Pasandida Aurat Season 3 – 36

Pasandida Aurat Season 3 – 36

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

भरत ने अपने लॉयर को कुछ जरुरी पेपर्स बनाने को कहा और फोन रख दिया। भरत अपना आखिर दांव खेलने जा रहा था और उसके पास बस अब 24 घण्टे बचे थे। 24 घंटो के बाद भरत की सारी परेशानिया दूर होने वाली थी और यही सोचकर वह मुस्कुराया। भरत अपने ही ख्यालो में खोया हुआ था कि तभी उसका फोन बजा। भरत ने अपना फोन उठाया , स्क्रीन पर अपने बैंक मैनेजर का नंबर देखकर भरत की मुस्कुराहट गायब हो गयी और उसने फोन उठाकर कान से लगाकर कहा,”हेलो”

“मिस्टर भरत ! आपने जो 10 लाख रूपये का इंतजाम करने को कहा था , वो तैयार है। आप खुद बैंक आएंगे या मैं अपने स्टाफ को आपके ऑफिस भेज दू ?”,फ़ोन के दूसरी तरफ से बैंक मैनेजर ने कहा
“नहीं नहीं ! किसी को ऑफिस भेजने की जरूरत नहीं है मैं खुद ही बैंक आ जाता हूँ”,भरत ने जल्दबाजी में कहा
“ठीक है मिस्टर भरत लेकिन क्या मैं जान सकता हूँ ऐसी क्या मज़बूरी थी कि आपको अपनी 10 लाख की FD को यू अचानक तुड़वाना पड़ा ?”,बैंक मैनेजर ने पूछा

“वो मैं आपको नहीं बता सकता , मैं बैंक आकर आपसे मिलता हूँ,,,,,,,,!”,कहकर भरत ने फोन काट दिया और मिस्टर शर्मा की भेजी डील्स पर काम करने लगे

मौर्या Pvt. Ltd. कम्पनी , नवी मुंबई
ऑफिस में काफी शोरगुल था और सभी अपना अपना काम छोड़कर यहाँ वह बस टाइम पास कर रहे थे। जयदीप अभी ऑफिस आया नहीं था जबकि नीलेश वक्त से ऑफिस से पहुंच चुका था। नीलेश पृथ्वी के केबिन में उसकी टेबल के सामने अपना लेपटॉप लेकर बैठा था और उस पर काम कर रहा था। ऑफिस में होने वाली चीजों से जैसे उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था , उसका ध्यान बस अपने लेपटॉप पर था और वह एक जरुरी रिपोर्ट तैयार करने में लगा हुआ था।

तान्या , कशिश और मनीष आ चुके थे और नीलेश पहले ही उन्हें ढेर सारा काम देकर बिजी कर चुका था। अंकित अपना बैग लिए केबिन में आया और अपने टेबल की तरफ जाते हुए कहा,”ये आज ऑफिस वालो ने ऑफिस को मच्छी मार्किट क्यों बनाया हुआ है ?”
“जैसा राजा वैसी प्रजा”,लेपटॉप पर अपनी नजरे गड़ाए नीलेश ने कहा जिसकी बात सुनकर अंकित और बाकि सब ने हैरानी से एक साथ उसे देखा

“तुम्हारे कहने का मतलब क्या है ?”,अंकित ने पूछा
नीलेश ने अपना लेपटॉप बंद किया और अपनी कुर्सी अंकित की तरफ घुमाकर कहा,”कम्पनी के मालिक को ऑफिस हमेशा सबसे पहले आना चाहिए ताकि वह देख सके कि उसके ऑफिस की कंडीशन क्या है ? अब जैसा बॉस होगा वैसे ही उसके एम्प्लॉय भी होंगे,,,,,,,,,,,,ये मतलब था मेरी बात का”

नीलेश की बात सुनकर अंकित ख़ामोशी से उसे देखने लगा तो अंकित उठा और लेपटॉप के बगल में पड़ी फाइल ली और उठते हुए कहा,”आधे घंटे बाद मैं तुम सब से मीटिंग रूम में मिलूंगा,,,,,,,,,,,!!”
नीलेश वहा से चला गया तो मनीष ने अंकित से कहा,”ये नया मैनेजर तो पृथ्वी सर से भी ज्यादा खड़ूस है”
“हाँ और रुड भी,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,अंकित ने कहा और मुँह बनाकर अपने बैग से लेपटॉप निकालने लगा। कशिश और तान्या ने मायूस होकर एक दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों अपने अपने काम में लग गयी।

गोआ रिसोर्ट
देर रात अवनि और पृथ्वी सबसे साथ बॉर्नफायर के लिए गार्डन में मौजूद थे इसलिए सोते सोते काफी रात हो गयी और दोनों सुबह देर तक सोते रहे। पृथ्वी की बांहो में अवनि बड़े सुकून से सो रही थी। खिड़की से आती धुप उसके चेहरे पर पड़ी तो वह नींद में कुनमुनाई जिस से पृथ्वी की नींद खुली उसने देखा सुबह की धुप अवनि को तंग कर रही है।  सोई हुई अवनि की बंद आँखों में एक सुकून था , चेहरे पर एक ताजगी और मासूमियत , सुर्ख होंठो की खूबसूरती और गाल पर आती बालों की लट।

पृथ्वी प्यारभरी नजरो से एकटक अवनि को देखता रहा और फिर धीरे से अपना हाथ अवनि पर पड़ती धुप के सामने कर दिया। पृथ्वी धीरे से हाथ को साइड करता और खिड़की से आती धुप अवनि को छू लेती , पृथ्वी फिर अपना हाथ धुप के सामने करता और सुकून के भाव अवनि के चेहरे पर झिलमिलाने लगते। पृथ्वी को ये सब करने में बड़ा मजा आ रहा था। वह मुस्कुराते हुए अवनि के चेहरे को निहारता रहा और फिर सहसा ही उसे वो सब बातें याद आ गयी जब शादी से पहले वह बार बार अवनि के सामने अपनी भावनाये जाहिर करता था और अवनि उसे खुद से दूर रहने को कहती थी।

पृथ्वी ने अवनि को अपनी बाँहो में समेट लिया , अवनि का सर पृथ्वी के सीने से आ लगा और पृथ्वी ने अपने होंठो से धीरे उसके सर को छुआ और मन ही मन कहा,”तुम हमेशा मुझे खुद से दूर रहने को कहती थी अवनि और देखो आज तुम खुद मेरे सबसे करीब हो,,,,,,,,,,,,,,,बहुत ज्यादा करीब हो”

अवनि का ये साथ पृथ्वी की जिंदगी का सबसे यादगार वक्त रहने वाला था। अवनि को अपने सीने से लगाये पृथ्वी मन ही मन खुद से ना जाने कितनी ही बाते करता रहा। कुछ देर बाद अवनि नींद से जागी और देखा कि वह पृथ्वी की बांहो में है तो अधखुली आँखों से पृथ्वी को देखकर मुस्कुराई और मन ही मन खुद से कहा,”याद है पृथ्वी मैं हमेशा आपको खुद से दूर रहने को कहती थी और देखो आज मैं खुद आपके करीब हूँ,,,,,,,,,,,इतना करीब कि मैं आपको धड़कने सुन सकती हूँ,,,,,,,,,,,!!”

पृथ्वी की नजर मुस्कुराती हुई अवनि पर पड़ी तो उसने कहा,”तुम जग क्यों गयी ? सोते हुए कितनी प्यारी लग रही थी , चलो वापस सो जाओ”
पृथ्वी ने अवनि का सर अपने सीने से लगाकर उसे बच्चो की तरह थपथपाकर कहा
अवनि ने अपना सर हटाया और पृथ्वी की तरफ देखकर कहा,”क्या पृथ्वी ! मैं बच्ची थोड़ी हूँ ?”
“मेरे लिए तुम बच्ची ही हो , छोटी लड़की जिसे बहुत सारे प्यार की जरूरत है”,पृथ्वी ने कहा और जैसे ही अपना हाथ अवनि के गाल की तरफ बढ़ाया अवनि ने पीछे हटकर कहा,”प्यार की नहीं फिलहाल मुझे एक कप चाय की जरूरत है”

“मैं आर्डर कर देता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“नहीं ! बाहर चलकर पीते है ना पृथ्वी”,अवनि ने बिस्तर से नीचे उतरकर कहा
“ठीक है”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि फ्रेश होने बाथरूम की तरफ चली गयी और पृथ्वी अपना फोन देखने लगा जिस पर कुछ मिस्ड कॉल और मैसेज थे।

पृथ्वी ने सभी कॉल्स और मैसेज को इग्नोर किया लेकिन एक नंबर वह इग्नोर नहीं कर पाया और फोन लगाकर खिड़की के पास चला आया। उसने खिड़की खोली और बाहर से आती ठंडी हवा के झोंके ने उसे छू लिया।
कुछ रिंग जाने के बाद किसी ने फोन उठाया और पृथ्वी ने बस जी और हाँ-नहीं में जवाब दिया। आखिर में पृथ्वी ने कहा,”मैं कल सुबह आकर आपसे मिलता हूँ”
पृथ्वी ने कुछ देर और बात की और फिर फोन काट दिया।

पृथ्वी ने फोन कट किया और जयदीप का नंबर डॉयल किया। जयदीप ने पहली ही रिंग में फोन उठा लिया और गाडी साइड लगाकर पृथ्वी से कहा,”मैं तुम्हारे ही फोन का इंतजार कर रहा था”
“मेरे फोन का क्यों ?”,पृथ्वी ने हैरानी से पूछा क्योकि उसने जयदीप से किसी और वजह से फोन किया था।

“यहाँ कुछ ठीक नहीं है , वो नीलेश तुम जानते हो उसने कल क्या किया ? कल तो उसने मुझे माइनर हार्ट अटैक दे ही दिया था,,,,,,,,उसकी पहचान बड़े बड़े लोगो से है और मुझे अब इस बात से डर लग रहा है पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,!!!”, जयदीप ने अपनी परेशानी पृथ्वी के सामने जाहिर की
पृथ्वी ने शांति से सब सुना और कहा,”आप खामखा परेशान हो रहे है। आपको और आपकी कम्पनी को नीलेश से कोई खतरा नहीं है वह यहाँ बस अपना काम करने आया है। उसे अपना काम करने दीजिये और बड़े बड़े लोगो से जान पहचान बढाईये”

“ओह्ह्ह पृथ्वी तुम समझ नहीं रहे हो , नीलेश देसाई ग्रुप एंड कम्पनी का एक्स एम्प्लॉय है , अगर मिस्टर देसाई को पता चला कि वह हमारी कम्पनी में काम कर रहा है तो उन्हें कितना बुरा लगेगा , कही वो मुझे गलत न समझ ले ?”,जयदीप ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“मिस्टर देसाई की नाराजगी से आपको क्या फर्क पड़ता है ? आपकी और उनकी कम्पनी दोनों अपना अपना बिजनेस करती है। गलत तब होता जब नीलेश अपनी पुरानी कम्पनी की डिटेल्स आपसे शेयर करता या उस कम्पनी के कॉन्टेक्ट आपके लिए इस्तेमाल करता”,पृथ्वी ने जयदीप को समझाया

“फर्क पड़ता है पृथ्वी ! मिस्टर शर्मा जो कि मिस्टर देसाई के बहुत अच्छे बिजनेस फ्रेंड है , उन्होंने कल नीलेश की वजह से हमारी कम्पनी के साथ डील की। तुम्हे नहीं लगता ये सब करके हम मिस्टर देसाई से दुश्मनी मोल ले रहे है ?”,जयदीप ने कहा
“आपको क्या लगता है मिस्टर शर्मा नीलेश की वजह से वहा आये थे ? नीलेश देसाई ग्रुप में सिर्फ प्राची का मैनेजर था MD नहीं,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने सधे हुए स्वर में कहा

“तो फिर मिस्टर शर्मा,,,,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“उन्हें मैंने भेजा था,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
जयदीप ने सुना तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया उन्हें लगा मिस्टर शर्मा नीलेश की वजह से यहाँ आये और डील डन करके चले गए जबकि सच्चाई तो कुछ और थी
जयदीप को खामोश पाकर पृथ्वी ने कहा,”रिलेक्स ! ये बात बताकर मैं आपको परेशान करना नहीं चाहता था लेकिन बताना पड़ा वरना आप खामखा नीलेश देशमुख से इम्प्रेस होते रहते”

“लेकिन तुम मिस्टर शर्मा को कैसे जानते हो और ये सब ?”,जयदीप ने कहा
“मैं आपको सब बता दूंगा ! आज शाम की फ्लाइट से मैं मुंबई वापस आ रहा हूँ,,,,,,,,,,,,,,कल एक जरुरी काम है उसके बाद शाम में मैं आपसे मिलता हूँ”,पृथ्वी ने गंभीर स्वर में कहा
“क्या ? तुम मुंबई वापस आ रहे हो ? फिर तो अवनि को तुम्हारे नौकरी छोड़ने के बारे में पता चल जायेगा , उसे क्या कहोगे पृथ्वी ?”,जयदीप ने मायूसी भरे स्वर में कहा

“सोच रहा हूँ मुंबई आकर अवनि को सब सच बता दू”,पृथ्वी ने कहा
“नहीं अवनि को कुछ बताने की जरूरत नहीं है ! तुम कल से वापस मौर्या ग्रुप ज्वाइन कर लो,,,,,,,,उस भरत को मैं अपने आप देख लूंगा”,जयदीप ने कहा
“आपको लगता है मैंने भरत के डर से आपकी कम्पनी छोड़ी है,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने पूछा
“तो फिर क्यों ?”,जयदीप ने पूछा

“क्योकि आपके साथ काम करके मैं थोड़ा बोर हो चुका था इसलिए मैने आपकी कम्पनी छोड़ दी”,पृथ्वी ने जयदीप को छेड़ने के लिए जान बूझकर ऐसा कहा और जयदीप चिढ भी गया
“अच्छा तो अब तुम्हे मेरी कम्पनी बोरिंग लगने लगी है,,,,,,,,,,,,हुंह भूलो मत मैं तुम्हारा बॉस हूँ”,जयदीप ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
“आप भी मत भूलिए मैं एक सुन्दर सी लड़की का पति हूँ , इस वक्त उसके साथ हनीमून पर आया हूँ और आप ये फिजूल बाते करके मेरा वक्त बर्बाद कर रहे है”,पृथ्वी ने भी चिढ़कर कहा।

“ओहके फाइन ! मुंबई आकर तुम मुझसे मिलोगे,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने कठोर स्वर में कहा
“थोड़ा प्यार से कहिये ना”,पृथ्वी ने कहा
जयदीप ने गुस्से से एक गहरी साँस ली और फिर अपने दिल पर पत्थर रखकर बड़े प्यार से कहा,”मिस्टर उपाध्याय ! मुंबई आने के बाद क्या आप मुझसे मिलने की कृपा करेंगे ? प्लीज मालिक,,,,,,,,,,,!!!”
“हम्म्म ठीक है सोचूंगा”,पृथ्वी ने कहा

जयदीप ने अफ़सोस में अपना सर झटका और फिर फोन काट दिया ! नीलेश और पृथ्वी उसके लिए एक पहेली बन चुके थे जिसका सुलझना बहुत जरुरी था।
अवनि फ्रेश होकर कपडे बदलकर बाहर आयी और पृथ्वी उसे साथ लेकर कमरे से बाहर निकल गया।

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
गिरिजा जी के फ्रेक्चर के बाद सिद्धार्थ ने ऑफिस के साथ साथ घर की जिम्मेदारिया भी अपने ऊपर ले ली। उसने सुबह का नाश्ता खुद बनाया।  गिरिजा जी को नाश्ता करवाकर दवा दी और उन्हें आराम करने को कहकर कमरे से बाहर चला आया। सिद्धार्थ ने जगदीश जी और अपने लिए भी नाश्ता लगाया और साथ बैठकर खाने लगा ! गिरिजा जी की वजह से ही सही सिद्धार्थ को जगदीश जी के साथ बैठकर खाने का मौका मिला और बीती रात के बाद से दोनों में हलकी फुलकी बाते भी होने लगी थी।

सिद्धार्थ ने नाश्ता किया और प्लेट उठाकर जैसे ही जाने लगा टेबल पर रखा उसका फोन बजा। सुरभि का फोन होगा सोचकर सिद्धार्थ जल्दी से टेबल की तरफ आया और फोन देखा। स्क्रीन पर अपने बॉस का नाम देखकर सिद्धार्थ मायूस हो गया। कल से सुरभि का कोई अता पता नहीं था और इसी वजह से सिद्धार्थ बहुत परेशान था। मायूस चेहरा लेकर वह बर्तन रखने किचन में चला गया। सिद्धार्थ के चेहरे की मायूसी जगदीश जी भांप गए लेकिन कहा कुछ नहीं।

सिद्धार्थ वापस आया और अपना फोन लेकर कमरे में चला गया। उसने अपने बॉस से बात की और इस उम्मीद में अपना फोन चेक किया कि सुरभि ने उसे कोई तो जवाब दिया होगा लेकिन सुरभि का ना कोई मैसेज था ना ही कोई फोन। सिद्धार्थ का मन अब अंदर ही अंदर आहत होने लगा और वह सोचने लगा कि क्या सुरभि जानबूझकर उसे इग्नोर कर रही है ? सिद्धार्थ ने सुरभि का नंबर डायल किया इस बार रिंग नहीं गयी बल्कि जवाब आया
“जिस नंबर से आप संपर्क करना चाहते है वो अभी स्विच ऑफ है , कृपया थोड़ी देर बाद डॉयल करे”

सिद्धार्थ ने सुना तो फोन कान से हटाया और अब तो उसे सच में ये लगने लगा कि शायद सुरभि जान बूझकर ही उसे इग्नोर कर रही है वरना वह अपना फोन ऐसे बंद क्यों करती ?
कहते है कि जब एक गलत विचार दिमाग में आता है तो वह अकेले नहीं आता बल्कि 100 गलत विचारो को अपने साथ लेकर आता है ! सिद्धार्थ के साथ भी यही हुआ जब उसने पाया कि सुरभि का फोन बंद है। पहले उसने सोचा की सुरभि उसे जान बूझकर इग्नोर कर रही है और उसके बाद एक एक करके गलत विचार उसके दिमाग में आते ही चले गए।

अनिकेत का सुरभि के फ्लेट पर आना , उस पर हक़ जताना , शुरुआत में सुरभि का सिद्धार्थ से नफरत करना , सुरभि का अपनी भावनाये छुपाना ये सब सिद्धार्थ के जहन में चलने लगा और ना चाहते हुए भी उसके जहन में सुरभि को लेकर अलग इमेज बनने लगी ! गुस्से में आकर सिद्धार्थ ने अपना फोन बिस्तर पर फेंका और खुद में ही बड़बड़ाया,”थैंक्यू सुरभि ! अवनि का दिल तोड़ने का अच्छा बदला लिया तुमने मुझसे,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

( क्या भरत हो पायेगा अपने इस आखरी दाँव में सफल ? क्या पृथ्वी है इस पुरे खेल का मास्टरमाइंड और नीलेश है सिर्फ एक मोहरा ? क्या दूर होगी सुरभि को लेकर सिद्धार्थ की गलतफहमी या हो जायेगा वह हमेशा के लिए सुरभि से दूर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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