Pasandida Aurat Season 3 – 45

Pasandida Aurat Season 3 – 45

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी ने जब लता और अवनि को साथ सोये देखा तो उनकी बलाये लेने से खुद को रोक नहीं पाया। पृथ्वी मुस्कुरा उठा , इस पल का वह कब से इंतजार कर रहा था और आज वह पल उसकी जिंदगी में आ गया जब लता जी अवनि को पुरे दिल से अपना चुकी थी। अवनि के चेहरे पर इस वक्त जो सुकून था उसे देखकर सहसा ही पृथ्वी की आँखों में नमी उभर आयी। उसने ख़ामोशी से अपने कदम पीछे लिए और कमरे से बाहर जाने लगा तो टेबल से टकरा गया।

आवाज होने से लता जी नींद से जागी और पृथ्वी को देखकर उठते हुए कहा,”अरे पृथ्वी ! तुम आज जल्दी आ गए”
“अरे आप उठ गयी क्यों गयी ? आप सो जाईये मैं  जाता हूँ,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि गहरी नींद में थी इसलिए लता ने उसे नहीं उठाया और बड़े ध्यान से उसका सर तकिये से लगाकर बिस्तर से नीचे चली आयी। पृथ्वी और लता कमरे से बाहर लता ने किचन की तरफ जाते हुए कहा,”आज तुम जल्दी कैसे आ गए , ऑफिस में काम कम था क्या ?”

“वहिनी की याद आ रही होगी”,पृथ्वी के बगल में बैठे लक्षित ने गेम खेलते हुए धीरे से कहा , जो लता को तो नहीं सुना लेकिन बगल में बैठे पृथ्वी को सुन गया और उसने लक्षित के सर पर धीरे से चपत लगाकर कहा,”तुम्हे बड़ा पता है”
 लक्षित ने पृथ्वी को देखकर मुँह बनाया और अपना ध्यान वापस गेम में लगा लिया।  पृथ्वी ने किचन में खड़ी लता की तरफ देखकर कहा,”हाँ आई ! आज ऑफिस में ज्यादा काम नहीं था इसलिए जल्दी चला आया”
“अच्छा है ! अवनि देखेगी तो खुश हो जाएगी,,,,,,,,,अभी तो वो सो रही है , मैं चाय बना रही हूँ साथ में कुछ खाने के लिए भी बनाऊ ?”,लता ने कहा

“नहीं ! बस चाय दे दीजिये”,पृथ्वी ने कहा
लता चाय बनाने लगी और पृथ्वी सोच में पड़ गया कि वह अवनि को अपनी इस नयी जॉब के बारे में कैसे बताये ? अवनि जब जानेगी पृथ्वी अब से प्राची के डेड की कम्पनी में काम करने वाला है तो वह कैसे रिएक्ट करेगी ? कही पृथ्वी को लेकर उसके मन में कोई गलत ख्याल ना आ जाये ? पृथ्वी इन्ही सब बातो में उलझा रहा और लता उसके लिए चाय ले आयी।

लता के हाथ में चाय का दूसरा कप देखकर पृथ्वी ने कहा,”ये ?”
“अवनि के लिए,,,,,,,,,,!!!”,लता ने सहज भाव से कहा
“दीजिये मैं ले जाता हूँ”,पृथ्वी ने अपनी चाय का कप थामे सोफे से उठते हुए कहा
लता समझ गयी कि पृथ्वी अवनि के साथ वक्त बिताना चाहता है इसलिए उसे कप देकर कहा,”हाँ तुम ले जाओ ! मैं जरा पड़ोस वाली आंटी से मिलकर आती हूँ ,  तुम्हारे बाबा बता रहे थे कुछ दिन से बहुत बीमार है वो,,,,,,,,,,,तुम चाय पीओ , मैं आती हूँ”

लता चली गयी और पृथ्वी चाय लेकर कमरे में चला आया। अवनि बेफिक्र सो रही थी। पृथ्वी आकर अवनि के बगल में बैठा , चाय के कप साइड टेबल पर रखे
और बड़े प्यार से अपनी उंगलियों से अवनि के गाल को छुआ। अवनि नींद में कुनमुनाई तो पृथ्वी झुका और उसके सर को अपने होंठो से छूकर प्यार से कहा,”अवनि ! उठ जाओ बेटा”
अवनि नींद में थी उसे लगा कोई उसे परेशान कर रहा है इसलिए वह करवट बदल कर सो गयी।

पृथ्वी मुस्कुराया उसने अवनि को अपनी तरफ किया और उसके हाथो को पकड़कर उसे बैठाते हुए कहा,”उठ भी जाओ,,,,,,,,,,,!!!
अवनि नींद से जागी , देखा सामने पृथ्वी बैठा है तो उसने उन्मांद भरे स्वर में कहा,”आप ऑफिस नहीं गए ?'”
पृथ्वी ने अपनी ऊँगली को अवनि के ललाट पर टेप किया और कहा,”मैं ऑफिस जाकर वापस भी आ गया,,,,,,,आई ने तुम्हारे लिए चाय बनायीं है”
अवनि ने सुना तो परेशानी भरे स्वर में कहा,”आपने मुझे जगाया क्यों नहीं ?”

“क्योकि तुम सोते हुए कुछ ज्यादा ही प्यारी लग रही थी , मासूम , एक छोटी बच्ची की तरह , इसलिए आई ने भी तुम्हे नहीं जगाया,,,,,,,,,,,,,ये लो चाय पीओ , ठंडी हो जाएगी”,पृथ्वी ने चाय का कप अवनि की तरफ बढ़ाकर कहा
अवनि ने कप लिया और चाय पीने लगी , पृथ्वी ने अवनि को अपनी जॉब के बारे में तो नहीं बताया लेकिन उस से इधर उधर की बाते करके हसाता रहा। थोड़ी देर बाद दोनों बाहर चले आये।

अवनि ने देखा लता बाहर गयी है तो वह किचन में चली आयी और शाम के खाने की तैयारी करने लगी। पृथ्वी भी किचन में आकर अवनि को परेशान करने लगा ये देखकर लक्षित ने अवनि के साथ मिलकर उसे किचन से बाहर निकाला और खुद अवनि की मदद करने लगा।  

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
गिरिजा जी से बातें करते करते सुरभि को वही नींद आ गयी ! सिद्धार्थ अपने कमरे में चला आया लेकिन अब वह सुरभि को लेकर पहले से ज्यादा परेशान हो गया। सिद्धार्थ सुरभि के जागने का इन्तजार करने लगा ताकि सुरभि से बात कर सके। जगदीश जी और गिरिजा जी को सिद्धार्थ ने नहीं बताया था कि सुरभि घर से भागकर आयी है , वे दोनों तो अभी तक यही सोच रहे थे कि शाम में सुरभि अपने फ्लेट वापस चली जाएगी।

शाम होते होते सुरभि की आँख खुली उसने खुद को गिरिजा जी के कमरे में पाया तो पहले हैरान हुई और बाद में उसे याद आया कि वह सुबह से यही है। सुरभि को ख्याल आया कि घरवाले उसे ढूंढ रहे होंगे और सुरभि से बहुत ज्यादा गुस्सा भी होंगे। सुरभि ने सिद्धार्थ को अपने भागकर आने के बारे में बताया भी लेकिन सिद्धार्थ ये जानकर भी शांत था। सुरभि अपनी आँखे मसलते हुये कमरे से बाहर आयी तो सामने हॉल में सिद्धार्थ मिल गया जो जगदीश जी के लिए चाय लेकर आया था। सुरभि को देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”तुम उठ गयी ! चाय पी लो फिर मैं तुम्हे तुम्हारे फ्लैट पर छोड़ देता हूँ”

सुरभि ने सुना तो हैरानी से सिद्धार्थ को देखा , सब सच जानने के बाद भी सिद्धार्थ उसे फ्लेट छोड़ने की बात क्यों कर रहा था ? जबकि सुरभि के पास तो फ्लेट की चाबी तक नहीं थी। जगदीश जी के सामने सुरभि ने सिद्धार्थ से कुछ नहीं पूछा वह चुपचाप आकर सोफे पर बैठ गयी ! सिद्धार्थ सुरभि के लिए चाय ले आया। चाय पीने के बाद सुरभि उठी तो जगदीश जी ने कहा,”तुम से मिलकर अच्छा लगा बेटा , आती रहा करो”
“जी अंकल”,सुरभि ने बुझे स्वर में कहा
“चले ?”,सिद्धार्थ ने कहा

“मैं आंटी को बाय बोलकर आती हूँ”,सुरभि ने कहा और गिरिजा जी के कमरे की तरफ बढ़ गयी। सुरभि ने उन्हें बाय बोला लेकिन गिरिजा जी ने भी उसे नहीं रोका आने को कहकर मुस्कुरा दी।
सुरभि मायूस होकर कमरे से बाहर चली आयी और सिद्धार्थ उसे लेकर घर के दरवाजे की तरफ बढ़ गया। दरवाजे के पास आकर सुरभि ने सिद्धार्थ से कहा,”तुमने अंकल के सामने मुझे फ्लेट पर छोड़ने की बात क्यों कही ?”
“तो मैं और क्या कहता ?”,सिद्धार्थ ने कहा

“तुम कुछ और भी कह सकते थे”,सुरभि ने कहा
“उस वक्त जो मेरे दिमाग में आया मैं कह दिया,,,,,,,,अब चले ?”,सिद्धार्थ ने घर का मेन गेट खोलते हुए कहा
सुरभि ने सिद्धार्थ की बाँह पकड़कर उसे रोका और कहा,”सिद्धार्थ ! क्या मैं यहाँ नहीं रह सकती ?”
सिद्धार्थ ने सुना तो ख़ामोशी से सुरभि को देखने लगा , सिद्धार्थ का सुरभि को यू देखना बैचैन कर गया तो उसने मचलकर कहा,”मुझे ऐसे मत देखो प्लीज”

“सुरभि ! मम्मी पापा नहीं जानते तुम किस कंडीशन में यहाँ आयी हो ? तुम यहाँ रुक सकती हो लेकिन मैं उन्हें क्या कहूंगा ? सच्चाई जानकर कही वो,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”,सिद्धार्थ ने धीरे से कहा लेकिन सुरभि उसकी पूरी बात सुनने से पहले ही चिढ गयी और कहा,”ओह्ह तो मेरे यहाँ रहने से तुम्हे प्रॉब्लम है,,,,,,,,,,ठीक है आओ चलते है , छोड़ दो मुझे मेरे फ्लेट,,,,,,,,,,,,!!!!”
कहकर सुरभि गेट से बाहर निकल गयी

“सुरभि,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने सुरभि के पीछे आते हुए कहा तो सुरभि पलटकर गुस्से से बोली,”एक शब्द नहीं बोलना,,,,,,,,,,,,चलो”
बेचारा सिद्धार्थ चुपचाप सुरभि के पीछे चल पड़ा और गाडी में आ बैठा , सुरभि उसके बगल में आ बैठी और अपने दोनों हाथो को बांधकर खिड़की से बाहर देखने लगी। सुरभि को गुस्से में देखकर सिद्धार्थ की उस से बात करने की हिम्मत नहीं हुई ! उसने गाडी स्टार्ट की और वहा से निकल गया।

रास्तेभर सिद्धार्थ और सुरभि के बीच कोई बात नहीं हुई , सुरभि अब तक अपने मन में 100 बाते बना चुकी थी तो वही सिद्धार्थ को सुरभि से कहने के लिए सही शब्द नहीं मिल रहे थे। सुरभि ने देखा सिद्धार्थ ने गाडी अपार्टमेंट वाले रास्ते ना ले जाकर किसी और ही रास्ते पर मोड़ दी है तो उसने सिद्धार्थ की तरफ देखकर कहा,”ये तुम मुझे कहा लेकर जा रहे हो ?”

सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखा और कहा,”तुम्हे मुझ पर भरोसा है ना ?”
सुरभि ख़ामोशी से सिद्धार्थ को देखती रही , ना चाहते हुए भी उसकी आँखों में आँसू भर आये लेकिन उसने अपने आँसुओ को बहने नहीं दिया और धीरे से हामी में गर्दन हिला दी। सिद्धार्थ ने सुरभि के हाथ पर अपना हाथ रखा और उसके हाथ को गेयर हेंडल पर रखकर कहा,”थोड़ी देर सो जाओ , तुम्हे अच्छा लगेगा”

इन दिनों जो हो रहा था उस से सुरभि काफी थक चुकी थी , उसने अपनी सारी चिंताए सिद्धार्थ पर छोड़ दी और अपनी आँखे बंद करके सर सीट से लगा लिया। सिद्धार्थ सुरभि को लेकर कहा जा रहा था ये तो वही जानता था लेकिन सुरभि का विश्वास इतना था कि उसने इसके बाद सिद्धार्थ से कोई सवाल नहीं किया।

कपूर हॉउस , मुंबई
“ये क्या विक्रम , तुम अभी तक तैयार नहीं हुए ? जल्दी करो हमे देर हो जाएगी। वैसे भी मिस्टर देसाई का घर यहाँ से काफी दूर है पहुंचने में एक डेढ़ घंटा लग जाएगा,,,,,,,,,हरी अप , मैं ज़रा तुम्हारी भाभी को देख लेता हूँ वो तैयार हुई या नहीं,,,,,,,,,,,,,!!!”,विक्रम के बड़े भाई ने कहा
“भाई ! आप लोग चले जाईये मैं नहीं जा पाऊंगा”,विक्रम ने बुझे स्वर में कहा

“ओह्ह्ह कम ऑन विक्रम ! मिस्टर देसाई ने आज का डिनर स्पेशली तुम्हारे लिए ही तो अरेंज किया है और तुम्ही नहीं जाना चाहते। आज के डिनर पर मिस्टर देसाई के साथ साथ प्राची भी होगी ! आज की शाम बहुत ख़ास है इसे ख़राब मत करो,,,,,,,,,तैयार हो जाओ मैं और तुम्हारी भाभी नीचे तुम्हारा इन्तजार कर रहे है”,विक्रम के बड़े भाई ने उसका कंधा थपथपा कर कहा और वहा से चला गया

विक्रम की आँखों के सामने एयरपोर्ट वाला सीन आने लगा जब प्राची और पृथ्वी आमने सामने थे और प्राची खुश थी। विक्रम अपने बड़े भाई की बात नहीं टाल सकता था इसलिए उठा और तैयार होकर घर से बाहर चला आया।

बाहर गाडी में ड्राइवर सीट पर विक्रम का बड़ा भाई , पिछली सीट पर भाभी और उसकी भतीजी बैठे थे। विक्रम ने गाडी का दरवाजा खोला और अंदर आ बैठा तो भतीजी ने कहा,”चाचू ! पापा अभी पापा मम्मा से कह रहे थे कि आपके लिए एक सरप्राइज है”

“कैसा सरप्राइज ?”,विक्रम ने बड़े भाई की तरफ देखकर चौंककर पूछा
 “अह्ह्ह्ह ! कुछ नहीं ये बस ऐसे ही बोल रही है,,,,,,चले ?”,विक्रम के बड़े भाई ने कहा  
“हम्म्म,,,,,,,,,,,,!!!”,विक्रम ने सीट बेल्ट लगाते हुए कहा और बड़े भाई ने गाडी आगे बढ़ा दी

विक्रम अपने परिवार के साथ देसाई मेंशन्स पहुंचा। मिस्टर देसाई बाहर बरामदे में खड़े उनका इन्तजार कर रहे थे। सबको देखकर ख़ुशी से फूले नहीं समाये और आकर विक्रम के भाई से हाथ मिलाकर कहा,”वेलकम मिस्टर कपूर,,,,,,,,,,आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई ?”
“थैंक्यू सर ! आल गुड”,मिस्टर कपूर ने कहा

“ओह्ह कम ऑन मिस्टर कपूर , ये सर वाली फॉर्मेलिटी ऑफिस के लिए रहने दीजिये। आज रात आप लोग यहाँ मेहमान है,,,,,,,,,आईये अंदर चलते है”,मिस्टर  देसाई ने कहा और मिसेज कपूर को भी नमस्ते करके अंदर चलने को कहा

विक्रम मिस्टर देसाई के सामने आया और कहा,”हेलो अंकल”
“हेलो बेटा ! आज तुम बहुत अच्छे लग रहे हो”,मिस्टर देसाई ने कहा
“थैंक्यू अंकल”,विक्रम ने मुस्कुरा कर कहा तो मिस्टर देसाई ने उसके कंधो पर अपनी बाँह रखी और आगे बढ़ गए।

सभी अंदर आकर हॉल में रखे आलिशान सोफों पर आ बैठे। विक्रम और उसका बड़ा भाई प्राची के घर पहले भी आ चुके थे लेकिन कभी अंदर नहीं आये। अंदर आकर उन्होंने देखा कि मिस्टर देसाई का घर काफी आलिशान है और खूबसूरत भी,,,,,,,,,,!!
नौकर सबके लिए कॉफी और बच्ची के लिए जूस ले आया। सब कॉफी पीते हुए बाते करने लगे। बाकि दिनों के बजाय विक्रम आज शांत बैठा था। बीती रात प्राची ने उसके साथ जो किया उसके बाद विक्रम काफी अपसेट था , ना उसने प्राची से कोई बात की ना ही प्राची को अपनी गलती का अहसास हुआ।

“प्राची कही नजर नहीं आ रही ?”,मिस्टर कपूर ने कहा
“अह्ह्ह दरअसल वो अपने कमरे में तैयार हो रही है,,,,,,,,,,मैं उसे बुला देता हूँ”,मिस्टर कपूर से कहकर मिस्टर देसाई ने अपने नौकर से इशारा किया कि वह जाकर प्राची को बुला लाये

नौकर के जाने के बाद मिस्टर कपूर ने कहा,”मिस्टर देसाई ! आपने प्राची को तो बता ही दिया होगा कि हम यहाँ उसके और विक्रम के रिश्ते के लिए आये है”
मिस्टर देसाई मुस्कुराये और कहा,”मिस्टर कपूर ! प्राची की हाँ है तभी तो मैंने आपको डिनर पर इन्वाइट किया बाकि आप खुद उस से पूछ लीजियेगा”

विक्रम ने अपने और प्राची के रिश्ते की बात सुनी तो हैरान भी हुआ और मन ही मन खुश भी , विक्रम को प्राची पहली मुलाकात से ही पसंद थी लेकिन वह शादी के लिए इतनी जल्दी हाँ कह देगी ये विक्रम ने नहीं सोचा था।
यहाँ आने से पहले विक्रम उदास था लेकिन अब उसका चेहरा फूलो की तरह खिल चुका था।

कुछ देर बाद प्राची नीचे आयी। विक्रम ने प्राची को देखा तो देखता ही रह गया। आज पहली बार प्राची ने सूट पहना था , कंधे पर बस सूट को टिकाये रखने के लिए दो डोरी थी और गले में दुप्पटा। बाल खुले और चेहरे पर थोड़ा मेकअप , वह बाकी दिनों के बजाय आज कुछ ज्यादा ही प्यारी लग रही थी और आज कई दिनों बाद उसके चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी दिखाई दे रही थी। मिसेज कपूर को तो प्राची देखते ही पसंद आ गयी।

प्राची मिस्टर देसाई के बगल में आ बैठी , उसने सबसे हेलो कहा और विक्रम की तरफ देखकर मुस्कुरा दी। विक्रम भी अपनी नाराजगी भूलकर मुस्कुरा उठा। डिनर में अभी टाइम था इसलिए मिस्टर देसाई मिस्टर कपूर और उनकी पत्नी को अपना घर दिखाने लगे। सबको बिजी देखकर प्राची विक्रम के पास आयी और उसकी कलाई पकड़कर उसे वहा से ले गयी !

प्राची विक्रम को लेकर बालकनी में आयी और उसे गले लगाकर कहा,”ओह्ह्ह थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू ! थैंक्यू सो मच विक्रम ,, मैंने सोचा नहीं था तुम इतना बड़ा कमाल कर दोगे , तुमने तो पृथ्वी को सीधा देसाई ग्रुप ही पहुंचा दिया”
प्राची की बात सुनकर विक्रम हैरान हुआ , प्राची उस से दूर हटी और ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”अब पृथ्वी को मेरा होने से कोई नहीं रोक सकता,,,,,,,,,,थैंक्यू सो मच”
 विक्रम ने जैसे ही सुना उसके चेहरे से ख़ुशी गायब हो गयी और उसका दिल टूटकर बिखर गया।

( अवनि और पृथ्वी की इन खुशियों में क्या आने वाली है कोई बड़ी मुसीबत ? आखिर सिद्धार्थ सुरभि को लेकर कहा जा रहा है ? प्राची की बात सुनकर आखिर क्यों टूट गया विक्रम का दिल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना

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