Love You जिंदगी – 51

Love You Zindagi – 51

Love you Zindagi
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नैना के इस बर्ताव के बाद अवि थोड़ा अपसेट हो गया रात के खाने के बाद वह ऊपर छत चला आया। अवि नैना को पसंद करता था वह सिर्फ नैना में अच्छाईया देखता था नैना की कमियों पर कभी उसका ध्यान ही नहीं गया। अवि चंडीगढ़ के नैया गांव में पला बढ़ा लड़का है , उसकी परवरिश गांव में हुई और वहा के माहौल के हिसाब से अवि का स्वाभाव काफी शांत और सुलझा हुआ था। उसे गुस्सा बहुत कम आता था और उसकी वजहरही है उसकी मॉम ! 10वी में आने के बाद अवि के मम्मी-पापा उसे और उसकी छोटी बहन को लेकर चंडीगढ़ में शिफ्ट हो गए हालाँकि उन्होंने अपनी गांव की जमीन और घर को बेचा नहीं था हर साल सब छुट्टियों में वहा जाते थे। अवि के पापा का चंडीगढ़ में अब खुद का बिजनेस था और उसकी मॉम डॉक्टर थी सभी खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। अवि के पापा चाहते थे की अवि भी उनके बिजनेस में हाथ बटाये लेकिन अवि ने फोटोग्राफी को अपना करियर चुना। चंडीगढ़ में उसे कई बार अवार्ड मिल चुके थे बस
अवि अब पुरे इंडिया में अपनी फोटोग्राफी दिखाना चाहता था।
आज अवि खुद को काफी अकेला ,महसूस कर रहा था। छत पर खड़ा आसमान को ताक ही रहा था की कुछ देर बाद घूमते घामते सार्थक वहा चला आया ! अवि को गुमसुम खड़े देखकर सार्थक ने उसके पास आकर कहा,”और भाई कैसे हो ? आजकल आपसे मिलना ही नहीं होता।”
“थोड़ा बिजी था , तुम बताओ लायब्रेरी नहीं जा रहे आजकल ?”,अवि ने सवाल किया
“हां वो मैंने जॉब के लिए अप्लाई किया है , उसी की तैयारी कर रहा हूँ।”,सार्थक ने कहा
“तुमने इंजीनियरिंग की है ना ?”,अवि ने फिर सवाल किया
“हां , लेकिन नौकरी कहा है ? सेल्फ रिस्पेक्ट बचाने के लिए जॉब तो करना पडेगा ना। बाय द वे आपकी फोटोग्राफी कैसी चल रही है ?”,इस बार सार्थक ने सवाल कर डाला।
“अच्छी चल रही है दिल्ली में 3 एग्जीबिशन और है उसके बाद वापस चंडीगढ़ , चंडीगढ़ में मेरा खुद का स्टूडियो होगा”,अवि ने कहा
“फोटो स्टूडियो ? उसके लिए इतनी मेहनत कर रहे हो आप वो तो कही भी खोल सकते हो”,सार्थक ने हँसते हुए कहा तो अवि मुस्कुराने लगा और कहा,”फोटो स्टूडियो नहीं उसमे उन फोटोज पर काम किया जाएगा जो मैग्जीन , मूवीज , शोज के पोस्टर्स पर होती है। छोडो तुम नहीं समझोगे लेकिन उन एक तस्वीर की कीमत होती है लाखो में , क्योकि वो यूनिक होती है।”
“क्या सच में ? भाई आप तो बहुत अमीर हो यार”,सार्थक ने हैरानी से कहा
“अरे नहीं ! अभी जो कुछ भी खर्च हो रहा है वो सब मॉम डेड का है मेरा कुछ भी नहीं लेकिन जल्दी ही मैं उनके लिए बहुत कुछ करूंगा”,अवि ने कहा
“हां ये सही कहा आपने मैं भी पैसे कमाकर अपने मम्मी पापा के लिए एक घर लेना चाहता हूँ , मेरा ये सपना है”,सार्थक ने कहा
“देखो सार्थक अगर मन लगाकर काम करोगे तो हर सपना पूरा होगा , दिल्ली आये मुझे कुछ वक्त ही हुआ है लेकिन मैंने बहुत से लोगो को पल पल यहाँ बदलते देखा है , किसी को किसी से कोई मतलब नहीं लेकिन तुम सबसे मिलकर मुझे लगता है जैसे मैं चंडीगढ़ में ही हूँ।”,अवि ने कहा
“हां भाई आपसे मिलकर मुझे भी यही लगता है जैसे मैं आपको काफी सालो से जानता हूँ और इसके पीछे की वजह है आपका नेचर जो की काफी अच्छा है”,सार्थक ने मुस्कुरा कर कहा
“अरे नहीं ऐसा भी नहीं है मैं इतनी जल्दी किसी के साथ फ्रेंक नहीं होता हूँ”,अवि ने कहा। सार्थक से बात करके अवि को थोड़ा अच्छा लग रहा था दोनों वही खड़े बातें करते रहे कुछ देर बाद सार्थक ने कहा,”भाई बात आगे बढ़ी ?”
“कौनसी बात ?”,अवि ने कहा
“अरे वही नैना के साथ , मेरा मतलब आपने उसे प्रपोज किया था रिस्पॉन्स मिला ?”,सार्थक ने पूछा
“उसे देखकर लगता है कोई पॉजिटिव रिस्पॉन्स आएगा ! वो लड़की ना दुनिया सबसे उलझी हुई लड़की है मतलब उसे बुरे में बुरा नजर आता है सबको आता है पर उसे तो अच्छे में भी बुरा ही नजर आता है। उसे समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। एक पल में वो लड़की इतनी क्यूट बन जाती है की किसी को भी उस से प्यार हो जाये और अगले ही पल इतनी भयानक की अच्छे खासे इंसान को हार्ट अटैक आ जाये।”,अवि ने कहा
“अहंमम मतलब नैना से झगड़ा हुआ है आपका”,सार्थक ने कहा तो अवि खामोश हो गया और फिर कहने लगा,”पता नहीं वो ऐसी क्यों है ? मैंने उसे इम्प्रेस करने के लिए उसकी हेल्प नहीं की थी बल्कि उसके साथ साथ शीतल और रुचिका की भी हेल्प की थी।”
“अरे भाई वो बहुत अच्छी है बस गुस्सा थोड़ा जल्दी आता है उसे लेकिन मुझे पक्का यकीन है एक दिन वो आपके प्यार को जरुर समझेगी”,सार्थक ने कहा
“काश ऐसा हो”,कहते हुए अवि दिवार से पीठ लगाकर ऊपर आसमान में देखने लगा !!

सुबह जब नैना उठी तो देखा विपिन जी और आराधना अपना बैग पैक कर रहे थे नैना आंखे मसलते हुए उनके पास आयी और कहा,”डेड आप और मॉम पेकिंग कर रहे हो , व्हाई ?”
“दिल्ली आना था आ गए , घूमना था घूम लिए , तुम लोग अच्छी जगह अच्छे लोगो के बिच हो देख लिया तसल्ली हो गयी अब वापस जा रहे है। ऑफिस भी तो देखना है ना”,विपिन जी ने जैसे ही कहा नैना अंदर ही अंदर ख़ुशी से डांस कर रही थी लेकिन बाहर उदास चेहरा लिए खड़ी हो गयी। उसे ऐसे देखकर आराधना ने कहा,”अरे नैना ! क्या बेटा ख़ुशी ख़ुशी जाने दो हमे ऐसे भेजेगी ?”
“अरे नहीं मॉम ये तो ख़ुशी के ही आंसू है।”,नैना ने कहा तो आराधना ने उसका कान पकड़कर कहा,”नौटंकीबाज”
शीतल और रुचिका भी वहा चली आयी और नैना विपिन जी की हेल्प करने लगी। पेकिंग के बाद नैना ने कहा,”आज आप लोगो के लिए नाश्ता मैं बनाऊगी”
आराधना और विपिन जी ने सूना तो हैरानी से नैना को देखने लगे वह नैना जिसे सिर्फ चाय बनाते देखा था आज नाश्ता बनाने की बात कर रही थीं। नैना ने शीतल और रुचिका से नहाकर आने को कहा और खुद किचन एरिया की और चली आयी। विपिन जी और आराधना को उसने रेस्ट करने को कहा। नैना ने फ्रीज से कुछ सब्जिया निकाली उन्हें आड़ा टेढ़ा काटकर रखा। डिब्बे में रखा बेसन और सूजी लिया और बर्तन में निकाला नैना उसे मिक्स करने लगी। नैना ने बालो को समेटकर उस में रबर खोंस रखा था जिनमे से एक दो लटें उसके गालों पर झूल रही थी नैना ने उन्हें हाथ से साइड किया तो हाथ पर लगा बेसन गाल पर भी लग गया और कुछ नाक पर भी। नैना बड़ी मेहनत से सब कर रही थी ये देखकर विपिन जी को उस पर बहुत प्यार आ रहा था उन्होंने आराधना से कहा
“देखो तुम खामखा परेशान हो रही थी नैना को लेकर कितना मन लगाकर नाश्ता बना रही है हम सबके लिए”
“हां आज पहली बार मैंने इसे ये सब करते देखा है”,आराधना ने खुश होकर कहा नैना में तो उन्हें परफेक्ट बहू नजर आ रही थी जो अगले घर जाकर उनका नाम रोशन करेगी। विपिन जी मुस्कुराये और कहा,”आराधना बच्चो का घर से दूर रहना उन्हें आजादी ही नहीं देता बल्कि जिम्मेदारियों का ज्ञान भी कराता है और हमारी नैना भी धीरे धीरे इन सब जिम्मेदारियों को सीख ही जाएगी”
“हां और फिर एक अच्छा सा लड़का देखकर हम इसकी शादी करवा देंगे”,आराधना ने चहकते हुए कहा
“अरे ! धीरे धीरे उसने सुन लिया तो नाश्ते के साथ साथ एक लंबा लेक्चर सुनने को भी मिलेगा”,विपिन जी ने कहा


उधर नैना अपने काम में लगी थी उसे चाय बनाने के लिए दूध चाहिए था देखा वहा दूध का पैकेट नहीं है नैना को याद आया आज वह बाहर टेबल से दूध लाना ही भूल गयी थी। नैना बे हाथ धोये और दरवाजा खोलकर बाहर आयी बाहर एक टोकरीनुमा बॉक्स लगा हुआ था जिसमे अक्सर दूध वाला पैकेट रखकर चला जाता था। नैना ने देखा टोकरी में दो पैकेट रखे है उसने दोनों उठाये और सोचने लगी,”ये आज दूधवाला दो पैकेट क्यों रखकर गया है ?”
“एक मेरा है”,पीछे सीढ़ियों से उतरते अवि ने कहा नैना ने पलटकर देखा और एक पैकेट वापस उसी जगह रखकर चली गयी। अवि ने पैकेट उठाया और बंद दरवाजे की और देखने लगा नैना की नाराजगी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। अवि बुझा हुआ सा मन लेकर अपने फ्लैट में चला आया और दूध का पैकेट रखकर नहाने चला गया।
नैना ने सबके लिए बेसन और सूजी से बने वेज चीला बनाया साथ में स्पाइसी वेजिटेबल्स का मिक्सचर और अदरक वाली चाय। सब साथ मिलकर नाश्ता कर रहे थे नैना ने दोनों चीज बहुत अच्छी बनाई थी। विपिन जी ने जैसे ही खाया नैना की तारीफ करने लगे। आराधना को भी सब बहुत पसंद आया उन्हें तो सब सपने जैसा लग रहा था की नैना ने बनाया है। विपिन जी रुचिका की और पलटे और कहा,”अरे रुचि बेटा , वो क्या नाम है अपने पडोसी का ? हां अवि अवि उसे भी बुला लो ,, वैसे भी आज हम लोग जा रहे है वो भी साथ नाश्ता कर लेगा”
“पापा वो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!”,नैना ने कहना चाहा लेकिन आराधना बिच में ही बोल पड़ी और कहा,”अरे हां रूचि बुला लो इस बहाने थैंक्यू भी बोल देंगे उसे कल उसने मेरी बहुत मदद की”
रुचिका बिना नैना की और देखे अवि को बुलाने चली गयी। अवि शायद नहाकर आया ही था इसलिए कहा,”तुम चलो मैं आता हूँ थोड़ी देर में”
रुचिका वापस आकर नाश्ता करने लगी कुछ देर बाद अवि आया और विपिन जी से कहा,”अंकल आपने बुलाया था , कुछ काम था ?”
“अरे नहीं ! आओ बैठो नाश्ता करते है”,विपिन जी ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपने पास बुलाते हुए कहा
“अरे नहीं नहीं अंकल आप लोग कीजिये !”,अवि ने नैना की और देखा जो की चुपचाप खा रही थी।
“अरे बैठो भी , वैसे भी आज हम लोग वापस लखनऊ जा रहे है , और हां कभी टाइम निकालकर आना वहा तुम्हे वहा के पकवान खिलाता हूँ”,नैना के पापा ने कहा तो अवि मुस्कुरा दिया और कहा,”हम्म्म जरूर”
विपिन जी ने अवि को अपनी बगल में ही बैठा लिया और नैना से कहा,”अरे नैना बेटा अवि के लिए भी नाश्ता ले आओ !”
नैना को अवि का उसके पापा की बगल में बैठना अच्छा नहीं लग रहा था उसने खुद पर काबू रखते हुए कहा,”हां डेड बिल्कुल अभी लाती हूँ”
नैना उठकर किचन की और चली गयी और रुचिका शीतल एक दूसरे को देखते हुए आँखों ही आँखों में सवाल कर रही थी की फिर से नैना कुछ गड़बड़ ना कर दे अवि के साथ ! नैना किचन में आयी उसने प्लेट में वेज चीला रखा और उस पर चम्मच भरकर लाल मिर्च डाली और उसे फोल्ड कर दिया। मिक्स वेज में भी उसने ग्रीन चिली सॉस मिला दिया और मन ही मन कहा,”अब देखना कैसे तुम्हारे सारे इमोशंस बाहर निकलते है मिस्टर अवि”
नैना ने वह प्लैट लाकर अवि के सामने रख दी और खुद उसके सामने जाकर बैठ गयी और अपना नाश्ता करने लगी। अवि चुप बैठा था उसके मन में नैना के गुस्से को लेकर ख्याल चल रहा था कही वह फिर से उसे गलत समझकर कुछ उलटा सीधा ना बोल दे। अवि को खोया हुआ देखकर विपिन जी ने कहा,”अरे अवि खाओ बेटा , नैना ने खुद अपने हाथ से बनाया है !”
अवि ने एक टुकड़ा तोड़ा और खाने लगा जैसे ही हलक से निचे उतरा अवि को महसूस हुआ उसमे बहुत ज्यादा मिर्च थी। उसका मुंह जलने लगा और गला भी वह समझ गया नैना ने जान बूझकर ऐसा किया है लेकिन अवि नैना के मम्मी पापा के सामने नैना को नीचा नहीं दिखाना चाहता था इसलिए चुपचाप खाता रहा। अवि ने तो कुछ नहीं कहा लेकिन उसका चेहरा बता रहा था की उसे तकलीफ हो रही है उसका चेहरा ;लाल हो चुका था आँखों में आंसू उभर आये। विपिन जी ने देखा तो कहा,”अरे बेटा क्या हुआ ? लगता है तुम तीखा कम खाते हो , लो पानी पीओ”
अवि एक साँस में ग्लास का सारा पानी पि गया लेकिन मुंह जल रहा था उसने उठते हुए कहा,”अंकल मेरा हो गया”
अवि वहा से उठकर बालकनी में चला आया और सिसकने लगा वह तेजी से साँस लेने लगा उसकी आँखे आंसुओ से भरी थी। अवि को समझ नहीं आ रहा था की आखिर नैना उस से इतनी नफरत क्यों कर रही थी ? उसने अपनी आँखों के किनारे साफ किये और वापस चला आया , अवि का चेहरा अभी भी लाल था । बाकि सब नाश्ता कर चुके थे। आराधना और विपिन जी ने तीनो बच्चियों को गले लगाया और उन्हें अपना ध्यान रखने को कहा। विपिन जी ने बैग उठाना चाहा तो अवि ने कहा,”अंकल मैं ले चलता हूँ।”
घूमते घामते कही से सार्थक भी चला आया और बाकि के बैग्स लेकर अवि के साथ निकल गया। शीतल रुचिका और नैना भी उनके साथ चली आयी निचे आकर आराधना और विपिन जी अपनी गाड़ी में बैठे और नैना को अपना ख्याल रखने को और फ़ोन करते रहने को कहा। अवि को विपिन जी ने अपने पास बुलाया और कहा,”तुम बहुत अच्छे हो बेटा , लखनऊ जरूर आना”
अवि ने हां में सर हिला दिया और उन्हें ध्यान से गाड़ी चलाने का कहकर साइड हो गया !

विपिन जी गाड़ी लेकर वहा से चले गए उनके जाने के बाद नैना शीतल और रुचिका वापस ऊपर चली आयी ! अवि की हालत देखकर सार्थक को समझते देर नहीं लगी वह अवि को अपने घर लेकर गया और मीठा खिलाया। अवि को थोड़ा आराम मिला तो सार्थक की मम्मी ने अवि को नाश्ते के लिए वही रोक लिया ! अपार्टमेंट में पहली बार किसी के घर आया था सार्थक की मम्मी से बात करके उसे अच्छा लगा। सार्थक और अवि दोनों ने साथ नाश्ता किया और फिर अवि ऊपर चला आया। अंदर आकर उसने टेबल पर रखा फोन देखा 3 मिस्ड कॉल थी तीन दिन बाद ही उसकी नयी एग्जीबिशन थी और उसी के लिए फोन था अवि ने बात की और तैयार होकर अपना बैग लिए जैसे ही बाहर आया सामने नैना , रुचिका और शीतल मिल गयी वे तीनो भी ऑफिस जा रही थी। चलते चलते नैना के हाथ से फाइल गिरी अवि उठाने के लिए झुका तो नैना ने खुद ही उठा ली और वहा से लिफ्ट की और चली गयी। शीतल और रुचिका दोनों को ही अवि का उतरा हुआ चेहरा देखकर बुरा लग रहा था लेकिन वे दोनों कुछ नहीं कर सकती थी। अवि नैना को परेशान नहीं करना चाहता था इसलिए सीढ़ियों से ही निचे चला आया वह निचे आया तब तक नैना शीतल और रुचिका के साथ वहा से जा चुकी थी। अवि अपने रास्ते चला गया और नैना अपने।
दिनभर ऑफिस में काम करने के बाद तीनो वापस चली आयी। अवि देर रात घर लौटा खाना आर्डर नहीं किया था ! भूख भी कम ही थी अवि ने दूध गर्म करने को रखा और फिर उसे पीकर ही सो गया। एक दिन गुजरा , दो दिन गुजरे नैना से उसकी कोई बात नहीं हुई। कभी कभी नैना से सामना हो भी जाता तो नैना उसे इग्नोर कर के चली जाती। ये तीन दिन उसने बहुत उदासी में गुजारे थे रुचिका और शीतल भी बिजी ही थी। एग्जीबिशन की शाम अवि नैना को बहुत मिस कर रहा था। ये एक स्ट्रीट आर्ट एग्जीबिशन थी जहा अवि गुमसुम सा बैठा था। उसकी फोटोग्राफी को सबने बहुत पसंद किया था। कुछ लड़किया उसके साथ फोटो खिंचवा रही थी , कुछ लोग ऑटोग्राफ भी ले रहे थे अवि फीकी सी मुस्कराहट लिए सब से साथ अच्छे से पेश आ रहा था। कुछ देर बाद अवि की नजर सामने गयी तो उसका दिल धड़कने लगा सामने से नैना शीतल और रुचिका के साथ चली आ रही थी। रुचिका जान बुझकर नैना को वहा लेकर आयी थी ताकि अवि को लेकर जो मिसअंडरस्टेंडिंग थी वो सब दूर हो जाये। नैना ने अवि को देखा ही नहीं और आगे बढ़ गयी उसी गली के कॉर्नर पर एक गिटारिस्ट हाथ में गिटार लेकर एक ऊँचे स्टूल पर बैठकर कोई धुन बजा रहा था। नैना रुचिका शीतल वहा खड़ी होकर सुनने लगी। नैना अवि की कोई बात नहीं सुन रही थी अवि को अब यही तरिका सही लगा और वह वहा चला आया उसने गिटार वाले लड़के से रिक्वेस्ट करके गिटार लिया और उसकी जगह बैठकर एक नजर नैना को देखा और फिर गिटार बजाने लगा , एक बहुत ही सेड धुन के साथ अवि ने गाना शुरू किया – ना मारेगी दीवानगी मेरी, ना मारेगी आवारगी मेरी
कि मारेगी ज़्यादा मुझे मौत से , नाराज़गी तेरी
क्यूँ इतना हुआ है तू ख़फ़ा ? , है ज़िद किस बात की तेरी ?
कि मारेगी ज़्यादा मुझे मौत से , नाराज़गी तेरी
जाँ निसार है, जाँ निसार
तेरे प्यार पे, मेरे यार, जाँ निसार है !!
अवि की आवाज को बहुत अच्छा तो नहीं कह सकते लेकिन असरदार जरूर थी की नैना के दिल को छूकर गुजरी और वह वहा से चली गयी।

क्रमश – Love You जिंदगी – 52

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संजना किरोड़ीवाल !!

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