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Pasandida Aurat Season 3 – 28

Pasandida Aurat Season 3 – 28

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

बागा बीच , गोआ
दिनभर घूमने और खरीदारी करने के बाद शाम में अवनि और पृथ्वी बीच पर घूमने चले आये। पृथ्वी के कहने पर अवनि ने एक स्लीवलेस समर गाउन पहना था। दोनों एक दूसरे का हाथ थामे बीच किनारे घूम रहे थे। शाम के समय लोगो की भीड़ भी ज्यादा थी इसलिए दोनों टहलते टहलते थोड़ा आगे निकल गए। चलते चलते एक लड़का अवनि और पृथ्वी के सामने आया और अपने हाथ में पकड़ी गोल टोपी पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”सर ! मैडम पर ये हेट बहुत अच्छी लगेगी ले लीजिये ना”

अवनि कभी हेट नहीं पहनती थी फिर भी पृथ्वी ने लड़के से एक हेट लेकर अवनि की तरफ बढ़ा दिया तो अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! मैं ये सब नहीं पहनती”
पृथ्वी ने अवनि के सर पर हेट लगाते हुए कहा,”हाँ जानता हूँ लेकिन ये तुम्हारी ड्रेस के साथ बहुत अच्छा लगेगा”
पृथ्वी ने इतने प्यार से अवनि के लिए हेट खरीदा और उसे पहनाया भी , अवनि उसे ना नहीं बोल पायी और मुस्कुरा दी तो पृथ्वी ने अपना फोन निकाला और कहा,”मैं इसके साथ तुम्हारी कुछ फोटोज लेता हूँ”

अवनि भी ख़ुशी ख़ुशी फोटो क्लिक करवाने लगी। कुछ फोटोज के बाद पृथ्वी अवनि के बगल में आया और उसके साथ सेल्फी ली। दोनों हँसते हुए फिर आगे बढ़ गए। गोआ आने के बाद पृथ्वी का पहला दिन चाहे जितना मुश्किल गुजरा हो लेकिन अब उसके और अवनि के बीच बस प्यार था , खुशिया थी और ढेर सारी मस्ती थी।

दोनों भीड़ से बहुत दूर निकल आये थे और समंदर किनारे आ बैठे। शाम का वक्त , ठंडी हवाएं और आसमान ढलते सूरज की लालिमा से ढका हुआ था। पृथ्वी सामने समंदर की लहरों को निहार रहा था।  अवनि ने पृथ्वी की बांह की थामी और अपना सर प्यार के कंधे पर टिकाकर सामने देखते हुए बड़े प्यार से कहा,”थैंक्यू पृथ्वी”
“और ये थैंक्यू किसलिए मैडम जी ?”,पृथ्वी ने भी उतने ही प्यार से कहा

अवनि सामने आती जाती लहरो को देखती रही और कहा,”मुझे एक नयी जिंदगी देने के लिए , मुझे ये अहसास दिलाने के लिए कि असल में प्यार क्या होता है ? मुझे इतना मान सम्मान देने और मेरी भावनाओ को सम्हालने के लिए , मुझे अपनी जिंदगी में शामिल करने के लिए और मुझे इतना प्यार करने के लिए,,,,,,,,,,,,,,,इस जीवन में आपने मुझे बहुत कुछ दिया है पृथ्वी बदले में मैं उसका एक चौथाई भी आपको दे पायी तो मैं खुद को खुशनसीब समझूंगी,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने अपने मन की बात पृथ्वी के सामने जाहिर की

पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”तुम्हे लगता है तुमने मेरे लिए कुछ नहीं किया,,,,,,,,,,आज मैं जो भी हूँ तुम्हारी वजह से हूँ अवनि,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि ने उसके कंधे से अपना सर हटाया और हैरानी से उसे देखने लगी तो पृथ्वी ने कहा,”हाँ अवनि ! तुम्हे अहसास नहीं है पर तुमने मुझे बहुत कुछ दिया है। मुझ जैसे इंसान के कठोर दिल को अपने प्यार से तुमने मोम बनाया है , मैं कभी ईश्वर में नहीं मानता था लेकिन तुम से मिलने के बाद मैं हर पल उस ईश्वर का शुक्रिया अदा करता हूँ। रिश्ते क्या होते है , उन्हें कैसे सम्हाला जाता है ?

ये मैंने तुम से सीखा है,,,,,,,,,,,,,,मेरी जिंदगी में ये छोटी छोटी खुशिया तुम्हारी वजह से आयी है अवनि। तुम्हारे प्यार ने मुझे साहस दिया , सबसे लड़ने की हिम्मत दी और देखो आज तुम मेरे साथ हो,,,,,,,,,,मेरे सामने और तुम कहती हो कि मैंने तुम्हारे लिए बहुत कुछ किया,,,,,,,,,,,असल में हमने एक दूसरे के लिए कुछ नहीं किया जो हुआ वो हमारी किस्मत में पहले से लिखा था,,,,,,,,,और इन सब बातों को अगर साइड कर दिया जाए तो मैं बस इतना कहूंगा कि मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ और हमेशा करता रहूंगा”

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि मुस्कुराई और आगे बढ़कर उसके गले आ लगी। पृथ्वी भी मुस्कुराया और अवनि का सर सहलाते हुए बड़े प्यार से कहा,”अवनि ! ये साथ हमे बहुत तकलीफो के बाद मिला है इसलिए मैं अब तुम्हे कभी खोना नहीं चाहता , दोबारा ये ख्याल अपने मन में भी मत लाना कि मैंने तुम्हारे लिए कुछ किया है,,,,,,,,,,,,,,,,,मैंने जो किया तुम तो उस से भी ज्यादा डिजर्व करती हो और मैं तुम्हे दूंगा भी बस तुम मुझ पर अपना विश्वास बनाये रखना”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी से दूर हटी और उसका चेहरा अपने हाथो में थामकर कहा,”आप मेरे साथ है मेरे लिए यही सबसे बड़ी जीत है,,,,,,,,,,,,,और मुझे कुछ नहीं चाहिए”

पृथ्वी मुस्कुराया और अवनि का ललाट चूमकर अपनी बाँह उसके कंधो पर रखी और उसे अपने करीब करके सामने आती जाती लहरों को देखने लगा। अवनि ने एक बार फिर अपना सर पृथ्वी के कंधे पर टिका लिया और कहा,”पृथ्वी ! आप सुरभि के बारे में कुछ बताने वाले थे ? क्या उसने फिर कोई गड़बड़ की है ?”
अवनि की बात सुनकर पृथ्वी को सहसा ही सुरभि का ख्याल आया और साथ ही ये भी याद आया कि आज वह अवनि को सुरभि और सिद्धार्थ के रिश्ते के बारे में बताने वाला था पर इस वक्त क्या अवनि को ये सब बताना सही रहेगा ? क्या वो इसे समझ पाएगी ?

पृथ्वी को सोच में डूबा पाकर अवनि ने अपना सर उसके कंधे से हटाया और उसकी तरफ देखकर कहा,”क्या बात है पृथ्वी ! क्या सोचने लगे ?”
अवनि की आवाज से पृथ्वी की तन्द्रा टूटी उसने अवनि की तरफ देखा और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर कहा,”अवनि ! मैं तुम्हे कुछ बताने जा रहा हूँ तुम बस उसे शांति से सुनना और ठंडे दिमाग से सोचना ठीक है”

“हम्म्म”,अवनि ने कहा हालाँकि मन ही मन तो वह भी परेशान हो गयी कि आखिर पृथ्वी ऐसा क्या बताने वाला है ?
 पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर अवनि को सिद्धार्थ और सुरभि के बारे में सब बता दिया जिस सुनकर अवनि को एक धक्का लगा और उसका चेहरा मुरझा गया। अवनि यकीन नहीं कर पा रही थी कि ऐसा भी कुछ हो सकता है ? वह चुपचाप उठी और पृथ्वी से कुछ दूर जाकर समंदर की तरफ मुँह करके खड़ी हो गयी। अवनि पर इस वक्त क्या गुजर रही थी ये पृथ्वी समझ पा रहा था।

वह तुरंत अवनि के पास ना जाकर कुछ देर अपनी जगह बैठा रहा और अवनि को देखता रहा। समंदर की आती जाती लहरों को देखते हुए अवनि अवनि की आँखों के सामने उसकी पुरानी जिंदगी चलने लगी जब वह सिद्धार्थ के साथ थी। सभी घटनाएं एक एक करके उसकी आँखों के सामने किसी फिल्म की तरह चलने लगी। अवनि की आँखों के सामने अपनी और सुरभि की दोस्ती वाले पल भी आये और जब उसे पृथ्वी की बात याद आयी तो सहसा ही उसका चेहरा फिर उदासी से घिर गया।

सुरभि सिद्धार्थ से प्यार करने लगेगी ये बात अवनि ने सपने में भी नहीं सोची थी और सोचती भी कैसे उसने तो सुरभि के शब्दों में हमेशा सिद्धार्थ के लिए गुस्सा और नफरत देखा था।
पृथ्वी उठा और अवनि की तरफ चला आया। वह अवनि के बगल में आ खड़ा हुआ और समंदर को देखते हुए कहा,”अवनि ! मैं समझ सकता हूँ इस वक्त तुम्हारे दिमाग में बहुत सारे सवाल और ख्याल एक साथ चल रहे है। सुरभि ने जब मुझे ये बताया तब मैं भी उस वक्त इतना ही हैरान परेशान हुआ था।

उसने तुमसे नहीं कहा क्योकि उसे डर था कि ये सब बताकर कही वो तुम्हारी दोस्ती ना खो दे,,,,,,,,,,,अवनि मैं जानता हूँ सिद्धार्थ ने तुम्हारे मन को जो ठेस पहुंचाई है उसे भुलाने में तुम्हे शायद पूरी जिंदगी लग जाए लेकिन अवनि जरुरी तो नहीं है न जिस इंसान ने हमे तकलीफ दी हो वो किसी और को भी वही तकलीफ दोबारा दे। उस इंसान से मुझे भी बहुत सी शिकायत थी लेकिन वो सब शिकायते उसके एक फैसले के सामने फीकी पड़ गयी जब उसने तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में सौंप दिया।

वो चाहता तो उस वक्त तुम से शादी करके मुझे हरा सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उसने उस प्यार को जीतने दिया जो मैं तुम से करता हूँ , जो तुम मुझसे करती हो और जो आज वो सुरभि से करता है। अवनि सिद्धार्थ बदल गया है तुम्हारे लिए ना सही पर सुरभि के लिए वो बदल गया है,,,,,,,,!!!१”
पृथ्वी की बातें सुनकर अवनि ख़ामोशी से उसे देखने लगी। अवनि की ख़ामोशी पृथ्वी को अंदर ही अंदर जला रही थी इसलिए वह अवनि के करीब आया और कहा,”ऐसे खामोश मत रहो अवनि ! कुछ तो बोलो , क्या चल रहा है तुम्हारे मन में ?”

“पृथ्वी ! मैं जानती हूँ सिद्धार्थ बदल चुका है और ये बदलाव मैंने उसमे बहुत पहले ही देख लिया था। सुरभि ने उसे क्यों चुना मैं नहीं जानती बस सुरभि कभी दूसरी अवनि ना बने क्योकि इस दुनिया में हर अवनि को सम्हालने के लिए कोई पृथ्वी नहीं बना है”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि के सर से अपना हाथ लगाया और उसे अपने सीने से लगाकर कहा,”पर तुम्हे सम्हालने के लिए ये पृथ्वी है,,,,,,,,,,,,,,सुरभि बहुत समझदार लड़की है अवनि , वो अब कोई गलत फैसला नहीं लेगी और फिर हम दोनों है ना उसके साथ,,,,,,,,,,,,,,,!!!

अवनि ने कुछ नहीं कहा बस ख़ामोशी से पृथ्वी के सीने से लगी रही , अवनि की ये ख़ामोशी साफ़ बयां कर रही थी कि सिद्धार्थ के दिए जख्म अभी भी भरे नहीं थे। सूरज डूब चुका था और धीरे धीरे अन्धेरा होने के साथ ही बीच की लाईटे जल उठी। पृथ्वी ने दोनों बाँहो से अवनि को समेटा और अपने सीने से लगाए रखा।

कुछ देर बाद दोनों एक दूसरे का हाथ थामे वापस रिसोर्ट की तरफ चल पड़े। समंदर की लहरे आती और उनके पैरों को छूकर गुजर जाती। चलते चलते पृथ्वी ने अवनि के हाथ को थोड़ा और मजबूती से पकड़ लिया जैसे बिना कुछ कहे उसे ये अहसास दिलाना चाहता हो कि कोई रहे ना रहे वह हमेशा उसके साथ  रहेगा और उसका साथ कभी नहीं छोड़ेगा।

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
सिद्धार्थ सुबह अपने घर से सुरभि को लाने निकला था लेकिन रात में अपने घर लौटा वो भी अकेले , जगदीश जी हॉल में बैठे टीवी देख रहे थे गिरिजा उनके लिए खाना लेकर आयी। उन्होंने खाने की प्लेट जगदीश जी के सामने रखी और जैसे ही नजर सिद्धार्थ पर पड़ी गिरिजा जी उसके पास आयी और परेशानी भरे स्वर में कहा,”सिद्धू ! कहा था तू सुबह से ? और सुरभि कहा है तू उसे लेने गया था ना फिर अपने साथ लाया क्यों नहीं ?”

“वो कुछ दिन बाद आएगी मम्मी”,सिद्धार्थ ने बुझे स्वर में कहा क्योकि सुरभि से सामने वह भले ही कितना भी स्ट्रांग बन के आया हो घर आते आते अनिकेत के ख्यालो ने उसे उदास कर ही दिया था।
जगदीश जी ने सुना तो सिद्धार्थ की तरफ देखा और कहा,”सिद्धू ! वो लड़की नहीं आएगी,,,,,मैं तो उसे उस दिन देखते ही समझ गया था कि वो घर बसाने के लायक नहीं है। अभी भी वक्त है भूल जाओ उसे वरना एक दिन वो तुम्हे धोखा देकर जरूर जाएगी”

जगदीश जी की बात सुनकर सिद्धार्थ को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन गिरिजा जी ने उसकी बाँह छूकर उसे इस वक्त कुछ भी बोलने से मना कर दिया और कहा,”तू जाकर हाथ मुँह धोकर आ जा , मैं तेरे लिए खाना लगा देती हूँ”
“मैं अपने कमरे में ही खाऊंगा मम्मी”,सिद्धार्थ ने कहा और एक नजर जगदीश जी को देखकर वहा से चला गया। जगदीश जी ने भी सिद्धार्थ को देखा और अपना ध्यान टीवी और खाने में लगा लिया।
गिरिजा जी उनके पास आयी और थोड़ा नाराजगी भरे स्वर में कहा,”क्या जरूरत थी उसे ये सब कहने की ? देख रहे है ना वो पहले ही कितना परेशान है”

“उसकी परेशानी की वजह वो लड़की है गिरिजा,,,,,,,,,!!!”,जगदीश जी ने कहा
गिरिजा जी ने आगे बहस करना सही नहीं समझा और चुपचाप वहा से चली गयी। किचन में आकर उन्होंने सिद्धार्थ के लिए प्लेट में खाना लगाया और लेकर उसके कमरे में चली आयी

सिद्धार्थ फ्रेश होकर कपडे बदल चुका था और मुँह पोछते हुए बिस्तर की तरफ आया तो गिरिजा ने कहा,”क्या बात है सिद्दू , तू इतना उदास क्यों है ? क्या तुम्हारा उस से कोई झगड़ा हुआ ?”
“नहीं मम्मी ! मैं  उसे लेने उसके घर ही गया था लेकिन वहा जाकर पता चला कि उसकी जिंदगी में अभी कुछ परेशानिया है। जब तक वो दूर नहीं हो जाती उस से कुछ भी कहना सही नहीं होगा। एक बार सब ठीक हो जाये उसके बाद उसने कहा है कि वो खुद हमारे घर आएगी”,सिद्धार्थ ने कहा

गिरिजा ने सिद्धार्थ के गाल को छुआ और प्यार से कहा,”कोई बात नहीं तुझे अपने प्यार पर भरोसा है ना बस उतना ही काफी है,,,,,,,,,,,चल आ बैठ खाना खा”
सिद्धार्थ खाने की प्लेट के सामने आ बैठा लेकिन जगदीश की बात याद आते ही फिर सोच में पड़ गया ये देखकर गिरिजा ने कहा,”क्या सोच रहा है ? खाना खा”

“पापा को हमेशा ऐसा क्यों लगता है कि मैं हमेशा गलत ही करूंगा ! हाँ मानता हूँ मैंने कुछ चीजे गलत की है लेकिन वो हालत की वजह से हुई। अवनि की किस्मत मुझसे नहीं किसी और से जुड़ी थी और उसे उस से दूर करने का पाप मैं कैसे कर देता ? आज जब मुझे ये अहसास हुआ कि सुरभि ही वो लड़की है जिसके साथ मैं अपनी पूरी जिंदगी ख़ुशी ख़ुशी बिता सकता हूँ तो पापा को लगता है वो इस घर के लायक नहीं,,,,,,,,,,,,,,,आखिर वो ऐसी बाते कैसे बोल सकते है मम्मी ?”,सिद्धार्थ ने उदास होकर कहा  

गिरिजा जी ने सिद्धार्थ के हाथ पर अपना हाथ रखा और कहा,”सिद्धू ! तू तो जानता है न अपने पापा को , गुस्से में आज तक उन्होंने कभी कोई बात सुनी है। देखा जाये तो उनका गुस्सा अपनी जगह सही भी है। तुम्हे लेकर लोग जो उन्हें ताने मारते है , उलटी सीधी बाते करते है वो सुनकर उन्हें भी बुरा लगता है और फिर और बेटा अवनि का अच्छा करने के बदले में तुमने सबके सामने उन्हें शर्मिंदा भी तो किया है,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन मुझे यकीन है धीरे धीरे वो तुम्हारी बात समझ जायेंगे,,,,,,,,,,,

एक बार सुरभि घर आकर उनसे मिल ले , अच्छे से सब बाते हो जाए उसके बाद वो भी उसे एक्सेप्ट कर लेंगे जैसे मैंने कर लिया”
“तो क्या अपने सुरभि को एक्सेप्ट कर लिया है ?”,सिद्धार्थ ने कहा
“तेरी ख़ुशी में ही मेरी ख़ुशी है बेटा , चल अब खाना खा और आराम कर , मैं जाती हूँ”,गिरिजा ने मुस्कुरा कर कहा और वहा से चली गयी।
सिद्धार्थ के दिल को एक तसल्ली तो मिली कि जगदीश जी ना सही गिरिजा जी उसके इस फैसले में उसके साथ है।

अगली सुबह , मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी , नवी मुंबई
“सर ! पृथ्वी की जगह नए एम्प्लॉय के लिए जो कैंडिडेट आने वाला था वह आ चुका है और बाहर आपका इंतजार कर रहा है”,जयदीप के केबिन में खड़े अंकित ने कहा।
अंकित के मुँह से सिर्फ केंडिडेट सुनकर जयदीप को थोड़ी हैरानी हुई और उसने कहा,”अंकित ! इस पोस्ट के लिए क्या सिर्फ एक एम्प्लॉय इंटरव्यू के लिए आया है ? ये काफी हैरानी की बात है ! मुंबई में रोजगार ज्यादा हो गया है या बेरोजगार कम,,,,,,,,,,,,!!!!”

“ये तो आपको पृथ्वी ही बता सकता है सर क्योकि इस केंडिडेट को मिस्टर पृथ्वी उपाध्याय ने ही रिकमेंड किया है”,अंकित ने कहा
जयदीप ने सुना तो उसे और ज्यादा हैरानी हुई , पृथ्वी ने खुद किसी और केंडिडेट को अपनी जगह भेजा है। जयदीप ने अंकित से उसे भेजने को कहा और अंकित वहा से चला गया
जयदीप ने पानी का गिलास उठाया और घूंठ भरकर खुद में ही बड़बड़ाया,”ये पृथ्वी भी अजीब है ! मुझे बताया भी नहीं और अपनी जगह केंडिडेट भी भेज दिया , ज़रा मैं भी तो देखू आखिर वो कौन है जो इस कम्पनी में पृथ्वी की जगह ले सकता है ?”

“May i come in Sir?”,जयदीप के कानो में एक आवाज पड़ी और उसकी तंद्रा टूटी उसने सामने देखे बिना ही कहा,”Yes come in.”
“Good Morning Sir”,केंडिडेट ने अंदर आकर कहा
जयदीप ने सर उठाकर जैसे ही सामने देखा उसका मुँह खुला का खुला रह गया और आँखे सामने खड़े शख्स पर जमकर रह गयी

( क्या अवनि समझ पायेगी पृथ्वी की बात और करेगी सिद्धार्थ को सुरभि के लिए स्वीकार ? क्या सिद्धार्थ और गिरिजा मिलकर मना पाएंगे जगदीश जी को या आएगी कोई मुसीबत ? आखिर वो कौन है जो लेने वाला है मौर्या ग्रुप में पृथ्वी की जगह और क्यों उड़े उसे देखकर जयदीप के होश ? जानने के लिए पढ़ते रहिये पसंदीदा औरत सीजन 3 मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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