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Love You जिंदगी – 41

Love You Zindagi – 41

Love You Zindagi
Love You Zindagi by Sanjana Kirodiwal

रुचिका बरामदे में बैठी अपने हाथ पर बंधी पट्टी को देख रही थी शीतल आयी और कहा,”ये क्या हुआ तुम्हारे हाथ को ?”
शीतल को वहा देखकर रुचिका होश में आयी और कहा,”क कुछ नहीं वो बस जरा सी चोट लग गयी , मैं ठीक हूँ !”


“नैना बुला रही है उसने हम सबको तैयार होने को कहा है , सभी बाहर जा रहे है घूमने !”,शीतल ने कहा तो रुचिका उठकर उसके साथ अंदर चली आयी ! दोनों ऊपर कमरे में आयी नैना नहा चुकी थी ! शीशे के सामने खड़ी वह अपने बालो को ड्रायर से सूखा रही थी ! रुचिका ने टेबल पर रखा म्यूजिक सिस्टम अपने फोन से कनेक्ट किया और गाना चला दिया ! गाना बजने लगा तो नैना शीशे के सामने खड़ी एक्टिंग करने लगी


“मेरे ख्वाबो में जो आये , आके मुझे छेड़ जाये !
उस से कहो कभी सामने तो आये !!
मेरे ख्वाबो में जो आये”
नौटंकी करते हुए वह इतनी प्यारी लग रही थी की शीतल भी उसके साथ मिलकर गाने लगी दोनों को बहुत मजा आ रहा था

नैना ने रुचिका को भी गाने का इशारा किया तो रुचिका ने अपने हाथ बांध लिए और पीठ खिड़की के पास दिवार से लगाकर गाते हुए कहा
“कैसा है कौन है वो जाने कहा है ?
जिसके लिए मेरे होंठो पे हां है”
शीतल और नैना ने हैरानी से एक दूसरे की और देखा और फिर शीतल ने आकर रुचिका का हाथ थामकर गाने के साथ सुर मिलाते हुए कहा


“अपना है या बेगाना है वो
सच है या कोई अफसाना है वो”
नैना ने उसके गले में बांहे डालते हुए कहा,”देखे घूर घूर के यु ही दूर दूर से , उस से कहो मेरी नींद ना चुराए !”
उसके बाद तीनो एक दूसरे की कमर में हाथ डालकर कदम बढ़ाते हुए गया – मेरे ख्वाबो में जो आये , आके मुझे छेड़ जाये ! उस से कहो कभी सामने तो आये ,, मेरे ख्वाबो में जो आये ,,, हे !!


इसके बाद तीनो बेड पर चढ़ गयी और एक दूसरे पर तकिया फेकने लगी , तीनो इस वक्त टीनऐज की लड़किया लग रही थी !! मौसम उस वक्त खुशनुमा हो रहा था ! नैना बेड से उतरकर खिड़की से बाहर देखते हुए गाने लगी
जादू सा जैसे कोई चलने लगा है !
ओह्ह्ह जादू सा जैसे कोई चलने लगा है !
मैं क्या करू दिल मचलने लगा है !”


रुचिका उसके पास आयी और अपनी कोहनी उसके कंधे पर रखकर गाने लगी,”तेरा दीवाना कहता है वो , चुप चुप के फिर क्यों रहता है वो !!”
नैना ने कन्धा झुककर कोहनी निचे की और शीशे की तरफ जाते हुए मुंह बनाकर आगे की लाइन गायी – कर बैठा भूल वो , ले आया फूल वो ,, उस से कहो जाये चाँद लेके आये !!


रुचिका हंस पड़ी क्योंकी उसे उस वक्त अवि की याद आ गई !! गाना खत्म होते ही रुचिका ने कहा,”क्या बात है नैना बड़ा चहक रही हो ? तुम्हे तो लव सांग्स पसंद ही नहीं है फिर ये वाला गाना तुम्हे कैसे याद है ? बोलो बोलो
“हैं कुछ भी , तुम लोग गा रही थी तो मैंने भी गा दिया !”,नैना ने शीशे ने देखकर बाल बनाते हुए कहा !


“लेकिन कुछ भी कहो , यहाँ रहके बड़ा मजा आ रहा है यार !”,शीतल ने चहकते हुए कहा तभी उसका फोन बजा नया नंबर देखकर शीतल को थोड़ी हैरानी हुई वह कमरे से बाहर आयी और फोन उठाया तो दूसरी और से एक जानी पहचानी आवाज आयी – कहा हो तुम ? मैं कल से तुम्हे फोन कर रहा हूँ ना तुम मेरा फोन उठा रही हो , ना मेरे मेसेज का जवाब दे रही हो ! चल क्या रहा है ये सब ?”
“वो मैं , मैं लखनऊ हूँ नैना के साथ वीकेंड पर उसके घर आयी थी !”,शीतल ने डरते डरते कहा


“व्हाट ? तुम्हारा दिमाग ख़राब है क्या शीतल ? किस से पूछ के तुम वहा गयी और मैंने कितनी बार कहा है तुमसे उस नैना से दूर रहो तुम लेकिन नहीं तुम्हे तो मेरी कोई बात सुननी ही नहीं है ! जबसे दिल्ली गई हो तुम्हारा सारा दिमाग ख़राब हो चुका है !”,दूसरी तरफ से राज ने कहा
“ऐसा नहीं है राज , नैना बहुत अच्छी है उसके मम्मी पापा भी बहुत अच्छे है !”,शीतल ने कहा


“सो व्हाट ? तुम वहा क्यों गयी ? तुमने एक बार भी मुझसे पूछा या मुझे बताया , तुमने बताना भी जरुरी नहीं समझा है ना !”,राज ने गुस्सा करते हुए कहा
“ऐसी बात नहीं राज मैं तुम्हे बताने वाली थी !”,शीतल ने कहना चाहा
“कब ? मैंने फ़ोन किया है तब बता रही हो , चल क्या रहा है तुम्हारे दिमाग हां ,, मन भर गया है मुझसे या कोई और मिल गया जो मुझसे ज्यादा खुश रखने लगा हो तुम्हे ! बोलो”,राज गुस्से में कुछ भी बोले जा रहा था !


बेचारी शीतल चुपचाप उसकी बातें सुनती रही और आखिर में कहा,”सॉरी !”
“तुम मुझसे दूर होती जा रही हो शीतल !”,राज एकदम से उदास हो गया !
“ऐसा कुछ भी नहीं है राज मैं सिर्फ नैना के कहने पर यहाँ नहीं आयी हूँ बल्कि मेरा खुद मन था उसके घरवालों से मिलने का , अपनी लाइफ में एक छोटा सा ब्रेक चाहती थी !”,शीतल ने कहा


“मैं सिर्फ इतना जानता हूँ की जब तुमसे बात नहीं होती तो मैं परेशान हो जाता हूँ शीतल ! लगता है जैसे मैं तुम्हे खो दूंगा !”,राज ने बड़ी मायूसी के साथ कहा !
“ऐसा कुछ नहीं है , आई लव यू !”,शीतल ने कहा
“आई लव यू , टेक केयर !”,कहकर राज ने फोन काट दिया ! शीतल वापस अंदर चली आयी ! नैना और रुचिका तैयार हो चुकी थी शीतल भी तैयार होने चली गयी !

नैना अपने फोन में कुछ नोटिफिक्शन चेक कर रही थी तभी रुचिका को मेसेज आया उसने मेसेज ऑपन किया तो मुस्कुरा उठी ! मैसेज अवि का था

हाय
“हेलो मिस्टर मजनू

मजनू ? आर यू सीरियस ?
“जस्ट किडिंग , सुबह सुबह कैसे याद किया ? एक्चुअली वो मैं ,, जबसे तुम लोग गए हो कुछ अच्छा नहीं लग रहा था !
“क्या बात है नैना की याद आ रही है ? अहहह्म्म या , आई मिस हर अलॉट ,, उसके जाने के बाद आई फील शी इज समथिंग फॉर मी !”


“हाउ रोमांटिक पर उसे ये सब बोरिंग लगता है
“सो सेड , तुम लगे रहो कभी ना कभी तो उसका दिल पिघलेगा ! आई विश ,, वैसे वो है कहा ?
“यही है मेरे सामने बात करोगे ? नहीं बस उसे देखने का मन है
“नो प्रॉब्लम , मैं विडिओ कॉल करती हूँ तुम बोलना मत ! ओके (स्माइल वाला इमोजी)


रुचिका ने अवि को विडिओ कॉल लगाया और फोन का कैमेरा नैना की और घुमा दिया ! नैना अपने फोन में बिजी थी अवि खामोशी से नैना को देख रहा था ! नैना फोन में देखते हुए टेबल के पास आयी बुक निकाली और और पेन से उसमे कुछ नोट करने लगी ! रुचिका ने पूछ लिया,”क्या कर रही हो नैना ?
“अरे वो एक दोस्त का एड्रेस नोट कर रही हूँ दिल्ली पहुंचकर घर भी तो ढूंढना है !”,नैना ने बुक में लिखते हुए कहा

अवि बस बिना पलके झपकाए उसे देख रहा था नैना ने हाथ में पकड़ा पेन होंठो में दबा लिया और फोन में देखते हुए कमरे में इधर से उधर घूमने लगी ! ये देखकर अवि मुस्कुरा उठा वो मुस्कुराते हुए इतना क्यूट लग रहा था ना की रुचिका भी खुद को उसे देखने से रोक नहीं पायी ! अवि ने कॉल डिस्कनेक्ट किया और रुचिका को मेसेज में थैंक्यू लिखकर भेज दिया !


शीतल ने चूड़ीदार सूट पहना था और उस पर बहुत ही प्यारा दुपट्टा था ! रुचिका ने घुटनो से कुछ निचे तक लाइट पिच रंग का फ्रॉक पहना हुआ था ! नैना ने वही हमेशा की तरह जींस और टॉप ! तीनो निचे आयी तब तक 10 बज चुके थे ! मोंटी पहले से वहा तैयार खड़ा था उसने फॉर्मल पेंट और लाइट स्काई कलर का शर्ट पहना हुआ था ! उसे देखते ही नैना ने कहाँ,”इतना तैयार होकर कहा जा रहे हो ?”
“बाहर , वैसे भी हजरतगंज घूमे काफी टाइम हो गया है !”,मोंटी ने कहा


नैना , रुचिका , शीतल हॉल में आयी मोंटी ने रुचिका की और देखा ब्लैक ड्रेस में वो बहुत क्यूट लग रही थी ! जैसे ही रुचिका ने उसकी तरफ देखा मोंटी ने नजरे घुमा ली ! नैना ने देखा उसके पापा फोन पर किसी से बात करने में बिजी है , जैसे ही उन्होंने फोन रखा नैना ने कहा,”डेड चले !”
“सॉरी बेटा मुझे और तुम्हारी मॉम को अभी हॉस्पिटल जाना होगा , तुम्हारी भुआ है ना उनके रिश्ते में कोई एडमिट है !”,विपिन जी ने कहा


“पर डेड आपने प्रॉमिस किया था”,नैना ने मचलते हुए कहा
“आई ऍम सो सॉरी बेटा , एक काम करो तुम लोग मोंटी के साथ चली जाओ ,, वैसे भी तुम सब बच्चो में हम दोनों अनकम्फर्ट रहेंगे ! तुम लोग मोंटी के साथ जाओ शाम को हम सब पक्का बाहर खाना खाने चलेंगे !”,विपिन जी ने कहा
“आप फिर अपना प्रॉमिस तोड़ दोगे !”,नैना ने कहा


“बिल्कुल नहीं !”,कहते हुए विपिन जी ने उसे हग करते हुए कहा और फिर आराधना से कहा,”चले आरु !”
“हां हां चलिए !”,आराधना अपना हाथ पर्स सम्हाले आयी और नैना से कहा,”ध्यान से जाना बेटा , और पैसे है ना तुम्हारे पास !”
“मॉम सब है आप आराम से जाईये , मोंटी है ना किस दिन काम आएगा !”,नैना ने मोंटी की ओर देखकर कहा


“आज मेरे कार्ड्स की खैर नहीं !”,मोंटी धीरे से बुदबुदाया ! विपिन जी उसके पास आये और गाड़ी की चाबी देकर कहा,”ध्यान से गाड़ी चलाना और हां बच्चियों को सेफ्ली घर लाना !”
“जो आज्ञा पिता श्री !”,मोंटी ने कहा
“ए मेरे डेड को कोई पिता जी नहीं बोलेगा ये सिर्फ मेरे डेड है !”,नैना ने मोंटी को आँखे दिखाते हुए कहा !
“अच्छा हम लोग चलते है !”,कहकर विपिन जी और आराधना वहा से चले गए !


“तुम्हारे डेड को मैं डेड बोलू तो तुम्हे क्या प्रॉब्लम है ?’,उनके जाते ही मोंटी ने नैना से कहा
“तुम तो क्या कोई भी नहीं बोल सकता !”,नैना ने कहा
“तुमसे तो बात करना ही बेकार है अब चलो !”,मोंटी ने कहा और बाहर निकल गया !
“तुम दोनों क्या हमेशा ऐसे ही झगड़ते रहते हो ?”,रुचिका ने कहा
“ह्म्म्मम्म , लेकिन जब तक हम लोग झगड़ा न करे अधूरा सा लगता है !”,नैना ने मुस्कुरा कर कहा


“देट्स कॉल्ड ट्रू फ्रेंडशिप नैना !”,शीतल ने कहा और तीनो बाहर आ गयी ! नैना ने बरामदे में खड़े स्कूबी का सर सहलाया और जाकर गाड़ी की पिछली सीट पर बैठते हुए कहा,”रूचि तू आगे बैठ जा !”
शीतल नैना के साथ पीछे बैठ गयी ! ड्राइवर सीट पर बैठे मोंटी ने रुचिका के लिए दरवाजा खोल दिया ! रुचिका अंदर आकर बैठ गयी ! मोंटी ने गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी ! सामने से आती धुप की वजह से मोंटी ने चश्मा पहन लिया और फिर नैना से कहा,”अच्छा नैना तूने बताया नहीं दिल्ली वाली जॉब के बारे में ?”


“अच्छी चल रही है , पहले महीने ही मैनेजर को बाहर करवा दिया मैंने और फिर उसने हमे घर से बाहर कर दिया !”,नैना ने कहा
“मालूम ही था मुझे तू जहा हो और वहा कोई कांड ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता ! अंकल आंटी को पता है इस बारे में ?”,मोंटी ने कहा
“नाह , और तू भी मत बताइयो , पता चले डेड मेरी जॉब ही छुड़वा दे ! वैसे मजा आ रहा है वो नौकरी करके !”,नैना ने कहा


“चल नहीं बताऊंगा , बट प्रॉमिस कर कोई भी प्रॉब्लम हो तो तू मुझे फोन करेगी !”,मोंटी ने कहा
“हां चल चल ठीक है , अच्छा डेड बता रहे थे शर्मा जी तेरे लिए लड़की ढूंढ रहे है ! ये अरेंज मैरिज में कबसे विश्वास होने लगा तुम्हे ?”,नैना ने मोंटी को छेड़ते हुए कहा ! नैना के इस सवाल से रुचिका मोंटी की और देखने लगी तो मोंटी ने यू टर्न लेते हुए कहा,”जिंदगी में जरुरी है प्यार अब वो शादी से पहले हो या शादी के बाद क्या फर्क पड़ता है !

और वैसे भी शर्मा जी इस बार तगड़ा बंदोबस्त कर रखा है मेरे लिए , लगता है इस साल करवा के ही मानेंगे !”
“मतलब तेरा भी कटने वाला है !”,नैना ने हँसते हुए कहा
शीतल और रुचिका को कुछ समझ नहीं आया की दोनों मिलकर किस शर्मा की बात कर रहे है शीतल ने अपनी जिज्ञाषा मिटाने के लिए पूछ ही लिया,”ये शर्मा जी कौन है ?
मोंटी मुस्कुराया और कहा,”मेरे पापा”


शीतल ने सूना तो मुस्कुरा उठी ! मोंटी ने गाड़ी हाईवे रोड की और मोड़ ली और गाड़ी एक साइड रोककर अपना सीट बेल्ट बांधते हुए रूचि से कहा,”तुम भी अपना सीट बेल्ट बांध लो , हाईवे है ना !”
रुचिका ने बांधने की कोशिश की लेकिन उसे समझ ही नहीं आया ! मोंटी की नजर उस पर गयी तो उसने अपना एक हाथ सीट पर रखा और रुचिका की और झुककर सीट बेल्ट उठाया और बांध दिया ! ये सब करते हुए वह रुचिका के इतना करीब था की रुचिका की तो सांसे ही थम गयी !

मोंटी से आती बॉडी स्प्रै की महक रुचिका की सांसो में बस्ती चली जा रही थी ! मोंटी वापस अपनी सीट पर आया और गाड़ी आगे बढ़ा दी ! ख़ामोशी तोड़ने के लिए मोंटी ने गाने चला दिए !
“लम्हा लम्हा दूरी यु पिघलती है !
जाने किस आग में ये शबनम जलती है !
हो लम्हा लम्हा दूरी यूँ पिघलती है
जाने किस आग में ये शबनम जलती है !


ख्वाहिशो की शाम ढलती है , ख्वाहिशो की शाम ढलती है
जाने किस आग में ये शबनम जलती है !
ला ला ला ला – (अभिजीत भट्टाचार्य)


गाना बहुत ही पीसफ़ुली था नैना अपने फोन में बिजी थी , शीतल खिड़की से बाहर सुंदर नज़ारे देख रही थी और बेचारी रुचिका आगे बैठी ख़ामोशी से उस गाने को सुन रही थी जिसे मोंटी गुनगुना भी रहा था ! उसने एक नजर मोंटी को देखा और फिर सामने देखने लगी !!

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संजना किरोड़ीवाल

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शीतल ने सूना तो मुस्कुरा उठी ! मोंटी ने गाड़ी हाईवे रोड की और मोड़ ली और गाड़ी एक साइड रोककर अपना सीट बेल्ट बांधते हुए रूचि से कहा,”तुम भी अपना सीट बेल्ट बांध लो , हाईवे है ना !”
रुचिका ने बांधने की कोशिश की लेकिन उसे समझ ही नहीं आया ! मोंटी की नजर उस पर गयी तो उसने अपना एक हाथ सीट पर रखा और रुचिका की और झुककर सीट बेल्ट उठाया और बांध दिया ! ये सब करते हुए वह रुचिका के इतना करीब था की रुचिका की तो सांसे ही थम गयी !

शीतल ने सूना तो मुस्कुरा उठी ! मोंटी ने गाड़ी हाईवे रोड की और मोड़ ली और गाड़ी एक साइड रोककर अपना सीट बेल्ट बांधते हुए रूचि से कहा,”तुम भी अपना सीट बेल्ट बांध लो , हाईवे है ना !”
रुचिका ने बांधने की कोशिश की लेकिन उसे समझ ही नहीं आया ! मोंटी की नजर उस पर गयी तो उसने अपना एक हाथ सीट पर रखा और रुचिका की और झुककर सीट बेल्ट उठाया और बांध दिया ! ये सब करते हुए वह रुचिका के इतना करीब था की रुचिका की तो सांसे ही थम गयी !

शीतल ने सूना तो मुस्कुरा उठी ! मोंटी ने गाड़ी हाईवे रोड की और मोड़ ली और गाड़ी एक साइड रोककर अपना सीट बेल्ट बांधते हुए रूचि से कहा,”तुम भी अपना सीट बेल्ट बांध लो , हाईवे है ना !”
रुचिका ने बांधने की कोशिश की लेकिन उसे समझ ही नहीं आया ! मोंटी की नजर उस पर गयी तो उसने अपना एक हाथ सीट पर रखा और रुचिका की और झुककर सीट बेल्ट उठाया और बांध दिया ! ये सब करते हुए वह रुचिका के इतना करीब था की रुचिका की तो सांसे ही थम गयी !

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