Sakinama – 9 देखते ही देखते एक महीना गुजर गया और इस बीच राघव से मेरी बातें होती रही। इस एक महीने में हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से जानने-समझने लगे थे। जून महीने का आखरी हफ्ता चल रहा था।...
Pakizah – 49 Pakizah – 49 पाकीजा को साड़ी थमाकर भावना वहा से चली गयी l पाकीजा सीधी थी इसलिए उसने भावना की बात मान ली लेकिन भावना के मन में क्या चल रहा था ये सिर्फ भावना जानती थी l...
Sakinama – 8 Sakinama – 8 मैं जैसे ही ऑफिस पहुंची मेरे साथ काम करने वाले लड़के मुझे देखने लगे। गलती उनकी नहीं थी आज से पहले किसी ने मुझे ऐसे अवतार में देखा भी तो नहीं था। कुछ ने तो...
Sakinama – 7 Sakinama – 7 मैं जिंदगी के एक नए सफर पर थी जिसमे ख़ुशी थी , अपनापन था , एक दूसरे की परवाह थी , छोटे छोटे सपने थे और खूबसूरत अहसास जिस से हर लड़की अपनी जिंदगी में...
Sakinama – 6 Sakinama – 6 मैं राघव को गुड बाय बोल चुकी थी और मुझे नहीं लगता इसके बाद वो मुझे मैसेज या कॉल करेगा। कुछ दिन बाद मेरी जिंदगी फिर से पहले जैसी हो गयी। वही दिनभर ऑफिस ,...