साक़ीनामा – 13

Sakinama – 13 Sakinama – 13 खिड़की के पास खड़ी मैं आसमान में चमकते चाँद को देख रही थी कि तभी राघव की आवाज मेरे कानों में पड़ी,”पानी लेकर नहीं आयी तुम ?”“नहीं”,मैंने पलटकर कहा  “जाओ लेकर आओ”,राघव ने लगभग आदेश...

साक़ीनामा – 12

Sakinama – 12 Sakinama – 12 गांव पहुँचते पहुँचते शाम हो चुकी थी और अँधेरा भी होने लगा था। राघव और उसकी फॅमिली गांव से थे लेकिन रहते गुजरात में थे। शादी उन्होंने गांव से ही की थी इसलिए पहले मुझे...

साक़ीनामा – 11

Sakinama – 11 Sakinama – 11 राघव और मैं हमारे आने वाले कल की बातें करते हुए कुछ देर वही बैठे रहे। राघव का उपवास था और सुबह से उसने कुछ खाया नहीं था इसलिये हम वहा से निकल गए। मंदिर...

साक़ीनामा – 10

Sakinama – 10 एक दोपहर राघव ने बताया कि वह अपनी मम्मी के साथ राजस्थान आ रहा है। मैंने जैसे ही सूना ख़ुशी से मेरा चेहरा खिल उठा। उसने बताया कि उसके मामाजी की तबियत खराब है उन्ही से मिलने मम्मी...

पाकीजा – एक नापाक जिंदगी 50

Pakizah – 50 पाकीजा का खत पढ़कर रूद्र की आँखों से आंसू बहने लगे l खत में लिखा था “प्रिय रूद्र जी !!आज जो कुछ भी हुआ उसकी वजह सिर्फ और सिर्फ हम है l अगर हम आपकी जिंदगी में ना...
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