Pasandida Aurat Season 3 – 43
Pasandida Aurat Season 3 – 43

सिद्धार्थ ने जैसे ही सुरभि के मुँह से सुना कि वह घर से भागकर आयी है तो सिद्धार्थ टेंशन में आ गया। सिद्धार्थ जानता था सुरभि थोड़ी पागल है लेकिन इतनी पागल होगी ये सिद्धार्थ ने सोचा नहीं था। वह सुरभि के सामने आया और दबे स्वर में कहा,”तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ? तुम , तुम घर से भागकर आयी हो ?”
“नहीं , ट्रेन में बैठकर , भागकर आती तो मेरे पैर दुखते ना”,सुरभि ने कहा
“सुरभि ! मैं मजाक के मूड में बिल्कुल नहीं हूँ,,,,,,,,सबसे पहले तो मुझे ये बताओ तुम्हारा फोन कहा है ? जानती भी हो मैंने कितने फोन और मैसेज किये तुम्हे,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने गंभीर स्वर में कहा
सिद्धार्थ को सीरियस देखकर सुरभि कुछ देर उसे एकटक देखती रही और फिर किचन से बाहर चली गयी। सिद्धार्थ झल्ला उठा आखिर सुरभि उस से चाहती क्या थी ? वह सुरभि के पीछे हॉल में चला आया तो देखा सुरभि जगदीश जी के सामने खड़ी है और उसके चेहरे पर बहुत ही गंभीर भाव है।
“अंकल ! आप मुझसे क्यों मिलना चाहते थे ?”,सुरभि ने एकदम से जगदीश जी से पूछा
जगदीश जी ने सुरभि को देखा और कहा,”बैठो,,,,,,,,,,,,,सिद्धू आओ बैठो”
सुरभि गिरिजा जी के बगल में सोफे पर आ बैठी , सिद्धार्थ भी साइड में रखे खाली सोफे पर आ बैठा। जगदीश जी ने सबको एक नजर देखा और फिर सुरभि से कहा,”मैं जो पुछु उसका सही सही जवाब देना”
“हम्म्म पूछिए”,सुरभि ने कहा
“क्या तुम सिद्धू को पसंद करती हो ?”,जगदीश जी ने पूछा
सुरभि ने सिद्धार्थ की तरफ देखा और मुँह बनाकर धीरे से बड़बड़ाई,”हुंह ! इस चिलगोजे में पसंद करने जैसा है ही क्या ? अभी अभी इसके मुँह से अपने लिए ‘तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ?’ सुनकर आयी हूँ”
“सुरभि,,,,,,,सिद्धू के पापा तुम से कुछ पूछ रहे है”,गिरिजा जी ने सुरभि का कंधा थपथपा कर कहा
सुरभि की तन्द्रा टूटी और उसने जगदीश जी की तरफ देखकर हिचकिचाते हुए कहा,”अंकल आप जैसा समझ रहे है वैसा,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“मैंने जो पूछा है उसका जवाब दो , क्या तुम सिद्धू को पसंद करती हो ?”,जगदीश जी ने कठोर स्वर में पूछा
सुरभि ने धीरे से हामी में गर्दन हिला दी , सिद्धार्थ के दिल को एक तसल्ली मिली कि चलो कम से कम सुरभि ने जगदीश जी के सामने इस बात को एक्सेप्ट तो किया कि वह उसे पसंद करती है। सुरभि का जवाब सुनकर जगदीश जी ने पूछा,”क्या तुम सिद्धू से शादी करना चाहती हो ?”
“हाँ,,,,,,,,,,,,,,,मेरा मतलब नहीं , मतलब हाँ,,,,,,,,,,,नहीं,,,,,,,,,,,,,ओह्ह गॉड,,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने हड़बड़ाकर कहा
“शांत हो जाओ ! मैंने अचानक ये पूछ लिया इसलिए तुम शायद घबरा रही हो। देखो सुरभि ! सिद्धु ने बताया कि वह तुम्हे पसंद करता है और तुम से शादी करना चाहता है लेकिन तुम्हारे मन की बात जाने बिना मैं इस रिश्ते के लिए हाँ नहीं कर सकता,,,,,,,,तो तुम बताओ क्या तुम इस से शादी करना चाहती हो ?”,जगदीश जी ने सहजता से कहा
सिद्धार्थ ने सुना तो उसे अपने कानो पर विश्वास नहीं हुआ , जगदीश जी खुद सुरभि से शादी की बात कर रहे थे। उसने हैरानी से गिरिजा जी को देखा तो गिरिजा जी अपनी पलकें झपकाकर मुस्कुरा दी। जगदीश जी का ये बदला हुआ रूप देखकर सिद्धार्थ बहुत खुश था वह बेचैनी से सुरभि के जवाब का इंतजार करने लगा। सुरभि खामोश थी और जगदीश जी को देख रही थी। उसने कोई जवाब नहीं दिया और एकदम से उठ खड़ी हुई , ये देखकर जगदीश जी के चेहरे पर परेशानी के भाव उभरे और सिद्धार्थ का दिल धड़क उठा। वह मन ही मन ये सोचकर घबरा गया कि कही सुरभि उसे ना तो नहीं कहने वाली ?
“मुझे सिद्धार्थ से बात करनी है”,सुरभि ने एकदम से कहा
“ठीक है , हमे कोई जल्दी नहीं है तुम आराम से अपना फैसला सुना सकती हो वैसे भी साथ में जिंदगी तुम्हे और सिद्धार्थ को बितानी है इसलिए तुम दोनों आपस में मिलकर फैसला कर लो तो ज्यादा बेहतर है”,जगदीश ने कहा
सुरभि फीका सा मुस्कुराई और गिरिजा जी की तरफ पलटकर कहा,”आंटी ! मैं इसे थोड़ी देर के लिए बाहर लेकर जाऊ ?”
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,,,!!”,गिरिजा जी ने कहा
सुरभि ने सिद्धार्थ की तरफ देखकर उसे एक लुक दिया और बाहर चलने का इशारा किया ताकि वह उस से बात कर सके। सिद्धार्थ धड़कते दिल के साथ उठा और सुरभि के पीछे पीछे चल पड़ा। इतना डर तो उसे आज तक जगदीश जी और गिरिजा जी से नहीं लगा था जितना सुरभि से लगने लगा था उस पर सुरभि का
वो गुस्स्से वाला लुक देखकर तो सिद्धार्थ की जान ही सूख गयी।
सुरभि सिद्धार्थ के साथ घर के दरवाजे पर आयी और जैसे ही बाहर जाने लगी। अपने घर की दिवार के पास खड़ी पड़ोसन पर सुरभि की नजर पड़ी जो कि उसे और सिद्धार्थ को ही देख रही थी।
सिद्धार्थ का गुस्सा किसी पर तो निकलना ही था इसलिए सुरभि ने सिद्धार्थ को दरवाजे पर ही छोड़ा और खुद पड़ोसन की तरफ आकर बोली,”ओह्ह्ह आंटी ! तुम्हे और कोई काम नहीं है क्या ? जब देखो तब दुसरो के घर में झांकती रहती हो , आँखे दर्द नहीं करती क्या ?”
पड़ोसन ने सुना तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया लेकिन एक अनजान लड़की की बाते वह भी कैसे सुन लेती इसलिए तुनककर कहा,”मैं अपने घर में खड़ी हूँ तुम्हारे घर में नहीं , और मैं कही भी देखू तुम्हे उस से क्या ?”
“मुझे तो कुछ नहीं है लेकिन अभी मैं जाकर तुम्हारे पति से कह दू कि तुम दिनभर यहाँ खड़ी होकर माथुर जी को देखती रहती हो , तो चलेगा तुम्हे ?”,सुरभि ने कहा
“बाप रे बाप ! क्या अजीब लड़की हो तुम , मैं भला उनको क्यों देखूंगी ?”,सुरभि से कहकर पड़ोसन ने सिद्धार्थ की तरफ देखा और कहा,”ए सिद्धू ! कौन है ये पागल लड़की ? देखो अगर तुम इस से शादी करने की सोच रहे हो तो ज़रा सोच समझकर करना , वरना तुम्हारा जीना हराम कर देगी ये लड़की,,,,,,,,,,!!!!”
सुरभि ने सुना तो पड़ोसन को मारने के लिए दिवार चढ़ने लगी ये देखकर सिद्धार्थ आया और सुरभि को उठाकर दिवार से दूर ले जाते हुए पड़ोसन से कहा,”अरे आप जाईये ना यहाँ से,,,,,,,,,,!!!”
“हुंह ! भलाई का तो ज़माना ही नहीं है”,पड़ोसन ने कहा और मुँह बनाकर वहा से चली गयी
“अरे तेरी भलाई तो मैं करुँगी , रुक जाती कहा है ?”,सुरभि ने सिद्धार्थ की बाँहो में झटपटाते हुए कहा
सिद्धार्थ ने एक हाथ से सुरभि का मुँह बंद किया और दूसरे हाथ से उसे उठाकर घर से बाहर ले गया। सिद्धार्थ ने गाड़ी का दरवाजा खोला और सुरभि को उसके अंदर डालकर दरवाजा बंद किया और खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठा। उसने गाड़ी स्टार्ट की और सुरभि को साथ लेकर वहा से निकल गया।
“तुम मुझे वहा से क्यों ले आये ? तुम्हारी उस पड़ोसन की हिम्मत कैसे हुई मुझे पागल कहने की , उसे तो मैं छोडूंगी नहीं”,सुरभि ने सिद्धार्थ की बाँह पर मारते हुए कहा
सिद्धार्थ ने घर से कुछ ही दूर एक खुले मैदान में आकर गाड़ी एक किनारे खड़ी की और सुरभि की कलाईयाँ पकड़कर उसे मारने से रोका और कहा,”सुरभि ! क्या हो गया है तुम्हे ?”
सुरभि को होश आया उसने सिद्धार्थ के हाथो से अपनी कलाईयाँ छुड़ाई और गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गयी।
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
पृथ्वी के आने से भरत का बना बनाया प्लान फेल हो गया उस पर पृथ्वी ने मिस्टर देसाई को लीगल पेपर का सच ना बताकर भरत को और उलझन में डाल दिया। भरत फ़ाइल लेकर अपने केबिन में आया और गुस्से से फाइल को टेबल की तरफ फेंककर चिल्लाया,”हाह ! ये कैसे हो सकता है ? उस पृथ्वी उपाध्याय ने यहाँ आकर मेरी सारी मेहनत को मिटटी में मिला दिया , मैं उसे छोडूंगा नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,आज वो देसाई पेपर्स पर साइन करने वाला था उसके बाद ये कम्पनी मेरी हो जाती लेकिन उसने , उसने मेरे सारे प्लान पर पानी फेर दिया”
गुस्से से भरा भरत काँप रहा था , उसका दिल जोरो से धड़क रहा था और आँखों में गुस्से की आग जल रही थी। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि पृथ्वी इस कम्पनी में मिस्टर देसाई का मैनेजर बनकर आएगा। पृथ्वी का यहाँ आना भरत के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं था। वह अपने सपने से दो कदम फिर पीछे हो गया। भरत ने अपने गले में पड़ी टाई को ढीला किया और अपनी कुर्सी पर आ बैठा। सहसा ही भरत को याद आया कि प्राची देसाई के 60% शेयर्स अभी भी उसके पास है जिनके जरिये वह देसाई को इस कम्पनी से बाहर करके इस पर अपना हक़ जमा सकता है।
भरत को उम्मीद की एक किरण नजर आयी उसने अपना ड्रॉवर खोला और उस पेपर को निकाला जिस पर भरत ने धोखे से प्राची के साइन लिए थे। भरत ने खुश होकर उस पेपर को देखा लेकिन जैसे ही पेपर पर लिखी तारीख पर पड़ी तो भरत के चेहरे पर मायूसी के भाव तैर गए , प्राची ने गलती से वहा एक महीने बाद की तारीख डाल दी थी।
पेपर पर लिखी तारीख आने में अभी एक हफ्ता और बाकी था लेकिन इसी के साथ भरत को एक तल्ली मिली की कि कम्पनी अभी भी पूरी तरह से उसके हाथ से गयी नहीं है जबकि वह इस बात से बिल्कुल अनजान था कि आज कि बोर्ड मीटिंग में मिस्टर देसाईं ने प्राची और अपने 20% शेयर्स किसी अनजान के नाम कर दिए है।
मिस्टर देसाई से मिलकर पृथ्वी उनके केबिन से बाहर चला आया और सीधा भरत के केबिन में आया। पृथ्वी को अपने केबिन में देखकर भरत अपनी जगह से उठा और पृथ्वी के सामने चला आया। पृथ्वी के चेहरे पर कठोर गुस्से के भाव थे लेकिन वह खामोश खड़ा था। भरत ने पृथ्वी को घूरकर देखा और कहा,”वेल प्लेयड पृथ्वी ! मानना पडेगा तुम्हारे दिमाग को,,,,,,,,,,,,जिस कम्पनी ने तुम्हे मौर्या ग्रुप से बाहर निकाला तुमने उसी कम्पनी में अपने लिए जगह बना ली,,,,,,,,,,लेकिन जो करने का तुम सोच रहे हो वो मैं तुम्हे करने नहीं दूंगा ! जिस स्पीड से तुम इस कम्पनी में आये हो , उसी स्पीड से मैं तुम्हे इस कम्पनी से बाहर भी करूंगा”
“आपने क्या मुझे इस ऑफिस का प्रवीण समझ रखा है या फिर आपने मुझे नीलेश समझ लिया है,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने भरत को घूरकर देखते हुए कहा तो भरत के चेहरे पर हवइया उड़ने लगी। नीलेश और उसके रिश्ते के बारे में बाहर के लोग तो क्या बल्कि इस ऑफिस के लोग भी नहीं जानते थे। पृथ्वी के मुँह से प्रवीण और नीलेश का नाम सुनकर भरत हड़बड़ा गया और कहा,”क क क्या मतलब है तुम्हारा ? देखो पृथ्वी तुम होंगे मिस्टर देसाई के मैनेजर लेकिन मैं इस कम्पनी का MD हूँ , तुम्हे मुझसे इस तरह से बात करने का कोई हक़ नहीं है समझे तुम,,,,,,,,,,,,,!!!!”
भरत को हड़बड़ाते देखकर पृथ्वी मुस्कुराने लगा। उसकी मुस्कराहट ने भरत की बेचैनी को और बढ़ा दिया। पृथ्वी भरत के करीब आया और उसकी आँखों में देखकर कहा,”इस कम्पनी के MD होकर भी तुम मेरा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे लेकिन एक मामूली सा मैनेजर होकर मैंने तुम्हारे प्लान की धज्जिया उड़ा दी,,,,,,,,,,,,,!!!!”
भरत ने सुना तो गुस्से से उसका खून खौल उठा।
पृथ्वी भरत से पीछे हटा और शर्ट की जेब से लीगल पेपर निकालकर उसके टुकड़े करते हुए कहा,”मैं चाहता तो तो ये पेपर मिस्टर देसाई को देकर तुम्हारी बेईमानी सामने ला सकता था लेकिन जो मजा तुम्हारे सामने रहकर तुम्हे तड़पाने में है वो ये सब करने में कहा,,,,,,,,बिल्कुल तुम इस कम्पनी के MD हो लेकिन इस कम्पनी का आखरी फैसला मिस्टर देसाई का होगा और वो मेरी सलाह के बाद अप्रूव होगा,,,,,,,,,,,,अब तुम बताओ भरत कम्पनी का MD बनना ज्यादा फायदे में है या मैनेजर,,,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए पृथ्वी ने फाडे हुए लीगल पेपर के टुकड़े भरत के मुँह पर उछाल दिए और भरत गुस्से से पृथ्वी को घूरता रहा।
पृथ्वी वहा से चला गया और भरत ने गुस्से में आकर अपना हाथ शीशे की टेबल पर दे मारा , उसका तो कुछ नुक्सान नहीं हुआ हाँ टेबल पर रखा सामान जरूर बिखर गया।
भरत के जले पर नमक छिड़ककर पृथ्वी मिस्टर देसाई के केबिन में आया। आने वाले डील्स और मीटिंग्स को लेकर उनसे डिस्कस किया। मिस्टर देसाई पृथ्वी से पहले ही इम्प्रेस थे आज उसके काम करने के तरीके देखकर और ज्यादा इम्प्रेस हो गए। बातो बातो में मौर्या ग्रुप का जिक्र हुआ मिस्टर देसाई ने कहा,”पृथ्वी ! जयदीप मौर्या ने अचानक हमारी कम्पनी के साथ एक साथ 6 डील्स केंसल कर दी , समझ नहीं आ रहा उसने ऐसा क्यों किया ? भरत से जब मैंने इस बारे में पूछा तो उसने कहा कि जयदीप मौर्या को हमारी कम्पनी पर भरोसा नहीं है”
“सर ! मिस्टर भरत सही कह रहे है,,,,,,,,,,,,कम्पनी छोटी हो या बड़ी जब तक आप उन्हें सिक्योरिटी या क्लियरिटी नहीं देंगे किसी भी कम्पनी को ये डर रहेगा कि डूब ना जाये,,,,,,,,,मिस्टर जयदीप मौर्या का डरना जायज है , उन्होंने इन डील्स में अपनी कड़ी मेहनत और कमाई लगाई है अगर आपकी कम्पनी उन्हें सिक्योरिटी नहीं देगी तो उनका डील केंसल करना जायज है और हो सकता है आपके बाद उन्हें कोई और बेहतर क्लाइंट मिल गया हो”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
पृथ्वी को बात सुनकर मिस्टर देसाई सोच में पड़ गए और फिर पृथ्वी की तरफ देखकर कहा,”पृथ्वी ! क्या जयदीप के पास हमारी कम्पनी से एक नया ऑफर लेकर जाओगे ? भरत और जयदीप के बिजनेस रिलेशन अच्छे नहीं है मैं जानता हूँ पर तुम्हे देखकर जयदीप मौर्या ना नहीं कह पायेगा,,,,,,,,,,,,,,, Will you do me a favor plz ?”
पृथ्वी सोच में पड़ गया , उसने अभी तक जयदीप को अपने देसाई ग्रुप ज्वाइन करने के बारे में नहीं बताया था , ऐसे में अचानक उसके सामने डील लेकर जाना पृथ्वी के लिए थोड़ा मुश्किल होने वाला था फिर भी उसने हामी में गर्दन हिला दी।
मिस्टर देसाई ने एक नए प्रोजेक्ट की फाइल साइन करके पृथ्वी की तरफ बढ़ा दी और कहा,”तुम आज ही जाकर उस से मिल लो,,,,,,ये चाबी रखो , मेरी गाडी ले जाना”
पृथ्वी ने गाड़ी की चाबी और फाइल उठायी और केबिन से बाहर निकल गया।
सिद्धार्थ की गाडी से बाहर निकल कर सुरभि वही मैदान में पड़ी पत्थर की एक बेंच पर आ बैठी। सिद्धार्थ भी गाडी से नीचे उतरा और सुरभि के पास चला आया। सुरभि बेंच के एक किनारे पर बैठी थी , सिद्धार्थ बेंच के दूसरे किनारे पर आ बैठा और सुरभि की तरफ देखकर धीरे से कहा,”आई ऍम सॉरी,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“तुमने मुझे क्यों नहीं बताया ?”,सुरभि ने सिद्धार्थ की तरफ देखकर थोड़ा गुस्से से कहा
“क्या ?”,सिद्धार्थ ने पूछा
“यही की तुम मुझे पसंद करते हो तुम्हे मुझसे शादी करनी है”,सुरभि ने उतने ही गुस्से से फिर कहा
“क्या तुम्हे दिखाई नहीं देता या फिर तुम जान बूझकर अनजान बन रही हो ?”,सिद्धार्थ का भी गुस्सा फूट पड़ा
सुरभि उसे ख़ामोशी से देखने लगी और सिद्धार्थ के चेहरे पर मायूसी के भाव उभर आये,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
( क्या गिरिजा जी और जगदीश जी ने कर लिया है सुरभि को स्वीकार ? क्या भरत फंस चुका है अपने ही बनाये जाल में या अभी भी करेगा वह फिर से जीतने की कोशिश ? क्या इस बार कर देगा सिद्धार्थ सुरभि के सामने अपने प्यार का इजहार ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Chalo ek kaam to aaj achcha hua aur wo yeh ki jagdish ji ne khud Surbhi ki pasand puchi aur Surbhi ne bhi batai…ki usse Siddarth pasand hai..but yeh bhi sahi Surbhi ne ki shadi ka faisla Siddarth se puch kar le ki Siddarth ko usse pyar hai ya nhi…aur gusse m he sahi Siddarth ne bol Diya hai ki wo Surbhi se pyar krta hai…ab dekhte hai Surbhi k ghar wale kya krte hai…idhar Bhart ko tadapte huye dekhna bhi sahi hoga, quki Prithvi k Mr. Desai ko Bhrat ki sachchi batane par usko kam saja milti…lakin ab Prithvi roz Bhart ko muh tod jawab dega…well done Prithvi aur all the best for Jaideep k liye.