किचन प्लेटफॉर्म पर बैठते हुए कहा
“लेकिन अवनि के सपने महंगे नहीं है और महंगे हो भी तो मैं उसका हर सपना पूरा करूंगा,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने विश्वास से भरकर कहा
“अरे मैं तो भूल गया”,नकुल ने कहा
“क्या ?”,पृथ्वी ने पूछा
“यही की पृथ्वी बाबू अवनि के प्यार में मजनू बन चुके है,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने हँसते हुए कहा
“चुप कर , वो कप्स दे”,पृथ्वी ने नकुल के सर पर एक चपत लगाकर कहा
नकुल ने हँसते हुए रेंक में रखे कप उठाये और पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिए। पृथ्वी ने चाय कप में छानी एक कप नकुल को दिया बाकि दो लेकर किचन से बाहर निकल गया। नकुल भी अपनी चाय लेकर बाहर चला आया।
पृथ्वी ने देखा अवनि आँखे मूँदे सर सोफे के हत्थे से लगाए बैठी है तो ना जाने क्यों अवनि को इस हाल में देखकर उसे अजीब सी तकलीफ हुई। उसने अवनि की चाय का कप टेबल पर रखा और धीरे से कहा,”अवनि,,,,,,,,,,,चाय”
अवनि ने आँखे खोली और सीधी होकर बैठी , उसने कप उठाया और ख़ामोशी से अपनी चाय पीने लगी। उदासी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी।
पिछले कुछ दिन से पृथ्वी रोज सुबह अवनि का हँसता मुस्कुराता चेहरा देखता था लेकिन आज उतरा हुआ चेहरा देखकर उसे अच्छा नहीं लग रहा था। पृथ्वी अपनी चाय लेकर अवनि के सामने खाली पड़े सोफे पर बैठ गया , नकुल भी उसके पास चला आया और बगल में बैठकर अपनी चाय पीने लगा।
अवनि ने अपनी चाय खत्म की और कप टेबल पर रखा। वह उठी और कहा,”पृथ्वी अब मैं ठीक हूँ , मुझे नहीं लगता हमे डॉक्टर के पास जाना चाहिए”
“पर मुझे लगता है और हम जा रहे है,,,,,,,,,और अगर अब आपने जिद की तो मुझे जबरदस्ती आपको उठाकर नीचे ले जाना पडेगा,,,,,,,,आप चाहती है मैं ऐसा करू ?”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर कहा
अवनि ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने प्यार से कहा,”तो अंदर जाईये , अपनी हालत ठीक कीजिये और बाहर आईये”
अवनि चुपचाप वहा से चली गयी ये देखकर नकुल ने पृथ्वी से कहा,”तुम्हे उसे ऐसे डाटना नहीं चाहिए , देख रहे हो न वो बीमार है”
“मैंने उनको उनके लिए डाँटा है बेटा ! देखा न तुमने अभी क्या कहा सुबह से 4 बार सुन चूका हूँ मैं ये बात,,,,,,,,वो खुद को लेकर बहुत लापरवाह है , अपनी परवाह नहीं करती जानता हूँ मैं इसलिए तो महादेव ने मुझे उनकी जिंदगी में भेजा है”,पृथ्वी ने खाली कप टेबल पर रखकर कहा
“तुम कब से महादेव में विश्वास करने लगे ?”,नकुल ने हैरानी से पूछा
पृथ्वी ने नकुल की तरफ देखा और कहा,”जब आपकी जिंदगी में कोई सही इंसान आता है और आपको उसे बेइंतहा मोहब्बत होती है तो आप उस हर चीज में विश्वास करते है जो उस से जुडी हो,,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ लगता है अवनि ने सुधार दिया है तुम्हे,,,,,,,,,!!”,नकुल ने पृथ्वी को छेड़ते हुए कहा
“अभी मैं इतना बिगड़ा नहीं हु कि उसे मुझे सुधारने की जरूरत पड़े,,,,,,,चलो अब उठो और काम पर लग जाओ”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा
“What do you mean ? काम पर लग जाओ”,नकुल ने उठकर कहा
“मैं अवनि को हॉस्पिटल लेकर जा रहा हूँ तब तक तुम ये घर साफ़ कर दो प्लीज,,,,,,,,फिर दोनों भाई मिल के खाना बनाएंगे ठीक है”,पृथ्वी ने कमरे की तरफ जाते हुए कहा
“अरे लेकिन मुझे ऑफिस भी जाना है”,नकुल चिल्लाया
“उसमे अभी 2 घंटे बाकी है , चुपचाप घर साफ करो”,कहकर पृथ्वी अवनि को लेने कमरे में चला गया और बेचारा नकुल मायूसी से उसे देखने लगा
शीशे के सामने खड़ी अवनि तौलिये से अपना चेहरा पोछ रही थी , उसमे कपडे बदलने की हिम्मत नहीं थी और ना ही अपने बाल बनाने की उसने बस मुँह धोया और बाथरूम से बाहर चली आयी। पृथ्वी ने देखा अवनि कुछ ज्यादा ही थकी हुई और बीमार लग रही है तो वह उसके पास आया और उसके हाथ से तौलिया लेकर कहा,”मुझे दीजिये”
पृथ्वी अवनि के सामने खड़े होकर धीरे धीरे उसका मुँह पोछने लगा।
उसने अवनि के बाल नहीं बनाये बस बालों की लटो को हाथ की उंगलियों से जमाया और सही किया। ये सब करते हुए उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह खामोश था और अवनि एकटक उसे देख रही थी।
पृथ्वी ने बिस्तर पर रखा अवनि का दुपट्टा उठाया और उसे अवनि के कंधो पर रखा और जमाकर कहा,”चले ?”
अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी , पृथ्वी ने टेबल पर रखा अवनि का फोन उठाया और उसे साथ लेकर कमरे से बाहर निकल गया। नकुल अभी भी हॉल में खड़ा था उसने अवनि और पृथ्वी को जाते देखा तो कहा,”ध्यान से जाना,,,,,और जरूरत हो तो मुझे फोन करना”
पृथ्वी जाते जाते पलटा और मुस्कुरा दिया जवाब में नकुल भी मुस्कुरा दिया और फिर घर साफ़ करने लगा
सिरोही , राजस्थान
ऑफिस जाने के लिए सिटी बस का इंतजार करती सुरभि के चेहरे पर गुस्से और खीज के भाव थे , कुछ देर पहले ही उसकी फोन पर अनिकेत से बहस हुयी थी और सुरभि ने गुस्से में आकर फोन काट दिया। पिछले कुछ दिनों से अनिकेत और सुरभि के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था। अनिकेत के घरवाले उस पर शादी का दबाव बना रहे थे और अनिकेत सुरभि पर ,, सुरभि शादी के लिए तैयार थी लेकिन वह अपनी नौकरी छोड़कर वापस उदयपुर जाना नहीं चाहती थी।
एक तरफ उसके सपने उसकी नौकरी थी और दूसरी तरफ अनिकेत का प्यार , अनिकेत भी अपने घरवालों की तरफ था और चाहता था कि सुरभि नौकरी छोड़कर हमेशा के लिए उदयपुर में रहे।
सुरभि ने अवनि से भी इस बारे में बात की लेकिन वह अवनि को बार बार परेशान करना नहीं चाहती थी। सुरभि ने कलाई पर बंधी घडी में समय देखा ऑफिस का टाइम हो रहा था और बस अभी तक नहीं आयी थी। झुंझलाकर सुरभि स्टॉप से बाहर आयी और पैदल ही ऑटो स्टेण्ड की तरफ चल पड़ी।
चलते चलते सुरभि अनिकेत से हुई बहस के बारे में सोच रही थी और सड़क पार करने के लिए आगे बढ़ गयी। उसने बगल से आती गाड़ी पर ध्यान नहीं दिया लेकिन गाडी में बैठे सिद्धार्थ ने सही वक्त पर ब्रेक मार दिया और सुरभि को टक्कर लगते लगते बची।
गाड़ी अचानक सुरभि के पास आकर रुकी तो उसकी तंद्रा टूटी , उसने गाड़ी में बैठे सिद्धार्थ को देखा तो अगले ही पल उसकी भँवे तन गयी।
सिद्धार्थ गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर आया और सुरभि की तरफ आते हुए कहा,”तुम्हे क्या हर बार टकराने के लिए मैं ही मिलता हूँ ?”
“ओह्ह्ह्ह मैं तो भूल ही गयी थी इस पुरे शहर में , नहीं नहीं पूरी दुनिया में एक ही तो मर्द है The Prince Charming सिद्धार्थ माथुर,,,,,,,लड़किया जिस से टकराने के बहाने ढूंढती है”,सुरभि ने बहुत ही प्यार से इतरा कर कहा ,
सिद्धार्थ को कुछ समझ आता इस से पहले वह गुस्से से चिल्लाई,”भगवान् ने तुम्हे दो दो आँखे दी है , इंसान ने इन लोमड़ी जैसी आँखों पर इतना बड़ा नजर का चश्मा दिया है क्या तुम्हे सड़क पर चलते इंसान नहीं दिखते,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ डरकर पीछे हटा और सुरभि को देखकर हैरानी से कहा,”हाह ! मुझे लगा तुम थोड़ा सुधर गयी होगी लेकिन नहीं तुम आज भी उतनी ही बद्तमीज हो”
“ओह्ह्ह्ह वाओ ! तमीज का ठेका तो जैसे तुमने ले रखा है,,,,,,,,,,,,,अवनि का पीछा छोड़कर तुम जो हीरो बने हो वो अवनि के लिए बने हो मेरे लिए नहीं,,,,,,!!!”,सुरभि ने कहा
“मुझे तुम्हारे सामने हीरो बनने का कोई शौक नहीं है , अब हटो मेरे रास्ते से और अगली बार मेरी गाड़ी के सामने आयी आना न तो ब्रेक नहीं मारूंगा सीधा चढ़ा दूंगा गाड़ी,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने गुस्से से कहा और जाकर अपनी गाड़ी में बैठ गया।
बाहर खड़ी गुस्से से उसे देखती रही , सिद्धार्थ ने गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ाई और ब्रेक मारा तो सुरभि डरकर पीछे हट गयी। सिद्धार्थ वहा से निकल गया।
सुरभि ने अपना बैग उसकी गाड़ी के पीछे फेंका और कहा,”और आज के बाद अगर तुम मेरे सामने आये तो मैं मुँह तोड़ दूंगी तुम्हारा,,,,,,,,,,,हाह ! ये सारे मर्द एक जैसे होते है एरोगेंट , इगोस्टिक और बद्तमीज,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह”
“मैडम कहा जाएँगी ?”,ऑटो वाले ने सुरभि के सामने ऑटो रोककर पूछा
अनिकेत और सिद्धार्थ की वजह से सुरभि का दिमाग पहले से गर्म था उसने ऑटोवाले को देखा और गुस्से से कहा,”जहन्नुम में , चलोगे ?”
सुरभि को गुस्से में देखकर बेचारा ऑटोवाला चुपचाप आगे बढ़ गया। सुरभि ने सड़क पर गिरा अपना बैग उठाया और घर जाने वाले रास्ते की तरफ चल पड़ी। उसमे अब इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इस मूड के साथ ऑफिस जाकर काम का कबाड़ा करे , उसने आज छुट्टी लेना ही बेहतर समझा और घर के लिए निकल गयी
सिटी हॉस्पिटल , मुंबई
“अवनि के नाम से एक अपॉइंटमेंट है”,हॉस्पिटल के रिसेप्शन पर खड़े पृथ्वी ने कहा
“पूरा नाम क्या है ?”,लड़की ने कहा
“अवनि उपाध्याय”,पृथ्वी ने कहा
“उम्र ?”,लड़की ने पूछा
“अह्ह्ह 31,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“हस्बेंड का नाम ?”,लड़की ने एक बार फिर पूछा
“पृथ्वी उपाध्याय”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर कहा जो कुछ ही दूर बेंच पर बैठी थी , उसका उतरा हुआ चेहरा देखकर पृथ्वी को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था और लड़की उस से सवाल किये जा रही थी
“एड्रेस ?”,लड़की ने कहा तो इस बार पृथ्वी ने कहा,”एक काम करता हूँ मैं आपको अपना पूरा बायोडाटा दे देता हूँ,,,,,,,,,,आपको दिखाई नहीं देता वहा उसकी तबियत खराब है,,,,,,,,फाइल दीजिये मुझे”
पृथ्वी को गुस्से में देखकर लड़की सहम गयी और फाइल उसकी तरफ बढाकर कहा,”सीधा जाकर लेफ्ट , रूम नंबर 5″
“थैंक्यू,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने फाइल लेकर कहा। वह अवनि की तरफ आया और उसे चलने का इशारा किया। पृथ्वी अवनि को लेकर डॉक्टर के केबिन में चला आया। डॉक्टर ने अवनि से अपनी बगल में पड़ी कुर्सी पर बैठने का इशारा किया। उन्होंने अवनि को चेक किया और कहा,”बुखार बहुत तेज है , आप पानी में भीगी थी क्या ?”
पृथ्वी ने सुना तो याद आया कल रात पुरे आधे घंटे दोनों बारिश में भीगे थे।
“जी डॉक्टर कल रात बारिश में,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने धीरे से कहा
“बारिश ? अजीब बात है कल तो बारिश,,,,,,,,,,,!!”,डॉक्टर ने इतना ही कहा कि पृथ्वी बीच में बोल पड़ा,”हुई थी ना , पनवेल साइड हुई थी आप तो जानते ही है मुंबई का मौसम कभी भी बारिश हो जाती है”
“हाँ ! भीगने की वजह से इन्हे सर्दी हो हो गयी है और उसी की वजह से बुखार भी है ,, मैं ये कुछ टेस्ट लिख देता हूँ आप करवा लीजिये डाउट क्लियर हो जाएगा”,डॉक्टर ने फाइल में टेस्ट लिखते हुए कहा
पृथ्वी ने फाइल ली और कहा,”थैंक्यू डॉक्टर”
“आप ये टेस्ट करवाकर रिपोर्ट ले आईये उसके बाद मैं दवा लिखूंगा आई हॉप निमोनिया ना हो वरना एडमिट करना पड़ सकता है”,डॉक्टर ने कहा
एडमिट का नाम सुनकर पृथ्वी के चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये ये देखकर डॉक्टर ने कहा,”रिलेक्स ! आप पहले टेस्ट करवा लीजिये फिर देखते है”
“हम्म्म थैंक्यू”,पृथ्वी ने कहा और अवनि के साथ केबिन से बाहर निकला और लेबोरेट्री की तरफ चला आया
( आखिर नकुल ने पृथ्वी को पानी के टेंक का बिल क्यों दिया ? सिद्धार्थ और सुरभि की ये मुलाकात क्या लाने वाली है कहानी में कोई नया ट्विस्ट ? क्या अवनि की रिपोर्ट्स में आएगी कोई गड़बड़ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Mujhe to lag raha hai ye baarish prithwi ne hi karwai thi
Vo pani tank ka Bill bhi usi ka hai shayad
Prithwi kitna pyara hai
Har Har mahadev🙏🙏 dii
Prithvi gaya Avni ko lekar Dr k pass aur Nakul karenga safai☺️☺️…kitna sahi dost hai Nakul Prithvi ka ..aur wo Prithvi ki sunta bhi hai… idhar Dr ne test k liye to bol diya, par darr lag rha hai ki kahin Avni ko nimoniya na ho jaye ….to udhar Surbhi bechari fansi hui hai… Aniket samjhta kyu nhi hai ki jis job k liye Surbhi ne itni mehnat ki hai, wo uski ese nhi chod sakti hai…kya wo apni job chod sakta hai Surbhi k liye…