Sakinama – 14 Sakinama – 14 कुछ दिन यू ही गुजर गए , मैं सबके सामने खुश रहने का दिखावा करने लगी थी पर अंदर से खुश नहीं थी। मैंने महसूस किया जैसे धीरे धीरे मैं अंदर से खाली होते जा...
Sakinama – 18 Sakinama – 18 मेरे बार बार माफ़ी मांगने के बाद भी उसने मुझे माफ़ नहीं किया। वो अपने घमंड में चूर था और मैंने उसकी मोहब्बत में अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट तक गवा दी। मेरा उपवास था। सब खाना...
Sakinama – 13 Sakinama – 13 खिड़की के पास खड़ी मैं आसमान में चमकते चाँद को देख रही थी कि तभी राघव की आवाज मेरे कानों में पड़ी,”पानी लेकर नहीं आयी तुम ?”“नहीं”,मैंने पलटकर कहा “जाओ लेकर आओ”,राघव ने लगभग आदेश...
Sakinama – 12 Sakinama – 12 गांव पहुँचते पहुँचते शाम हो चुकी थी और अँधेरा भी होने लगा था। राघव और उसकी फॅमिली गांव से थे लेकिन रहते गुजरात में थे। शादी उन्होंने गांव से ही की थी इसलिए पहले मुझे...
Sakinama – 11 Sakinama – 11 राघव और मैं हमारे आने वाले कल की बातें करते हुए कुछ देर वही बैठे रहे। राघव का उपवास था और सुबह से उसने कुछ खाया नहीं था इसलिये हम वहा से निकल गए। मंदिर...