Pasandida Aurat Season 3 – 37
Pasandida Aurat Season 3 – 37

भरत ने ऑफिस का काम खत्म किया और फिर बैंक के लिए निकल गया ! अपनी गलती छुपाने के लिए उसे मिस्टर शर्मा की बात माननी पड़ी। भरत ने अपनी पूरी सेविंग मिस्टर शर्मा को दे दी। अपनी FD तुड़वाकर बैंक से रूपये लिए और मिस्टर शर्मा के ऑफिस जा पहुंचे। भरत ने उन्हें बची हुई रकम लौटाई और देसाई ग्रुप में लौट आया। भरत को बस अब अगले दिन का इंतजार था जब वह अपना आखरी दांव खेलकर हमेशा के लिए इस खेल को ख़त्म करने वाला था।
पृथ्वी से बात करने के बाद जयदीप को समझ आया कि नीलेश उसकी कम्पनी में बस पृथ्वी का भेजा एक मोहरा है बाकी जो कुछ नीलेश कर रहा है वो सब पृथ्वी रहा है। पृथ्वी के काम और उसकी सूझ-बूझ का तो जयदीप पहले से ही दीवाना था लेकिन उसे पृथ्वी से मिलकर ये सब सुलझाना था। वह फिर से पृथ्वी को किसी और मुसीबत में डालना नहीं चाहता था। आज रात पृथ्वी मुंबई पहुंचने वाला था और जयदीप को बस कल सुबह का इंतजार था जब वह पृथ्वी से मिलकर जानेगा कि आखिर वह कर क्या रहा है ?
सुरभि अपने घर में कैद होकर रह चुकी थी। उसके भाई ने उसकी मदद करने की कोशिश की लेकिन सुरभि को तो सिद्धार्थ का नंबर तक याद नहीं था। वह चाहती तो अवनि और पृथ्वी की मदद ले सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया ! कितने वक्त बाद अवनि और पृथ्वी की जिंदगी में सुकून के पल आये थे ! सुरभि इन पलों को बर्बाद करना नहीं चाहती थी। उसका फोन उसके पास नहीं था और सिद्धार्थ से बात करने और घरवालों के समझने की उम्मीद अब उसे दूर दूर तक कही नजर नहीं आ रही थी इसलिए सुरभि ने अगली सुबह भागने का प्लान बनाया और अब उसे भी अगले दिन का इन्तजार था।
पिछले 24 घंटो में सिद्धार्थ सुरभि को ना जाने कितने ही कॉल और मैसेज कर चुका था लेकिन सुरभि ने एक भी कॉल और मैसेज का जवाब नहीं दिया और आखरी बार कॉल किया तब पता चला कि सुरभि ने अपना फोन बंद कर लिया है ! सिद्धार्थ अब पूरी तरह से टूट चुका था , सुरभि को नजरअंदाज करते देखकर
सिद्धार्थ को अब लगने लगा कि सुरभि जैसे अब तक उस से कोई बदला ले रही थी। इसी ख्याल के साथ सिद्धार्थ के दिमाग में सुरभि को लेकर नेगेटिव ख्याल उमड़ने लगे लेकिन उसका दिल , उसका दिल अब भी सुरभि को मासूम समझ रहा था। दिनभर सिद्धार्थ इसी कश्मकश में उलझा रहा और फिर उस ने फैसला किया कि कल वह एक बार फिर सुरभि के फ्लेट जाएगा और उस से ये सब करने की वजह पूछेगा।
अवनि और पृथ्वी का आज गोआ में आखरी दिन था और इस दिन को दिन खूबसूरत याद के साथ जीना चाहते थे इसलिए अवनि के कहने पर पृथ्वी ने आज नाश्ता कमरे से बाहर गार्डन में किया ! नाश्ते के बाद दोनों ने बाकि कपल्स के साथ मिलकर रिसोर्ट के पूल में वक्त बिताया और मस्ती की। नहाकर दोनों तैयार हुए फिर बाहर घूमने निकल गए। अवनि की पसंद से पृथ्वी ने घरवालों के लिए कुछ शॉपिंग की और दोपहर होते होते दोनों रिसोर्ट चले आये।
पृथ्वी ने अवनि से खाना खाने के लिए रिसोर्ट में ही बने रेस्त्रो चलकर दोनों के लिए खाना आर्डर करने को कहा और खुद सब बैग लेकर कमरे में चला आया।
कमरे में आकर पृथ्वी ने बैग रखे , हाथ मुँह धोया और फ्रेश होकर खाना खाने चला आया। पृथ्वी आया तब तक अवनि खाना आर्डर कर चुकी थी और बैठकर जूस पी रही थी। पृथ्वी आकर उसके सामने बैठा।
वेटर खाना लेकर आया उसने वेज खाना अवनि के सामने रखा और नॉनवेज पृथ्वी के सामने ये देखकर पृथ्वी ने अवनि से कहा,”तुम अपने लिए वेज और मेरे लिए नॉन वेज क्यों मंगवाया ?”
“आपको पसंद है ना इसलिए,,,,,,,,,,,!!!”, अवनि ने मुस्कुरा कर कहा
“अरे बेटा ! तुम नॉनवेज नहीं खाती , मैं तुम्हारे सामने बैठकर ये कैसे खा सकता हूँ ?”,अवनि की तरफ देखकर पृथ्वी ने कहा और फिर वहा खड़े वेटर की तरफ पलटकर कहा,”इसे ले जाईये प्लीज”
“ये बिल में ऐड हो चुका है सर”,वेटर ने कहा
“इट्स ओके ! आई विल पे , आप इसे ले जाईये”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
वेटर ने पृथ्वी के सामने रखा खाना उठाया और वहा से चला गया। वेटर के जाने के बाद अवनि ने पृथ्वी से कहा,”पृथ्वी ! आपने खाना वापस क्यों कर दिया ?”
“क्योकि अब से मैं भी तुम्हारे साथ वेज खाऊंगा”,पृथ्वी ने अवनि के लिए लाये खाने से थोड़ा खाना अपनी प्लेट में परोसते हुए कहा
अवनि हैरानी से पृथ्वी को देखने लगी ! वह पृथ्वी जिसकी जुबान पर हमेशा चिकन मटन का नाम होता था वह अवनि के लिए वेज खाने की बात कर रहा है।
अवनि को अपनी तरफ देखते पाकर पृथ्वी ने कहा,”मैं रोज वेज खाऊंगा लेकिन यहाँ से वापस मुंबई जाने के बाद तुम्हे रोज मेरे लिए अच्छा अच्छा वेज खाना बनाना पडेगा बस वो लौकी , कद्दू , करेला नहीं बनाना हाँ वो मैं नहीं खा पाऊंगा”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराने लगी और अपनी प्लेट से पृथ्वी की प्लेट में थोड़ा खाना और परोसते हुए कहा,”मैं सब आपकी पसंद से बनाउंगी ठीक है”
“डन ! और ये क्या कर रही हो तुम ? सब मेरी प्लेट में रख दिया अपने लिए कुछ नहीं रखा , रुको मैं खिलाता हूँ”,कहते हुए पृथ्वी ने एक निवाला बनाया और अपने हाथ से अवनि को खिला दिया। सुकून के भाव अवनि के चेहरे पर झिलमिलाने लगे क्योकि उसने जान बूझकर अपना सारा खाना पृथ्वी की प्लेट में परोसा ताकि पृथ्वी उसे अपने हाथ से खिलाये।
अवनि को मजे से खाते देखकर पृथ्वी ने कहा,”अब समझ में आया तुमने अपना खाना मेरी प्लेट में क्यों रखा ? मेरे हाथ से खाना चाहती थी ना”
अवनि ने हामी में सर हिलाया और कहा,”क्या पता इसके बाद मुंबई जाकर मौका मिले न मिले”
“हाह ! ऐसा कुछ नहीं है , मैं रोज तुम्हे अपने हाथ से खिलाऊंगा , तुम जितनी बार कहोगी उतनी बार खिलाऊंगा”,पृथ्वी ने निवाला अवनि की तरफ बढ़ाकर कहा
अवनि ने सुना तो प्यार से पृथ्वी के चेहरे को निहारने लगी। उसके सामने बैठा ये शख्स उसके लिए अपने दिल में कितनी मोहब्बत लेकर बैठा था। अवनि ने एक निवाला अपने हाथ से बनाया और पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”आपने प्यार से एक निवाला खिलाया मेरे लिए वही काफी है”
पृथ्वी मुस्कुराने लगा और फिर दोनों बाते करते हुए खाना खाने लगे।
खाना खाने के बाद पृथ्वी और अवनि अपने कमरे में चले आये। अवनि हाथ मुँह धोकर आयी तो देखा पृथ्वी बैग पैक कर रहा है। अवनि पृथ्वी की तरफ आयी और कहा,”हटिये ! मैं करती हूँ”
पृथ्वी ने अवनि की बाँहो को पकड़कर उसे अपने सामने बिस्तर पर बैठाया और कहा,”तुम आराम करो ये मैं पैक कर देता हूँ। हमारे पास थोड़ा वक्त है और जाने से पहले मैं तुम्हे कुछ दिखाना चाहता हूँ”
“क्या ?”,अवनि ने पूछा
“है कुछ ! देखो तुम मुझे डिस्टर्ब मत करो , मुझे पैकिंग करने दो”,पृथ्वी ने झूठ मुठ का चिढ़कर कहा तो अवनि मुस्कुराने लगी और फिर वही बैठकर पृथ्वी की मदद करने लगी।
सब सामान पैक होने के बाद पृथ्वी ने अवनि से कपडे बदलकर आने को कहा जो कि सफर में कंफर्टेबल हो और खुद भी टीशर्ट और जींस पहन लिया। बाकि सब कपडे और सामान भी उसने पैक किया और बैग साइड में रख दिए। फ्लाइट में अभी 3 घंटे बाकि थे !
अवनि ने कुर्ती और पलाजो पहना उसमे वह काफी प्यारी लग रही थी। बालों को समेटकर उनमे क्लेचर डाल लिया और मेकअप के नाम पर बस होंठो पर हलकी लिपस्टिक लगाई और पृथ्वी के साथ बाहर निकल गयी।
पृथ्वी अवनि को लेकर बीच चला आया। अवनि को नहीं समझ आया कि पृथ्वी उसे यहाँ क्यों लेकर आया है ? वह बिना कोई सवाल जवाब किये पृथ्वी के साथ चल रही थी। बीच किनारे आकर पृथ्वी ने अवनि की आँखों पर अपना हाथ रखा और उसे लेकर दूसरी तरफ बढ़ गया ! ये वही जगह थी जो पहले दिन अवनि ने कमरे की खिड़की से देखी थी और पृथ्वी से सवाल किया था कि इस जगह इतने कम लोग क्यों है ?
पृथ्वी एक जगह आकर रुका और धीरे से अवनि की आँखों से अपना हाथ हटा दिया ! अवनि ने धीरे से अपनी आँखे खोली और जैसे ही सामने देखा , सामने का नजारा देखकर उसकी पलकों ने जैसे झपकने से इंकार कर दिया ! सामने ढलता सूरज और उसकी पिली नारंगी रौशनी इस वक्त इतनी खूबसूरत लग रही थी कि कोई भी देखकर ठहर जाए। अवनि प्यारभरी नजरो से ढलते सूरज को देखती रही।
पृथ्वी अवनि के पीछे खड़ा था उसने अपनी बांहो को अवनि की कमर और पेट से लपेट लिया और अपनी ठुड्डी अवनि के कंधे पर टिकाकर कहा,”पसंद आया ?”
पृथ्वी की बाँहो में कैद अवनि ने पृथ्वी की तरफ गर्दन घुमाई और आँखों में चमक भरकर कहा,”ये सच में बहुत खूबसूरत है। मुझे सनसेट देखना बहुत पसंद है , ढलता सूरज एक सुकून देता है”
पृथ्वी ने अवनि के ललाट को अपने होंठो से छुआ और कहा,”हाँ मैं जानता हूँ तुम्हे सनसेट पसंद है , अदरक वाली चाय पसंद है , बंद कमरों की खुली खिड़किया पसंद है , बस और ट्रेन में खिड़की वाली सीट पसंद है , सफ़ेद फूल पसंद है , झुमके पसंद है , चुडिया पसंद है , बनारस पसंद है और बनारस में सबसे ज्यादा अस्सी घाट पसंद है,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“आपको सब पता है”,अवनि ने मुस्कुराकर कहा
“तुमसे जुडी हर बात याद रखना मुझे ख़ुशी देता है”,पृथ्वी ने कहा
“ये सब बाते तो मेरी किताबो में भी लिखी है”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अवनि को अपनी तरफ घुमाया और उसका चेहरा अपने दोनों हाथो में लेकर उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”अवनि ! तुम्हारी किताबो से ज्यादा मैंने तुम्हे पढ़ा है , तुम्हारी इन आँखों को पढ़ा है , तुम्हारे ललाट पर सिकन को पढ़ा है , तुम्हारे होंठो की हंसी को पढ़ा है और तुम्हारे इस मासूम चेहरे के पीछे छुपे अनकहे दर्द को पढ़ा है,,,,,,,,,,,,,,,तुम्हे जानने के लिए मुझे तुम्हारी किताबे पढ़ने की जरूरत नहीं है।”
“ऐसी बातें करके आप मेरी मुश्किलें बढ़ा रहे है”,अवनि ने पृथ्वी की आँखों में झाँकते हुए कहा
“कैसी मुश्किलें ?”,पृथ्वी ने अपलक अवनि की आँखों में देखते हुए कहा
“अगर आप ऐसे ही मुझसे प्यार करते रहे तो मुझे खुद पर गुरुर हो जाएगा पृथ्वी”,अवनि ने कहा
“तुम्हे खुद पर गुरुर करने के लिए मेरे प्यार की जरूरत नहीं है अवनि ! मेरे बिना भी तुम्हारी अपनी एक पहचान है लेकिन हाँ मेरा साथ उस पर चेरी ऑन द केक जरूर हो सकता है”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि मुस्कुरा दी
ढलता सूरज , शाम का समय , समंदर का किनारा , ठंडी हवा के झोंके और समंदर की आती जाती लहरों की आवाज , दो प्यार करने वाले खामोश खड़े एक दूसरे की आँखों मे ना जाने क्या ढूंढ रहे थे ? अवनि का चेहरा पृथ्वी के हाथो में था और फिर पृथ्वी ने धीरे से अपनी गर्दन झुकाई और अपने होंठो को अवनि के होंठो की तरफ बढ़ा दिया। अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली और समंदर की लहरें उन दोनों के पैरों को छूकर गुजरने लगी। दूर कही बहुत ही प्यारी धुन बज रही थी जिसने इस पल को और भी खूबसूरत बना दिया।
उसी शाम , देसाई मेंशन , मुंबई
बिस्तर पर उलटी पड़ी प्राची अपना फोन स्क्रॉल कर रही थी कि तभी उसके फोन की स्क्रीन पर एक मैसेज पॉप अप हुआ। प्राची ने मैसेज खोलकर देखा तो ख़ुशी से उसका दिल धड़क उठा और आँखे चमक उठी ! उसके होंठो पर एक बड़ी सी मुस्कान तैर गयी और उसके सफ़ेद मोती जैसे दाँत चमक उठे। वह फोन हाथ में थामे पीठ के बल लुढ़क गयी और विक्रम का नंबर डॉयल किया।
एक दो रिंग जाने के बाद विक्रम ने फोन उठाया तो प्राची ने कहा,”हेलो विक्रम ! कहा हो तुम ?”
“मैं अपने ऑफिस में हूँ बताओ कैसे याद किया ?”,विक्रम ने कहा
“अह्ह्ह्ह ! एक्चुली क्या हम मिल सकते है ?”,प्राची ने पूछा
“अभी ?”,विक्रम ने थोड़ा हैरानी भरे स्वर में कहा क्योकि उसके सामने फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग बैठे जिनके साथ आज उसकी इम्पोर्टेन्ट मीटिंग थी !
“हाँ प्लीज,,,,,,,,,,,मुझे अभी तुम से मिलना है , प्लीज प्लीज प्लीज ना मत कहना”,प्राची ने रिक्वेस्ट करके कहा
विक्रम ने सामने बैठे लोगो को देखा , अगर वह अभी मीटिंग केंसल कर प्राची से मिलने जाता है तो उसे भारी नुक्सान होगा और अगर वह प्राची को मना करता है तो प्राची नाराज होगी। उसने फोन का स्पीकर अपने हाथ से दबाया और सामने बैठे लोगो से कहा,”मिस्टर कपूर ! क्या बाकि की चीजे हम कल डिस्कस कर सकते है ? इफ यू डोंट माइंड ! मुझे अर्जेन्ट जाना होगा”
सामने बैठे लोग आपस में खुसर फुसर करने लगे और फिर मिस्टर कपूर ने हामी में सर हिलाया और अपने लोगो के साथ वहा से निकल गए। विक्रम ने प्राची को अपने ऑफिस से कुछ ही दूर एक कैफे में मिलने को कहा
“अह्ह्ह्ह नहीं वहा नहीं ! तुम मुझे विले पार्ले मिलो , प्राइम मॉल के सामने,,,,,,,,,मैं तुम्हे एक घंटे में वही मिलूंगी”,प्राची ने कहा
“विले पार्ले क्यों ? हम किसी अच्छी जगह मिलते है न”,विक्रम ने कहा
“ओह्ह्ह प्लीज विक्रम , तुम्हे वही आना है और तुम आ रहे हो देट्स इट बाय”,प्राची ने कहा और बिना विक्रम की बात सुने फोन काट दिया।
विक्रम ने अपना फोन देखा और खुद में ही बड़बड़ाया,”इसने मुझे प्राइम मॉल क्यों बुलाया है , आखिर अब क्या चल रहा है इसके दिमाग में ?”
( कल का दिन लेकर आएगा भरत , जयदीप , सुरभि और सिद्धार्थ के लिए कोई अच्छी खबर ? गोआ से जाने के बाद भी क्या यू ही बना रहेगा अवनि और पृथ्वी का प्यार ? आखिर क्यों है प्राची इतना खुश और क्यों बुलाया उसने विक्रम को इतनी दूर मिलने ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ
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संजना किरोड़ीवाल


सुरभि अपने घर में कैद होकर रह चुकी थी। उसके भाई ने उसकी मदद करने की कोशिश की लेकिन सुरभि को तो सिद्धार्थ का नंबर तक याद नहीं था। वह चाहती तो अवनि और पृथ्वी की मदद ले सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया ! कितने वक्त बाद अवनि और पृथ्वी की जिंदगी में सुकून के पल आये थे ! सुरभि इन पलों को बर्बाद करना नहीं चाहती थी। उसका फोन उसके पास नहीं था और सिद्धार्थ से बात करने और घरवालों के समझने की उम्मीद अब उसे दूर दूर तक कही नजर नहीं आ रही थी इसलिए सुरभि ने अगली सुबह भागने का प्लान बनाया और अब उसे भी अगले दिन का इन्तजार था।
Kal ka din to sab behano k important hai quki kal rakshabandan hai…lakin yeh samj nhi aaya ki Prachi ko esi kon se baat karni hai jo usne Vikram ko turant milne k liye bulaya hai…kahin wo Prithvi ko kidnep to nhi krne wali hai…quki aaj sham ko Prithvi Mumbai wapas aa rha hai…aur rhi Surbhi ki baat to wo nhi bhagegi …uska bhai nhi krne dega… dekhna hoga ki Siddarth kya krta hai…aur sabse zaruri to Bhart ko dekhna hai.