Pasandida Aurat Season 3 – 29

Pasandida Aurat Season 3 – 29

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

जयदीप अपने सामने खड़े नए केंडिडेट को हैरानी से देख रहा था। जयदीप ने देखा उसके सामने खड़ा शख्स कोई और नहीं बल्कि नीलेश माथुर है। वही नीलेश जो कुछ वक्त पहले देसाई ग्रुप की MD प्राची देसाई का मैनेजर था। जयदीप को हैरान परेशान देखकर नीलेश ने फिर कहा,”Good Morning सर , Are you ok ?”
नीलेश की आवाज से जयदीप की तन्द्रा टूटी उसने हड़बड़ाकर कहा,”प्लीज सिट”
“थैंक्यू सर”,नीलेश ने कुर्सी खिसकाकर बैठते हुए कहा


जयदीप ने पानी का गिलास उठाया और एक साँस में उसे खत्म कर गिलास साइड में रख दिया ! जयदीप को थोड़ा परेशान देखकर नीलेश ने कहा,”सर ! आई थिंक मुझे यहाँ देखकर आप सरप्राइज है ?”
“शॉक ! शॉक लगा है मुझे,,,,,,,,,मैं अभी आता हूँ”,जयदीप ने कहा और नीलेश से वही इंतजार करने को कहकर खुद केबिन से बाहर आया और पृथ्वी को फोन लगाया।


एक दो रिंग जाने के बाद पृथ्वी ने फोन उठाया आज वह अवनि के साथ क्रूज पर जाने वाला था इसलिए दोनों बीच किनारे ही खड़े थे। स्क्रीन पर जयदीप का नंबर देखकर पृथ्वी मुस्कुराया जैसे वह जानता हो कि जयदीप का फोन आएगा ही आएगा। पृथ्वी ने अवनि से वही रुकने को कहा और साइड में आकर जयदीप का फोन उठाकर कान से लगाकर बहुत ही खुशमिजाज अंदाज में कहा,”हेलो सर ! गुड मॉर्निंग”


“गुड मॉर्निंग ? यहाँ मुझे हार्ट अटैक आते आते बचा है। तुमने अपनी जगह नीलेश माथुर को रिकमेंड किया है , क्या तुम होश में हो ?”,जयदीप ने परेशानी भरे स्वर में कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”बिल्कुल मैं होश में हूँ मैंने अभी आपकी तरह पीना शुरू नहीं किया है”
“पृथ्वी मैं मजाक के मूड में बिल्कुल नहीं हूँ , आई ऍम सीरियस,,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने गंभीर स्वर में कहा
“सर ! मैं भी मजाक के मूड में नहीं हूँ , मैं अपनी जगह नीलेश को बहुत सोच समझ के रिकमेंड किया है। सो डोंट वरी नीलेश को उसका काम करने दो”,पृथ्वी ने कहा


“पृथ्वी ! तुम जानते हो न नीलेश ऑपोसिट कम्पनी का एम्प्लॉय है , उसे तुम्हारी जगह रखकर क्या सच में मुझे रिस्क लेना चाहिए ?”,जयदीप ने चिंतित स्वर में पूछा
“सर ! आपको मुझ पर भरोसा है न ?”,पृथ्वी ने कहा
“हाँ ! मुझे तुम पर पूरा भरोसा है पृथ्वी”,जयदीप ने कहा
“तो फिर आज से ही नीलेश को मेरी जगह दे दीजिये,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा


“लेकिन वो जगह तुम्हारी है और मैं उस जगह वापस मैं तुम्हे देखना चाहता था पृथ्वी”,जयदीप ने मायूस होकर कहा
“ओह्ह्ह कम ऑन मिस्टर जयदीप ! आपको लगता है इतना बड़ा काम करने के बाद मैं उस पोस्ट पर वापस आऊंगा ? फिलहाल मैं अपनी नयी जिंदगी में बिजी हूँ काम के बारे में मुंबई आकर सोचूंगा”,पृथ्वी ने कहा
“कौनसा बड़ा काम ? कही तुम फिर से मौर्या ग्रुप के खिलाफ जाने की तो नहीं सोच रहे ?”,जयदीप ने पूछा
“फ़िलहाल मैं अवनि के साथ रोमांटिक डेट पर जाने की सोच रहा हूँ,,,,,,,,,,अगर आपकी इजाजत हो तो मैं जाऊ मालिक ?”,पृथ्वी ने कहा


“हाँ जाओ मैंने तुम्हे कब रोका ?”,जयदीप ने कहा
“आप फोन रखेंगे तभी तो मैं जा पाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा
“ठीक है ! जल्दी वापस आओ मुझे तुम से मिलना है,,,,,,,,,,यहाँ ये सब सम्हालना मुश्किल हो रहा है एंड आई रियली मिस यू”,जयदीप ने मायूस होकर कहा
“आप भूल रहे है कि आप एक बड़ी कम्पनी के बॉस है,,,,,,,,मैं रखता हूँ बाय”,पृथ्वी ने कहा और जयदीप की बात सुने बिना ही फोन काट दिया लेकिन फोन काटने के बाद जयदीप की बाते याद करके मुस्कुरा उठा।

पृथ्वी काफी देर तक नहीं आया तो अवनि उसकी तरफ चली आयी और उसे मुस्कुराते देखकर कहा,”पृथ्वी”
अवनि की आवाज से पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने कहा,”आप तो ऐसे मुस्कुरा रहे है जैसे आपकी किसी पुरानी सहेली का फोन आया हो”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”हम्म्म सहेली ही समझ लो लेकिन मेल सहेली”
“मेल सहेली ?”,अवनि ने चौंककर पूछा


“अरे जयदीप सर का फोन था”,पृथ्वी ने कहा
“मिस कर रहे होंगे ना तुम्हे ? इतने दिनों से तुम ऑफिस नहीं गए काम भी पेंडिंग में होगा”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो अवनि के बगल में आकर उसके कंधो पर अपनी बाँह रखी और उसके साथ क्रूज की तरफ बढ़ते हुए कहा,”उसकी टेंशन तुम मत लो,,,,,,,,,मुंबई पहुंचकर मैं सब सही कर दूंगा”
अवनि मुस्कुराई और हामी में गर्दन हिला दी।  

पृथ्वी से बात करने के बाद जयदीप वापस केबिन में आया लेकिन नीलेश कुर्सी पर नहीं था ये देखकर जयदीप के चेहरे पर परेशानी के भाव उभरे और उसने इधर उधर देखा तो खिड़की के पास खड़ा नीलेश उसे नजर आया। जयदीप नीलेश की तरफ आया और कहा,”क्या तुम जानते हो तुम्हे यहाँ रिकमेंड पृथ्वी ने किया है ?”
जयदीप की आवाज सुनकर नीलेश पलटा और जयदीप की तरफ देखकर कहा,”जी हाँ मुझे पता है”


“बैठकर बात करे ?”,जयदीप ने कहा तो नीलेश एक बार फिर जयदीप के सामने कुर्सी पर आ बैठा। कुछ देर इधर उधर की बाते करने और नीलेश के लिमिटेड जवाब सुनकर जयदीप समझ गया कि नीलेश पृथ्वी से पूरा ट्रेंड होकर आया है।
“नीलेश एक पर्सनल सवाल पूछ सकता हूँ ?”,जयदीप ने पूछा
“जी बिल्कुल”,नीलेश ने सहजता से जवाब दिया
“देसाई ग्रुप की इतनी अच्छी पोस्ट छोड़कर तुम यहाँ आये हो , क्या मिस्टर देसाई इस बात को जानते है ?”, जयदीप ने पूछा


नीलेश कुछ देर खामोश रहा और फिर बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”सर इसमें कोई शक नहीं है कि पुरे मुंबई में देसाई एंड ग्रुप टॉप टेन कम्पनीज में से एक है। वहा मेरा अच्छा पैकेज था , अच्छी जॉब थी और ग्रोथ भी थी लेकिन एक क्वालिटी होती है सर जिसे हम “सेल्फ रिस्पेक्ट” है। एक नौकरी बचाने के लिए अगर आपको अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट दाव पर लगानी पड़े तो मेरे ख्याल से वो नौकरी नहीं गुलामी है और मैं गुलामी के लिए नहीं बना”


नीलेश की बातो में जयदीप को एक सच्चाई नजर आयी लेकिन फिर भी थोड़ा घबरा रहा था क्योकि नीलेश देसाई ग्रुप का बहुत ही पुराना एम्प्लॉय था और अब वह जयदीप की कम्पनी में था ये जानकर कही देसाई ग्रुप से उनके बिजनेस रिलेशन हमेशा के लिए खत्म ना हो जाए जयदीप को इस बात की चिंता सता रही थी इसलिए उन्होंने नीलेश से कहा,”इस बात की क्या गारंटी है कि इस कम्पनी में रहते हुए तुम देसाई ग्रुप के लिए ईमानदार रहोगे और उनकी इन्फॉर्मेशन लीक नहीं करोगे ?”


“अगर मुझे ये करना होता तो मैं यहाँ इस मामूली नौकरी के लिए नहीं आता बल्कि उन इन्फॉर्मेशनस को बाकि 9 कम्पनीज में बेचकर इतना पैसा कमा लेता कि जिंदगीभर ऐश करता”,नीलेश ने कहा
नीलेश की बात सुनकर जयदीप एक बार फिर हैरान था। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर नीलेश की इस कम्पनी में आने की असल वजह क्या है ? वह सामने से ज्यादा पूछ भी नहीं सकता था इसलिए कहा,”ओहके फाइन ! तुम चाहो तो आज से पृथ्वी की जगह काम शुरू कर सकते हो”


“मैं अपना काम शुरू कर चुका हूँ”,कहते हुए नीलेश ने अपना लेपटॉप जयदीप की तरफ घुमा दिया ! जयदीप के सामने एक नए प्रोजेक्ट की रिपोर्ट थी जिसे उसे आज शाम की मीटिंग में प्रेजेंट करना था। जयदीप ने देखा और कहा,”ये तुमने कब और कैसे किया ?”
नीलेश इस केबिन मे आने के बाद पहली बार हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”That’s why Prithvi has advised me to come here.”
जयदीप ने सुना तो हामी में गर्दन हिलायी और लेपटॉप वापस नीलेश की तरफ घुमाकर कहा,”So what can we do now ?”


नीलेश ने अपना लेपटॉप बंद किया और कहा,”देसाई ग्रुप के साथ कितनी डील्स है ?”
“6 डील्स””,जयदीप ने कहा
“Cancel them”,नीलेश ने सधे हुए स्वर में कहा
जयदीप ने सुना तो हैरानी से नीलेश को देखने लगा और हैरानी भरे स्वर में कहा,”व्हाट ?”
“I said, cancel them”,नीलेश ने सधे हुए स्वर में कहा  


जयदीप ने सुना तो मन ही मन कहा,”लगता है ये और पृथ्वी दोनों मिलकर मेरी कम्पनी को बंद करवाकर मानेंगे”
जयदीप को खुद में ही बड़बड़ाते देखकर नीलेश उठा और अपना लेपटॉप उठाकर कहा,”मैं आपसे आफ्टर लंच मीटिंग में मिलता हूँ”
जयदीप कुछ कहता इस से पहले नीलेश वहा से चला गया और जयदीप उसे जाते देखकर बड़बड़ाया,”ये तो पृथ्वी से भी ज्यादा खड़ूस निकला,,,,,,,,पता नहीं मेरी कम्पनी का क्या होगा ?”

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
अपने केबिन में बैठा भरत किसी सोच में डूबा परेशान था। मिस्टर देसाई ने उसे अपने लिए नया मैनेजर ढूंढने को कहा लेकिन भरत अपने किसी आदमी को मैनेजर की पोस्ट नहीं दे सकता था क्योकि इसके लिए उस लेवल तक क्वालिफाइड होना भी जरुरी था ! साथ ही मिस्टर देसाई ने भरत को एक नयी परेशानी दे दी नीलेश के रूप में , जब से नीलेश ये कम्पनी छोड़कर गया था वह किसी की नजरो में नहीं आया ना ही वह लौटकर वापस आया।

नीलेश इस कम्पनी में  काफी सालों से था और प्राची का मैनेजर भी था इसलिए वह इस कम्पनी से जुडी बहुत सी जरुरी इन्फॉर्मेशन जानता था और यही अब इस कम्पनी के लिए एक परेशानी बन चुकी थी जिसका जिम्मा भी मिस्टर देसाई ने भरत पर ही डाल दिया ! भरत ने सोचा प्रवीण को कम्पनी से निकालने के बाद उसका रास्ता आसान हो जाएगा लेकिन ये आसान होने के बजाय और मुश्किल हो गया जब कुछ देर पहले हुई मीटिंग में मिस्टर देसाई ने कहा कि कम्पनी में नए CA के आने तक उसकी सभी जिम्मेदारी भरत देखेगा।


भरत को ना चाहते हुए भी मिस्टर देसाई की ये बात माननी पड़ी इसलिए अब वह अपने केबिन में सर पकडे बैठा था। कुछ देर बाद किसी ने दरवाजा खटखटाया और भरत ने कहा,”यस कम इन”
भरत का चमचा चेतन अंदर आया और कहा,”सर आपने मेल चेक किया ?”
भरत ने ना में गर्दन हिलाई और लेपटॉप खोलकर कम्पनी के मेल बॉक्स को चेक किया जिसमे सबसे ऊपर मौर्य एंड ग्रुप का मेल था।

भरत ने जैसे ही मेल देखा उसकी आँखे हैरानी से फ़ैल गयी और उसने चेतन की तरफ देखकर कहा,”ये सब क्या है ? कल तक वो जयदीप मौर्या इन डील्स के लिए मेरे सामने भीख माँग रहा था और आज उसने इन्हे केंसल कर दिया और रीजन दिया है कि उन्हें हमारी कम्पनी पर भरोसा नहीं,,,मुंबई की टॉप टेन कम्पनीज में से एक देसाई ग्रुप एंड कम्पनीज पर भरोसा नहीं है। चेतन जयदीप मौर्या से अभी कॉन्टेक्ट करो और उनके साथ आज शाम मीटिंग रखो”


चेतन ने सुना और मायूसी भरे स्वर में कहा,”सर मैंने जयदीप मौर्या से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने ये कहकर फोन काट दिया कि वो इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहते”
भरत ने सुना तो गुस्से से उसका खून उबल पड़ा आखिर जयदीप उस से चाहता क्या था ? ये सब करने के पीछे आखिर क्या कारण हो सकता है क्योकि कोई भी कम्पनी का मालिक अपनी निजी दुश्मनी के चलते अपने बिजनेस को नुकसान में नहीं डालेगा।

भरत ने चेतन की तरफ देखा और कहा,”कही वो पृथ्वी मौर्या कम्पनी में वापस तो नहीं आ गया ? क्योकि उसके अलावा और किसी में इतनी हिम्मत नहीं है कि मौर्या ग्रुप के फैसले को बदल सके”
“नहीं सर ! पृथ्वी सर तो मुंबई से बाहर है और सुनने में आया है कि जयदीप उसकी जगह किसी नए बन्दे को हायर करने वाला है”,चेतन ने कहा


चेतन की बात सामान्य थी लेकिन गुस्से से भरे भरत ने जब पृथ्वी के लिए उसके मुँह से सर सुना तो उसका गुस्सा और बढ़ गया और उसने चिल्लाकर कहा,”व्हाट सर हाँ , वो बस मौर्या कम्पनी का एक मामूली सा एम्प्लॉय है इस से  ज्यादा कुछ नहीं समझे”
“सो सो सॉरी सर”,चेतन ने घबराहट भरे स्वर में कहा
“मैंने तुम्हे नीलेश का पता लगाने को कहा था उसका कुछ पता चला ?”,भरत ने गुस्से से उबलकर कहा
“नहीं सर ! मैंने लड़को को भेजकर सब जगह पता करवाया लेकिन उसका कुछ पता नहीं है,,,,!!”,चेतन ने कहा


हर तरफ से ना ना सुनकर भरत गुस्से से उठा और टेबल पर रखे सामान को हाथ से साइड में गिराकर कहा,”आखिर तुम सब कर क्या रहे हो ? एक लड़के का पता नहीं लगा पा रहे हो , इतना पैसा क्या मैं तुम लोगो के ऐशो आराम के लिए देता हूँ ?”
भरत को इतने गुस्से में देखकर चेतन घबरा गया। भरत गुस्से में चेतन के पास आया और उसकी कोलर पकड़कर गुस्से से कहा,”दो दिन के अंदर मुझे नीलेश किसी भी हाल में अपने सामने चाहिए समझे तुम,,,,,,,,,,,,,वरना तुम सब अपनी नौकरी से हाथ धो बैठोगे”

चेतन की आवाज उसके गले में ही रह गयी उसने हामी में गर्दन हिलायी और भरत ने उसे पीछे  धकियाकर कहा,”जाओ यहाँ से,,,,,,,,,,!!!”
चेतन बिना एक पल गवाए वहा से चला गया। भरत ने गुस्से में अपना हाथ टेबल पर दे मारा।

सुरभि का फ्लेट , सिरोही
 सुरभि के ऑफिस की आज भी छुट्टी थी इसलिए उसे ऑफिस तो जाना नहीं था। सुरभि ने आज अपने घर को साफ़ करने का सोचा और चाय नाश्ते के बाद सफाई में जुट गयी। कमरे की सफाई करते हुए उसके हाथ अवनि का डिब्बा लगा जिसमे अवनि की चूडिया और कानो के कुछ झुमके रखे थे। सुरभि ने झाड़ू साइड में रखी और उस डिब्बे को खोलकर उसमे रखी चूडिया अपने दोनों हाथो में पहन ली और छनकाकर खुश होने लगी। उसने बड़े बड़े झुमके निकाले और उन्हें भी अपने कानो में पहन लिया

उसी डिब्बे में एक टिका रखा था उसे अपनी माँग में सजा लिया और कबर्ड से एक दुपट्टा निकालकर सर पर ओढ़ लिया और शीशे के सामने आकर दुल्हन की तरह शर्माने की एक्टिंग करने लगी। सुरभि ने देखा ये सब पहन कर वह सुंदर तो लग रही थी लेकिन साथ ही कुछ कमी भी थी। सुरभि ने ध्यान से देखा तो पाया कि ललाट पर बिंदी नहीं लगा है तो उसने एक ललाट पर एक बिंदी भी लगा लिया और अब वह बहुत ज्यादा सुन्दर लग रही थी।


 सुबह सुबह सुरभि का मन ख़ुशी से भरा हुआ था वह शीशे में खुद को देखते हुए निहार रही थी , गुनगुना रही थी और फिर उसने अपना फोन उठाया और अपनी एक सुन्दर सी फोटो खींचकर सिद्धार्थ को भेज दी। सुरभि खुद नहीं समझ पा रही थी कि वह ऐसा क्यों कर रही है ? बस उसे ये करना अच्छा लग रहा था ख़ुशी दे रहा था। उसने अपने फोन में कोई गाना चलाया और उस दुपट्टे को ओढ़कर थिरकने नाचने गाने लगी


“ओह्ह्ह पीया ! ओह्ह्ह पीया ! लेके डोली आ
चलूँ मैं तेरी ही गली , चलू मैं तेरी ही गली ,
ओह्ह्ह पीया की गली तो लागे जग से भली , जग से भली
ओह्ह्ह पीया ! ओह्ह्ह पीया ! लेके डोली आ”

जैसे जैसे गाना बज रहा था सुरभि हँसते मुस्कुराते गाना गाते घर के सभी काम निपटा रही थी। उसने हाथो में चुड़िया , कानो में झुमके अभी भी पहने थे बस दुपट्टा सोफे पर था और ललाट का टीका किचन प्लेटफॉर्म , उसने सभी काम निपटाए और नहाने चली गयी। नहाकर वापस आयी तो फिर उसका वही नाचना गाना थिरकना चालू हो गया। आज उसने तय किया कि वह सिद्धार्थ के घर जाएगी उसके पापा से मिलने इसलिए उसने नयी जींस और उस पर पहनने के लिए कुर्ती निकाल ली।

सुरभि ने कपडे पहने और अपने बालों को सुखाते हुए शीशे के सामने चली आयी तभी उसका फोन बजा। सुरभि ने बिस्तर पर रखा अपना फोन देखा तो सिद्धार्थ का मैसेज था। उसने सुरभि को चक्कर खाकर नीचे गिरने वाला एक GIF भेजा था। सुरभि ने देखा तो हंस पड़ी , सिद्धार्थ ने ये उसकी भेजी हुई फोटो के बदले में भेजा था साथ ही लिखा था “I can’t wait to see you anymore , i am coming”


सिद्धार्थ का मैसेज देखकर सुरभि का दिल धड़क उठा और उसके गाल गुलाबी हो गए। वह पीठ के बल बिस्तर पर लेट गयी और मुस्कुराते हुए सिद्धार्थ के बारे में सोचने लगी।

कुछ देर बाद ही घर की डोरबेल बजी ! सुरभि उठकर हैरानी और ख़ुशी भरे भावो के साथ खुद में ही बड़बड़ायी,”ये इतनी जल्दी आ भी गया”
वह जल्दी से बिस्तर से नीचे उतरी और कमरे से बाहर जाने लगी लेकिन वापस शीशे के सामने आयी और अपने बालों को ठीक किया , शीशे पर चिपकी बिंदी उतारकर ललाट पर लगाईं और ड्रेसिंग पर रखे झुमके उठाकर कानो में पहनने लगी। एक कान में तो आसानी से पहन लिया दूसरे कान में जैसे ही पहनने लगी बेल फिर बजी।

सुरभि दूसरे झुमके को पहनते हुए दरवाजे की तरफ जाने लगी। आज से पहले वह कभी ऐसे तैयार नहीं हुई लेकिन आज सिद्धार्थ के लिए ये सब करने में उसे एक अलग ही ख़ुशी का अहसास हो रहा था। सुरभि ने झुमका कान में पहनते हुए दरवाजा खोला और बिना सामने देखे कहा,”खोल रही हूँ बाबा इतनी भी क्या जल्दी है ?’
दूसरा झुमका भी सुरभि पहन चुकी थी और जैसे ही सामने देखा उसके चेहरे का रंग उड़ गया और वह कुछ बोल नहीं पायी।

( मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी में आने के पीछे क्या है नीलेश का मकसद ? देसाई सर ने क्यों डाल दी भरत पर सारी जिम्मेदारियां और क्या वह ढूंढ पायेगा नीलेश को ? क्या फिर से आया है अनिकेत सुरभि के सामने या इस बार आयी है सुरभि की जिंदगी में कोई नयी परेशानी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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Continue With Pasandida Aurat Season 3 – 30

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संजना किरोड़ीवाल

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