Manmarjiyan Season 4 – 65

Manmarjiyan Season 4 – 65

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी चकिया पहुंचने से पहले अब किसी तरह की कोई भसड़ नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने यादव जी को भी अपने साथ ले लिया ताकि जल्दी से जल्दी चकिया पहुंचकर बिंदिया की शादी रुकवाए। मिश्रा जी जब गाडी चलाकर थक गए तो उन्होंने शर्मा जी से गाडी चलाने को कहा क्योकि उन्हें इन चारो में से सिर्फ उन पर ही भरोसा था और खुद उनके बगल में आ बैठे। पीछे गुप्ता जी , बीच में आदर्श फूफा और यादव जी बैठे थे। गुप्ता जी और आदर्श फूफा ने अपने अपने कुर्तो से नाक ढकी हुयी थी क्योकि यादव जी में से बहुत ही गन्दी बदबू आ रही थी लेकिन मिश्रा जी के डर से दोनों चुप बैठे थे।

उधर कानपूर में कोचिंग जा रही वेदी को मिश्राइन ने लवली का टिफिन देने को कहा लेकिन जब वेदी शोरूम पहुंची तो पता चला लवली तो आज शोरूम आया ही नहीं। हैरान परेशान परेशान सी वेदी टिफिन वही शोरूम में छोड़कर अपनी कोचिंग चली गयी। लवली गुड्डू जैसा मंदबुद्धि नहीं था बल्कि वह बहुत ही  होशियार और समझदार इंसान था इसलिए जब फूफा ने उसके सामने कागज खाया तभी समझ गया कि कुछ तो गड़बड़ है

और तभी से वह मिश्रा जी और आदर्श फूफा पर नजर रखे हुए था और जब उसे पता चला कि आदर्श फूफा और मिश्रा जी चकिया जा रहे है तो वह शोरूम जाने का बहाना करके गुड्डू की बाइक से सीधा चकिया निकल गया। जिस वक्त ढाबे के बाहर गुप्ता जी मिश्रा जी को समझा रहे थे उस वक्त लवली उनके सामने से निकला था लेकिन मिश्रा जी ने ध्यान नहीं दिया। गुड्डू गोलू और मंगल फूफा चकिया में थे , मंगेश और लल्लन पहले से वहा मौजूद थे , लवली भी चकिया जा रहा था और रही सही कसर  मिश्रा जी और उनकी मण्डली पूरी करने जा रहे थे।

लवली ने गुड्डू पर भरोसा करके उसे बिंदिया को लेने भेज तो दिया लेकिन अब उसे डर था कि कही उसकी और मंगेश की दुश्मनी के चलते कही गुड्डू किसी मुसीबत में ना फंस जाए। लवली फूल स्पीड में बाइक भगाने लगा बिंदिया की शादी से पहले उसे चकिया पहुंचना था।

अब आते है गुड्डू पर , गोलू और मंगल फूफा को ऋतिक के घर भेजकर गुड्डू बिंदिया से मिलने गया लेकिन अपने टेंट के काम में ऐसा फंसा कि टेंट लगाते लगाते दोपहर हो गयी। सभी लड़के और रमेश गुड्डू के पास आये और कहा,”गुड्डू भैया ! जे कैसा आर्डर लिया है गोलू भैया ने साला हिया ना कोनो हम से पानी पूछ रहा है ना चाय और खाने का तो दूर दूर तक कोनो ठिकाना नाही है,,,,,,,,,,,,!!”

“हाँ गुड्डू भैया ! काम तो सब हो चुका अब हम सबको बहुते भूख लगी है , ऐसा लग रहा है जैसे शरीर मा जान ही नाही बची है”,दूसरे लड़के ने मुँह लटककर कहा
अपने लड़को की बात सुनकर गुड्डू को उन पर दया आयी और साथ ही गोलू पर गुस्सा भी कि उसने यहाँ का आर्डर क्यों लिया ? गुड्डू ने सबको बैठकर आराम करने को कहा और खुद उनके खाने का इंतजाम करने चला गया।

गुड्डू ने गमछा मुँह पर लपेटा और बिरजू के पास आकर कहा,”टेंट डेकोरेशन का सब काम हो चुका है अब लड़के लोगन का खाने की व्यवस्था भी देख लयो सुबह से किसी ने कुछो खाया नाही है”
“अरे भाई हिया शाम मा बारात आने वाली है और तुम लोगन को खाने की पड़ी है , थोड़ी देर रुक जाओ फिर बारात के साथ ही खा लेना,,,,,,,,,,हाँ जाओ काम करो”,बिरजू ने गुड्डू का कंधा थपथपा कर कहा और वहा से चला गया
“अरे भाई सुनो , अरे लड़के लोग सुबह से कुछो नाही खाये है , ए भाई ए सुनो यार”,गुड्डू आवाज देते ही रह गया लेकिन बिरजू वहा से चला गया

गुड्डू मायूस होकर वापस जाने के लिए मुड़ा तो कुछ ही दूर खड़ी रुपा ने उसे आवाज दी,”लवली,,,,,,,,,,,,,,!!!”
रूपा गुड्डू को अभी भी लवली समझ रही थी। गुड्डू रुका तो रूपा उसके पास आयी और कहा,”अपने लड़का लोगन को लेकर हमाये साथ आओ”
गुड्डू रमेश के साथ बाकी सभी 7-8 लड़को को लेकर रूपा के पीछे चल पड़ा।

रूपा उन्हें लेकर अपने घर में आयी। उसने गुड्डू और बाकी सबसे बैठने को कहा और फिर खाने से भरे बर्तन लाकर लड़को के सामने रख दिए। दरअसल आज रूपा के घर में दावत थी और इसलिए काफी खाना बच गया था। गुड्डू ने रूपा की तरफ हैरानी से देखा तो रूपा उसके पास आयी और कहा,”आज घर मा बिंदिया का मुँह मीठा करवाने के लिए दावत रखी थी उसी में जे खाना बच गवा और देखो जे सब के काम आ गवा,,,,,,,,,,,,अरे तुम सब देख का रहे हो शुरू करो”

रमेश ने गुड्डू की तरफ देखा तो गुड्डू ने गर्दन हिलाकर खाने का इशारा कर दिया और सभी लड़के खाने पर टूट पड़े। गुड्डू रूपा की तरफ पलटा और कहा,”किन शब्दों में आपका शुक्रिया अदा करे समझ नाही आ रहा”
“अरे जे मा शुक्रिया अदा करने की का बात है,,,,,,,,,वैसे उह्ह्ह कही नजर नाही आ रहे ?”,रूपा ने सब लड़को में मंगल फूफा को ढूंढते हुए कहा
“उह्ह्ह कौन ?”,गुड्डू ने पूछा

“अरे वही जो आपके साथ थे , उह्ह्ह आते तो उह्ह्ह भी थोड़ा खा लेते , अब पानी से पेट थोड़े ना भरता है”,रूपा ने पहेलियाँ बुझाकर कहा लेकिन गुड्डू को समझते देर नहीं लगी कि रूपा मंगल फुफा के बारे में बात कर रही है तो कहा,”कौन मंगल फूफा ?”
“फूफा ? का ओह्ह्ह शादीशुदा है ?”,रूपा का तो दिल ही टूट गया
गुड्डू हंसा और कहा,”अरे नाही नाही उह्ह्ह तो अभी तक कँवारे फूफा तो ओह्ह्ह का सरनेम है,,,,,,,,,,,उनको और गोलू को हमने किसी जरुरी काम से बाहिर भेजा है,,,,,,,,,,,,,,!!!”

रूपा ने सुना तो राहत की साँस ली कि मंगल फूफा अभी तक कंवारे है और अब तक उसके लिए कंवारे है ये सोचकर रूपा का चेहरा शर्म से लाल होने लगा। गुड्डू ने उसे बिना बात के यू शर्माते देखा तो कहा,”आप हमाये साथ आईये ना आपसे जरुरी बात करनी है”
रूपा गुड्डू के साथ साइड में आयी तो गुड्डू ने उसे बिंदिया को लेकर भागने की अपनी योजना बताई और कहा कि इसमें वह गुड्डू की मदद करे। रूपा ने सुना तो घबराकर कहा,”नाही नाही लबली हमहू जे ना करे है अरे अगर मंगेश चचा को पता चला ना तो उह्ह्ह हमे जान से मार देंगे,,,,,,,,,,,,!!”

“ऐसे ना कहो देखो हमहू बहुते उम्मीद के साथ आये है , हमाये पास जियादा बख्त नाही है। हमहू कैसे भी करके बिंदिया को घर के पीछे भेज देंगे आप बस उसको बस गाँव के बाहर नुक्कड़ तक पहुंचा देना बाकि हम देख लेंगे”,गुड्डू ने कहा
“लेकिन,,,,,,,,,,!!!”,रूपा अभी भी असमझ की स्तिथि में थी
गुड्डू ने रूपा के दोनों हाथो को थामा और उदास होकर कहा,”प्लीज रूपा ! हम हाथ जोड़ते है , बस इत्ती सी मदद कर दयो हमायी,,,,,,,,,,,,अरे तुमहू भी तो कबो किसी से सच्चा पियार की होगी ना”

प्यार का नाम सुनकर रूपा को मंगल फूफा याद आये जिनसे अभी ताजा ताजा उसकी आँखे लड़ी थी उसने कहा,”ठीक है लवली हमहू बिंदिया को गाँव के नुक्कड़ पर पहुंचा देंगे”
“बहुत बहुत शुक्रिया,,,,,,,,,,,,हमहू जाकर बिंदिया को खबर कर देते है”,गुड्डू ने कहा और लड़को की तरफ आया और कुछ रूपये रमेश की तरफ बढाकर कहा,”ए तुम सब लोग खाना खाकर हिया से सीधा कानपूर निकल जाना”

“वो तो ठीक है गुड्डू भैया लेकिन टेंट का का ? शादी के बाद उह्ह्ह भी तो वापस हटाना है ना”,रमेश ने कहा
“टेंट तो तब हटेगा जब शादी होगी,,,,,,,,,,,हिया साला हमायी लंगोट फटने पर आयी और इनको टेंट की पड़ी है,,,,,,,,,!!”,गुड्डू मन ही मन खुद में बड़बड़ाया
“का हुआ गुड्डू भैया ? किस सोच मा पड़ गए और जे पैसे काहे पिकअप है ना हम सब ओह्ह्ह से चले जायेंगे”,रमेश ने कहा

रमेश की आवाज से गुड्डू की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”नाही पिकअप यही रहने दो टेंट का सामान किसमे लाएंगे वापस , तुम लोग बस से निकलो और तुम हमायी गाड़ी लाने वाले थे उह्ह्ह कहा है ?”,गुड्डू ने कहा
गाड़ी का नाम सुनते ही रमेश की आँखों के सामने कबाड़ बन चुकी गाडी आयी और उसे झुरझुरी हुई , उसने गुड्डू की बात को नजरअंदाज करके साथ बैठे लड़के से कहा,”अबे यार थोड़ी नरम पूड़ी दो ना जे का सुखी सुखी पूड़ी रखी है”

“रमेश हमहू तुमसे पूछ रहे है , गाड़ी सही सलामत है न ?”,गुड्डू ने फिर कहा
रमेश ने अपनी प्लेट उठायी और गुड्डू से बचने के लिए वहा से नो दो ग्यारह हो गया।
“रमेश , अबे रमेश अबे सुनो,,,,,,,,,,,जे साला रमेशवा भी उह्ह्ह गोलुआ के साथ रह कर अजीब हुई गवा है। जे सब की खबर कानपूर जाकर लेते है”,कहते हुए गुड्डू रूपा के घर से बाहर निकल गया।

गुड्डू घर से बाहर आया तो नजर एक टूटी फूटी गाड़ी पर पड़ी। पहले तो गुड्डू ने गाड़ी पर कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन जैसी ही नजर गाड़ी की नंबर प्लेट पर पड़ी वह हैरान हो गया और बड़बड़ाते हुए गाडी की तरफ आया,”जे कानपूर की गाड़ी हिया चकिया मा का कर रही है उह्ह्ह भी जे हालत मा ?”

गुड्डू ने गाड़ी के चारो तरफ एक चक्कर लगाया और देखा गाड़ी का आगे का शीशा गायब , पिछली सीट के दोनों दरवाजे गायब , पीछे की डिग्गी का पतरा गायब , सीटों का फोम बाहर और गाड़ी की सामने की हेडलाईट गायब , अगले ही पल गुड्डू को समझ आया कि ये कबाड़ नहीं बल्कि भाड़े की गाड़ी है जो वह कानपूर से लेकर आया था।

गुड्डू का हाथ अपने सीने के बांयी तरफ चला गया और उसे हार्ट अटेक आते आते बचा। उसने गोलू और रमेश से गाड़ी को सही सलामत लेकर आने को कहा था और गोलू रमेश ने इस गाडी को चलने लायक भी नहीं छोड़ा था।
गुड्डू ने सर उठाकर आसमान की तरफ देखा और चिल्लाया,”गोलूउउउउउउउउ”

ऋतिक का घर
मंगल फूफा और गोलू लल्लन से बचते हुए ऋतिक को ढूंढ रहे थे लेकिन ऋतिक उन्हें कही नहीं मिला। थककर दोनों एक बार फिर उसी कमरे में चले आये और गोलू तो आते ही पसर गया ये देखकर मंगल फूफा ने उसे उठाते हुए कहा,”अबे गोलू उठो ! जे सोने का बख्त नाही है , चलो उह्ह्ह डिफेक्टिव पीस को ढूंढना है। याद है ना गुड्डू के सामने कितनी बड़ी बड़ी बाते करके आये हो तुमहू , चलो उठो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

“फूफा ! हम नाही उठ पाएंगे , सुबह से साला एक ठो दाना पेट मा नाही गवा है उस पर सुबह से भाग रहे है,,,,,,,,,,,,हमायी सेक्सी बॉडी अब जवाब दे चुकी है फूफा , हम अब और नाही भाग पाएंगे”,बिस्तर पर मुँह के बल गिरे गोलू ने मरे हुए स्वर में कहा
गोलू की बाते सुनकर मंगल फूफा की हिम्मत भी जवाब दे गयी वे भी कमरे में पड़ी कुर्सी पर आ बैठे और हाँफते हुए कहा,”थक तो हम भी गए है गोलू,,,,,,,,एक ठो कप चाय भी मिल जाता तो जान मा जान आती”

“अरे फूफा ! हमको तो लगता है जे रीतिकवा की बारात के साथ कही हमाओ तुमहाओ जनाजा ना निकल जाये”,गोलू ने कहा
तभी एक महिला हाथ में कुछ मिठाईया और फल लेकर आयी और टेबल पर रखते हुए कहा,”ए लला ! का बिस्तर मा मुँह छुपाय के पड़े हो , उठो और थोड़ा  कुछो खाय ल्यो ओह्ह्ह के बाद बारात लेकर अपनी दुल्हिन लेने भी तो जाना है,,,,,,,,,,,!!”

गोलू ने सुना तो अपना मुँह उठाया लेकिन उठ पाता इस से पहले ही मंगल फूफा ने उसका मुँह वापस बिस्तर में दबाते हुए महिला से कहा,”अरे आप जाईये जे का हम खिला देंगे”
“ठीक है,,,,,,,,,,,,!!!”,महिला ने कहा और वहा से चला गया
महिला के जाते ही मंगल फूफा गोलू से दूर हटे और गोलू ने उठकर उनके टकले पर मुक्का मारकर कहा,”अबे तुमहू फूफा नाही साक्षात यमराज हो हमायी जिंदगी मा  

दो मिनिट हमाओ मुँह और दबाये रखते ना तो डायरेक्ट महादेव से मीटिंग कर लिए होते हमहू”
“अरे उह्ह्ह महिला तुमको उह्ह्ह रितिकवा समझ रही थी इहलीये हमहू ऐसा किये”,मंगल फूफा ने अपना टकला सहलाते हुए कहा
गोलू को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उसने कहा,”अरे हमका माफ़ कर दयो फूफा , वैसे उह्ह्ह हिया काहे आयी थी ?”,गोलू ने उठकर  बैठते हुए कहा

“अरे उह्ह्ह डिफेक्टिव पीस के लिए मिठाई लेकर आयी थी”,मंगल फूफा ने मुँह बनाकर कहा
गोलू ने जैसे ही मिठाई का नाम सुना जल्दी से उठकर टेबल की तरफ जाते हुए कहा,”अरे उह्ह्ह पहिले से मीठा है और मीठा खिलाकर अब का ओह्ह्ह का चाशनी बनानी है”
कहते हुए गोलू ने टेबल पर रखी प्लेट से लड्डू उठाया और मुँह में रख लिया। लड्डू खाकर गोलू को जो सुकून मिला वो उसके चेहरे से साफ झलक रहा था।

गोलू को खाते देखकर मंगल फुफा भी उसकी तरफ चले आये और एक लड्डू उठाकर खाने लगे। इसके बाद तो गोलू और मंगल फूफा ने मिलकर पूरी मिठाई साफ कर दी अब बारी थी फलों की तो फूफा संतरा लेकर उसे छिलने लगे और गोलू केला छीलकर खाते हुए कमरे में घूमने लगा। केला खाते खाते गोलू की नजर पड़ी कमरे में खूंटी पर टंगी शेरवानी पर और वही रखा था सेहरा गोलू ने आधा खाया केला रखा और शेरवानी की तरफ आया।

उसका दिमाग बिजली से भी तेज चलने लगा वह मुस्कुराया। उसने सेहरा उठाया और अपने सर पर लगाकर मंगल फूफा की तरफ पलटकर कहा,”फूफा ! मिल गवा आइडिआ”
मंगल फूफा ने सुना तो गोलू की तरफ देखा लेकिन गोलू की तरफ देख पाते इस से पहले ही संतरे का रस उनकी आँख में गया और मंगल फूफा रो पड़े।

( क्या लवली मिश्रा जी से पहले पहुंच पायेगा चकिया और बचा पायेगा गुड्डू और बिंदिया को ? क्या गुड्डू लेगा गोलू से अपनी भाड़े की गाडी का बदला ?  शेरवानी और शादी का सेहरा देखकर अब गोलू के दिमाग में कौनसा आइडिआ आया है ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” सीजन 4  मेरे साथ ) v

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संजना किरोड़ीवाल

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मिश्रा जी चकिया पहुंचने से पहले अब किसी तरह की कोई भसड़ नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने यादव जी को भी अपने साथ ले लिया ताकि जल्दी से जल्दी चकिया पहुंचकर बिंदिया की शादी रुकवाए। मिश्रा जी जब गाडी चलाकर थक गए तो उन्होंने शर्मा जी से गाडी चलाने को कहा क्योकि उन्हें इन चारो में से सिर्फ उन पर ही भरोसा था और खुद उनके बगल में आ बैठे। पीछे गुप्ता जी , बीच में आदर्श फूफा और यादव जी बैठे थे। गुप्ता जी और आदर्श फूफा ने अपने अपने कुर्तो से नाक ढकी हुयी थी क्योकि यादव जी में से बहुत ही गन्दी बदबू आ रही थी लेकिन मिश्रा जी के डर से दोनों चुप बैठे थे।

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