Pasandida Aurat Season 3 – 27
अनिकेत और सिद्धार्थ को झगड़ा करते देखकर सुरभि का दिल टूट गया और वह इतनी फ़्रस्ट्रेट हो गयी कि उसने गुस्से में आकर दोनों को अपने फ्लेट से बाहर निकाल दिया और खुद घुटनो के बल गिरकर रोने लगी। सुरभि अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाकर रोती रही और फिर वही फर्श पर सो गयी। सुरभि को पता ही नहीं चला कब दोपहर हो गयी। उसकी नींद तब टूटी जब किसी ने दरवाजे पर आकर बेल बजायी। सुरभि उठी और अपनी आँखे पोछते हुए दरवाजे की तरफ आयी। उसने दरवाजा खोला सामने एक बार फिर सिद्धार्थ खड़ा था जिसे देखकर सुरभि ने हैरानी और दुःख भरे स्वर में कहा,”तुम फिर आ गए ?”
“मैं कही गया ही नहीं था , सुबह से यही था तुम्हारे फ्लेट के बाहर सीढ़ियों पर बैठा इंतजार कर रहा था तुम्हारा,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने धीरे से कहा
सुरभि ने सुना तो सिद्धार्थ के लिए उसका जो गुस्सा था वो तकलीफ में बदल गया। उसे सहसा ही सिद्धार्थ से कहे अपने कड़वे शब्द याद आ गए और उसकी आँखों में आँसू भर आये। सुरभि को खामोश देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”आराम से सोच लो कौनसी गाली देनी है”
सुरभि ने सुना तो जल्दी से ना में सर हिलाया और धीरे से कहा,”तुम यहाँ क्यों हो ? तुम्हे चले जाना चाहिए था”
सिद्धार्थ हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”राईट ! मुझे चले जाना चाहिए था लेकिन मैं नहीं गया। तुम्हारा गुस्सा देखकर दुःख में तुम्हे अकेले छोड़कर चला गया तो फिर मैं मर्द कैसा ?”
सुरभि ने सुना तो एकटक सिद्धार्थ को देखने लगी और कुछ देर बाद कहा,”तुमने जो कुछ भी देखा,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने सुरभि की बात बीच में काटकर कहा,”मुझे बहुत प्यास लगी है , एक गिलास पानी मिलेगा ?”
सुरभि ने सुना तो सिद्धार्थ से अंदर आने का इशारा किया और दरवाजा बंद कर उसके पीछे चली आयी। सुरभि ने किचन में आकर एक गिलास पानी लिया और लाकर सिद्धार्थ की तरफ बढ़ा दिया। सिद्धार्थ ने सुरभि का हाथ उसकी तरफ करके कहा,”पीओ इसे”
“तुम्हे प्यास लगी थी ना”,सुरभि ने कहा
“पीओ,,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने सुरभि को घूरकर कहा तो सुरभि ने आधा पानी पी लिया ! सिद्धार्थ ने उसके हाथ से गिलास लिया और बचा हुआ पानी खुद पीकर खाली गिलास टेबल पर रखकर वापस सुरभि के सामने चला आया।
सिद्धार्थ ने एक नजर घर को देखा पूरा हाल बिखरा पड़ा था जिसे कुछ देर पहले उसने और अनिकेत ने ही बिखेरा था। सिद्धार्थ को इधर उधर देखते पाकर सुरभि ने कहा,”क्या चाहिए तुम्हे ?”
“तुमने कुछ खाया ?”,सिद्धार्थ ने एकदम से पूछा
सुरभि ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी और फिर एकदम से कठोर स्वर में कहा,”तुम जाओ यहाँ से मुझे ये घर साफ करना है”
सिद्धार्थ ने सुरभि की दोनों बाँहो को थामा और सुरभि को सोफे पर बैठाते हुए कहा,”तुम आराम से बैठो इसे मैं साफ़ कर देता हूँ”
“तुम क्यों साफ़ करोगे ?”,सुरभि ने उठकर कहा
सिद्धार्थ ने उसे वापस सोफे पर बैठाया और कहा,”क्योकि इसे मैंने फैलाया है”
सुरभि फिर खड़ी हो गयी और कहा,”सिर्फ तुमने नहीं अनिकेत ने भी,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ सुरभि की तरफ पलटा , थोड़ा करीब आकर सुरभि की आँखों में झांककर कहा,”उसका फैलाया हुआ समेटना भी अब मेरी जिम्मेदारी है फिर चाहे वो तुम्हारा घर हो या तुम्हारी जिंदगी”
सिद्धार्थ की बात सुनकर सुरभि खामोश हो गयी। सिद्धार्थ ने उसके कंधो पर हाथ रखकर एक बार फिर उसे धीरे से सोफे पर बैठाया और खुद अपना फोन देखने लगा ये देखकर सुरभि धीरे से बड़बड़ाई,”घर साफ़ करने का बोलकर फोन में घुसा है , सफाई क्या इसका फोन करने वाला है ?”
“तुमने कुछ कहा ?”,सिद्धार्थ ने पलटकर पूछा
“झाड़ू वहा है”,सुरभि ने बालकनी की तरफ इशारा करके कहा तो सिद्धार्थ भी धीरे से बड़बड़ाया,”हाह ! लगता है ये मुझसे पूरा घर साफ़ करवा के ही मानेगी”
“जी मालकिन”,सिद्धार्थ ने कहा और अपना फोन जेब में डालकर बालकनी की तरफ चला आया। उसने झाड़ू उठायी और हॉल की सफाई करने लगा। आधे घंटे में ही सिद्धार्थ ने हॉल को चमका दिया। वाशबेसिन के सामने आकर उसने अपने हाथ धोये और किचन की तरफ जाते हुए कहा,”तुम्हारे फ्रीज में दूध होगा ना ?”
“क्यों पूछ रहे हो ?”,सुरभि ने उसके पीछे आते हुए कहा
“क्योकि मेरा चाय पीने का मन है”,सिद्धार्थ ने फ्रीज का दरवाजा खोलकर अंदर रखा दूध बाहर निकालकर कहा
“हाँ तो अपने घर जाकर पीओ ना”,सुरभि ने चिढ़कर कहा
“कितनी सेल्फिश हो यार तुम , तुम्हारे लिए मैंने पूरा घर साफ़ किया और तुम मुझे एक कप चाय तक नहीं पिला सकती। ठीक है घर जाकर ही पी लेता हूँ और खाना भी वही डिलीवर करने को बोल देता हूँ”,सिद्धार्थ ने दूध का पैकेट प्लेटफॉर्म पर रखकर कहा
खाने का नाम सुनकर सुरभि के मुँह में पानी आया उसने उसे निगलकर कहा,”क्या तुमने खाना आर्डर किया है ?”
“हाँ ! मुझे लगा सुबह से तुमने कुछ खाया नहीं होगा और तुम्हारा मन भी नहीं होगा कि खुद के लिए कुछ बना लो इसलिए मैंने खाना आर्डर किया लेकिन अब जाने दो , मैं घर जाता हूँ खाना भी वही मंगवा लूंगा , थोड़ा ज्यादा है बट मैं मम्मी पापा के साथ एडजस्ट कर लूंगा वरना मेरी पड़ोसन तो है ही,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने किचन से बाहर जाते हुए कहा
सुरभि ने सुना तो उसकी भूख और बढ़ गयी और खाने के लिए तो वह कभी ना नहीं बोल सकती थी इतनी बड़ी भुक्कड़ जो ठहरी उसने सिद्धार्थ के पीछे आते हुए कहा,”पड़ोसन क्यों ? अरे मैं मर गयी हूँ क्या ? मैं खाउंगी ना”
“तुम कैसे खा सकती हो ? तुमने तो मुझे एक कप चाय तक के लिए मना कर दिया”,सिद्धार्थ ने उदास होकर कहा
“अरे नहीं नहीं,,,,,,,,,,मेरा मतलब था तुमने इतनी सफाई की तो तुम थक गए होंगे ना इसलिए तुम्हारे लिए चाय मैं बना देती हूँ”,सुरभि ने कहा
“पक्का तुमने यही कहा था ?”,सिद्धार्थ ने सुरभि को घूरकर पूछा
“अरे हाँ हाँ मैंने यही कहा था , तुम्हे शायद गलत सुन गया। तुम खड़े क्यों हो बैठो ना ? मैं अभी तुम्हारे लिए चाय बनाकर लाती हूँ”,सुरभि ने सिद्धार्थ को सोफे पर बैठने का इशारा करके कहा तो सिद्धार्थ मुस्कुरा उठा वह बहुत अच्छे से जानता था सुरभि को कब कैसे मनाना है। सिद्धार्थ सोफे पर ना बैठकर नीचे जमीन पर आ बैठा क्योकि उसे वहा बैठना अच्छा लग रहा था।
सुरभि खाने के बारे में सोचते हुए चाय बनाने लगी और सिद्धार्थ अनिकेत के बारे में सोचने लगा कि वह कैसे उसे सुरभि से दूर रखे ? सुरभि दो कप में चाय छानकर ले आयी और सिद्धार्थ के साथ नीचे ही आ बैठी और कहा,”तुम यहाँ क्यों बैठ गये ?”
“कुछ देर पहले तुम भी तो यही बैठी थी ना”,सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखकर गंभीरता से कहा
सुरभि ने सुना तो उसे कुछ देर पहले वाली बाते याद आयी और उसका चेहरा एकदम से उदासी से भर गया। सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखा और कहा,”आई प्राउड ऑफ यू”
“हैं ! ये किसलिए ?”,सुरभि ने हैरानी भरे स्वर में पूछा
“सुरभि तुम इतनी स्ट्रांग हो कि तुम हर सिटुअशन को फेस कर सकती हो। सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत है तुम में और तुम अपने लिए खुद स्टेण्ड ले सकती हो।
आज सुबह जब अनिकेत के सामने तुमने अपना स्टेण्ड लिया वो काफी अच्छा था। तुमने इन्तजार नहीं किया कि मैं आकर तुम्हारी मदद करू बल्कि तुमने मेरी मदद को भी ठुकरा दिया। उस वक्त तुमने मुझसे जो भी कहा मुझे उसका बिल्कुल बुरा नहीं लगा और मैं चाहता हूँ तुम हमेशा ऐसी ही रहो बेबाक और स्ट्रांग ,, तुम अपना स्टेण्ड खुद लेती हो और इसलिए मैं तुम्हे पसंद करता हूँ”,सिद्धार्थ ने कहा
सिद्धार्थ ने इतनी बाते कही लेकिन सुरभि का दिमाग आखरी बात पर जाकर अटक गया और उसे वह एक बार फिर सिद्धार्थ के मुँह से सुनना चाहती थी इसलिए उसने कहा,”लास्ट में क्या कहा तुमने ?”
“यही कि मैं तुम्हे पसंद करता हूँ”,सिद्धार्थ ने कहा
सुरभि ने सुना तो उसका दिल धड़कने लगा और पेट में गुदगुदी सी होने लगी लेकिन उसने अपनी भावनाओ को चेहरे पर नहीं आने दिया !
वह सिद्धार्थ से कुछ कहती इस से पहले डोरबेल बजी और सिद्धार्थ ने उठकर दरवाजे की तरफ जाते हुए कहा,”लगता है खाना आ गया”
सुरभि अब खाने के बारे में भूल चुकी थी उसे तो बस सिद्धार्थ के कहे आखरी शब्द याद थे। उसने खुश होकर दोनों हाथो को मिलाकर एक ताली मारी और आपस में मिले हाथो को अपनी ठुड्डी से लगाकर धीरे से कहा,”उसने कहा वो मुझे पसंद करता है,,,,,,,,,,,,,वो मुझे पसंद करता है”
सिद्धार्थ खाना लेकर आया और सुरभि के सामने रखकर खुद ही किचन से प्लेट लेने चला गया क्योकि सुरभि अकेले में ही कुछ सोचकर मुस्कुरा रही थी और सिद्धार्थ उसके उस पल को ख़राब करना नहीं चाहता था। वह प्लेट लेकर आया और सुरभि के सामने आ बैठा। सुरभि की तन्द्रा टूटी उसने मुस्कुरा कर सिद्धार्थ को देखा तो सिद्धार्थ ने प्लेट उसकी तरफ बढाकर खाना खाने का इशारा किया।
सिद्धार्थ ने अपनी प्लेट में थोड़ा खाना रखा और सुरभि ने अपनी और वही दोनों जमीन पर बैठकर खाना खाने लगे। ये सच था कि सिद्धार्थ बदल चुका था जब वह अवनि के साथ था तब हमेशा किसी ना किसी बहाने उसके करीब आने की कोशिश करता रहता था लेकिन सुरभि के साथ वह ऐसा नहीं था। उसने कभी सुरभि की कोशिश नहीं की ना ही कभी उसे लेकर उसके मन में कोई ख्याल आये , उलटा अपने मेल ईगो को साइड में रखकर उसने सुरभि का गुस्सा झेला है , उसकी उल्टियां साफ की ,
हर बार उसके लिए कुछ ना कुछ खाने को ले आता था और शांत रहकर बस उसे समझने की कोशिश करता रहता। ये प्यार ही था जो सिद्धार्थ को सुरभि से हो चुका था लेकिन अभी तक उसने सुरभि के सामने अपनी भावनाये जाहिर नहीं की।
खाते हुए सिद्धार्थ अपनी किसी सोच में गुम था और सुरभि खाते हुए बीच बीच में उसे देख रही थी।
खाते खाते चावल के कुछ दाने सिद्धार्थ के होंठ के पास लग गए सुरभि ने देखा तो अपना हाथ बढ़ाया और उन्हें हटा दिया। सुरभि की उंगलियों की छुअन से सिद्धार्थ की तंद्रा टूटी और वह सुरभि को देखने लगा तो सुरभि ने ऊँगली पर लगे चावल दिखाकर कहा,”वो ये लग गया था”
“हम्म्म ! थैंक्स”,सिद्धार्थ ने कहा और खाने लगा
“अच्छा तुम सुबह यहाँ क्यों आये थे ?”,सुरभि ने पूछा
“किसी जरुरी काम से आया था , आने से पहले तुम्हे फोन किया था लेकिन तुमने नहीं उठाया”,सिद्धार्थ ने कहा
“उस टाइम शायद मैं बाथरूम में थी और फिर उसके बाद अनिकेत,,,,,,,,,,,,खैर छोडो ये बताओ क्या जरुरी काम था तुम्हे मुझसे ?”,सुरभि ने खाते हुए पूछा
सुबह से सुरभि बहुत कुछ झेल चुकी थी। सिद्धार्थ उसे अपने आने की वजह बताकर परेशान करना नहीं चाहता था इसलिए उसने कहा,”अह्ह्ह्ह वो बस ऐसे ही तुम्हे देखने का मन किया तो चला आया”
“हहहहहह”,सुरभि ने हैरानी से कहा तो सिद्धार्थ ने उसकी प्लेट में थोड़ा और खाना रखते हुए कहा,”कुछ नहीं खाना खाओ”
सुरभि हैरान प[परेशान सी सिद्धार्थ को देखकर खाना खाने लगी , अगले पल उसके दिमाग में सिद्धार्थ के कहे शब्द आये “वो बस ऐसे ही तुम्हे देखने का मन किया तो चला आया” उसने कहा वो मुझे देखने आया है इसका मतलब अब मेरे बिना उसका भी दिल नहीं लगता,,,,,,,,,,,,,,क्या ये मुझसे प्यार करने लगा है ? ओह्ह्ह मुझे ये सोचकर इतनी शर्म क्यों आ रही है ? ये चिलगोजा मुझसे प्यार करता है,,,,,,,,,ओह्ह्ह्ह माय गॉड,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि सोचते हुए बस मुस्कुरा रही थी और ये सब बाते उसके दिमाग में चल रही थी। सिद्धार्थ ने उसे बेवजह मुस्कुराते देखा तो उसके सामने हाथ हिलाकर कहा,”क्या हुआ है तुम्हे ? खाना क्यों नहीं खा रही हो तुम ?”
सुरभि की तन्द्रा टूटी और उसने अपना ध्यान खाने पर लगा लिया।
खाना खाकर सिद्धार्थ ने कलाई पर बंधी घडी में समय देखा जो कि शाम के 4 बजा रही थी। सुरभि ने जूते बर्तन किचन में रखे और सिद्धार्थ को दरवाजे तक छोड़ने आयी। सिद्धार्थ ने सुरभि को अपना ख्याल रखने को कहा और जाने के लिए पलट गया। सुरभि ने दरवाजा बंद नहीं किया वह अभी भी वही खड़ी सिद्धार्थ को देख रही थी जैसे उसके कुछ बोलने का इंतजार कर रही हो। सिद्धार्थ भी वापस पलटा और कहा,”सुरभि,,,,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
“मेरे पापा तुम से मिलना चाहते है”,सिद्धार्थ ने कहा
“हाँ ? क्यों ? तुमने फिर से कोई कांड किया क्या ?”,सुरभि ने चौंककर कहा
सिद्धार्थ ने अफ़सोस में अपना हाथ अपने ललाट पर मारा और कहा,”नहीं , हर बार अपना दिमाग चलाना जरुरी है क्या सुरभि ? वो तुमसे बस मिलना चाहते है,,,,,,,,,क्या तुम घर आओगी ?”
“अभी ?”,सुरभि ने पूछा
“अह्ह्ह्ह अगर तुम अभी चलना चाहो तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है”,सिद्धार्थ ने कहा
सुरभि ने अपनी हालत देखी , रोने की वजह से चेहरा मुरझा चुका था , आँखे लाल और वह काफी मायूस महसूस कर रही थी उसने कहा,”अभी नहीं ! मैं फिर कभी आउंगी,,,,,,,,,चलेगा न ?”
“हाँ चलेगा ! नो प्रॉब्लम,,,,,,,,,मैं जाता हूँ और प्लीज उस अनिकेत से दूर रहो तुम,,,,,,,,,,,यही तुम्हारे लिए ठीक होगा”,सिद्धार्थ ने कहा और वहा से चला गया
“हाउ पजेसिव ? अनिकेत से दूर रहो ,, अनिकेत के जरिये ही सही तुम्हारे दिल की बात जुबान पर तो आयी मेरे चिलगोजे,,,,,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ को जाते देखकर सुरभि बड़बड़ाई और दरवाजा बंद कर अंदर चली गयी
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
“भरत ! मैंने तुमसे अपने लिए नया मैनेजर ढूंढने के लिए कहा था”,अपने केबिन में बैठे मिस्टर देसाई ने कहा
“हाँ सर ! मैंने कल शाम ही इस वेकेंसी के लिए ऐड डाल दिया है ! कल से इंटरव्यू शुरू हो जायेंगे। आप चिंता मत कीजिये मैं आपके लिए बेस्ट मैनेजर चूज करूंगा”,भरत ने कॉफी का कप मिस्टर देसाई की तरफ बढाकर कहा
“थैंक्यू भरत ! तुम हो इसलिए मैं इस कम्पनी की आधी टेंशन से दूर हूँ,,,,,,,अच्छा नीलेश का कुछ पता चला आजकल कहा है वो ?”,मिस्टर देसाई ने कॉफी का एक घूंठ भरकर कहा
नीलेश का नाम सुनकर भरत खामोश हो गया आखिर था तो नीलेश उसका अपना ही बेटा जिसके बारे में मिस्टर देसाई और ऑफिस वाले कुछ नहीं जानते थे।
“भरत , भरत , कहा खो गए ?”,मिस्टर देसाई ने कहा
“अह्ह्ह कही नहीं सर , आप नीलेश के बारे में कुछ कह रहे थे ?”,भरत ने पूछा
“मैं पूछ रहा था नीलेश की कोई खबर है तुम्हे ? जब से वो ये कम्पनी छोड़कर गया है कही दिखाई नहीं दिया , कही उसने कोई और कम्पनी तो ज्वाइन नहीं कर ली ?’,मिस्टर देसाई ने कहा
“नहीं सर ! मेरी सभी से बात होती रहती है मुंबई की टॉप कम्पनीज में तो उसने ज्वाइन नहीं किया है ना ही हमारी किसी एंटी कम्पनी में”,भरत ने कहा
“अगर वह ज्वाइन ना ही करे तो बेहतर होगा भरत क्योकि उसके पास इस कम्पनी की बहुत सी जरुरी इन्फॉर्मेशन और वर्क एक्सपीरियंस है”,मिस्टर देसाई ने कहा
“आप बेफिक्र रहिये सर अगर वह ऐसा करता भी है तो सीधा जेल जाएगा”,भरत ने कहा लेकिन मन ही मन नीलेश को लेकर परेशान हो गया क्योकि जब से उसने इस कम्पनी को छोड़ा था तब से वह भरत के घर भी नहीं आया था तो आख़िर वह गया कहा ?
( क्या सुरभि कर देगी हमेशा हमेशा के लिए अनिकेत को अपनी जिंदगी से दफा ? क्या सुरभि को होने लगा है सिद्धार्थ के प्यार का अहसास ? आखिर कहा है नीलेश और मिस्टर देसाई को क्यों है उस से डर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
