साक़ीनामा – 28

Sakinama – 28 Sakinama – 28 मृणाल की लिखी किताब से सागर को एक क्लू मिला कि मृणाल बनारस में हो सकती है। सागर उठा और तुरंत नीचे चला आया। उसने हर्ष को बाहर बुलाया और कहा,”मुझे तेरी गाड़ी चाहिए”“गाडी ,...

साक़ीनामा – 27

Sakinama – 27 Sakinama – 27 सागर फ़टी आँखों से उस तस्वीर को देखता रहा उसकी आँखों के सामने वो सारे पल घूमने लगे जो उस किताब में लिखे थे। सागर ने अपना बैग उठाया और तुरंत वहा से निकल गया।...

साक़ीनामा – 26

Sakinama – 26 Sakinama – 26 रात के 2 बज रहे थे और सागर उस खाली पड़े स्टेशन की बेंच पर बैठा हाथ में पकड़ी किताब को देखे जा रहा था। उसके जहन में सिर्फ मृणाल का ख्याल था। राघव आज...

साक़ीनामा – 25

Sakinama – 25 पुरे दो महीने बाद मैं अपने शहर में थी। मैं कितनी बीमार थी ये मुझे अपने घर आने के बाद अहसास हुआ। अपने घर आने के बाद मेरी हिम्मत टूट चुकी थी। मैं दिनभर बिस्तर पर रहने लगी...

साक़ीनामा – 24

Sakinama – 24 Sakinama – 24 “9 बजे से पहले बस नहीं है क्या ?”,मैंने पूछा“नहीं मैडम”,उसने कहा तो मैं और परेशान हो गयी ना मेरे पास ज्यादा पैसे थे और ना ही वहा मैं किसी को जानती थी। पहली बार...
error: Content is protected !!