Pasandida Aurat Season 2 – 26
Pasandida Aurat Season 2 – 26

जयदीप की बातो में आकर पृथ्वी ने सबको डिनर के लिए हाँ कह दिया लेकिन उसने अवनि से तो इस बारे में पूछा ही नहीं। वह इस बारे में सोच ही रहा था कि तभी उसका फोन बजा। पृथ्वी उठा अपनी टेबल की तरफ आया स्क्रीन पर अवनि का नंबर देखकर पृथ्वी ने जल्दी से टिश्यू से अपने हाथ पोछे और फोन कान से लगाकर कहा,”ह ह हेलो”
“तुमने खाना खाया ?”,अवनि ने उतने ही आराम से पूछा जितना जल्दबाजी में पृथ्वी ने हेलो कहा
“हाँ अभी खाया,,,,,,,,बहुत अच्छा बना था और मैंने ही नहीं मेरी टीम और जयदीप सर ने भी खाया,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि मुस्कुराई और कहा,”इसलिए मैंने थोड़ा ज्यादा रखा”
“मुझे यकीन नहीं हो रहा आपने मुझे फोन किया है ?”,पृथ्वी ने कहा
“ऐसा क्यों ?”,अवनि ने पूछा
“मैं हमेशा सपना था , हमारी शादी होगी , आप मेरे लिए लंच बनाएंगी और जब मैं ऑफिस में रहूँगा तो आप लंच टाइम में फोन करके मुझसे पूछेगी कि मैंने खाना खाया या नहीं,,,,,,,,,,,आज वो सच हो रहा है तो मुझे यकीन नहीं हो रहा”,पृथ्वी ने कहा
“सपने देखा करो पृथ्वी वो पुरे होते है,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“सच में पुरे होते है ?”,पृथ्वी ने कहा
“हाँ ! और ये मैंने तुम से मिलने के बाद महसूस किया है”,अवनि ने कहा
पृथ्वी तो मारे ख़ुशी के धड़ाम से कुर्सी पर आ बैठा और ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”ऐसे सेंकडो सपने मैंने आपके साथ देखे है मैडम जी”
“अच्छा पृथ्वी सुनो ! मुझे तुम्हे कुछ बताना है”,अवनि ने कहा
“हाँ बताईये ना मैडम जी,,,,,,वैसे मुझे भी आपको कुछ बताना है”,पृथ्वी ने कहा
“ठीक है पहले तुम बताओ”,अवनि ने कहा
“अरे नहीं ! पहले आप बताईये”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी ! बताओ ना क्या बात है ?”,अवनि ने कहा
“नहीं पहले आप , मेरी बात वैसे भी इतनी इम्पोर्टेन्ट नहीं है”,अवनि ने कहा
“ठीक है फिर आज शाम तुम घर आओगे तब मैं तुम्हे बताउंगी,,,,,डरना मत ये अच्छी बात है , मैं तुम्हारे लौटने का इंतजार करुँगी”,अवनि ने सहजता से कहा
“मैं अभी आ जाता हूँ”,पृथ्वी ने बेसब्र होकर कहा
“पृथ्वी ! तुम ऑफिस में हो , तुम्हे ऐसे रोज रोज अपना काम छोड़कर नहीं आना चाहिए , मैंने कहा ना मैं तुम्हारे लौटने का इंतजार करुँगी,,,,,,,,,,,शाम में मिलते है ठीक है,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने पृथ्वी को समझाया।
“अह्ह्ह्ह ठीक है मैं शाम में मिलता हूँ,,,,,बाय”,पृथ्वी ने कहा और फोन काट दिया। उसने अपने फोन को रखा और अपनी गर्दन पीछे झुकाकर बच्चो की तरह मचलते हुए कहा,”अह्ह्ह्ह अब ये शाम कब होगी ?”
“तुम आजकल खुद से कुछ ज्यादा ही बातें करने लगे हो , तुम ठीक हो न ?”,अंकित ने केबिन में आकर अपनी कुर्सी की तरफ जाते हुए कहा
पृथ्वी उठा और कहा,”हाँ मैं बिल्कुल ठीक हूँ मुझे क्या हुआ है ?”
“शादी के बाद तुम काफी बदले बदले नजर आ रहे हो”,अंकित ने पृथ्वी को ध्यान से देखकर कहा
“हाह ! ऐसा क्या देखा तुमने ?”,पृथ्वी ने हैरानी से कहा
“तो फिर तुम्हारे कान लाल क्यों है ? ऐसा तो तभी होता है जब हम किसी बात पर शरमाते या बहुत ज्यादा खुश होते है”,अंकित ने कहा
पृथ्वी को कुछ देर पहले अवनि से की बातें याद आ गयी तो उसने कहा,”ऐसा कुछ नहीं है , मैं हाथ धोकर आया उसके बाद सीनियर्स के साथ मीटिंग है फाइल तैयार रखो,,,,,,,,,,,!!”
“जब भी इसे कुछ ऐसा पूछो इसे काम याद आ जाता है , पर कुछ भी कहो पृथ्वी धीरे धीरे बदल तो तुम रहे हो पर ये बदलाव अच्छा लग रहा है तुम पर,,,,,,,,,,,,,,ऐसे ही खुश रहो”,पृथ्वी को जाते देखकर अंकित बड़बड़ाया और फिर अपने काम में बिजी हो गया
शाम में ऑफिस से बाहर आया और साफ़ मौसम देखकर उसे सुबह अवनि से कही बात याद आयी। उसने आसमान की तरफ देखा और कहा,”मैंने उस से कहा है कि आज बारिश होगी लेकिन ये क्या आपने तो मौसम साफ रखा है , सुबह तो आप बरसने के मूड में थे अब क्या हुआ ? मेरी ख़ुशी देखी नहीं जा रही आपसे,,,,,,,,,,,हाह आपको लग रहा होगा बारिश होगी तो मुझे अवनि के साथ अच्छा वक्त बिताने का मौका मिलेगा ,
मेरे वो छोटे छोटे क्यूट सपने पुरे होंगे जो मैंने देखे है,,,,,,,,,हाँ तो ऐसा ही है , मैं चाहता हूँ आज बारिश हो और मैं उसे बाहर लेकर जाऊ , बारिश से जुड़ा उसका वो डर हमेशा के लिए दूर कर दू जो उसे हर बार तकलीफ देता है।
इतना तो कर सकते है ना आप , मेरे लिए ना सही मेरी मैडम जी के लिए कर दीजिये आखिर वो आपको इतना मानती जो है,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी आसमान की तरफ देखते हुए ये सब बाते कर रहा था कि जयदीप ने आकर उसका कंधा थपथपया। पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने जयदीप की तरफ देखा तो जयदीप ने कहा,”ये आसमान में देखकर किस से बातें कर रहे हो तुम ?”
“किसी से भी नहीं,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“हाह ! अभी मैंने सुना तुम कुछ बकबक कर रहे थे , कभी कभी तुम सच में बहुत अजीब लगते हो पृथ्वी,,,,,,,,अब मेरी शक्ल क्या देख रहे हो घर जाओ तुम्हारी मैडम जी तुम्हारा इंतजार कर रही होंगी”,जयदीप ने कहा और आगे बढ़ गया
“हाह ! क्या बकवास है ? अब मैं अवनि की तरह इनको भी अजीब लगने लगा,,,,,,,,,,ओह्ह्ह अवनि मेरा इंतजार कर रही होगी मुझे जाना चाहिए,,,,,,,,,,,,,आपसे तो मैं बाद में बात करूंगा”,कहते कहते पृथ्वी ने सर उठाकर ऊपर देखा और वहा से चला गया
पृथ्वी घर पहुंचा और बेल बजा दी। अवनि ने दरवाजा खोला और पृथ्वी बाहर खड़ा प्यार से उसे देखने लगा। अवनि को हैरानी हुई कि पृथ्वी अंदर क्यों नहीं आ रहा जबकि पृथ्वी पुरे 10 घंटे बाद अवनि को देख रहा था। पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि ने कहा,”तुम अंदर नहीं आओगे ?”
“अह्ह्ह हाँ,,,,,,,,!!”,कहते हुए पृथ्वी अंदर चला आया अवनि ने दरवाजा बंद किया और पृथ्वी के हाथ से बैग और टिफिन लेकर कहा,”इन्हे मैं रख देती हूँ”
पृथ्वी ने सिर्फ टिफिन अवनि को दिया और बैग खुद लेकर कमरे की तरफ बढ़ गया। अवनि ने टिफिन खोलकर वाशबेसिन में रखा और फिर हाथ धोकर पृथ्वी के लिए चाय चढ़ा दी।
अवनि चाय लेकर हॉल में आयी तो देखा पृथ्वी ने कपडे नहीं बदले है वह ऑफिस के कपड़ो में ही हॉल के सोफे पर बैठा है। अवनि ने चाय का कप लाकर उसके सामने रखा और कहा,”तुमने कपडे नहीं बदले ?”
पृथ्वी ने चाय का कप उठाया और अवनि की तरफ देखकर कहा,”आप भूल गयी ना मैडम जी , मैंने कहा था ना आज शाम बारिश होगी और हम बाहर जायेंगे”
अवनि ने बालकनी के बाहर देखा शाम हो चुकी थी और हल्का अँधेरा भी होने लगा था लेकिन मौसम एकदम साफ बारिश का कोई नामोनिशान तक नहीं था।
“तुम्हे लगता है आज बारिश होगी ?”,अवनि ने अपनी चाय लेकर बगल वाले सोफे पर बैठते हुए कहा
“बिल्कुल होगी , मुंबई की बारिश का और मोहब्बत का कोई भरोसा नहीं है मैडम जी , कब हो जाये किसे पता ?”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर शरारत से कहा तो अवनि चुपचाप अपनी चाय पीने लगी और पृथ्वी मुस्कुराने लगा
पलकें झुकाये अवनि अपनी चाय पी रही थी और कुछ देर बाद उसने धीरे से कहा,”आज सुबह मैं तुम्हारी आई से मिली थी”
पृथ्वी ने सुना तो चाय पीते पीते रह गया। उसका दिल धड़कने लगा और चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये इसलिए नहीं कि अवनि लता से मिली थी बल्कि इसलिए कि कही उन्होंने अवनि को पेपर्स के बारे में तो नहीं बता दिया। पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा अवनि की पलकें अभी भी झुकी हुई थी और उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे उसने धीरे से कहा,”मैंने उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने,,,,,,,,,,,,,!!!”
“और उन्होंने आपसे बात नहीं की , हर बार की तरह आपसे बुरा कहा यही ना मैडम जी”,पृथ्वी ने उदास होकर कहा
अवनि ने अपना सर उठाया और पृथ्वी की तरफ देखकर कहा और धीरे से मुस्कुराकर कहा,”लेकिन तुम्हारे बाबा ने मुझसे बात की पृथ्वी , उन्होंने कहा मैं तुम्हारी आई की कही बातों को दिल पर ना लू , एक दिन सब ठीक हो जाएगा,,,,,,,,,,तुम्हारे बाबा को देखकर लगा जैसे मेरे पापा मेरे सामने खड़े है,,,,,,,,,वो बिल्कुल उनकी तरह है,,,,,,,,,,!!!”
“वो आपके भी बाबा है मैडम जी और देखना एक दिन आई भी आपको समझेगी और बहुत ज्यादा प्यार करेंगी आपसे,,,,,,,,बस आप उनकी बातो से कभी अपना मन दुखी मत करना,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“मुझे अपने लिए दुःख नहीं होता पृथ्वी मुझे बस तुम्हारे लिए बुरा लगता है,,,,,,,तुम उनसे दूर हो , परिवार से दूर रहना कैसा होता है मैं ये देख चुकी हूँ,,,,,,,,,मैं कभी नहीं चाहती थी तुम उनसे दूर,,,,,,,,,,,!!!”,कहते कहते अवनि की आँखों में नमी और चेहरे पर उदासी उभर आयी
“शशशशश बस ! मैं उनसे दूर नहीं हूँ मैडम जी और आपकी वजह से तो बिल्कुल भी नहीं इसलिए बार बार अपने दिमाग में ये सब लाना बंद कीजिये आप,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो ख़ामोशी से पृथ्वी की तरफ देखने लगी , आज से पहले उसने इतना मजबूत लड़का नहीं देखा था
“अच्छा आप मुझे कुछ बताने वाली थी”,अवनि को खोया देखकर पृथ्वी ने कहा
अवनि की तंद्रा टूटी तो उसने पृथ्वी को अपने मेल के बारे में बताया।
पृथ्वी ने सुना तो ख़ुशी से उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी और उसने कहा,”ये तो बहुत अच्छी बात है अवनि ! एक काम करता हूँ मैं कल ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूँ,,,,,,,आपके साथ चलता हूँ”
“नहीं पृथ्वी ! तुमने अभी अभी ऑफिस ज्वाइन किया है तुम्हे अपने काम पर फोकस करना चाहिए,,,,,,,,वैसे भी ये ज्यादा दूर नहीं है नवी मुंबई में है तो मैं कैब से चली जाउंगी”,अवनि ने कहा
“अगर मैंने अवनि के साथ जाने की जिद की तो इसे लगेगा मैं इसे कंट्रोल कर रहा हूँ लेकिन इतने बड़े शहर में मैं इसे अकेले कैसे जाने दे सकता हूँ ?”,पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा और फिर जैसे ही उसने अवनि के मुँह से नवी मुंबई सुना तो कहा,”मेरा ऑफिस भी नवी मुंबई में ही है , मैं वहा तक आपके साथ चलता हूँ फिर वहा से आपके लिए कैब बुक कर दूंगा,,,,,,,,,,,और अब आप ये मत कहना कि आप खुद मैनेज कर लेंगी , आई नो आप बहुत समझदार है स्ट्रांग है इंडिपेंडेंट है लेकिन मेरा भी कुछ फर्ज बनता है , मैं आपका पति हूँ और मैं नहीं चाहूंगा आप परेशान हो,,,,,,,,,,,तो बस आप,,,,,,,,,,,!!!”
“ठीक है हम साथ जायेंगे”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा
“मतलब कल हम साथ साथ ट्रेवल करेंगे,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह खुश होकर कहा
“इसमें इतना खुश होने वाली कौनसी बात है ?”,अवनि ने कहा
“बस है , आप नहीं समझेगी,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा
“अच्छा तुम मुझे क्या बताने वाले थे ?”,अवनि ने खाली कप टेबल पर रखते हुए पूछा
पृथ्वी को याद आया कि उसने अवनि से पूछे बिना ही अपनी टीम और बॉस को संडे नाईट डिनर पर बुला लिया है। उसे उलझन में देखकर अवनि ने कहा,”क्या हुआ कोई परेशानी है क्या ?”
“अरे नहीं नहीं मैडम जी वो बस मुझसे एक गलती हो गयी है”,पृथ्वी ने धीरे से कहा
“कैसी गलती ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहने लगा,”अह्ह्ह दरअसल वो आज ऑफिस में लंच के टाइम हम सबने साथ खाना खाया , उन्हें आपके हाथो से बना खाना बहुत पसंद आया और मैंने आपसे पूछे बिना ही उन्हें इस संडे घर पर डिनर के लिए इन्वाइट कर दिया”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा कर कहा,”पर इसमें क्या गलत है पृथ्वी तुम उन्हें बुला सकते हो”
“हम्म्म लेकिन आप इतने लोगो के लिए खाना कैसे बनाएंगी ? मेरा मतलब वो 5 लोग है,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी ! तुम मेरी फॅमिली से मिले हो न , जब मैं उदयपुर में थी तो रोज रात का खाना मैं ही बनाया करती थी , मैं बना लुंगी,,,,,,,,,,इतनी सी बात के लिए तुम इतना परेशान हो रहे थे और इसे गलती बता रहे थे,,,,,,,,,,सच में पागल हो तुम”,अवनि ने प्यार से कहा
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और कहा,”गलती ये है कि मैंने उनसे कहा है आप उनके लिए दाल-बाटी-चूरमा बनाएंगी”
अवनि ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखने लगी और ये देखकर पृथ्वी ने बच्चो की तरह मचलकर कहा,”देखा ! मैंने कहा था ना मुझसे गलती हुयी है , मुझे उनसे बहस करनी ही नहीं चाहिए थी खामखा मैंने उन्हें डिनर पर इन्वाइट किया और तो और आपसे बिना पूछे ये भी कहा कि आप उनके लिए ये सब बनाएगी ! अह्ह्ह्ह मैं सच में गधा हूँ,,,,,,,,,,, प्लीज आप मुझसे नाराज मत होना और गुस्सा तो बिल्कुल मत करना मैं उन्हें मना कर दूंगा,,,,,,,,,,,कोई बहाना बना दूंगा”
अवनि ने पृथ्वी को परेशान देखा तो उसके होंठो को पकड़कर उसका मुँह बंद किया और कहा,”कितना बोलते हो ना तुम , मुझसे कहते हो मैं काम सोचा करू लेकिन तुम तो मुझसे भी ज्यादा सोचते हो,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी को चुप देखकर अवनि ने अपना हाथ हटाया और कहा,”मैं बना लुंगी , तुम्हे उन्हें मना करने की जरुरत नहीं है और इसके लिए मैं तुम से बिल्कुल नाराज नहीं हूँ ना ही तुम पर गुस्सा आ रहा है इसलिए ये सब सोचना बंद करो”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुरा दिया। अवनि उठी खाली कप उठाये और किचन की तरफ जाने लगी तो पृथ्वी ने कहा,”आप सच में ये सब बनाने वाली है ?”
अवनि पलटी और कहा,”अब आपने अपनी टीम से कह ही दिया है तो मुझे तो अपने राजस्थान की लाज बचानी होगी ना मिस्टर उपाध्याय”
अवनि तो चली गयी लेकिन उसके मुँह से निकला “आप” पृथ्वी के दिल पर किसी तीर की तरह जा लगा और पृथ्वी का हाथ उसके सीने पर,,,,,,,,,,,,!!!!
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संजना किरोड़ीवाल


“अगर मैंने अवनि के साथ जाने की जिद की तो इसे लगेगा मैं इसे कंट्रोल कर रहा हूँ लेकिन इतने बड़े शहर में मैं इसे अकेले कैसे जाने दे सकता हूँ ?”,पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा और फिर जैसे ही उसने अवनि के मुँह से नवी मुंबई सुना तो कहा,”मेरा ऑफिस भी नवी मुंबई में ही है , मैं वहा तक आपके साथ चलता हूँ फिर वहा से आपके लिए कैब बुक कर दूंगा,,,,,,,,,,,और अब आप ये मत कहना कि आप खुद मैनेज कर लेंगी , आई नो आप बहुत समझदार है स्ट्रांग है इंडिपेंडेंट है लेकिन मेरा भी कुछ फर्ज बनता है , मैं आपका पति हूँ और मैं नहीं चाहूंगा आप परेशान हो,,,,,,,,,,,तो बस आप,,,,,,,,,,,!!!”
“अगर मैंने अवनि के साथ जाने की जिद की तो इसे लगेगा मैं इसे कंट्रोल कर रहा हूँ लेकिन इतने बड़े शहर में मैं इसे अकेले कैसे जाने दे सकता हूँ ?”,पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा और फिर जैसे ही उसने अवनि के मुँह से नवी मुंबई सुना तो कहा,”मेरा ऑफिस भी नवी मुंबई में ही है , मैं वहा तक आपके साथ चलता हूँ फिर वहा से आपके लिए कैब बुक कर दूंगा,,,,,,,,,,,और अब आप ये मत कहना कि आप खुद मैनेज कर लेंगी , आई नो आप बहुत समझदार है स्ट्रांग है इंडिपेंडेंट है लेकिन मेरा भी कुछ फर्ज बनता है , मैं आपका पति हूँ और मैं नहीं चाहूंगा आप परेशान हो,,,,,,,,,,,तो बस आप,,,,,,,,,,,!!!”
“अगर मैंने अवनि के साथ जाने की जिद की तो इसे लगेगा मैं इसे कंट्रोल कर रहा हूँ लेकिन इतने बड़े शहर में मैं इसे अकेले कैसे जाने दे सकता हूँ ?”,पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा और फिर जैसे ही उसने अवनि के मुँह से नवी मुंबई सुना तो कहा,”मेरा ऑफिस भी नवी मुंबई में ही है , मैं वहा तक आपके साथ चलता हूँ फिर वहा से आपके लिए कैब बुक कर दूंगा,,,,,,,,,,,और अब आप ये मत कहना कि आप खुद मैनेज कर लेंगी , आई नो आप बहुत समझदार है स्ट्रांग है इंडिपेंडेंट है लेकिन मेरा भी कुछ फर्ज बनता है , मैं आपका पति हूँ और मैं नहीं चाहूंगा आप परेशान हो,,,,,,,,,,,तो बस आप,,,,,,,,,,,!!!”
Baki sab to thik hai…par yeh barish Hui ki nhi… Prithvi sahi bolta hai ki Mumbai ki barish ka koi bharosa nhi hai…lakin yaha to subha se sham ho gai hai, lakin barish nhi hui hai…kahin esa na ho ki Prithvi wait hee krta rha jaye aur barish na ho…aur bahar jane ka plan cancel ho jaye…but kuch bhi badal rha hai aur usko bachchi wali harkate, sach m bahot pyari hai