Pasandida Aurat Season 3 – 44
Pasandida Aurat Season 3 – 44

सुरभि ख़ामोशी से सिद्धार्थ को देखती रही ये देखकर सिद्धार्थ ने बेचैनी भरे स्वर में कहा,”बोलो सुरभि ! चुप क्यों हो ? क्या तुम नहीं जानती मेरे दिल में क्या है ? मेरे दिल का छोडो क्या तुम्हे नहीं पता तुम्हारे दिल में क्या है ? सच तो ये है सुरभि कि इस वक्त हम दोनों एक ही नाव पर सवार है”
सुरभि ने सिद्धार्थ की तरफ गुस्से से देखा और कहा,”जब तुम्हे सब पता है तो तुमने मुझसे क्यों नहीं कहा ? क्यों नहीं कहा मुझसे कि तुम मुझे पसंद करते हो और तुम्हे मुझसे प्यार है ?”
“मैं तुम्हे बताने आया था सुरभि लेकिन जब अनिकेत के आने से तुम्हे परेशान देखा तो नहीं बताया,,,,,,,,,,,मैंने तुम्हे घर आने के लिए कहा क्योकि पापा तुमसे मिलना चाहते थे तब भी मैं तुम्हे बताने वाला था लेकिन तुम अचानक से चली गयी , कितने फोन किये तुम्हे , दो बार तुम्हारे अपार्टमेंट भी जाकर आया। दो दिन परेशान होने के बाद मुझे पता चला कि तुम्हारे घरवाले तुम्हे ले गए है,,,,,,,,,,उस सुबह क्या हुआ था सुरभि ? मुझे बताओ प्लीज,,,,,,,,,,,,,!!!!”,सिद्धार्थ ने कहा
सिद्धार्थ की बात सुनकर सुरभि के चेहरे पर उदासी के भाव उभर आये। वह उदास आँखों से सिद्धार्थ को देखने लगी और फिर उसे सब बता दिया जो उस सुबह हुआ था।
सुरभि की बात सुनकर सिद्धार्थ के चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिलाने लगे और उसने कहा,”वो अनिकेत इतना कमीना निकलेगा मैंने कभी सोचा नहीं था , मैं उसे सबक सिखाकर रहूंगा”
“उसकी जरूरत नहीं है , यहाँ आने से पहले मैंने उसकी वाइफ को सब बता दिया अब उसे सबक वो सिखाएगी,,,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अनिकेत को याद करके गुस्से से कहा
“लेकिन तुम घर से क्यों भाग आयी ? तुम्हे अपने घरवालों से बात करनी चाहिए थी उन्हें बस गलतफहमी हुई है,,,,,,,,,,,,,,,और , और तुमने फ़ोन क्यों नहीं किया ?
एटलीस्ट किसी दोस्त या घर के फोन से भी तो तुम मुझे फोन कर सकती थी ना,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“अह्ह्ह्ह वो एक्चुली मुझे तुम्हारा नंबर याद नहीं है,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने शब्दों को चबाकर कहा
सिद्धार्थ ने सुना तो चौंककर सुरभि की तरफ देखा और बेंच से उठकर कहा,”सीरियसली ! तुम्हे मेरा नंबर तक याद नहीं है , ओह्ह्ह सुरभि तुम इतनी डम्ब कैसे हो सकती हो ?”
सुरभि को सिद्धार्थ कुछ उलटा सीधा बोले और वह चुपचाप सुन ले , इस जन्म में तो मुमकिन नहीं था। वह अपनी जगह से उठी और खींचकर एक मुक्का सिद्धार्थ की पीठ पर जड़ा और कहा,”मैं अगर डम्ब हूँ तो तुम क्या हो ?”
सुरभि के हाथ में दम था , एक मुक्के से ही सिद्धार्थ की पीठ सीधी हो गयी और उसने चिढ़कर कहा,”मैं गधा हूँ , जो तुमसे प्यार करता हूँ,,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ के मुँह से ‘मैं तुमसे प्यार करता हूँ’ सुनकर सुरभि शरमा गयी और कहा,”हाह ! मैं हूँ ही इतनी अच्छी किसी को भी मुझसे प्यार हो जाएगा,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो घूरकर सुरभि को देखा और सुरभि ने अपने अंगूठे और ऊँगली से दिल बनाया और मुस्कुरा दी।
बेचारा सिद्धार्थ उसे कुछ बोल भी नहीं सकता था इसलिए अपनी पीठ सहलाते हुए गाड़ी की तरफ चल पड़ा और कहा,”चलो ! घर चलकर पापा को जवाब भी देना है और प्लीज उनके सामने ये बिल्कुल मत कहना कि तुम घर से भागकर आयी हो,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
सुरभि गाडी का दरवाजा खोलकर अंदर आ बैठी और सीट बेल्ट लगाते हुए कहा,”तो फिर मैं उनसे क्या बोलूंगी ?”
सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखकर अपने दोनों हाथ जोड़े और कहा,”तुम्हे कुछ नहीं बोलना है मेरी माँ , मैं सब सम्हाल लूंगा तुम बस चुप रहो,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि ने सुना तो मुँह बनाया और सामने देखने लगी। सिद्धार्थ ने एक गहरी साँस ली और गाडी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी।
सिद्धार्थ सुरभि को लेकर घर पहुंचा। जगदीश जी और गिरिजा जी हॉल में ही बैठे थे। सिद्धार्थ और सुरभि उनके पास चले आये तो जगदीश जी ने कहा,”क्या हुआ सिद्धू , सब ठीक है ना ?”
सिद्धार्थ ने हामी में गर्दन हिला दी तो जगदीश जी ने सुरभि की तरफ देखा और कहा,”सुरभि ! क्या सोचा है फिर तुमने ? क्या तुम्हे सिद्धार्थ से शादी करनी है ?”
सुरभि को सिद्धार्थ ने बोलने से मना किया था इसलिए उसने ख़ामोशी से अपनी गर्दन झुका ली और सुरभि की जगह सिद्धार्थ ने कहा,”पापा ! दरअसल सुरभि को सोचने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए। आपने एकदम से इसके सामने शादी की बात कह दी तो ये थोड़ा घबरा गयी और इसलिए मुझसे बात करना चाहती थी,,,,,,,,,,,,!!!”
जगदीश जी इन दिनों सिद्धार्थ को समझने लगे थे और पहले से बहुत शांत भी गए थे इसलिए सुरभि की तरफ देखकर कहा,”इसमें घबराने की क्या बात है बेटा ? अगर तुम्हे सिद्धार्थ से शादी नहीं करनी तो साफ साफ़ मना भी कर सकती हो”
“नहीं नहीं मैं तो तैयार हूँ , इसी ने मुझसे बोला चुप,,,,,,,,,रह,,,,,,,,,,,,,,ने को”,सुरभि ने जल्दबाजी में कहा और बात खत्म करते करते उसके शब्द धीमे पड़ गए क्योकि उसे ये नहीं बोलना था।
सुरभि की बात सुनकर गिरिजा जी मुस्कुरा उठी ये देखकर सुरभि का चेहरा शर्म से लाल हो गया और वह अंदर गिरिजा जी के कमरे में भाग गयी। सिद्धार्थ भी वहा से अपने कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया !
सिद्धार्थ और सुरभि के जाने के बाद गिरिजा जी ने जगदीश जी से कहा,”मुझे तो सुरभि बहुत पसंद है और अब तो उसने भी कह दिया कि वह हमारे सिद्धू से शादी करना चाहती है। आप सुरभि के घरवालों से मिलकर इन दोनों की शादी की बात कर लीजिये ना”
“हम्म्म लेकिन,,,,,,,,,,,,!!!”,जगदीश जी कहते कहते रुक गए
“लेकिन क्या ?”,गिरिजा जी ने पूछा
“सुरभि दूसरी कास्ट से है , सब घरवालों और रिश्तेदारों से क्या कहूंगा ?”,जगदीश जी ने कहा उन्हें अब भी खानदान और समाज की चिंता थी।
“देखिये जी ये सब पुरानी बाते है , आजकल बच्चे अपनी पसंद से शादी करते है और यही उनके लिए सही है। ये जात-पात के नाम पर उनकी खुशिया छीनना मुझसे नहीं होगा। मैं अपने बेटे के लिए सुरभि को पसंद कर चुकी हूँ और अब वही इस घर की बहू बनेगी,,,,,,,,,,,!!!”,गिरिजा जी ने आज पहली बार जगदीश जी के सामने कठोर स्वर में कहा
“ठीक है भई ! जब माँ बेटा राजी तो क्या करेंगे पापाजी”,जगदीश जी ने सोफे से उठते हुए कहा
गिरिजा की आँखों में ख़ुशी के आँसू भर आये , जगदीश जी ने स्कूटी की चाबी और थैला उठाकर कहा,”मैं जरा बाजार जाकर ताजी सब्जिया ले आता हूँ”
जगदीश जी चले गए और गिरिजा भी उठकर धीरे धीरे अपने कमरे की तरफ बढ़ गयी। सुरभि ने जब उन्हें अकेले अंदर आते देखा तो उनके पास आयी और उन्हें सहारा देकर बिस्तर पर बैठा दिया। खुद भी उनके पास आ बैठी और बाते करने लगी।
अपने कमरे में बिस्तर पर बैठा सिद्धार्थ परेशान था और किसी सोच में डूबा हुआ था। सुरभि उसे पसंद करती है और वह भी उस से शादी करना चाहती है ये बात जानकर सिद्धार्थ खुश था लेकिन साथ ही इस बात की चिंता उसे सता रही थी कि सुरभि घर से भागकर आयी थी। उसके घरवाले उसे घर में ना पाकर परेशान हो रहे होंगे , कही वे लोग सुरभि को और ज्यादा गलत ना समझ ले। सिद्धार्थ बस इन्ही सब बातो में उलझता जा रहा था। उसने मन ही मन एक फैसला उठकर कमरे से बाहर चला आया।
हॉल में कोई नहीं था , गिरिजा के कमरे से हसने की आवाजे आ रही थी इसलिए सिद्धार्थ उनके कमरे की तरफ बढ़ गया ! कमरे में आकर देखा सुरभि और गिरिजा किसी बात पर खिलखिलाकर हंस रही है। सिद्धार्थ आया तो टेंशन में था लेकिन दोनों को हँसते खिलखिलाते देखकर वह कुछ देर के लिए अपनी परेशानी भूल गया और उनके साथ बैठकर बाते करने लगा।
जगदीश जी बाजार से ताजा सब्जिया और घर का कुछ जरुरी सामान ले आये। सुरभि ने सुबह सिद्धार्थ को बहुत परेशान किया था इसलिए दोपहर का खाना बनाने किचन में वह खुद चली आयी ! सिद्धार्थ ने उसकी मदद करनी चाही ताकि मदद के साथ साथ वह सुरभि से कुछ बात भी कर सके लेकिन सुरभि ने उसे किचन से बाहर कर दिया। सिद्धार्थ हॉल में आ बैठा और लेपटॉप पर अपना बचा हुआ काम खत्म करने लगा !
दोपहर का खाना सबने साथ मिलकर खाया और फिर सुरभि गिरिजा जी से बाते करते करते उन्ही के कमरे में सो गयी।
मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी , नवी मुंबई
नीलेश अपना लेपटॉप उठाये जयदीप के केबिन में आया और कहा,”मिस्टर देसाई के नए मैनेजर एक डील के सिलसिले में आपसे मिलना चाहते है”
“लेकिन देसाई ग्रुप के साथ तो हम सारे डील पहले ही केंसल कर चुके है फिर उन्हें क्यों मिलना है ? कही उन केंसल डील के बदले में मिस्टर देसाई मेरी कम्पनी पर केस तो नहीं करने वाले , हे भगवान् ! ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है , ना मैं तुम्हारी बात मानता ना उन डील्स को केंसल करता और ना उस भरत से पंगा लेता”,जयदीप ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“आप हमेशा इतने नेगेटिव मोड़ में क्यों रहते है ? आपको पृथ्वी सर से कुछ सीखना चाहिए , वो कितने कूल है। मैंने कभी उनको ऐसे पेनिक होते नहीं देखा”,नीलेश ने अपना लेपटॉप जयदीप के टेबल पर रखकर उसमे एक पेन ड्राइव लगाकर कहा
“हुंह ! मुझे उस से सीखना चाहिए , मैं उसका बॉस हूँ,,,,,,,,,,,,तुम नहीं जानते तुम्हारी एक गलती की वजह से मुझ पर मेरी कम्पनी पर कितना बड़ा फाइन लग सकता है”,जयदीप ने परेशानी भरे स्वर में कहा
तभी केबिन का दरवाजा खुला और पृथ्वी ने अंदर आते हुए कहा,”फाइन तो आप पर लगेगा”
पृथ्वी की आवाज सुनकर जयदीप ने दरवाजे की तरफ देखा , पृथ्वी को अपने सामने देखकर जयदीप का चेहरा खिल उठा। वह पृथ्वी के पास आया और उसके गले लगते हुए कहा,”ओह्ह्ह पृथ्वी ! अच्छा हुआ तुम आ गए”
कहकर जयदीप पृथ्वी से दूर हटा और आगे कहा,”तुम्हे पता भी है तुम्हारे जाने के बाद यहाँ क्या क्या हुआ ? और ये नीलेश जिसे तुमने अपनी जगह रिकमेंड किया था , ये भरत माथुर का बेटा है , भरत माथुर , देसाई ग्रुप एंड कम्पनी के MD , उसे अगर पता चला कि मैंने नीलेश को यहाँ रखा है तो वो मुझे छोड़ेगा नहीं,,,,,,,,,,आज मिस्टर देसाई का नया मैनेजर मुझसे डील करने यहाँ आ रहा है , मैं उसे साफ़ साफ़ कह दूंगा कि मुझे देसाई ग्रुप से कोई बिजनेस रिलेशन नहीं रखना,,,,,,,,,!!!!”
पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखा और सहज भाव से कहा,”मिस्टर देसाई का नया मैनेजर मैं ही हूँ”
जयदीप ने सुना तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया और लगा जैसे वह अभी चक्कर खाकर गिर जाएगा। जयदीप को खोया देखकर पृथ्वी ने कहा,”आप ठीक है ?”
जयदीप ने अपने गले में पड़ी टाई को ढीला किया और बदहवास हालत में कहा,”तुम दोनों मुझे हार्ट अटैक देकर मानोगे”
जयदीप की बात सुनकर लेपटॉप पर काम करता नीलेश हल्का सा मुस्कुराया और पृथ्वी ने टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाकर जयदीप की तरफ बढाकर कहा,”रिलेक्स ! मैं सब बताता हूँ”
जयदीप ने पानी पीया , एक दो गहरी सांसे लेकर खुद को शांत किया और पृथ्वी के साथ सोफे पर आ बैठा। पृथ्वी ने नीलेश को भी बुला लिया और फिर जयदीप को सब बताने लगा ! जयदीप ध्यान से पृथ्वी की बाते सुनने लगा , जैसे जैसे पृथ्वी बता रहा था जयदीप धीरे धीरे सब समझ रहा था और इसी के साथ उसकी परेशानी भी कुछ कम हो रही थी।
जयदीप को सच बताने के बाद पृथ्वी ने गंभीर स्वर में कहा,”सर ! ये बात सिर्फ आपके और नीलेश के अलावा कोई नहीं जानता। जल्द ही उस भरत का असली चेहरा मिस्टर देसाई के सामने आ जाएगा , तब तक हमे ये नाटक करना ही होगा। एक बार भरत अपने मुँह से अपनी सच्चाई उगल दे उसके बाद मुझे उस प्राची देसाई को भी सबक सीखाना है”
कहते कहते पृथ्वी के चेहरे पर गुस्से और चिढ के भाव उभर आये। वह उठा और जाने लगा तो नीलेश ने कहा,”पृथ्वी,,,,,,,,,,,,!!!!”
पृथ्वी ने पलटकर नीलेश को देखा तो नीलेश ने धीरे से कहा,”आई होप कि तुम प्राची के साथ ज्यादा बुरा पेश ना आओ”
पृथ्वी मुस्कुराया , नीलेश की परवाह में उसे प्राची के लिए भावनाये अब भी नजर आ रही थी उसने हामी में गर्दन हिलाई और वहा से चला गया।
ऑफिस से बाहर आकर पृथ्वी देसाई ग्रुप आया और मिस्टर देसाई की कार ऑफिस के पार्किंग में छोड़कर गार्ड के हाथ चाबी अंदर भिजवा दी। मिस्टर देसाई ऑफिस में नहीं थे इसलिए पृथ्वी सीधा स्टेशन चला आया और वहा से ट्रेन पकड़कर घर के लिए निकल गया क्योकि उसने अवनि से वादा किया था वह ऑफिस से जल्दी आ जायेगा।
पनवेल पहुचंते पहुंचते पृथ्वी को 5 बज चुके थे। वह स्टेशन से बाहर आया और पैदल ही चल पड़ा। रास्ते में उसने अवनि के लिए बहुत सारे चॉकलेट्स और सफ़ेद गुलाब के फूलों का एक बुके लिया क्योकि उसे याद था बीती रात अवनि ने एयरपोर्ट से घर लौटते वक्त उस से ये दो चीजे मांगी थी।
रवि जी का घर , पनवेल
सुबह पृथ्वी और रवि के ऑफिस जाने के बाद अवनि ने लता के साथ मिलकर घर की सफाई की और फिर दोपहर के खाने में नीलम भुआ के लिए भरवा करेले भी बनाये जो कि उन्हें बहुत पसंद थे। लक्षित अपने कॉलेज में था और घर में बस लता , अवनि और नीलम भुआ थे। तीनो ने साथ बैठकर खाना खाया और ढेर सारी बाते की। अवनि गोआ से लता और नीलम भुआ के लिए जो सामान लेकर आयी थी उन्हें दिया और दोनों को खूब पसंद भी आया !
दोपहर बाद नीलम भुआ अपने घर चली गयी और लता ने अवनि से चलकर आराम करने को कहा। अवनि लता के कमरे में चली आयी। लता बिस्तर पर आ लेटी और अवनि से भी सो जाने को कहा। अवनि लता से कुछ दूरी बनाकर उनके बगल में लेट गयी और बाते करते करते कब उसे नींद आ गयी पता ही नहीं चला। लता को नींद नहीं आ रही थी इसलिए वह बड़े प्यार से धीरे धीरे अवनि का सर थपथपाती रही जैसे कोई माँ अपने बच्चे को सुलाती है वैसे ही ,, सोई हुई अवनि ने करवट ली और सर लता के सीने से लगा लिया !
सोई हुई अवनि के चेहरे पर सुकून के भाव थे। लता मुस्कुरा उठी उसने धीरे से अवनि के सर को अपने होंठो से छुआ और अपनी आँखे मूँद ली।
लक्षित कॉलेज से घर आ चुका था। उसने अंदर आकर देखा लता और अवनि दोनों सोई हुई है तो चुपचाप किचन में जाकर खुद ही खाना लिया और खाकर बाहर सोफे पर लेटकर अपने फोन में गेम खेलने लगा। पृथ्वी घर आया देखा हॉल में सिर्फ लक्षित है तो उसने अवनि और लता के बारे में पूछा तो लक्षित ने पृथ्वी से चुप रहने का इशारा किया और उसका हाथ पकड़कर उसे चुपचाप लता के कमरे में लेकर आया। पृथ्वी ने जब लता और अवनि को साथ साथ सोये देखा वो भी इतने सुकून से तो उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी।
उसने अपने दोनों हाथो से लता और अवनि की बलाये ली और मन ही मन खुद से कहा
“एक मर्द को अपनी जिंदगी में इस से ज्यादा और क्या ही चाहिए होता है”
( सुरभि को लेकर आखिर सिद्धार्थ ने कौनसा फैसला किया है ? जो सच पृथ्वी ने जयदीप को बताया वो मिस्टर देसाई के सामने कब आएगा ? क्या अब भी है नीलेश के दिल में सुरभि के लिए प्यार ? क्या सच में एक मर्द के लिए वो पल खास होता है जब वह अपनी माँ और पत्नी साथ में खुश देखता है ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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Continue With Pasandida Aurat Season 3 – 45
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संजना किरोड़ीवाल


Sahi kaha Prithvi ne ko ek mard ko kya chahiye agar uski patni aur maa k bech m pyar beshumar hai…aur Lata ji bhi ab Avni ko sasu maa nhi maa se badh kar pyar de rhi hai…har taraf sab okay hai…bas Siddarth aur Surbhi ki shadi k liye Surbhi k ghar wale ma’am jaye aur iss Bhart ki bhi jaldi khul jaye.