Pasandida Aurat Season 3 – 18

Pasandida Aurat Season 3 – 18

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

अवनि को सुलाकर पृथ्वी सोफे की तरफ चला आया और आकर उस पर लेट गया ! अवनि नशे में थी ऐसे में उसके करीब रहना पृथ्वी को सही नहीं लग रहा था क्योकि अगर अवनि उसके करीब आने की कोशिश करेगी तो वह भी खुद को नहीं रोक पायेगा और वह अवनि के साथ अपनी शादीशुदा जिंदगी पुरे होशो हवाश में शुरू करना चाहता था ऐसे नहीं,,,,,,,,,,,!!

पृथ्वी ने सोफे से कुशन को उठाकर एक सर के नीचे लगाया और दूसरा अपने सीने से लगाकर आँखे मूँद ली। पृथ्वी ने अभी आँखे बंद की ही थी कि उसके कानों में अवनि के रोने की आवाज पड़ी। पहले पृथ्वी को लगा कि उसका वहम है इसलिए उसने नजरअंदाज कर दिया लेकिन अगले ही पल उसके कानो में फिर वही अवनि के सिसकने की आवाज पड़ी तो पृथ्वी ने अपनी आँखे खोली और गर्दन घुमाकर देखा तो पाया कि अवनि बिस्तर पर बैठी है और अपने नाख़ून चबाते हुए सिसक रही है। पृथ्वी ने सीने पर रखे तकिये को साइड में रखा और उठकर अवनि की तरफ आया।

पृथ्वी ने देखा अवनि सच में रो रही है तो वह उसके सामने आ बैठा और प्यार से कहा,”अवनि ! क्या हुआ ? तुम सोई क्यों नहीं ?”
अवनि ने भीगी पलकें उठाकर पृथ्वी को देखा और कहा,”अब तुमसे मुझसे प्यार नहीं करोगे ना ?”
“अरे ! ये किसने कहा तुम से ?”,पृथ्वी ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“क्योकि अब तुम मुझसे नफरत करने लगे हो”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
“अरे बेटा ! मैं तुम से नफरत क्यों करूँगा ?”,पृथ्वी ने कहा

“क्योकि मैंने तुम्हे परेशान किया , मैंने शराब पीकर तुम्हे तंग किया इसलिए”,अवनि ने फिर रोआँसा होकर कहा उसे इतना याद था कि उसने शराब पी है
“तुम मुझे रोज तंग करो मुझे चलेगा”,पृथ्वी ने प्यार से कहा
अवनि मुस्कुराई और पृथ्वी के पास खिसककर उसका हाथ अपने हाथो में लेकर कहा,”तो क्या मैं तुम्हे थोड़ा और तंग करू ?”
“हम्म्म ठीक है”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने खुश होकर उसे रुकने का इशारा किया। वह गिरते पड़ते बिस्तर से नीचे उतरी और अपने सूटकेस को नीचे गिराकर उसे खोलने लगी। पृथ्वी को नहीं समझ आया वह क्या कर रही है वह बस हैरानी से उसे देख रहा था। अवनि ने सूटकेस खोला और उसमे कुछ ढूंढने लगी। एक एक करके उसने कपडे बाहर निकालने शुरू किये , बाहर क्या निकाले वह हवा में उछाल कर उन्हें इधर उधर फेंक रही थी।

कपडे फेंकते हुए उसके हाथ में काव्या का दिया वन पीस भी आया और उसे भी उसने फेंक दिया जो की सीधा पृथ्वी के मुँह पर आ गिरा। पृथ्वी ने उसे हटाया और दोनों हाथो से उठाकर देखा और अगले ही पल बड़बड़ाया,”कही अवनि मुझसे ये पहनने को तो नहीं कहने वाली , अरे नहींईईईईई मैं ये नहीं करने वाला , इसे कही छुपा देता हूँ”
कहकर पृथ्वी ने जल्दी से उसे फोल्ड किया और तकिये के नीचे छुपा दिया। वह सीधा होकर बैठा तब तक अवनि अपने हाथ में कोई गुलाबी रंग का पेपर जैसा कुछ लेकर आयी और पृथ्वी के सामने बैठते हुए कहा,”अपना हाथ सामने करो”

पृथ्वी को नहीं पता था अवनि क्या करने वाली है इसलिए उसने अपना हाथ आगे कर दिया। पृथ्वी के हाथ पर बालों को देखकर अवनि ने गुलाबी पेपर को अलग करके कहा,”देखो तुम्हारे हाथ पर कितने बाल है , मैं इन्हे हटा देती हूँ,,,,,,,,,,,,!!!”
“मतलब ?”,पृथ्वी ने पूछा
“मतलब ये कि मैं तुम्हारी वेक्स करुँगी”,अवनि ने कहा और जैसे ही वेक्स पेपर पृथ्वी के हाथ पर चिपकाने लगी पृथ्वी ने अपना हाथ पीछे खींचकर कहा,”ए अवनि ! मैं ये सब नहीं करने वाला,,,,,,,,ये वेक्स वेक्स लड़किया करती है मैं लड़का हूँ”

अवनि ने एक हाथ में वेक्स स्ट्रिप को थामा और दूसरे हाथ से पृथ्वी का हाथ अपनी तरफ खींचकर कहा,”लड़के भी कर सकते है। रुको तुम्हे अच्छा लगेगा”
“अरे ये भी कोई अच्छा लगने की चीज है,,,,,,,,,,,,,अवनि ! मेरे बच्चे देखो रात बहुत हो गयी है तुम , तुम सो जाओ ,, हम ये सब सुबह करेंगे ठीक है”,पृथ्वी ने अवनि को समझाते  से उठ खड़ा हुआ
अवनि नशे में थी इसलिए इस वक्त पृथ्वी की बात मानने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। वह उठी और पृथ्वी की तरफ आते हुए कहा,”नहीं मुझे अभी करना है”

पृथ्वी वहा से निकल गया लेकिन अवनि उसके पीछे पड़ गयी। दोनों उस कमरे में यहाँ वहा भागने लगे , पृथ्वी को नहीं समझ आ रहा था अवनि को कैसे समझाए ? लेकिन अपने हाथ पर वेक्स स्ट्रिप तो वह बिल्कुल नहीं चाहता था। भागते हुए पृथ्वी वापस बिस्तर की तरफ ही चला आया और अवनि उसके पीछे , जैसे ही वह पृथ्वी की तरफ बढ़ी उसका पैर कालीन में उलझा और वह लड़खड़ाकर पृथ्वी के अंदर ही जा गिरी। पृथ्वी ने अवनि को तो सम्हाल लिया लेकिन खुद को नहीं सम्हाल पाया और अवनि को साथ लेकर बिस्तर पर जा गिरा।

अवनि उसकी बांहो में आकर एकदम से शांत हो गयी और एकटक उसे देखने लगी। पृथ्वी का दिल धड़कने लगा आखिर था तो बेचारा एक लड़का ही ऊपर से अवनि का पति,,,,,,,,,,,लेकिन यहाँ भी पृथ्वी ने अपना मन मार लिया और साइड में पलट गया। वह पीठ के बल बिस्तर पर लेट गया और अवनि ने धीरे से अपना सर उसके सीने पर रखा और उसके बगल में आकर लेट गयी। पृथ्वी के धड़कते दिल की धड़कने अवनि के कानो में पड़ी तो उसने कहा,”तुम्हारा दिल इतनी जोर से क्यों धड़क रहा है ?”
“क्योकि तुम मेरे पास हो”,पृथ्वी ने कहा

“और अगर मैं दूर चली गयी तो ?”,अवनि ने अपना सर उठाकर पृथ्वी की तरफ देखा और मासूमियत से पूछा
“तो ये धड़कना बंद हो जाएगा”,पृथ्वी ने गहरी साँस लेकर कहा
 अवनि ने वापस अपना सर पृथ्वी के सीने पर रखा और अपनी बाँह उसके सीने पर रखकर कहा,”मैं तुम से कभी दूर नहीं जाउंगी ! मैं चाहती हूँ तुम्हारा दिल हमेशा धड़कता रहे”
पृथ्वी मुस्कुराया और अवनि को अपनी बाँहो में लेकर अपनी आँखे मूँद ली। पृथ्वी के सीने से लगे अवनि को नींद आ गयी और पृथ्वी भी वही सो गया।

सुरभि का फ्लेट , सिरोही
बियर के नशे में सोई सुरभि सुबह देर तक सोती रही उसकी आँख तब खुली जब कानो में डोरबेल की आवाज बजती ही चली गयी। सुरभि उबासी लेते हुए उठी , रोने की वजह से उसका काजल फ़ैल चुका था , बाल उलझकर चिड़िया का घोसला बन चुके थे , नींद की वजह से उसे उबासी आ रही थी और रात में पीने की वजह से सर भारी हो रहा था। वह अपना सर सहलाते हुए कमरे से बाहर आयी।

डोरबेल की आवाज लगातार बज रही थी जिस से वह चिढ़ते हुए दरवाजे के पास आयी और दरवाजा खोला तो सामने खड़े सिद्धार्थ को देखकर उसका मुँह खुला का खुला रह गया लेकिन सुरभि को इस हालत में देखकर सिद्धार्थ को एक छोटा सा हार्ट अटैक आते आते बचा और उसका हाथ अपने सीने पर चला गया।
सिद्धार्थ को वहा देखकर पहले सुरभि के होंठो पर मुस्कान आयी लेकिन अगले ही पल उसे बीती शाम पड़ोसन की कही बात याद आयी तो उसने सामने खड़े सिद्धार्थ को घुरा और कहा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”

“तुम्हारा फोन कहा है ? मैंने तुम्हे कितने फोन किये तुम उठा क्यों नहीं रही हो ? ना तुम मेरे मैसेज का जवाब दे रही हो,,,,,,,,,,,और और ये क्या हालत बना रखी है तुमने अपनी ? तुम तुम सिरोही कब आयी और तुमने मुझे बताया क्यों नहीं ?”,सिद्धार्थ ने सुरभि के सामने सवालो की झड़ी लगा दी
सुरभि को नहीं समझ आया वह पहले सिद्धार्थ के किस सवाल का जवाब दे इसलिए दरवाजा उसके मुँह पर बंद करते हुए कहा,”ये सब मैं तुम्हे क्यों बताऊ ?”

सिद्धार्थ कुछ कहता इस से पहले सुरभि दरवाजा बंद कर चुकी थी और बाहर खड़ा सिद्धार्थ बड़बड़ाया,”हाह ! इसे क्या हो गया ये ऐसे क्यों बात कर ही है ?”
सिद्धार्थ खुद से सवाल कर ही रहा था कि सुरभि ने एकदम से दरवाजा खोला और अपनी गर्दन बाहर निकालकर गुस्से से कहा,”शादी मुबारक हो”

“शादी अरे किस,,,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने इतना ही कहा कि सुरभि ने फिर दरवाजा उसके मुँह पर बंद किया और अंदर चली आयी। बाहर खड़े सिद्धार्थ को समझ ही नहीं आया कि आखिर सुरभि इतना गुस्से में क्यों है ? उसने बेल बजाने के लिए एक बार फिर अपना हाथ बढ़ाया लेकिन रुका और हाथ नीचे करके कहा,”नहीं ! मुझे उसे परेशान नहीं करना चाहिए,,,,,,,,,,,,,मैं यही रूककर उसके आने का इंतजार करता हूँ”
सिद्धार्थ फ्लेट के बाहर साइड में खड़ा हो गया। उसने अपनी पीठ दिवार से लगा ली और हाथो को आपस में बांध लिया वह सुरभि के बाहर आने का इन्तजार करने लगा

अंदर आकर सुरभि ने किचन प्लेटफॉर्म पर रखा पानी का बोतल उठाया और ढक्कन खोलकर मुँह से लगा लिया। सिद्धार्थ को देखने के बाद उसकी नींद पूरी तरह से उड चुकी थी और वह काफी गुस्से में भी थी। पानी पीकर सुरभि हॉल में चली आयी उसने सोफे पर पड़ा अपना फोन उठाया और देखा सिद्धार्थ के 10-15 मिस्ड कॉल और कुछ मैसेज थे। सुरभि ने मैसेज खोलकर भी नहीं देखे और फोन वापस सोफे पर फेंककर कमरे के अंदर चली गयी !

नहाकर वह ऑफिस जाने के लिए तैयार हुए बाहर आयी। आज ना उसका चाय पीने का मन था ना ही कुछ खाने का , पोस्ट ऑफिस जाकर खा लेगी सोचकर सुरभि ने अपना बैग उठाया उसमे जरुरी सामान और अपना फोन रख लिया !  वह दरवाजा खोलकर बाहर आयी लेकिन उसने सिद्धार्थ की तरफ नहीं देखा जो कि बगल में ही दिवार से पीठ लगाए खड़ा था। सुरभि ने फ्लेट लॉक किया और लिफ्ट की तरफ बढ़ गयी। उसे लिफ्ट का बटन दबाने के लिए जैसे ही अपना हाथ बढ़ाया सिद्धार्थ ने पहले ही आकर बटन दबा दिया और लिफ्ट खुल गयी।

सुरभि ने हैरानी से अपने बगल में देखा और कहा,”तुम फिर से आ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”
सुरभि अपनी बात पूरी करती इस से पहले सिद्धार्थ ने उसे लिफ्ट के अंदर धकेला और खुद भी अंदर चला आया ! उसने बटन दबा दिया लिफ्ट नीचे जाने लगी।
“तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”,सुरभि ने चिढ़कर सिद्धार्थ से कहा
“तुम मेरा फोन क्यों नहीं उठा रही हो ?”,सिद्धार्थ ने पूछा

“मेरी मर्जी”,सुरभि ने गुस्से से कहा
“तुम्हे हुआ क्या है , तुम इतना गुस्से में क्यों हो ?”,सिद्धार्थ ने पूछा क्योकि वह सुरभि की नाराजगी की वजह नहीं जानता था
एक तो सुरभि सिद्धार्थ से नाराज थी उस पर सिद्धार्थ ऐसे सवाल करके उसे और गुस्सा दिला रहा था उसने देखा लिफ्ट नीचे आ चुकी है और दरवाजा खुल चुका है तो उसने कहा,”भाड़ में जाओ तुम”
“अरे लेकिन मैंने,,,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने कहा लेकिन उसके बाकी शब्द अंदर ही रह गए क्योकि लिफ्ट के दरवाजे बंद हो चुके थे और वह लिफ्ट के साथ ही ऊपर जा चुका था।

पहले माले पर जाकर सिद्धार्थ ने लिफ्ट रोकी और बाहर आया वह सीढ़ियों से भागकर नीचे आया ताकी सुरभि को रोक सके लेकिन सुरभि तब तक वहा से जा चुकी थी। सिद्धार्थ अपार्टमेंट से बाहर आया इधर उधर देखा तो पाया सुरभि सामने खड़े ऑटो में बैठकर जा रही है तो वह ऑटो के पीछे भागा और भागकर ऑटो में सुरभि के बगल में जा बैठा। ऑटोवाले ने पलटकर देखा तो सिद्धार्थ ने कहा,”आगे ध्यान दो”
ऑटोवाले ने गर्दन घुमा ली सिद्धार्थ सुरभि की तरफ पलटा और कहा,”क्या हुआ है तुम्हे , तुम मुझे ऐसे इग्नोर क्यों कर रही हो ?”

सुरभि ने बहुत कोशिश की लेकिन यहाँ उसका गुस्सा फूट पड़ा और उसने कहा,”इग्नोर ? कल मैंने तुम्हे कितने फोन किये कितने मैसेज किये तुमने एक बार भी देखा ?”
“अरे उस वक्त मैं बिजी था और जब मैंने तुम्हारे कॉल और मैसेज देखे तब मैंने तुम्हे वापस फोन किया भी लेकिन तुमने नहीं उठाया”,सिद्धार्थ ने कहा
“हाँ बिजी तो होंगे ही कल तुम्हारी सगाई जो थी,,,,,,,,,,,,,,जब सगाई ही करनी थी तो फिर जो मेरे साथ था वो क्या था ?”,सुरभि ने गुस्से से कहा

“सगाई ! किसकी सगाई ?”,सिद्धार्थ ने चौंककर कहा
“तुम्हारी और किसकी ?”,सुरभि ने कहा
“तुम से किस ने कहा ?”,सिद्धार्थ ने और हैरानी भरे स्वर में पूछा
“तुम्हारी उस पड़ोसन ने , कल शाम जब मैं तुम से मिलने तुम्हारे घर आयी थी तब उसने मुझसे कहा था ‘माथुर साहब के लड़के की सगाई है तो सब वही गए है’ हाह ! जब तुम्हे किसी और से ही शादी करनी थी तो मुझसे क्यों कहा तुम जिंदगीभर इन्तजार करोगे ?”,सुरभि ने अपना गुस्सा शब्दों में जाहिर किया

सिद्धार्थ ने सुना तो अपना हाथ अपने ललाट पर दे मारा और कहा,”अरे ! पूरी दुनिया में क्या एक ही माथुर है ? उसने सही बोला तुमने सुनने में गड़बड़ की , जिस माथुर साहब के लड़के की कल शाम सगाई थी वो मेरा कजिन है मेरे बड़े पापा का लड़का,,,,,,,,,,हम सब वही थे इसलिए मैं बिजी था और तुम , तुम क्या गधी हो ? किसी ने कुछ बोला और तुमने बिना दिमाग लगाए कुछ भी सोच लिया”

सिद्धार्थ की बात सुनकर सुरभि के दिल को थोड़ी राहत मिली की कल शाम उसने जो सोचा था वैसा कुछ नहीं हुआ लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिलाये और उसने कहा,”तुमने मुझे गधी कैसे कहा ? दफा हो जाओ यहाँ से,,,,,,,,,,,,,,,ए ऑटोवाले भैया ! ऑटो रोको”
ऑटोवाले ने ऑटो साइड में रोक दिया। सुरभि ने सिद्धार्थ को ऑटो से बाहर किया और कहा,”निकलो यहाँ से और आज के बाद मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना”

“अरे लेकिन मेरी बात,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने कहा
“भैया चलिए यहाँ से”,सुरभि ने कहा और ऑटोवाले ने ऑटो आगे बढ़ा दिया। सिद्धार्थ उदास होकर जाते हुए ऑटो को देखता रहा। सुरभि उस से नाराज थी लेकिन अपनी ही गलतफहमी की वजह से,,,,,,,,,,,,,,!!

देसाई मेंशन्स , मुंबई
प्राची सुबह उठी और तैयार होकर नीचे चली आयी। उसे तैयार देखकर डायनिंग पर बैठे देसाई सर ने कहा,”प्राची ! तुम कही जा रही हो ?”
प्राची देसाई सर की तरफ आयी और टेबल पर रखे टोकरे से सेब उठाकर कहा,”गुड मॉर्निंग डेड”

“गुड मॉर्निंग बेटा,,,,,,,,,,,सुबह सुबह तुम,,,,,,,,,,,,,!!!”,देसाई सर ने इतना ही कहा कि प्राची ने सेब का एक निवाला खाया और कहा,”ओह्ह हाँ डेड ! कल शाम आप कुछ परेशान थे इसलिए मैं आपको बताना भूल गयी ! एक्चुली मैं अपने दोस्तों के साथ बाहर शॉपिंग पर जा रही हूँ,,,,,,,,,,,अब आपके ऑफिस तो आ नहीं सकती इसलिए सोचा बाहर ही चली जाती हूँ , यहाँ घर पर रहूंगी तो अकेले बोर हो जाउंगी”
“ऐसी बात नहीं है प्राची तुम जब चाहो तब ऑफिस आ सकती हो”,देसाई सर ने कहा

“नो डेड ! अब मैं ऑफिस उसी दिन आउंगी जिस दिन कुछ बन जाउंगी,,,,,,,,,आई ऍम गेटिंग लेट मैं जाती हूँ बाय”, प्राची ने अपना फोन देखते हुए कहा और सेब खाते हुए वहा से चली गयी।
मिस्टर देसाई भी अपना नाश्ता खत्म कर उठे और जैसे ही जाने लगे उनकी नजर खिड़की के बाहर पड़ी जहा विक्रम की गाडी खड़ी थी। विक्रम ने आकर प्राची के लिए गाडी का दरवाजा खोला और प्राची मुस्कुराते हुए अंदर जा बैठी। विक्रम भी मुस्कुराते हुए ड्राइवर सीट पर जा बैठा और गाडी वहा से निकल गयी।

ये देखकर मिस्टर देसाई के चेहरे पर ख़ुशी और होंठो पर मुस्कराहट तैर गयी ! उन्होंने अपना ऑफिस बैग उठाया और घर से निकल गए। प्राची ने उनसे झूठ बोला इस बात का उन्हें ज़रा भी बुरा नहीं लगा बल्कि विक्रम के साथ बढ़ती नजदीकियों को देखकर वे खुश थे। ड्राइवर गाडी ले आया और मिस्टर देसाई ऑफिस के लिए निकल गए।  

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
भरत आज ऑफिस सबसे पहले चला आया। उसने आकर सब रिपोर्ट्स तैयार की और मिस्टर देसाई के आने का इन्तजार करने लगा। भरत अपने केबिन से बाहर आया और देखा एक एक करके सभी आ रहे है। कुछ देर बाद ही लीगल टीम के हेड और प्रवीण साथ साथ अंदर आये उन्हें देखकर भरत के चेहरे पर कठोर भाव उभरे क्योकि इस ऑफिस में ये दो लोग ही थे जो भरत के इशारो पर चलने से इंकार कर चुके थे। भरत ने उन्हें एक नजर देखा और स्टाफ को कुछ समझाने लगा।

प्रवीण लीगल टीम के हेड के साथ अपने केबिन की तरफ आते हुए बोला,”मैंने सुना है कि कल शाम मिस्टर देसाई लौट आये है और आज ऑफिस आने वाले है”
“हाँ तुमने सही सुना है ! आज सुबह ही मेरी उनसे बात हुई है वो आज ऑफिस आने वाले है”,हेड ने कहा
“आज मैं उनके सामने इस भरत की सच्चाई लाकर रहूंगा ! देसाई सर नहीं जानते कि उनकी पीठ पीछे ये आदमी क्या क्या गड़बड़ कर रहा है ?”,प्रवीण ने कुछ ही दूर खड़े भरत को देखकर कहा

“तुम कैसे ये करोगे , क्या तुम्हारे पास उनके खिलाफ कोई सबूत है ?”,हेड ने पूछा
प्रवीण ने अपनी जेब से एक पेन ड्राइव निकाला और हेड को दिखाकर कहा,”उस भरत के खिलाफ हर सबूत इस पेन ड्राइव में है,,,,,,,,,,मैं आज ही इसे मिस्टर देसाई को देकर इसकी सच्चाई उनके सामने ला दूंगा”
हेड ने सुना तो मुस्कुराया और प्रवीण के कंधे पर हाथ रखकर कहा,”बहुत अच्छे प्रवीण ! अब इस भरत का नकाब देसाई सर के सामने उतरना ही चाहिए,,,,,,,,,,इसे तुम मुझे दे दो”

“आप इसे क्यों लेना चाहते है ?”,प्रवीण ने हैरानी से कहा
“मुझे उस भरत पर बिल्कुल भरोसा नहीं है वो पहले दिन से तुम्हारे पीछे पड़ा है , मिस्टर देसाई आज ऑफिस आने वाले है और वह इतना शांत खड़ा है जैसे कुछ  हुआ ही ना हो , हो ना हो इसके पीछे जरूर उसकी कोई चाल है। ये मेरे पास रहेगा तो सेफ रहेगा और आज मीटिंग में मैं सबके सामने ये मिस्टर देसाई को हेंडओवर कर दूंगा”,हेड ने विश्वास भरे स्वर में कहा

प्रवीण को उन पर पूरा भरोसा था क्योकि पहले दिन से ही दोनों इस कम्पनी में अच्छे दोस्त थे। उसने पेन ड्राइव हेड को दे दी और अपने केबिन में चला गया। हेड ने भी पेन ड्राइव को जेब में रखा और अपने केबिन की तरफ बढ़ गया। कुछ दूर खड़ा भरत ये देखकर हल्का सा मुस्कुरा उठा।

( क्या अवनि के सर से उतरेगा शराब का नशा ? क्या सिद्धार्थ समझा पायेगा सुरभि को अपनी बात ? क्या प्रवीण ने पेन ड्राइव हेड को देकर कर दी है कोई बड़ी भूल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये पसंदीदा औरत सीजन 3 मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
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