Manmarjiyan Season 4 – 62

Manmarjiyan Season 4 – 62

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू गोलू और मंगल फूफा को लेकर खिड़की से मनोज के कमरे में कूद गया। कमरे में आकर गोलू में तो जान ही नहीं बची थी वह तो वहा रखे बिस्तर पर गिर पड़ा। मंगल फूफा के हाथ में अभी भी पानी का खाली जग था। गुड्डू ने सबसे पहले पहने हुए कपडे उतारे और शर्ट पहन लिया क्योकि पेंट तो उसने पहले से ही पहनी थी।

वह गोलू के सामने पड़ी कुर्सी पर आ बैठा और हाँफते हुए कहा,”साला का किस्मत पायी है हमने ? एक मुसीबत से निकलते नाही कि दूसरी मा पैर दे बैठते है,,,,,,, आये थे हिया बिंदिया भाभी को लेने और तुम दोनों पहिले से यहाँ हमाये लिए गड्डा खोद के बैठे हो,,,,,,,,,,कभी कभी तो लगता है गोलू साला तुमहि असली पनौती हो”
“गुड्डू भैया पनौती हम नाही जे मंगल फूफा है मारना है तो जे का मारो”,गोलू ने मरे हुए स्वर में कहा
“अरे हमे काहे मारना है हम का किये ? हम तो तुम्हरे कहे कहे चल रहे है गोलू”,मंगल फूफा ने कहा

गुड्डू मंगल फूफा और गोलू से कुछ कहता इस से पहले कमरे का दरवाजा खुला और तीनो ने हैरानी से दरवाजे की तरफ देखा और गुड्डू ने राहत की साँस ली। मनोज अंदर आया और जल्दी से दरवाजा बंद करके गुड्डू के पास आकर बोला,”लवली भैया ! अच्छा हुआ आप हिया है , हमे लगा मंगेश के आदमियों ने आपको पकड़ लिया”
“लवली भैया ! अरे जे लवली भैया नहीं गुड्डू,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने इतना ही कहा कि गुड्डू ने आगे बढ़कर उसका मुँह बंद करके मनोज से कहा,”तुमहू जे कि बातो पर ध्यान ना दो , जे नशे मा है तो कुछ भी बक देता है”

गोलू को कुछ समझ नहीं आया गुड्डू ने ऐसा क्यों कहा ? उसने अपनी भँवे उचकाई तो गुड्डू ने गोलू से चुप रहने का इशारा किया और मनोज की तरफ आकर बोला,” मंगेश तो नाही पर ओह्ह्ह के आदमियों ने हमे जरूर पकड़ लिया  था लेकिन हमहू बचकर निकल गए और तब से बस भाग ही रहे है”
“मंगेश के आदमियों ने आपको हिया देख लिया , अब आपका हिया रुकना खतरे से खाली नहीं है लवली भैया , आप हिया से चले जाईये”,मनोज ने परेशानी भरे स्वर में कहा

गुड्डू ने सुना तो उसके चेहरे पर कठोर भाव आये और उसने कहा,”नहीं मनोज हमहू हिया बिंदिया को लेने आये है और उसे साथ लेकर ही जायेंगे , हमायी ओह्ह से बात हो चुकी है सही मौका देखकर हमहू ओह्ह के साथ हिया से भाग जायेंगे”
“आपको का लगता है लवली भैया हिया से भागना इत्ता आसान है ? अरे उह्ह्ह मंगेश्वा बिंदिया भाभी को हिया ना देखकर का सांत बैठेगा ? अरे बिल्कुल नाही,,,,,,,,,!!”,मनोज ने परेशानी भरे स्वर में कहा

“तो फिर और का रास्ता है मनोज ?”,गुड्डू ने हताश होकर कहा
गोलू को तो कुछ समझ नहीं आ रहा था वह बेचारा तो बिस्तर पर पड़ा थूक निगल निगल कर अपने सूखे गले को गीला कर रहा था। मंगल फूफा ने सुना तो गुड्डू और मनोज की बाते समझते उन्हें देर नहीं लगी और उन्होंने गुड्डू के पास आकर कहा,”तुमहू इजाजत दो हम कुछ कहे ?”
“अब आपको का कहना है ?”,गुड्डू ने झुंझलाकर कहा

मंगल फूफा ने हाथ में पकड़ा जग साइड में रखा और कहा,”तुमहू बिंदिया के साथ हिया भाग तो नाही सकते पर सोचो अगर जे शादी ही ना हो तो,,,,,,,,,,!!”
“मतलब ?”,गुड्डू ने कहा
“मतलब इह कि आज शाम मा बिंदिया की बारात ही ना आये तो ?”,मंगल फूफा ने कहा
“बारात कैसे नाही आएगी ? शादी आज शाम मा है तो बारात तो आएगी ना मंगल फूफा,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा

“अरे अगर दूल्हा ही गायब हुई गवा तो बारात कैसे आएगी ?”,मंगल फूफा ने अपनी भँवे उचकाकर कहा लेकिन इस बार भी गुड्डू को नहीं समझ आया उसने झुंझलाकर कहा,”अबे कहना का चाहते हो ?”
गुड्डू तो मंगल फूफा की बात नहीं समझा लेकिन बिस्तर पर पड़ा गोलू समझ गया और कहा,”अरे दूल्हे को उठाने की बात कर रहे है मंगल फूफा”

मंगल फूफा ने सुना तो खुश होकर गोलू की तरफ आये और गोलू को हाई फाइव दिया लेकिन मंगल फूफा का हाथ गोलू के हाथ से लगता इस से पहले गुड्डू ने मंगल  और गोलू की छाती पर चढ़ाकर कहा,”का उठा लो बे ? भूल गए पिछली बार फूफा को उठाये थे साला उह्ह्ह चरस आज तक काट रहे है,,,,,,,,,,,,,,दूल्हे को उठा लो,,,,,,,,,,,,तुम्हाये पास कोनो ढंग का आइडिआ हो तो दो वरना मुँह बंद रखो अपना”

गुड्डू की फटकार सुनकर गोलू को भी गुस्सा आ गया उसने गुड्डू को धक्का देकर उठते हुए कहा,”हाँ तो का हमने अकेले बोई थी उह्ह चरस ? ओह्ह मा खाद पानी मिटटी आपने और पुरे मिश्रा खानदान ने भी दिया था ,, और आपने अकेले नाही काटी उह्ह्ह चरस ओह्ह्ह का काटने के चाकर मा हमहू साला बाप से लेकर ना जाने किस किस से जूते खाये है,,,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ तो कौन बोले थे तुमको रंगबाजी करो ?”,गुड्डू ने भड़ककर कहा

“हमाये बलिदान को रंगबाजी का नाम नाही दयो गुड्डू भैया”,गोलू ने गुड्डू की तरफ आकर कहा
“बलिदान के नाम पर जो कदम कदम पर हमायी बलि चढाने को तैयार हो जाते हो उसका का ? देखो गोलू हमाओ दिमाग पहिले से बहुते गर्म है इसे और गर्म नाही करो समझे”,गुड्डू ने गुस्से से कहा
मनोज और मंगल फूफा एक दूसरे की शक्ल देखने लगे और फिर मंगल फूफा ने गुड्डू और गोलू के बीच आकर उन्हें एक दूसरे से दूर करके कहा,”अरे बस करो यार तुम दोनों,,,,,,,,,का दोनों आपस मा भाँडो की तरह लड़ रहे हो ,, अरे जोन काम से हिया आये हो पहिले उह्ह्ह पूरा करो भाई ,, जे झगड़ा तो कानपूर जाकर कर लेना”

मंगल फूफा की बात में दम था इसलिए गुड्डू और गोलू दूर हुए और साथ ही शांत भी हो गए। गुड्डू को शांत देखकर मंगल फूफा ने उसे समझाते हुए कहा,”और का बुराई है गोलू के आइडिआ मा , सही तो कह रहा है उह्ह्ह अगर दूल्हा गायब हो गया तो बारात हिया पहुंचेगी ही नाही और जब बारात ही नाही पहुंचेगी तो बिंदिया शादी करेगी किस से ? हुआ मंगेश और ओह्ह्ह के आदमी जे पता लगाने में व्यस्त हो जायेंगे कि दूल्हा कहा है और हिया मौका देखकर तुम बिंदिया को लेकर निकल जाना,,,,,,,,,,,,,,!!!”

मंगल फूफा की बात सुनकर गुड्डू सोचने पर मजबूर हो गया और मनोज ने कहा,”आदमी तुमहू छोटे हो पर बात बड़े काम की कहे हो”
मंगल फूफा ने खुद के लिए छोटा शब्द सुना तो चिढ गए और कहा,”छोटे से का मतलब है बे तुम्हारा ? आज भी कानपूर की गलियों मा निकले ना तो लड़किया हमाये स्टाइल को देखकर गिर जाती है,,,,,,,,,,!!!”

कहते कहते मंगल फूफा ने स्टाइल दिखाया और खुद ही घूमकर गोलू के बगल में जा गिरे। ये देखकर मनोज दबी सी हंसी हसने लगा और गोलू ने कहा,”अब और कितना गिरोगे मंगल फूफा,,,,,,,,,,,हिया साला हमहू थूक निगल निगल के काम चलाय रहे है और तुमहू अपना स्टाइल दिखा रहे हो ,, अरे थोड़ा पानी पिलाय दयो हमे,,,,,,,,,,!!!”
“अरे माफ़ करना हमहू भूल गए अभी लेकर आते है”,कहते हुए मंगल फूफा ने खाली जग उठाया और मनोज के पास आकर कहा,”जे पानी का मिलेगा ?”

“दांयी तरफ रखा है जाकर लेइ ल्यो”,मनोज ने कहा तो मंगल फूफा कमरे से बाहर निकल गए।
गोलू प्यास का मारा बिस्तर पर पड़ा रहा उस पर गुड्डू ने उसे बोलने से मना किया था और अब तो वह गुड्डू से थोड़ा नाराज भी था इसलिए चुपचाप पड़ा रहा। मनोज गुड्डू के पास आया और कहा,”लवली भैया ! उह्ह्ह आपका फूफा बात तो सही कहकर गया है ,अगर हम लोग मंगेश के आदमियों से लड़ने के बजाय दूल्हे को ही हिया आने से रोक दे तो हमारा काम आसान हो जाएगा और एक बार आप बिंदिया भाभी को लेकर कानपूर पहुंच गए ओह्ह्ह के बाद मंगेश आपका का ही बिगाड़ लेगा”

“तुमहू सही कह रहे हो मनोज”,गुड्डू ने कहा
गुड्डू के मुँह से ये सुनकर गोलू उठा और गुड्डू के पास आकर हाथो को नचाते हुए कहा,”वाह वाह वाह गुड्डू भैया , इह कहा तो इह सही कह रहा है और साला जे ही बात हम कहे तो हमायी छाती पर चढ़ गए,,,,,,,,,जे कहा की समझदारी है बताना जरा”
“तुम्हाये कहने और जे के कहने मा दिन रात का फर्क है ना गोलू”,गुड्डू ने कहा

“फर्क का फर्क है हम का फ़ारसी मा कहे थे ,लोकल भाषा मा ही तो कहे रहय ना कि उठवा लेते है दूल्हा को लेकिन नाही हमायी बात गलत और जे की बात सही”,गोलू ने कहा
“हमे माफ़ कर दयो मालिक हमाये से गलती हुई गयी , अब आपकी इजाजत हो तो हमहू सोचे कि आगे का करना है ?”,गुड्डू ने गोलू के सामने हाथ जोड़कर कहा.

गोलू ने मुँह बनाया और सामने से आते मंगल फूफा के हाथ से जग लेकर पानी पीने लगा। पानी थोड़ा गर्म था और उसमे कोई स्वाद भी नहीं था। गोलू ने गला तर किया और जग साइड में रखकर कहा,”फूफा ! जे कैसा पानी लेकर आये है थोड़ा अजीब लग रहा है”
“बाहर टंकी से लेकर आये है”,मंगल फूफा ने कहा
“कौनसी टंकी से बे ?”,मनोज ने पूछा

“तुम्हाये दांयी तरफ जो टंकी रखी है संडास के सामने वही से तो लेकर आये है”,मंगल फूफा ने कहा
“अबे हमहू तुम्हाये दांयी तरफ कहे थे तुम जहा से पानी लेकर आये हो उह्ह्ह संडास की टंकी है बे”,मनोज ने कहा
गोलू ने सुना तो उलटी करने के लिए मुँह खोला और उबकाई ली ये देखकर मंगल फूफा ने झेंपते हुए कहा,”माफ़ करना गोलू हमे पता नहीं था,,,,,,,,!!!”
“पता नहीं था , अबे फूफा साला हमको संडास का पानी पिला दिए तुमहू”,गोलू ने बुरा सा मुँह बनाकर फिर उबकाई लेते हुए कहा

“जाने दो न गोलू , अब पानी तो पानी होता है”,मंगल फूफा ने गोलू को बहलाकर कहा
गोलू तो गोलू था उसने मंगल फूफा की गर्दन दबोची अपनी बाँह में और दो तीन घुसे उनकी कमर में मारे तो मंगल फूफा ने कहा,”अरे गोलू हमे काहे मार रहे हो ?”
“हम मारे चाहे हमाये बाप मारे मार तो मार होती है ना”,कहते हुए गोलू ने मंगल फूफा को दो तीन घुसे और जमा दिए। गुड्डू ने देखा तो मंगल फूफा को गोलू से छुड़ाते हुए कहा,”अबे गोलू छोडो इन्हे का कर रहे हो ?”

गोलू ने रोनी सूरत बनाकर गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”गुड्डू भैया ! एकदम से हमको हमाये पिताजी याद आ गए,,,,,,,,,,,,! और ये कहते कहते उन्होंने मंगल फूफा को एक मुक्का और जड़ दिया और बेचारे मंगल फूफा जमीन पर आ गिरे।

गाड़ी के अंदर बैठे गुप्ता जी , शर्मा जी और आदर्श फूफा आपस में उलझे हुए थे। मिश्रा जी उन तीनो से परेशान होकर गाडी से बाहर आये और जोर से चिल्लाये। मिश्रा जी की चीख़ सुनकर तीनो गाड़ी से बाहर निकले और मिश्रा जी के सामने चले आये।
“का हुआ मिश्रा जी चीख़े काहे आप ?”,गुप्ता जी ने कहा
“हाँ का हुआ आप चिल्लाये काहे ?”,आदर्श फूफा ने कहा

शर्मा जी ने कुछ नहीं कहा क्योकि वे मिश्रा जी के चेहरे के हाव भाव देखकर ही समझ गए थे कि मिश्रा जी आ पारा हाई है। उन्होंने चुप रहना ही बेहतर समझा और पीछे हट गए। मिश्रा जी ने गुस्से से एक नजर तीनो को देखा और कहा,”अंदर बैठ के का सूअर कुत्तो की तरह काहे लड़ झगड़ रहे हो तुम लोग ?
“सूअर बोल रहे है तुम्हे”,गुप्ता जी ने बगल में खड़े आदर्श फूफा को दबे स्वर में कहा
“हाँ तो तुम्हे भी कुत्ता कहे न”,आदर्श फूफा ने भी दबे स्वर में ही कहा

“कहो तो काट ले ?”,गुप्ता जी ने अपनी भंव चढ़ाकर आदर्श कहा
“हाँ हाँ काट लो , नोच लो एक दूसरे को , हमको साला इह समझ नाही आता भगवान् के घर जब बुद्धि बंट रही थी तब कहा थे बे तुम लोग ? एक दूसरे से नाही बनती तो एक दूसरे के फ़टे मा टाँग अड़ाना जरुरी है चुपचाप बैठ नाही सकते,,,,,,,,,हमहू साला पहिले से टेंशन मा है और तुम लोगो की हाय तौबा खत्म नाही होय रही,,,,,,,,,,,,,ऐसे तो पहुंच गए चकिया”,मिश्रा जी ने तीनो को एक साथ लताड़कर कहा

गुप्ता जी ने तो चुप्पी ही साध ली और शर्मा जी पहले से चुप थे लेकिन आदर्श फूफा को अभी भी चुल थी इसलिए कहा,”हम का कह रहे है मिश्रा जी ?”
“अबे चुप ! कोई कुछो नहीं बोलेगा ,, साला जबसे गाडी मा बइठे है गाड़ी को सब्जीमंडी बनाया हुआ है,,,,,,अब अगर तीनो में से कोई एक भी बोला न तो उठाकर गाड़ी से बाहिर फेंक देंगे”,मिश्रा जी ने कड़कदार आवाज में कहा तो तीनो चुपचाप जाकर गाड़ी में बैठ गए।

झगड़ा ना हो इसलिए गुप्ता जी आगे आ बैठे ,शर्मा जी को आदर्श फूफा से ज्यादा खुन्नस थी नहीं इसलिए वे उनके साथ आ बैठे। मिश्रा जी ने गाड़ी स्टार्ट की एक गहरी साँस ली और गाडी आगे बढ़ा दी। पीछे डिग्गी में बैठे यादव जी डिग्गी का ढक्कन खोलकर सब सुन रहे थे उन्होंने घबराकर खुद से कहा,”जे तो हमने बड़ी मुसीबत मोल ले ली ,जे मिश्रा साला अपने दोस्तों का अपने जीजा का सगा नहीं उन्हें उठाकर बाहर फेंकने की बात कर रहा है , हमको डिग्गी में देखा तो कही हमे,,,,,,,,,,,,,!!!”

यादव जी ने इतना ही कहा वे आगे कहते इस से पहले ब्रेकर पर गाडी उछली और यादव जी डिग्गी से बाहर लेकिन किस्मत अच्छी थी जो गाड़ी का बोनट पकड़ लिया और अब वे गाड़ी के साथ घसीटते हुए जा रहे थे।

 गुड्डू , गोलू और मंगल फूफा की ये तिकड़ी सम्हाल पाएंगी अपने इस नए कांड को ? क्या गुड्डू अब बिंदिया को भगाने से पहले उठाएगा उसके होने वाले दूल्हे को ? मंगल फूफा को मारते मारते अचानक क्यों आयी गोलू को अपने पिताजी की याद ? क्या चकिया पहुंचने तक यादव जी बचेंगे या हो जायेंगे भगवान् को प्यारे ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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मंगल फूफा की बात में दम था इसलिए गुड्डू और गोलू दूर हुए और साथ ही शांत भी हो गए। गुड्डू को शांत देखकर मंगल फूफा ने उसे समझाते हुए कहा,”और का बुराई है गोलू के आइडिआ मा , सही तो कह रहा है उह्ह्ह अगर दूल्हा गायब हो गया तो बारात हिया पहुंचेगी ही नाही और जब बारात ही नाही पहुंचेगी तो बिंदिया शादी करेगी किस से ? हुआ मंगेश और ओह्ह्ह के आदमी जे पता लगाने में व्यस्त हो जायेंगे कि दूल्हा कहा है और हिया मौका देखकर तुम बिंदिया को लेकर निकल जाना,,,,,,,,,,,,,,!!!”

मंगल फूफा की बात में दम था इसलिए गुड्डू और गोलू दूर हुए और साथ ही शांत भी हो गए। गुड्डू को शांत देखकर मंगल फूफा ने उसे समझाते हुए कहा,”और का बुराई है गोलू के आइडिआ मा , सही तो कह रहा है उह्ह्ह अगर दूल्हा गायब हो गया तो बारात हिया पहुंचेगी ही नाही और जब बारात ही नाही पहुंचेगी तो बिंदिया शादी करेगी किस से ? हुआ मंगेश और ओह्ह्ह के आदमी जे पता लगाने में व्यस्त हो जायेंगे कि दूल्हा कहा है और हिया मौका देखकर तुम बिंदिया को लेकर निकल जाना,,,,,,,,,,,,,,!!!”

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